RBIने जिन लोगो औऱ कंपनी का 68,607 करोड़ रुपये का लोन राइट आफ किया है
आरबीआई ने जिन लोगो औऱ कंपनी का 68,607 करोड़ रुपये का लोन राइट आफ किया है उनमें टॉप 5 की डीटेल्स को जरा गौर से देखिए ....
1.मेहुल चोकसी गीतांजलि रत्न लिमिटेड,जो कि 5,492 करोड़ रुपये के साथ सूची में सबसे ऊपर है
2.REI एग्रो लिमिटेड का 4,314 करोड़ रु।
3. जतिन मेहता के 4,000 करोड़ रु
4. रोटोमैक ग्लोबल प्रा। 2850 करोड़ रु
5. रामदेव / बालकृष्ण के 2,212 करोड़ रु ...
इन सबका एक एक करके विश्लेषण करू उससे पहले समझ ले लोन को राइट आफ करना और वेव ऑफ करना दोनो अलग चीजे है बैंक लोन राइट आफ तब करता है जब उसे रिकवरी के सारे रास्ते बंद होते दिखते है इसलिए अपनी बेलेन्स शीट को क्लीन रखने के लिए वो एनपीए वाले सारे लोन को बेलेंस शीट में लिखना बंद कर देता है और उस लोन को पाने की सारी उम्मीद छोड़ देता है लेकिन औपचारिकता के लिए रिकवरी की आस नही छोड़ता है और अपनी रिकॉर्ड बुक में रखता है
वेव आफ़ का मतलब लोन माफी होती है जिसमे बैंक कोई रिकवरी की नही करता है और सारे रिकॉर्ड अपने बेलेंस शीट औऱ अकॉउंट बुक्स से मिटा देता है किसानों की लोन माफी उसका सबसे बड़ा उदाहरण है
अब आते है विश्लेषण पर लिस्ट में जीसने टॉप किया है वो मेहुल चौकसी पीएनबी के साथ बडा घोटाला करके भाग गया है तो क्या सरकार ने मान लिया है कि उसको कभी भारत नही ला पाएगी और रिकवरी के सारे रास्ते बंद हो चुके है क्या सरकार ने उसकी सारी सम्पति सीज कर ली है क्या सरकार के पास रिकवरी का कोई तरीका नही बचा है
दूसरा नाम आरईआई एग्रो लिमिटेड है, और इसके निदेशक संदीप झुझुनवाला और संजय झुनझुनवाला हैं, जो पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दायरे में हैं। लेकिन इनकी संपति सीज होकर ऑक्शन नही हुई है तो यह कैसे मान ले कि रिकवरी का सारे रास्ते बंद हो गए है
तीसरा और चौथे नंबर वाले डिफॉल्टरों की भी यही कहानी है जतिन मेहता और रोटोमेक के कोठारी ग्रुप के खाते और संपति सीज करने की भी कोई खबर नही है इनकी जांच धोखाधड़ी के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा की जा रही है
लिस्ट में सबसे आखरी और रोचक नाम बाबा रामदेव का है बाबा रामदेव ने हालिया में रुचि सोया ग्रुप का टेक ओवर किया है और पंतजलि एक प्रॉफिट मेकिंग कंपनी है और वो अन्य डिफाल्टरों के भांति बैंक करप्ट भी नही है अपने बचाव में पंतजलि यह तर्क दे सकती है कि रुचि सोया के बेड लोन की वजह से यह सब हुआ है लेकिन इस तर्क में कोई दम नही है
यह समझने की जरूरत है कि रामदेव और कंपनी को रूचि सोया का अधिग्रहण करने के लिए धन कहां से मिला। और अगर उन्होंने यह सब स्वयं के फंड से किया है तो RBI द्वारा एक प्रॉफिट मेकिंग कंपनी को NPA मानकर उनका लोन कैसे राइट आफ किया जा रहा है
अगर राइट ऑफ का मतलब रिकवरी बंद नही होता है और अगर पंतजलि को यह लोन चुकाना ही होगा तो क्या आरबीआई ने पंतजलि से रिकवरी की ऐसी कोई कोशिश की है अगर नही तो क्या आरबीआई ने पंतजलि ने सारी उम्मीद छोड़ दी है अगर नही तो यह लोन राइट आफ क्यो किया गया है और सबसे बड़ा सवाल यह सब कोरोना के महासंकट में क्यो किया जा रहा है सरकार और आरबीआई को इस सब सवालों का जवाब जनता को जरूर देना चाहिए 🎯🎯
1.मेहुल चोकसी गीतांजलि रत्न लिमिटेड,जो कि 5,492 करोड़ रुपये के साथ सूची में सबसे ऊपर है
2.REI एग्रो लिमिटेड का 4,314 करोड़ रु।
3. जतिन मेहता के 4,000 करोड़ रु
4. रोटोमैक ग्लोबल प्रा। 2850 करोड़ रु
5. रामदेव / बालकृष्ण के 2,212 करोड़ रु ...
इन सबका एक एक करके विश्लेषण करू उससे पहले समझ ले लोन को राइट आफ करना और वेव ऑफ करना दोनो अलग चीजे है बैंक लोन राइट आफ तब करता है जब उसे रिकवरी के सारे रास्ते बंद होते दिखते है इसलिए अपनी बेलेन्स शीट को क्लीन रखने के लिए वो एनपीए वाले सारे लोन को बेलेंस शीट में लिखना बंद कर देता है और उस लोन को पाने की सारी उम्मीद छोड़ देता है लेकिन औपचारिकता के लिए रिकवरी की आस नही छोड़ता है और अपनी रिकॉर्ड बुक में रखता है
वेव आफ़ का मतलब लोन माफी होती है जिसमे बैंक कोई रिकवरी की नही करता है और सारे रिकॉर्ड अपने बेलेंस शीट औऱ अकॉउंट बुक्स से मिटा देता है किसानों की लोन माफी उसका सबसे बड़ा उदाहरण है
अब आते है विश्लेषण पर लिस्ट में जीसने टॉप किया है वो मेहुल चौकसी पीएनबी के साथ बडा घोटाला करके भाग गया है तो क्या सरकार ने मान लिया है कि उसको कभी भारत नही ला पाएगी और रिकवरी के सारे रास्ते बंद हो चुके है क्या सरकार ने उसकी सारी सम्पति सीज कर ली है क्या सरकार के पास रिकवरी का कोई तरीका नही बचा है
दूसरा नाम आरईआई एग्रो लिमिटेड है, और इसके निदेशक संदीप झुझुनवाला और संजय झुनझुनवाला हैं, जो पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दायरे में हैं। लेकिन इनकी संपति सीज होकर ऑक्शन नही हुई है तो यह कैसे मान ले कि रिकवरी का सारे रास्ते बंद हो गए है
तीसरा और चौथे नंबर वाले डिफॉल्टरों की भी यही कहानी है जतिन मेहता और रोटोमेक के कोठारी ग्रुप के खाते और संपति सीज करने की भी कोई खबर नही है इनकी जांच धोखाधड़ी के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा की जा रही है
लिस्ट में सबसे आखरी और रोचक नाम बाबा रामदेव का है बाबा रामदेव ने हालिया में रुचि सोया ग्रुप का टेक ओवर किया है और पंतजलि एक प्रॉफिट मेकिंग कंपनी है और वो अन्य डिफाल्टरों के भांति बैंक करप्ट भी नही है अपने बचाव में पंतजलि यह तर्क दे सकती है कि रुचि सोया के बेड लोन की वजह से यह सब हुआ है लेकिन इस तर्क में कोई दम नही है
यह समझने की जरूरत है कि रामदेव और कंपनी को रूचि सोया का अधिग्रहण करने के लिए धन कहां से मिला। और अगर उन्होंने यह सब स्वयं के फंड से किया है तो RBI द्वारा एक प्रॉफिट मेकिंग कंपनी को NPA मानकर उनका लोन कैसे राइट आफ किया जा रहा है
अगर राइट ऑफ का मतलब रिकवरी बंद नही होता है और अगर पंतजलि को यह लोन चुकाना ही होगा तो क्या आरबीआई ने पंतजलि से रिकवरी की ऐसी कोई कोशिश की है अगर नही तो क्या आरबीआई ने पंतजलि ने सारी उम्मीद छोड़ दी है अगर नही तो यह लोन राइट आफ क्यो किया गया है और सबसे बड़ा सवाल यह सब कोरोना के महासंकट में क्यो किया जा रहा है सरकार और आरबीआई को इस सब सवालों का जवाब जनता को जरूर देना चाहिए 🎯🎯
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