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नई दिल्‍ली, एजेंसियां। लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मसले पर चर्चा की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही हम लॉकडाउन को क्रमबद्ध ढंग से हटाने पर गौर कर रहे हैं लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जब तक हम वायरस पर कारगर कोई वैक्‍सीन या उपाय नहीं ढूंढ लेते हैं तब तक वायरस से लड़ने के लिए हमारे पास सबसे बड़ा हथियार सामाजिक दूरी ही है। प्रधानमंत्री के संबोधन से जुड़े हर अपडेट के लिए जुड़े रहें jagran.com के साथ...

LIVE PM Narendra Modi will Address Nation

- पीएम मोदी ने कहा, साथियों, एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। विश्व भर में करोड़ों जिंदगियां संकट का सामना कर रही हैं। सारी दुनिया, जिंदगी बचाने की जंग में जुटी है।

- पीएम मोदी ने कहा, चार महीने में कोरोना वायरस से मुकाबला करते हुए हो गए। अब तक विश्‍व में 42 लाख लोग संक्रमित हो गए। पौने तीन लाख लोगों की मौत हो गई।

कयासों का दौर शुरू

- पीएम नरेंद्र मोदी का यह संबोधन राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों से बात करने के ठीक अगले दिन होना है। पीएम के ऐलान को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्‍यादा कयास लॉकडाउन पर लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लॉकडाउन 4 को लेकर चर्चाएं तेज हैं।  



ममता बोलीं, आय के बारे में क्‍या

- पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री के साथ बैठकों के दौरान उम्मीदें हैं लेकिन हम हर बार खाली हाथ लौटते हैं। पिछले 2 महीनों से कोई आय नहीं हुई है लेकिन हमें केंद्र से कोई विकल्प नहीं मिल रहा है। हमें 52 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। कोरोना जारी रहेगा लेकिन आय के बारे में क्या...?

संबोधन से पहले गरमाई सियासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्‍यमंत्रियों के साथ बैठक में यह संकेत दे चुके हैं कि किसी भी सूरत में लॉकडाउन से धीरे धीरे चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलना होगा। पीएम मोदी ने राज्‍यों से इस बारे में एग्जिट प्‍लान मांगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई राज्‍य अभी लॉकडाउन हटाना नहीं चाहते हैं जबकि कुछ राहत पैकेजों की मांग कर रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ने कुछ आरोपों के साथ सियासी माहौल भी गरमा दिया है।

ममता ने लगाए गंभीर आरोप

- इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की वीडियो कॉन्‍फ्रेंस मीटिंग से नाखुश ममता बनर्जी का कहना है कि बैठक से बंगाल को कुछ हासिल नहीं हुआ और उन्‍हें खाली हाथ लौटना पड़ा है। ममता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल को केंद्र से उतना वित्‍तीय सहयोग नहीं मिला है जिनने का वह हकदार है।

ममता बनर्जी ने की यह पहल

- पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने लॉकडाउन-4 की अटकलों से पहले एलान किया है कि राज्‍य में रेड जोन को आगे तीन कैटिगरी (a, b, c) में बांटा जाएगा। पुलिस इन इलाकों को देखेगी। राज्‍य के कंटेनमेंट जोनों में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने राहत भरी जानकारी दी

- लॉकडाउन के चौथे चरण की अटकलों के बीच देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70 हजार को पार कर गई है। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70756 हो गई है जिसमें से 22454 ठीक हो चुके हैं। देश में अभी कोरोना के सक्रिय संक्रमितों की संख्या 46008 है। देश में कोरोना से 2293 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन ने एक राहत भरी जानकारी दी है कि देश में कोरोना से होने वाली मृत्‍युदर बाकी मुल्‍कों के लिहाज से बेहद कम है।

पांचवीं बार संबोधन

प्रधानमंत्री का राष्‍ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने सभी संबोधनों में देशवासियों से सहयोग की अपील की है। साथ ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई को और धारदार बनाने का आह्वान किया है। आइये संक्षेप में जानते हैं कि पीएम मोदी ने इससे पहले के संबोधनों में क्‍या बातें कही हैं।

पहले संबोधन में जनता कर्फ्यू की बात

प्रधानमंत्री ने पहली बार 19 मार्च 2020 की रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने सावधानियों का पालन करते हुए 22 मार्च (रविवार) को जनता कर्फ्यू की अपील की थी।

दूसरे संबोधन में लॉकडाउन का एलान

जनता कर्फ्यू की सपलता के बाद पीएम मोदी ने दूसरी बार 24 मार्च की रात 8 बजे देश को संबोधित करते हुए पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी।

तीसरे संबोधन में दीप जलाने की अपील

तीन अप्रैल को पीएम मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे पांच अप्रैल की रात नौ बजे कोरोना वॉरियर्स के लिए 9 मिनट का वक्त निकालें और घरों की बत्तियां बंद कर दीप, मोमबत्ती, टार्च, मोबाइल की फ्लैश लाइटें रोशन करें।

चौथे संबोधन में लॉकडाउन-2 का एलान

प्रधानमंत्री ने चौथी बार 14 अप्रैल को देशवासियों को संबोधित करते हुए तीन मई तक के लिए पूरे देश में लॉकडाउन-2 लगाए जाने की घोषणा की थी।

दिखेगी भविष्‍य की तस्‍वीर

प्रधानमंत्री का राष्‍ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। प्रधानमंत्री ने ‘दो गज की दूरी’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा था कि कई मुख्यमंत्रियों द्वारा रात में कर्फ्यू लगाने के लिए दिए गए सुझाव को मानने से निश्चित रूप से लोगों में सतर्कता की भावना फिर से पैदा होगी। ऐसे समय जब लॉकडाउन-3 खत्म होने में अब पांच दिन का समय ही बचा है... पीएम मोदी का यह संबोधन भविष्‍य की तस्‍वीर दिखाएगा। कोरोना से निपटने के लिए देश को लॉकडाउन-4 (Lockdown-4) की जरूरत है या नहीं और यदि है तो उसकी रूपरेखा और तस्‍वीर कैसी होगी... इस बारे में भी प्रधानमंत्री इशारा करेंगे।

अर्थव्‍यवस्‍था को गति देने की चुनौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करके भावी कदमों को लेकर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमें यह समझना होगा कि अब कोरोना से लड़ाई पहले ज्यादा केंद्रित होगी। आगे हमें इसके फैलाव को रोकना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग सभी ऐहतियाती कदमों का पालन करें। इस बातचीत में पीएम मोदी ने स्‍पष्‍ट संकेत दिया था कि अगले चरण में राहत तो दी जाएगी लेकिन लॉकडाउन एकदम से नहीं हटाया जाएगा। उन्‍होंने कहा था कि हमारे सामने बीमारी को रोकने के साथ साथ अर्थव्‍यवस्‍था को गति देने की गहरी चुनौती है।

जन से लेकर जग तक की नीति पर चलने के संकेत

पीएम मोदी के साथ बातचीत में ज्‍यादातर राज्‍यों के मुख्‍यमंत्री भी लॉकडाउन में एकमुश्‍त ढील देने के पक्ष में नहीं दिखे। वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि जन से लेकर जग तक की नीति पर आगे बढ़ना होगा। सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन के अगले दौर में ऑरेंज और रेड जोन में भी थोड़ी ढील दी जा सकती है। हालांकि आवागमन, मनोरंजन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम शुरू होने के लिए अभी इंतजार करना होगा। यही नहीं गांवों को संक्रमण से बचाने की भी एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में पीएम मोदी के इस संबोधन को बेहत खास माना जा रहा है।
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ऋषि कपूर की मौत के बाद उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने वाले ये लोग कौन थे !
ऋषि कपूर की मौत के बाद उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने वाले ये लोग कौन थे !
Nadim Akhter 23:50
"हरदिलअजीज और हंसमुख चिंटू के इस दुनिया से
जाने के बाद कल सोशल मीडिया पर उनके
ख़िलाफ़ एक Hate Campaign चला। ये लोग
स्वर्गीय ऋषि कपूर पर डोमेस्टिक वॉयलेंस से
लेकर तमाम तरह के आरोप लगा उन्हें बुरा इंसान
बताने की मुहिम चला रहे थे। इनमें कुछ पत्रकार
भी शामिल थे "
Nadim S. Akhter 1 May 2020
बहुत अफसोस की बात है कि कल अभिनेता ऋषि
कपूर की मौत के बाद कुछ लोगों ने सोशल
मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ लिखा और कैम्पने
चलाने की कोशिश की। ये लोग स्वर्गीय ऋषि
कपूर पर डोमेस्टिक वॉयलेंस से लेकर तमाम तरह के
आरोप लगा उन्हें बुरा इंसान बताने की मुहिम चला
रहे थे। इनमें कुछ पत्रकार भी थे। पहले ऋषि साब पर
लगे सारे आरोप गिना देता हूँ, फिर बारी-बारी से
उन सबका जवाब भी दूंगा।
ऋषि साहब पर पहला आरोप डोमेस्टिक वॉयलेंस
यानी घरेलू हिंसा का है जो ज़ाहिर है, उनकी
पत्नी नीतू कपूर के कंधे पर बंदूक़ रखकर लगाया
गया। इसमें कुछ ख़बरों का हवाला देकर ये बताया
गया कि कैसे नीतू कपूर ने ऋषि कपूर के ख़िलाफ़
डोमेस्टिक वॉयलेंस का केस किया था। फिर
अपुष्ट सूत्रों के हवाले से ये बताया कि नीतू कपूर,
उसके बाद ऋषि का घर छोड़कर चली गई थीं और
आजीविका के लिए सैलून तक चलाया।
ऋषि कपूर पर दूसरा ये लगा कि वे Child pornography को बढ़ावा देने वाले इंसान थे और इस
बाबत मुंबई के एक एनजीओ ‘जय हो फाउंडेशन’ ने
उनके खिलाफ एक केस भी दर्ज कराया था। यह
केस Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत था।
तीसरा आरोप ऋषि कपूर पर ये लगाया गया कि
वह महिलाओं का सम्मान नहीं करते थे और उनके
बारे में अनाप-शनाप ट्वीट कर देते थे। इसमें उनके दो
ट्वीट का हवाला दिया गया। इसमें ऋषि जी के
उस ट्वीट का हवाला दिया जा रहा था, जब
भारतीय महिला क्रिकेट टीम लॉर्ड्स में विश्व
कप का फ़ाइनल इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेल रही थी।
तब ऋषि कपूर ने जो ट्वीट किया था, वो मैं नीचे
कॉपी-पेस्ट कर रहा हूँ।
“Waiting for a repeat of Sourav Ganguly’s act on the balcony of The Lords Ground, London, when India beat England 2002 NatWest series final! YO.”
बहुत ही चालाकी से इस ट्वीट का मतलब भाई
लोगों ने ये बताया कि ऋषि कपूर चाहते थे कि
भारतीय महिला टीम भी मैच जीतने के बाद
बालकनी में आकर सौरव गांगुली की तरह अपना
टीशर्ट निकाले और हवा में लहराए। उस वक़्त इस
ट्वीट के बाद ऋषि कपूर को ट्विटर पर काफ़ी
भला-बुरा कहा गया।
उनका दूसरे ट्वीट का जिक्र सेलिब्रिटी किम
करदाशियां को लेकर था, जिसमें ऋषि कपूर ने
सोशल मीडिया पर किम पे बने एक वायरल मेमे को
शेयर किया था। इसमें किम के कपड़ों की तुलना
बोरी में बंद प्याज़ से की गई थी। इस मेमे को शेयर
करते हुए ऋषि ने लिखा था- Onions in a mesh bag!
तो इन सारे आरोपों की खिचड़ी ऐसी पकाई गई
कि अच्छे-अच्छे लोगों को हमने ये लिखते देखा कि
ऋषि कपूर को श्रद्धांजलि देने से पहले ये देख लो
कि वह कितने निम्न स्तर के इंसान थे। किसी के
मरने के बाद उसके पाप कम हो जाते हैं क्या ? ऐसी
तमाम बातें तथाकथित बुद्धिजीवियों ने लिखीं।
ये सब देखकर मेरा दिल बैठ गया। सोचा, वहीं
उनको जवाब दूँ पर खून का घूँट पीकर रह गया। फिर
विचार बनाया कि कलम का जवाब कलम से ही
दूँगा। वो भी मुंहतोड़।
तो सबसे पहले ऋषि कपूर के लिए नफरत बो रहे
विद्वानों के पहले आरोप का जवाब।
डोेमेस्टिक वायलेंस के आरोप का बुलबुला
तो ऐसा है बंधुओं ! अगर पत्रकार हो तो ख़बर को
कन्फर्म भी करना सीखो। आरोप तो कोई किसी
पर, कुछ भी लगा सकता है। मुझे नीतू कपूर द्वारा
डोमेस्टिक वॉयलेंस का केस करने संबंधी जो भी
ख़बर इंटरनेट पर दिखी, वह सब अटकलों पर
आधारित थी। माना जाता है, बताया जाता है
टाइप। अरे पुलिस में केस हुआ है तो जाकर थानेदार
से वर्जन लाओ ना ! लिखो तो पुलिस क्या बोल
रही है? लेकिन घरेलू हिंसा के आरोप वाली किसी
भी ख़बर में मुझे पुलिस का कोई कन्फर्मेशन नज़र
नहीं आया। यानी ख़बर या तो हवाहवाई थी या
डेस्क पर बैठ सपने में लिखी गई थी।
अब दूसरा पहलू। भई, मियाँ-बीवी के बीच झगड़े
किस घर में नहीं होते। हो सकता है कि ऋषि कपूर
के वैवाहिक जीवन में भी कुछ अनबन हुई हो। बात
थाना-पुलिस तक भी पहुँची हो पर इससे आप ऋषि
कपूर को नारी विरोधी कैसे बता सकते हैं ? नीतू
जी के साथ वह अपना भरापूरा परिवार छोड़ गए
हैं। इसलिए कोई मूर्ख ही इस तरह के आरोप लगाकर
एक दिवंगत आत्मा को बदनाम कर सकता है।
वैसे आपकी जानकारी के लिए ये बता दूँ कि
ख़ुद ऋषि कपूर ने अपनी किताब ‘खुल्लमखुल्ला’
में लिखा है कि शादी के बाद अपनी फ़्लॉप
होती फ़िल्मों की वजह से वह डिप्रेशन में जाने
लगे थे और इसके लिए नीतू कपूर को ज़िम्मेदार
ठहराने लगे थे। तब नीतू कपूर प्रेग्नेंट थीं। बाद में
ऋषि कपूर को इस बात का बहुत मलाल हुआ कि
उनकी वजह से उस वक़्त नीतू जी किस कदर
मानसिक दबाव में रही होंगी। ऋषि कपूर ने इस
किताब में अपनी ज़िंदगी की कोई बात उन्होंने
छुपाई नहीं। सब खुलकर बता दिया है। सो घरेलू
हिंसा का आरोप भी कहीं टिकता नहीं।
अब आते हैं दूसरे आरोप में, जिसमें मुंबई के जय हो
फाउंडेशन नामक एक एनजीओ ने लाइमलाइट में आने
के लिए ऋषि कपूर पर Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत मुकदमा दर्ज करवा
दिया था। नीचे उस वीडियो का स्क्रीनशॉट दे रहा हूं, जिसे लेकर उन पर ये आरोप लगा था। आप ही देखिए और सोचिए।
दरअसल हुआ ये था कि ऋषि कपूर एक मजाकिया
इंसान भी थे और मजाक-मजाक में सीरियस बात
कह देना उनकी आदत थी। तब गुरमीत राम-रहीम
का मामला गर्म था। इसे लेकर ऋषि साब ने ट्विटर
पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एटीएम जैसी
किसी मशीन के सामने खड़ी एक लड़की को पीछे
से एक छोटा बच्चा छेड़ता है। लड़की जब पीछे
मुड़ती है तो सामने एक बड़ा बच्चा भी खड़ा
होता है। लड़की समझती है कि ये हरकत बड़े बच्चे ने
की है। वह उसे तमाचा जड़ देती है। अब बड़ा बच्चा
लाइन में छोटे बच्चे को आगे कर देता है और ख़ुद पीछे
खड़ा हो जाता है। छोटा बच्चा फिर लड़की को
पीछे से टच करता है तो अबकी बार फिर लड़की
पीछे घूमकर तमाचा बड़े बच्चे को ही मारती है।
यानी करे कोई और भरे कोई।
ऋषि कपूर ने तब अपने ऊपर हुए इस एफआईआर पर
कहा था कि चूँकि वह सेलिब्रिटी हैं, इसलिए उन्हें
टार्गेट किया जा रहा है। वह इस वीडियो के
सहारे लोगों को बताना चाहते हैं कि अपने दिल
की आवाज़ सुनो, ढोंगी बाबाओं की नहीं। इसके
बाद उन्होंने वह ट्वीट डिलीट भी कर दिया। इस
पूरे घटनाक्रम में हुआ ये कि ऋषि कपूर के नाम का
फ़ायदा उठाकर मुंबई का एक अनाम एनजीओ
ख्याति पा गया। यानी दूसरों को बदनाम करके
ख़ुद का नाम हो गया। और पब्लिक के लिये ये हुआ
कि खाया पिया कुछ नहीं और गिलास फोड़ा
बारह आने का। मुझे व्यकितगत तौर पर उस
वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखा कि चाइल्ड
पोर्नोग्राफी टाइप कोई मामला बने। एक ह्यूमर
का वीडियो था, जिसे लेकर एनजीओ अपनी
दुकानदारी चमकाने थाने पहुँच गया।
चलिए, अब चलते हैं तीसरे आरोप पर कि ऋषि जी
महिला विरोधी थे और महिलाओं का सम्मान
नहीं करते थे। वह मैच जीतने पर महिला क्रिकेट टीम
से भी सौरव गांगुली जैसे व्यवहार की अपेक्षा
करते थे। यानी शर्ट उतारने वाली बात। तो ट्विटर
पर मूर्ख लोगों को कौन समझा सकता है भाई?
बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं कि जब बात समझ ना आए, तो
इंसान को चोंच बंद रखनी चाहिए। पर भारत में सब
चोंच फाड़ने वाले ही हैं। जरा देखिए, मरहूम ऋषि
साब ने क्या ट्वीट किया था- “Waiting for a repeat of Sourav Ganguly’s act on the balcony of The Lords Ground, London, when India beat England 2002 NatWest series final! YO.”
अगर अंग्रेज़ी ना आती हो तो इसका ट्रांसलेशन ये
है कि लॉर्ड्स ग्राउंड की बालकनी में सौरव
गांगुली जैसे करतब की प्रतीक्षा है। यहाँ ऋषि
जी ने कहां लिखा है कि महिला खिलाड़ी
अपनी शर्ट उतारकर हवा में लहराएं ? अगर भाव
आपको समझ नहीं आया, तो इसमें ऋषि जी की
क्या गलती थी? वह तो अपनी महिला क्रिकेट
टीम से इंग्लैंड को हराकर एक धाँसू विजयघोष की
उम्मीद कर रहे थे। इसका तरीक़ा कुछ भी हो
सकता था। पर नहीं। भाई लोगों को बाल की
खाल निकालने की आदत होती है। सो ना आगे
देखा, ना पीछा, ना कौआ और ना अपना कान,
बस दौड़ पड़े कौए के पीछे कि मेरा कान ले गया,
मेरा कान ले गया कौआ… ! वही मूर्ख लोग, जो तब
ऋषि जी का ट्वीट नहीं समझ पाए थे, आज उनकी
मौत के बाद पुराने गड़े मुर्दे निकालकर सोशल
मीडिया पर बदबू फैला रहे थे। एक सभ्य समाज को
ये सब शोभा देता है क्या ?
रही किम करदाशियां पर बने मेमे को ट्वीट करने
की बात तो सिम्पल लॉजिक है गुरु। ऋषि कपूर
फ़ैशन आइकन रहे थे। उन्हें इसकी समझ थी। सो किम
के कपड़ों के डिज़ाइन की तुलना जब बोरी में बंद
प्याज़ से करने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर
वायरल हुई तो बतौर एक यूज़र उन्होंने भी हास-
परिहास के अंदाज में इसे शेयर कर दिया। क्या हम
बातचीत में कभी-कभी अपनी महिला मित्रों,
यहाँ तक कि घर की महिलाओं से भी ये नहीं कह देते
कि आज सुग्गे यानी तोते जैसी ड्रेस क्यों पहनी
हो ? सो बाल-बच्चेदार और जिम्मेदार बुजुर्ग ऋषि
कपूर भी जब ऐसी ही कोई तस्वीर शेयर कर देते हैं
तो इसमें महिलाओं का अपमान कैसे हुआ
मूर्खाधिराज महाराज !! या तो गंदगी आपके
दिमाग़ में है या फिर आप ग्लास को हमेशा आधा
ख़ाली देखते हैं। ग्लास को आधा भरा हुआ देखने
की भी आदत डाल लीजिए। ज़िंदगी ख़ुशगवार
गुजरेगी।
एक बात और। ना मैं स्वर्गीय ऋषि कपूर साहब
का प्रवक्ता हूँ और ना ही कोई समाज
सुधारक। बस, सही को सही और ग़लत को ग़लत
कहना मुझे आता है। आप लोगों को शर्म नहीं आई
कि एक बुजुर्ग एक्टर, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से
भारतीय सिनेमा को इतना कुछ दिया, जिन्होंने
अपनी फ़िल्मों से आपकी ज़िंदगी के कई अनुभवों
को जीवंत कर दिया, जो जीवन भर सच के साथ
खड़ा रहा और कभी ये परवाह नहीं की कि सत्ता
या समाज या दोस्त-यार क्या बोलेंगे, बेबाक़ और
बेलाग तरीक़े से सार्वजनिक मंच पर अपनी बात
रखी, उस बुजुर्ग के इस दुनिया से जाने के बाद इतनी
नीचता पर उतर आए आप लोग !! धिक्कार है। जो
लोग कल बड़े पाक-साफ बनकर ऋषि कपूर पर सोशल
मीडिया पे इल्ज़ाम लगा रहे थे, उनसे यही कहूँगा
कि बॉस! पहला पत्थर वो मारे, जो पापी ना हो।
जिगर चाहिए सच बोलने के लिए।
ऋषि कपूर तो ऐसे इंसान थे, जिन्होंने अपनी
ज़िंदगी को खुली किताब बनाकर जनता के बीच
उछाल दिया। अपनी यादों को समेटते हुए किताब ‘खुल्लमखुल्ला’ में ये भी बता दिया कि उनके पिता
स्वर्गीय राजकपूर साहब का मरहूम नरगिस जी और
बैजयंतीमाला जी से अफ़ेयर था। एक वक़्त था जब
अवॉर्ड के लिए उन्होंने पैसे दिए थे, ये भी कबूला।
अब बोलिए, जो इंसान इतनी ईमानदारी से अपने
परिवार और ज़िंदगी के राज बता रहा हो, वह
क्या छिपाएगा हमसे ? जो कुछ छुपा था, सब
ज़ाहिर तो कर दिया उन्होंने अपनी किताब में !
और अगर आपमें इतनी बुद्धि नहीं है कि आप उनके
ट्वीट को समझ सकें तो उसका ग़लत इंटरप्रिटेशन
बनाकर उनको बदनाम और ज़लील तो मत करो !
जिस भारतीय संस्कृति की आप दुहाई दे रहे हो, वह
मरने के बाद दुश्मन के बारे में भी अपशब्द नहीं
निकालती क्योंकि तब पाक रूह परमात्मा से जा
मिली होती है और नश्वर शरीर ही जहान में रह
जाता है। सो उस रूह यानी आत्मा का अपमान,
परमात्मा का अपमान माना जाता है। क्या
इत्ती छोटी सी बात आप लोगों को समझ नहीं
आई ? बड़े फ़र्ज़ी आदमी हो यार आपलोग !!
#Nadimkibaat #नदीमकीबात
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इतनी जल्दी हार नहीं मानना चाहता था अपना 'पान सिंह तोमर '
इतनी जल्दी हार नहीं मानना चाहता था अपना 'पान सिंह तोमर '
Nadim Akhter 08:44
" ऐसा नहीं है कि राजकपूर, अमिताभ बच्चन से
लेकर राजेश खन्ना और अभी आमिर खान की
अदाकारी में दम नहीं है पर मामला क्लास
वाला है। वो सबमें नहीं होता और मेरी जितनी
समझ है, उसके मुताबिक़ दिलीप साब के बाद
इरफ़ान ही इस ‘क्लास’ वाले कप को थामे
दिखते हैं "
Nadim S. Akhter 29 April 2020
मुझे आज दोपहर में ये ख़बर पता चली कि संजीदा #
एक्टर #इरफ़ान #खान का इंतकाल हो गया।
जानकर झटका सा लगा और दिमाग़ में ये बात
कौंध गई कि अरे ! अभी कल ही तो ख़बर आई थी
कि उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में एडमिट
कराया गया है। विदेश से इलाज कराके ठीक होकर
लौटे थे। फिर अचानक ! क्या हुआ ? और फिर
एकसाथ इरफ़ान की कई फ़िल्मों के किरदार मेरी
आँखों के सामने घूम गए। बॉलिवुड का वो गाना
याद आ गया कि रोते हुए आते हैं सब, हंसता हुआ जो
जाएगा, वो मुक़द्दर का सिकंदर जानेमन
कहलाएगा। इरफ़ान मुक़द्दर का सिकंदर तो बने पर
शायद हंसते हुए इस दुनिया से विदा नहीं हुए। वह
अभी और जीना चाहते थे। ऐसा पिछले दिनों
उन्होंने कहा था। वह उन अपनों के लिए ज़िंदगी
को गले लगाना चाहते थे, जो बीमारी में दिन-रात
खड़े होकर उनकी तीमारदारी कर रहे थे। पर
अफ़सोस ! ऐसा हो ना सका। #बॉलिवुड का एक
जगमगाता #सितारा, जो अभी जवान हो ही
रहा था, वह असमय काल के गाल में समाकर बुझ
गया। भारतीय और विश्व सिनेमा को एक बहुत
बड़ा नुक़सान हो गया।
आज शाम जब सोशल मीडिया पर तैरकर दिनभर
की बड़ी ख़बरों की टोह ले रहा था, तो हर जगह
मुझे इरफ़ान खान से संबंधित पोस्ट्स दिखीं। क्या
फ़ेसबुक और क्या ट्विटर, हर ख़ास और आम इरफ़ान
को श्रद्धांजलि देता दिखा। अलग-अलग
विचारधाराओं वाले भी और जुदा-जुदा खोमचे
वाले भी। ऐसा लगा कि इरफ़ान के जाने के ग़म में
पूरा देश एक हो गया। हिंदू-मुसलमान के बीच नफ़रत
बोने के इस दौर में एक ‘मुसलमान अभिनेता’ के जाने
पर देश में शोक की ऐसी लहर देखकर आज एक बार
फिर लगा कि अभी हमारे समाज का बेसिक
धागा टूटा नहीं है। अभी भी लोग कम से कम पर्दे
की दुनिया में धर्म और सम्प्रदाय का भेद नहीं
करते। ऐसी ख़बरें भी आईं थीं कि इरफ़ान खान ने
अपने नाम के आगे से ‘खान’ शब्द हटा लिया है
क्योंकि वह अपनी पहचान अपने काम से करना
चाहते थे, अपने धर्म से नहीं। वैसे देश में शोक की ऐसी
लहर एक और मुसलमान के जाने पर दिखी थी-मरहूम
डॉ. एपीजे अब्दुल #कलाम साब। तब कुछ लोगों ने
कहा था कि देश के हर मुसलमान को डॉ. कलाम
जैसा बनना चाहिए। उस वक़्त हमने पूछा था कि
क्यों ? तब इस देश के हर हिंदू को महात्मा #गांधी
सरीखा और रवींद्रनाथ #टैगौर जैसा क्यों नहीं
बनना चाहिए? ये क्या अजीब तुलना और तर्क है।
हर इंसान की अलग अपनी शख़्सियत होती है। मरहूम
इरफ़ान ना तो कलाम बन सकते थे और ना मरहूम
कलाम साब, इरफ़ान। खैर! इस मुद्दे पर फिर कभी
लिखूँगा वरना विषय से भटक जाऊंगा।
तो मैं बता रहा था कि जब इरफ़ान खान की मौत
की ख़बर मिली तो उनकी फ़िल्में फ्लैशबैक की तरह
मेरे दिमाग़ में कौंध गईं। सबसे पहले मुझे उनकी वो
फ़िल्म याद आई, जो मेरे दिल के बहुत क़रीब है- पान
सिंह तोमर। उस फ़िल्म को देखते वक़्त मुझे ऐसा
लगा मानो मैं टाइम ट्रावेल करके इतिहास को
अपने सामने घटित होता देख रहा हूं। इतना जीवंत
अभिनय ! शानदार। इस फ़िल्म को देखने के बाद ही
मैं इरफ़ान का मुरीद बना। हालाँकि इससे पहले भी
उन्होंने कई जानदार एक्टिंग वाली फ़िल्में करके
अपना लोहा मनवा लिया था पर अपन सख़्त जान
हैं। कोई चीज दिल को जल्दी लुभाती नहीं। पर उस
दिन पान सिंह तोमर वाले इरफ़ान पर अपना दिल
आ गया। उसके बाद जब भी कभी मैं टीवी या
अख़बार में इरफ़ान खान को देखता तो रुक जाता।
फिर एक दिन ख़बर आई कि इरफ़ान ने ख़ुद ट्वीट
करके दुनिया के सामने ये खुलासा किया है कि
उन्हें एक गंभीर बीमारी है पर वह इससे लड़ेंगे। उन्हें
दुआओं की दरकार है। हमने भी उनके लिए दुआ की।
वो ठीक होकर लौट आए। उनके प्रशंसक और मुझ
जैसा कद्रदान खुश था। पर वो कहते हैं ना कि मौत
तो बहाना ढूँढती है। इरफ़ान खान की मौत का
भी बहाना हो गया। ठीक वैसे ही, जैसे मशहूर और
दिग्गज फ़िल्म निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा
का हुआ था। वह तो मच्छर के काटने से होनी
वाली बीमारी से असमय चले गए। डेंगू से। इलाज की
सारी सुविधाओं के बाद भी नहीं बचे। उनका
जाना भी मुझे ऐसे ही खला था। तब मैंने लिखा
था कि आज बॉलिवुड का रोमांस चला गया। अब
भारत की फ़िल्मों में ना वैसी चाँदनी दिखेगी
और ना वो सिलसिला। डेंगू बीमारी उनकी मौत
का बहाना बन गई। और अब इरफ़ान। पर इरफ़ान तो
अभी उभर रहे थे। उनका बेस्ट आना अभी बाक़ी
था। लेकिन अब ये कभी नहीं हो पाएगा।
अफ़सोस !!
इरफ़ान की एक्टिंग का जब मैं मुरीद बना तो
टीवी पर एक बल्ब के विज्ञापन को मैं चाव से
देखता था। उस बल्ब का नाम है- सिसका एलईडी।
उस विज्ञापन का मैंने साइकोलॉजिकल
आब्जर्वेशन भी किया। कि इरफ़ान कैसे उस बल्ब
को बेच रहे हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज क्या है? वो
बोल क्या रहे हैं? तब मैंने पाया कि विज्ञापन
बनाने वाली कंपनी की कॉपीराइटिंग टीम ने
इरफ़ान के खिलंदड़ व्यक्तित्व को ध्यान में रखकर
ही पूरे ऐड का कॉनसेप्ट और डायलॉग लिखे होंगे।
ये कमाल की बात थी। ऐसा अमिताभ बच्चन जैसे
एक्टर्स के लिए किया जाता रहा है पर इतनी कम
उम्र में इरफ़ान के लिए अगर ये सब हुआ होगा, तो
इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उनके
व्यक्तित्व की छाप एक विज्ञापन पर भी
दिखती थी।
इरफ़ान खान की एक्टिंग और काम का लोहा
दुनिया ने माना। वह हॉलिवुड तक गए। पर असल
बात ये नहीं है। भारत जैसे देश में जहां 'फ़िल्मों में
जाना मतलब अच्छी शक्ल-सूरत वाला होना’
जैसी मान्यताएँ प्रचलित हैं, वहाँ बेहद मामूली नैन-
नक़्श वाले इरफ़ान खान ने नसीरुद्दीन शाह और
ओमपुरी जैसे अभिनेताओं की परंपरा को आगे
बढ़ाया। अपनी एक्टिंग के दम पे अपनी पहचान
बनाई। नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी जैसे कलाकार भी
इसी लीग को आगे बढ़ा रहे हैं। और भी कई नाम हैं
पर इरफ़ान सबसे जुदा थे। एक्टिंग की दुनिया के
जानकार कहते हैं कि वह नैचुरल एक्टर थे। उन्हें
अभिनय करना नहीं पड़ता था। यह उनके अंदर से
निकलता था। यही बात एक एक्टर और एक लीजेंड
का फ़र्क़ बताता है। मेरी बात करूँ तो मुझे दिलीप
कुमार के बाद इरफ़ान खान की एक्टिंग ने सबसे
ज़्यादा प्रभावित किया। ऐसा नहीं है कि
राजकपूर-अमिताभ बच्चन से लेकर राजेश खन्ना और
अभी आमिर खान की एक्टिंग में दम नहीं है पर
मामला क्लास वाला है। वो सबमें नहीं होता और
मेरी जितनी समझ है, उसके मुताबिक़ दिलीप साब
के बाद इरफ़ान ही इस ‘क्लास’ वाले कप को थामे
दिखते हैं।
इरफ़ान खान के जीवन और एक्टिंग में उनके संघर्ष पर
ज़्यादा बात नहीं करुंगा क्योंकि अमूमन हर ज़मीन
से उठे माटी के लाल को इसका सामना करना ही
करना होता है। इरफ़ान भी अपवाद नहीं थे।
राजस्थान के एक छोटे से शहर से निकलकर उन्होंने
एक्टिंग की ट्रेनिंग ली, टीवी सीरियल्स में काम
किया, संघर्ष किया, फिर फ़िल्में मिलीं, शुरु में
पहचान नहीं मिली, वे लगे रहे और एक दिन अपनी
अदाकारी से सबको मुतास्सिर कर दिया। उसके
बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हाँ, चूँकि वह
संजीदा कलाकार थे, सो फ़िल्में उन्होंने बहुत
चुनिंदा कीं। और जो किया, चाहे वह कितना ही
छोटा रोल क्यों ना हो, उसे दिल से किया। उस
किरदार को पर्दे पर जीवंत कर दिया।
ये जानकर निजी तौर पर मुझे और अफ़सोस हुआ कि
चंद रोज़ पहले इरफ़ान की अम्मी का राजस्थान में
निधन हो गया पर बेटा, माँ के जनाज़े में शामिल
नहीं पाया। लॉकडाउन के चलते वीडियो कॉल के मार्फ़त ही इरफ़ान ने बेटा होने का फर्ज
निभाया। यह उनके जैसे संवेदनशील इंसान के लिए
बहुत बड़ा सदमा रहा होगा, जो उन्हें अंदर से और
तोड़ गया होगा। और कुछ ही दिन बीते, आज ये
ख़बर आ गई कि बेटा भी अपनी अम्मी के पास
चला गया। इस फानी दुनिया को छोड़कर, दूसरी दुनिया में। पर एक बात है, जो बार-बार मुझे
कचोटती है। इरफ़ान अभी और जीना चाहते थे।
अपनों के लिए। ऐसी ख्वाहिश थी उनकी। फिर
भी उन्हें जाना पड़ा। वो हंसते हुए तो नहीं ही गए
होंगे। दिल पर एक बोझ लेकर गए होंगे। मजूबरी रही
होगी क्योंकि खुदा के हुक्म के आगे इंसान बेबस है।
बस, हम जैसे लोगों को ये लगा था कि इरफ़ान भाई
अब एकदम ठीक हैं। तंदुरुस्त होकर विदेश से लौट आए,
क्रिकेटर युवराज सिंह की तरह, मनीषा कोइराला
की तरह। एक अच्छे फाइटर की तरह मौत को
उन्होंने भी मात दे दी। पर नियति के अपने फ़ैसले
होते हैं। वह निष्ठुर है। इस दफ़ा पर्दे का चमकता
सितारा इंटरवेल में ही बुझ गया।
अल्लाह इरफ़ान भाई की रूह को सुकून दे और उन्हें
जन्नत नसीब करे, हम क़द्रदानों की तो उनके लिए
यही दुआ है।
आमीन !!
15notes
पीएम मोदी को ट्विटर पर ट्रॉल करके किसे क्या मिला ?
पीएम मोदी को ट्विटर पर ट्रॉल करके किसे क्या मिला ?
Nadim Akhter 06:43
"आज जो ट्विटर पर हुआ और जिस तरह देश के प्रधानमंत्री के बारे में -ग़द्दार- जैसा शब्द लिखकर उसे ट्रेंड कराया गया, वह इसी का विस्तार है। अगर आप मल्ल युद्ध में सामने वाले का लंगोट खुलने पर उसकी हंसी उड़ाएँगे, रेफ़री खेल रोकने की बजाय उसे खेल का हिस्सा बताएगा तो एक ना एक दिन सामने वाला प्रतिद्वंद्वी भी आपकी लंगोट भरी महफ़िल में खोल ही देगा। तब क्या करेंगे आप?"
Nadim S. Akhter 6 May 2020
मैंने #Twitter पर नाना-दादा प्रकार के ट्रेंड देखे हैं पर आज पीएम पर एक ट्रेंड की भाषा देखकर विचलित हूँ। क्या अब कोई शर्म-लिहाज और शालीनता नहीं बची हममें? यह लिखे जाने तक 77.5 हजार ट्वीट के साथ ट्विटर पर नम्बर-1 ट्रेंड था- #गद्दार_मोदी_लुटेरा_है । मतलब जिसके जो मन में आ रहा है, इस हैशटैग के साथ ट्विटर पर लिख-बोल रहा है। किसी पे कोई लगाम नहीं। आम दिनों ये ट्रॉल सेना विपक्ष के लोगों को, सेलिब्रिटीज को, पत्रकारों को और आम जनता को ट्रॉल करती आई है। आज पीएम को ट्रॉल किया गया। वह भी एक बेहद आपत्तिजनक भाषा में। बहुत दुख की बात है कि ये सब हुआ। ये नहीं होना चाहिए था।
लगता है कि आज घर के चिराग़ से ही घर को आग लग गई। इसीलिए बड़े बुज़ुर्ग कह गए हैं कि घर का अनुशासन बनाकर रखो। आज अगर कोई आपका प्यारा बच्चा अनुशासन तोड़ रहा है और आप चुप हैं, तो कल को कोई घर का दूसरा बच्चा भी अनुशासन तोड़ेगा। तब आप मन मसोस कर रह जाएँगे, कुछ नहीं कर पाएँगे क्योंकि परम्परा आपकी छत्रछाया में ही बनी है।
मुझे ये कहते हुए दुख हो रहा है कि बतौर एक राष्ट्र हम अंदर से बुरी तरह टूट चुके हैं। सामाजिक और राजनीतिक कटुता का आलम ये है कि विरोधी को नीचा दिखाने के लिए लोग किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। जिस मीडिया की छाती पर चढ़कर जमाती-कोरोना किया गया, यही मीडिया कल दूसरे पक्ष की मूर्ति भी विखंडित कर देगा। अगर मीडिया को चाकर ही बनना है, तो वह किसका अपना होगा? वही हाल #आईटी #सेल और तमाम ट्रॉल सेना का होगा। आज ये जिनकी दिहाड़ी कर रहे हैं, कल पैसे के लिए किसी और की दिहाड़ी करेंगे। बचेगा कोई नहीं। मैं तो बस कल की सोचकर और व्यथित हो जाता हूँ। कौन किसको छोड़ेगा यहां? अब तो व्यक्तिगत दुश्मनी सी दिखती है।
बस एक बात बतानी थी। शायद आप जानते होंगे। पर याद दिला देता हूँ। तब अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री बन गए थे। एक दिन साउथ ब्लॉक पहुंचे तो वहां की एक दीवार पे सदा टँगी रहने वाली पंडित नेहरू की फोटुक गायब थी। अटल के चमचों ने सोचा था कि इससे वह खुश होंगे। शाबाशी देंगे। पर अटल जी भड़क गए। कहा-किसने हटवाई नेहरू जी की तस्वीर? सब चुप। फिर दुबारा वह पोर्ट्रेट वहां लगी। अटल जी के दिल को करार आया।
ये बात बताते हुए खुद अटल जी ने कहा था कि राजनीतिक मतभेद के बावजूद मनभेद नहीं होना चाहिए। उनके और नेहरू के बीच मतभेद थे, मनभेद नहीं। वह नेहरू जी की बहुत इज़्ज़त करते थे पर आलोचना भी तगड़ी कर देते थे। ऐसे ही एक दफा उन्होंने नेहरू जी के व्यक्तित्व की आलोचना कर दी। कहा कि आपमें इंग्लैंड के दो-दो प्रधानमंत्रियों, चर्चिल और चेम्बर्लिन का मिश्रण है। आलोचना तीखी थी। उसी शाम नेहरू जी और अटल जी एक भोज पर मिल गए। हमेशा की तरह नेहरु जी शांत थे। अटल का जब उनसे सामना हुआ तो नेहरू ने उस 'सॉलिड स्पीच' के लिए अटल को बधाई दे दी। फिर मुस्कुराते हुए वहाँ से चले गए। अटल बस उन्हें देखते रह गए। बाद में अटल जी ने बताया था कि आज के ज़माने में अगर किसी को ऐसा बोल दो, तो दुश्मनी को दावत हो जाती है। लोग बातचीत करना छोड़ देते हैं। पर तब ऐसा नहीं था।
ये कहानी आपको इसलिए बताई कि आप जानें के आज हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन का कितना पतन हो चुका है। बतौर राष्ट्र हम अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों का छाता लेकर नहीं चल रहे, अब तो विचाधारा के नाम पर एक-दूसरे पे बदूँक ताने घूम रहे हैं। वैसे आज के माहौल में भी कभी-कभी नयनसुख पल मिल जाते हैं। कहीं किसी कोने से एक तस्वीर आती है कि बीजेपी के भीष्म पितामह लालकृष्ण आडवाणी को (जिन्हें मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया है) सोनिया गांधी हाथ पकड़कर सहारा दे चलने में मदद कर रही हैं। कभी राहुल गांधी चलते-चलते अचानक से रुक जाते हैं और बैठे आडवाणी जी से झुककर बात करने लगते हैं। कभी संसद के अंदर ही राहुल गांधी, किसी को गले लगा लेते हैं।
पर दूसरी तरफ़ से ऐसी कोशिश नहीं दिखती। उलटे आईटी सेना इसका माखौल उड़ाने में लग जाती है। राहुल गांधी के गले मिलने को पप्पू का नाटक बताया जाता है। एक और वाक़या याद दिलाता हूँ। तब अटल जी पीएम थे और पाकिस्तान में सत्ता परवेज़ मुशर्रफ के हाथ में थी। हमेशा की तरह भारत-पाक रिश्तों में बर्फ़ जमी थी और माहौल में तनाव था। तभी नेपाल के काठमांडू में 11वें सार्क (SAARC) समिट का आयोजन हुआ। इसमें परवेज मुशर्रफ को बोलने का मौका अटल जी से पहले मिला। मुशर्रफ के बाद तीन और राष्ट्राध्यक्षों को बोलना था, तब जाकर अटल जी की बारी आती। तब अपने भाषण में मुशर्रफ ने सार्क को आपसी मतभेद भुलाने का मंच बताया और कहा- "Let none amongst us consider himself more equal than others."
जाहिर है बात घुमाकर कही गई थी और समझने वाले समझ रहे थे कि ये सीधे-सीधे बड़े भाई भारत की तरफ़ इशारा था। अटल जी यह सुनकर मन ही मन कुछ गुन रहे थे और मुशर्रफ बोलकर मंच से अपनी सीट की तरफ़ आ रहे थे। पर अचानक वह पलटे और अटल जी की सीट की तरफ़ बढ़ लिए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने अटल जी की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया । तब तक अटल जी बैठे हुए थे। अचनाक से बढ़े मुशर्रफ के इस दोस्ती के हाथ ने अटल जी को भी भौंचक कर दिया। उस समय तक अटल जी के घुटने में दर्द रहने लगा था, सो उन्हें जवाब में उठकर हाथ मिलाने में थोड़ा वक़्त लग गया। दो देशों की कटुता पर दोस्ती के इस हाथ से सार्क समिट का पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दूसरे राष्ट्राध्यक्षों के चेहरे में खिलखिलाने लगे। माहौल में तनाव कम हो गया। दोनों देशों के ब्यूरोक्रेट्स और सेना के अफ़सरों ने राहत की सांस ली।
उस वक्त मीडिया में इस घटना की खूब चर्चा हुई थी और मुशर्रफ के इस Hand Shake को मास्टरस्ट्रोक कहा गया। जो भी हो, इसके बाद दोनों देशों के रुख में नरमी आयी और बातचीत का रास्ता खुला। कहने का मतलब ये है कि आज की सदी में हम कोई राजे-रजवाड़ों के जमाने में नहीं रह रहे हैं। हम लोग एक लोकतंत्र में रहते हैं और 'जनता का राज' चलाने का जिम्मा हम अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को दे देते हैं। ऐसे में इन जनप्रतिनिधियों और Public Servants को ये सोचना होगा कि वे खुद राजा नहीं हैं। जनता के नौकर हैं। देश में राजनीतिक शुचिता और प्रेमभाव बनाना उनका ही दायित्व है। अगर वे अपनी जगह से फिसले और विघटनकारी तत्वों को समाज से लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक और वैयक्तिक गरिमा तार-तार करने का मौका दिया, तो कल ये सांप उन्हें भी डंस लेगा, जिसे पालपोस कर और दूध पिलाकर बड़ा किया गया है।
आरोप लगते रहे हैं कि हमारे सत्ता प्रतिष्ठान में बहुत ऊँचे पदों पर बैठे नेता ऐसे लोगों को ट्विटर पर फ़ॉलो करते हैं, जो साम्प्रदायिक और ज़हरीली बातें बोल-लिखकर समाज में नफ़रत फैलाते हैं, लोगों को ट्रॉल करते हैं। ये लोग बड़ी शान से कहते भी हैं कि हमारा कौन क्या बिगाड़ लेगा? देखो, फलां मंत्री, फलां नेता हमको फ़ॉलो करता है।
अगर आप मल्ल युद्ध में सामने वाले का लंगोट खुलने पर उसकी हंसी उड़ाएँगे, रेफ़री खेल रोकने की बजाय उसे खेल का हिस्सा बताएगा तो एक ना एक दिन सामने वाला प्रतिद्वंद्वी भी आपकी लंगोट भरी महफ़िल में खोल ही देगा। तब क्या करेंगे आप ? ऐसे में आज जो ट्विटर पर हुआ और जिस तरह देश के प्रधानमंत्री के बारे में -ग़द्दार- जैसा शब्द लिखकर उसे ट्रेंड कराया गया, वह इसी का विस्तार है। बतौर नागरिक और राष्ट्र, यह हम सब के लिए बेहद शर्मनाक है। ऐसा नहीं होना चाहिए था। यह क्यों हुआ, इस पर उच्च स्तर पर मंथन होना चाहिए। विपक्ष को भी इस घटना की कड़ी निंदा करनी चाहिए।
इसलिए अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। ज़रूरत है कि सभी राजनीतिक पार्टियाँ आपसी कटुता भुलाकर देश को आगे ले जाने की फ़िक्र करें। इसमें सत्ताधारी पार्टी की भूमिका एक अभिभावक की तरह सबसे अहम हो जाती है कि वह सबको साथ जोड़कर और साथ लेकर चले। वरना ट्रॉल सेना का क्या है? वो तो पैसों के लिए अपने बाप को भी ट्रॉल कर दें। ईसा पीर, ना मूसा पीर, सबसे बड़ा है पैसा पीर। पर क्या वाक़ई??!!
15notes
आख़िर अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ क्यों बोलते रहते हैं सुब्रमण्यम स्वामी !
आख़िर अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ क्यों बोलते रहते हैं सुब्रमण्यम स्वामी !
Nadim Akhter 00:51
" यह विपक्ष का भी हिस्सा हड़पने का खेल है। मतलब अगर सरकार को लगे कि गलती हो गई या पब्लिक में थू-थू हो रही है या विपक्ष जनता में क्रेडिबिलिटी बना रहा है तो तुरंत अपने ही एक आदमी को आगे कर दो, जो सरकार की 'कड़ी निंदा' कर दे "
Nadim S. Akhter 5 May 2020
गेम समझिए। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद श्री सुब्रमण्यम स्वामी ने मज़दूरों से ट्रेन का किराया वसूलने के मामले में मोदी सरकार पर हमला बोल दिया। स्वामी बोले कि भूखे मज़दूरों से किराया वसूलना एक मूर्खतापूर्ण फ़ैसला है। अगर विदेश में फँसे (या छुपे?) भारतीयों को हवाई जहाज़ से सरकार मुफ़्त देश ला सकती है, तो फिर इन मज़दूरों से क्यों किराया वसूला गया? अगर रेलवे किराए का बोझ वहन करने में सक्षम नहीं तो फिर PM Cares Fund किसलिए है?
तो कुछ समझे आप? सुब्रमण्यम स्वामी अपनी ही सरकार पर हमलावर हो गए। आप सोच रहे होंगे कि कित्ती अच्छी लोकतांत्रिक पार्टी है। पार्टी के ही लोग सरकार की आलोचना कर रहे हैं। पर गच्चा मत खाइए। यह विपक्ष का भी हिस्सा हड़पने का खेल है। मतलब अगर सरकार को लगे कि गलती हो गई या पब्लिक में थू-थू हो रही है या विपक्ष जनता में क्रेडिबिलिटी बना रहा है तो तुरंत अपने ही एक आदमी को आगे कर दो, जो सरकार की 'कड़ी निंदा' कर दे। इसके बहुत फ़ायदे हैं।
एक तो इससे जनता का ध्यान तुरंत सरकार की गलती से डाइवर्ट हो जाता है और वह विपक्ष की बात सुनने की बजाय राज कर रही पार्टी के उस चेहरे की तरफ देखने लगता है, जो सरकार को कोस रहा होता है। यानी मीडिया से लेकर जनमानस तक विपक्ष जो स्पेस बना सकता था, जो अपनी छाप छोड़ सकता था, वह भी मत होने दो। वह स्पेस भी ख़ुद हड़प लो।
इसका दूसरा फ़ायदा ये है कि जनता में इससे ये मैसेज चला जाता है कि हाय रे हाय ! कितनी लोकतांत्रिक सरकार है। स्वामी जैसा नेता तक सरकार की कड़ी निंदा किए दे रहा है और सब सुन रहे हैं। सदके जावां। इस अदा पर। जैसा मैं हमेशा कहता रहता हूँ कि जनता तो है ही भेड़ों का झुंड। वह बहुत आसानी से ऐसी थ्योरीज के झाँसे में आ जाती है। बाक़ी का काम आईटी सेल कर देता है कि देखो, आपकी सरकार कितनी सहनशील है। अपना ही नेता आड़े हाथों ले रहा है, फिर भी ये टुकड़े-टुकड़े गैंग और तथाकथित सिक-कुलरवादी कहता फिरता है कि ये सरकार तो आलोचना बर्दाश्त ही नहीं कर पाती है। देखो, अपने स्वामी जी को। चौड़े होकर आलोचना कर रहे हैं और पार्टी में बने हुए हैं। ना सरकार उनको तलब कर रही है और ना पार्टी अध्यक्ष। फिर भी ये लिबरल गैंग चोंच लड़ाता रहता है। और क्या चाहिए भाई लोगों !!
आप क्रोनोलॉजी समझिए। जब-जब सरकार की नीतियों या फ़ैसलों से जनता में उसकी आलोचना होने की आशंका रहती है तो स्वामी जी फट से कोई ऐसा ट्वीट कर देते हैं कि विपक्ष क्या हमलावर होगा गुरु ! लो हमीं बोल दे रहे हैं। रेलवे द्वारा मज़दूरों की घर वापसी पर जब किराया वसूलने की ख़बरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं और इस बात के सबूत दिखने लगे कि सरकार ने किराया वसूला है तो सरकार को किरकिरी से बचने के लिए तुरंत सुब्रमण्यम स्वामी आगे आ गए। अब कांग्रेस की कामचलाऊ अध्यक्ष सोनिया गांधी की कौन सुने, जिन्होंने भी जोश में ऐलान कर डाला कि मज़दूरों के घर आने का किराया कांग्रेस पार्टी देगी। हालाँकि कांग्रेस समर्थकों ने इस ख़बर को खूब हवा दी और कुछ मीडिया संस्थानों ने भी इसे छापा-दिखाया पर महफ़िल तो स्वामी जी लूट ले गए। ट्विटर पर भी और मेनस्ट्रीम मीडिया पर भी।
यानी हुआ ये कि सरकार पर विपक्ष के हमले की धार स्वामी जी ने कुंद कर दी। लो, अपना ही आदमी सरकार को घेर रहा है भाई ! अब सोनिया जी ने बोल दिया तो क्या कमाल कर दिया। इसके बाद फिर सरकार भी डैमेज कंट्रोल करती है। कभी ख़बर आती है कि किराया तो लिया ही नहीं गया, फिर ये कि इतना फ़ीसदी किराया ख़ुद रेलवे दे रहा है, हम तो मज़दूरों के हितैषी हैं वग़ैरह-वगैरह। यानी एक साथ अलग-अलग एंगल से इतनी ख़बरें फैला दो कि पब्लिक भी कन्फ्यूज हो जाए कि भैया !! ये किराया कहीं मंगल ग्रह के प्राणी तो नहीं भर रहे !! और विपक्ष ने जो हमला किया, वह स्वामी जी ने पहले ही रोक दिया। लब्बोलुबाब ये कि जनता उकताकर इस ख़बर को ही भूल जाए कि जाने दो बे ! समझ ही नहीं आ रहा कि सोनिया गांधी काहे पगलाए हुए है और ये मजदूरवा सब काहे किचकिचा रहे हैं ? सरकार तो ट्रेन चलवाइए रही है ना ! किरायो ते देबे कर रही है। सब पॉलिटिक्स है...और इस तरह बहुत ही महीन तरीक़े से सरकार की गलती छिपा ली जाती है और साख बरकरार रखी जाती है।
ऐसा नहीं कि अपने स्वामी जी पहली बार बीजेपी में रहते मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। बीच-बीच में यदा-कदा इनके अमृत बोल फूटते रहते हैं, जब भी सरकार की इमेज ख़राब होने की चिंता होने लगती है, स्वामी जी प्रकट हो जाते हैं। इससे पहले जब अर्थव्यवस्था सुस्ती के चरम पर थी, तब स्वामी जी ने खुलेआम सरकार की आलोचना कर दी थी। वे इतने पर ही नहीं रुके, RBI के पूर्व गर्वनर
रघुराम राजन की तारीफ भी कर दी और नसीहत दे डाली कि मोदी सरकार को उन्हीं के सुझाए रास्ते पर चलकर बेरोजगारी दर कम करनी चाहिए।
कहते हैं कि स्वामी जी देश के वित्त मंत्री बनना चाहते थे/हैं पर जब दाल नहीं गली तो समय-समय पर अपनी भड़ास सरकार की निंदा करके निकालते रहते हैं। अगर ऐसा है और वे बीजेपी से इतने ही नाराज़ हैं तो अब तक तो उनको पार्टी छोड़ देना चाहिए था ! कमाल की बात ये है कि दिल्ली दंगों जैसे हालात पर स्वामी जी अपनी पार्टी या सरकार की नहीं, ब्यूरोक्रेट्स की आलोचना करने लगते हैं। दिल्ली दंगों के समय उन्होंने कहा था कि चापलूस और Anti-Hindutva माइंडसेट वाले नौकरशाह की वजह से ही सारी परेशानी है और हमें Anti CAA प्रोटेस्ट के खड़े होने से सीख लेनी चाहिए। तब इस विवाद में उन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले को भी घसीट लिया था।
इतना ही नहीं, Vice News को दिए एक
विस्फोटक इंटरव्यू में स्वामी जी ने ये तक कह दिया कि जहां भी मुसलमान ज्यादा तादाद में होते हैं, वहां समस्या होती है क्योंकि इस्लामिक आइडियोलॉजी ऐसा कहती है। मतलब दंगों को रोकने में सरकार और पुलिस की कोई जिम्मेदारी नहीं। असल समस्या मुसलमान हैं? यानी एक तीर से दो शिकार। एक तो इस तरह की बयानबाजी से साम्प्रदायिक उन्माद भड़का दो और दूसरी तरफ राज्य के कर्तव्यों पर सवाल उठाने वालों का मुंह बंद कर दो कि ये तो मुसलमान कर रहे हैं, राज्य क्या करे ??
साफ़ है कि सरकार के अलग-अलग संकट के समय स्वामी जी अलग-अलग भूमिका में रहते हैं। जब जहां, जो सधा, उसपे निशाना लगाकर सरकार की इमेज ठीक कर दो, उनका यही काम है। दिल्ली दंगों के लिए अफ़सरशाही ज़िम्मेदार हो गई, मुसलमानों को क़सूरवार ठहरा दिया और अब रेलवे भाड़ा वसूलने पे सरकार की थोड़ी आलोचना कर दी ताकि विपक्ष का स्पेस भी बीजेपी के पास ही रह जाए। स्वामी जी के इस भोलेपन पर कौन ना मर जाए? इसीलिए कहता हूँ कि राजनीति बहुत महीन चीज है। जो दिखता है, वो अंदर से होता नहीं।
15notes
सोशल मीडिया पर जाँच-परख के दोस्ती गाँठें
सोशल मीडिया पर जाँच-परख के दोस्ती गाँठें
Nadim Akhter 00:32
जो लोग सोशल मीडिया पर मुझे अपनी मित्र सूची में शामिल करना चाहते हैं, वे अगर
पहाड़, फूल, बादल, नदी, चिड़िया, तोता, मैना, शेर, बब्बर शेर, बन्दर, चिंपैंजी, भारत माता, गाय, बैल, सैनिक, सेना, इंडिया गेट, जामा मस्जिद, प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, मायावती, ममता बनर्जी, सुंदर कन्या, मैंचो मैन, फिल्मी सितारे, वारे-न्यारे, आदि-इत्यादि....
के फोटुक अपनी प्रोफाइल पिक में लगाएंगे तो उन्हें तुरन्त मैं फर्जी प्रोफाइल घोषित कर देता हूँ। अब सोशल मीडिया वो जगह नहीं रही कि आप चेहरा छुपाकर दोस्ती गांठने चलें। या तो आप खुद को बहुत चालाक समझते हैं या सामने वाले को महा-मूर्ख। बिना चेहरा दिखाए दोस्ती नहीं हो सकती। अभी हाल ही में एक -सुंदर- बालक पकड़ा गया, जो एक -कुरूप- कन्या की प्रोफाइल पिक लगाकर फेसबुक पर टहल रहा था और उसके 10 हज़ार फॉलोवर्स थे। इस देश की जनता भोली है, मैं नहीं, इसलिए मुझे झांसा देने की कोशिश ना करें। ऐसे फर्जी लोगों को सीधे उल्टा टांग देता हूँ।
बीच-बीच में अपनी मित्र सूची के लोगों को भी टटोलता रहता हूँ। अगर वहां भी संदेहास्पद गतिविधि दिखती है तो सीधे unfriend करता हूँ। सोशल मीडिया पे अपनी मर्ज़ी से हूँ, इसलिए यहां मैं किसी को झेलूँगा नहीं। चाहे वास्तविक दुनिया में वह मेरा कितना भी अजीज़ और प्रिय क्यों ना हो! ये सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का मेरा उसूल है। ये पब्लिक प्लेटफॉर्म है, इसलिए यहां अनुशासन की सख्त जरूरत है। अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आप fake news, गंदगी और नफरत फैलाएंगे, इसकी इजाजत अपनी वॉल पे मैँ नहीं देता। आप अपनी वॉल पे भी अगर रोबॉट की तरह समाज को तोड़ने वाली पोस्ट डालेंगे, तो भी मैं आपको हटा दूंगा अपनी मित्र सूची से।
इस दुनिया में पहले ही बहुत सारे टेंशन हैं, सो सोशल मीडिया का बेवजह तनाव मैं नहीं लेता। हां, अगर आप मेरी बात से इत्तेफाक नहीं रखते और वो आपको चुभती हैं तो आप बेशक खुद को मुझसे अलग कर लें। चॉइस आपकी है। मित्र कम हों या एक भी ना हों, मुझे फर्क नहीं पड़ता। इस दुनिया में अकेला आया था और अकेला जाऊंगा। किस्मत रही तो चार आदमी कांधा दे ही देंगे मेरी अंतिम यात्रा को। वैसे मैं यारों का यार हूँ और दुश्मनों का दुश्मन। मुझ जैसा दोस्त और मुझसे खतरनाक शत्रु आपको नहीं मिलेगा। जो मुझे नज़दीक से जानते हैं, उनको पता है कि अपना नुकसान करके दोस्ती का हक अदा किया है।
दुनियादारी का शिष्टाचार निभाने में यकीन नहीं रखता। अगर आप मित्र हैं और गलत करेंगे तो आपको टोकूंगा। इस दुनिया में दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता है, जिसे आप अपनी मर्जी से चुनते हैं। बीवी और शौहर तक मां-बाप चुन लें आते हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं। सो दोस्त कम रखिये, पर अच्छे रखिये। फेसबुक भी आपको ये चॉइस देता है। सोशल मीडिया कहने को आभासी दुनिया ज़रूर है पर यहां सबकुछ real यानी वास्तविक होता है। ऐसे माध्यम में दोस्तों का चुनाव सावधानीपूर्वक करें। मैं करता हूँ।
धन्यवाद
15notes
आख़िर क्या है पीएम मोदी के रात 8 बजे टीवी पर आने का राज !
आख़िर क्या है पीएम मोदी के रात 8 बजे टीवी पर आने का राज !
Nadim Akhter 09:14
"हमारे #प्रधानमंत्री #नरेंद्र #मोदी अगर न्यूमेरोलॉजी में यकीन रखते हैं तो उनको रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन का वक़्त बदल देना चाहिए "
Nadim S. Akhter
रात 8 बजे का राज़! : # Numerology का जितना मुझे ज्ञान है, उसके मुताबिक आठ (8) नम्बर ठीक नहीं। ये हर दिशा में #extreme पर जाता है। थोड़ा रहस्यमयी भी है। पब्लिक डीलिंग के लिए तो बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं। दो-दो जीरो ऊपर-नीचे बैठे हैं। मतलब गुड़-गोबर होने का पूरा रिस्क है।
सो हमारे #प्रधानमंत्री #नरेंद्र # मोदी अगर इस विद्या में यकीन रखते हैं तो उनको रात 8 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन का वक़्त बदल देना चाहिए। पिछले अनुभव देख लीजिए। पीएम ने क्या चाहा और जनता ने क्या कर डाला! # पीएम चाहें तो इस विद्या में पारंगत किसी गुणी व्यक्ति से सलाह ले सकते हैं।
आज आपको एक राज़ की बात बताता हूँ जो कई दिनों से मेरे दिमाग में है। पीएम मोदी के जन्म की तारीख 17 सितंबर है जिसका योग 1+7 यानी 8 आता है। सो हो सकता है कि # harmonic#
vibration के सिद्धांत का पालन करते हुए किसी विद्वान ने उनको 8 बजे का सुझाव दिया हो, जो एक तरह से ठीक है। पर इसमें एक पेंच है। पीएम का vibration भी 8 और रात 8 बजे भी वही ऊर्जा। दोनों मिलकर # physics के resonance टाइप इफ़ेक्ट पैदा करते हैं। अगर आप भौतिक विज्ञान पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि resonace यानी दो # frequency के मिलान से इतनी # ऊर्जाउत्पन्न होती है कि दुनिया के कई बड़े-बड़े पुल इसी से गिरे हैं। ठीक इसी तरह 8 नम्बर अगर 8 बजे ही बोले तो इसके विपरीत प्रभाव भी हो सकते हैं। वही #Resonance .
मैं numerology का कोई ज्ञाता नहीं, इसलिए इस पोस्ट को पढ़ने के बाद कृपया अपनी दशा-दिशा जानने के लिए मुझसे संपर्क ना करें। मोदी जी के बारे में ये एक # पैटर्न दिखा तो उसे बता दिया।
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नई दिल्‍ली, एजेंसियां। लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मसले पर चर्चा की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही हम लॉकडाउन को क्रमबद्ध ढंग से हटाने पर गौर कर रहे हैं लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जब तक हम वायरस पर कारगर कोई वैक्‍सीन या उपाय नहीं ढूंढ लेते हैं तब तक वायरस से लड़ने के लिए हमारे पास सबसे बड़ा हथियार सामाजिक दूरी ही है। प्रधानमंत्री के संबोधन से जुड़े हर अपडेट के लिए जुड़े रहें jagran.com के साथ...

LIVE PM Narendra Modi Address Nation High Lights-

कयासों का दौर शुरू

- पीएम नरेंद्र मोदी का यह संबोधन राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों से बात करने के ठीक अगले दिन होना है। पीएम के ऐलान को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्‍यादा कयास लॉकडाउन पर लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लॉकडाउन 4 को लेकर चर्चाएं तेज हैं।  



ममता बोलीं, आय के बारे में क्‍या

- पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री के साथ बैठकों के दौरान उम्मीदें हैं लेकिन हम हर बार खाली हाथ लौटते हैं। पिछले 2 महीनों से कोई आय नहीं हुई है लेकिन हमें केंद्र से कोई विकल्प नहीं मिल रहा है। हमें 52 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। कोरोना जारी रहेगा लेकिन आय के बारे में क्या...?

संबोधन से पहले गरमाई सियासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्‍यमंत्रियों के साथ बैठक में यह संकेत दे चुके हैं कि किसी भी सूरत में लॉकडाउन से धीरे धीरे चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलना होगा। पीएम मोदी ने राज्‍यों से इस बारे में एग्जिट प्‍लान मांगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई राज्‍य अभी लॉकडाउन हटाना नहीं चाहते हैं जबकि कुछ राहत पैकेजों की मांग कर रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ने कुछ आरोपों के साथ सियासी माहौल भी गरमा दिया है।

ममता ने लगाए गंभीर आरोप

- इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की वीडियो कॉन्‍फ्रेंस मीटिंग से नाखुश ममता बनर्जी का कहना है कि बैठक से बंगाल को कुछ हासिल नहीं हुआ और उन्‍हें खाली हाथ लौटना पड़ा है। ममता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल को केंद्र से उतना वित्‍तीय सहयोग नहीं मिला है जिनने का वह हकदार है।

ममता बनर्जी ने की यह पहल

- पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने लॉकडाउन-4 की अटकलों से पहले एलान किया है कि राज्‍य में रेड जोन को आगे तीन कैटिगरी (a, b, c) में बांटा जाएगा। पुलिस इन इलाकों को देखेगी। राज्‍य के कंटेनमेंट जोनों में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने राहत भरी जानकारी दी

- लॉकडाउन के चौथे चरण की अटकलों के बीच देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70 हजार को पार कर गई है। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70756 हो गई है जिसमें से 22454 ठीक हो चुके हैं। देश में अभी कोरोना के सक्रिय संक्रमितों की संख्या 46008 है। देश में कोरोना से 2293 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन ने एक राहत भरी जानकारी दी है कि देश में कोरोना से होने वाली मृत्‍युदर बाकी मुल्‍कों के लिहाज से बेहद कम है।

पांचवीं बार संबोधन

प्रधानमंत्री का राष्‍ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने सभी संबोधनों में देशवासियों से सहयोग की अपील की है। साथ ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई को और धारदार बनाने का आह्वान किया है। आइये संक्षेप में जानते हैं कि पीएम मोदी ने इससे पहले के संबोधनों में क्‍या बातें कही हैं।

पहले संबोधन में जनता कर्फ्यू की बात

प्रधानमंत्री ने पहली बार 19 मार्च 2020 की रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने सावधानियों का पालन करते हुए 22 मार्च (रविवार) को जनता कर्फ्यू की अपील की थी।

दूसरे संबोधन में लॉकडाउन का एलान

जनता कर्फ्यू की सपलता के बाद पीएम मोदी ने दूसरी बार 24 मार्च की रात 8 बजे देश को संबोधित करते हुए पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी।

तीसरे संबोधन में दीप जलाने की अपील

तीन अप्रैल को पीएम मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे पांच अप्रैल की रात नौ बजे कोरोना वॉरियर्स के लिए 9 मिनट का वक्त निकालें और घरों की बत्तियां बंद कर दीप, मोमबत्ती, टार्च, मोबाइल की फ्लैश लाइटें रोशन करें।

चौथे संबोधन में लॉकडाउन-2 का एलान

प्रधानमंत्री ने चौथी बार 14 अप्रैल को देशवासियों को संबोधित करते हुए तीन मई तक के लिए पूरे देश में लॉकडाउन-2 लगाए जाने की घोषणा की थी।

दिखेगी भविष्‍य की तस्‍वीर

प्रधानमंत्री का राष्‍ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। प्रधानमंत्री ने ‘दो गज की दूरी’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा था कि कई मुख्यमंत्रियों द्वारा रात में कर्फ्यू लगाने के लिए दिए गए सुझाव को मानने से निश्चित रूप से लोगों में सतर्कता की भावना फिर से पैदा होगी। ऐसे समय जब लॉकडाउन-3 खत्म होने में अब पांच दिन का समय ही बचा है... पीएम मोदी का यह संबोधन भविष्‍य की तस्‍वीर दिखाएगा। कोरोना से निपटने के लिए देश को लॉकडाउन-4 (Lockdown-4) की जरूरत है या नहीं और यदि है तो उसकी रूपरेखा और तस्‍वीर कैसी होगी... इस बारे में भी प्रधानमंत्री इशारा करेंगे।

अर्थव्‍यवस्‍था को गति देने की चुनौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करके भावी कदमों को लेकर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमें यह समझना होगा कि अब कोरोना से लड़ाई पहले ज्यादा केंद्रित होगी। आगे हमें इसके फैलाव को रोकना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग सभी ऐहतियाती कदमों का पालन करें। इस बातचीत में पीएम मोदी ने स्‍पष्‍ट संकेत दिया था कि अगले चरण में राहत तो दी जाएगी लेकिन लॉकडाउन एकदम से नहीं हटाया जाएगा। उन्‍होंने कहा था कि हमारे सामने बीमारी को रोकने के साथ साथ अर्थव्‍यवस्‍था को गति देने की गहरी चुनौती है।

जन से लेकर जग तक की नीति पर चलने के संकेत

पीएम मोदी के साथ बातचीत में ज्‍यादातर राज्‍यों के मुख्‍यमंत्री भी लॉकडाउन में एकमुश्‍त ढील देने के पक्ष में नहीं दिखे। वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि जन से लेकर जग तक की नीति पर आगे बढ़ना होगा। सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन के अगले दौर में ऑरेंज और रेड जोन में भी थोड़ी ढील दी जा सकती है। हालांकि आवागमन, मनोरंजन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम शुरू होने के लिए अभी इंतजार करना होगा। यही नहीं गांवों को संक्रमण से बचाने की भी एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में पीएम मोदी के इस संबोधन को बेहत खास माना जा रहा है।
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नोएडा, जागरण संवाददाता। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शहर में औद्योगिक इकाइयों व विकास योजनाओं का कार्य शुरू कर दिया गया है। प्राधिकरण ने 1150 उद्योग को लगभग 65,000 कर्मचारियों और श्रमिकों के साथ काम करने की अनुमति दी है। वहीं, 24 ग्रुप हाउसिंग 7000 श्रमिकों के साथ कार्य प्रारंभ कर सकेंगे। नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने बताया कि सोमवार को 1150 उद्योगों को संचालित करने की अनुमति दी गई है। जिससे 65000 श्रमिकों को काम मिलेगा। वहीं, 24 ग्रुप हाउसग के प्रोजेक्ट भी शुरू होंगे जहां 7000 श्रमिक कार्य करेंगे। इससे पूर्व नोएडा प्राधिकरण लगभग 850 औद्योगिक इकाइयों को चलाने की अनुमति दी गई। इन औद्योगिक इकाइयों में 57000 श्रमिक काम करेंगे। इसके अलावा 20 ग्रुप हाउसिंग बिल्डर परियोजनाओं को शुरू करने का निर्देश दिया गया था। यहां 3300 श्रमिक काम करेंगे। वहीं, एक दिन पहले 32 अन्य औद्योगिक और वाणिज्यिक परियोजनाओं को निर्माण कार्य शुरू करने की अनुमति दी गई है। इनमें 2200 श्रमिक काम करेंगे। इसके अलावा प्राधिकरण की 30 और परियोजनाओं को भी शुरू किया जाएगा। इन सभी स्थानों पर कोविड-19 के नियमों के अनुसार ही कार्य किया जाएगा।

572 निर्यातक औद्योगिक इकाइयों को संचालन की अनुमति

कोविड-19 का असर कम करने के लिए सरकार ने लॉकडाउन कर रखा है। इसका सर्वाधिक असर प्रदेश से किए जाने वाले निर्यात पर पड़ा है। उत्पाद फैक्टि्रयों में बना पड़ा है, आर्डर खरीदारों के पास पहुंच नहीं रहा है। इसलिए वह ऑर्डर रद कर रहे हैं। नुकसान के असर को कम करने के लिए शासन लगातार औद्योगिक इकाइयों को खोलने की अनुमति दे रहा है। सोमवार को भी कोविड-19 के नियमों का पालन कर 572 निर्यात इकाइयों को खोलने का निर्देश जारी किया गया।

इन नियमों का करना होगा पालन

परिसर के अंदर श्रमिकों को मास्क, सैनिटाइजेशन व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन।
कार्यस्थल पर थूकने व तंबाकू के सेवन पर प्रतिबंध।
इकाई न्यूनतम श्रमिकों द्वारा संचालित की जाएगी।
कार्य स्थल पर आने वाले श्रमिक की थर्मल स्क्री¨नग होगी।
प्रत्येक पाली के बाद कार्य स्थल को सैनिटाइज करना होगा।
किसी भी श्रमिक में लक्षण दिखने पर प्राधिकरण/प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना होगा।
इकाई को शुरू करने से पहले श्रमिकों का आरटी-पीसीआर टेस्ट आधार पर कराया जाए।
श्रमिक कंटेनमेंट जोन से नहीं आना चाहिए।
निर्देशों का पालन न होने या संक्रमित मिलने पर अनुमति स्वत: समाप्त हो जाएगी।
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नई दिल्ली, एएनआइ। देश में फैली कोरोना महामारी को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि हमारा रिकवरी रेट लगातार बेहतर हो रहा है। अभी हमारा रिकवरी रेट 31.7 फीसदी है। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में हमारी मृत्यु दर दुनिया में सबसे कम है। आज मृत्यु दर लगभग 3.2 फीसद है, कई राज्यों में यह दर इससे भी कम है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वैश्विक मृत्यु दर लगभग 7 से 7.5 फीसद के बीच है।

In the fight against #COVID19 our mortality rate is about the lowest in the world. Today the mortality rate is around 3.2%, in several states it is even less than this. Global fatality rate is around 7-7.5%: Union Health Minister Dr Harsh Vardhan https://t.co/rpJP0vyMIa" rel="nofollow

— ANI (@ANI) May 12, 2020
बता दें कि पूरे देश में कोरोना वायरस के लिए पुख्ता निगरानी तंत्र तैयार किया जा रहा है। इसके लिए हर जिले में हर हफ्ते कोरोना का 200 टेस्ट अनिवार्य रूप से होगा। खास बात यह है कि ये टेस्ट उन लोगों का किया जाएगा, जिनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं है। इससे हर जिले में आम लोगों के शरीर में कोरोना वायरस की मौजूदगी का तत्काल पता लगाया जा सकेगा और बाद में उसके नियंत्रण के लिए विशेष कदम उठाये जा सकेंगे। ध्यान देने की बात है कि देश के सभी जिलों में सर्दी-खांसी-जुकाम-बुखार जैसे कोरोना के लक्षण वाले मरीजों का कोरोना टेस्ट पहले से अनिवार्य रूप से किया जा रहा है।

देश में अब तक 2293 लोगों की गई जान

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70 हजार को पार कर गई है। देश में अब तक कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 70756 हो गई है। जिसमें से 22454 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है और देश में अभी कोरोना के एक्टिव संक्रमितों की संख्या 46008 है। देश में अभी तक कोरोना के कारण 2293 लोगों की जान जा चुकी है।
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नई दिल्ली, प्रेट्र। भारत से लगी सीमाओं पर चीन अकारण तनाव पैदा करने की हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। लद्दाख में अतिक्रमण के विफल प्रयास के बाद अब चीनी हेलीकॉप्टरों ने इसी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बेहद समीप उड़ान भरी।

हालांकि भारतीय वायुसेना के सुखोई लड़ाकू विमानों ने इन हेलीकॉटरों को खदेड़ दिया। पूर्वी लद्दाख में बीते हफ्ते भी चीनी सैनिकों ने घुसने की कोशिश की थी। इस पर दोनों ओर के सैनिकों के बीच धक्का-मुक्की हो गई थी। इसमें कई सैनिक घायल हो गए थे। इसी तरह की घटना सिक्किम सीमा पर भी हुई थी।

पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग लेक इलाके में गत पांच मई को हुई हिंसक झड़प के चलते अब भी तनाव का माहौल है। हालांकि इस घटना के अगले ही दिन दोनों देशों के स्थानीय कमांडरों के बीच हुई बैठक में तनातनी को खत्म करने को लेकर सहमति बनी थी।

सूत्रों ने बताया कि इलाके में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद ही चीनी सैन्य हेलीकॉप्टरों को एलएसी के समीप उड़ते देखा गया। वे सीमा के बेहद करीब आ गए थे। इनकी भनक लगते ही भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 लड़ाकू विमान पहुंच गए और हेलीकॉप्टरों को खदेड़ दिया। उन्होंने कहा कि चीनी हेलीकॉप्टर नियमित रुप से अपने क्षेत्र में उड़ान भरते रहते हैं। भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर भी अपने क्षेत्र में उड़ते हैं।

पूरी रात रही टकराव की स्थिति

पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग लेक के उत्तर छोर पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच तकरीबन पूरी रात टकराव की स्थिति बनी रही थी। दोनों ओर के करीब ढाई सौ सैनिक एक-दूसरे के सामने आ गए थे। इस दौरान दोनों ओर के सैनिकों में धक्का-मुक्की और पथराव भी हुआ। इसमें दोनों देशों के कई सैनिक जख्मी हो गए। इस घटना के बाद दोनों तरफ से अतिरिक्त टुकडि़यां भी बुला ली गई थीं।

सिक्किम में भी सैनिकों में हुई झड़प

भारत और चीन के सैनिकों के बीच गत शनिवार को सिक्किम के नाकु-ला इलाके में झड़प हुई थी। यहां चीन के कुछ सैनिक भारतीय सीमा में दाखिल हो गए थे। भारतीय सैनिकों ने इसका विरोध किया। देखते ही देखते दोनों देशों के करीब डेढ़ सौ सैनिक एक-दूसरे के सामने आ गए। इस तनातनी ने पथराव का भी रुप ले लिया था। इस टकराव में दोनों तरफ के करीब दस सैनिक मामूली रुप से घायल हो गए थे।

डोकलाम में 73 दिन रही तनातनी

वर्ष 2017 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच डोकलाम (भूटान) में 73 दिनों तक तनातनी रही। इस दौरान दोनों ओर की सेनाएं एक-दूसरे के सामने कुछ सौ मीटर पर तैनात थीं। दोनों देशों में युद्ध की आशंका तक गहराने लगी थी। इस घटना के बाद अप्रैल, 2018 में चीन के वुहान शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की पहली अनौपचारिक बैठक हुई थी।

इसमें दोनों नेताओं ने भरोसा और समझ बढ़ाने के लिए बातचीत को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी सेनाओं के लिए स्ट्रेटजिक गाइडेंस जारी करने का फैसला लिया था। गत वर्ष तमिलनाडु के मामल्लपुरम में भी मोदी और चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई थी।
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नई दिल्ली, पीटीआई। भारतीय रेलवे ने कोरोना लॉकडाउन (Corona Lockdown) के के बीच मंगलवार से ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया है। ये ट्रेनें नई दिल्ली से राजधानी एक्सप्रेस के 15 रूटों पर चलाई जा रही हैं। इस बीच रेलवे ने आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप को अनिवार्य कर दिया है। सोमवार को रेलवे ने विशेष ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को अरोग्य सेतु ऐप को डाउनलोड करने की सलाह दी थी। हालांकि, अधिकारियों ने उन यात्रियों को यात्रा से इंकार नहीं किया है जिनके मोबाइल फोन में ऐप इंस्टॉल नहीं है।

दिल्ली और देश के प्रमुख शहरों के बीच चलने वाली 15 जोड़ी विशेष रेलगाड़ियों के लिए रेलवे द्वारा जारी दिशानिर्देशों में यह नहीं कहा गया है कि मोबाइल ऐप इंस्टॉल करना अनिवार्य है, देर रात (12:24 बजे) रेल मंत्रालय के ट्वीट कर ऐप को अनिवार्य कर दिया है।

ट्वीट में कहा गया है, 'भारतीय रेलवे कुछ यात्री ट्रेन सेवाएं शुरू करने जा रहा है। यात्रियों को अपनी यात्रा शुरू करने से पहले अपने मोबाइल फोन में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य है।' रेलवे के प्रवक्ता आरडी बाजपेयी ने पुष्टि करते हुए कहा है कि ऐप यात्रा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा किऑनलाइन टिकट बुक करने के लिए मोबाइल फोन नंबर भी अनिवार्य है, इसलिए सभी यात्रियों को अपने साथ मोबाइल फोन ले जाना होगा।

उन्होंने कहा किआरोग्य सेतु ऐप को इंस्टॉल करने के बाद ही यात्रियों को स्टेशन पर आना होगा और यह यात्रा के लिए अनिवार्य भी है। रेलवे ने इसे अनिवार्य कर दिया है और यात्रियों को अपनी सुरक्षा के लिए इसे इंस्टॉल करना चाहिए। चूंकि सभी यात्री मोबाइल फोन रखते हैं, इसलिए यह एक मुद्दा नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, हम यात्रियों को ऐप का उपयोग करने के लिए आवश्यक सभी सहायता प्रदान करेंगे।

अधिकारियों ने हालांकि कहा कि अगर किसी यात्री के पास मोबाइल फोन नहीं है, तो केस-टू-केस आधार पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह संभव नहीं है कि राजधानी ट्रेन में यात्रा करने वाले किसी व्यक्ति के पास फोन नहीं होगा।

बाजपेई ने कहा कि हमने प्रवासियों के लिए विशेष ट्रेनों पर इस ऐप को अनिवार्य नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जिन यात्रियों के मोबाइल फोन पर ऐप इंस्टॉल नहीं है, उन्हें स्टेशन पर आने के बाद ऐसा करने के लिए कहा जा सकता है।
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नई दिल्‍ली (जेएनएन)। उत्‍तराखंड से लगती चीन की सीमा पर जब से भारत ने सड़क बनाई है तब से ही चीन की आंखों में वो कांटे की तरह चुभ रही है। इस सड़क के उद्घाटन के बाद चीन ने भारतीय राजदूत को तलब कर अपना विरोध भी जताया, लेकिन चीन का ये रवैया न तो नया ही है और न ही ऐसा है जिसको पहली बार देखा जा रहा है। गर्बाधार-लिपुलेख सड़क के बनने से भारत की सामरिक ताकत बढ़ी है। इसके बाद चीन के सैनिकों द्वारा दो बार भारतीय सीमा में घुसकर हाथापाई भी की गई। इसके बाद सवाल ये उठता है कि उसने ऐसी हरकत क्‍यों की, जबकि भारत ने अपनी ही सीमा के अंदर सड़क निर्माण किया था।

इस तरह की कार्रवाई की सबसे बड़ी वजह तो ये ही है कि चीन हमेशा से ही अपनी विस्‍तारवादी नीति की अगुआई करता रहा है। चीन के अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद हैं। इसके अलावा ताइवान को लेकर भी उसका विवाद है और दक्षिण चीन सागर विवाद को भी पूरी दुनिया भलीभांति जानती है।

चीन की इस गीदड़ भभकी को जानकार अपने यहां के वर्तमान हालातों से लोगों का ध्‍यान भटकाना मानते हैं। चीन मामलों के जानकार और किंग्‍स कॉलेज, लंदन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत मानते हैं कि एक तरफ जहां पूरी दुनिया कोरोना के कहर से निकलने की कोशिश में जुटी है तो दूसरी तरफ चीन बड़ी तेजी से इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। ताइवान हो या दक्षिण चीन सागर सभी जगहों पर उसकी गतिविधियों और उसकी धमकियों में तेजी आई है। यही चीन भारत से लगती सीमा पर भी दिखाई दे रही है।

उनके मुताबिक, सीमा पर जब भी कभी कोई सड़क बनाई जाती है तो प्रोटोकॉल का इस्‍तेमाल किया जाता है और पड़ोसी देश को उसकी पूर्व सूचना भी दी जाती है। हालांकि, ये भी एक सच्‍चाई है कि इसको लेकर विरोधी देश हमेशा ही डिप्‍लोमैटिक माध्‍यम से अपना विरोध दर्ज कराता है। वहीं, दूसरा देश अपना काम करता जाता है। जहां तक चीन की बात है तो वह बखूबी जानता है कि वर्तमान में जब उसके यहां पर कोरोना के मरीजों और इससे हुई मौतों की संख्‍या पर सवाल उठ रहे हैं तो ये जरूरी हो जाता है कि लोगों का और दुनिया का ध्‍यान यहां से भटकाया जाए। चीन फिलहाल वही कर रहा है।

उनका कहना है कि चीन इससे पहले डोकलाम में भी भारत को आंख दिखाने की कोशिश कर चुका है। सिक्किम और नगालैंड को भी वो अपना हिस्‍सा बताता रहा है और यहां पर होने वाले निर्माण का विरोध करता रहा है। प्रोफेसर पंत मानते हैं कि उसकी ये गीदड़ भभकी ज्‍यादा लंबे समय तक दिखाई नहीं देगी और वो खुद ही शांत भी हो जाएगा। इसके बावजूद भारत को हर वक्‍त चीन से सतर्क रहने की जरूरत होगी। उनके मुताबिक, चीन द्वारा की जा रही ये कवायद पीएलए का एजेंडा है और चीन हमेशा से ही इस तरह की गतिविधियों के लिए इसका इस्‍तेमाल करता रहा है।

उनके मुताबिक, चीन-भारत के बीच कुछ सीमा पर वास्‍तव में जमीन पर कोई लकीर नहीं है। इसकी वजह से भी कभी-कभी दोनों देशों के बीच गतिरोध की खबरें आती रहती हैं। उनका ये भी मानना है कि थोड़ा-बहुत गतिरोध दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर तब तक चलता रहेगा, जब तक ये सीमा का सही निर्धारण दोनों देशों की सहमति से नहीं हो जाता है। इसके बाद भी भारत को अपनी सीमा के अंदर हर तरह का निर्माण करने का अधिकार है।

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लखनऊ, (कुमार संजय)। लतिका मिश्रा ने अपने पैर पर खडो होने पर घर का सहारा बनने के लिए जीएनएम का डिप्लोमा किया। पिता ने डिप्लोमा कराने के लिए एक बीघा खेत भी बेचा । पढाई पूरी होने के बाद दो साल तक कही कोई जांब नहीं मिला। एक नर्सिंग होम में तीन हजार में 12 से 15 घंटे का काम मिला। इसी बीच एक संस्थान में आउटसोर्सिग में नौकरी मिली लेकिन सेलरी 15 हजार ऐसे में खुद का खर्च निकाल पाना ही संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थित केवल एक लतिका की नही है । हजारों है जिन्होंने नर्सिग में डिप्लोमा किया लेकिन पाच से सात हजार में नौकरी करने को मजबूर है।

पीजीआई नर्सिग एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा शुक्ला कहती है कि प्रदेश में केवल 13 हजार सरकारी नौकरी है जो फुल है। जब जरूरत नहीं है तो डिप्लोमा क्यों कराया जा रहा है। मेडिकल विवि, लोहिया , पीजीआइ सहित तमाम निजि संस्थान बीएससी नर्सिग और जीएनएम करा कर बेरोजगार ट्रेड नर्सेज की फौज खडी कर रहे हैं। इस प्रोफेशन में सबसे अधिक लड़कियां है । टीएनआई के सदस्य डा. अजय कुमार सिंह का कहा कि मेडिकल प्रोफेशन में डिप्लोमा करने के मामले में 13.7 फीसदी लड़कियां है । उत्तर प्रदेश में एक लाख पांच 263 नर्स पंजीकृत है । सरकारी क्षेत्र के पीएमएस में लगभग 10 हजार और चिकित्सा शिक्षा में तीन हजार नौकरी है । इस तरह कुल तेरह हजार नौकरी है । इससे साफ है कि पंजीकृत हजारों नर्सेज बेरोजगार है लेकिन प्रदेश में ट्रेनिंग लगातार जारी है।

हर साल 18 हजार तैयार हो रही है ट्रेंड नर्सेज

हर साल उत्तर प्रदेश के नर्सिग कालेजों से 18 हजार 743 नर्सेज ट्रेंड होकर निकलती है साल-दर –साल संख्या बढ़ती जा रही है । ट्रेंड नर्सेज डा. अजय सिंह कहते है कि नर्सेज पांच –सात हजार में काम करने के लिए मजबूर हो रही है। इस पेशे में 90 फीसदी लड़कियां है जिनका शोषण हो रहा है। मजे की बात यह है कि इस तेजी से निजि नर्सिग कालेजों की संख्या बढी है। नर्सिग काउंसिल आफ इंडिया के अनुसार के वर्ष 2018 में सरकारी क्षेत्र के केवल 8 और निजि क्षेत्र 272 नर्सिग कालेज थे

ट्रेंड नर्सेज की कमी बता कर किया जाता रहा है गुमराह

ट्रेंड नर्सेज की भारी कमी है लेकिन हकीकत कुछ और है कमी होती तो आउट सोर्स पर काम करने के लिए नर्सेज कैसे मिलती। मानक के अनुसार प्रदेश में 500 की संख्या पर एक नर्स की तैनाती होनी चाहिए इस तरह चार लाख नर्सज की तैनाती होनी चाहिए लेकिन मानक के अनुसार तैनाती न कर ट्रेंड नर्सेज को शोषण के लिए छोड़ दिया गया।

प्रदेश से पंजीकृत नर्सेज को मिले प्राथमिकता

प्रदेश के किसी भी संस्थान या उपक्रम में पहले प्रदेश से पंजीकृत नर्सेज को प्राथमिकता दे कर ही प्रदेश से ट्रेंड नर्सेज को समायोजित किया जा सकता है। सीमा शुक्ला का कहना है कि नर्सेज का शोषण सरकारी संस्थानों में आउट सोर्सिंग के जरिए तैनाती कर हो रहा है। इनके छुट्टी का पैसा भी काट लिया जाता है।


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कानपुर, [विक्सन सिक्रोड़िया]। अब नैनो फाइबर की मार से कोरोना वायरस का खात्मा हो जाएगा। आइआइटी के पूर्व पीएचडी छात्र ने प्रोफेसर व वैज्ञानिकों की मदद से ऐसा पांच लेयर वाला मास्क तैयार किया है, जिसके संपर्क में आने के चंद सेकेंड के अंदर वायरस और बैक्टीरिया दम तोड़ देंगे। यह मास्क डॉक्टरों और आमजन के लिए तो बेहद उपयोगी होगा, इसके साथ ही रोगी के इलाज में भी बेहद कारगार साबित होगा।



परीक्षण में पास हुआ मास्क, कीमत अभी तय नहीं

आइआइटी के पूर्व पीएचडी छात्र डॉ. संदीप पाटिल ने यह शक्तिशाली मास्क डॉ. शिवा कुमार, डॉ. मनीष कुलकर्णी, डॉ. प्रभात द्विवेदी, डॉ. राजा अंगमत्थू व डॉ. टीजी गोपाकुमार के साथ मिल कर तैयार किया है। परीक्षण में मास्क खरा उतरने के बाद अब स्टार्टअप कंपनी ई स्पिन नैनोटेक इसके निर्माण की तैयारी में जुट गई है। मास्क के तीन महीने में बाजार में आने की संभावना है। हालांकि इसकी कीमत अभी तय नहीं की गई है।

नैनो फाइबर के हथियार से वार

यह मास्क पावरफुल नैनो फाइबर से बैक्टीरिया व वायरस का सफाया करेगा। इसमें नैनो फाइबर चार्ज पार्टिकल के एक्टिव एजेंट होंगे, जो बैक्टीरिया ववायरस का खात्मा कर देंगे। जैसे सैनिटाइजर व साबुन से बैक्टीरिया व वायरस खत्म हो जाते हैं, उसी प्रकार नैनो फाइबर के संपर्क में आते ही वह मर जाएंगे। ऐसे में मास्क के जरिए बैक्टीरिया और वायरस घर नहीं आएंगे।



हर लेयर बेहद कारगर, एक माह होगी मियाद

केमिकल इंजीनियरिंग नैनो टेक्नोलॉजी से पीएचडी करने वाले डॉ. संदीप पाटिल ने बताया कि पांच लेयर के इस मास्क में पहली लेयर धूल को रोकेगी, दूसरी बारीक कणों से बचाएगी, तीसरी अतिसूक्ष्म कणों को शरीर में पहुंचने से रोकेगी, चौथी नैनो फाइबर लेयर होगी जो बैक्टीरिया व वायरस को मारेगी। इसके अलावा पांचवीं लेयर सपोर्टिंग लेयर होगी जो मास्क को करीब महीने भर तक सुरक्षित रखने में मददगार होगी।



डॉक्टरों के लिए मददगार, रोगी के लिए बेहद उपयोगी

डॉ. संदीप ने बताया कि यह मास्क डॉक्टरों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा क्योंकि वह लगातार मरीजों के संपर्क में रहते हैं। इससे वह कोरोना संक्रमण से बचे रहेंगे, वहीं आम लोग भी सुरक्षा के लिहाज से इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। वहीं रोगी के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा, इसे इस तरह समझ सकते हैं जब रोगी के खांसने पर मुंह से बाहर आने वाले ड्रॉप लेट्स मास्क के संपर्क में आएंगे तो चंद सेंकेंड में खत्म हो जाएंगे। इस तरह वह वापस मुंह के अंदर नहीं जा सकेंगे और संक्रमण बढ़ने का खतरा कम होने से जल्दी स्वस्थ होंगे।
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