Story 77

साहब बीवी और गुलाम की चुदाई की कहानी

12-05-2020 by दिल्ली बॉय

आज की सेक्स कहानी बिल्कुल अलग सी है. एक 24 वर्षीय लड़का एक विवाहित युगल के बीच में फंस जाता है. फिर सेक्स का क्या सीन बना, आज आप उस रस का मजा लीजिएगा.

मैं अभिषेक 24 साल का हूं और नोएडा में गार्ड की नौकरी करता हूं. ये सेक्स कहानी अभी कुछ दिन पहले ही शुरू हुई.

जिस घर के बाहर मैं गार्ड की ड्यूटी करता था, वहां मेरे अलावा अन्य लोग भी काम करते थे. ये घर शर्मा जी का था, जो किसी कंपनी में कार्यरत थे और उनकी पत्नी भी जॉब करती थीं. काफी रईस परिवार था मगर उनका कोई बच्चा नहीं था.

ये दोनों 30 साल से ज्यादा के नहीं लगते थे. हमारी मैडम काफी सुंदर थीं, उनकी चूचियां बड़ी मोटी और भरी हुई थीं जबकि गांड सामान्य से कुछ ज्यादा ही उभरी हुई थी. कद की बात करूं तो वे दोनों ही लंबाई में दोनों सामान्य ही थे.

बात तब की है, जब मुझे उनके घर में काम करते हुए 4 महीने से ज्यादा हो गए थे. बाकी के स्टाफ से मेरी बातचीत होती रहती थी. मुझे उनके एक नौकर ने बताया कि वो कई सालों से यहां कार्यरत है. मैंने उससे मैडम के बारे में जानने की कोशिश की, तो उसने बताया कि मैडम काफी सेक्सी हैं और उन्होंने मेरे साथ भी काफी बार चुदाई करवाई है.

उसकी बात सुनकर मैंने कहा- क्या मैडम मेरे साथ भी सेक्स करेंगी?
वो हंस कर बोला- तू अभी नया है इसलिए तेरे ऊपर अभी मैडम की नजर नहीं गई. वरना तेरे जैसे मुर्गे को तो मैडम अब तक कभी का हलाल कर देतीं.

उससे मैं बातचीत में काफी खुल गया था और इसी तरह के बातें हम दोनों अक्सर बात करते रहते थे.

फिर कुछ एक हफ्ते बाद मैडम और मालिक काफी रात को घर आए थे, तो मैंने गेट खोला.

उन्होंने अन्दर प्रवेश किया. मैंने देखा कि मैडम गाड़ी चला रही थीं.

फिर मैडम ने मालिक की तरफ का गेट खोलते हुए मुझे पास आने का इशारा किया.

मैंने साहब को नशे में धुत्त देखा तो समझ गया कि मैडम मुझे किस लिए बुला रही थीं. मैं मैडम के साथ मालिक को पकड़ कर उनके कमरे तक छोड़ने गया, फिर वापस आ गया और गेट बन्द करके अपने कमरे में बैठ गया.

कुछ देर बाद मैडम मेरे पास आईं. मैं उन्हें पास आते देख कर एकदम से खड़ा हो गया.

मैडम मुझसे देखते हुए बोलीं- तुम्हारा नाम क्या है?
मैंने हिचकिचाते हुए अपना नाम बताया- ज..जी मैडम अ..अभिषेक.
मैडम बोलीं- ठीक है … गेट लॉक कर दो … अब कोई नहीं आएगा और तुम अन्दर आ जाओ.

मैं गेट बंद करके घर में अन्दर गया और मैडम के कमरे के बाहर से देखने लगा. उनका कमरा काफी सजाया हुआ था और बेड पर मालिक लेटे हुए थे.

मैडम ने बोला- अभिषेक, तुम कुछ खाओगे?
मैंने गर्दन हिलाकर ना कर दिया.

मैडम मेरे पास आ गईं. मुझे उनके मुँह से शराब की महक आ रही थी. उन्होंने बिना कुछ सोचे मुझे पागलों की तरह किस करना शुरू कर दिया. मैं पहले तो सकपका गया … मगर जब मैडम मुझे एकदम चुदासी सी चूमने लगीं, तो मुझे अपने उस साथी की बात याद आ गई जिसने मुझे बताया था कि मैडम को अलग अलग मर्दों के लंड लेने का शौक था. बस ये याद करते ही मैं भी उन्हें किस करने लगा.

वो मेरे होंठों को चूसते हुए मेरी छाती पर हाथ रख कर सहलाने लगीं. कुछ ही पलों बाद मैडम ने मेरी पेंट की ज़िप खोल दी और अन्दर हाथ डाल दिया. मेरा लंड भी एकदम से खड़ा होने लगा था. मैडम ने मेरा लंड पकड़ लिया, जो उनके हाथ के स्पर्श से कुछ ज्यादा ही तनाव में आने लगा.

मैडम ने अपने हाथ में मेरे बड़े और मोटे लंड का स्पर्श पाया, तो वो लंड को हिलाते हुए नीचे बैठ गईं. फिर मैडम ने पेंट की जिप से लंड बाहर निकाला और मुँह में डाल कर चूसने लगीं.

लंड को मैडम के मुँह की गर्मी मिलनी शुरू हुई तो मुझे भी मज़ा आने लगा. मैं भी मैडम के सिर पर हाथ रख कर दबाने लगा. मैडम कुल्फी की तरह मेरा लौड़ा चूसती रहीं.

थोड़ी ही देर में मेरा लंड नशे में पागल हो गया और उसने पानी छोड़ दिया. मैडम ने पानी का पता ही नहीं चलने दिया … वो पूरा रस पी गईं.

फिर मैडम ने नशीली आंखों से मुझे देखा और मेरा लंड छोड़ कर गांड मटकाते हुए सोफे पर बैठ गईं.

वे अपनी जींस उतार कर मुझे करीब आने का इशारा करते हुए बोलीं- अब इसको चूसो.

मैंने जमीन पर घुटने मोड़ कर उनकी पैंटी को नीचे खींच दिया और चूत को दोनों हाथों की उंगलियों से महसूस करने लगा. मेरे अब तक के जीवन में मेरा ये पहला चूत का स्पर्श था.

मैडम ने टांगें फैलाते हुए कहा- अभी अपनी जीभ से इसे चाटो.

मैंने मुँह को उनकी चूत पर रखा और जीभ से मैडम की चुत चाटने लगा. वो सिसकारियां भरने लगीं. उनकी चूत पहले ही रस छोड़ चुकी थी. इस समय वो बिल्कुल गीली थी. मैं मैडम की चूत चाटता रहा और मैडम मस्त आवाज निकाल कर कामुक सिसकारियां भरती रहीं.

मैडम ने दस मिनट बाद फिर से पानी छोड़ दिया और मेरा सिर अपनी मोटी जांघों में जकड़ लिया. मैं मैडम की चुत का पानी चाटता रहा. पर पूरा नहीं चाट सका.

अब मैडम शांत हो गई थीं और एक मिनट तक मुझे जाँ

घों में दबाए मुर्गी की तरह दबोचे रहीं. फिर उन्होंने मेरे सर को आजाद किया और अपनी कुर्ती को उठा कर चूची की तरफ इशारा किया.

मैं समझ गया और मैंने मैडम की ब्रा को हाथों से पकड़ लिया. उनकी दोनों चूचियां मेरे हाथों में नहीं आ रही थीं … शायद मैडम की चूचियां 38 या 40 की साइज की रही होंगी.

मैंने मैडम की नाभि पर किस किया, तो मैडम सोफ़ा पर आगे की तरफ झुक गईं और मेरे दोनों कंधों पर अपने हाथ रख दिए. मैंने कमर के पीछे हाथ ले जाकर मैडम की ब्रा का हुक खोल दिया और उनके हाथ में से ब्रा को खींच कर ढीला कर दिया.

अब मैडम ने खुद ही अपनी ब्रा उतार दी. मैंने मैडम के मोटे मोटे चूचे चूसने शुरू कर दिए, तो मैडम मस्त हो गईं और मुझे सहलाने लगीं. मुझे सबसे मस्त अहसास मैडम के चूची चूसने में हुआ.

मैं शायद 15 मिनट या उससे भी ज्यादा मैडम के मोटे मोटे चूचे चूसता रहा. मेरा काफी सारा थूक भी मैडम के चूचियों पर लग गया था.

फिर मैडम अंग्रेजी में कुछ बोलीं … मुझे ज्यादा समझ नहीं आया … पर मैंने उनके बोलने के बाद अपने लौड़ा देखा, तो वो आकार बदल कर तनाव में आ गया था.

मैंने अपने कपड़े उतार दिए और लौड़ा हाथ में पकड़ लिया.

मैडम ने टांगें उठाते हुए बोला- इसे अन्दर डालो.
ये कहते हुए वो सोफे पर सीधी पसर गईं.

मैं उनके ऊपर चढ़ गया और अपना लौड़ा उनकी चुत के अन्दर डाल दिया और धीरे धीरे हिलाने लगा.

पता नहीं मैडम को क्या हुआ, उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और मैं उनके ऊपर गिर गया. उन्होंने एकदम से मुझे पलट कर अपने नीचे कर दिया. पहले तो मुझे लगा कि मैं नीचे गिर जाऊंगा, पर सोफ़ा काफी बड़ा था, तो मैं आराम से मैडम के नीचे आ गया.

मैडम मेरे ऊपर चढ़ गई थीं. इस प्रक्रिया में मेरा लौड़ा चुत के अन्दर ही घुसा रहा था. फिर मैडम ने लंड चुत में एडजस्ट किया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया. वो तेजी से धक्के लगाने लगीं.

मुझे बड़ा मजा आने लगा था. साला बिना मेहनत के चुत चुद रही थी. कुछ देर बाद मैडम मेरे लंड पर पूरी तरह से बैठ गईं और अब जो उन्होंने लंड पर कूदना शुरू किया तो मैडम ने तो समझो पूरा सोफ़ा ही हिला डाला. मेरे लंड ने भी उनका साथ दिया और उछलती चुत में अड़ा रहा.

फिर मैडम एक लम्बी चुदाई के बाद झड़ गईं और मैं भी उनके बाद ज्यादा देर नहीं टिक सका.

चुदाई के बाद मैंने उठ कर अपने कपड़े पहने और अपने बाहर वाले गार्ड रूम में आ गया.

मैं सुबह तक मस्ती से सोया. सुबह जब मैं उठा, तो घर के बाकी नौकर भी आ गए थे. मेरा वो दोस्त भी आ गया था.

उसने मेरा खिला हुआ चेहरा देखा, तो उसने मुझसे रात के बारे में पूछा. मैंने उसे आंख मार दी और वो समझ गया कि मेरे लंड ने मैडम की चुत के दरिया की डुबकी लगा ली है.

कुछ देर बाद मेरी ड्यूटी खत्म होने का टाइम हो गया और मैं घर चला गया.

पूरा दिन ऐसे ही बीत गया. रात को 8 बजे मैं फिर से ड्यूटी पर गया, तो मुझे पता चला कि घर में कोई नहीं है. मैंने सोचा आज फिर मैडम की चूत बजाने का मौका मिलेगा. मैं मैडम के मोटे चूचे और मोटी गांड की कल्पना में डूब गया.

रात में कल के जैसे कोई 11 बजे मालिक की गाड़ी आ गई. मैंने गेट खोला, तो मैडम ने मुझसे कहा- अभि, तुम गेट लॉक करके अन्दर आ जाना.

मैंने गेट बंद किया और वापस मुड़ कर देखा. आज मालिक अपने आप उतर कर जा रहे थे, ये देख कर मेरा मूड खराब हो गया और खड़ा लौड़ा सो गया.

फिर भी मैं हिम्मत करके अन्दर गया, तो मैडम ने कहा- अभि, आज हम तीनों साथ में करेंगे.

मेरी गांड फट गई कि आज नौकरी गई.

लेकिन मालिक ने मुस्कुराते हुए उनका साथ दिया … तो मुझे राहत की सांस आई.

मालिक ने कमरे में आने का इशारा किया, तो मैं उन दोनों के पीछे पीछे कमरे में घुस गया.

मालिक ने अपने कपड़े उतार दिए और अपने लौड़े को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगे. मैडम ने भी अपने कपड़े उतार दिए. मैंने भी अपनी वर्दी उतार दी और मैडम ने मेरा लंड पकड़ लिया और बैठ कर चूसने लगीं. मैंने देखा साहब का लंड मुझसे काफी छोटा था.

मैंने पूछा- मैडम मालिक का लंड तो काफी छोटा है.
मैडम बोलीं- हां, इनका तो अन्दर ही नहीं जाता.

मैं चुप हो गया.

मैडम बोलीं- अभि, आज तुम ऊपर लेट कर करो.

नंगी मैडम बेड पर चित लेट गईं. मैं मैडम के ऊपर चढ़ गया और अपना लौड़ा मैडम की चुत के अन्दर डाल कर धक्के लगाने शुरू कर दिए.

तभी मालिक ने मेरे पीछे आ कर मेरी गांड में अपना लौड़ा घुसा दिया. मैं एकदम से कलप गया और रुक गया.

मैडम ने मेरी हालत समझी और मेरी कमर पकड़ कर खुद नीचे से धक्के लगाने लगीं.
उधर पीछे से मालिक मेरी गांड में धक्के लगा रहे थे.
मैडम बोलीं- अभि डरो मत … वो दो मिनट में झड़ जाएंगे.

मालिक मेरे ऊपर लेट से गए और तेज तेज धक्के लगाने लगे. नीचे से मैडम हिलती रहीं. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था … पर इस सैंडविच चुदाई में मज़ा आ रहा था. कुछ देर बाद मालिक ने अपना पानी मेरे गांड में निकाल दिया और मेरे ऊपर गिर गए.

तभी मैडम बोलीं-

जल्दी उठो यार … तुम तो झड़ गए … अब हम दोनों को तो करने दो.

मालिक तुरंत हाफते हुए उठ कर बेड पर लेट गए. मैंने मैडम की चुदाई फिर से शुरू कर दी. वो बड़ी मस्त आवाज निकाल कर चुदवा रही थीं. मैं भी पूरे जोश में उनको चोद रहा था.

फिर मैंने अपना पानी मैडम के अन्दर निकाल दिया. उसी समय मैडम भी झड़ कर मुझसे चिपक गईं.

अब मैं खड़ा होकर अपनी गांड को हाथ से देखने लगा.

मैडम हंस कर बोलीं- अभि अभी रुक जाओ … मैं टिशू पेपर से साफ कर देती हूं. इनका तुम्हारी तरह अन्दर तक नहीं जाएगा.
फिर मैडम ने अपनी चूत और मेरी गांड दोनों साफ कर दिया.

अब मैडम और मालिक के साथ ये बीच वाला सेक्स हफ्ते में दो तीन बार हो ही जाता है. बाद में मुझे मैडम ने बताया कि वे मेरे वीर्य से पेट से हो गई हैं.

मैंने उनकी तरफ हैरानी से देखा तो बोलीं- बस मुझे तुम पसंद आ गए थे. इसलिए ये बच्चा तुम्हारा ही है. यदि लड़का हुआ तो इसका नाम भी अभिषेक ही रखूंगी.

मैं खुश हो गया. मैडम भी मुझसे खुश थीं. मैं उनकी खूब सेवा करता था. अब तो मैं मैडम के बगल वाले कमरे में ही रहने लगा था.

दोस्तो, कैसी लगी मेरी चुदाई की कहानी … मुझे मेल करके जरूरी बताना

शादी से पहले मेरी चूत चुदाई की कहानी

29-12-2019 by रश्मि त्यागी

मेरी चूत चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैंने कैसे पहली बार अपनी चूत और गांड चुदवाई? शादी से पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज का! मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था.

मेरा नाम रश्मि है। मैं दिल्ली में रहती हूं 28 साल की औरत हूं मेरी शादी हो चुकी है।

यह कहानी मेरी पहली चूत चुदाई की कहानी है अंतर्वासना पर जब मेरी शादी नहीं हुई थी मेरा एक बॉयफ्रेंड था कॉलेज के टाइम का मैं कैसे उसे अपनी चूत और गांड चुदवाती थी आज मैं वही आपको बताऊंगी मेरा बॉयफ्रेंड मेरी सारी ख्वाहिश पूरी करता था तो मैं भी उस पर जान छिड़कती थी।

तब मेरी उम्र 21 साल के आसपास थी मेरा सेक्स करने का बहुत मन करता था मैं वासना से एकदम भरी हुई रहती थी उसने मुझे पटा लिया.
मुझे खुद भी पता नहीं चला कि कब मैं उस उससे पट गई और उसकी बातों में आ गई क्योंकि वह बातें इतनी अच्छी-अच्छी करता था मेरी उससे फोन पर घंटों बात होती थी.

एक बार उसने मुझे होटल में मिलने के लिए कहा. शुरू में मुझे बहुत डर लग रहा था तो मैंने मना कर दिया. लेकिन बाद में फिर हम उसकी ज्यादा जिद करने पर मैं मान गई और हम दोनों साथ में एक होटल में गए.

वहां रूम में जाकर वह मेरे होठों पर चिपक गया, मुझे किस करने लगा. मैं तो गर्म होने लगी थी मेरी कामवासना धीरे धीरे जागने लगी थी.

वो स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपना हाथ फिरा रहा था और मेरे होंठों पर किस कर रहा था. वो मेरी शर्ट के ऊपर से ही मेरे उरोज दबा रहा था.

अब तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा यार मुझे जी भर कर चोदे. मैं हर तरह से तैयार थी उससे चुदवाने के लिए!

फिर धीरे-धीरे उसने मेरी स्कर्ट उतार दी, मैं सिर्फ उसके सामने पेंटी में. थी मेरी नंगी जांगे उसके सामने थी वह मेरी जांघों पर किस करने लगा और पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.

मैंने मजे में अपनी टांगें ऊपर उठा ली और उसके बालों पर हाथ फिराने लगी. मेरी उम्र ही ऐसी थी कि जब वासना जोर मारने लगती है. मैं भी कामुकता से भरी हुई थी.
फिर मैंने खुद अपने कमीज़ उतार दी और अपनी ब्रा भी।

मैंने उसको अपने ऊपर खींचा और उसे अपने बूब्स चूसने का इशारा किया. वह मेरे बूब्स को पागलों की तरह चूसने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुंह से कामुकता भरी आवाजें निकल रही थी. दो-तीन साल से इतनी बुरी तरह से मेरा चुदने का मन कर रहा था कि मैं ही जानती थी।

फिर मैंने उसको बेड के दूसरी तरफ धक्का दे दिया और उसके कपड़े उतारने लगी. लेकिन मेरा मन लंड चूसने का कर रहा था इसलिए मैंने थोड़ी सी पैन्ट को नीचे उतारकर और उसके निक्कर में से उसके लंड को निकाल कर सीधा उसका लंड चूसने लगी.
मेरे यार के मुख से सिसकारियाँ निकल रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
उसके आधे कपड़े निकले हुए थे, पूरे भी अभी नहीं उतरे थे।
लेकिन मैं पूरी नंगी थी.

Chut Chudai Ki Kahani

मैंने अपने यार के लंड को चूस चूस कर इतना गीला कर दिया था कि उसने मुझे धक्का देकर बेड पर सीधा लिटा दिया और मेरी टांगों को हल्की सी ऊपर उठाकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया.

मैं चीखने लगी और अपने दांतों को उसकी गर्दन पर गड़ाने लगी. मुझे मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे दर्द होना बंद हो गया और पूरा मजा आने लगा।
मैंने उसकी कमर पर अपने नाखून गड़ा दिए. वह भी मेरी कोली भरकर मुझे जमकर चोद रहा था और इसी पोज में मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.

मैं बहुत चिल्लाई जब मुझे मजा आया. मैंने अपने आप को उससे चिपका लिया और उसकी बांहों में सिमट कर रह गई. लेकिन वह मुझे ऐसे ही चोदता रहा.

मेरे झड़ने के बाद मैंने उसको काफी मना किया कि अब मेरी चूत की चुदाई ना करे … लेकिन वह नहीं माना.
मैंने अपने हाथों से उसको हटाना चाहा लेकिन वह नहीं हटा.

तो मैं निढाल होकर बेड पर लेट गई और अपने बदन को टाइट करके उसके धक्कों का सामना करने लगी.

10 मिनट के बाद मुझे फिर से मजा आने लगा और फिर से मैं उसका साथ देने लगी. उसने मुझे अब की बार घोड़ी बना लिया, पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मेरे बाल पकड़कर मुझे खूब चोदा.
इस अवस्था में मुझे बहुत दर्द हुआ. मैं बहुत चिल्लाई भी लेकिन वह नहीं हटा और उसे मजा आने लगा तो उसने कहा- बेबी बताओ अपना वीर्य कहां निकालूं?
मैंने उससे कहा- अंदर ही निकाल दो, मुझे आपके बच्चे की मां बनना है.

और उसने ऐसे घोड़ी बने बने ही मेरी चूत में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया. गर्म गर्म माल मेरे अंदर जाकर लग रहा था, मुझे महसूस हो रहा था उसका वीर्य, उसका पानी!

फिर वह हट गया. मैं भी थक कर लेट गई, वीर्य मेरी चूत से निकलकर बाहर बहने लगा. हमने कपड़े से अपने अपने यौन अंगों को साफ किया और एक दूसरे से बहुत देर तक ऐसे ही नंगे चिपके रहे.

फिर कुछ देर बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मुझे अपना लंड चूसने को कहा.

मैंने भी अपने द

ोनों हाथों से उसके लंड की मालिश की थूक से! और फिर मैं उसका लंड चूसने लगी.

वह ऊपर से मेरे सिर को दबाता तो मैं पूरा लंड उसका मुंह में ले लेती. लेकिन सांस ना आने के कारण फिर मैं जल्दी से बाहर निकाल लेती. हम दोनों इतनी गंदी तरह से सेक्स कर रहे थे क्योंकि हम दूसरे को बुरी तरह से चोदना चाहते थे.

फिर उसने मुझे दोबारा से घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी गांड को चाटने लगा. उसने उंगली से मेरी गांड को धीरे-धीरे गीला कर दिया.
मेरी गांड इतनी गीली हो गई कि बहुत ज्यादा! मैं जानती थी कि अब मेरी गांड की चुदवाने की बारी है।

तो उसने अपनी पूरी उंगली गीली करके मेरी गांड में डाल दी. मुझे बहुत दर्द हुआ.
मैंने चिल्ला कर कहा- नहीं बेबी, वहां नहीं!

लेकिन वह धीरे-धीरे ऐसे ही करता रहा, कभी जीभ से चाटता, बार-बार कभी उंगली कभी चाटना!
इस वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर उसने मुझे पेट के बल लेटा कर क्रीम अपने लंड पर लगा कर मेरी गांड में लंड डाल दिया. मैं बहुत चिल्लाई लेकिन उसने मेरी नहीं सुनी.

लेकिन फिर धीरे-धीरे मुझे मजा आने लगा और मैं उसका साथ देने लगी.

उस दिन पूरे दिन होटल में उसने मुझे बहुत चूसा मेरे कामुक बदन को … उसके दबाने काटने से मेरा सारा बदन लाल हो गया था. और मेरी चूत और मेरी गांड में उसने अपना वीर्य भर दिया था.
हम दोनों ने खूब मजे किए फिर उस दिन … उसने मुझे बहुत चोदा. मेरी गांड में ही अपना वीर्य निकाल दिया.

फिर एक बार मैंने उसके ऊपर राइडिंग की. मेरे बूब्स उसके मुंह में और मैंने उसके ऊपर बैठकर बहुत धक्के लगाए. वह मेरे हिप्स पर बहुत तेज मारता भी था बीच-बीच में … जिससे मुझे बहुत मजा आता था.

उस दिन होटल में हम दोनों ने अपनी पूरी वासना निकाली; वहां पर उस दिन हम चार-पांच बार सेक्स किया और बहुत मजे किए.

यह थी मेरी शादी से पहले की चुदाई की कहानी मेरे बॉयफ्रेंड के साथ … जिससे मैं चुदवाती थी.

लेकिन अब तो मेरी शादी हो चुकी है और उसकी भी!
अब वह मुझ से बात नहीं करता क्योंकि उसकी वाइफ उस पर शक करती है. और हम चाहते भी हैं कि हमारे रास्ते अलग अलग रहें.

लेकिन मेरा फिर से मन भी करता है कि कोई ऐसा मेरी लाइफ में फिर से आए जो अच्छा हो, सच्चा हो और मेरे लिए हमेशा खड़ा रहे!

तो दोस्तो, यदि मेरी चूत चुदाई की कहानी थी, आपको कैसी लगी? प्लीज मुझे ईमेल कर कर जरूर बताएं.

भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-3

22-03-2020 by रोहित कुमार

मैंने अपनी कुंवारी बहन के पैर ऊपर की तरफ मोड़ दिये और लंड उसकी रसीली बुर की लकीर पर रगड़ने लगा, जिससे वो पागल हो गयी. वो तड़फ कर बोली- आंह भैया … जल्दी कुछ करो … नहीं तो मैं मर जाऊंगी.

बहन भाई के प्यार की सेक्स कहानी के पिछले भाग
भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-2
में आपने पढ़ा कि मैंने अपनी बहन की कुंवारी बुर की झांटों के जंगल को साफ़ करके उसकी बुर को चूम लिया था और उसे नंगी ही अपनी गोद में लेकर लेटा था. मेरा लंड लोअर में से ही उसकी बुर में टच हो रहा था. वो भी मुझसे गांड चिपका कर लेटी थी.

अब आगे:

जब सोते हुए मैंने श्वेता को किस किया तो पलट गई और उसका स्कर्ट ऊपर हो गया. उसकी मस्त रसीली बुर ठीक मेरे लंड के सामने आ गई थी. उसने अपनी बुर मेरे लंड पर दबाते हुए मुझे कई सारे किस मेरे पूरे चेहरे पर दे दिए और लास्ट में हम दोनों के लब आपस में कब जुड़ गए, कुछ पता ही नहीं चला. हम दोनों का ये दूसरा लिप किस था, पर ये अब कुछ अलग ही था.

चुम्बन करते हुए हम दोनों एक दूसरे की जीभ भी चूसने लगे. कुछ ही देर में उसका शरीर एकदम से गर्म हो गया, जैसे बुखार हो. उसके हाथ पैर में कंपकंपाहट होने लगी. वो सिर्फ किस करने से ही इतना गर्म हो गयी थी.

काफी समय तक किस करते हुए हम दोनों एक दूसरे को सहला रहे थे. मैं उसकी पीठ सहलाते सहलाते उसके चूतड़ों को सहलाने लगा, जो नंगे थे. फिर उसकी गांड की दरार में से होते हुए उसकी बुर तक पहुंचा, तो उसकी बुर गीली हो चुकी थी.

उसकी गीली बुर के लकीर में मैंने एक उंगली से उसकी क्लिट को रगड़ना शुरू किया, तो वो ‘अहह ऊंह..’ करने लगी.
थोड़ा होश आने पर बोली- भैया आप क्या कर रहे हैं?
मैंने बोला- तुम्हारी प्यारी बुर को भी तो प्यार चाहिए न.

वो चुप रह गई.

फिर मैं उसकी एक चूची को दबाने लगा और वैसे ही लिप किस करता रहा.

आज मेरा सब कुछ कर जाने का इरादा था, तो मैंने कहा- बेटू आज हम दोनों अपने पूरे कपड़े उतार कर सोते हैं … मजा आएगा.
वो बोली- कैसे?
मैंने कहा- जैसा मैं कहता हूं, तू करती जा.
उसने बोला- ठीक है.

मैंने रजाई के अन्दर ही अपना लोवर टी-शर्ट उतार दिया और उसने भी उतार दिया.

इस बार जब हम दोनों आपस में चिपके, तो नंगे बदन एक एक अंग आपस में सट गए … और ऐसा लगा जैसे हमने दुनिया का सबसे सुखद अहसास पा लिया हो … जो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता.

फिर मैं उठा और लाइट जला दी, तो वो एकदम से घबरा गई और बोली- क्या हुआ?
मैंने बोला- तुझे आज बिना कपड़ों के देखने का मन हो रहा है … इसलिए लाइट जला दी.
उसने इस बात पर बाकी की रजाई भी हटा दी और बोली- भैया आप भी न … मैं तो आपकी ही हूँ न … जब जी चाहे देखिये.

फिर उसका ध्यान मेरे खड़े लंड पर गया तो बोली- भैया ये तो कल से भी ज्यादा खड़ा है. … और मोटा हो गया है.
मैं बोला- हां ये तुझे देख कर ऐसा हो गया है बेटू.

मैं उसके करीब गया और उसे सर पर किस किया, फिर आंखों पर, फिर गाल पर … और लास्ट में लिप किस करने लगा. मैं एक हाथ से अपनी बहन की चूचियां दबाने लगा.

वो बोली- भैया दर्द हो रहा है, धीरे करो.
मैंने कहा- कहां पर दर्द हो रहा है?
उसने कहा- जो आप पकड़ कर दबा रहे हैं न.
मैं बोला- क्या?

वो शर्मा गयी.

मैंने फिर पूछा- मैं क्या दबा रहा हूँ, बताओ न!
वो लजा कर बोली- मेरा दुधु …
इस पर मैं हंस दिया और बोला- पगली इनको चूची बोलो.
वो मुस्कुराते हुए बोली- भैया मेरी चूची धीरे दबाओ न … दर्द हो रहा है.
तब मैंने कहा- अभी तो बहुत कुछ होगा … तुमको इस दर्द में भी मजा आएगा.

वो कुछ नहीं बोली बस मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी.

फिर मैं उसकी गर्दन पर किस करते हुए नीचे आया और उसकी एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा. साथ ही दूसरी चूची को दबाने लगा.

उसको मजा आने लगा और वो बस आंख बंद करके अपने मम्मों की चुसाई और रगड़ाई का मजा लेने लगी.

फिर मैं बोला- बेटू मेरा लंड पकड़ कर कल की तरह सहलाओ न.
उसने मेरी तरफ देख और पूछा- क्या सहलाऊं?
मैंने अपने लंड पर उसका हाथ रखा और कहा- इसे लंड कहते हैं.

मेरी भोली बहन हंस दी और वैसा ही किया, जैसा मैंने उससे कहा था.

मैं बारी बारी से अपनी बहन की दोनों चूचियों को खूब चूसा और दबाया. वैसे उसकी चूचियां कुछ 28 इंच की ही थीं. मुझे ये ऐसे मालूम था क्योंकि वो 28बी साइज़ की ब्रा पहनती थी, ये मैंने अभी ही देखा था, जब उसने अपनी ब्रा को निकाला था.

मेरी बहन बेड पर एकदम नंगी पड़ी थी और उसकी रुई सी मुलायम चूचियों का मजा मैं ले रहा था. उसकी मक्खन सी चूचिया ऐसी लग रही थीं, जैसे किसी छोटे से गुब्बारे में हवा और पानी भरा हो. मुझे अपनी बहन के चुचे छूने में बड़ा मजा आ रहा था.

फिर मैं उसके पेट को चूमता चाटता हुआ उसकी नाभि पर आ गया. जब वहां मैंने किस किया, तो वो एकदम से ‘सीई…’ की आवाज के साथ मचल गयी.

काफी देर तक अपनी बहन की नाभि चूसने के बाद अब बारी थी बुर चुसाई की.
पहले तो

मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और बड़े प्यार से उसकी बुर को सहला कर उसकी बुर के दोनों लबों को अलग करके देखा. बिल्कुल गुलाब की गुलाबी नाजुक सी पंखुड़ियां थीं. मुझे बुर के अन्दर उसके यौवन का कामरस दिखाई दिया, जिसे मैंने चूसने में एक पल का समय भी नष्ट नहीं किया. तुरंत ही मैं पूरी जीभ लगा कर उसकी बुर का रस चूसने लगा.

क्या बताऊं दोस्तों … उसकी बुर का अमृत जीभ से लगते ही मुझे तो मानो जैसे उसकी जवानी का नशा छा गया था.

मुझे अब उसकी बुर चाटने के अलावा कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. मैं बहन की कुंवारी बुर को चाटता गया और वो मचलती गयी. मुझे तो उसकी आवाज तक का होश नहीं था. मस्त जवानी की महक थी उसकी बुर में. कोरापन का मस्त अहसास था.

फिर मैंने अपनी जीभ नुकीली करके उसकी बुर के छेद में डाला, जो कि अन्दर से बंद था. आह गजब का स्वाद था. मुझे मेरी ज़िंदगी का सबसे स्वादिष्ट स्वाद मिल रहा था. तभी मुझे लगा कि उसने मेरा सर पकड़ लिया है और अपनी रसीली बुर में दबा रही है. मैं समझ गया कि अब मेरी बहन की कुंवारी बुर का सैलाब निकालने वाला है.

मैं और जोर जोर से उसकी बुर चुसाई करने लगा. वो भी अपनी गांड उठा उठा कर बुर चुसवा रही थी. तभी अचानक से उसने कुछ ज्यादा ही ऊपर को गांड उठायी और एकदम से कांपते हुए अजीब सी आवाज निकालते हुए अपने पहले यौवन रस को अपनी बुर के रास्ते मेरे मुँह में निकालने लगी.

मेरी बहन की कुंवारी बुर का स्वाद थोड़ा खट्टा नमकीन और अलग ही किस्म का था. मैं तो उसमें इतना खो गया कि पूरा रस पी गया और मेरा पूरा चेहरा भी गीला हो गया.

पहली बार झड़ने के बाद वो एकदम बेजान सी हो गई थी. लम्बी सी सांसें लेते हुए आंख बंद किए हुए मेरी बहन निढाल सी पड़ी थी.

दो मिनट बाद मैंने भी उसकी बुर से मुँह हटाया और उसके बगल में लेटकर बोला- बेटू क्या हुआ?
उसने बिना आंख खोले ही मुझे गले लगा लिया और बोली- आई लव यू भैया.
मैंने भी ‘आई लव यू टू..’ बोला और पूछा- कैसा लगा मेरा ये वाला प्यार?
वो बोली- भैया मत पूछो … आज के जैसा सुकून और ताजगी मुझे पहले कभी नहीं मिला.
मैं बोला- अभी तो पूरा प्यार बाकी ही है.
वो बोली- भैया अब आप लेटिये, मैं आपको प्यार करूंगी.

मैं लेट गया और उसने किस करने की वैसे ही शुरुआत की. जब वो मेरी छाती के निप्पलों पर आयी, तो हंसने लगी.

मैंने उसकी तरफ देखा तो बोली- भैया आपकी ये छोटी सी चूची को मैं कैसे दबाऊं?
मैंने बोला- चूसो न मजा आएगा.

उसने मेरे निप्पल चूसने शुरू कर दिये.
क्या बताऊं दोस्तो … मेरा पूरा बदन मेरा हिल गया. इसी दरम्यान उसका दायां हाथ खुद ब खुद मेरे लंड पर चला गया.
मैंने उसे हिलाना बताया कि लंड को ऊपर नीचे करो.

उसने मेरा लौड़ा हिलाना शुरू किया.

आह अपनी नंगी बहन से प्यार करने में क्या मस्त मजा आ रहा था.

फिर मैंने कहा- बेटू मेरे लंड पर किस करो न.

पहले तो उसने थोड़ा न नुकुर की … फिर बाद में उसने अपने भाई के लंड पर चुम्मियों की मानो बरसात कर दी.

तब मैंने कहा- अब इसे मुँह के अन्दर लेकर चूसो.
उसने बोला- भैया ये कैसे करूं?
मैंने कहा- जैसे लॉलीपॉप चूसती हो न … वैसे ही लंड चूसो.

उसने वैसे ही अपने भाई का लंड चूसना शुरू किया. क्या बताऊं मुझे तो जन्नत का मजा आने लगा था.

मैं भी ताव में उसका सर पकड़ कर जोर जोर से ऊपर नीचे करने लगा. मैंने देखा कि लंड मेरी बहन के गले तक चोट कर रहा था जिससे उसे तकलीफ हो रही थी, तो मैंने अपनी बहन का सर छोड़ दिया.

उसने लंड निकालते हुए गुस्से से कहा- मार डालोगे क्या भैया?
मैंने उससे सॉरी बोला और कहा- जोर जोर से लंड चूसो … मुझे अच्छा लग रहा है.
उसने भी कहा- हां भैया, पहले तो मुझे अच्छा नहीं लगा था, पर आपके लंड से जब कुछ खट्टा चिपचिपा सा मेरे मुँह में आया, तो मुझे भी अजीब सा नशा चढ़ गया है अब तो मुझे भी आपका लंड चूसना अच्छा लगने लगा है.
मैंने कहा- जैसे मैंने तेरी बुर का अमृत निकाला था न … वैसे ही मेरा भी निकलने वाला है. तू भी उसे पी जाना, मजा आएगा.
वो बोली- ठीक है.

मेरी बहन फिर से अपने भाई का लंड जोर जोर से चूसने लगी. कुछ देर बाद मेरा माल निकलने को हुआ, तो मैंने उसे बताया कि अब रुकना नहीं … बस माल निकलने ही वाला है.

ये जानकर वो और जोर से अपने भाई का लंड चूसने लगी. अगले ही पल मेरा लावा फूट पड़ा. कसम से आज से पहले इतना अधिक लावा कभी नहीं निकाला था. मैंने कई बार खुद लंड हिला कर मुठ मारी थी मगर आज से पहले इतना वीर्य कभी नहीं निकला था, ये देख कर मैं खुद भी आश्चर्य में था.

मेरी बहन काफी हद तक मेरे लंड का रस पी गयी थी, पर कुछ वीर्य बाहर भी गिर गया था, जिसे उसने ऊंगली से उठा कर चाट लिया.

अब हम दोनों लेटे हुए बात करने लगे.
मैंने पूछा- कैसा लगा?
वो बोली- भैया बहुत मजा आया … अब तो मैं रोज करूंगी.
मैंने बोला- अभी कहां असली मजा आया. अभी तो बहुत कुछ बाकी है.
उसने कहा- क्या मतलब?
मैं बोला- चल आ … 69 में करते हैं.
उसने पूछा- ये क्या होता है?

मैंने पूरा बताया, तो उसने वैसा ही किया. हम दोनों ने पोजीशन ले ली.

मैं पीठ के बल लेटा था, वो मेरे ऊपर उलटी होकर आ गई और पैर अलग कर कर मेरे मुँह पर अपनी बुर रख दी. साथ ही मेरा लंड पकड़ कर उसने चूसना शुरू कर दिया. मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा और मैं उसकी बुर चाटने लगा.

अब तो इस पोजीशन में उसकी गांड भी सामने थी, तो मुझसे रहा नहीं गया. मैंने अपनी जुबान को सीधा उसकी गांड के छेद पर लगा कर उसकी गांड को चाटने लगा.

उसकी गांड खुद ब खुद आगे पीछे होने लगी. वो बोली- वॉव भैया … बड़ा मजा आ रहा है.
मैंने कहा- तू मेरी गांड भी चाट ले … तो मुझे भी मजा आ जाएगा.

वो मेरी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

फिर मैंने उसको सीधा लेटने को बोला और कहा- अब असली मजा आएगा. मैं अब तुम्हारी यानि अपनी प्यारी बहन की बुर में अपना लंड डाल कर पेलूंगा और चोद चोद कर मजा दूंगा.

वो मदहोश होकर बोली- जो भी करो भैया … पर जल्दी करो … मेरी बुर में चीटियां रेंग रही हैं. मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरी बहुत कुलबुला रही है.

मैंने उसके पैर ऊपर की तरफ मोड़ दिये और लंड को अपनी कुंवारी बहन की रसीली बुर की लकीर पर रगड़ने लगा, जिससे वो पागल हो गयी. वो तड़फ कर बोली- आंह भैया … जल्दी कुछ करो … नहीं तो मैं मर जाऊंगी.
मैंने बोला- बेटू थोड़ा दर्द होगा, तो मुँह में कपड़ा डाल कर दबा लो … नहीं तो आवाज करोगी.

उसने वैसा ही किया.

फिर मैंने अपने लंड को थोड़ा हिला कर टाइट किया और उसकी बुर के जन्नती दरवाजे पर लगा कर थोड़ा सा दबाया … तो वो उचक गई.
मैं बोला- बस एक बार में ही दर्द होगा … सह जाना.
उसने इशारे में हां कहा.

मैंने इस बार थोड़ा थूक उसकी बुर के छेद पर लगाया और लंड सैट करके अपनी बहन के ऊपर लेट गया. मैंने उसे सर से पकड़ लिया ताकि वो हिल न सके. बस निशाना सैट होते ही मैंने झटका दे मारा. मेरा लंड एक ही झटके में उसकी बुर में घुस गया.

श्वेता के मुँह से घुटी सी आवाज आई- आ … ई … मर गई.

वो जोर से तड़पने लगी, उसकी आंखों से दर्द के मारे आंसू आ गए. पर कुछ कर तो सकती नहीं थी, उसके मुँह में कपड़ा था. इधर मैंने भी उसे जोर से पकड़ रखा था. मैं एक मिनट रुका रहा … क्योंकि दर्द तो मुझे भी हुआ था.

फिर मैंने उसके मुँह से कपड़ा निकाला, तो उसने जोर से सांस लेते हुए गुस्से से कहा- भैया आज तो मार ही दोगे … इतना दर्द हो रहा है.

मैंने कहा- बेटू पहली बार में होता है, अब नहीं होगा.
उसने पूछा कि क्या पूरा अन्दर चला गया?
मैंने बताया कि नहीं अभी आधा लंड अन्दर गया है.
वो बोली- बस अब नहीं करो … और अन्दर नहीं डालना … नहीं तो मर जाऊंगी.
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा … बस तू अब मजा ले.

मैंने आधे लंड से ही अपनी बहन की कुंवारी बुर को पेलना शुरू कर दिया. उसे दर्द के साथ हल्का मजा भी आने लगा. उसकी बुर भी गीली होने लगी. लंड चुत की रगड़ से रस निकलने लगा. चिकनाई होने से मुझे लगा कि अब मौक़ा आ गया है. तभी मैंने एक जोरदार शॉट मारा और लंड पूरा उसी बुर में घुस गया.

इस बार वो फिर से चीखी और मुझे मारने लगी- भैया आंह मर गई … आप बहुत गंदे हो.

मैं रुक गया और उसकी एक चूची को चूसने लगा. उसका दर्द कम होने लगा तो मैंने अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया.

वो मस्त होने लगी और लंड का मजा लेने लगी. करीब 20 मिनट तक मैं अपनी बहन को एक ही पोजीशन में पेलता रहा. वो भी मस्ती में अपने भाई का लंड पेलवाती रही. वो अब तक अपनी बुर से दो बार पानी छोड़ चुकी थी.

मैंने पूछा कि बेटू मेरा रस निकलने वाला है … पिएगी या तेरी बुर को पिला दूं?
उसने पहले डर से पूछा- अन्दर कुछ होगा तो नहीं?
तब मैंने कहा- कल दवा ला दूंगा … खा लेना.
तब वो बोली कि भैया ये मेरी ज़िंदगी का पहला प्यार आपसे इस तरह का मिला है … आप मेरी बुर को ही पिला दीजिये. आपका रस या तो मैं पियूंगी या फिर मेरी बुर ही पिएगी.

मैंने उसकी बात सुनकर बेहिचक चुदाई में लग गया. फिर मैंने अपनी बहन की बुर में ताबड़तोड़ 7-8 शॉट जोर जोर से मारे और लावा बुर में निकालने लगा.
जैसे ही मेरा लावा उसकी बुर में गिरा, वो भी कंपकंपाते हुए अपना यौवन रस निकालने लगी.

वो हम दोनों की पहली चुदाई आज भी याद आती है, तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है.

इसके आगे की चुदाई की कहानी अगले भाग में लिखूँगा. तब तक आप अपनी चुत में उंगली कीजिएगा या लंड की मुठ मारिएगा

भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-1

20-03-2020 by रोहित कुमार

मेरी माँ बहुत पहले मर गयी थी. मेरी छोटी बहन को मेरे पापा और मैंने ही पाला पोसा है. हम उसे जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं. इस प्यार आगे चल कर क्या रूप लिया?

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को दिल से नमस्कार. मैं रोहित 29 साल का, अपनी ज़िंदगी की शत प्रतिशत सच्ची सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ. मैं आपको बता दूँ कि ये मेरी ज़िंदगी के पिछली 7 सालों मतलब सन 2012 से अब तक की सच्चाई है, इसलिए ये कुछ लंबी हो सकती है और आपके सामने कई भागों में आएगी.

ये सेक्स कहानी मेरे और मेरी छोटी बहन के बीच की है. पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूँ, फिर विस्तार से सारी कहानी बताऊंगा.

जैसा कि मैं अपना नाम रोहित बता चुका हूँ. मेरी बहन का नाम श्वेता है. हम दोनों के अलावा इस दुनिया में हमारे पिता जी ही हैं. हम सभी बिहार के एक गाँव में रहते हैं और इस गांव में हमारी कुल 8 बीघा जमीन है, जिसमें मेरे पिता खेती करते हैं. हमारी मां उस समय गुजर गई थीं, जब श्वेता 3 साल की थी और मैं छह साल का था. मतलब मेरी बहन मुझसे 3 साल छोटी है.

मां के जाने के बाद पापा और मैंने ही श्वेता को पाला पोसा है. हम दोनों उसे अपनी जान से भी बहुत ज्यादा प्यार करते हैं.

पापा ने हम दोनों की पढ़ाई और ख्वाहिशों का बड़ा ध्यान रखा है. मैं 10वीं के बाद पढ़ने के लिए उत्तर प्रदेश के एक जिले में आ गया, जो बिहार से सटा हुआ था. श्वेता उस समय गांव में ही मुझसे छोटी क्लास में पढ़ रही थी.

एक साल बाद पापा ने उसे भी मेरे पास यहीं इसी शहर में भेज दिया. हम दोनों यहीं किराये के मकान में रहकर एक ही स्कूल में पढ़ने लगे. जब मैं ग्रेजुएशन कर रहा था, तब श्वेता क्लास 11 वीं में आ गयी थी. यहीं से हमारी कहानी शुरू हो गई थी.

श्वेता शुरू से ही मेरे साथ ही सोती आयी थी. एक ही बिस्तर पर वो और मैं लेट कर सोते थे. हम दोनों ही कोई भी किसी भी तरह की बात आपस में कर लेते थे. हमारे बीच कोई कुछ छिपाता नहीं था. वैसे वो शरारती भी ज्यादा थी, कुछ भी ऊटपटांग बात पूछ लिया करती थी.

वो सर्दी की रात थी. हम दोनों रजाई ओढ़ कर सोए हुए थे. मैं अपने दाईं करवट में लेटा था और श्वेता भी वैसे ही लगभग मेरी गोद में लेटी थी. श्वेता इस समय तक जवानी में कदम रख चुकी थी. ऐसे ही उसकी चुचियों में अच्छा खासा उभार आ चुका था. उस रात ठंड काफी थी, तो वो मुझसे कुछ ज्यादा ही चिपक कर सोयी हुई थी. मैं भी उसको पेट से पकड़ कर सोया था. खुद को एडजस्ट करते समय मेरा बायां हाथ उसकी एक चुची से लग गया.

पहले तो मुझे बहुत बुरा लगा, पर थोड़ी देर बाद उसके कोमल अहसास से मेरा लंड तन गया. चूंकि श्वेता मुझसे चिपकी हुयी थी, तो उसे भी कुछ महसूस हुआ. शरारती तो वो थी ही, उसने पूछ लिया.

श्वेता- भैया कुछ अजीब सा गड़ रहा है … और गर्म भी लग रहा है.
मैं- कुछ भी तो नहीं है … और तुम मेरी गोद में हो न, तो गर्म लग रहा होगा.
श्वेता- नहीं भैया … कुछ है.

उसने पीछे हाथ करके सीधे मेरे लंड पर हाथ रख दिया.

मैं पूरी तरह से सकपका गया और थोड़ा पीछे को हो गया. मैंने कहा- कुछ नहीं है … तू सो जा आराम से.
श्वेता- नहीं भैया, मुझे पता है … क्या चुभ रहा है.
मैं- क्या?
श्वेता- भैया ये आपका सुसु है न!
मैं- नहीं नहीं … कुछ नहीं है.
श्वेता शरारत से बोली- भैया मैं जानती हूँ आपका सुसु ही गड़ रहा है, पर वो इतना बड़ा और गर्म क्यों है.
मैं- कुछ नहीं पगली, वो मौसम ठंडा है न इसलिए.
तो वो और मुझसे चिपकते हुए बोली- आपको अब ठंड नहीं लगेगी.

उसकी ऐसी हरकत की उम्मीद मुझे नहीं थी. खैर लंड महराज और तन गए. मैं सोचता ही रह गया कि मेरी बहन आज कैसे इस तरह से खुल गयी है.

फिर किसी तरह हम दोनों सो गए.

सुबह उठने पर तो मैं थोड़ा झेंपा हुआ था, पर वो एकदम सामान्य थी.

हम दोनों अपने अपने स्कूल और कालेज गए. शाम को वापस आए और खाना-पीना हुआ. पढ़ाई की और सोने आ गए. ठंड तो आज भी थी, पर सोते समय मुझे पिछली रात का सीन याद आ गया था. वही सब सोच कर मेरा लंड फिर से तन गया. मैंने किसी तरह से अपने आपको काबू में किया और सोने लगा.

आज श्वेता खुद ही मुझसे चिपक गयी और बोली- भैया ठंड आज भी ज्यादा है.

अब मैं हूँ तो आखिर मर्द ही … लंड फिर से उसके कोमल चूतड़ों से सट कर खड़ा हो गया.

वो बोली- भैया आज भी ठंड लग रही है न!
मैंने बोला- हां.

उसने आज फिर से लंड पकड़ लिया और बोली- इसको इतनी ठंड क्यों लगती है?
मैं पीछे होकर बोला- पकड़ क्यों लेती है … छोड़ पहले.
तो उसने बड़ी मासूमियत से कहा कि मुझे जब ठंड लगती है, तो आप भी तो मुझे गोद में पकड़ कर सुलाते हैं.

इसके बाद मैंने उसे काफी समझाया, पर उसकी मासूमियत से मैं हार गया और चुपचाप वैसे ही सो गया.

अगली सुबह मौसम बहुत ही खराब था, तो हम दोनों ही पढ़ने नहीं गए. बस नाश्ता पानी, खाना पीना करने के बाद बिस्तर में लेट कर बात करने लगे. पर इन दो रातों का मेरे पर काफी असर हुआ औ

र मेरा दिमाग कुछ अलग ही सोचने लगा.

मैं उससे बोला- अब हम दोनों को अलग अलग बेड पर सोना चाहिये.
ये सुनकर उसने मना कर दिया और बोलने लगी- भैया आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?
मैं बोला- देख … अब हम दोनों बड़े हो गए हैं … इसलिए अलग सोना ठीक रहेगा.

काफी देर समझाने के बाद वो रोने लगी और बोली- आप मुझे अब पहले जैसा प्यार नहीं करते.
मैंने बोला- ऐसा नहीं है … तू समझा कर, कुछ साल बाद तो तुझे मुझसे अलग ही सोना होगा क्योंकि तेरी शादी हो जाएगी. तू अपने पति के घर जाएगी और वहां रहेगी.
इस पर वो उदास हो गयी और गुस्सा करते हुए बोली- मुझे शादी नहीं करनी. मैं तो आपके साथ ही रहूँगी.
बस वो रोने लगी. अब मैं भी क्या करता, सो बोल दिया कि ठीक है, मेरे साथ ही ज़िंदगी भर रहना.

इस पर वो खुश होकर एक पैर मेरे ऊपर फेंकते हुए और जोर से पकड़ते हुए मुझसे चिपक गयी और प्यार से मुझे एक पप्पी दी. लेकिन उसके पैर फेंकने से मेरे लंड पर इतनी जोर से चोट लगी कि मेरे मुँह से आह निकल गई और मैं थोड़ा सा ऐंठ गया.

उसने घबरा कर पूछा कि भैया क्या हुआ?
मैं बोला- कुछ नहीं.
वो बोली- आपको मेरी कसम … बताओ न!

मैं फिर सोचने लगा कि इसे अब क्या बताऊं कि लंड पर ठोकर लगी है.

मैंने कह दिया कि तुमने झटके से पैर रखा न … इसलिए मेरी सुसु पर चोट लग गई.

ये सुनकर वो झट से उठकर बैठ गयी और मेरे लंड पर हाथ रखने की कोशिश करने लगी. पर मैंने तो पहले से ही लंड पकड़ रखा था.
वो बोलने लगी- दिखाओ न … कहां लग गई है.

मेरी मासूम बहन बाम लेकर आ गयी और जिद करने लगी.
इस पर मैंने कहा- अभी अपने आप ठीक हो जाएगा, तुम परेशान नहीं हो.
पर वो नहीं मानी और उसने मुझे अपनी कसम दे दी.

अब मैं क्या करता- ले देख ले.

ये कहते हुए मैंने अपना लोअर नीचे कर दिया. मेरी तो शर्म से ही हालत खराब हो गयी.

वो कुछ देर तक लंड देखने के बाद बोली- भैया मुझे तो समझ नहीं आ रहा, तुम बताओ न!

मैंने अपनी गोटियों की तरफ हाथ फेर कर बताया कि यहां लगी है.

वैसे मैं बता दूँ कि मैं अपनी झांटें हमेशा साफ करके रखता हूँ.

मेरे इशारे करने पर उसने अपने हाथ में बाम ली और जोर से मेरी गोटियों पर बाम लगा दी. मुझे उसके हाथ लगने से फिर से दर्द हुआ.

श्वेता बोली- अब क्या हुआ भैया!
मैंने कहा- गोटियां बहुत नाजुक होती हैं … तू हल्के हाथ से लगा … और अब रहने दे.

लेकिन उसके छूने से मेरा लंड खड़ा होने लगा था, जिसे देखकर वो पूछने लगी कि भैया ये क्या होने लगा, आपका सुसु अब बड़ा क्यों हो रहा है … और फिर से गर्म भी हो रहा है.

अब मुझे भी शर्म आना कुछ बंद सी हो गई थी, तो मैंने भी बोल दिया कि उसे आराम मिल रहा है … और अच्छा लग रहा है … इसलिए वो खड़ा हो रहा है.
मेरे ये कहने पर पता नहीं क्यों, इस बार वो थोड़ा सा शर्मा गयी और उसने हाथ पीछे कर लिया.

मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं.

फिर मैंने भी अपना लोवर ऊपर किया और उसको लेकर लेट गया.

मैं बोला- ये सब किसी को बताना नहीं.
वो मेरे सीने में सर छिपाते हुए बोली- ठीक है.

फिर कुछ देर तक इधर उधर की बात करने के बाद वो बोली कि भैया आपका सुसु अब दर्द तो नहीं कर रहा न!
मैंने बोला- नहीं.
फिर बोली- पता नहीं क्यों आपका सुसु पकड़ने का मन कर रहा है.
अब मुझे भी ये सब अच्छा लगने लगा था, तो मैंने भी कह दिया कि तेरा ही तो है … पकड़ ले.

उसने झट से लोवर में हाथ डाल दिया और मेरा लंड पकड़ लिया.

मैंने बोला- अब खुश!
तो बोली- हां भैया.
मैंने कहा कि लम्बे वाले को ऊपर नीचे करके सहलाओ.
तो उसने बोला- क्यों?
मैं बोला कि मुझे भी अच्छा लग रहा है.

वो वैसे ही लंड पकड़ कर सहलाती रही.

बाद में उसने एक सवाल फिर से किया, जिसे सुनकर मैंने भी खुलने का फैसला किया कि या तो वो सच में नादान है … या फिर बन रही है.

उसने पूछा- भैया आपके सुसु पर बाल नहीं हैं … ऐसा क्यों!
तो मैंने बोला- ऐसा क्यों पूछ रही हो?
उसने बोला कि मेरी सुसु के ऊपर तो बहुत सारे बाल हैं.

ये बात सुनकर मुझे भी अब शरारत सूझी.

मैंने आश्चर्य से पूछा- ऐसा कैसे हो सकता है … देखूँ तो जरा.
तो इस बार वो शर्मा गयी और बोली- नहीं नहीं!
तब मैंने थोड़ा नाराजगी दिखाते हुए कहा- ठीक है तेरी मर्जी … मैंने तो तुमसे कुछ नहीं छिपाया … यानि कि तुम मुझसे प्यार नहीं करती.
वो बोली- ऐसा नहीं है भैया … मुझे थोड़ा शर्म आ रही है बस.
मैंने कहा कि बचपन में तो मैं ही तुमको नहलाता था … वो भी बिना कपड़ों के … तब तो तुम नहीं शर्मायी.
इस पर वो बोली- अच्छा ठीक है भैया आप खुद ही देख लो.

ये कह कर उसने अपना लोवर नीचे कर दिया, लेकिन पैंटी नहीं निकाली.

मैंने भी बेवकूफ बनते हुए पैंटी के ऊपर से ही उसकी सुसु यानि कि बुर पर हाथ रख कर मुआयना करने लगा. क्या मस्त अहसास था मुलायम बुर का … वो भी अपनी छोटी बहन की बुर का अहसास मुझे अन्दर तक मजा दे रहा था. मुझे अलग ही रोमांच आ रहा था, धड़कनें बढ़ गयी थीं.

उसी समय मेरे मन में फिर से एक बार आया कि ये हम दोनों क्

या कर रहे हैं. पर अब शायद थोड़ा सा ही सही, पर देर हो चुकी थी. पैंटी के ऊपर से ही बहन की बुर का मुआयना किया, तो लगा कि उसकी बुर पर बहुत सारे बाल हैं, जो काफी घने लग रहे थे.

मैं अपना हाथ नीचे ले गया, तो उसकी बुर की लकीर चालू हो गयी और मैंने नीचे तक उंगली से अच्छे से टटोल कर देखा. एकदम पतली सी लकीर महसूस हुई.

फिर मैंने जानबूझ कर हाथ वापस कर लिया और थोड़ा रूखे स्वर में कहा- कहां कुछ गलत है … सब ठीक तो लग रहा है … बाल तो है ही नहीं.

इस पर वो थोड़ा उखड़ते हुए बोली- क्या भैया आपने सही से देखा ही नहीं … ऊपर से ही आप छू रहे थे.
मैंने बोला- जैसे तुमने किया, वैसे ही मैंने छू कर देखा.

तब उसने खुद ही अपनी पैंटी नीचे कर दी और बोली- लो अब छू कर देखो … कितने बड़े बड़े बाल हैं.

मैं फिर से उसकी बुर को छुआ. वाकयी में बहुत घने बाल थे.

फिर मैंने पूरी हथेली से उसकी बुर को दबाया और चुत की लकीर के सहारे उसकी बुर को ऊपर नीचे कई बार सहला दिया, जिससे वो थोड़ा मचल उठी.

उसके कंठ से ‘इस्स…’ की आवाज निकल गई.

मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो बोली- पता नहीं, कुछ अजीब सा लगा.

अब मैंने खुद ही उसकी पैंटी और लोवर को ऊपर कर दिया और बोला कि इसको साफ कर लिया करो … यहां के बाल को काट लिया करो … या रेज़र से साफ कर लिया करो.
तब उसने कहा- ठीक है.

चूंकि दिन का समय था … मगर ठंड ज्यादा थी इसलिए बिस्तर से निकलने का मन ही नहीं कर रहा था. सो हम दोनों सो गए. मैंने वैसे ही उसको अपनी बांहों में लिए हुए सो गया.

बाकी का अब आपको अगले भाग में बताऊंगा कैसे क्या हुआ.

दोस्तो, हो सकता है आपको ये भाग बोर लगे, पर सच मानिए जो जैसी घटना घटी है, वैसे ही मैंने लिखा है, कोई मिर्च मसाला नहीं डाला. अगले भाग से आपको हम दोनों भाई बहन की चुदाई की कहानी का मजा मिलने लगेगा. मुझे सेक्स कहानी लिखने में कोई तजुर्बा नहीं है … इसके लिए क्षमा चाहूंगा.

भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-2

21-03-2020 by रोहित कुमार

मेरी छोटी बहन ने मेरा लंड देखा तो वो बोली कि भैया आपकी सूसू पर बाल नहीं हैं, मेरी सूसू पर तो बहुत बाल हैं. मैंने अपनी बहन की बुर कैसे देखी और उसको साफ़ किया?

सभी पाठकों को फिर से स्वागत है, जैसा कि मैंने अपनी सेक्स कहानी के पिछले भाग
भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-1
में बताया था कि कैसे मेरी छोटी बहन श्वेता ने मेरा लंड देखा और किस परिस्थितियों में मुझे उसकी बुर छूने का सौभाग्य मिला.

अब आगे:

शाम को जब मेरी आंख खुली, तो श्वेता पीठ के बल सीधी लेट कर सो रही थी. पहले तो मैंने आज उसको कुछ अलग नजरिए से देखा और दो दिनों में … और आज दिन में जो हुआ, उसको सोच कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

मुझे भी शरारत सूझी, तो मैं ठीक उसके ऊपर लेट गया और लंड का दबाव उसकी बुर पर देते हुए, उसे जोर से पकड़ कर पहले गाल पर किस करने लगा. इससे वो पहले हड़बड़ा गयी, फिर उसने मुझे भी पीठ पर हाथ ले जाकर जोर से पकड़ा और ‘सी…’ की आवाज करते हुए मेरे गाल पर भी किस कर दिया.

मैंने कहा- बेटू उठो … (मैं उसे प्यार से बेटू कहता हूं) चलो कहीं बाहर घूम कर आते हैं.
उसने ‘ऊंऊ…’ करते हुए मेरे गाल पर एक किस किया और बोली- ठीक है.

फिर हम दोनों तैयार हुए और मार्किट गए, थोड़ा पार्क में घूमे. फिर वापस आते समय छोटे से रेस्टोरेन्ट में खाना खाया. फिर एक जनरल स्टोर पर जाकर मैंने एक लेडीज रेजर और वीट क्रीम ले ली. तभी मेरी नजर कंडोम पर पड़ी और मेरे मन में कुछ होने लगा, पर मैंने सोचा इतना कुछ नहीं होने वाला, इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी.

हम दोनों सामान लेकर रूम पर आ गए. ठंड भी बढ़ने लगी थी. आज शनिवार था, कल रविवार की छुट्टी थी.

आते ही मैंने रेजर और वीट क्रीम उसको दे दी, तो वो बड़े हैरान होकर पहले देखने लगी. फिर शर्मा कर उसने मुझसे क्रीम ले ली.

मैं बोला- इन दोनों में से जो तुम्हें सही लगे, उसे यूज़ कर लेना.

फिर वो कुछ सोच कर बोली कि भैया मैं क्रीम नहीं लगाऊंगी.
मैंने पूछा- क्यों?

उसने बताया कि मेरी सहेलियां बताती हैं कि क्रीम लगाने से स्किन काली हो जाती है … इसीलिए उन्होंने कभी नहीं लगाई. लेकिन मुझे रेजर से डर लगता है कि कहीं कट न जाए … इसी वजह से आज तक कभी बाल नहीं काटे हैं. मुझे रेजर चलाना भी नहीं आता.

मैंने उसे अपने फोन पर एक वीडियो खोज कर दिखाया कि रेजर से कैसे बुर के बाल साफ करते हैं. पहले तो वो झांटें साफ़ करने वाले वीडियो को देखने से शर्मा रही थी, फिर उसने बड़े गौर से देखा. पर फिर भी हिम्मत नहीं जुटा पायी.

मैं बोला कि देखो वहां के बालों को साफ कर देना चाहिए … इन बालों से खुजली भी होती है और दूसरी वो जगह साफ सुथरी नहीं रह पाती.
वो बोली- हां जानती हूं भैया, पर डर लगता है.
मैंने कहा कि अगर तुम ठीक समझो, तो मैं साफ़ कर दूँ.
वो बोली कि भैया आपसे कैसे करवा लूं … मुझे शर्म आएगी.

तब मैंने कहा- देखो, यहां हम दोनों ही एक दूसरे का ख्याल रखने के लिए हैं. हमें एक दूसरे की पूरी मदद भी करनी होगी न..!
इस पर वो बोली- जैसा आपको ठीक लगे.
मैं बोला- ऐसा करो, तुम लोवर निकाल कर स्कर्ट पहन लो … तब तक मैं पानी गर्म कर लेता हूं.

मैं पानी गर्म करके जब रूम में आया, तो वो स्कर्ट पहन कर रेडी थी.
मैंने कहा- सीधी लेट जाओ.
वो लेट गयी.

फिर मैंने रूम हीटर को उसके पैर की तरफ लगाया और बोला कि स्कर्ट ऊपर करके पैर फैलाओ.
उसने ऐसा ही किया.

उसके बाद का सीन देख कर मुझे हंसी आ गयी … क्योंकि उसने पैंटी तो निकाली ही नहीं थी.

मुझे हंसता देख कर वो थोड़ी चिढ़ गयी और बोली- मुझे नहीं कराना.
तब मैंने सॉरी बोला और कहा कि पैंटी भी निकाल दो.
वो बोली- आपको जैसे जो करना है, खुद ही कीजिये … मुझे नहीं मालूम.

मैंने खुद ही उसकी पैंटी को निकाल दिया और उसके बाद का नज़ारा देख कर तो मेरे मुँह खुला ही रह गया … क्योंकि उसकी झांटों से भरी बुर बहुत ही कामुक और मस्त लग रही थी.

मुझे देखकर वो थोड़ा सा शर्मा गयी और उसने अपने पैरों को सटा लिया.
मैंने कहा- बेटू, ऐसे कैसे होगा.
उसने पैर धीरे से खोले.

पहले मैं नजदीक से जाकर उसकी बुर को देख रहा था. फिर अपने दाएं हाथ से उसको छुआ, तो श्वेता उचक गयी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं.

इसके बाद मैंने उसकी बुर को पूरी हथेली से सहलाया, तो उसने अपनी आंखें बंद कर लीं. फिर मैंने उसके एक बाल को खींच कर देखा, तो वो लगभग 3 इंच का था.

मैंने बोला कि इसको 2 बार में साफ करना होगा. पहले कैची से काटना होगा फिर रेजर से.
वो बोली- भैया आपको जैसा सही लगे.

अब आप कल्पना कीजिए कि एक भाई अपने बहन की बुर की झांट के बाल साफ करने जा रहा है. वो पल बड़ा रोमांचक था. मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था. लंड पूरा खड़ा था, सामने नई नवेली बुर थी … कैसे अपने आपको मैंने रोक रखा था, आप समझ सकते हैं.

फिर मैंने उसकी बुर के बालों को कैंची से काटना शुरू किया और पूरा ध्यान उसकी बुर पर ही र

कि चूम लूं.

ये कहते हुए मैंने अपनी बहन की बुर को चूम लिया और एक गहरी पप्पी एकदम बीचों बीच, दाने के पास जीभ से छू लिया.

मेरे ऐसा करते ही वो उछल गयी और बोली- भैया, ये क्या कर रहे हो, ये भी कोई चूमने की जगह है?
तब मैंने कहा- इतनी सुंदर दिख रही है कि मैं अपने आप को रोक ही नहीं पाया.
वो बोली- कोई बात नहीं.

फिर मैंने उससे देखने को कहा, तो उसने कहा- हां भैया, मेरी सुसु बहुत अच्छी लग रही है.
मैंने कहा- अरे बेटू इसे सुसु नहीं बुर कहते हैं … सुसु तो छोटे बच्चों की होती है … अब तो ये बड़ी हो गयी है.
वो बोली- धत भैया आप भी!

फिर मैंने आफ्टर शेव अपनी हथेली में लेकर उसकी बुर पर लगाया, तो वो मचल उठी.

फिर वो उठी और अपनी पैंटी पहनने लगी, तो मैंने मना किया.

वो बोली- क्यों!
तब मैंने कहा- आज शेविंग की हो न … तो आज खुला ही रहने दो.
वो बोली- ठीक है.

फिर हम दोनों सोने लगे. आज मुझे कुछ अलग ही मजा आ रहा था. मैंने अपना लंड ठीक उसके पीछे सटा दिया. आज मैंने सिर्फ लोवर पहना था, अंडरवियर नहीं पहना था. मैंने खड़े लंड को ज़ोर से दबा कर उसे अपनी गोद में ले लिया और एक हाथ पेट पर ले जाकर उसका पेट सहलाने लगा. उसको भी आज अच्छा लग रहा था, तो उसने अपनी गांड को पीछे दबा दिया.

वो बोली- भैया आप मुझे कभी छोड़ना नहीं … आपके बिना मैं मर जाऊँगी.
मैंने बोला- ऐसा नहीं बोलते … मैं हूँ न.
उसे गाल पर किस किया मैंने.

अब आगे चुदाई होगी मित्रो, पर अगले भाग में

खा. एक बार मैंने उसे देखा, तो वो बड़े गौर से देख रही थी. जैसे ही उसकी मुझसे आंख मिली, तो उसने शर्म से अपना चेहरा छिपा लिया.

कोई 15 मिनट में मैंने उसके बाल को काट कर रेजर चलाने लायक कर दिया.

उसके बाद तो उसकी चुत की असली रंगत देखने को मिली. श्वेता गोरी तो थी ही, पर उसकी बुर भी इससे एक टोन कम ही गोरी थी. मैंने हाथ लगाकर बुर के बालों को झाड़ कर साफ किया और थोड़ा सहला दिया.

फिर बोला- बेटू … अभी देख कैसा लग रही है तेरी सुसु!
तब उसने देखा और खुद छू कर भी देखा तो बोली- हां भैया … अब बड़ा अच्छा लग रहा है.
मैंने बोला- अभी पूरी सुसु साफ करने दो फिर देखना.
वो बोली- ठीक है.

फिर मैंने गर्म पानी से उसकी बुर के बाकी बचे बालों को भिगो कर मुलायम किया और शेविंग फोम लेकर बुर पर मलने लगा, जिससे उसको मजा भी आ रहा था और मुझे भी. उसने अपनी आंखें बंद कर ली थीं … इससे मैं भी पूरी मस्ती से बुर का मजा लेने लगा था.

फिर मैंने रेजर से उसकी बुर को ऊपर से शुरू किया और साफ करता गया. अंत में उसकी बुर की लकीर के अगल बगल ही बाल बच गए थे, तो मैंने उसकी बुर की लकीर के अन्दर से उंगली करके उसकी बुर की फांकों को फैलाया. आह क्या मस्त सीन नजर आया. पूरा पिंक और अन्दर लाल रंग. … उसकी बुर के लबों को देखकर मजा आ गया. बिल्कुल कुंवारी 19 साल की बुर थी. लेकिन मैंने महसूस किया कि उसकी बुर अन्दर से गीली हो गयी थी क्योंकि चिपचिपा पानी हल्का हल्का आ रहा था … यानि कि मेरी बहन श्वेता गर्म हो रही थी.

दस मिनट की मेहनत के बाद मैंने अपनी बहन की कुंवारी बुर को एकदम चिकना कर दिया. क्या मस्त बुर लग रही थी. मेरा मन तो कर रहा था कि अभी बुर चूम लूं और लंड पेल दूँ. पर मैंने मन को अपने काबू में किया. जल्दबाजी गलत हो सकती थी. मुझे अब लग रहा था कि बहन की बुर मेरी ही होने वाली है.

मैंने श्वेता से कहा- अब देखो, कितनी प्यारी लग रही है.
उसने देखा और बोला- हां भैया ये तो बहुत अच्छी दिखने लगी … सुन्दर भी दिखने लगी है.

फिर मैंने थोड़ा जानबूझ कर उसकी बुर पर उंगली से इधर उधर दबा कर खोलकर देखा कि कहीं बाल तो नहीं बचा है न. तो मुझे उसके गांड के छेद के आस पास थोड़ा बाल दिखे.

मैंने कहा कि अब तुम पेट के बल लेट जाओ … क्योंकि नीचे भी कुछ बाल हैं.

वो पेट के बल हो गयी. क्या नमकीन नज़ारा था … बहन के गोल गोल गोरे गोरे चूतड़ देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया. मेरा लंड गीला हो गया.

खैर पेट के बल लेटने से दोनों चूतड़ आपस में चिपक गए थे, तो रेजर जाना मुश्किल था.

मैंने उससे कहा कि बेटू जैसे मैं घोड़ा बनकर तुमको अपनी पीठ पर घुमाता था, वैसे ही तुम घोड़ा बन जाओ.
वो हंसने लगी और बोली- भैया मैं कैसे घोड़ा बन सकती हूं
मैंने पूछा- क्यों?
उसने बोला- अरे भैया मैं तो लड़की हूँ न … तो मैं तो घोड़ी बनूंगी न!
तब मैंने कहा- अच्छा बाबा, घोड़ी ही बन जाओ.

फिर वो खड़ी हुई, तो उसका स्कर्ट नीचे हो गया. वो घोड़ी बन गयी. वो घोड़ी तो बन गयी. पर स्कर्ट से उसका पिछवाड़ा ढक गया था. जब मैं उसकी स्कर्ट उठाने लगा, तो जैसे लग रहा था किसी दुल्हन का घूंघट उठा रहा हूँ. मैं उस समय रोमांच से भरा हुआ था. फिर मैंने स्कर्ट रूपी घूंघट को उठाया और अपनीं बहन की प्यारी सी गांड देख कर मुझे मजा आ गया.

उसके गोरे गोरे चूतड़ों के बीच में छोटी सी भूरे रंग का प्यारी सी गांड का मुहाना दिखा, तो मैं अपने आपको रोक नहीं पाया और अपनी बीच की उंगली से मुहाने को सहला दिया, जिससे वो एक बार फिर चिहुंक उठी.

मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं.

मैंने हल्का सा गर्म पानी लिया और पहले गांड और आस पास को गीला किया. फिर शेविंग फोम लेकर बुर से लेकर पूरी गांड तक मलने लगा. इसके बाद रेजर से पूरी गांड के आस पास के बाल साफ करके चमका दिया.

मैंने एक बार फिर से श्वेता की बुर व गांड का मुआयना किया और थोड़ा सहला भी दिया. उसकी बुर की फांक में उंगली से उसकी क्लिट को सहला भी दिया, जिससे उसकी बुर थोड़ी सी पनिया गयी.

फिर मैंने कहा- अब जा … साबुन से अच्छे से धोकर आ जा.

उसने वैसा ही किया और वापस आयी, तो मैंने कहा- जरा देखूँ तो अपनी बहन की सुसु कैसी लग रही है.
तो वो बोली- भैया 45 मिनट से आप यही तो देख रहे थे.
मैंने कहा- अरे देख थोड़ी रहा था, वो तो साफ कर रहा था न.
वो कुछ नहीं बोली.

मैंने बोला- अब सीधी लेट जाओ.
वो लेट गयी और मैंने उसकी स्कर्ट को उठाया, तो देखा उसने पैंटी पहन ली थी.

मैंने कहा- अरे बेटू अभी पूरी साफ़ कहां हुई थी.
वो बोली- हो तो गई साफ!
मैंने बोला- अरे अभी आफ्टर शेव लोशन लगाना है.
वो बोली- ठीक है.

मैंने उसकी पैंटी निकाली और देखा कि क्या मस्त उजला स्वर्ग सा नजारा था. गोरी ब्रेड के जैसे फूली हुई मस्त रसीली बुर दिख रही थी. मैं तो अपनी बहन की चकाचक साफ़ बुर को देखता ही रह गया.

उसने मुझे हिला कर बोला- भैया कहां खो गए?
मैंने कहा- इतनी सुंदर लग रही है कि नजर ही नहीं हट रही है, मेरा मन कर रहा है

भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-3

22-03-2020 by रोहित कुमार

मैंने अपनी कुंवारी बहन के पैर ऊपर की तरफ मोड़ दिये और लंड उसकी रसीली बुर की लकीर पर रगड़ने लगा, जिससे वो पागल हो गयी. वो तड़फ कर बोली- आंह भैया … जल्दी कुछ करो … नहीं तो मैं मर जाऊंगी.

बहन भाई के प्यार की सेक्स कहानी के पिछले भाग
भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-2
में आपने पढ़ा कि मैंने अपनी बहन की कुंवारी बुर की झांटों के जंगल को साफ़ करके उसकी बुर को चूम लिया था और उसे नंगी ही अपनी गोद में लेकर लेटा था. मेरा लंड लोअर में से ही उसकी बुर में टच हो रहा था. वो भी मुझसे गांड चिपका कर लेटी थी.

अब आगे:

जब सोते हुए मैंने श्वेता को किस किया तो पलट गई और उसका स्कर्ट ऊपर हो गया. उसकी मस्त रसीली बुर ठीक मेरे लंड के सामने आ गई थी. उसने अपनी बुर मेरे लंड पर दबाते हुए मुझे कई सारे किस मेरे पूरे चेहरे पर दे दिए और लास्ट में हम दोनों के लब आपस में कब जुड़ गए, कुछ पता ही नहीं चला. हम दोनों का ये दूसरा लिप किस था, पर ये अब कुछ अलग ही था.

चुम्बन करते हुए हम दोनों एक दूसरे की जीभ भी चूसने लगे. कुछ ही देर में उसका शरीर एकदम से गर्म हो गया, जैसे बुखार हो. उसके हाथ पैर में कंपकंपाहट होने लगी. वो सिर्फ किस करने से ही इतना गर्म हो गयी थी.

काफी समय तक किस करते हुए हम दोनों एक दूसरे को सहला रहे थे. मैं उसकी पीठ सहलाते सहलाते उसके चूतड़ों को सहलाने लगा, जो नंगे थे. फिर उसकी गांड की दरार में से होते हुए उसकी बुर तक पहुंचा, तो उसकी बुर गीली हो चुकी थी.

उसकी गीली बुर के लकीर में मैंने एक उंगली से उसकी क्लिट को रगड़ना शुरू किया, तो वो ‘अहह ऊंह..’ करने लगी.
थोड़ा होश आने पर बोली- भैया आप क्या कर रहे हैं?
मैंने बोला- तुम्हारी प्यारी बुर को भी तो प्यार चाहिए न.

वो चुप रह गई.

फिर मैं उसकी एक चूची को दबाने लगा और वैसे ही लिप किस करता रहा.

आज मेरा सब कुछ कर जाने का इरादा था, तो मैंने कहा- बेटू आज हम दोनों अपने पूरे कपड़े उतार कर सोते हैं … मजा आएगा.
वो बोली- कैसे?
मैंने कहा- जैसा मैं कहता हूं, तू करती जा.
उसने बोला- ठीक है.

मैंने रजाई के अन्दर ही अपना लोवर टी-शर्ट उतार दिया और उसने भी उतार दिया.

इस बार जब हम दोनों आपस में चिपके, तो नंगे बदन एक एक अंग आपस में सट गए … और ऐसा लगा जैसे हमने दुनिया का सबसे सुखद अहसास पा लिया हो … जो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता.

फिर मैं उठा और लाइट जला दी, तो वो एकदम से घबरा गई और बोली- क्या हुआ?
मैंने बोला- तुझे आज बिना कपड़ों के देखने का मन हो रहा है … इसलिए लाइट जला दी.
उसने इस बात पर बाकी की रजाई भी हटा दी और बोली- भैया आप भी न … मैं तो आपकी ही हूँ न … जब जी चाहे देखिये.

फिर उसका ध्यान मेरे खड़े लंड पर गया तो बोली- भैया ये तो कल से भी ज्यादा खड़ा है. … और मोटा हो गया है.
मैं बोला- हां ये तुझे देख कर ऐसा हो गया है बेटू.

मैं उसके करीब गया और उसे सर पर किस किया, फिर आंखों पर, फिर गाल पर … और लास्ट में लिप किस करने लगा. मैं एक हाथ से अपनी बहन की चूचियां दबाने लगा.

वो बोली- भैया दर्द हो रहा है, धीरे करो.
मैंने कहा- कहां पर दर्द हो रहा है?
उसने कहा- जो आप पकड़ कर दबा रहे हैं न.
मैं बोला- क्या?

वो शर्मा गयी.

मैंने फिर पूछा- मैं क्या दबा रहा हूँ, बताओ न!
वो लजा कर बोली- मेरा दुधु …
इस पर मैं हंस दिया और बोला- पगली इनको चूची बोलो.
वो मुस्कुराते हुए बोली- भैया मेरी चूची धीरे दबाओ न … दर्द हो रहा है.
तब मैंने कहा- अभी तो बहुत कुछ होगा … तुमको इस दर्द में भी मजा आएगा.

वो कुछ नहीं बोली बस मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी.

फिर मैं उसकी गर्दन पर किस करते हुए नीचे आया और उसकी एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा. साथ ही दूसरी चूची को दबाने लगा.

उसको मजा आने लगा और वो बस आंख बंद करके अपने मम्मों की चुसाई और रगड़ाई का मजा लेने लगी.

फिर मैं बोला- बेटू मेरा लंड पकड़ कर कल की तरह सहलाओ न.
उसने मेरी तरफ देख और पूछा- क्या सहलाऊं?
मैंने अपने लंड पर उसका हाथ रखा और कहा- इसे लंड कहते हैं.

मेरी भोली बहन हंस दी और वैसा ही किया, जैसा मैंने उससे कहा था.

मैं बारी बारी से अपनी बहन की दोनों चूचियों को खूब चूसा और दबाया. वैसे उसकी चूचियां कुछ 28 इंच की ही थीं. मुझे ये ऐसे मालूम था क्योंकि वो 28बी साइज़ की ब्रा पहनती थी, ये मैंने अभी ही देखा था, जब उसने अपनी ब्रा को निकाला था.

मेरी बहन बेड पर एकदम नंगी पड़ी थी और उसकी रुई सी मुलायम चूचियों का मजा मैं ले रहा था. उसकी मक्खन सी चूचिया ऐसी लग रही थीं, जैसे किसी छोटे से गुब्बारे में हवा और पानी भरा हो. मुझे अपनी बहन के चुचे छूने में बड़ा मजा आ रहा था.

फिर मैं उसके पेट को चूमता चाटता हुआ उसकी नाभि पर आ गया. जब वहां मैंने किस किया, तो वो एकदम से ‘सीई…’ की आवाज के साथ मचल गयी.

काफी देर तक अपनी बहन की नाभि चूसने के बाद अब बारी थी बुर चुसाई की.
पहले तो

मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाया और बड़े प्यार से उसकी बुर को सहला कर उसकी बुर के दोनों लबों को अलग करके देखा. बिल्कुल गुलाब की गुलाबी नाजुक सी पंखुड़ियां थीं. मुझे बुर के अन्दर उसके यौवन का कामरस दिखाई दिया, जिसे मैंने चूसने में एक पल का समय भी नष्ट नहीं किया. तुरंत ही मैं पूरी जीभ लगा कर उसकी बुर का रस चूसने लगा.

क्या बताऊं दोस्तों … उसकी बुर का अमृत जीभ से लगते ही मुझे तो मानो जैसे उसकी जवानी का नशा छा गया था.

मुझे अब उसकी बुर चाटने के अलावा कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. मैं बहन की कुंवारी बुर को चाटता गया और वो मचलती गयी. मुझे तो उसकी आवाज तक का होश नहीं था. मस्त जवानी की महक थी उसकी बुर में. कोरापन का मस्त अहसास था.

फिर मैंने अपनी जीभ नुकीली करके उसकी बुर के छेद में डाला, जो कि अन्दर से बंद था. आह गजब का स्वाद था. मुझे मेरी ज़िंदगी का सबसे स्वादिष्ट स्वाद मिल रहा था. तभी मुझे लगा कि उसने मेरा सर पकड़ लिया है और अपनी रसीली बुर में दबा रही है. मैं समझ गया कि अब मेरी बहन की कुंवारी बुर का सैलाब निकालने वाला है.

मैं और जोर जोर से उसकी बुर चुसाई करने लगा. वो भी अपनी गांड उठा उठा कर बुर चुसवा रही थी. तभी अचानक से उसने कुछ ज्यादा ही ऊपर को गांड उठायी और एकदम से कांपते हुए अजीब सी आवाज निकालते हुए अपने पहले यौवन रस को अपनी बुर के रास्ते मेरे मुँह में निकालने लगी.

मेरी बहन की कुंवारी बुर का स्वाद थोड़ा खट्टा नमकीन और अलग ही किस्म का था. मैं तो उसमें इतना खो गया कि पूरा रस पी गया और मेरा पूरा चेहरा भी गीला हो गया.

पहली बार झड़ने के बाद वो एकदम बेजान सी हो गई थी. लम्बी सी सांसें लेते हुए आंख बंद किए हुए मेरी बहन निढाल सी पड़ी थी.

दो मिनट बाद मैंने भी उसकी बुर से मुँह हटाया और उसके बगल में लेटकर बोला- बेटू क्या हुआ?
उसने बिना आंख खोले ही मुझे गले लगा लिया और बोली- आई लव यू भैया.
मैंने भी ‘आई लव यू टू..’ बोला और पूछा- कैसा लगा मेरा ये वाला प्यार?
वो बोली- भैया मत पूछो … आज के जैसा सुकून और ताजगी मुझे पहले कभी नहीं मिला.
मैं बोला- अभी तो पूरा प्यार बाकी ही है.
वो बोली- भैया अब आप लेटिये, मैं आपको प्यार करूंगी.

मैं लेट गया और उसने किस करने की वैसे ही शुरुआत की. जब वो मेरी छाती के निप्पलों पर आयी, तो हंसने लगी.

मैंने उसकी तरफ देखा तो बोली- भैया आपकी ये छोटी सी चूची को मैं कैसे दबाऊं?
मैंने बोला- चूसो न मजा आएगा.

उसने मेरे निप्पल चूसने शुरू कर दिये.
क्या बताऊं दोस्तो … मेरा पूरा बदन मेरा हिल गया. इसी दरम्यान उसका दायां हाथ खुद ब खुद मेरे लंड पर चला गया.
मैंने उसे हिलाना बताया कि लंड को ऊपर नीचे करो.

उसने मेरा लौड़ा हिलाना शुरू किया.

आह अपनी नंगी बहन से प्यार करने में क्या मस्त मजा आ रहा था.

फिर मैंने कहा- बेटू मेरे लंड पर किस करो न.

पहले तो उसने थोड़ा न नुकुर की … फिर बाद में उसने अपने भाई के लंड पर चुम्मियों की मानो बरसात कर दी.

तब मैंने कहा- अब इसे मुँह के अन्दर लेकर चूसो.
उसने बोला- भैया ये कैसे करूं?
मैंने कहा- जैसे लॉलीपॉप चूसती हो न … वैसे ही लंड चूसो.

उसने वैसे ही अपने भाई का लंड चूसना शुरू किया. क्या बताऊं मुझे तो जन्नत का मजा आने लगा था.

मैं भी ताव में उसका सर पकड़ कर जोर जोर से ऊपर नीचे करने लगा. मैंने देखा कि लंड मेरी बहन के गले तक चोट कर रहा था जिससे उसे तकलीफ हो रही थी, तो मैंने अपनी बहन का सर छोड़ दिया.

उसने लंड निकालते हुए गुस्से से कहा- मार डालोगे क्या भैया?
मैंने उससे सॉरी बोला और कहा- जोर जोर से लंड चूसो … मुझे अच्छा लग रहा है.
उसने भी कहा- हां भैया, पहले तो मुझे अच्छा नहीं लगा था, पर आपके लंड से जब कुछ खट्टा चिपचिपा सा मेरे मुँह में आया, तो मुझे भी अजीब सा नशा चढ़ गया है अब तो मुझे भी आपका लंड चूसना अच्छा लगने लगा है.
मैंने कहा- जैसे मैंने तेरी बुर का अमृत निकाला था न … वैसे ही मेरा भी निकलने वाला है. तू भी उसे पी जाना, मजा आएगा.
वो बोली- ठीक है.

मेरी बहन फिर से अपने भाई का लंड जोर जोर से चूसने लगी. कुछ देर बाद मेरा माल निकलने को हुआ, तो मैंने उसे बताया कि अब रुकना नहीं … बस माल निकलने ही वाला है.

ये जानकर वो और जोर से अपने भाई का लंड चूसने लगी. अगले ही पल मेरा लावा फूट पड़ा. कसम से आज से पहले इतना अधिक लावा कभी नहीं निकाला था. मैंने कई बार खुद लंड हिला कर मुठ मारी थी मगर आज से पहले इतना वीर्य कभी नहीं निकला था, ये देख कर मैं खुद भी आश्चर्य में था.

मेरी बहन काफी हद तक मेरे लंड का रस पी गयी थी, पर कुछ वीर्य बाहर भी गिर गया था, जिसे उसने ऊंगली से उठा कर चाट लिया.

अब हम दोनों लेटे हुए बात करने लगे.
मैंने पूछा- कैसा लगा?
वो बोली- भैया बहुत मजा आया … अब तो मैं रोज करूंगी.
मैंने बोला- अभी कहां असली मजा आया. अभी तो बहुत कुछ बाकी है.
उसने कहा- क्या मतलब?
मैं बोला- चल आ … 69 में करते हैं.
उसने पूछा- ये क्या होता है?

मैंने पूरा बताया, तो उसने वैसा ही किया. हम दोनों ने पोजीशन ले ली.

मैं पीठ के बल लेटा था, वो मेरे ऊपर उलटी होकर आ गई और पैर अलग कर कर मेरे मुँह पर अपनी बुर रख दी. साथ ही मेरा लंड पकड़ कर उसने चूसना शुरू कर दिया. मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा और मैं उसकी बुर चाटने लगा.

अब तो इस पोजीशन में उसकी गांड भी सामने थी, तो मुझसे रहा नहीं गया. मैंने अपनी जुबान को सीधा उसकी गांड के छेद पर लगा कर उसकी गांड को चाटने लगा.

उसकी गांड खुद ब खुद आगे पीछे होने लगी. वो बोली- वॉव भैया … बड़ा मजा आ रहा है.
मैंने कहा- तू मेरी गांड भी चाट ले … तो मुझे भी मजा आ जाएगा.

वो मेरी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

फिर मैंने उसको सीधा लेटने को बोला और कहा- अब असली मजा आएगा. मैं अब तुम्हारी यानि अपनी प्यारी बहन की बुर में अपना लंड डाल कर पेलूंगा और चोद चोद कर मजा दूंगा.

वो मदहोश होकर बोली- जो भी करो भैया … पर जल्दी करो … मेरी बुर में चीटियां रेंग रही हैं. मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरी बहुत कुलबुला रही है.

मैंने उसके पैर ऊपर की तरफ मोड़ दिये और लंड को अपनी कुंवारी बहन की रसीली बुर की लकीर पर रगड़ने लगा, जिससे वो पागल हो गयी. वो तड़फ कर बोली- आंह भैया … जल्दी कुछ करो … नहीं तो मैं मर जाऊंगी.
मैंने बोला- बेटू थोड़ा दर्द होगा, तो मुँह में कपड़ा डाल कर दबा लो … नहीं तो आवाज करोगी.

उसने वैसा ही किया.

फिर मैंने अपने लंड को थोड़ा हिला कर टाइट किया और उसकी बुर के जन्नती दरवाजे पर लगा कर थोड़ा सा दबाया … तो वो उचक गई.
मैं बोला- बस एक बार में ही दर्द होगा … सह जाना.
उसने इशारे में हां कहा.

मैंने इस बार थोड़ा थूक उसकी बुर के छेद पर लगाया और लंड सैट करके अपनी बहन के ऊपर लेट गया. मैंने उसे सर से पकड़ लिया ताकि वो हिल न सके. बस निशाना सैट होते ही मैंने झटका दे मारा. मेरा लंड एक ही झटके में उसकी बुर में घुस गया.

श्वेता के मुँह से घुटी सी आवाज आई- आ … ई … मर गई.

वो जोर से तड़पने लगी, उसकी आंखों से दर्द के मारे आंसू आ गए. पर कुछ कर तो सकती नहीं थी, उसके मुँह में कपड़ा था. इधर मैंने भी उसे जोर से पकड़ रखा था. मैं एक मिनट रुका रहा … क्योंकि दर्द तो मुझे भी हुआ था.

फिर मैंने उसके मुँह से कपड़ा निकाला, तो उसने जोर से सांस लेते हुए गुस्से से कहा- भैया आज तो मार ही दोगे … इतना दर्द हो रहा है.

मैंने कहा- बेटू पहली बार में होता है, अब नहीं होगा.
उसने पूछा कि क्या पूरा अन्दर चला गया?
मैंने बताया कि नहीं अभी आधा लंड अन्दर गया है.
वो बोली- बस अब नहीं करो … और अन्दर नहीं डालना … नहीं तो मर जाऊंगी.
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा … बस तू अब मजा ले.

मैंने आधे लंड से ही अपनी बहन की कुंवारी बुर को पेलना शुरू कर दिया. उसे दर्द के साथ हल्का मजा भी आने लगा. उसकी बुर भी गीली होने लगी. लंड चुत की रगड़ से रस निकलने लगा. चिकनाई होने से मुझे लगा कि अब मौक़ा आ गया है. तभी मैंने एक जोरदार शॉट मारा और लंड पूरा उसी बुर में घुस गया.

इस बार वो फिर से चीखी और मुझे मारने लगी- भैया आंह मर गई … आप बहुत गंदे हो.

मैं रुक गया और उसकी एक चूची को चूसने लगा. उसका दर्द कम होने लगा तो मैंने अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया.

वो मस्त होने लगी और लंड का मजा लेने लगी. करीब 20 मिनट तक मैं अपनी बहन को एक ही पोजीशन में पेलता रहा. वो भी मस्ती में अपने भाई का लंड पेलवाती रही. वो अब तक अपनी बुर से दो बार पानी छोड़ चुकी थी.

मैंने पूछा कि बेटू मेरा रस निकलने वाला है … पिएगी या तेरी बुर को पिला दूं?
उसने पहले डर से पूछा- अन्दर कुछ होगा तो नहीं?
तब मैंने कहा- कल दवा ला दूंगा … खा लेना.
तब वो बोली कि भैया ये मेरी ज़िंदगी का पहला प्यार आपसे इस तरह का मिला है … आप मेरी बुर को ही पिला दीजिये. आपका रस या तो मैं पियूंगी या फिर मेरी बुर ही पिएगी.

मैंने उसकी बात सुनकर बेहिचक चुदाई में लग गया. फिर मैंने अपनी बहन की बुर में ताबड़तोड़ 7-8 शॉट जोर जोर से मारे और लावा बुर में निकालने लगा.
जैसे ही मेरा लावा उसकी बुर में गिरा, वो भी कंपकंपाते हुए अपना यौवन रस निकालने लगी.

वो हम दोनों की पहली चुदाई आज भी याद आती है, तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है.

इसके आगे की चुदाई की कहानी अगले भाग में लिखूँगा. तब तक आप अपनी चुत में उंगली कीजिएगा या लंड की मुठ मारिएगा

भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-4

23-03-2020 by रोहित कुमार

मेरी सहेलियां स्कूल में सेक्स की बात करती थीं. पर मैं उनसे दूर रहती थी. एक दिन मेरी सहेली ने एक किताब दी जिसमें सेक्स के मजे के बारे में बताया हुआ था. पर मैं डरती थी और …

आपने अब तक की मेरी कुंवारी जवान बहन की सेक्स कहानी के पिछले भाग
भाई बहन के प्यार से सेक्स तक-3
में पढ़ा था मैंने अपनी बहन की कुंवारी बुर को चोद कर अपने लंड का रस उसी में डाल दिया था.

अब आगे:

जब मेरा पूरा लंड रस निकल गया, तो मैं उठ गया. मैंने देखा कि मेरे लंड के रस और उसकी बुर के रस के साथ थोड़ा सा खून भी मिला हुआ उसकी बुर से बह रहा था. मैंने उसकी स्कर्ट से उसकी बुर को पौंछ कर साफ कर दिया और अपना लंड भी साफ कर लिया.

फिर मैंने उससे पूछा कि अपने भैया का प्यार पसंद आया?
वो मुझे किस करते हुए बोली- अब तो मुझे सिर्फ यही प्यार आपसे हर समय चाहिए मेरे प्यारे भैया.

फिर हम दोनों उठे और मैंने उससे बाथरूम में चलने को कहा. वो लंगड़ा कर चलने लगी. मुझे उसकी चाल देख कर हंसी आ गयी.
वो बोली- भैया आप हंस रहे हैं … मैं खड़ी भी नहीं हो पा रही हूँ.
मैं उसे सहारा देकर ले गया और उसकी बुर को साफ किया. उसने भी मेरा लंड साफ किया.

फिर उसने मेरे सामने ही पेशाब की, तो उसकी बुर से अन्दर का माल बाहर आने लगा, जिसमें खून भी निकल रहा था. वो ये देख कर डर गई.
मैंने उसे बताया कि डरने की कोई बात नहीं है. ये तो पहली बार में आता ही है.

फिर जब मैंने पेशाब किया तो मेरी जान निकल गयी. मेरा स्किन जो सुपारे से जुड़ी होती है, वो कट गई थी.

उसे मैंने अपनी बहन को दिखाया- देखो, बस ऐसे ही तुम्हारी बुर में भी होता है. झिल्ली के टूटने से थोड़ा खून आ ही जाता है.

फिर हम दोनों रूम में आ गए, तो वो कपड़ा पहनने लगी. मैंने उसे मना किया कि अब ऐसे ही रहने दो. हम दोनों अब रूम में नंगे ही रहेंगे.
वो मेरी बात मान गयी.

मैं बोला- बेटू, अब तुमको जब भी अपनी बुर में पेलवाने का मन करे, मेरा लंड घुसवा लेना अपनी बुर में … या जब भी चूसने का मन करे, तो चूस लेना.
उसने भी वैसा ही कहा कि हां भैया आपका भी जब भी मन हो, मेरी बुर पेल लीजियेगा.

रात भर तो हम दोनों बहुत अच्छे से एक दूसरे को पकड़ कर नंगे बदन सोये, पर सुबह होते होते ठंड काफी बढ़ गई. चूंकि आज रविवार भी था, तो हम दोनों नहीं उठे. बस बेड पर लेटे लेटे ही बात कर रहे थे.

मैंने कहा- बेटू गुड मॉर्निंग.
ये कह कर मैंने अपनी बहन के होंठों की एक चुम्मी ले ली. बदले में उसने भी पप्पी दी और अपने भैया से गले लग गयी. गले लगने के साथ ही उसने मेरा लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी.

मैंने पूछा- क्या पेलवाने का मन है?
वो बोली- हां भैया

हम दोनों में फिर से किस चालू हो गया. सब कुछ वैसे ही हुआ, बुर चाटना लंड चूसना … पर जब वो पीठ के बल लेटने लगी, तो मैंने कहा- बेटू आज मैं दूसरी पोजीशन तुम्हारी बुर पेलूंगा.
तब वो बोली- कैसे?
मैंने आंख मारते हुए कहा- घोड़ी बन जाओ.
वो हंसते हुए बोली- अब सही बोले हो … भैया आप घोड़ा … और मैं घोड़ी.

जब वो घोड़ी बन गयी, तो मैं अच्छे से उसकी बुर और गांड को चाटने लगा. फिर मैंने अपना लंड उसकी बुर में घुसा दिया. आज भी मेरी बहन को थोड़ा सा दर्द हुआ … मुझे भी हुआ क्योंकि चमड़ी का जख्म अभी भरा नहीं था. पर जब लंड खड़ा हो और बुर में आग लगी हो तो हर दर्द मजा देता है.

मैंने अपनी बहन को बहुत जबरदस्त तरीके से 15 मिनट तक पीछे से पेला.
फिर मैं बोला- अब तू मुझे पेल.
वो बोली- मैं कैसे पेलूं … लंड तो आपके पास है?
तब मैंने कहा- बेटू मैं लेटता हूँ, तू मेरे ऊपर बैठ कर ऊपर नीचे आगे पीछे करके अपनी बुर लंड पर रगड़ कर मजा ले.

उसने वैसा ही किया और खूब मस्ती के साथ चुदती रही. मैं उसकी चूचियों के निप्पलों के साथ खेलता रहा. फिर जब मेरा माल निकलने को हुआ तो मैंने उसे बताया.
वो बोली- रुको भैया, सुबह का नाश्ता मैं तुम्हारे रस से करूंगी.
मैं खुश हो गया.

वो उठ गई और मेरे लंड को चूसने लगी. कोई दो मिनट बाद मेरा लंड का रस लावा की तरह निकलने लगा और वो उसे पीती गयी. वो चटखारा लेते हुए बोली- भैया, आपने मुझको ये पहले क्यों नहीं दिया?
मैंने बोला- था तो तेरे पास ही … पर हर काम का एक समय होता है. जैसे फल के पकने का इन्तजार करने पर ही फल मीठा लगता है.
वो हंस दी- मतलब मैं पक गई हूँ.
मैं भी हंस दिया.

फिर हम दोनों उठे, बिस्तर सही किया, ठंड थी, तो दोनों ने पूरे कपड़े पहने और घर का थोड़ा बहुत काम किया. फिर मैं नहाने चला गया … क्योंकि अभी वो खाना बना रही थी. मैं नहा कर बाहर नंगे ही निकल आया … क्योंकि अब तो कोई शर्म बची नहीं थी.

श्वेता मुझे नंगा देख कर बोली- भैया आज तौलिया भूल गए थे क्या?
मैंने कहा- भूला कुछ नहीं … बस अब तो नंगे ही अच्छा लग रहा है.

वो मेरे पास आई और मेरे लिप पर चुम्मी देकर झुक गई और मेरे लंड को चूम लिया.

मैं उसको पकड़ने चला, तो बोली- अभी नहीं … मुझको खाना

का इंतज़ार कीजिएगा कि कैसे मैंने अपनी बहन की गांड मारी.

बनाना है … और मुझे भी नहाना है. आप अन्दर जाइये, कपड़े पहनिए … नहीं तो ठंड लग जाएगी.

मैं कपड़े पहन कर बैठ गया और वो काम खत्म करके नहा कर आ गई. वो बाथरूम से टॉवल लपेट कर आई और उसने मेरे सामने आते ही टॉवल खोल दिया.

आह … बला की खूबसूरत सुंदर मेरी बहन नंगी मेरे सामने खड़ी इतरा रही थी. मैं उठा और उसकी तरफ लपका.
तो वो बोली- भैया वहीं बैठे रहो.
मैंने कहा- एक पप्पी बस तेरी और तेरी बुर की.
वो इतरा कर बोली- हम्म … सिर्फ एक ही लेना.

मैं उठा, पहले मैंने अपनी बहन के ऊपर के होंठों को चूमा, फिर नीचे बैठ कर नीचे बुर के होंठों को थोड़ा गहराई तक चूसा.
उसने ‘सीई…’ की आवाज के साथ कहा- बस भैया हो गया … पूरा दिन बाकी है.

फिर उसने कपड़े पहने, हल्का मेकअप लगाया और बोली- भैया मैं कैसी लग रही हूँ.
मैंने कहा- बिल्कुल मेरी दुल्हन लग रही हो.
मेरे ऐसा कहने पर वो शर्मा गयी.

फिर हम दोनों ने खाना खाया और बाहर घूमने चले गए. दो घंटे बाद वापस आते समय मैंने अनवांटेड 72 की एक टॅबलेट खरीद ली और एक पैकेट कंडोम भी ले लिया.

घर आते ही कमरे का दरवाजा लॉक किया और अन्दर चले गए. मैंने उसे दवा और कंडोम दिए, तो उसने मुस्कुराते हुए ले लिए.

वो दवा और कंडोम बैग में रखकर कपड़े उतारने लगी.
मैंने बोला- रुको.
वो बोली- क्या हुआ?
तब मैंने कहा- आज से तेरे कपड़े मैं ही उतारूंगा.
वो बोली- अच्छा मेरे प्यारे भैया.

वो खड़ी हो गयी. मैंने उसकी जैकेट उतार दी. फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को उतारा. फिर जींस उतार दी. अब वो मेरे सामने सिर्फ पैंटी ब्रा में थी.
वो बोली- बस..!
मैं बोला- हां हो गया.

उसने मेरे सामने पैंटी ब्रा भी उतार दी और बोली कि आपने ही तो नंगे रहने को कहा था.
तब मैंने कहा- बेटू अभी ठंड बहुत है.
वो बोली- ठीक है!

उसने बिना ब्रा पैंटी के ही लोवर और टी-शर्ट पहन ली. मैंने भी बिना अंडरवियर के लोवर टी-शर्ट पहन लिया.

मैंने उससे बोला- तुम दवा खा लो, नहीं तो मामा से पापा बन जाऊंगा.
वो हंसी और बोली- भैया ऐसा हो जाए तो अच्छा ही है … क्योंकि अब मैं सिर्फ आपकी ही रहना चाहती हूँ.
मैंने कहा- ठीक है बेटू … तब का तब देखा जाएगा … अभी तो मजे करो.
वो बोली- ठीक है.

फिर हम दोनों रजाई में बैठ गए, वो मेरी गोद में बैठी थी. मैं उसे पेट से पकड़े हुए था.

तब उसने पूछा- भैया आप मुझे पहले से ही पेलना चाहते थे?
मैं बोला- नहीं बेटू … ये तो दो दिन में पता नहीं सब कैसे हो गया.
मैं थोड़ा उदास हो गया.

वो बोली- भैया आप बुरा न माने, तो एक बात कहूँ?
मैंने कहा- मैंने तेरी कोई बात का कभी बुरा माना है?
वो बोली- भैया, मेरी सहेलियां स्कूल में ऐसे ही सेक्स को लेकर उल्टी सीधी बात करती थीं. पर मैं उनसे दूर रहती थी. लेकिन एक दिन मेरी एक सहेली ने मुझे पढ़ने को एक किताब दी, जिसमें सेक्स का मजा दिया हुआ था. पर मैं डरती थी और आपसे बहुत प्यार करती थी. इसलिए बाहर कोई गलत काम नहीं किया.

मैं उसे बड़ी तल्लीनता से सुन रहा था.

वो- एक दिन जब आप नहा कर टॉवल लपेट कर निकले, तो आपका टॉवल गिर गया था. उस समय मैंने आपको नंगा देख लिया था … बस उसी दिन से पता नहीं क्यों मेरा मन न तो पढ़ाई में लगता था … और न ही किसी काम में. मुझे हर समय आपका लंड दिखता था. उस रात जब आपका लंड खड़ा हो गया था, तो मुझे पता नहीं क्या हो गया … और मैंने अगली रात न चाहते हुए भी आपका लंड पकड़ लिया.

मैंने कहा- बेटू कोई बात नहीं … जो हुआ अच्छे के लिए हुआ. देख न … अब तू भी खुश है और मैं भी.
श्वेता बोली- हां भैया … अब अच्छा लग रहा है.
मैंने कहा- अब अच्छे से पढ़ाई करना और इस साल 11 वीं और अगले साल 12 वीं में अच्छे से नंबर ला कर पास होना.
वो बोली- वादा भैया … आपको निराश नहीं करूंगी. बस तुम मुझे ऐसे ही प्यार करते रहना.

तब मैंने उसकी चुचियों को पकड़ते हुए कहा- अच्छा मेरी जान.
मैं अपनी मस्त बहन की मस्त चुचियां दबाने लगा.
श्वेता बोली- भैया और कितने तरह से चुदाई होती है?
मैंने उसे बताया- देखो होना तो बस एक ही काम है … बुर और गांड में लंड का घुसना … पर इसको जिस तरह से भी मजेदार बना दिया जाए, वो ही पोजीशन सही होती है और वो ही मस्त तरीका होता है.

मेरे मुँह से गांड शब्द सुनते ही वो बोली- भैया लंड को गांड में भी पेला जाता है क्या?
तब मैंने बताया कि उसे गांड पेलना नहीं … गांड मारना कहते हैं. पर क्यों कहते हैं, ये मुझे भी नहीं पता.

उसने बोला- तो भैया, आज आप मेरी गांड भी मार दो.
ये कहते हुए उसने मुझे आंख मार दी.
मैंने कहा- मैं तेरी गांड मार तो दूंगा, पर क्या तू दर्द सह पाएगी? क्योंकि गांड में ज्यादा दर्द होगा.
वो बोली- भैया मुझे आप पर यकीन है. आप आराम से मेरी गांड में लंड कर लेंगे.
मैं बोला- हां मैं तो कर लूंगा, पर तू दर्द सह पाएगी?
वो बोली- आपके प्यार के लिए मैं हर दर्द सहन कर लूंगी.
मैंने कहा- ठीक … अब तेरी गांड मारने की तैयारी करूंगा.

आज की सेक्स स्टोरी बस इतनी ही थी. मेरी अगली सेक्स कहानी

Hello dosto ap jyada se maje lene k liye channel ka link share kare taki member bade

Aur mai aur jyada apk hindi chudai ki kahani upload karu

Aur ho sake to member bhi add dijiye thank u👇👇👇

Skip to content

Free Hindi Sex Stories

अन्तर्वासना की हॉट हिंदी सेक्स कहानियाँ

 Menu

दोस्त की बीवी बच्चे की चाहत में चुदी

04-05-2020 by देव कुमार

भाभी की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने अपने दोस्त की बीवी की चुदाई करके उसे गर्भवती किया. मेरे दोस्त की शादी के पाँच साल बाद भी बच्चा नहीं हुआ था.

दोस्तो, मैं देव कुमार, छत्तीसगढ़ से हूं. ये भाभी की चुदाई की कहानी पांच माह पहले की है. मेरा एक दोस्त है, जो सरकारी नौकरी में है. उसकी शादी को पांच साल हो गया है, लेकिन उन दोनों को अब तक कोई बच्चा नहीं हुआ है.

एक दिन उसने मुझसे बोला कि कोई अच्छा सा डॉक्टर बताओ, जो बच्चों के बारे में इलाज करता हो.
मैंने उसे शहर की एक महिला डॉक्टर का पता बताया.

उसने मुझसे भी साथ चलने को कहा क्योंकि वह शहर में कार ड्राइव नहीं कर पाता था. मैं भी साथ में चला गया. कार को मैं ड्राइव कर रहा था. मैं और मेरा दोस्त आगे बैठे थे और मेरे दोस्त की बीवी यानि मेरी भाभी पीछे की सीट पर बैठी थी. भाभी की उम्र 23 साल फिगर 32-30-34 की थी. वो एकदम फिट और स्वस्थ सुंदर महिला थी.

उस दिन मैंने भाभी को पहली बार देखा था. वो बहुत ही सुन्दर थी.
मैंने भाभी को पीछे देखने वाले आईने में देखा, तो पाया कि वो भी मुझे ही देख रही थी. हम दोनों की नजरें मिलीं … लेकिन भाभी कुछ और ही सोच में डूबी थी.

हम लोग डॉक्टर के पास गए, तो मैंने कहा- मैं बाहर ही रहता हूं.
उसने मुझसे अन्दर चलने की जिद करते हुए कहा.
मेरे बार बार मना करने के बावजूद भी वो मुझे अन्दर ले गया.

फिर डॉक्टर मैडम ने दोनों का टेस्ट किया और दो दिन बाद फिर से आने को बोला.

उस दिन इसी सब में पूरा दिन बीत गया था. शाम को हम लोग वहां से निकले, घर आते आते रात हो गई.

दो दिन बाद हम लोग फिर हॉस्पिटल गए. डॉक्टर ने फिर से कुछ टेस्ट किए और बोली कि चार दिन बाद फिर से आना पड़ेगा.

हम लोग वहां से निकले, फिर रास्ते में हम सभी ने चाय नाश्ता किया और आगे चल दिए. एक जगह कार को रुकवा कर मेरा दोस्त एटीएम से पैसे निकालने के लिए चला गया. कार में भाभी और मैं ही थे.

मैंने भाभी से कहा- भाभी, आप अपना मोबाइल नंबर दो ना.
भाभी ने मुझे नंबर दे दिया.
मैंने उसको कॉल किया तो उसके फोन की घंटी बजी.

मैं अभी भाभी का नंबर सेव भी नहीं कर पाया था कि मेरा दोस्त वापस आ गया. मैंने गाड़ी स्टार्ट की और हम लोग घर की ओर रवाना हो गए.

कुछ देर बाद मेरे दोस्त ने कहा- मुझे रोज रोज छुट्टी नहीं मिलेगी. तो तुमको तुम्हारी भाभी को हॉस्पिटल लेकर जाना होगा.
पहले तो मैंने मना किया, लेकिन उसके बार बार बोलने के बाद मैंने हां बोल दिया.

मैंने घर आकर भाभी का नंबर सेव किया और वॉट्सएप में उसका स्टेटस देखा. क्या बताऊं दोस्तो . … भाभी ने अपने चार पांच फोटो अलग अलग पोज में स्टेटस में लगा रखे थे. मुझे नहीं पता था कि भाभी ने मेरा नंबर सेव किया है या नहीं.

मैंने दूसरे दिन देखा, दूसरे दिन अलग ही स्टेटस डाला था. मैं सिर्फ स्टेटस देखता था.

फिर तीसरे दिन मैंने नाइस पिक करके कमेंट किया तो उधर से तुरंत रिप्लाई आया- थैंक्यू.

मैंने उस दिन कुछ मैसेज नहीं किया. फिर से दूसरे दिन जब भाभी ने नया स्टेटस डाला, तो मैंने फिर से नाइस पिक करके कमेंट किया. उसने तुरंत रिप्लाई किया- थैंक्यू.

आज मैंने लिखा- क्या कर रही हो?
तो बोली- कुछ नहीं … बस मोबाइल देख रही थी … और आप क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- आपको याद कर रहा हूं.
उसने हंसने की इमोजी भेज दी.

उस दिन हमने मैसेज में बहुत बात की.

भाभी से अब मेरी काफी बातें होने लगी थीं. बातों ही बातों में भाभी ने एक दिन बताया कि मैंने अपना स्टेटस आपके लिए ही डाल देती हूं.
मैं समझ गया कि जरूर भाभी के दिल में मेरे लिए कुछ तो खिचड़ी पक रही है.

अगले दिन डॉक्टर के पास जाना था … तो मैं दोस्त के घर गया. उस समय मेरा दोस्त ड्यूटी जा चुका था. भाभी तैयार होकर बैठी थी. भाभी ने पीले रंग की साड़ी पहनी थी.
क्या बताऊं दोस्तो … ऐसा लग रहा था कि भाभी को अभी चोद दूं.
लेकिन बात कुछ आगे बढ़ी नहीं थी, इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा.

भाभी ने मुझसे चाय के लिए पूछा तो मैंने मना कर दिया. घर में सिर्फ मेरे दोस्त और भाभी ही रहते हैं, दोस्त के पिता जी भी नौकरी में हैं, इसलिए वो बाहर रहते हैं.

फिर हम दोनों घर से निकले. मैंने भाभी से अपने बगल की सीट पर बैठने को कहा तो बोली कि कुछ दूर चलने के बाद बैठूंगी, अभी पीछे बैठ रही हूं. आस पास के लोग सब देख रहे हैं.
मैंने बोला- ठीक है.

कुछ दूर जाने के बाद मैंने गाड़ी को रोका, तो भाभी आगे वाली सीट पर आकर बैठ गई.

मैंने गियर बदलते समय भाभी के हाथ पर मैंने धीरे से अपना हाथ रख दिया. भाभी ने कुछ नहीं कहा, तो मुझे लगा कि शायद भाभी भी यही चाहती है.

मैंने अपना हाथ खींच लिया और उसकी तरफ से किसी हरकत का इन्तजार करने लगा. मगर उसने कुछ नहीं किया.

इसके बाद हम लोग बातचीत करत

ई करने लगा था. मेरा दोस्त बहुत ज्यादा ड्रिंक करता था और नशे में धुत होकर सो जाता था. रात को जब वो सो जाता था, तो हम दोनों दूसरे कमरे में आकर चुदाई कर लेते थे.

एक दिन भाभी की मां आयी थी. उस रात को भाभी और मैं चुदाई कर रहे थे, तो ये उसकी मां ने देख लिया.

फिर क्या हुआ, मैं बाद में बताऊंगा. भाभी अभी प्रेगनेंट हो गई है. दोस्तों मेरी सेक्स कहानी बहुत लंबी है … पर एकदम सच्ची है. आपको मेरी भाभी की चुदाई की कहानी कैसी लगी …

े हुए हॉस्पिटल पहुंच गए.

डाक्टर मैडम के पास गए, तो टेस्ट के रिजल्ट आ गए थे.

डॉक्टर बोली- सब कुछ नॉर्मल है, जब आपका पीरियड आएगा … उसके पांच दिन बाद फिर से आना.

उस दिन हॉस्पिटल का काम जल्दी हो गया था. आज किसी तरह की जांच वगैरह नहीं होनी थी.

उसके बाद मैंने भाभी से बोला- चलो कहीं घूमने चलते हैं.
भाभी बोली कि कहां जाएंगे?
मैंने कहा- किसी होटल में चलते हैं.
इस पर भाभी बोली- क्या करोगे होटल जाकर?
भाभी सब कुछ जानकर अनजान बनी रही.

मैंने कहा- कुछ खाएंगे और आराम करेंगे.
ये कहते हुए मुझे थोड़ा डर लग रहा था कि कहीं भाभी को ये बात पसंद नहीं आई, तो वो मेरे दोस्त को बता देगी. इससे हो सकता था कि उसके यहां मेरा आना जाना बन्द हो जाए.

मैंने बात घुमाते हुए कहा- अच्छा चलो किसी गार्डन में चलते हैं.
इस पर भाभी ने हां कह दिया.

अब हम दोनों एक गार्डन में आ गए. वहां हम लोग एक घंटे घूमे, फिर शाम को घर आ गए.

मैंने भाभी को उसके घर छोड़ा और वापस निकल आया.

घर आकर मैंने भाभी को कॉल किया, तो बोली- चाय पी कर जाना था ना … आप यूं ही चले गए.
मैंने कहा- आपने मुझे रोका ही नहीं … चलिए ठीक है … मैं वापस आ जाता हूं … आप चाय बना कर रखो.
वो तनिक हंस कर बोली- ठीक है आ जाओ.

मैं फिर से उसके घर गया और भाभी ने मुझे चाय दी. मैं कुछ देर चाय पीते हुए भाभी से बात करता रहा. फिर मैं निकलने लगा, तो भाभी मुझे दरवाजे तक छोड़ने आई.

मैंने न जाने किस भावावेश में आकर पलट कर भाभी को एक किस कर दिया और उसके मम्मों को भी दबा दिया.
भाभी मेरी इस हरकत पर कुछ नहीं बोली बस एक हल्की सी आह निकालते हुए रह गई.

मैं मुस्कुराते हुए जल्दी से उसके घर से निकल गया. घर आकर मैंने भाभी को कॉल किया तो उसने फोन नहीं उठाया.

मैंने दोबारा लगाया, तो फोन रिसीव हुआ.

भाभी बोली- आप बहुत गंदे हो.
मैंने कहा- क्या हो गया भाभी?
भाभी- वही … जो आपने अभी मेरे साथ हरकत की थी.
इस पर मैंने कहा- मैंने तो कुछ नहीं किया था.

भाभी हंस दी. मैं समझ गया कि भाभी हंस गई माने पट गई.
फिर हम दोनों ने एक घंटे तक बात की.

मैंने शाम को भाभी को ‘आई लव यू..’ का मैसेज किया. भाभी ने इसका कोई जबाव तो नहीं दिया मगर वो मेरे इधर उधर की बातें करने लगी.

एक घंटे बाद मैंने फिर से ‘आई लव यू..’ का मैसेज किया.
इस बार उसने लिखा- क्या पागल हो गए हो?
मैंने कहा- भाभी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं … मैं आपसे मिलना चाहता हूं.

उसने मुझे इस बात का जवाब ही नहीं दिया. अब हम रोज बात करने लगे.

भाभी को भी मेरी इस बात की आदत हो गई थी. वो मुझसे खुल कर बात करने लगी थी.

मैं रोज भाभी को ‘आई लव यू..’ बोलता और भाभी चुप रह जाती.
फिर एक दिन भाभी ने भी ‘आई लव यू..’ बोल दिया.

मैंने भाभी से पूछा- मुझसे कब मिलोगी?
भाभी बोली कि रुको … बताऊंगी.

फिर एक दिन ऐसा हुआ कि मेरा दोस्त ऑफिस की तरफ से दो दिन के लिए टूर पर चला गया. उसने जाते समय मुझसे कहा कि यार मेरे घर पर तेरी भाभी अकेली है … उसका ख्याल रखना.
मैंने ओके कहा.

दोस्त चला गया तो मैंने भाभी को फोन किया.
कुछ देर बात हुई, तब मैंने कहा- आपके पतिदेव मुझसे आपका ख्याल रखने का कह गए हैं. मेरी कोई जरूरत हो तो बताओ.
भाभी बोली- हां मुझे आपकी जरूरत है … आज रात को मेरे घर आ जाना.
मैंने कहा- आज कोई ख़ास काम करवाना है क्या?
भाभी बोली- जब तुम्हें सब मालूम है, तो क्यों पूछ रहे हो.

मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि भाभी मुझे रात को अपने घर में बुला रही है.

मैं रात को मोटरसाइकिल से भाभी के घर पहुंचा और घर के बाहर ही रुककर उसे कॉल किया.
भाभी ने मुझसे कुछ देर के बाद आने का बोला. उस समय रात को दस बज रहे थे.

एक घंटे बाद मैंने फिर से फोन किया, तो भाभी बोली- दरवाजा खोल रही हूँ. फिर फोन करूंगी … तुम बिना शोर किये अन्दर आ जाना.

मैंने ओके कहा और उसके घर से कुछ दूर अपनी बाइक को एक जगह टिका दिया.
उसी के बाद कुछ देर बाद भाभी ने दरवाजा खोल कर मुझे कॉल किया कि आ जाओ … मैंने दरवाजा खुला छोड़ दिया है.

मैं बाइक को बिना स्टार्ट किये खींचता हुआ इधर उधर देखता हुआ उसके घर के बाहर आ गया. दरवाजा खुला हुआ था. मैंने बाइक को अन्दर करके दरवाजा बंद कर दिया. आस पास एकदम सन्नाटा था शायद मुहल्ले सब लोग सब सो गए थे.

मैं भाभी के घर में जाकर सीधा उसके बाथरूम में घुस गया और हाथ मुँह धोकर भाभी के रूम में आ गया.

भाभी लाल रंग के गाउन में बहुत सुंदर लग रही थी. मैं उसके करीब गया और उसको किस करने लगा. भाभी मुझे सहयोग करने लगी.

मैंने उसके गाउन को उतार दिया. अब मेरे सामने भाभी रेड कलर की ब्रा और पैंटी में थी. मैं उसे किस करते हुए मजा ले रहा था. साथ ही मैं उसके मम्मों को भी दबा रहा था.

भाभी भी मुझे किस करने में साथ देने लगी थी. मैंने इशारा किया, तो भाभी मेरी शर्ट की बटन खोलने लगी.

मैंने अपनी शर्ट और पैंट को उतार कर बाजू सोफे पर फेंक दिया. इसके बाद मैंने भाभी को बिस्त

र पर चित लेटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. मैं भाभी के दूधिया मम्मों को दबाने लगा. उसका एक हाथ अपने हाथ से पकड़ कर अपने अंडरवियर के अन्दर डाल दिया.

भाभी मेरे लंड को सहलाने लगी.

फिर मैंने भाभी और अपने सारे कपड़े उतार दिए. अब हम दोनों नंगे हो गए थे. मैं भाभी की चूचियों को चूसने लगा और हल्के हल्के से दांतों से काटने लगा. भाभी मस्त होकर मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए कुछ बड़बड़ा रही थी.

भाभी- आह जल्दी डालो जी … मुझे बच्चे के लिए चुदना है.
‘हां मेरे लंड से ही तुझे बच्चा मिलेगा.’

मैं उसकी बात का जवाब देते हुए धीरे से नीचे आ गया और उसके पेट पर किस करते हुए उसकी चूत तक पहुंच गया. मैंने भाभी की टांगों को खोला और चूत को किस किया. साथ ही चुत के आस पास के इलाके को किस किया.

इससे भाभी एकदम से गरमा गई और मादक सिसकारियां लेने लगी. उसने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और कहा- तुम्हारा तो मेरे पति के लंड से डबल है … मुझे इसका स्वाद लेना है.

उसकी बात सुनकर मैंने 69 की अवस्था ले ली. हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए. अब भाभी मेरा लंड चूस रही थी … और मैं उसकी चूत को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा था.

भाभी ने चुत को चूसने से मना कर दिया … तो मैंने एक उंगली को उसकी चूत में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा.

भाभी- आह अब मत तड़पाओ … जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो.

मैं सीधा हो गया और मैंने अपना लंड एक बार भाभी के मुँह में डाल दिया और कहा कि इसको चिकना कर दो.

भाभी मेरा लंड चूसने लगी.

वो लंड ऐसे चूस रही थी … मानो बहुत भूखी हो.

कुछ पल बाद मैं भाभी के ऊपर आ गया और उसके चूतड़ों के नीचे एक तकिया लगा दिया. भाभी ने अपने पैर फैला दिए. इससे उसकी चुत एकदम से किसी फूले पाव की तरह ऊपर उठ गई. मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रख कर धक्का लगाया. मेरा लंड चूत में नहीं जा सका. क्योंकि भाभी की चूत बहुत टाइट थी और बहुत गीली हो गई थी. लंड फिसल कर बगल में चला था.

इसके बाद भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत में सैट किया और आंखों से इशारा किया.

तो मैंने जोर लगाया और लंड को अन्दर पेल दिया. उसी पल मैंने भाभी के होंठों पर अपने होंठ जमा दिए और उसको किस करने लगा. भाभी को लंड घुसने से दर्द हो रहा था वो चिल्लाना चाहती थी लेकिन मेरे होंठों के ढक्कन के होने से वो चिल्ला न सकी.

कुछ पल बाद मैंने होंठों को हटाया, तो बोली- रुक जाओ … मुझे दर्द हो रहा है. जरा आराम से करो.

मैंने ओके कहा और अब मैं धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगा.

कुछ ही देर में चिकनाई हो जाने से लंड मस्ती से चुत में सटासट जाने लगा. अब भाभी भी पूरा जोश में आ गई थी. वो अपने चूतड़ों को ऊपर उठा उठा कर चुद रही थी.

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और धकापेल चुदाई चलने लगी.

कोई दस मिनट चुत चोदने के बाद मैंने भाभी को अपने ऊपर आने को कहा. उसे ओके कहा तो मैं नीचे लेट गया.

भाभी मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे लंड को अपने चूत में से डालने लगी और बोली कि तुम्हारा दोस्त तो मुझे दो मिनट से ज्यादा ही नहीं चोद पाता है.

वो लंड चुत में लेकर ऊपर नीचे होने लगी. मैं भाभी की चूचियों को दबा रहा था.

कुछ देर बाद भाभी की चूत से पानी निकलने लगा और वो मेरे ऊपर ही लेट गई.

पांच मिनट बाद मैं पलंग से नीचे उतरा और भाभी को भी पलंग के कोने में खींच लिया. इधर लाकर मैंने उसकी दोनों टांगों को ऊपर उठाया और उसकी चूत में लंड डाल कर तेजी से चोदने लगा.

थोड़ी देर चोदने के बाद मैंने भाभी को घोड़ी बना कर चोदा. इस तरह आधा घंटा बाद भाभी को मैंने फिर लेटा दिया और चुदाई करने लगा.

भाभी अब तक तीन बार गरम होकर ठंडी हो चुकी थी.

मैंने भाभी से कहा- मेरा होने वाला है … किधर निकालूं?
भाभी बोली- मेरी चूत में ही डाल दो … क्योंकि मुझे बच्चा चाहिए.

मैंने भाभी की चूत को अपने वीर्य से भर दिया. भाभी ने मुझे अपनी बांहों में कसकर पकड़ लिया और भाभी भी झड़ गई.

उस रात मैंने भाभी के साथ रात भर चुदाई की.

सुबह पांच बजे मैं भाभी के घर से निकलने को तैयार हो गया. भाभी ने दरवाजा खोल कर देखा, तो आस पास के लोग कोई नहीं उठे थे. मैं बाइक लेकर अपने घर आ गया. घर आकर मैंने भाभी को फोन किया.

वो कहने लगी कि मेरी टांगों में और बाकी शरीर में बहुत दर्द हो रहा है.
मैं बोला- आज आप आराम करो.

उस दिन ग्यारह बजे के करीब उसकी सास और ससुर घर आ गए.
उसकी सास ने भाभी की मालिश की, तब जाकर उसका दर्द कम हुआ.

अब भाभी मुझसे रोज बात करती थी. हम दोनों को जब भी मौका मिलता, खूब चुदाई करते थे.

अब भाभी को मैं ही हॉस्पिटल ले जाता हूं. मुझे उसका पति अपनी बीवी को हॉस्पिटल ले जाने के लिए बुलाता है.

हम दोनों ने हॉस्पिटल जाने के बहाने होटल के रूम में भी जाकर खूब चुदाई की. जब मेरा दोस्त घर नहीं होता, तब मैंने भाभी के घर रात को भी रुक कर उसको चोदता था.

कुछ दिन बाद तो ऐसा हुआ कि मेरे दोस्त के घर रहते हुए ही मैं भाभी की चुदा

बुर्कानशीं भाभी की चूत चुदाई करके प्यास बुझायी
21-08-2019 by आर्यन पांडेय
सिनेमा हॉल में मेरी बगल में एक बुर्कानशीं भाभी बैठी थी. अँधेरे में उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. हमारी दोस्ती हो गयी. फिर उसके बाद उस पर्दानशीं भाभी की चुदाई मैंने कैसे की?

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को नमस्कार.
दोस्तो, मेरा नाम आर्यन है, ये नाम बदला हुआ है. मैं लखनऊ से हूँ. मेरी उम्र 25 साल और कद 5 फुट 7 इंच का है. मेरा रंग एकदम साफ है.

मैं आज अपनी पहली सेक्स कहानी लिख रहा हूँ. अगर कोई गलती दिखे, तो माफ कीजिएगा.

ये कहानी एक सच्ची घटना है, कोई कल्पना नहीं है. बात दो साल पहले की है, जब मेरी उम्र 23 साल थी. लखनऊ शहर में ही मेरा घर है. मैं एक बार शॉपिंग करने अपने दोस्तों के साथ मॉल में गया था. वहां से हम सभी दोस्तों ने मूवी देखने का प्लान बनाया. हम लोग उसी मॉल के सिनेमा हॉल में टिकट लेकर मूवी देखने के लिए घुस गए. ये एक हॉरर मूवी थी. जब हम लोग हॉल में घुसे, तब तक मूवी हो चुकी थी. हम सभी अपनी सीटों पर बैठ गए और मूवी देखने में मस्त हो गए.

हॉल में हॉरर मूवी के कारण कुछ ज्यादा ही अँधेरा था. तभी अचानक मेरे हाथ से किसी के हाथ का स्पर्श हुआ. मैंने महसूस किया कि ये एक महिला का हाथ था. मैंने बगल में देखा, तो वो एक नकाब पहने हुए महिला थी. हालांकि उसने अपने चेहरे से नकाब हटाया हुआ था, जिससे मैं उसका चेहरा देख सका. वो महिला अभी अपनी आंखें स्क्रीन पर गड़ाए हुए फिल्म देखने में मशगूल थी.

मैंने ध्यान से देखा कि उस महिला के नैन नक्श बहुत ही सुंदर थे. वो शायद अपनी किसी महिला रिश्तेदार या फ्रेंड के साथ आई थी. वो बस दो ही लोग थे, क्योंकि उन दोनों के उस तरफ की कुछ सीटें खाली थीं.

कुछ देर के बाद जब अचानक से स्क्रीन पर एक डरावना सीन आया, तो उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. क्योंकि मैंने अपना हाथ उसी चेयर के हैंडल पर रखा हुआ था. उसने मेरे हाथ को कसके दबा लिया. मुझे समझ आ गया कि ये सीन देख कर डर गई है, इसलिए उसने ऐसा किया था.

एक पल बाद उसका हाथ कुछ ढीला हुआ, तो मैंने उनसे धीरे से पूछा- आप घबरा गई थीं क्या?
उन्होंने मेरी तरफ देखा और धीरे से उत्तर दिया- हां.
हालांकि अभी तक उनका हाथ मेरे हाथ पर ही रखा था. जब उन्होंने खुद ही अपना हाथ नहीं हटाया, तो मैंने भी उनके हाथ को हटाने का प्रयास नहीं किया.

कुछ देर बाद जब मूवी में ब्रेक आया, तो उनके साथ की महिला कुछ खाने आदि का सामान लेने बाहर चली गई. इधर मेरे दोस्त भी बाहर चले गए. मेरे दोस्तों ने मुझसे भी बाहर चलने के लिए, लेकिन मैंने मना कर दिया.

अब मैंने उन भाभी से बात करना शुरू की. वो भी मुझसे बात करने लगीं. उनसे बातों ही बातों में परिचय हो गया. वो बड़ी मधुर स्वभाव की मस्त भाभी थीं.

अचानक उन्होंने मुझसे मेरा नम्बर मांगा. मैं एक बार तो चौंक गया, फिर मैंने उनको अपना नम्बर दे दिया.

ब्रेक खत्म हो गया था. मेरे दोस्त और उनकी साथ की महिला वापस आ गए थे. मैंने अपना हाथ हिलाया, तो भाभी ने भी अपना हाथ हटा लिया. हम सब फिर से मूवी देखने लगे.

एक मिनट बाद ही भाभी ने फिर से अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया. अबकी बार मैंने अपना हाथ ऐसा रखा था कि उनकी हथेली मेरी हथेली से चिपक गई. मैं अपने हाथ को फैलाए हुए ही रखे था.

एक मिनट बाद भाभी ने मेरी उंगलियों में अपनी उंगलियां फंसा दीं. मैंने उनकी तरफ देखा, तो वे स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए थीं और उनके हाथ की उंगलियां मेरी उंगलियों में बार बार कसी जा रही थीं. अब मैंने भी उनकी हथेली को अपनी हथेली से जकड़ लिया. मैंने महसूस किया कि भाभी की हथेली मेरी हथेली से खेलने लगी थी. मूवी के दौरान ही हमारी अच्छी दोस्ती हो गई.

मैंने उनके कान में धीरे से कहा भी कि आपकी हथेली बड़ी मुलायम है.
उन्होंने भी मुझे देखा और मुस्कुरा कर अपनी हथेली को दबा दिया. शायद ये एक इशारा था.

मैंने अपना दूसरा हाथ भी उनके हाथ पर ऊपर से रख दिया. यूं ही हथेली से रगड़ सुख लेना देना चलता रहा. मैंने अपनी कोहनी से उनकी चूची को दबाने का प्रयास किया, तो भाभी ने खुद को दूसरी तरफ सरका लिया. मैं समझ गया कि अभी तवा गर्म नहीं हुआ है.

मैं भी शान्ति से उनके हाथ का मजा लेता रहा. एक बार मैंने फिर से कोशिश की और इस बार मैंने भाभी का हाथ अपनी जांघ पर रखने का प्रयास किया, तो भाभी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा कर मेरे लंड को टच करके जल्दी से अपने हाथ को हटा लिया. मैं भी गनगना गया.

कुछ देर बाद हम लोग मूवी देख कर बाहर निकले, तो उन दोनों ने अपने नकाब डाल लिए थे. मुझे बाहर निकलने की आपा-धापी में समझ ही नहीं आया कि इन दोनों में से कौन सी भाभी मेरे साथ सैट हुई थी. मैं मायूसी से उन दोनों को देखता रहा, मगर उनकी तरफ से कोई सिग्नल नहीं मिला.

वो दोनों चली गईं और मैं भी अपने घर आ गया. घर पहुंचने के थोड़ी देर बाद ही मेरा फ़ोन बजा.

मैंने देखा कि कोई अनजान नम्बर से कॉल थी. मैंने पूछा- कौन?

वो नार्मल हुईं, तो मैंने एक और जोर का धक्का लगा दिया. इस बार मेरा पूरा लंड भाभी की चूत के अन्दर घुस गया था. इस झटके से भाभी की आंखें बाहर आ गईं.

मैं लंड पेल कर रुक गया और भाभी को सहलाने और चूमने लगा. कुछ पल यूं ही रुके रहने के बाद मैंने आराम आराम से लंड को अन्दर बाहर करना चालू कर दिया.

जब भाभी को लंड से मजा मिलने लगा, तब उनकी गांड हिलने लगी और वो भी अपनी गांड उठाते हुए लंड का जवाब देने लगीं.
अब वो बोलने लगीं- आह जोर जोर से करो.

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और भाभी को धकापेल चोदने लगा. पूरे कमरे में घपघप की आवाजें आने लगीं. भाभी को बेहद मजा आ रहा था और उनके मुँह से लगातार मादक कराहें निकल रही थीं.

मैं करीब दस मिनट तक भाभी को पेलता रहा. इसी बीच वो जोर से अकड़ कर पूरा झड़ गईं. भाभी की चूत से गर्म पानी का मानो फुहारा सा निकल पड़ा, जिससे मेरा लंड एकदम सटासट अन्दर बाहर होने लगा. मैं भाभी को और जोर जोर से चोदने लगा.

कुछ पल बाद मैंने अपना लंड निकाल लिया. मैंने भाभी से पूछा- लंड चूसोगी?
भाभी तो जैसे मेरे इस सवाल का इन्तजार कर रही थीं. उन्होंने मेरा लंड झट से अपने मुँह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगीं.

मुझे लंड चुसवाने में मजा आने लगा. भाभी ने मेरा लंड चूसते हुए अपनी चूत में उंगली करना शुरू कर दी. ये देख कर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.

थोड़ी देर बाद मैंने भाभी की फिर से चुदाई शुरू कर दी. कोई दस मिनट बाद भाभी फिर से झड़ने लगीं, तो इस बार मेरा भी माल निकलने वाला था.
मैंने भाभी का दूध चूसते हुए उनसे पूछा- किधर लेना है?
भाभी मुझे दूध पिलाते हुए बोलीं- आह अन्दर ही निकाल दो मेरी जान.

बस 10-15 तगड़े शॉट के बाद मेरा भी वीर्य भाभी की चूत में निकल गया.

स्खलन के बाद हम दोनों एक दूसरे से गले लगकर लेटे रहे.

फिर मैंने भाभी को चूमते हुए पूछा- कैसा लगा?
भाभी ने मुस्कुरा कर कहा- जिंदगी में ऐसी चुदाई मैंने कभी नहीं की; मुझे बेइंतेहा मजा आया. तुम वास्तव में बड़े मस्त हो.

थोड़ी देर बाद हम लोगों ने फिर से चुदाई की. इसके बाद मैंने कपड़े पहने और बाहर आ गया. भाभी भी कपड़े पहन कर मुझसे रुकने के लिए कह कर किचन में चली गईं.
उन्होंने चाय चाय बनाई और बाहर आकर मेरे साथ चाय पी. अब मैं उनको चूम कर उधर से चला आया.

अब जब भी मुझे मौका मिलता है, भाभी से फोन पर बात करके हम लोग चुदाई कर लेते हैं.

आपको बुर्कानशीं भाभी की चुदाई की कहानी कैसी लगी अपने मेल जरूर कीजिएगा. आपके प्यार का इन्तजार करूँगा और जल्द ही एक नई सेक्स कहानी लेकर आऊंगा

उस तरफ से एक महिला की आवाज थी. मैं समझ गया कि भाभी ही हैं.
उन्होंने अपना नाम बताया.

मैं बोला- आपके नाम की तरह आप भी बहुत हसीन हो.
उन्होंने मेरी बात का कोई उत्तर न देते हुए कहा- ये मेरा व्हाट्सएप्प नम्बर है. अभी रखती हूँ, बाद में बात करेंगे.
इतना कह कर भाभी ने फोन काट दिया.

मैंने उनका नम्बर सेव कर लिया और उनके नम्बर पर व्हाट्सैप चैक करने लगा. मुझे भाभी की डीपी देखने की जल्दी थी लेकिन उनकी डीपी में कुछ उर्दू में लिखा हुआ एक धार्मिक सा लगने वाला शब्द लिखा था.

मैंने हाय लिख कर उन्हें मैसेज कर दिया.

रात को भाभी ने मेरा मैसेज पढ़ा और उनका जबाव आया. फिर हमारी बात होने लगी. अब हम दोनों के बीच मैसेज का सिलसिला चल पड़ा.

कोई दस दिन बाद एक दिन उनका फ़ोन आया. उस दिन वो बहुत उदास लग रही थीं.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
भाभी बोलीं- कल मिलिए.. तब बताते हैं.
मैंने कहा- हां हां, आ जाता हूँ.. बताइए किधर आना है?

भाभी ने मुझे पता बताया और ठीक समय पर आने को कहा. भाभी ने ये भी कहा कि आप आने के बाद मिस कॉल दे देना. मैं सामने दिख जाऊंगी.

मैं उनके दिए हुए पते पर, सही समय पर पहुंच गया. मेरे सामने एक घर था. मैं कुछ सोच कर दूर खड़ा हो गया और मैंने उनको मिस कॉल दे दी. शायद वो उस समय फोन लिए ही मेरे फोन का इन्तजार कर रही थीं.

अगले ही पल भाभी गेट खोल कर बाहर आईं. आह क्या गजब की परी लग रही थीं. इस वक्त भाभी ने नकाब नहीं ओढ़ा था. इसलिए उनका 36-30-40 का फिगर सामने बड़ा ही मस्त दिख रहा था. भाभी भरे हुए शरीर की मालकिन थीं.

मैं उनको देखता ही रह गया. भाभी ने भी मुझे देख लिया था और उन्होंने हाथ के इशारे से अन्दर आने को कहा.

मैंने इधर उधर देखा और झट से उनके घर के खुले दरवाजे के अन्दर घुस गया.

मैं उनके घर के अन्दर गया तो मैंने पूछा कि घर पर कोई नहीं दिख रहा है, क्या आप अकेली रहती हैं?
भाभी बोलीं- मेरे शौहर बाहर गए हैं.

मैंने सोफे पर बैठते हुए उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा.
भाभी बोलने लगीं- मेरे पति काम के सिलसिले में ज्यादातर बाहर ही रहते हैं और वे मुझे ज्यादा वक्त नहीं दे पाते हैं. मुझे अकेलापन काटने को दौड़ता है.. इसलिए मैं उदास हो जाती हूँ.

भाभी इतना बोलते ही रोने लगीं. मैंने उठ कर भाभी के आंसू पौंछे. भाभी के आंसू पौंछने के कारण मैं उनके करीब हो गया था. इसी वजह से भाभी ने मेरे सीने पर अपना सर रख दिया. मैंने भाभी को गले से लगा लिया. अब मैं उनकी पीठ को सहलाने लगा था.

भाभी लगातार सुबक रही थीं. मैं उन्हें चुप कराने का प्रयास करने लगा और उनको सहलाता रहा.

जब भाभी चुप हुईं, तो वो मुझे किस करने लगीं. मैं भी उनका पूरा साथ दे रहा था.

भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और अन्दर ले जाने लगीं. मैं समझ गया कि ये मुझे बिस्तर पर ले जाना चाहती हैं. मैं उनके साथ खिंचा चला गया.

हम दोनों अन्दर बेडरूम में आ गए और बिस्तर पर बैठ गए. भाभी ने मेरे सीने पर सर रखा, तो मैंने लेटते हुए उनको अपने साथ लिटा लिया. वो मुझसे चिपक कर लेट गई और मुझे चूमने लगीं. मैंने धीरे से उनके बड़े बड़े चुचों को सहला दिया. उन्होंने आह भरी और मुझे चूचे सहलाने के लिए मेरे हाथ को अपने हाथ से दबा दिया. मैं उनके मम्मों को भींचने लगा, वो गर्म होने लगीं.

मैंने भाभी को बिठाया और उनका कमीज निकाल दिया. उन्होंने खुद मेरी मदद करते हुए अपने कुरते को उतर जाने दिया. भाभी मेरे सामने ब्रा में बहुत ही सुंदर लग रही थीं. मैंने उनके पजामे को भी उतार दिया. भाभी ने पजामे के नीचे नीचे कुछ नहीं पहना था.

फिर मेरे कपड़े भाभी ने खुद निकाले. भाभी ने मुझे नंगा कर दिया था. मैंने भी भाभी की ब्रा को निकाल दिया.

जब भाभी ने मेरा लंड देखा, तो वो बड़ी हैरानी से बोलीं- हायल्ला इत्ता बड़ा.. मेरे शौहर का बहुत छोटा सा है.. ये तो बहुत बड़ा है.
मेरा लंड 7 इंच का है और 3.5 इंच मोटा है. वो मेरा लंड देख के पागल हो गईं.

मैंने उन्हें धक्का देकर लिटा दिया. अब मैं भाभी के निप्पलों को बारी बारी से चूसने लगा. भाभी के मुँह से कामुक आवाजें आने लगीं.

मैं भाभी के बदन को चूमने लगा और धीरे धीरे भाभी की चूत पर मैं अपना मुँह ले गया.

आह क्या साफ़ चूत थी … बिना बाल की. एकदम मक्खन जैसी मुलायम. मैंने पूछा, तो मालूम हुआ कि आज ही भाभी ने साफ़ की थी.

जैसे ही मैंने भाभी की चूत को मुँह लगाया, उनका शरीर अकड़ने लगा. थोड़ी देर तक मैंने भाभी की चूत चाटी. जब भाभी का पानी निकलने लगा, तो वो एकदम से निढाल हो गईं.

मैं उनकी चूत को बदस्तूर चाटता रहा. उनकी चूत कुछ ही देर में फिर से गर्म हो गई.
अब भाभी बोलने लगीं- देर मत करो.. प्लीज़ अन्दर डाल दो.

मैंने देर न करते हुए अपना लंड का टोपा उनकी चूत पर रखा और धक्का लगा दिया. क्या बताऊं उनकी टाइट चूत में ‘करर..’ की आवाज आई और वो रोने लगीं. अभी मेरा सिर्फ टोपा ही अन्दर गया था.

फिर मैं उनकी चुचियों को चूसने लगा और कान पर किस करने लगा. उनका दर्द कुछ थमा और जब

गर्लफ्रेंड की सहेली और अम्मी की चूत चुदाई
11-05-2020 by सुमीत गुप्ता
मैंने अपने पड़ोस की एक लड़की से दोस्ती की, गर्लफ्रेंड बनायी. उसकी एक सहेली थी शादीशुदा … मेरी गर्लफ्रेंड की सहेली ने कैसे मुझसे अपनी चूत चुदवायी और उसके बाद …

मेरी ये पहली और एकदम सच्ची कहानी है, जो सेक्स में सही से क्रिया नहीं कर पाते उनके लिए भी ये कहानी मददगार साबित हो सकती है।

स्टोरी थोड़ी लंबी है लेकिन आशा करता हूँ थोड़ा सब्र रखेंगे तो कहानी में बेहद मज़ा आएगा।

मेरी हाइट 6 फ़ीट है मैं मेरठ, उत्तर प्रदेश से नाम सुमित और मैं अपनी कॉलोनी में पतंगबाजी में सबसे अच्छा हूँ, यहां तक कि जब भी मैं पतंग उड़ाता हूँ तो आस पास के सब लोग पेच लगाने से मन कर देते हैं.

हमारे पड़ोस में एक लड़की है आसिफा; उम्र 19-20 साल होगी; दूध सी गोरी, बहुत ही प्यारी, जो भी देखे प्यार हो जाये, बला की खूबसूरत! और उसके भाई ज़ुबैर सबसे छोटा और अय्यूब जिसकी उम्र 18 साल के आसपास है. उसको पतंगबाज़ी का बहुत शौक है, वो हमेशा जब भी पतंग उड़ाने छत पर आता, अधिकतर आसिफा भी आती।

एक बार वो पतंग उड़ा रहे थे और मैं जैसे ही छत पर पहुँचा तो अय्यूब ने ललकारा. मैंने भी अपनी पतंग उड़ाई और उसका पतंग आसानी से काट दिया. इस तरह उसकी 3 पतंग कट चुकी थी.

इतने पतंग काटने से ज़ुबैर छोटा होने के कारण रोने लगा. तो आसिफा ने इशारे में मुझसे रिक्वेस्ट की कि मैं अपनी पतंग कटवा लूं.
पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया. लेकिन जब उसने दोबारा रिक्वेस्ट की तो पता नहीं क्यों मैं इग्नोर नहीं कर पाया.

उसके बाद अय्यूब ने मेरी 2 पतंग लगातार काट दी जिससे ज़ुबैर एकदम खुश हो गया।
और आसिफा ने स्माइल करके थैंक यू कहा।
पता नहीं क्यों उसकी स्माइल में कुछ अलग ही फील हुआ. मेरे गलत विचार नहीं थे; उसके लिए एक प्यार की फीलिंग आ रही थी।

फिर मैं भी मौका देख कर उसको छुप कर देखने लगा और जब वो छत पर होती तो पहुँच जाता छत पर, हम जब भी एक दूसरे को देखते बस स्माइल करके रह जाते थे।
इससे मन में अंदर फीलिंग्स बढ़ती जा रही थी।

एक दिन इशारे में बहुत ही हिम्मत करके उससे हेलो कहा।
वो एकदम नीचे चली गयी।

उसके बाद दोबारा मेरी हिम्मत नहीं हुई. मैंने उसको देख कर स्माइल करना छोड़ दिया और उसकी तरफ देखता भी नहीं था।

एक दिन मैं और मेरा दोस्त रोहित (दवाई की कंपनी में सेल्स का काम करता है) पतंग उड़ा रहे थे कि अय्यूब की बहुत सारी पतंग हम लोग काट चुके थे. थोड़ी देर में एक बॉल हमारी छत पर आई, वो अय्यूब के घर से आयी थी. तो रोहित ने बिना सोचे वो बॉल वापस फेंक दी।

मैंने देखा कि आसिफा बॉल लेकर खड़ी है. इससे पहले कोई समझ पाता मैं फिर पतंग उड़ाने लगा।

वो बॉल थोड़ी देर में दोबारा आयी तो मुझे लगी. मैंने देखा रबर की बॉल थी, फटी हुई थी उसमें एक कागज था।
तो वो बॉल मैंने रोहित के सामने अपने पॉकेट में रख ली.

जैसे ही रोहित गया, मैंने वो कागज़ निकाला बॉल से!
उसमें आसिफा ने सॉरी नोट लिखा- सॉरी, उस दिन एकदम डर गई थी. समझ नहीं आया था कि क्या करूँ. तो मैं जल्दी से नीचे चली गयी. फिर अगले दिन हम सॉरी बोलना चाह रहे थे लेकिन आप हमें देख ही नहीं रहे थे.
और नीचे फोन नंबर लिखा हुआ था।

मैंने एकदम नंबर सेव करके व्हाट्सएप्प पे उसको मैसेज भेजा. लेकिन उसको रिसीव नहीं हुआ. इन्तजार करते करते मैं सो गया, पता ही नहीं चला.
सुबह देखा तो उसका गुड मॉर्निंग का मैसेज पड़ा हुआ था।

मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गयी कि भोले बाबा ने सुन ली.
फिर हम चैट करने लगे।
पूरा पूरा टाइम हम आपस में बात करने लगे. जब हम छत पर होते तो इशारों में बातें करने लगे. मुझे उससे प्यार होने लगा था और वो भी मेरी तरफ आकर्षित होने लगी।

समय बीतता गया, हमने मिलने का प्लान बनाया तो वो सहेली के पास जाने का बहाना बना कर बुर्के में आयी. मैं उसको कार से पिक्चर दिखाने ले गया।
वहां हमने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और एक किस किया. बस इससे ज़्यादा हमने कुछ नहीं किया।

उसको ये बात बेहद पसंद आई और वहां से वापस लौट कर रात को मैंने उसको प्रोपोज़ किया और वो मान गयी।

एक बार हम बात कर रहे थे तो रोमांटिक बातें शुरु हुई और सेक्स चैट शुरू हो चुकी थी. एक बार उसने बताया कि उसके अब्बू और अम्मी को उसने बहुत बार सेक्स करते हुए देखा है और अब भी देख लेती है.

मैंने उसकी स्टोरी जाननी चाही.
तो उसने बताया कि उसके अब्बू अम्मी को प्यार नहीं करते, शराब पीते हैं और सेक्स करके सो जाते हैं. अम्मी की बिल्कुल आवाज़ नहीं आती, वो चुपचाप बेड पे लेटी रहती हैं. उसके अब्बू करते हैं और साइड होके सो जाते हैं.
ये बात बताते बताते थोड़ी अपसेट हो गयी।

मैंने उसको चुप कराया और कहा- चिंता मत करो, तुम्हारे साथ ऐसा नहीं होगा, तुम्हारी मर्ज़ी के बिना हाथ तक नहीं लगाऊंगा.
इस बात पर वो केवल हंसी और कोई जवाब नहीं दिया.
वो बात वही खत्म हो गयी।

मैं उसके अम्मी अब्बू की लाइफ के बारे में ज़्यादा उससे सुनने लगा.

एक बार का उसन

े बताया कि दोनों भाई सो चुके थे. उसकी अम्मी के कमरे का दरवाजा खुला तो वो भी उठी.
तो देखा अम्मी पानी लेने किचन में आई हुई थी; सिर्फ पेटीकोट में, ऊपर कुछ नहीं पहना हुआ था.

आसिफा आगे बढ़ती … इतने में उसके अब्बू अम्मी के पीछे आये और पेटीकोट उठा कर पीछे से डालने की कोशिश करने लगे. फिर उन्होंने वहां से तेल उठा कर लगाया और अम्मी को पीछे से चोदने लगे. मुश्किल से 5 मिनट भी नहीं लगे, अंदर निकाल कर वापस अब्बू कमरे में चले गए.
और अम्मी ने पानी पिया और कमरे में चली गयी जैसे कुछ हुआ ही ना हो।

आसिफा अपनी अम्मी के लिए परेशान रहती थी, हमेशा कहती थी के अब्बू के लिए कोई दवाई जिससे वो ठीक हो जाये और अम्मी खुश हो जाये।
तब मेरे पास ऐसा कोई विकल्प नहीं था तो बात टाल दी।

लेकिन कुछ दिन बाद मेरे दोस्त रोहित ने एक किट के बारे में बताया सेक्स वर्धक दवाइयों की किट थी जिससे अगर बचपन की गलतियों की वजह से या अन्य कारणों से कमज़ोरी या शीध्रपतन या पतलापन जैसी कमियों पर बहुत ही असरदार दवाई थी। मुझे पहले तो मज़ाक लगा क्योंकि बाजार में ऐसी आयुर्वेदिक दवायें बहुत आती हैं और महँगी भी!
लेकिन सुना है उनसे कुछ होता नही! तो ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।

फिर रोहित ने एक दिन बताया कि इस किट से बहुत लोगों को फायदा हुआ है और बेहद असरदार दवाई है।
ये बात मैंने आसिफा को बतायी तो वो खुश हुई. लेकिन समस्या थी कि इस किट के बारे में उसके अब्बू को कैसे बताये।

तो ये ज़िम्मेदारी आसिफा ने ली कि वो अपनी अम्मी से इस बारे में बात करेगी।

उसके बाद से उसके बातों में अलग ही प्यार नज़र आ रहा था। उसके बाद एक दिन आसिफा ने बताया कि उसने अम्मी से बात की किट के बारे में इस प्रकार:

आसिफा की एक सहेली जिसका नाम ज़रीना है, उसकी शादी को 1 साल ही हुआ है. वो बहुत परेशान रहती थी कि उसका शौहर उसके साथ सही से सेक्स कर नहीं पाता था. तो ऑनलाइन उसने एक किट मंगवाई जिसका कोर्स 3 महीने का होता है. वो उसने 1 महीने का ट्रायल पैक मंगवाया था. उससे उसके शौहर में बहुत बदलाव दिखाई दिए और 3 महीने का पूरा कोर्स करने के बाद उसका शौहर अब एक दमदार घोड़े में बदल गया है। अब वो ज़रीना को छोड़ता ही नहीं।

यह सुन कर अम्मी ने उस किट के बारे में पूछा तो आसिफा ने बहाना लगा दिया कि ज़रीना से पूछना पड़ेगा.
फिर 2 दिन बाद आसिफा ने उस किट का नाम बता दिया।

उसकी अम्मी ने जानकारी बटोर कर वो किट कैफ़े वाले से ऑनलाइन मंगवाई जो आसिफा को बाद में पता चला।

1 महीने बाद से ही अब्बू में बदलाव आने लगा और अम्मी के चेहरे की चमक बढ़ गयी.

एक दिन आसिफा ने रात में देखा कि अब्बू अम्मी को घोड़ी बना कर पीछे से चोद रहे हैं और लगभग 15 मिनट ये कार्यक्रम चला उधर अम्मी की सिसकारियों से पूरा कमरा भर रहा था।
आसिफा ने अपने अम्मी की सिसकारियाँ पहली बार सुनी थी.

उसी रात उसने मुझे फोन करके पूरी बात बताई कि ये दवाई काम कर रही है और उसकी खुशी का ठिकाना ना था।

एक दिन आसिफा और मैं मिलने बाहर गए हुए थे.
जब आसिफा वापस लौटी तो देखा ज़रीना (बेहद खूबसूरत आसिफा जैसी … बस थोड़ी छोटी कद की थी. लेकिन कमाल का हुस्न है उसका) वहीं बैठी हुई है और उसकी अम्मी गुस्से में थी।

ज़रीना और आसिफा छत पर आ गई और मैं दूसरी ओर पतंग उड़ा रहा था।
ज़रीना- तुझे ये दवाई मिली कहाँ से? हमें भी बता? मेरे शौहर को ज़रूरत है. तेरी अम्मी बता रही थी कि कोई किट है बड़ी दमदार।

आसिफा ने पूरी बात मेरी और उसके बीच और साथ में अम्मी और अब्बू के बीच की सब बातें बता दी।

तभी उसी समय आसिफा का फोन आया जिसपे ज़रीना बात कर रही थी, उसने थोड़ा मस्ती की फिर हमारी भी बातें होने लगी।
आसिफा ने एक ग्रुप बना दिया था जिसमें मैं आसिफा और ज़रीना थे बस।

नीचे अम्मी ने आसिफा से पूरी बात पूछी तो उसने बताया कि वो उन दोनों को कई बार सेक्स करते हुए देख चुकी है और देखा कि अम्मी कैसे नाखुश रहती हैं. तो उसने ऑनलाइन ये दवा देखी और बात दी.
यह सुनकर उसकी अम्मी ने उससे कुछ नहीं कहा और समय के साथ आसिफा अपनी अम्मी से पूरी खुल चुकी थी।
लेकिन हमारे बारे में कुछ नहीं बताया।

एक दिन ज़रीना का फ़ोन मेरे पास आया कि उसको उस किट की ज़रूरत है। मैं उसके लिए ला दूँ और ये बात आसिफा को ना बताऊँ।

लेकिन मैंने आसिफा को सब बता दिया.
उसने कहा- कि दवाई पहुँचवा दो।
तो मैंने रोहित से 3 किट मंगवा ली और ज़रीना के बताए समय पर उसके घर पहुँच गया. उस समय वहां कोई नहीं था।
उसने मुझे बुलाया चाय पिलाई फिर किट के बारे में जानकारी लेने लगी।

तेल देख कर उसने पूछा- इसका क्या करना है?
तो मैंने बताया कि शौहर के लिंग पर मुलायम हाथों से मालिश करनी है.
उसने पूछा- कैसे करनी है?
तो मुझे समझ नहीं आया तो मज़ाक में कहा- मैं अपने करके बता दूँ?

उसने झट से हाँ बोल दी.
तो मैंने भी देर ना करते हुए अपनी जीन्स और अंडरवीयर घुटनों तक उतार दी।
उसने कहा- पूरा उतार दो. कहीं कपड़े गंदे ना हो जायें.

मैं इरादे समझ चुका थ

ा और मैं भी तैयार था. मैंने कपड़े उतार कर साइड रख दिये और कहा- अब बताता हूं मालिश कैसे करनी है. पहले तो लिंग को खड़ा कराइये।

इतना कहकर मैं सोफे से खड़ा हुआ. वो सोफे पर ही थी. मैं उसके बेहद करीब जाकर बोला- जी कीजिये.
उसने हाथ लगाया.
जैसे ही उसने कोमल हाथों का स्पर्श हुआ, एकदम से मेरा लिंग अपना आकार लेने लगा. वो लिंग को आगे पीछे करने लगी.

तो मैंने कहा- पहले पूरा खड़ा करो!
वो कुछ समझ पाती उससे पहले अपना लिंग उसके मुंह के बेहद पास ले गया.
उसने बिना समय गंवाए पहले उसपर किस किया फिर ऊपर का हिस्सा मुख में लिया और एक प्रोफेशनल की तरह अंदर बाहर करने लगी.

उस समय मैं किसी और ही दुनिया में था. वो मेरा लंड अपने मुंह में ले रही थी और हैरान थी कि वो पूरा लंड ले नहीं पा रही थी मुंह में।

मेरा होने वाला था तो मैंने ज़बरदस्ती उसका मुँह पकड़कर पूरा अंदर डालने की कोशिश की. लेकिन अंदर पूरा जा नहीं पाया और मैंने सारा माल अंदर मुख में ही निकाल दिया.
फिर भी वो चूसे जा रही थी.

मैंने उसको सोफे पर लिटाया और मैंने उसके ऊपर लेट कर उसकी चूत में कपड़ों के ऊपर से ही उंगली करने लगा।
तभी उसने मुझे हटाया और अपने कपड़े उतार कर लेट गयी.

मैंने अपना लिंग उसकी चूत के द्वार पर लगाया और थोड़ा सा झटका दिया. ज़रीना की चीख निकल गयी। उसके शौहर का इतना मोटा नहीं था तो उसे दर्द हुआ.

मैंने उसके मुँह पर हाथ रख एक ज़ोर का झटका मारा और मेरा पूरा का पूरा लंड जरीना की चूत के अंदर चला गया.
उसके आँसू निकल गए लेकिन मैं नहीं रुका।

वो भी हल्का हल्का कमर ऊपर नीचे कर रही थी. तो मैंने भी ज़्यादा जल्दी ना करते हुए धीरे धीरे अपना काम आगे बढ़ाया. फिर लगभग 5 मिनट बाद ज़रीना निढाल हो गयी.
लेकिन मेरा होना बाकी था तो मैं उसके ऊपर आया और फिर शुरू किया.

उसका दोबारा हो गया था लेकिन मेरा बाकी था। उसके अंदर भी हिम्मत नहीं बची थी लेने की … उसकी चूत दुखने लगी थी तो फिर मैंने उसके मुँह में डालकर अपना माल फिर से निकाल दिया.

जरीना अपनी चूत चुदाई से बहुत खुश थी. मैं अपने कपड़े पहन कर वापस आ गया।
उसके बाद ये सिलसिला लगातार जारी रहा।

आसिफा को अब अपनी अम्मी खुश दिखाई देती थी तो उसका सारा प्यार और क्रेडिट मेरे को मिलने लगा. जिससे आसिफा के साथ मैं जैसा भी मज़ाक करूं या कुछ बोलूं तो वो बुरा नहीं मानती थी।

समय के साथ ज़रीना के साथ काफी मौके मिलने लगे, एक बार उसकी गांड भी मारी थी।
मेरे बहुत अच्छा चल रहा था कि एक दिन आसिफा से बात करते करते पता नहीं क्या हुआ मैंने उसको ज़रीना के बारे में सब बात दिया।

उस समय तो वो गुस्से में फोन रख दिया, उसने ज़रीना से भी बात करनी बंद कर दी.
मुझे बहुत बुरा लगा।

मैंने ज़रीना से कहा कि आसिफा के पास जाकर मेरी बात कराये तो वो बहुत मनाने पर तैयार हुई।

एक दिन अचानक मेरे पास एक अनजान नंबर से फोन आया, दूसरी तरफ से किसी औरत की आवाज़ आयी. बात करने पर पता चला कि आसिफा की अम्मी थी.
मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी ने मुझे उसी वक़्त अपने घर आने को कहा.

उस समय डर के मारे दिमाग बंद हो गया, कुछ समझ नहीं आया कि क्या करूँ.
हिम्मत जुटा कर मैं आसिफा के घर डरते डरते गया. सुबह के करीब 11 बज रहे थे, वहां ज़रीना और आसिफा की अम्मी रिज़वाना थी।
ज़रीना को देख कर मैं और डर गया।

उन्होंने मुझे वह बैठने को कहा. पहले हमारी कभी कभार गली के बाहर बात हो जाती थी, लेकिन आज तो उनका चेहरा देखने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी, तभी आसिफा की अम्मी ने ज़रीना को कमरे में आसिफा के पास भेजा मतलब आसिफा भी घर में ही थी.

अब हाल में केवल मैं और रिज़वाना बचे थे बाकी बच्चे स्कूल और आसिफा के अब्बू नौकरी पर गए थे।

रिज़वाना ने पूछा- ये सब कब से चल रहा है?
मैंने पूछा- आप किसकी बात कर रही हैं?
तो उन्होंने गुस्से में तेज आवाज में फिर दोहराया.

मुझे पता नहीं क्यों डर के साथ गुस्सा आ गया, मैंने कहा बात- पता चलेगी तभी तो कुछ बोलूंगा?
इतना बोलने के बाद मेरी फिर अंदर से फटी.

लेकिन तभी रिज़वाना ने पूछा कि आसिफा से कब से संबंध है तुम्हारे?
मैंने बोला कि करीब 5-6 महीने से मेरी बहुत ही अच्छी दोस्त है।
रिज़वाना ने कहा- उसके साथ क्या क्या किया??

मुझे एकदम समझ नहीं आया कि क्या कहूँ … मैं आसिफा से प्यार करता हूँ, उसके साथ कुछ भी गलत नहीं किया।
मेरी बात बीच में काट कर बोली- ज़रीना के साथ जो भी तुमने किया. कैसे मान लूं कि आसिफा के साथ नहीं किया होगा.
मैंने सिर्फ इतना कहा- मैं आसिफा को खुश देखना चाहता हूँ बस।

उसके बाद मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी ने मेरी जांघ पर हाथ रख कर पूछा- किस तरह खुश रख सकते हो?
अंदर ही अंदर डर भी लग रहा था और लंड तन गया, जिसको रिज़वाना ने भाम्प लिया और कहा- जब मैं फोन करूं तो आ जाना।
और मुझे जाने को कहा.

मैं जैसे ही खड़ा हुआ, रिज़वाना ने आँख मार दी जिससे मुझे सुकून मिला।

उसी रात आसिफा को बहुत कॉल करे लेकिन उसने उठाया नहीं और ज़रीना ने भी कोई बात नहीं क

ी.

अगले दिन 10 बजे मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी रिज़वाना का फोन आया और उसने मुझे अपने घर बुलाया.
मैंने घर जाकर रिज़वाना से आसिफा के बारे में पूछा.
उसपे उसने बताया कि वो ज़रीना के यहां गयी है शाम को आएगी.

मुझे गुस्सा तो बहुत आया. जैसे ही मैं घर जाने के लिए पलटा … रिज़वाना ने हाथ पकड़ कर मुझे रोका और बोली- थोड़ी देर बैठते हैं.
तो मैं भी बैठ गया।

मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी ने उस दिन गाउन पहना हुआ था बिना ब्रा के, उसके स्तन बेहद मोठे और फिगर भी जानदार था।

मुझसे मेरा मोबाइल घबराहट में नीचे गिरा, एकदम रिज़वाना नीचे झुकी और फोन उठाते हुए अपने चूचों के दर्शन कराए. मेरा लंड एकदम तन गया और थोड़ी हिम्मत करके उसका हाथ वही पकड़ के उसके पास बैठ गया.
वो कुछ नहीं बोली.

मैं अपने होंठ धीरे धीरे गर्लफ्रेंड की अम्मी के होंठों के पास ले गया और वो आगे बढ़ी. बस फिर तो मैंने आगे और बढ़कर उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए. वो भी साथ देने लगी. मैंने उसके निप्पल पकड़ के एक ज़ोर से पिंच किया. उसकी सिसकी निकल गयी.

मैं जल्दबाज़ी ना करते हुए उसके चूचे गाउन के ऊपर से ही चूसने लगा, जिससे वो मदहोश हुए जा रही थी. वो मेरी जीन्स के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ने की कोशिश करने लगी.

अब मैंने उसका गाउन ऊपर कर लिया और उसके चुचे चूसने लगा.
वो पागल हुए जा रही थी क्योंकि उसका शौहर ऐसा कुछ नहीं करता था.

मैंने उसका फायदा उठाकर धीरे धीरे पहले उसको गर्म किया, गर्लफ्रेंड की अम्मी की चूत पे उंगली फिराई जिससे वो पागल हुए जा रही थी.
एकदम उसने मुझे अपने ऊपर से हटाया और मेरी जीन्स उतारने लगी.

मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी मेरा लंड देख कर हैरान हो गयी और उसको हिलाने लगी. मैंने उसको मुँह में लेने को बोला लेकिन उसने मना कर दिया.
मैंने ज़्यादा बोला नहीं और उसको नीचे लेटा कर मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी की चूत पर अपना टोपा रख कर थोड़ा अंदर डालने लगा.

मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी जिससे ज़्यादा दिक्कत नहीं हुई.
लेकिन उसने एकदम से रोका. पर मैं बिना रुके मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी की चूत के अंदर डालता चला गया. उसको दर्द हुआ थोड़ा क्योंकि उसके शौहर का पतला और छोटा था.

मैं अपना पूरा लैंड मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी की चूत के अंदर डाल कर रुक गया. थोड़ी देर में रिज़वाना खुद ही अपनी गांड हिलाने लगी.
फिर मैंने धक्के मारने शुरू किए, मैं धीरे धीरे अंदर बाहर करता रहा. उसकी तेज़ सिसकारियों से कमरा भर गया.

कुछ ही देर में उसकी सिसकियाँ और तेज़ हो गयी और मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी बोली- तेज तेज़ करो. रुकना नहीं!
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

थोड़ी देर बाद उसने रुकने को बोला लेकिन मैं अपनी स्पीड बरकरार रखकर काम करता रहा. मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी की चूत चुदाई करता रहा.

5 मिनट के बाद उसकी फिर सिसकारियाँ तेज़ हो गयी और मैं और तेज़ स्पीड से अंदर बाहर करता रहा. वो फिर से झड़ गयी.
इस बार उसने झटके से बाहर निकलवा दिया.

मेरा हुआ नहीं था तो मुझे थोड़ा गुस्सा आया और मैंने उसको पीछे पलट कर उसकी गांड पर उसकी चूत का पानी डाल कर अपना लंड घुसाने की जैसे ही कोशिश की, मेरा लंड आराम से मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी की गांड अंदर चला गया.

10 मिनट के बाद मैं सारा माल उसकी गांड में डालकर रुक गया।
फिर मेरा लंड थोड़ी देर में अपने आप ही बाहर आ गया.

मेरी गर्लफ्रेंड की अम्मी रिज़वाना बेहद खुश थी. उसने मेरे लंड पर एक चुम्मी दी और गाउन डाल कर अंदर चली गयी और मैं भी अपने घर आ गया.

मैं सोचने पर मज़बूर हो गया कि आखिर ज़रीना ने आसिफा की अम्मी रिज़वाना को क्या क्या बताया?
और आसिफा जब मुझसे और ज़रीना से नाराज़ है तो ज़रीना के यहां क्यों गयी?

आगे देखते हैं कि क्या होता है? जैसे ही कुछ घटित होगा, मैं आगे की कहानी लिखूँगा.

दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-1
04-01-2020 by राजीव सिंह
दीवाली की शाम मैं अपने मित्र के घर गया. उस समय घर में उसकी माँ अकेली थी. तभी मेरे दोस्त की बहन भी आ गयी. उसकी खिली जवानी देख मैं देखता ही रह गया.

नमस्कार दोस्तो, मैं राजीवअपनी एक सेक्सी कहानी के साथ हाजिर हूँ जो इस दीपावली मेरे साथ हुई।

दोस्तो इस दीपावली की छुट्टी में मैं अपने गाँव गया हुआ था। दीपावली की शाम को दिए जलाने के बाद मैं अपने पड़ोस में एक मित्र के घर गया जो मेरे साथ ही वाराणसी में काम करता है और इस बार वो वापस गांव नहीं आ पाया था।

उसके घर में उसके पापा मम्मी और एक छोटी बहन, जिसका नाम पीहू था, रहती थी। जब मैं उसके घर पहुँचा तो घर पर सिर्फ उसकी मां थी।
मैंने उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दी और पीहू और उसके पापा के बारे पूछा.
तो उन्होंने बताया कि पीहू के पापा किसी काम से रिश्तेदार के यह गए है कल आएंगे। पीहू गांव में मन्दिर पर दिए जलाने गयी है, कुछ देर बाद आएगी।

तब मैंने उनके साथ मिलकर पूरे घर में दीये जलाये।
दिए जलाने के बाद उसकी माँ और मैं छत पर खड़े होकर बात कर रहे थे तभी वहाँ पीहू आ गयी।
उसने मुझसे कहा- भैया, आप कब आये?

मैं तो बस उसे देखता रह गया.
वो नीले रंग का कमीज और सफेद सलवार पहने थी।

दोस्तो, पहले मैं पीहू के फिगर के बारे में बता दूँ. उसकी हाइट लगभग पांच फुट, उसकी चूचियों का साइज बत्तीस इंच, कमर छब्बीस इंच और गांड का साइज़ बत्तीस इंच था।

मैं पीहू से दो साल बाद मिला था। इन दो सालों में उसका बदन काफी भर गया था। उसकी उम्र बाइस साल की हो गयी थी।

उसके आने के बाद उसकी मम्मी ने कहा- तुम दोनों बात करो, मैं नीचे जा रही हूँ खाना बनाने।

उसकी मम्मी के जाने के बाद मैं पीहू को कुछ देर तक लगातार देखता रहा तो पीहू ने हंसकर कहा- भैया, क्या देख रहे हो? पहले कभी नहीं देखा क्या?
तब मैंने कहा- पहले भी देखा है पर तब और अब तुम काफी बदल गयी हो।

यह सुनकर पीहू ने कहा- मैं कहाँ बदली हूँ, मैं तो वैसी ही हूँ.
तब मैंने कहा- बदल तो गयी हो. अब पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही हो।

पीहू बोली- झूठी तारीफ मत करिए.
तब मैंने कहा- झूठ नहीं कह रहा हूँ. सच में तुम बहुत ही खूबसूरत लग रही हो. तुम्हें देखकर तो कोई भी पागल हो जाएगा। किसी का भी दिल तुम्हें पाने के लिए मचल जाएगा।

पीहू यह सुनकर मुस्कुराती हुई बोली- भैया, खूबसूरत तो आप भी बहुत लग रहे हैं, आपको भी कई सारी लड़कियां पसन्द करती होंगी।
मैंने कहा- ऐसी बात नहीं है, मुझे तो आज तक किसी ने नहीं कहा.
तो वो बोली- डरती होंगी आपसे!
तब मैंने कहा- इसमें डरने वाली क्या बात है। जब तक कोई कहेगा नहीं … तब तक किसी के दिल का हाल कैसे पता चलेगा।

पीहू ने कहा- भैया आपकी कोई गर्लफ्रैंड है?
तो मैंने कहा- नहीं!

मैंने उससे पूछा बॉयफ्रेंड के बारे में तो उसने भी न में जवाब दिया।

पीहू ने मुझसे पूछा- भैया, आपको कैसी गर्लफ्रैंड चाहिए?
तब मैंने कहा- बिल्कुल तुम्हारे जैसी!
तो उसने कहा- मतलब?
तब मैंने कहा- तुम्हारे जैसी न ज्यादा पतली न ज्यादा मोटी! तुम्हारे जैसी खूबसूरत और जिस पर मैं तुम्हारे जितना विश्वास कर सकूं कि वो हमारी बातें किसी और से न कहे।

पीहू बोली- भैया, इस तरह की तो सिर्फ मैं हूँ. तब तो आपको मुझे ही अपनी गर्लफ्रैंड बनाना पड़ेगा. नहीं तो बिना गर्लफ्रैंड के रह जाएंगे।
तब मैंने कहा- मेरी इतनी अच्छी किस्मत कहाँ कि तुम मेरी गर्लफ्रैंड बनो।
पीहू ने कहा- आपको मुझसे अच्छी मिलेगी!
तब मैंने कहा- मुझे तुमसे अच्छी नहीं, तुम्हारे जैसी चाहिए।

पीहू ने कहा- भैया क्या आप अपनी बहन को अपनी गर्लफ्रैंड बनाना चाहते हैं?
तो मैंने कहा- अगर मेरी प्यारी बहना को एतराज न हो तो मैं उसे गर्लफ्रैंड बनाना चाहता हूँ।

पीहू ने कहा- कहीं आप भाई को तो नहीं बता देंगे कि मैं आप से ऐसे बात कर रही थी?
तब मैंने कहा- क्या मुझपर विश्वास नहीं है?
तो उसने कहा- आप पर तो मैं खुद से भी ज्यादा विश्वास करती हूँ।

मैंने पीहू से कहा- पीहू, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं तुमसे प्यार करता हूँ.
तो पीहू ने कहा कि वो भी मुझसे प्यार करती है।

इसके बाद मैंने पीहू को पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया। मैंने पीहू का सर अपने दोनों हाथों में लेकर उसके माथे पर एक चुम्बन किया तो उसने अपनी आँखें बंद कर ली.

फिर मैं उसके पूरे चेहरे पर किस करने लगा.
पीहू मदहोश हो गयी थी।

फिर मैं उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी. करीब दो तीन मिनट तक हम एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे।

इसके बाद मैंने पीहू को पलट कर उसके पीछे आ गया और अपने दोनों हाथों को समीज के अंदर उसके चूचियों पर रखकर दबाने लगा और अपने होंठों से उसके गर्दन पर किस करने लगा।
पीहू ने मुझसे कहा- भैया, मम्मी कभी भी ऊपर आ सकती हैं.

तब मैं उसी तरह उसकी चूचियों को दबातें हुए उसे सीढ़ी के किनारे के पास रेलिंग तक ले आया।
वो नीचे की तरफ दे

ख रही थी और मैं उसे किस करते हुए उसकी चूचियों को दबा रहा था।

तभी उसकी मम्मी ऊपर आने लगी तो हम दोनों एक दूसरे से अलग होकर बातें करने लगे।

उसकी मम्मी चाय लेकर ऊपर आयी थी. हम लोग चाय पीने लगे।

उसकी मां चाय देकर नीचे चली गयी तब पीहू ने कहा- भैया, आप मेरे लिए दीपावली का क्या गिफ्ट लाये हैं?
मैंने कहा- हाँ गिफ्ट लाया हूँ, बहुत ही खूबसूरत है.
तब पीहू बोली- इस समय साथ लाये हैं?
तो मैंने कहा- हाँ!
तो वो बोली- जल्दी से मेरा गिफ्ट मुझे दीजिये.
मैंने कहा- पहले अपनी आँखों को बंद करो, तब तुम्हें गिफ्ट मिलेगा।

पीहू ने अपनी आँखों को बंद कर लिया और बोली- दीजिये गिफ्ट!

तो मैंने अपनी पैन्ट को खोलकर अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और पीहू के हाथों को अपने हाथ में लेकर लन्ड उसकी हाथ में दे दिया।

मेरे गर्म लन्ड का एहसास पाते ही उसने चौंक कर अपनी आँखों को खोल दिया और लन्ड अपनी हाथ में देखकर बोली- भैया, आप बहुत शरारती हो। क्या आप मेरे लिए यही लेकर आये थे?
तब मैंने कहा- गिफ्ट तो तुम्हारा घर पर है पर ये वाला भी सबसे कीमती गिफ्ट मेरी प्यारी बहन के लिए है. क्या ये वाला गिफ्ट मेरी बहन को पसंद नहीं आया?
पीहू ने कहा- ये गिफ्ट तो बहुत अच्छा है।

तो पीहू से मैंने कहा- नीचे झुककर इसे चूसो.
उसने मना कर दिया, बोली- ऐसा कौन करता है?
तब मैंने कहा- सभी करती हैं, लन्ड में से निकलने वाला माल को पीने के बाद लड़कियाँ और खूबसूरत हो जाती हैं। तुम्हें भी अच्छा लगेगा.
काफी मनाने के बाद वो लन्ड मुंह में लेने को तैयार हुई।


Behan Ne Lund Chusa
पीहू नीचे झुककर घुटनों के बल बैठ गयी और हाथों में मेरा लन्ड लेकर उस पर एक किस किया।
मैंने उसके हाथों के ऊपर अपना हाथ रखकर लन्ड के चमड़े को पीछे किया तो सुपारा बाहर आ गया।
अब मैंने पीहू से कहा- मुंह में लेकर चूसो.
तो वो लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।

जब पीहू मेरा लन्ड चूस रही थी तो मुझे कितना मज़ा आ रहा था यह मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता।

कुछ देर के बाद मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो मेरे लन्ड ने पूरा माल पीहू के मुंह में निकाल दिया। पीहू मेरा पूरा माल पी गयी पर उसके चेहरे के भाव देखकर ऐसा लगा जैसे उसका स्वाद पसन्द नहीं आया।
मैंने उससे कहा- धीरे धीरे इसका स्वाद पसन्द आने लगेगा. और मेरा माल मेरी बहन की खूबसूरती को और बढ़ाएगा।

यह सुनकर पीहू मुस्कुराने लगी.

मैंने उसे पकड़ लिया और उसके होंठों को चूसने लगा, वो भी मेरे होंठो को चूसने लगी।

कुछ देर बाद मैंने पीहू से कहा- मैं अपनी प्यारी बहन को चोद कर दीपावली मनाना चाहता हूँ. क्या मेरी प्यारी बहना अपनी चुदाई मुझसे करवाएगी?
पीहू ने कहा- भैया, आप मेरे साथ कुछ भी कर सकते हैं. मैं आपको रोकूंगी नहीं … पर यहाँ कुछ करने में रिस्क है।
मैंने पीहू से कहा- तुम मेरा साथ दो, मैं कोई तरकीब निकलता हूँ।

इसके बाद मैं पीहू के साथ नीचे आ गया और उसकी मम्मी से कहा- मैं पीहू को मार्केट लेकर जा रहा हूँ दीपावली का गिफ्ट दिलवाने … उसके बाद घर होते हुए आएंगे।

उसके बाद मैं पीहू को लेकर आने घर आया और उसके लिए जो कपड़े लेकर आया था, वो ले लिये और बाइक निकाल कर उसकी डिग्गी में डाल दिया।
मैंने घर पर बोल दिया कि पीहू को लेकर मार्किट जाऊंगा और उसे उसके घर छोड़ते हुए आऊंगा।

पीहू को बाइक पर बैठा कर गांव के बाहर आ गया और बाइक अपने खेतों वाली ट्यूबेल की तरफ मोड़ दिया जो एकदम सुनसान स्थान पर था।
ये देखकर पीहू बोली- भैया, आप तो मुझे गिफ्ट दिलवाने मार्केट ले जा रहे थे?
तब मैंने कहा- गिफ्ट ही दूंगा अपनी प्यारी बहन को … वो भी सबसे अच्छा वाला।

बाइक को मैंने अपनी ट्यूबेल पर खड़ी कर दिया। ट्यूबेल पर एक छोटा सा कमरा बना था जिसमें पम्पिंग सेट लगा था. उसके बगल में एक खाट पड़ी थी. जब खेतों में पानी देना होता था तो पिताजी यहीं पर सोते हैं।

मैंने ट्यूबेल का दरवाजा खोला और पीहू को अंदर कर बाइक को भी दरवाजा बंद कर लिया।

मैं कुछ देर पहले ही ट्यूबवैल पर दीये जला कर गया था. बाहर जो दीये जल रहे थे, मैं कमरे में उन्हें ले आया और कमरे में पूरा उजाला हो गया।
पीहू ने कहा- भैया, यहाँ कोई आएगा तो नहीं?
मैंने कहा- यहाँ कौन आएगा पागल इस समय … वैसे भी आज दीपावली मना रहे हैं लोग।
पीहू ने कहा- लोग दीपावली मना रहे हैं और हम …

इतने में मैंने उसे कमर से पकड़ कर खींच कर अपने सीने से लगा लिया और कहा- हम भी दीपावली को अपनी यादगार बना रहे हैं एक दूसरे से प्यार करके!

इसके बाद मैं पीहू के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर पूरे चेहरे पर चूमने लगा. पीहू भी मदहोश होकर अपनी बांहों में मुझे कसकर पकड़ लिया।

कुछ देर मैं पीहू को ऐसे ही चूमता रहा, फिर मैंने अपने होंठों में उसके निचले होंठ को लेकर चूसने लगा. तो वो भी मेरे ऊपर वाले होंठ को चूसने लगी.

थोड़ी देर बाद मैंने पीहू से कहा कि वो अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दे.
तो पीहू ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी. मैं उसकी जीभ को

चूसने लगा।

कुछ देर तक उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी और वो मेरी जीभ चूसने लगी।
करीब दस मिनट तक हम ऐसे ही चुम्माचाटी करते रहे।

अब तक पीहू पूरी तरह चुदाई की मस्ती में आ गयी थी.
मैंने पीहू से कहा- पीहू, हाथ ऊपर करो, तुम्हारी कमीज उतारनी है.
तो वो बोली- भैया, मुझको शर्म आ रही है।
मैंने कहा- शर्म कैसी पागल जब भैया तुझे चोदने के लिए तैयार है और तू भैया से चुदवाने के लिए।

उसने शर्म से अपना सर मेरे सीने में छिपा लिया।

कहानी जारी रहेगी

दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-2
05-01-2020 by राजीव सिंह
अपने दोस्त के घर गया तो उसकी बहन से मिला. हम दोनों की जवानी ने जोर मारा और मैं उसकी चुदाई के लिए उसे अपने खेतों में ट्यूबवैल के कमरे में ले आया. जवान लड़की की पहली चुदाई का मजा लें.

मेरे ख़ास दोस्त की बहन की चूत चुदाई की इस कहानी के पहले भाग
दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-1
में आपने पढ़ा कि मैं दीपावली की शुभकामनाएं देने अपने दोस्त के घर गया तो उसकी बहन से मुलाकात हुई. उसकी जवानी मुझे घायल कर गयी. बातों बातों में हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी भावनाएं बता दी और मैं उसकी पहली चुदाई के लिए उसे अपने खेतों में ट्यूबवैल के कमरे में ले आया.
अब आगे:

वो बोली- भैया, मुझको शर्म आ रही है।
मैंने कहा- शर्म कैसी पागल जब भैया तुझे चोदने के लिए तैयार है और तू भैया से चुदवाने के लिए।

उसने शर्म से अपना सर मेरे सीने में छिपा लिया। मैंने उसके हाथ ऊपर कर उसका कमीज निकाल दिया।

अब वह नीले रंग की ब्रा में मेरे सामने खड़ी थी। उसके बाल उसके चूतड़ों से नीचे तक की लंबाई के थे, जिनको उसने बाँध कर रखा था. मैंने उसे सीने से लगा कर उसके बालों को खोल दिया।

पीहू को सीने से चिपकाए हुए ही मैंने अपने दोनों हाथों को उसकी कमर पर फिराते हुए ऊपर ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसके कंधों पर से ब्रा की डोरी को सरकाकर नीचे कर ब्रा को उसके जिस्म से अलग कर दिया।

अब मैंने पीहू को घुमाकर उसकी पीठ को सीने से चिपका कर दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियाँ के निप्पल जोर से मसलने लगा।
पीहू ने कहा- भैया धीरे धीरे करो दर्द हो रहा है, अब मैं तुम्हारी हो गयी हूँ।
मैंने कहा- पीहू जान … यह तो प्रेम का मीठा दर्द है … भैया का प्यार में दिया इतना दर्द नहीं सहोगी?
तो उसने कहा- आप मेरे भैया और सईंया आज से दोनों हैं।

मैंने अपने शर्ट और बनियान को निकाल दिया और पीहू को सीने से लगा लिया. फिर पीहू को गोद में उठा कर खाट पर लिटा दिया।

अपनी पैंट निकाल कर मैं पीहू के ऊपर चढ़ गया। मैं पीहू के चेहरे को चूमने लगा. उसके चेहरे को चूमते हुए उसके कानों को भी बारी बारी मुंह में लेकर चूसने लगा।
पीहू पूरी तरह से चुदासी होकर मादक आहें भरने लगी थी।

फिर मैं उसके कानों को चूमते हुए उसके गर्दन और कंधों को चूमने लगा। पीहू के कंधों से होते हुए उसके बायें हाथ को चूमते हुए उंगलियों तक आया और बारी बारी उसकी अंगुलियों को मुंह में लेकर चूसने लगा.
फिर यही सब उसकी दायें हाथ के साथ भी किया।

पीहू मादक आहें भर रही थी और मुझसे बोली- भैया कुछ हो रहा है, जल्दी करिये.
मैंने कहा- क्या?
तो वो शर्मा गयी।

मैंने उसकी चूचियाँ के निप्पलों को दोनों हाथों की उंगलियों और अंगूठे से मसलते हुए पूछा- मेरी प्यारी बहना, क्या करूँ तुम्हारे साथ?
तो वो बोली- भैया, आप बहुत बेशर्म हो गए हैं।
तब मैंने उसके दोनों निप्पलों को जोर से मसलते हुए कहा- अपनी प्यारी बहना को चोदने के लिए बेशर्म तो होना ही पड़ेगा।

उसके मुँह से एक आह निकल गयी शर्माकर उसने अपनी आँखें बंद कर ली।

अब मैं पीहू की बायीं चूची की निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दायीं चूची को अपने हाथों से मसलता रहा.
पीहू धीरे धीरे आहें भर रही थी.

फिर मैं पीहू की दायीं चूची को मुंह में लेकर बायीं को मसलने लगा।
मैंने पीहू से पूछा- कैसा लग रहा है?
तो वो बोली- बहुत अच्छा भैया।

उसकी चूचियों को चूसने के बाद उसके पेट और कमर को चूमने लगा उसके बाद मैंने पीहू की ठोड़ी के चारों तरफ अपनी जीभ से चाटने लगा।
पीहू ने मेरा सर कसकर पकड़ लिया और धीरे धीरे ‘आह भैया … आह …’ कह कर आहें भर रही थी।

अब मैंने पीहू के सलवार का नाड़ा खोल कर सलवार को निकाल दिया। अब वो मेरे सामने नीले रंग की पैंटी में थी। पैंटी के ऊपर से ही मैंने उसकी बुर पर किस किया तो वो सिहर उठी।
मैंने उसकी पैंटी को उसकी टाँगों से निकल दिया। अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी।


Jawan Ladki Ki Chut
पीहू का गोरा जिस्म बहुत ही खूबसूरत लग रहा था।

मैंने उसकी टांगों को फैलाकर अपना मुँह उसकी बुर पर रख कर किस किया तो वो सिहर उठी।

अब मैं अपनी जीभ उसकी बुर के अंदर डालकर चाटने लगा तो उसने मेरे सर को कसकर पकड़ लिया और धीरे धीरे ‘भैया … भैया …’ कहते हुए आहें भरने लगी.
लगभग पांच मिनट तक मैं उसकी बुर को चूसता रहा.

इसके बाद पीहू शरीर अकड़ने लगा और उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया।
स्खलित होने के बाद पीहू काफी रिलैक्स दिख रही थी।

पीहू से मैंने कहा- अब तुम्हारी बारी है.
और उसके ऊपर लेट कर उसको बांहों में भर कर करवट बदल कर उसको ऊपर कर दिया।

उसकी दोनों टांगों में अपनी टाँगें फंसा ली और उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से दबाते हुए कहा- किस करो पूरे बदन को!
तो पीहू मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर किस करने लगी।

चेहरे को कुछ देर चूमने के बाद उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर अपनी जीभ मेरे मुँह डाल दिया. मैं उसकी

जीभ चूसते हुए उसकी कमर को सहला रहा था और उसके चूतड़ों को दबा रहा था।
उसके बाल कुछ उसके चूतड़ों पर थे कुछ बाल मेरे चेहरे के दोनों तरफ लटके थे। बालों के साथ उसके कमर को सहलाने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था।

इसके बाद मेरे गले को चूमते हुए पीहू नीचे मेरे सीने की तरफ आयी और मेरे दोनों निप्पलों को बारी बारी अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। धीरे धीरे पीहू फिर गर्म होने लगी थी।

निप्पलों को चूसने के बाद जब उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसे अपनी चड्डी उतारने का इशारा किया।
उसने मेरी चड्डी को उतार दिया।

मैंने लन्ड चूसने का इशारा किया तो वो मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर चूसने लगी। मैं पीहू के बालों को सहलाने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने पीहू को रुकने का इशारा किया. वो मेरी तरफ देखने लगी तो मैंने उसके चेहरे को पकड़ कर ऊपर की तरफ खींच लिया और पीहू के होंठों को चूसने लगा।
कुछ देर तक उसके होंठों को चूसने के बाद मैंने उसे पेट के बल लिटा दिया और उसके बायें पैर की एड़ी को चूमते हुए उसके चूतड़ों तक आया फिर उसके दायें पैर की एड़ी को चूमते हुए चूतड़ों तक आया।

उसके बल उसके चूतड़ों तक फैले हुए थे। उनके ऊपर से ही उसके चूतड़ों को किस करते हुए उसकी पूरी पीठ पर चुम्बन करने लगा।

अब तक पीहू पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और आहें भरने लगी थी।

मैंने पीहू के चूतड़ों पर अपने दांतों से हल्का सा काट लिया तो उसने एक मदहोश करने वाली आह भरी। फिर मैंने पीहू को पीठ के बल लिटा दिया और उसकी दोनों टाँगों को फैलाकर उनके बीच में घुटनो के बल बैठ गया।

पीहू मेरी तरफ मदहोश होकर देख रही थी।

मैंने पीहू से कहा- मेरी प्यारी बहना दीपावली की शाम अपने भाई के लन्ड से चुदने के लिए तैयार है।
तब पीहू ने सर हिलाकर हाँ का इशारा किया।

मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोलकर कहो!
तब उसने कहा- हाँ, मेरे प्यारे भैया, आपकी बहन भाई के लन्ड से चुदने के लिए तैयार है।

पीहू ने कहा- भैया … पर आपका इतना मोटा लन्ड मेरी बुर में कैसे जाएगा?
तब पीहू से मैंने पूछा- सच बताओ कि अब तक कभी चुदी हो या नहीं?
तो उसने कहा- नहीं … पर कभी कभी उंगली से कर लेती हूं।

पीहू बोली- भैया, इतना मोटा लंड मेरी बुर में नहीं जा पायेगा.
तो मैंने कहा- पहली बार में हल्का सा दर्द हो सकता है। अपने भाई के लिए इतना तो कर ही सकती हो?
तो उसने हाँ का इशारा किया।

मैंने मुँह से ढेर सारा थूक उसकी बुर और अपने लन्ड पर लगाया और अपना लन्ड उसकी बुर की छेद पर रख कर पीहू की तरफ देखकर कहा- डालूं? तैयार हो?
तो उसने हाँ कहा.

फिर मैंने उसकी कमर को जोर से पकड़ कर लन्ड पर दवाब बनाकर एक झटके से पूरा लन्ड उसकी बुर में उतार दिया।
मुझे ऐसा एहसास हुआ जैसे मेरा लन्ड किसी चीज़ को चीरते हुए आगे बढ़ रहा था।
और पीहू के मुंह से एक आह निकल गयी।

मैंने पीहू से पूछा- दर्द तो नहीं हो रहा है?
तो उसने कहा- नहीं … मैं तो सोचती थी कि बहुत दर्द होगा।
तब मैंने कहा- अगर लड़की को पूरी तरह गर्म करके चुदने के लिए तैयार करके लन्ड डालेंगे तो उसे ज्यादा दर्द नहीं होता है।

इस पर पीहू ने कहा- पर भैया, ऐसा लग रहा है जैसे कोई गर्म लोहे का रॉड मेरी बुर में चल गया है।
तब मैंने कहा- मुझे भी ऐसा लग रहा है जैसे मेरा लन्ड किसी गर्म भट्टी में चला गया है। पीहू तुम्हारे अंदर बहुत गर्मी है जिसे मैं अपने लन्ड से पानी निकाल कर तुम्हारी जिस्म की गर्मी को आज शांत करूँगा।

यह सुनकर पीहू मुस्कुराने लगी और बोली- तो शांत कर दीजिए।
और मैं धीरे धीरे पीहू की चूचियाँ दबाते हुए धक्के मारने लगा।

नीचे से पीहू भी धक्के लगाकर जवाब दे रही थी और धीरे धीरे बोल रही थी- चोद दो भैया … और चोदो।

कुछ देर ऐसे ही अपने दोस्त की बहन की चूत को चोदने के बाद मैं रुक गया और पीहू से कहा- अपनी टांगें मेरी कमर में लपेट लें और हाथों से मुझे कसकर बांहों में भर ले. मैं तुझे खाट से उठाऊंगा.
तो उसने ऐसा ही किया।

मैंने पीहू को खाट से अपनी गोद में उसकी बुर में अपना लन्ड डाले ही उठा लिया। मैंने पीहू को लाकर दरवाजे से लगा दिया और उसकी बायीं चूची को मुंह में लेकर पीने लगा.
तो पीहू ने कहा- भैया, मैं आपको भारी नहीं लग रही हूँ?
तो मैंने कहा- मेरी बांहों में इतनी ताकत तो ही ही कि तुम्हें गोद में लेकर चोद सकूँ।

मैंने उसके चूतड़ों को नीचे से उठाया हुआ था और वो मुझे अपने पैरों से कसकर लपेटे हुए अपनी बांहों के घेरे में लेकर मुझसे कसकर चिपकी हुई थी।
उसकी नर्म चूचियाँ मेरे सीने से दबी हुई थी और मैं उसके होंठों का रस पी रहा था।

मैंने उससे पूछा- कैसे लग रहा है?
तो उसने कहा- बहुत ही अच्छा! भइया पर ये आप किसी को कभी बताइयेगा मत … नहीं तो तो मैं मर ही जाऊंगी।
मैंने उससे कहा- आज के बाद मरने की बात कभी मत करना! तुम्हें तो जीना है मेरे लिए! वादा करो कि तुम मुझे यूं ही प्यार करोगी.
तो उसने कहा- भैया, मैं हमेशा आपकी रहूंगी, जब चाहे आप मुझसे प्यार कर सकते हैं।

पीहू से मैंने

कहा- पीहू, दरवाजा खोलो!
तो उसने कहा- क्यों भैया?
मैंने कहा- पहले खोलो, फिर बताऊंगा.
तो उसने दरवाजा खोल दिया।

मैं उसे गोद में लिए बाहर आ गया तो उसने कहा- भैया, कोई देख लेगा.
तो मैंने कहा- देखो बाहर कितना अंधेरा है. वैसे भी यहाँ खेत पर कौन आएगा।
उसने चारों तरफ देखा, फिर बोली- भैया, आप मुझे बाहर क्यों लाये हो?
तो मैंने कहा- मेरी प्यारी बहना, तेरी चुदाई खुले आसमान के नीचे खेत में करूँगा.
तो उसने कहा- भैया, आप बहुत शरारती हो।

पीहू को मैंने अपनी गोद से नीचे उतार दिया, उससे बोला- बहना, अब तुम घोड़ी बन जाओ, पीछे से तुमको चोदूंगा।
वो घोड़ी बन गयी मैं भी उसके पीछे घुटनों के बल बैठ गया और अपना लन्ड उसकी बुर में पीछे से डाल दिया.
मैं उसकी कमर पकड़ कर उसे चोदने लगा, नीचे से वो आहें भर रही थी।

कुछ देर चोदने के बाद मैं रुक गया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा।
फिर कुछ देर बाद उसके बालों को पकड़ कर उसका सर हल्का पीछे खींच कर फिर से उसे चोदने लगा. जब मुझे लगता कि मेरा माल निकल जायेगा तो मैं रुक जाता और उसके बाद उसके जिस्म से कुछ देर खेलने लगता।

लगभग पन्द्रह मिनट तक उसे घोड़ी बनाकर चोदने के बाद मैंने अपना लन्ड उसकी बुर से निकाल कर उसको खड़ा किया।
अब तक कि चुदाई से वो मस्त हो गयी थी वो सही से खड़ा भी हो पा रही थी।

मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोली- आप बहुत बेरहम होकर चोद रहे हैं.
तब मैंने कहा- क्या तब मज़ा नहीं आ रहा?
तो वो बोली- मज़ा तो बहुत आ रहा है भइया। क्या आप मुझे हमेशा ऐसे ही प्यार करेंगे?
मैंने कहा- हाँ, हमेशा करूंगा।

फिर मैंने उसे गोद में लेकर रूम के अंदर लेकर खाट पर लिटा दिया. उसकी दोनों टाँगें फैलाकर अपना लंड उसकी बुर में डाल कर मैं उसके ऊपर लेट गया.
उसकी उसकी आँखों में देखते हुए मैं बोला- मेरी प्यारी बहना को मेरे लन्ड की चुदाई कैसी लगी?
तो वो बोली- भैया, आप बहुत अच्छा चोदते हैं.

फिर मैं उसकी कमर पकड़ कर उसे चोदने लगा.
कुछ देर बाद उसने पानी छोड़ दिया और मुझसे बोली- भैया बस करो!
तो मैंने कहा- बस थोड़ी देर और!
मैं जोर से धक्के लगा कर उसको चोदने लगा।

कुछ देर बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा, मैं पीहू के ऊपर लेट कर और जोर से धक्के लगाकर उसे चोदने लगा. पीहू ने मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया।
मेरे लन्ड ने अपना सारा माल पीहू की बुर में निकल दिया और मैं निढाल होकर पीहू के ऊपर लेट गया।

कुछ देर ऐसे ही पीहू के ऊपर लेटा रहा और पीहू मेरी पीठ सहलाती रही.
उसके बाद मैं उसके ऊपर से उठ गया।

मैंने उसकी चड्डी से अपना लन्ड साफ करके उसकी बुर को भी साफ किया।
पीहू से मैंने कहा- पीहू आज की चुदाई के यादगार के रूप में ये तुम्हारी चड्डी और ब्रा मेरे पास रहेगी.
तो वो मुस्कुराती हुई बोली- रख लीजिए।

उसके बाद हम दोनो ने कपड़े पहन लिए और मैं पीहू को लेकर घर आ गया।

दोस्तो, आपको मेरी यह दोस्त की बहन की चूत की चुदाई कहानी कैसी लगी?

दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-3
06-01-2020 by राजीव सिंह
मैं अपने दोस्त की कुँवारी बहन की चुदाई एक बार खेतों में कर चुका था. अब रात को उसी के घर में रात भर सुहागरात मनाने का कार्यक्रम था. क्या मैं उस देसी लड़की के साथ सेक्स कर पाया?

मेरे ख़ास दोस्त की बहन की चूत चुदाई की इस कहानी के दूसरे भाग
दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-2
में आपने पढ़ा कि मैं अपने दोस्त की बहन से दोस्ती करके उसे अपने साथ अपने खेतों के बीच में बने कमरे में ले आया उसकी चुदाई का कार्यक्रम बना कर. वो भी अपनी पहली चुदाई का मजा लेकर चुद गयी थी.

अब आगे:

नमस्कार दोस्तो मैं फिर से हाजिर हूँ अपनी कहानी को लेकर!

तो पीहू को खेत में चोदने के बाद मैं उसे उसके घर छोड़ने गया। वहाँ मैंने पीहू को उसका गिफ्ट नीले रंग की जीन्स और सफेद रंग का टॉप उसे दिया।
उसे पीहू लेकर काफी खुश हो गयी.
मैंने उससे कहा- पहन कर देख लो कि ठीक है या नहीं!
तो वो रूम में उसे पहनने चली गयी।

मैं उसकी मम्मी से बातें करने लगा।

वो जीन्स टॉप पहन कर जब बाहर आई तो बोली- बिल्कुल सही साइज का है।
और हम लोग आपस में बातें करने लगे।

उसकी मम्मी ने कहा- राज, आज पीहू के पापा घर पर नहीं हैं, ऐसा करो कि तुम आज यही हमारे साथ खाना खाकर यहीं सो जाओ।
मैंने कहा- ठीक है आंटी, पर अभी मैं घर जा रहा हूँ कुछ देर बाद आऊंगा तो सभी लोग साथ खाएंगे।

उसके बाद मैं बाइक लेकर वहां से सीधे मार्केट चला गया। रास्ते में मैंने पीहू को कॉल कर पूछा- मम्मी कहाँ हैं?
तो वो बोली- रसोई में!
मैंने कहा- पीहू तैयार रहना, आज अपनी सुहागरात मनाएंगे।

उसके बाद मैंने मार्केट में मेडिकल की दुकान से गर्भ रोकने की दवाई, सेक्स की गोली और नींद की गोली खरीद ली।

वापसी में मैंने एक दुकान से दो जोड़ी ब्रा और पैंटी और दो बड़े वाले डेरी मिल्क चॉकलेट और सुनार की दुकान से सोने की एक चेन लेकर पीहू के घर आ गया।
अपने घर पर मैंने कॉल कर बता दिया कि आज दोस्त के घर पर सोऊंगा क्योंकि उसके पापा घर पर नहीं है।

उसके बाद पीहू के घर गया तो उसकी मम्मी ने कहा- तुम लोग बैठो, मैं खाना निकालती हूँ।
उसकी मम्मी खाना निकालने रसोई में चली गयी तो मैंने पीहू से कहा- ये नींद की गोली किसी तरह से अपनी मम्मी को खिला दो।
पीहू ने मुझसे वो दवा ले ली और अपनी मोबाइल से अपने भाई को कॉल कर बात करते हुए रसोई में चली गयी।

थोड़ी देर बाद उसकी मम्मी मोबाइल पर बात करते हुए मेरे पास आकर बैठ गयी और मेरे दोस्त से बात करने लगी।

कुछ देर बाद पीहू खाना लेकर आई और हम लोगों के सामने रख दिया। फिर एक प्लेट में वो खीर लेकर आई और एक कटोरी मेरे सामने रखी, एक अपनी मम्मी को दी और एक कटोरी अपने लिए रखी।
उसके बाद हम सभी लोगों ने खाना खाया।
खाने के बाद हम लोग बातें करने लगे।

कुछ देर बाद उसकी मम्मी बोली- मुझे नींद आ रही है, मैं सोने जा रही हूं.
उन्होंने मुझसे कहा- तुम बाहर वाले रूम में सो जाना और पीहू अपने रूम में सो जाएगी।

फिर वो और पीहू अपने अपने रूम में सोने चली गयी।

उनके जाने के बाद मैंने वियाग्रा की गोली खा ली और बाइक की डिग्गी में से सामान निकल कर रूम में आया और आराम करने लगा।

कुछ देर बाद मैंने पीहू को कॉल किया और बोला- देखो, तुम्हारी मम्मी सो गई हैं या नहीं?
तो कुछ देर बाद उसका कॉल आया- मैंने मम्मी को आवाज दी मगर वो बोल नहीं रही हैं।
मैंने कहा- अब तुम्हारी मम्मी सुबह ही उठेंगी। अब तुम जल्दी से मेरे रूम में आ जाओ।

कुछ देर बाद मेरे रूम का दरवाजा खुला और पीहू अंदर आ गयी। वो लाल रंग की साड़ी पहन कर आई थी।

साड़ी में पीहू और भी खूबसूरत लग रही थी।
मैंने पूछा- साड़ी पहन कर क्यों आयी हो?
तो उसने कहा- आज पूरी रात अपनी है. आज मैं भैया आपकी दुल्हन बनकर आपके साथ सुहागरात मनाना चाहती हूं। क्या आप मुझको अपनी दुल्हन बनायेंगे?
मैंने कहा- क्यों नहीं मेरी प्यारी बहना।

इसके बाद वो बाहर चली गयी कुछ देर बाद वापस आयी तो वो अपने साथ सिंदूर,एक ग्लास दूध और एक जलता हुआ दीया लेकर आई।
उसने कहा- पहले मेरी मांग में सिंदूर भरिये!
तो मैंने उसकी मांग में सिंदूर लगा दिया.

उसके बाद उसने मेरा हाथ पकड़ कर कहा- इस दीये के चारों तरफ हम सात फेरे लेंगे।
फिर हमने दीये के चारों तरफ घूमकर सात फेरे पूरे किए।

मैंने पीहू को अपने सीने से लगाते हुए कहा- अब तुम मेरी दुल्हन हो, तुम्हारे मन और इस खूबसूरत तन पर किसका अधिकार है?
तो वो बोली- मेरे प्यारे भइया का … जो अब मेरे सईंया भी हैं।

मैंने पीहू से कहा- अब हम सुहागरात मनाएंगे.
तो वो बोली- हाँ!

मैंने कहा- जानती हो न कि सुहागरात में तुम्हारे साथ क्या होगा?
तो वो मेरी आँखों में देखती हुई बोली- आप ही बता दो न आप क्या करेंगे?

पीहू से मैंने कहा- आज तुमको मैं सुहागरात की सेज पर चोदूंगा।
मैंने पीहू से पूछा- बताओ मैं तुम्हारे साथ क्या करूँगा?
तो वो बोली- आप मुझे चोदेंगे।

मैंने उससे पूछा- तुम चुदाई के तैयार हो?
तो उस

ने कहा- हाँ!

मैंने कहा- बिस्तर पर ले चलूं?
तो उसने कहा- हाँ!

मैंने उसको गोद में उठाया और बिस्तर पर ले जाकर बैठा दिया।
उसने अपने चेहरे पर घूंघट खीच लिया और बोली- दूल्हन का चेहरा देखने के लिए भइया आपको मुंह दिखाई देनी पड़ेगी।
मैंने कहा- ठीक है, दूंगा.
और उसके घूंघट को उठा दिया।

इस पर पीहू बोली- अब मेरी मुँह दिखाई दीजिये?
तो मैंने कहा- अपनी आँखें बंद करो.
उसने अपनी आँखें बंद कर ली।
मैंने सोने की चैन निकाल कर उसके गले में पहना दी।

उसने आँखें खोल कर चैन को देख कर बोली- बहुत खूबसूरत मुंह दिखाई दी है भइया आपने।
तो मैंने कहा- इसलिए कि मेरी प्यारी बहन ही मेरी ही दुल्हन बनी है।

मैंने पीहू से पूछा- क्या अब तुम्हारे बदन का दीदार करने की इजाज़त है मुझे?
तो उसने कहा- हाँ, पर पहले आप दूध पी लीजिये।
मैंने कहा- जरूर पिऊंगा पर उसे तुम्हें अपने मुंह में लेकर पिलाना होगा।
उसने कहा- ठीक है!

और थोड़ा सा दूध अपने मुंह में लेकर मेरे मुंह में डाल दिया।
इसी तरह मैंने भी थोड़ा सा दूध उसकी मुंह में डाल दिया।
इस तरह सारा दूध हम दोनों ने एक दूसरे को पिला दिया।

इसके बाद मैंने पीहू को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ के उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर चूमने लगा। उसके बाद मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा।

फिर मैंने उसके सीने पर से उसकी साड़ी को हटा दिया। ब्लाउज के ऊपर से ही मैं उसकी दोनों चूचियाँ दोनों हाथों से कसकर मसलने लगा।

पीहू अब तक एकदम चुदासी होकर आह भरते हुए आह भ..इ..या कहने लगी। उसकी मद भरी आहें सुनकर मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। मैंने उसकी साड़ी के चुन्नट जो साया के अंदर किये हुए थे, उनको निकाल दिया और पूरी साड़ी उतार दी।

अब वह साया और ब्लाउज में मेरे सामने थी। मैंने बिस्तर पर अपने दोनों पैर सटाकर फैला दिए और पीहू को अपनी जांघों पर बैठने का इशारा किया।

पीहू अपने दोनों पैर मेरे कमर के दोनों तरफ करके अपना मुँह मेरी तरफ करके मेरी जाँघों पर बैठ गयी। मैंने कसकर उसे सीने से लगा लिया उसने भी मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया।

मैंने पीहू का सर अपने हाथों में पकड़ कर पहला चुम्मा उसकी माथे पर किया तो उसने शर्म से अपनी आँखों को बंद कर लिया।
उसके बाद मैं उसके पूरे चेहरे को चूमने लगा।

कुछ देर बाद मैंने पीहू से अपने चेहरे पर किस करने को कहा तो वो मेरे पूरे चेहरे पर चुम्बन करने लगी।

मैं पीहू के होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा वो भी मेरा साथ देने लगी. उसके बाद मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी तो वो मेरे जीभ को चूसने लगी. फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी मैं उसकी जीभ चूसने लगा।

फिर मैं उसके दोनों कानों और गर्दन को चूमते हुए उसके कंधे तक आया।
अब तक पीहू पूरी तरह चुदासी हो गयी थी।

फिर मैंने उसके ब्लाउज के हुक को खोल कर उसका ब्लाउज निकाल दिया और उसकी कमर को सहलाते हुए अपने हाथों को सजी पीठ पर ले जाकर उसकी ब्रा के हुक को खोल दिया।
फिर धीरे धीरे उसके कंधे से ब्रा की डोरी को सरका कर नीचे कर दिया और ब्रा को भी निकाल कर उसके जिस्म से अलग कर दिया।

उसके बाद मैंने कहा- मेरी बहन, अपनी चूची अपने हाथों से मुझे पिलाओ!
तो उसने घुटनों के बल होकर अपने हाथ से अपनी बायीं चूची का निप्पल मेरे मुँह में दे दिया और बोली- भइया मेरी चूची का सारा रस पी जाइये।
मैं उसकी चूची का निप्पल अपने दांतों में दबाकर चूसने लगा और बायें हाथ से उसकी दूसरी चूची और उसके निप्पल को मसलने लगा।
पीहू मेरे सर को सहलाते हुए मादक आहें भर रही थी।

बारी बारी उसकी दोनों चूचियों को पीने और मसलने के बाद पीहू को लिटा कर उसकी साया का डोरी खोल दिया और उसके साया को निकाल दिया। फिर मैंने उसकी पैंटी भी निकाल कर उसको बिल्कुल नंगी कर दिया औऱ मैं अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया।

मैंने अपना लन्ड उसके हाथ में देकर पूछा- ये क्या है?
तो उसने कहा- आपका लन्ड है.
मैंने पूछा- इससे क्या करूँगा मैं?
तो वो बोली- इससे आज अपनी बहन को दुल्हन बना कर चोदोगे।

मैंने उसे लन्ड चूसने का इशारा किया तो मेरे दोस्त की बहन मेरा लन्ड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.


Dost Ki Behan Ki Chut Chati
कुछ देर बाद मैंने अपना लन्ड उसके मुंह से निकाल लिया और उसको लिटा कर उसकी टाँगें फैला दी और अपना मुंह उसकी बुर पर लगा उसे चूसने लगा।
मैं उसकी बुर तब तक चूसता रहा जब तक उसकी बुर ने पानी नहीं छोड़ दिया। मैं उसकी बुर के पानी को पी गया।

उसके बाद मैं उसकी दूसरी चूची के निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगा और एक को अपने हाथों से मसलकर उसको चुदने के लिए गर्म करने लगा।

लगभग दस मिनट तक दोनों चूचियाँ दबाने और चूसने के बाद वो चुदने के लिए फिर से तैयार हो गयी और बोली- भैया, प्लीज अब मुझे चोद दीजिये।

दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-4
07-01-2020 by राजीव सिंह
अपने दोस्त की बहन की चूत मैं दो बार चोद चुका था. अब मेरा मन उसकी गांड मारने का था. वो डर रही थी कि गांड में लंड जाएगा तो दर्द होगा. तो मैंने उसकी गांड मारी या नहीं?

कहानी का पिछला भाग: दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-3

फिर मैं उसके पेट और कमर को चूमते हुए उसकी चूत पर आकर एक चुम्बन किया। उसके बाद बायें पैर के जाँघों को चूमते हुए घुटनों से नीचे उसके पैरों की एड़ियों तक आया फिर दायें पैर की एड़ी को चूमते हुए उसकी घुटनों से होते हुए उसकी जाँघों तक जाकर फिर से उसकी चूत पर किस किया।
वो आह भ..इ..या कहते हुए मादक आहें भर रही थी जिससे मेरी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी।

फिर मैंने उसको पेट के बल लिटा दिया और उसके बाएं पैर की उँगलियों को चाटते हुए घुटनों से होकर उसके बायें चूतड़ पर आया। फिर इसी तरह दायें पैर को चूमते हुए उसके दायें चूतड़ तक आया। फिर मैं उसके बालों को उसकी पीठ और चूतड़ों के पास से हटाकर पूरी पीठ को चूमते हुए उसके गर्दन तक आया।

अब पीहू आहें भरती हुई कहने लगी- भइया, अब चोद दो मुझे … नहीं तो मर जाऊंगी।

मैंने उसे पेट के बल लिटा दिया और उसके माथे पर उसकी चूचियाँ दबाते हुए प्यार से उसको चूम लिया। उसकी दोनों टाँगों को फैलाकर मैं उसके बीच घुटनों के बल बैठ गया और उसके दोनों टाँगों को अपने कंधों पर रखकर लन्ड का सुपारा उसकी चूत की छेद पर रखकर एक ही झटके में पूरा लन्ड उसकी चूत में पेल दिया।

पीहू के मुंह से एक दर्द भरी आह निकली- उम्म्ह… अहह… हय… याह… भइ..या धीरे करो … दर्द होता है,
फिर मैं दोनों हाथों में उसकी दोनों चूचियाँ पकड़ कर दबातें हुए उसकी चूत को चोदने लगा।

करीब पंद्रह मिनट बाद पीहू का जिस्म अकड़ने लगा वो बोली- भैया मेरा निकलने वाला है.
और कसकर मेरे बदन से लिपट गयी।

चार पांच झटके खाने के बाद उसका बदन ढीला पड़ गया। इसके बाद वो बोली- भइया, थोड़ी देर रुक जाओ, दर्द हो रहा है.
तो मैंने अपना लन्ड उसके चूत से निकल लिया।

दवा अपना असर दिखा रही थी। फिर मैं पीहू को घोड़ी बनाकर पीछे से अपना लन्ड उसकी चूत में डाल कर उसकी कमर पकड़ कर उसे चोदने लगा.

कुछ देर अपने दोस्त की जवान बहन ऐसे चोदने के बाद मैं लन्ड उसकी चूत से निकाल कर बिस्तर पर लेट गया और पीहू से कहा- मेरे लंड के ऊपर आकर इसकी सवारी करो।

पीहू मेरी कमर के दोनों तरफ अपने घुटनों के बल होकर अपनी चूत की छेद पर मेरे लन्ड को सेट कर बैठ गयी। मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में समा गया।
मैंने पीहू से कहा- पीहू, अब तुम मुझे चोदो.
तो वो कमर हिला कर मुझे चोदने लगी।

कुछ देर बाद मैंने इशारा किया तो वो मुझसे लिपट गयी।

मैंने करवट बदल कर पीहू को नीचे कर दिया और उसे चोदने लगा। अब मैं पूरी तरह उत्तेजित हो गया था और कसकर धक्के लगा कर पीहू को चोदने लगा।

करीब दस मिनट तक धक्के लगता रहा तब तक पीहू का शरीर फिर अकड़ने लगा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
पीहू अब बिल्कुल तृप्त हो गयी थी, उसने मुझसे कहा- भइया, अब बस करो … क्या चोद कर मेरी जान लेने का इरादा है? बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- बहना, आज तुम्हारी ऐसी चुदाई करूँगा कि जिंदगी में कभी भूल नहीं पाओगी मेरे लन्ड को।
तब पीहू ने कहा- भइया, आपने मेरी पहली चुदाई कर मेरी सील तोड़ी है. मैं आपको कैसे भूल सकती हूं।

मैं उसकी बातों को अनसुना कर और तेज़ी से धक्के लगाकर उसे चोदने लगा.
नीचे से पीहू मादक आहें भर रही थी- भ..इ…या… बस करो. मैं मर जा…ऊं…गी.

करीब दस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरा जिस्म अकड़ने लगा और मेरे लन्ड ने अपना माल उसकी चूत में निकाल दिया।

मैं निढाल होकर अपना लन्ड उसकी चूत में डाले ही उसके ऊपर लेट गया और वो प्यार से मेरी पीठ को सहलाने लगी।
पीहू ने कहा- भइया, आपने तो आज मुझे चोद कर मेरी जान ही निकाल दी। ऐसे बेरहमी से कोई अपनी बहन को चोदता है क्या?
मैंने उससे पूछा- सच बता, इस चुदाई में तुझे मज़ा आया या नहीं?
तो उसने कहा- मज़ा तो बहुत आया। आपने सच में बहुत अच्छे से मुझे चोदा. मज़ा आ गया।

फिर मैंने करवट बदल कर उसको अपने ऊपर ले लिया उसकी टाँगों में टांगें फंसाकर उसकी चूतड़ों और कमर को सहलाते हुए उससे बातें करने लगा।

लगभग चालीस मिनट के बाद मेरे लन्ड ने फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू की. तब मैंने पीहू से कहा- पीहू आज मैं तुम्हारी गांड भी मारूँगा.
तो वो बोली भइया- आपका इतना मोटा लन्ड मेरी गांड में कैसे जाएगा? बहुत दर्द होगा.
तब मैंने कहा- धीरे धीरे डालूंगा, थोड़ा दर्द होगा पर आज ये दर्द मेरे लिए सहना पड़ेगा तुमको।

पीहू बोली- भइया, मैं आपके दिया हर दर्द सहूंगी. पर धीरे से डालियेगा।
मैंने कहा- मेरी प्यारी बहन तेरी गांड में अपना लन्ड धीरे से ही डालकर तेरी गांड चोदूँगा ज्यादा दर्द नहीं होगा।

पीहू से मैंने पूछा कि उसके पास वैसलीन है तो उसने कहा- मेरे रूम में है.
तो मैंने लाये हुए दोनों चॉकलेट के पैकेट उसके हाथों में दिए और उसको

गोद में उठाकर उसके कमरे में ले आया।

बाहर जाकर उसकी मम्मी के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और पीहू के रूम में आया। चॉकलेट के दोनों पैकेट पिघल गए थे।
पीहू ने कहा- भइया, ये तो पिघल गए हैं.
तब मैंने कहा- हाँ इन्हें जानबूझकर कर पिघलाया है।
तब वो बोली- क्यों भैया?

तो मैंने एक पैकेट फाड़कर उसका चॉकलेट अपने पूरे लन्ड पर लगा दिया और उसे कहा- चाटकर इसे खा जाओ.
वो मेरे लन्ड को चाटते हुए पूरी चॉकलेट को खा गयी।

मैंने उससे पूछा- कैसा लगा मेरे लन्ड चॉकलेट का स्वाद?
तो बोली- भैया, बहुत अच्छा लगा।

फिर मैंने उसे लिटा कर दूसरे पैकेट को फाड़ कर पूरा चॉकलेट उसकी चूत पर लगा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा।
मैं उसकी चूत को चाटते हुए चॉकलेट को खा रहा था और पीहू की बेकरारी बढ़ती जा रही थी।

उसकी चूत को चाट कर साफ कर देने के बाद मैंने उससे कहा- घोड़ी बन जाओ, अब तुम्हारी गांड मारूँगा.
तो वो बोली- भइया, धीरे धीरे डालियेगा. गांड में लंड जाएगा तो दर्द होगा।

उसे घोड़ी बनाने के बाद मैंने वैसलीन उंगली में निकाल कर गांड के छेद के ऊपर ढेर सारी वैसलीन लगा दी और अपने लन्ड पर भी वेसलीन लगा ली।
फिर मैंने लन्ड का सुपारा उसकी गांड की छेद पर रख और हल्का सा दवाब बनाया तो सुपारे का नोकीला सिरा उसकी गांड की छेद में सेट हो गया।

मैंने कसकर पीहू का कमर पकड़ लिया और उससे बोला- अपना लन्ड तुम्हारी गांड में डाल रहा हूँ. बर्दाश्त करना.
तो उसने कहा- ठीक है भैया, कोशिश करूंगी. पर आराम से डालना आप!
मैंने कहा- ठीक है।

उसकी कमर को मैंने कस कर पकड़ लिया और लन्ड पर दवाव बनाया तो उसका सुपारा उसकी गांड की छेद के अंदर चला गया।
उसके मुँह से एक जोर की चीख निकल गयी- उईइ माँ मर गयी … निकालो भैया!
उसने लन्ड अपनी गांड में से निकलने की कोशिश की.

मगर मैंने उसकी कमर को कस कर पकड़ा हुआ था और एक जोर का झटका देकर पूरा लन्ड उसकी गांड में डाल दिया।
वो जोर से चीख उठी- भ..इ…या, प्लीज अपना लन्ड बाहर निकाल लो!
उसकी आँखों में आँसू आ गए।

मैंने उससे कहा- पीहू, प्लीज शांत हो जाओ, दर्द अभी खत्म हो जाएगा।
कुछ देर तक वैसे ही रहने के बाद पीहू से पूछा- दर्द कम हुआ?
तो वो बोली- हाँ!
फिर मैंने धीरे धीरे उसकी गांड में धक्के लगाना शुरू कर दिया।

कुछ देर धक्के लगाने के बाद मैंने पीहू से पूछा- गांड में लंड का मज़ा आ रहा है?
तो वो बोली- हाँ … पर शुरू में जब मेरी गांड में लंड घुस रहा था तो मेरी जान ही निकल गयी थी।

मैंने उसकी गांड में धक्के लगाने की स्पीड बढ़ा दी।

करीब आधे घण्टे तक लगातार अपने दोस्त की बहन की गांड में धक्के लगाने के कारण मेरा लन्ड आराम से अंदर बाहर होने लगा था।
अब उसे भी गांड मरवाने में मज़ा आने लगा था। नीचे से वो धक्के का जवाब धक्के से दे रही थी।

कुछ देर चोदने के बाद मेरे लन्ड ने अपना माल उसकी गांड में निकाल दिया और मैं निढाल होकर उसकी बगल में लेट गया।
मैंने पीहू को अपने ऊपर ले लिया और उसके बदन को सहलाते हुए उससे बातें करने लगा।

घड़ी में तीन बजे का अलार्म सेट कर हम सो गए।

तीन बजे घड़ी का अलार्म बजा तो मेरी नींद टूट गयी। मैंने अलार्म बन्द किया, पीहू को देखा तो वो बेसुध नंगी लेटी थी। उसके नंगे बदन को देखकर लन्ड महाराज फिर तन कर खड़े हो गए।

मैंने पीहू को जगाया और चालीस मिनट तक फिर उसकी चूत की चुदाई पूरा मजा लेकर और देकर की।

उसके बाद पीहू ने अपने कपड़े पहन लिए. उसने बिस्तर को सही किया और मेरे साथ बाहर वाले कमरे में आ गयी।
वहाँ पर मैंने अपने कपड़े पहने और उसने अपनी साड़ी और अन्य कपड़े समेट लिए।

मैंने उसे वो ब्रा और पैंटी दे दी जो मैं उसके लिए लाया था.
और उसने मुझे वो सोने की चैन वापस दे दी, बोली- भैया, इसे आप रखे रहिये, बाद में कोई मौका देखकर मुझे दे दीजियेगा।

इसके बाद वो अपने रूम में चली गयी और मैं बिस्तर पर सो गया।

सुबह मेरी नींद तब खुली जब मेरी जान पीहू मेरे लिए चाय लेकर आई और मुझे जगाया।
मैंने प्यार से उसे चूमा और उसके हाथों से चाय ले ली.

चाय पीने के बाद मैं अपने दोस्त की मम्मी से मिल के अपने घर चला आया।

दोस्तो, मेरे जिगरी दोस्त की सगी जवान बहन की चूत चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी? मुझे बताना मत भूलियेगा. मुझे आपकी राय का इंतजार रहेगा।

कहानी का अगला भाग: दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-5

दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-5
08-01-2020 by राजीव सिंह
दुनिया का सबसे बड़ा नशा चूत का नशा होता है। ऐसा ही मेरे साथ हुआ। दोस्त की बहन को जमकर चोदने के बाद मेरे ऊपर हमेशा उसकी चूत चोदने का नशा छाया रहता था।

कहानी का पिछला भाग: दोस्त की बहन बनी गर्लफ्रेंड-4
दोस्तो नमस्कार!
कहते हैं दुनिया का सबसे बड़ा नशा चूत का नशा होता है। अगर वो भी एक कमसिन कली की चूत मारने को मिल जाये तो उसको चोदने के चक्कर में आप हमेशा पड़े रहते हैं।
ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ।
पीहू को दीपावली की रात जमकर चोदने के बाद मेरे ऊपर हमेशा उसकी चूत चोदने का नशा छाया रहता था।

मैं अक्सर उसके घर जाया करता पर उसको चोदने का कोई मौका मिल नहीं पा रहा था। मैं उसे देखकर बस आहें भरकर रह जाता था। मैं उसे चोदने की तरकीब सोचता रहता था।

मेरी दीपावली की छुट्टियां खत्म होने वाली थी।
एक दिन मैं उसके घर पर बैठकर उसकी मम्मी और पीहू से बातें कर रहा था।

मैंने पीहू से पूछा- तुम बी ए के आखरी साल में हो, इसके बाद क्या करने का सोचा है?
पीहू ने कहा- इसके बाद बी एड करना है।
मैंने कहा- अगर पढ़ना है तो किसी अच्छे कॉलेज से पढ़ो.

तब उसकी मम्मी ने कहा- यहाँ पास में कहाँ कोई अच्छा कॉलेज है।
मैंने उसकी मम्मी से कहा- पीहू को बाहर भेज दो पढ़ने के लिए!
तो वो बोली- अकेली लड़की को कैसे बाहर भेज सकते हैं।

मैंने उसकी मम्मी से कहा- आप परेशान क्यों हो रही हो? आप पीहू को वाराणसी भेज दीजिये. वहाँ पर मनीष भी होगा और मैं तो रहूंगा ही।

काफी समझाने के बाद उसकी मम्मी बोली- ठीक तो है, पीहू को अगर किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल जाएगा तो अच्छा ही रहेगा।

मौका सही देखकर मैंने उसकी मम्मी से कहा- पीहू को क्यों नहीं एक बार वाराणसी भेज देती हैं, मेरे साथ वहाँ थोड़ा ये भी घूम फिर लेगी और कुछ दिनों के बाद मनीष के साथ वापस आ जायेगी।

मैंने पीहू को आंखों से इशारा किया तो उसने कहा- हाँ मम्मी, क्यों नहीं मुझे भैया के साथ भेज देती. कुछ दिनों घूम फिर कर मनीष भैया के साथ वापस आ जाऊंगी।

बार बार कहने और उनकी बात मनीष से करवाने के बाद वो मेरे साथ पीहू को भेजने के लिए तैयार हो गयी।

उस दिन जब पीहू अकेले में मिली तो बोली- भैया, मैं सब समझती हूं। आप मुझे घुमाने के बहाने चोदने के लिए लेकर जा रहे हैं।
मैं मौका देखकर उसकी चूचियाँ दबाते हुए बोला- मेरी छोटी बहना तो काफी समझदार हो गयी है।

तीन दिन बाद मेरी छुट्टियां खत्म हो गयी तो मैं पीहू को साथ लेकर वाराणसी रूम पर आ गया। मनीष भी रूम पर था। हमारा रूम तीसरी मंजिल पर था। सबसे नीचे मकान मालकिन रहती थी। दूसरी मंजिल पर एक टीचर अपनी पत्नी के साथ रहते थे। दूसरे में एक आदमी अकेले रहता था। सबसे ऊपर वाले रूम में हम दोनों लोग रहते थे।

कुछ देर आराम करने के बाद शाम को हम तीनों तैयार होकर घाट की तरफ घूमने चले गए फिर होटल में खाना खाकर हम लोग वापस रूम पर आ गए।

वापस आने के बाद मनीष ने कहा- तुम दोनों आराम करो. मेरी नाईट शिफ्ट चल रही है, मैं ड्यूटी पर जा रहा हूँ।
इसके बाद वो तैयार होकर ड्यूटी पर चल गया।

मैं एक जरूरी काम से नीचे चला गया था।

कुछ देर बाद मनीष का काल आया कि वो ड्यूटी पर पहुँच गया है।
अब मैं रूम पर आ गया।

पीहू फोन पर अपनी मम्मी से बात कर रही थी। मैं पीछे से जाकर उसको अपनी बांहों में भर कर उसकी दोनों चूचियाँ दबाने लगा।

कुछ देर बाद उसने कॉल कट कर दिया और बोली- भइया, आप मुझे क्या इसीलिए यहाँ लेकर आये हैं?
तब मैंने उसे घुमाकर सीने से लगा लिया और उसकी आँखों में देखकर बोला- मैं तुम्हें चोदने के लिए यहाँ लेकर आया हूँ. क्या तुम मुझसे चुदने के लिए यहाँ नहीं आई हो?
वो कसकर मुझे अपनी बांहों में भरती हुई बोली- हाँ भैया, घूमना तो सिर्फ एक बहाना है. असल में मैं सिर्फ आपसे चुदने के लिए आई हूँ।

पीहू मुझसे बोली- भैया आपके जाने के बाद भाभी आयी थी। वो तो बहुत खूबसूरत है आपने कभी उनपर लाइन नहीं मारी क्या?
मैंने उसकी चूचियाँ दबातें हुए कहा- वो खूबसूरत तो है ही पर कभी भाव ही नहीं दिया. और कहने में गांड भी फटती है कि किसी से कह दिया तो बवाल हो जाएगा।

पीहू ने कहा- भैय्या कहो तो आपके लिए उससे बात करूं?
मैंने पीहू की चूचियों को दबाते हुए कहा- उससे सेटिंग करा दो न मेरी प्यारी बहना … तुम्हारा अहसान रहेगा।
उसने कहा- कोई बात नहीं भैया, जाने से पहले आपके लिए इनकी व्यवस्था करके जाऊंगी। पर भाभी से सेटिंग होने के बाद मुझे तो नहीं भूल जाओगे?
मैंने उसकी चूचियो को दबाते हुए कहा- अपनी प्यारी बहन पर ऐसी सौ भाभियां कुर्बान … मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूंगा।

पीहू ने कहा- भैया ऐसा क्या मुझमें है जो भाभी में नहीं है?
तब मैंने कहा- भाभी भी खूबसूरत है. पर तुम मुझे उनसे भी खूबसूरत लगती हो, तुम्हारी सील तोड़कर मैंने तुमको कली से फूल बनाया है। तुमको चोदने के चक्कर में तो बहुत लड़के पड़े होंगे. पर तुमने ये मौका मुझे दिया. तब बताओ मैं तुमक

ो कैसे भूल सकता हूँ।

पीहू ने कहा- भैया, सिर्फ लड़के ही नहीं बुड्ढे भी मेरे पीछे पड़े हैं।
मैंने उसकी गर्दन पर किस करते हुए कहा- तुम इतनी खूबसूरत हो ही कि तुम्हें चोदने के ख्याल मात्र से ही बुड्ढों के भी लन्ड खड़े हो जाते होंगे।

यह सुनकर पीहू बोली- भईया क्या सच में मैं इतनी खूबसूरत हूँ?
मैंने उससे कहा- हीरे की परख सिर्फ जौहरी जानता है. तुम कितनी खूबसूरत हो ये सिर्फ वही बता सकते हैं जिनका लन्ड तुम्हें देखते ही खड़ा हो जाता होगा और उनका दिल तुमको चोदने के लिए मचल जाता होगा।

इतना कहकर मैं उसके कानों को बारी बारी मुंह में लेकर चूसने लगा।
मैंने पीहू से कहा- जरूर मैंने कुछ अच्छे काम किये होंगे जो तुम्हारे जैसी लड़की की सील तोड़ने और तुमको चोदने को मिला।
उसने मुझसे कहा- भैया आप जब कभी मौका मिलेगा तब तब अपनी बहन को नहीं अपनी दुल्हन को चोद सकते हैं।
इतना कहकर वो मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगी।

मैंने उसके बंधे हुए बालों को खोल दिया उसके बाल उसके चूतड़ों तक लटकने लगे। मैं उसके चूतड़ों को अपने हाथों से दबाने लगा।
होंठों को चूसने के बाद उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और मैं उसकी जीभ चूसने लगा।

फिर मैंने उसके हाथ को ऊपर कर उसका गुलाबी रंग का टीशर्ट निकाल दिया।
मैंने उसे इशारा किया तो उसने मेरा टीशर्ट और बनियान निकल कर अलग कर दिया।

हमारे रूम में दो तख्त सटाकर डाले गए थे। मैं तख्त के बीच में बिस्तर पर टांगें फैलाकर बैठ गया और पीहू को अपनी गोद में आने का इशारा किया।
वो मेरी तरफ मुँह करके मेरी गोद में आकर मेरी जाँघों पर बैठ गई।
मैं उसके होंठों को अपने मुँह में लेकर पीने लगा।

उसके होंठों को चूसते हुए ही उसकी ब्रा को खोल कर निकाल दिया। उसके बाद उसको लिटा कर उसके लैगी और पैंटी को उसकी टाँगों से निकाल कर नंगी कर दिया।
फिर मैं अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया।

फिर मैं पीहू के साथ सिक्सटी नाइन वाली पोजीशन में लेट कर उसकी चूत को चूसने लगा और वो मेरा लन्ड चूस रही थी। कुछ देर ऐसे ही चूसने के बाद उसके ऊपर से उठ गया और उसकी दोनों टाँगों के बीच आकर बैठ गया।

पीहू पूरी तरह चुदासी होकर मुझसे बोली- भइया अब डाल दीजिए!
मैंने पूछा- क्या?
तो बोली- अपना लन्ड और क्या!

मैं अपना लन्ड उसकी चूत में डाल कर उसकी टाँगों को कंधे पर रख कर चोदने लगा. जब मुझे लगता कि मेरी उत्तेजना ज्यादा बढ़ गयी है तब धक्के लगाना रोक देता और उसकी चूचियाँ को मसलने लगता था.

लगभग दस मिनट बाद पीहू के चूत ने पानी छोड़ दिया। पीहू के चेहरे पर संतुष्टि के भाव साफ दिख रहे थे।

फिर मैंने उसको घोड़ी बना दिया और लन्ड उसकी गांड में डाल कर उसकी कमर को पकड़ कर धक्के मारने लगा। कुछ देर तक उसकी गांड में धक्के लगाकर चोदने के बाद अपना लन्ड उसकी गांड में से निकाल कर उसकी चूत में डाल कर उसकी चूत चोदने लगा।

अब मैंने लन्ड निकाल कर पीहू को बिस्तर पर लिटा कर उसकी दोनों टाँगों को उठा कर उसके गर्दन की तरफ मोड़ दिया और उसकी चूत में लन्ड डालकर चोदने लगा।
पहले ही झड़ चुकने के कारण उसकी चूत काफी गीली हो गयी थी और छप छप की आवाज के साथ लन्ड आसानी के साथ अंदर बाहर हो रहा था।

पीहू नीचे से गांड उठाकर हर धक्के का जवाब दे रही थी और ‘आह भ…ई…या और जोर से भ…ई…या मेरे प्यारे भ..ई..या.. मेरी जान भ…इ…या आई लव यू भइया’ कह करके आहें भर रही थी।

उसकी आहें सुनकर उसकी चूत को जोर से चोदते हुए मैंने कहा- हाँ मेरी प्यारी बहना, मेरी प्यारी दुल्हनिया … आज पूरी रात तुमको चोदूंगा।
यह सुनकर पीहू ने कहा- हाँ भैया, आज पूरी रात आपसे चुदवाऊंगी।

मेरी उत्तेजना ज्यादा बढ़ गयी थी इसलिए मैंने लन्ड उसकी चूत से निकाल लिया और उसकी दोनों टाँगों को फैलाकर उसकी चूत को चूसने लगा।

थोड़ी देर बाद पीहू मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ खींचने लगी. मैं समझ गया कि अब वो दुबारा झड़ने वाली है।
कुछ देर बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

मैं उसकी चूत का पूरा पानी पी गया और उठकर पीहू के ऊपर लेट गया और उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा।

कुछ देर उसके होंठों को चूसने के बाद मैं लेट गया और पीहू को अपने लन्ड पर बैठने का इशारा किया।
पीहू मेरे लन्ड को चूत पर सेट कर बैठ गयी। मेरा लन्ड पूरा उसकी चूत में चला गया. उसके बाद वो थोड़ा झुककर अपने हाथों को मेरे दोनों कंधो के बगल में रखकर धीरे धीरे कमर उठा कर मुझको चोदने लगीं और मैं उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथों से मसलने लगा।

कुछ देर तक वो मुझे ऐसे ही चोदती रही. उसके बाद मैंने इशारा किया तो उसने मुझे सहारा देकर बैठा लिया। अब वो मेरे गोद में थी और मेरा लन्ड अब भी उसकी चूत में!

मैं उसके होंठों को मुंह में लेकर चूसने लगा।
कुछ देर बाद मैंने उससे कहा- मुझे पकड़ ले! मैं तुझे गोद में लेकर खड़ा होकर उसे चोदूंगा।

उसने अपने पैरों को कसकर मेरे कमर से लपेट लिया और मेरे बांहों में चिपक गयी। मैंने उसकी गांड के नीचे दोनों हाथों को लगा दिया और खड़ा हो गया।
अब कमरे में खड़े होकर मैं इधर उधर घूमते हुए उसे चोद रहा था।

कुछ देर खड़े होकर चोदने के बाद मैं उसे बिस्तर के किनारे लिटा कर खड़ा हो गया और जोर जोर से उसकी चूत में धक्के लगा कर उसको चोदने लगा।
पूरा कमर पीहू की मादक आहों और छप छप की आवाज से गूंज रहा था।

लगातार पांच मिनट धक्के लगाने के कारण मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुँच गया और मेरे लन्ड ने अपना सारा माल पीहू की चूत में गिरा दिया।
मैंने पीहू के माथे पर एक किस किया और निढाल होकर उसकी बगल में लेट गया।

कुछ देर बाद मैं उठ कर बैठ गया और पीहू की पीठ को अपने सीने से चिपका कर उसको अपनी गोद में बैठा कर उसकी दोनों चूचियों के निप्पल को उंगलियों में ले कर मसलने लगा और पीहू से बातें करने लगा।

पीहू ने मुझसे कहा- भैया अगर आपको भाभी अच्छी लगती है तो बात आगे बढ़ाऊ?
मैंने पीहू से कहा- जैसी तुम्हारी इच्छा!
तो पीहू ने कहा- जाने से पहले मैं वादा करती हूं कि भाभी को आपकी गोद में बैठा कर जाऊँगी।

कुछ देर बाद लन्ड फिर से खड़ा होने लगा तो मैंने पीहू को बिस्तर पर लिटा दिया और अपना लन्ड उसकी टाँगों को उठाकर उसके चूत के अंदर डालने लगा.
तो पीहू ने कहा- भैया आपके अंदर तो बहुत स्टेमिना है, इतनी जल्दी आपका लन्ड दुबारा खड़ा हो गया है। आपकी बीवी आपसे बहुत खुश रहेगी।
मैंने पीहू से कहा- स्टेमिना तो मेरे अंदर है ही … पर तुम भी इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हारे इस जवान और गदराए बदन को देखकर तुम्हें चोदने का मन अपने आप करने लग रहा है। और रही बात बीवी की … तो क्या तुम भूल गयी हो हो कि तुम भी मेरी बीवी हो।

यह सुनकर पीहू मुझको अपनी बांहों में भरते हुए बोली- नहीं भैया, मैं भूली नहीं … आपको दिल से हमेशा अपन पति मानूँगी।
इसके बाद मैं उसे चोदने लगा।

मैंने पीहू से कहा- मनीष दूसरी कम्पनी में साक्षात्कार देने वाला है. अगर वो वहां सलेक्ट हो जाएगा तो वो मुम्बई चला जायेगा। तुम अच्छी तरह से तैयारी करके यहाँ एड्मिशन ले लो. और जब मनीष चला जायेगा तो फिर यहाँ पर हम दोनों पति पत्नी की तरह रहेंगे। फिर मेरी जान, तुमको मैं रोज इसी तरह चोदूँगा।

लगभग चालीस मिनट लगातार पीहू का चूत चोदने के बाद लन्ड ने मेरे पानी छोड़

दिया। उस रात पीहू को मैंने चार बार अलग अलग तरीके से जमकर चोदा। पीहू और मैं दोनों लोग चुदाई से पूरी तरह थक कर चूर हो गए थे। मैं पीहू को अपनी नंगी ही अपनी बांहों में लेकर सो गया।

सुबह नींद खुली तो सात बज रहे थे।
मैं जल्दी से उठा और पीहू को जगाया और बोला- सुबह हो गयी है।
जल्दी जल्दी हम दोनों लोग फ्रेश होकर नहाए और खाना बनाने लगे।

पीहू हमारे साथ एक हफ्ते रही दिन में मनीष उसको शहर घुमाता और रात भर मैं पीहू की जमकर चुदाई करता।

इसके एक हफ्ते बाद पीहू मनीष के साथ वापस घर चली गई। मनीष ने पीहू से वादा किया है कि पीहू के एग्जाम खत्म होने के बाद उसका एडमिशन यहाँ कम्प्यूटर क्लासेस में करवाएगा।

उसके बाद से मैं उसके एग्जाम खत्म होने का इन्तजार कर रहा हूँ कि वो एग्जाम देकर फ्री हो जाए और मैं उसे यहाँ फिर से लेकर आऊं और उसको चोद सकूँ।

दोस्तो आपको मेरे ख़ास दोस्त की बहन की चूत और गांड चुदाई की ये कहानी कैसी लगी आप बताना मत भूलियेगा.

चाची के साथ चुदाई की तमन्ना
07-05-2020 by परिमल पटेल
मेरी चाची सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैंने अपनी मस्त चाची के साथ सेक्स किया. मैं चाची को चाहता था. एक दिन मैंने चाची की तारीफ़ की तो चाची की चुदाई का मौक़ा मिला.

नमस्ते दोस्तो, कैसे हो आप?
मेरा नाम परीमल है. मेरी उम्र 22 साल है. मेरी हाइट 6 फीट है. मेरे लंड का साइज 7.2 इंच है जो कि देखने में कुछ ज्यादा ही लम्बा लगता है. मेरे लंड की मोटाई 2.5 इंच के आसपास है.

मैं गुजरात के भरूच का रहने वाला हूं. हमारे घर में मैं और मेरे माता पिता को मिला कर हम तीन ही लोग रहते हैं. मेरी एक बहन भी है लेकिन वो बड़ी है और उसकी शादी हो चुकी है. मैं एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता हूं.

मैंने अन्तर्वासना पर कई सारी कहानियां पढ़ी हैं. जब से मुझे अन्तर्वासना के बारे में पता चला था तब से ही मेरा अच्छा टाइम पास होने लगा था. मैं अक्सर अन्तर्वासना पर सेक्स स्टोरी का मजा लिया करता था. शुरू में तो मैं हिन्दी सेक्स कहानी को पढ़ते हुए ही अपना लंड हिला लेता था.

उसके बाद एक दिन मेरे साथ कुछ ऐसी घटना हुई कि मैंने सोचा कि मैं भी इसको चाची सेक्स स्टोरी के माध्यम से आप लोगों तक पहुंचाऊं. अपनी यह एडल्ट कहानी मैं पहली बार लिखने जा रहा हूं. अगर कहानी लिखने में मुझसे कोई गलती हो जाये या फिर कोई कमी रह जाये तो मुझे आप माफ करना.

यह चाची सेक्स स्टोरी जो मैं आज आप लोगों को बता रहा हूं ये आज से करीबन 6 महीने पहले की घटना है. अपनी चाची को तो मैं काफी समय पहले से ही पसंद करता था लेकिन जैसे जैसे मेरी जवानी और जवान हो रही थी वैसे वैसे ही चाची की ओर मेरा आकर्षण भी बढ़ता जा रहा था.

चाची को मैं पसंद तो बहुत करता था लेकिन उनसे कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती थी. मुझे उनसे काफी डर लगता था और कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर पाता था जब वो मेरे सामने होती थी.

मेरी चाची का घर मेरे घर के बिल्कुल पास में ही है. मेरी चाची का नाम ऋत्विका (बदला हुआ) है. मैं उनको प्यार से ऋतु चाची बुलाता था. उनकी उम्र 38 साल के करीब थी. मेरे चाचा का लकड़े का व्यापार था.

चाचा जी सुबह ही अपने काम पर निकल जाते थे और शाम को ही वापस आया करते थे. चाचा चाची के पास एक बेटा भी है. वो अहमदाबाद में इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करता है और वहीं पर हॉस्टल में रहता है. मेरी चाची घर में इसलिए बिल्कुल ही अकेली रहती थी.

अपनी चाची के बारे में मैं आप लोगों को क्या बताऊं, वो देखने में बिल्कुल अनुष्का शर्मा के जैसी लगती है. बस उनकी उम्र थोड़ी आगे निकल गयी है. मगर चाची ने अभी तक अपने आपको इतना मेंटेन करके रखा हुआ था कि उनको देख कर कोई उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकता था.

बूब्स के मामले में चाची अनुष्का शर्मा से बहुत आगे है. अनुष्का शर्मा की नंगी चूची तो मैंने नहीं देखी हैं. अनुष्का शर्मा के बूब्स का साइज मुझे इतना खास नहीं लगता है लेकिन मेरी चाची के बूब्स का साइज एकदम लंड फड़काने वाला है. उसकी चूचियां एकदम से गोल हैं.

मेरी चाची की गांड की शेप भी बहुत मस्त है. वो न तो ज्यादा छोटी थी और न ही उनके शरीर के हिसाब से ज्यादा बड़ी थी. कुल मिला कर मेरी चाची एक परफेक्ट माल लगती थी.

एक दिन की बात है कि मेरे मां पापा एक शादी के फंक्शन में शामिल होने के लिए सुबह सुबह ही घर से निकल गये थे. मैं अपनी जॉब के लिये निकल गया था. मगर मैं उस दिन सुबह जाते हुए थोड़ा सा लेट हो गया था.

मेरी कंपनी की बस जिसमें मैं रोज जाता था वो आज निकल गयी थी. अगर मैं प्राइवेट साधन से जाता हूं तो लेट हो ही जाता हूं और फिर हाफ डे लग जाता है. इसलिए मैंने छुट्टी करने का मन बना लिया.

घर आकर मैंने चाची को बोल दिया कि मैं भी घर में ही हूं और दोपहर का खाना आप मेरे लिये भी बना देना. फिर वापस आकर मैं अपने लैपटॉप पर गेम खेलने लगा. कुछ देर में बोरियत होने लगी और मैं अन्तर्वासना खोल कर बैठ गया. मैंने सोचा कि सेक्स स्टोरी पढ़ कर मजा लिया जाये.

कहानी पढ़ते हुए ही मेरा लंड फटने को हो गया. मेरे मन में चाची को चोदने के ख्याल आने लगे. सोच रहा था कि क्यों न आज चाचा के साथ ट्राई किया जाये.

उसी वक्त मेरे घर के दरवाजे की बेल बजी. मैं एकदम से उठ कर अपने शार्ट्स के नीचे खड़े लंड को दबा कर दरवाजा खोलने के लिए गया. देखा तो दरवाजे पर चाची ही थी.
वो बोली- परीमल, मेरे साथ जरा मार्केट चल. मुझे सब्जी लेने के लिए जाना है.

मैं खुशी खुशी तैयार हो गया और हम लोग बाइक पर निकल गये. हम दोनों चुपचाप बैठे हुए थे.
चाची बोली- कुछ तो बात किया करो मेरे साथ, तुम मेरे सामने कुछ भी नहीं बोलते हो. तुम सभी लड़कियों के साथ ऐसे ही शरमाते हो या मेरे साथ ही ऐसा करते हो?

चाची के पूछने पर मैं बोला- चाची, मुझे आपके सामने शर्म आती है.
वो बोली- इसमें शरमाने की क्या बात है. मैं तो तुम्हारी चाची हूं. ये बताओ कि तुमने अभी तक कोई गर्लफ्रेंड वगैरह भी बनाई है या अभी तक

ऐसे ही अकेले अकेले घूमते रहते हो?

वैसे मेरे पास ये कहने की हिम्मत नहीं थी लेकिन पता नहीं अचानक से मेरे मन में क्या विचार आया कि मैं बोला- चाची आपके जैसी माल आज तक कोई मिली ही नहीं है. इसलिए मैं अभी तक सिंगल हूं.

वो ये बात सुन कर हंसने लगी और बोली- अच्छा, मुझमें ऐसा क्या दिखता है तुझे?
मैं बोला- आप बहुत ही क्यूट और प्यारी होने के साथ साथ सेक्सी भी बहुत लगती हो. आपने अपनी बॉडी को बहुत अच्छे से मेंटेन किया हुआ है. मुझे तो आपके अंदर दूसरी अनुष्का शर्मा दिखाई देती है. आपको देख कर कोई भी आपके बारे में अन्दाजा नहीं लगा सकता है कि आप एक बेटे की मां भी हो.

अपनी तारीफ सुन कर चाची काफी खुश हो गयी और झूठा नाटक करते हुए मेरी पीठ पर हाथ से मारते हुए बोली- अच्छा, बहुत शैतान हो गया है तू, मैं चाची हूं तेरी. तुम मेरे बारे में ऐसा सोचते हो क्या?

मैं बोला- चाची, आप तो मेरे सपने में भी आती हो और सपने में आकर मेरे साथ बहुत कुछ कर जाती हो.
वो पूछने लगी- अच्छा, मुझे भी बता जरा कि मैं तेरे सपने में आकर क्या करती हूं? मैं भी तो सुनूं अपने बारे में.
बात को टालते हुए मैं बोला- छोड़ो न चाची, बाद में कभी बताऊंगा.

फिर हम लोग मार्केट में पहुंच गये. हम सब्जी लेने लगे. चाची बैंगन और लौकी को हाथ में लेकर पूरा छूकर देख रही थी. ऐसा देख कर ही मेरा लंड खड़ा होने लगा और मन करने लगा कि चाची के हाथ में इस बैंगन की जगह अपना बैंगन ही दे दूं.

फिर हम लोग सब्जी लेकर घर आ गये. घर लौटने के बाद मैंने चाची को उनके घर के बाहर छोड़ा और फिर अपने घर की ओर आने लगा.
चाची बोली- अरे कहां चले? अभी खाना तैयार हो जायेगा थोड़ी देर में. तुम खाना खाकर ही चले जाना. तब तक चलो मेरे साथ मेरे घर में चाय पी लेना.

ऐसे बनी मेरी चाची सेक्स स्टोरी
हम लोग चाची के घर में गये. चाची हम दोनों के लिए चाय बना कर ले आई. हम दोनों साथ में बैठ कर चाय पीने लगे. मैं और चाची इधर उधर की बातें करने लगे.

इतने में ही चाची बोली- अच्छा एक बात बताओ, मैं तुम्हें सच में इतनी अच्छी लगती हूं क्या?
मैंने कहा- मां कसम चाची, आप इतनी सेक्सी और क्यूट लगती हो मुझे कि मेरा तो मन करता है कि बस … आपके साथ …
वो बोली- क्या, मेरे साथ क्या?

फिर बात को घुमाते हुए मैंने कहा- कुछ नहीं. मैं आपको शुरू से ही बहुत पसंद करता हूं.
चाची बोली- तुम्हारे पसंद करने का क्या फायदा, तुम्हारे चाचा तो कभी मेरे बारे में ऐसी बातें नहीं करते हैं. मुझे तो लगता है कि जैसे उनको अपनी बीवी की कोई परवाह ही नहीं है. वो दिन रात बस काम, काम और काम में ही बिजी होते हैं. मुझ पर तो कभी ध्यान ही नहीं देते, जैसे तुम देते हो.

चाची को समझाते हुए मैंने कहा- मैं आपकी परेशानी समझ सकता हूं चाची.
वो बोली- तुम नहीं समझोगे. तुम्हारे चाचा ने कितने दिनों से मेरे बदन को हाथ तक नहीं लगाया है.

मौका देख कर मैंने कहा- चाची अगर आप बुरा न मानें तो मैं आपसे एक बात पूछूं?
वो बोली- हां पूछो, क्या बात है.
मैंने कहा- आपकी सेक्स लाइफ कैसी है चाची?

चाची बोली- क्या खाक सेक्स लाइफ है मेरी परीमल, तुम्हारे चाचा तो इस मामले में बहुत ही पीछे हैं. वो मुझे कभी वो खुशी नहीं दे पाते हैं जिसकी मेरी इच्छा शुरू से रही है. वो बस पांच मिनट के अंदर ही अपना काम निपटा कर सो जाते हैं. मैं पूरी रात भर करवटें बदलती रहती हूं.

इतना कहते हुए चाची की आंखों से आंसू निकल आये. मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और उनको गले से लगा लिया. मैंने अपने शरीर को चाची के शरीर से बिल्कुल सटा दिया और मेरे अंदर हवस जागने लगी.

चाची के बड़े बड़े चूचे मेरी छाती से चिपक से गये. मुझे बहुत मजा आया. मैंने उसी वक्त मौका देख कर चाची के होंठों पर एक हल्का सा प्यार भरा किस कर दिया. फिर मैं पीछे हो गया. सोच रहा था कि शायद चाची बुरा न मान गयी हो. डर लग रहा था कि कहीं मेरी इस हरकत पर चाची गुस्सा हो जाये और मुझे थप्पड़ मारने लगे.

मगर अगले ही पल चाची ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठों को रख कर मुझे पागलों की तरह किस करने लगी. मैं भी चाची का पूरा साथ देने लगा.

हम दोनों ने पांच मिनट तक लिपलॉक किस का मजा लिया. उसके बाद चाची पीछे हटी और मुस्करा कर कहने लगी- तुम तो बहुत शरमाते थे मुझसे. मगर किस तो बहुत मजे से कर रहे थे. अब शर्म कहां गयी?

बदले में मैंने चाची की गर्दन, उनके कान और होंठों पर किस करना शुरू कर दिया. साथ ही अब मेरी हिम्मत भी बढ़ गयी थी और मेरे हाथ चाची के बूब्स पर चले गये थे. मैं चाची के बूब्स को मसलते हुए किस करने लगा था.

चाची बोली- तुम तो बहुत बड़े खिलाड़ी हो गये हो.
मैं बोला- अभी तो ये शुरूआत है जान, आगे आगे देखो क्या होता है.
दरअसल मैं अन्तर्वासना पर कहानियां खासकर चाची सेक्स स्टोरी पढ़ते हुए काफी कुछ सीख गया था. मैं जान गया था कि औरत को कैसे गर्म करते हैं और उसके शरीर में कौन कौन से अंग किस

तरह उत्तेजित होते हैं.

अब मैं चाची को अच्छे से किस करते हुए जैसे चूसने लगा था. मैंने उनका टॉप निकाल दिया. ब्रा में कैद चाची की चूचियां बहुत ही मस्त लग रही थीं. उनको पीने के खयाल से ही मेरे मुंह में पानी आ रहा था. फिर मैंने चाची की लोअर को भी निकाल दिया.

चाची अब मेरे सामने ब्रा और पैंटी में थी. वो इसमें कयामत लग रही थी. मुझे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि वर्षो के बाद मेरा सपना अब सच्च होने वाला है।
मैं जोश में आकर चाची के पूरे जिस्म पर किस करने लगा और हाथों से उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके मम्में दबाने लगा। वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और फिर मैंने ब्रा को निकाल दिया और दोनों पंछियों को आजाद कर दिया।

उनकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। फिर मैंने पैंटी को भी निकाल दिया। अब वह मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थी। उनकी चूत छोटी सी बंद होंठों वाली गुलाबी रंग की थी और पूरी तरह से क्लीन शेव कर रखी थी। मेरा लंड मेरी चाची की प्यारी सी चूत को देखकर फड़फड़ाने लगा।

मैंने भी मेरे सारे कपड़े उतार कर उनकी चूत पर जल्दी से मुंह लगा दिया और उसे चूसने लगा. चूत को चूसते हुए मैं उनकी चूत के दाने को काटने लगा।

वह तो पागल हो रही थी और अजीब तरह की आवाजें निकाल रही थी- आह्ह … खा जाओ इस चूत को … ओह्ह … तुम तो बहुत मजा दे रहे हो परीमल, इतने होशियार कब से हो गये तुम, आह्ह चूसो मेरी चूत को मेरे प्यारे. चाट लो इसको पूरी जीभ अंदर तक डाल कर. आह्ह् शश्… ओहई मां, चूसो और चूसो.

वह मेरे बालों में हाथ फेरने लगी। मैंने भी उनकी चूत को बहुत चूसा और उनकी गांड में उंगली करने लगा. वह मेरे सिर को अपनी चूत के ऊपर दबाने लगी और मचलने लगी।।

मैं चूत को कभी काटता तो कभी पूरी मुंह में भर लेता. मेरा लंड भी पूरी तरह से तनकर तैयार हो गया था. वह मेरे 7 इंची लंड को देख कर बोली कि आज तो मजा आ जाएगा।

चाची ने ललचायी हुई नजर से मेरे लंड को देखा और उसको मुंह में भर लिया. चाची मेरे लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। हम दोनों 69 पोजिशन में आ गए। वह मेरे ऊपर थी और मैं उनके नीचे. वह मेरे लंड को चूसती रही और मैं उनकी चूत में अपनी जीभ फिरा रहा था।

थोड़ी देर के बाद यानि कि करीब 20 मिनट के बाद उनका शरीर अकड़ने लगा और फिर चाची की चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया। मैं चाची की चूत से निकल रहा वह सारा पानी पी गया. चूत के रस का कुछ अजीब सा खट्टा सा स्वाद था. मगर पीने में मजा आ रहा था.

उसके बाद मेरे लंड ने भी चाची के मुंह में माल निकाल दिया जिसको चाची ने पूरा पी लिया.

हम दोनों 10 मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे. फिर वह मेरे ऊपर से उठी और एक बार फिर से मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया.

चाची मेरे लंड को जोर जोर से चूसने लगी और उसने पांच मिनट के अंदर ही मेरे लंड को चूस चूस कर पूरा खड़ा कर दिया. फिर मैंने चाची को बेड पर लिटाया और देर न करते हुए चाची की चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

लंड की रगड़ चूत पर लगी तो चाची तड़प उठी.
वो बोली- डाल दे अब अंदर, अब किसका इंतजार कर रहा है तू! मैं इतने दिनों से लंड की भूखी हूं. अब और न तड़पाओ और मेरी चूत को शांत करो.

मैंने लंड का सुपारा चूत में फंसा कर अपना आधा लंड चाची की चूत में उतारा. चाची चिल्ला उठी- अरे बहुत मोटा है रे तेरा. प्लीज बाहर निकाल एक बार!
मैं झड़कते हुए बोला- चुप साली रंडी, कितने दिनों से भूखी थी न तू? अब ले मजा मेरे लंड से चुदने का.

इतना बोल कर मैंने एक धक्का फिर से चाची की चूत में लगा दिया. मेरा पूरा लंड चाची की चूत में अंदर घुस गया. ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा लंड किसी गर्म भट्टी में समा गया हो. चाची की चूत में दर्द हो रहा था और मैंने उसको कम करने के लिए चाची के बदन को सहलाना शुरू किया. उसकी चूचियों को मसलते हुए उसको किस करने लगा. तब जाकर चाची थोडी शांत हुई.

अब मैंने थोड़ा विराम देकर चाची की चूत तो चोदना शुरू किया. मैं लंड को अंदर बाहर करते हुए धक्के देने लगा और कुछ ही देर में चाची को मेरे मूसल लंड से चुदने में पूरा मजा आने लगा.
अब तो चाची के मुंह से कामुक मजे की सिसकारियां निकल रही थीं-ऊम्म्म … हम्म्म्म … हाह … हाहाह … आह्ह चोदो.

चाची के मुंह से ऐसी आवाजें सुन कर मुझे भी और ज्यादा जोश आ रहा था. मैं अब चाची की चूत में लंड को फुल स्पीड में आगे पीछे करने लगा. चाची की दोनों टांगें मेरे कंधे पर थीं. पूरे रूम में फच-फच की आवाज गूंजने लगी थी.

कुछ देर चोदने के बाद फिर मैं नीचे आ गया. चाची मेरे लंड पर मेंढक की तरह बैठ गयी और फिर कूदने लगी. मैं भी नीचे से धक्का देने लगा और उनको चोदने लगा. पीछे से मैं उनकी गांड पर चपेट भी मार रहा था.

चाची फुल स्पीड में ऊपर नीचे होते हुए लंड पर कूद कूद कर चुदवा रही थी. उनके बूब्स भी साथ में उछल रहे थे. चाची के खुले हुए बाल हवा में उड़ रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे सेक्स का तूफान सा भरा हुआ है हम दोनो

ं के अंदर.

अपनी लाइफ में मुझे इतना मजा कभी नहीं आया था. ऐसे ही 20-25 मिनट तक हम लोग धक्का-पेल वाली चुदाई करते रहे. उस दौरान चाची दो बार झड़ चुकी थी. मेरा लंड भी अब कसने लगा था.
मैंने पूछा- कहां निकालूं चाची?

चाची बोली- मेरे अंदर ही निकाल दो. मेरा ऑपरेशन हो चुका है और बच्चा होने का कोई डर नहीं है.
मैं जोश में चाची की चूत में पूरी ताकत से धक्के लगाने लगा. फिर मैंने अपना गर्म गर्म लावा चाची की चूत में फेंक दिया. उसके बाद मैं ढेर हो गया. चाची मेरे ऊपर ही लेट गयी.

हम दोनों की सांसें बहुत तेजी से चल रही थीं. हम दोनों ऐसे ही 15 मिनट तक पड़े रहे. फिर चाची ने उठकर अपनी चूत से मेरा मुरझाया हुआ लंड निकाला और मुझे होंठों पर एक लंबी किस दी और फिर बोली- सेक्स में मुझे इतना ज्यादा मजा आज तक नहीं आया. लव यू मेरी जान।

फिर हम दोनों बाथरूम में जाकर एक दूसरे के सामने पेशाब करने लगे. वह मेरे लंड को देख कर हंसने लगी और बोली- देखो, कैसा सिकुड़ सा गया है, बहुत बड़ा कमीना है तेरा लंड।
मैंने कहा- जैसा भी है अब तो आपका ही है.

उसके बाद हम दोनों एक दूसरे नहलाने लगे. मैं फिर से चाची के बूब्स को सहलाने और दबाने लगा. कुछ देर मैंने चाची के बूब्स को चूसा और फिर हम बाहर आ गये.

उसके बाद हम तैयार होकर होटल से खाना लेने गये. चाची अब खुद ही मेरी पीठ से चिपक कर बैठी थी और उसके बूब्स मेरी पीठ पर चिपके हुए थे. हम खाना लेकर आये और साथ में ही हमने खाना खाया.

खाना खाने के बाद मैंने सोचा कि कुछ देर यहीं पर आराम कर लेता हूं. मैं वहीं लेट गया. चाची मेरे बगल में ही लेटी थी. चाची ने फिर से मेरे लंड पर हाथ फिराना शुरू कर दिया. मैं भी चाची के बूब्स को तो कभी चूत को सहलाने लगा. हम दोनों एक बार फिर से गर्म हो गये.

इस बार मैंने चाची को डॉगी स्टाइल में चोदा.

उसके बाद मैंने चाची की गांड में काफी सारा तेल लगा कर अपने लंड पर तेल लगा दिया. मैंने चाची की गांड में लंड को घुसाया और उनकी गांड चोदने लगा. चाची की गांड की गोलाइयां भी बिल्कुल चिकनी होकर चमक रही थी.

चिकना होने की वजह से लंड सरलता से अंदर बाहर हो रहा था. चाची की गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी. तेल की वजह से पूरे रूम में थप-थप की आवाज हो रही थी जिसको सुन कर मुझे अजीब सा नशा हो रहा था और मैं जोश में चाची की गांड को पेलने लगता.

चाची की गांड चुदाई करने में मुझे बहुत मजा आया. आधे घंटे तक चाची की गांड को ठोकने के बाद मैं उसकी गांड में ही झड़ गया. हम दोनों फिर ऐसे ही नग्न अवस्था में एक दूसरे से लिपट कर सो गये.

करीब 6 बजे के लगभग चाची ने मुझे जगाया. मैंने देखा कि चाची पहले से ही तैयार होकर बैठी थी. फिर मैं भी नहा-धोकर फ्रेश हुआ और तैयार होकर सोफे पर आकर बैठ गया. चाची थोड़ी देर के बाद चाय बना कर ले आई.

चाची मुझसे खुश होते हुए बोली- तू आज से मुझे मेरे नाम से ही बुलायेगा.
मैंने चाची की बात की हामी भर दी.

इतने में ही चाचा भी काम से वापस घर लौट आये. मुझे वहां देख कर चाचा खुश हो गये और बोले- हमारे घर भी आते रहा करो, कभी चाय पीकर जाया करो.
चाची बोली- हां, मैं भी इसे यही समझा रही थी कि ये भी तो इसी का घर है.
चाची के चेहरे पर एक स्माइल थी.

दोस्तो, उस दिन के बाद मैंने चाची को घर से बाहर होटल में भी दो बार चोदा. मैं घर से जॉब का बहाना बना कर निकल जाता था और चाची अपने पीरियड का बहाना बना कर निकल आती थी और हम दोनों बाहर मिलते और फिर चुदाई का मजा लेते.

एक बार तो मैंने चाची और उसकी सहेली दोनों की चुदाई साथ में भी की. वह कहानी मैं आप लोगों को फिर कभी बताऊंगा.

पडोस की सेक्सी भाभी👇👇👇👇

मेरा नाम रवि है।में गुजरात के राजकोट शहर में रहता हूं।में 18 साल का हु।मेरे लंड का साइज 6 इंच है।मुझे भाभी ओर कुवारी लड़की को चोदना बहुत पसंद है। मुझे लड़की यो की गांड मारना ओर चूत चाटना बहुत पसंद है।मैं आप सब से मेरी पहली चुदाई की कहानी बताना चाहता हु। कैसे मैंने मेरे पड़ोस में रहने आयी भाभी को कि चोदा।

कहानी सुरु करने से पहले में आपको भाभी के बारे में बताना चाहता हु
भाभी का नाम अंजलि है।भाभी की उम्र 28 साल की है।और उसका फिगर साइज 34-28-36 है।और उसकी उभरी हुई बड़ी गांड बहोत मस्त है।

वो जब चलती है तो अच्छे अच्छे के लंड खड़े हो जाते है

यह कहानी एक साल पहले की है।जब भाभी मेरे पड़ोस में रहने आयी थी।वो थोड़े दिनों सब लोगो से अच्छे से घुलमिल गयी।अंजली भाभी ओर मेरी मम्मी थोड़े दिनों में अच्छी दोस्त बन गयी।

इसीलिए भाभी अकसर मेरे घर आया करती है।ओर जैसे ही में उसे देखता तो मेरा लंड सलामी देने लगता है।

भाभी का पति का ट्रांसपोर्ट का बिसनेस है।इसीलिए वो ज्यादा बाहर रहते है हफ्ते में सिर्फ 2-3 बार घर आते है।इसीलिए भाभी घरमे ज्यादातर अकेली होती है ओर मैंने जब से उसे देखा तब से में उसे चोदना चाहता था।

में आप सबका का ज्यादा समय न लएते हुए कहानी सुरु करता हु।

एक दिन मेरे घर मे में अकेला था।तब में आंख बंद करके मुठ मार रहा था तब अचानक भाभी आ गयी और मुझे देखलिया पर मेरी आँख बंद थी ऐसीलिये मुझे कुछ पता ना चला।वो मुझे ऐसे देखकर चली गयी।ओर मुझे कुछ पता नही चला कि भाभी ने मुझे मुठ मरते देख लिया।

फिर दूसरे दिन में कुछ काम से भाभी के घर गया तो उसका देखने का नज़ररिया बदल गया ओर मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था कि अचानक भाभी को क्या हुआ।और फिर में अपने घर आ गया।

में तब में बाहरवी कक्षा में था। ओर मैथ्स मेरा कमजोर था। तब मेंने मा को ये बताया तब मा ने भाभी को रिक्वेस्ट की के मुझे मैथ्स पठाये क्योंकि भाभी ने बहोत पठाय की है। तब उसी दिन साम को 5 बजे मुझे पठाने आयी।

मैं ओर भाभी मेरे रूम में अकेले थे और भाभी मुझे पठा रही थी।पर मेरा ध्यान पढ़ने के अलावा भाभी के बड़े बूब्स पे मेरा ध्यान था।और भाभी को ये पता चल गया और उसने कुछ नही कहा और मुझे मैथ्स सीखाने लगी ओर मुझे एक मैथ्स की प्रॉब्लम सॉल्व करने दे दी।जब मैं प्रॉब्लम सॉल्व कर रहा था तब भाभी ने अचानक कहा कि कल तुम जब घर पर अकेले थे तब तुम जो कर रहे थे वो मैंने देख लिया ।और ये सुनते ही मेरे हाथ से पेन छूट गयी और में कांपने लगा।

तभी भाभी ने कहा के डरो मत में किसीको कुछ नही कहूंगी।तब मुझे थोड़ी राहत मिली।और उसी वक्त भाभी खुल के बात करने लगी।उसने मुझे पूछा के तुम्हारी कोई गर्लफ्रैंड नही है जो तुम ये सब करते हो।मेने कहाँ की कोई मिली ही नही।तब उसने मेरे गाल पर एक किस किया और कहा मैं तो हु तुम्हारी गर्लफ्रैंड तो तुम्हे ओर किसीकी ज़रूरत है।फिर मेने थोड़ी हिम्मत करके उसको भी एक किस कर दिया।

फिर उसने दरवाजा अंदर से बंध किया और मेरे पास आके मुझे जोर से गले लगा दिया और पागलो की तरह मुझे किस करने लगी।
उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि वो सेक्स की बहोत प्यासी है।थोड़ी देर बाद मैंने भी उसका साथ देना सुरु कर दिया।

किस करते हुए मेने उसकी गांड दबाना सुरु कर दिया।पंद्रह मिनट के किस के बाद वो घुटनो के बल बैठ गयी और मेरा पैंट उतारकर लंड मुह में ले और जोर से वो चूस रही।मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था क्योंकि पहली बार किसीने मेरा मुह में लिया ओर लंड पाँच मिनट चूसने के बाद उसने मेरे सभी कपड़े उतार दिए और पूरे बदन को चूमने लगी।

बादमे उसने मुझे कहाकि तुम क्यू ऐसे ही खड़े हो तुम भी कुछ करो।फिर मैंने उसका ब्लाउज उतार दिया।उसने नीचे पिंक कलर की ब्रा पहनी थी ।में उपरसे ही बूब्स जोर से दबाने लगा और वोह आह ऊह ऐसी आवाजे निकालने लगी फिर मैंने एक जटके में ब्रा उतार दी ओर दोनो बूबस को बारी बारी से चूसने लगा ओर चूस चूस के लाल कर दिए।बादमे में उसके पेट को चूमा ओर धीरे से नीचे की ओर गया।

मेने उसके पेटिकोट का नाड़ा खोल दिया और पेटिकोट नीचे गिरा तो मेने देखा की उसने नीचे भी पिंक पैंटी पहनी थी।मेने उसकी चूत को उपरसे चूमा ओर पैंटी निकल दी।उसकी चूत गीली थी और एक मोहक खुसबू आ रही थी वो मुझे अपनि ओर खींच रही थी।
फिर मेने उसका रस पिया तो भाभी कांप उठी मेंने उसकी चूत में जीभ से चोदता रहा और वो कहने लगी ऐसे ही करते रहो।बहोत दिनों के बाद ऐसा मज़ा मिला है।में आज से तुम्हारी हु तुम जो चाहो वो कर सकते हो।ओर थोड़ी जोर से उसने कहा अब तड़पाओ मत जल्दी से अंदर डाल दो।

फिर उसको बेड पर लिटा दिया ओर उसकी दोनो टांगे चौड़ी कर दी।

फिर लंड का सूपाड़ा चूत के मुँह पर रख के एक जोर से धक्का दिया तो सूपाड़ा अंदर चला गया और भाभी की चीख निकल गयी।उसकी चूत टाइट थी क्युकी उसने बहोत टाइम से नही चुदवाया।उसका पति भी उसको नही चोदता था।

फिर मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा और जोर से एक धक्का दिया तो लंड चूत चिर कर अंदर चला गया तो भाभी के आंख में आंसू गए।फिर थोड़ी देर रुकने के बाद जब दर्द कम हुआ तब धीरे धीरे धक्के देने चालू करे बादमे स्पीड बढ़ा दी अब वो भी मजा ले रही थी।
बिस मिनीट में वो 2 बार जड़ी ओर दोनो बार उसकी चूत का पानी मे पी गया। अब मेरा भी होने वाला था तो मैंने कहा कहा पानी छोड़ु , तो उसने कहा अंदर ही छोड़ दो बाद में में गोली खा लूँगी और 5-6 जोरदार जटके के बाद में जड़ गया और उसकी चूत मेरे पानी से भर गई।

बादमे हम दोनों थक कर वही लेटे रहे।फिर हमने खुदको साफ किया और कपड़े पहने ओर 10 मिनिट बाद भाभी ने मुझे लिप किस दी ओर कहा अब मैं चलती हु अब कल करेंगे।और वो माँ के पास गई और कहा मैंने रवि को अच्छे से मैथ्स पढा दिया है।अब में कल आउंगी।जब तब रवि बारहवीं में है तब तक मै रोज पढ़ाऊंगी।अब मैं चलती हु ऐसा कहकर वो चली गयी…

हम सात महीने तक रोज ऐसे सेक्स करते रहे और बादमे वो दूसरी जगह रहने चली गयी।

वो कभी कभी हमारे घर आती है और हम टैब सब करते है।

अदला बदली की शुरुआत – निशा के जलवे💋💋💋💋💋👇👇👇👇


हेलो दोस्तों… मेरा नाम राकेश है और मैं दिल्ली का रहनेवाला हूँ। मैं एक छोटा हार्डवेयर का बिज़नेस चलता हूँ करोल बाग में। मैं अक्सर हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट ऑर्ग पैर हिंदी सेक्स कहानियां (hindi sex kahaniyan), बीवी की अदला-बदली (biwi ki adla badli)और बीवी की चुदाई (biwi ki chudai) की कहानियां पढ़ने आता हूँ। मैं ५ फुट ६ इंच लम्बा हु और सेहतमंद हूँ। मेरा लंड ६ इंच लम्बा है और २ इंच मोटा।

मेरी बीवी, निशा मुझसे २ साल छोटी है और सावली है। उसकी लम्बाई मेरे जितनी ही है पर वो स्लिम ट्रिम फिगर की है। उसके चूचियाँ मध्यम साइज के हैं। 34B के और कमर पतली और गांड गोली और उभरी है। हम दोनों काफी मॉडर्न ख्याल के हैं और निशा अक्सर वेस्टर्न कपडे पहनती है।👇👇👇

अब कहानी को आगे बढ़ाते है….

एक बार मेरा दोस्त, इमरान, जो एक ट्रेवल एजेंट है, मुझसे बोला के एक फॅमिली टूर सेट करते है। मैंने भी हाँ कर दी.. बहुत दिन हो गए थे मुझे और निशा को कहीं गए तोह मैंने सोचा के अच्छा चेंज होगा। तो ये तय हुआ के हम नैनीताल चलेंगे।

ठंडी का मौसम था, फरवरी का, तो मैंने और निशा ने कुछ गर्म कपडे ख़रीदे और तैयारी पूरी की चलने के। २ दिन बाद हम और इमरान और उसकी बीवी आलिया नयी दिल्ली एयरपोर्ट पर मिले। आलिया एकदम गोरी और सेक्सी लेडी थी। उसके चुचे निशा से बड़े थे और बदन निशा जैसा सुडौल था। मुझे वो काफी पसंद थी।

“हेलो राकेश!”, आलिया बोली, हाथ मिलाते हुए, “आप लोग टाइम पर आ गए, चेक-इन जस्ट शुरू हुआ है”.

मैं और निशा मुस्कुरा दिए और अपना लगेज चेक-इन किया। फिर हम सब लाइन में लग गए और कुछ ही देर में हवा में उड़ रहे थे। फ्लाइट टाइम पे था तो हम सही समय पर देहरादून उतर गए। वहाँ से हमने एक SUV बुक किया नैनीताल के लिए और चल दिए।👇👇👇

रास्ता हँसते गाते कट गया और हम ८-९ घंटे में नैनीताल पहुँच गए। वहाँ हमने एक रिसोर्ट में चेक-इन किया और अपने – अपने कमरे में फ्रेश होने चले गए। रात के करीब १० बजे इमरान का फोन आया।

“अरे भाई, मेरे कमरे में आ जाओ, थोड़ा गला गिला करते है…”, वो बोला.. इमरान और मैं अक्सर साथ पीते थे.. उसने स्टॉक का इंतज़ाम ट्रिप के लिए पहले से कर रखा था..

“बस ५ मिनट भाई, आ रहा हूँ… “, मैंने पंत की ज़िप ऊपर करते हुए बोला और फ़ोन काट दिया…

“निशा, रेडी होक इमरान वाले रूम में आ जाना, मैं जा रहा हूँ वहां… “, इतना कहते मैं बाहर निकला और इमरान के कमरे के तरफ चल दिया…

४ कमरे छोड़ उसका कमरा था, मैं नॉक करके अंदर दाखिल हो गया। अंदर इमरान तौलिये में बैठा था और आलिया वार्डरॉब में बैठी टीवी देख रही थी…

“आ भाई, बैठ.. “, इमरान ने सोफे के तरफ इशारा किया जहां टेबल पर व्हिस्की की २ बोत्तले और ३-४ बियर के कैन्स थे…

मैं बैठ गया और इमरान पेग बनाने लगा। उसने चखना पहले ही रूम सर्विस से मंगवा लिया था….

मैं पेग उठाया और एक चुस्की ली और बोला … ,” ये काम तूने अच्छा किया इमरान, स्टॉक साथ ले आया.. ”

“वो तो लाना ही था भाई, अपना काम कैसे चलेगा इसके बिना.. “, वो हँसते हुए बोला..

“वो सब तो ठीक है, पर ये बियर के कैन्स क्यों? हम बियर नहीं पीते यार… “, मैंने और एक चुस्की ली और कैन्स के तरफ इशारा करते बोला…

” अरे भाई, वो हमारे लिए है… मेरे और निशा के लिए… माइल्ड है, ज़्यादा नशा नहीं होगा… “, आलिया बोल पड़ी…

मैंने इमरान के तरफ देखा। मुझे नहीं पता था के आलिया भी पीती है…. इमरान हंस पड़ा और मुझे आँख मार दी…

” सही तो है.. ट्रिप में मज़े सब करेंगे, सिर्फ हम ही नहीं… “, वो बोला…

१० मिनट के हमारा दूसरा राउंड चालू हो गया… पता नहीं क्यों मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा सा होने लगा था… इमरान नार्मल लग रहा था.. शायद मुझे अब व्हिस्की हज़म नहीं हो रहा था…

“ले यार”, इमरान ने ग्लास मेरे तरफ कर दी… मैंने उठा लिया और पीना शुरू किया…

तभी निशा भी आ गयी। उसने वेस्टर्न ऑउटफिट पहना था। टी-शर्ट और शार्ट पैन्ट्स.. पिछले हफ्ते ही ख़रीदा था उसने ट्रिप के लिए….👇👇👇

“आओ भाभी, बड़ी देर कर दी… “, इमरान मुस्कुराते हुए बोला…

“हाँ, थोड़ा टाइम लग गया फ्रेश होने में.. “, निशा ने कहा और आलिया के पास जाके बेड पर बैठ गयी… कुछ देर दोनो ने बातें की आपस में…

” हमारा बियर तो दो, इमरान…”, आलिया बोली..

” हमारा? तुम बियर पीती हो आलिया?”, निशा ने आष्चर्य में पुछा…

“पीती नहीं हूँ पर ट्रिप पे ट्राई तो कर ही सकते है न निशा… माइल्ड है, एकदम फ्रूट बियर जैसा… नशा बिलकुल नहीं होगा.. “, वो बोली…

निशा तो वैसे तो कोई ऐतराज़ नहीं था… फ्रूट बियर उसने पहले भी पि थी तो उसे पता था के उससे नशा नहीं होता…

“चलो ठीक है.. माइल्ड है तोह चलेगा… “, निशा बोली और एक कैन ले लिया आलिया के हाथ से…

” वैसे तुम लोग रोबे और तौलिये में क्यों हो? अभी अभी फ्रेश हुए हो क्या?”, निशा हँसते हुए बोली… बीच बीच में उसने २-३ सिप भी ले ली…

“हाँ यार…”, आलिया बोली… ,” दरहसल थोड़ा फ्री होना चाहते थे हम दोनों तोह बिना अंडर गारमेंट्स के ही बैठ गए, तौलिया और रोबे लपेटे हुए… ”

इतना कह कर उसने मेरे तरफ देख मार दी… इमरान हंस पड़ा…

” माहौल गर्म है यार… पि.. और पि.. “, इतने कह के उसने मुझे चौथा पेग दिया…

मुझे तो काफी नशा हो गया था… ग्लास मुँह के जगह ऊपर नीचे लग रहा था… पता नहीं क्यों पर आज कुछ ज़्यादा ही हो गया था मुझे…

उधर निशा ने दूसरी कैन खाली कर दी.. वो भी झूम रही थी…

इमरान नार्मल लग रहा था.. उसने में मेरे इतनी ही पि थी पर नार्मल था…

आलिया भी थोड़ा नशे में लग रही थी.. बियर पक्का माइल्ड नहीं था…



तभी इमरान उठा और उसने बैग में से एक वायरलेस स्पीकर निकला और बीएड पर रख बोलै…, “चलो.. थोड़ा डांस-वांस करते है… ”

उसने एक हॉट आइटम सांग लगा दी.. और पेग हाथ में लिए नाचने लगा… आलिया भी उठी और उसके साथ नाचने लगी…

निशा को भी नाचना था.. वो मेरे पास आयी और मुझे खींचकर साथ नाचने लगी.. हम सब नशे में आइटम सांग पर नाच रहे थे… कभी अपनी अपनी बीवियों के साथ तो कभी दूसरे के बीवियों के साथ… कुछ देर ऐसा ही चलता था…

निशा अब इमरान के साथ थी और आलिया मेरे साथ… हम नाच रहे थे.. तभी सांग चेंज हुआ और बूम-डिगी-डिगी वाला गाना चल पड़ा.. हम सब कूदने लगे… निशा अपने गांड मटका रही थी झुक के और इमरान अपने कमर उसपर रगड़ रहा था…

यहाँ आलिया मुझे गले लगकर नाच रही थी…

कुछ देर ऐसा ही चलता रहा… माहौल वाकई में काफी गरम था… निशा अपने गांड कुछ ज़्यादा ही रगड़वा रही थी… इमरान के तौलिये में उसका खड़ा लंड साफ़ दिख रहा था..

यहाँ आलिया ने मुझे सोफे पर गिरा दिया और मुझपर चढ़ बैठी.. और मूव्स करने लगी…

उधर इमरान और निशा अब बेड पर थे… निशा के आँखों में काफी नशा था… और वो कोई नागिन के जैसे मूव्स कर रही थी… निशा बेड पर लेटी थी और इमरान उसके उपर अपनी टाँगे फैलाये नाच रहा था… निचे से निशा को उसका लंड ज़रूर दिख रहा होगा… वैसे भी इमरान ने तो कुछ पहना नहीं था…

यहाँ… आलिया ने मेरा टी-शर्ट और पंत उतार दिया था… उसने अपने वार्डरॉब को खोल दिया और अपने बड़े-बड़े चुचे मेरे मुँह पर रगड़ रही थी… कुछ देर में मेरा अंडरवियर भी उतार दिया और मेरा लंड हाथ में ले चूसने लगी..

उसकी गोरी गांड पर मैं हाथ फेरने लगा और वो मेरा लंड किसी लॉलीपॉप के जैसे चूसे जा रही थी…

वह बेड पर निशा अब पूरी नंगी थी और इमरान का लंड चूस रही थी… निशा के सावले बदन पर इमरान अपने हाथ फेर रहा था… पता नहीं क्यों मुझे नशे में ये सब अच्छा लग रहा था….

आलिया मेरे आंड को सेहला रही थी और लंड चूसे जा रही थी…

कुछ देर बार इमरान ने निशा को पेलना शुरू कर दिया… इमरान का लंड मुझसे बड़ा और मोटा था.. मैंने काफी बार देखा था उसका लंड टॉयलेट में… निशा कराह रही थी और टेढ़ी-मेढ़ी हो रही ही उत्तेजना से… दर्द से…👇👇👇

इमरान निशा को चोद रहा था पूरे ताकत से… निशा भी उससे लिपट, गांड उठा-उठा के चुदवा रही थी… ऐसा करीब १०-१५ मिनट चला… फिर इमरान ने निशा को पलट दिया और पीछे से उसकी चूत मारने लगा…

निशा को ये पोजीशन बहुत पसंद था… मैं अक्सर ऐसे ही चोदता था उसे… वो मज़े में थी… आहें भर रही थी.. कराह रही थी…. बीच बीच में दर्द के वजह से चिल्ला रही थी…

इमरान ने पीछे से उसे और कुछ देर चोदा और फिर अपना लंड निकाल लिया… उसका मोटा लम्बा मुस्लिम लंड अभी भी तना था… निशा हिली नहीं…

उसने निशा के कान में कुछ कहा और पास से तेल ले आया….


“प्लीज, वहाँ मत करो… दर्द होगा… “, निशा बोली…

इमरान मेरी बीवी की गांड मरने वाला था !!!!!!

“कुछ नहीं होगा निशा डार्लिंग…”, इमरान मुस्कुराते हुए बोलै… ,” ट्रिप इसी के लिए तो प्लान किया था.. एक्सपेरिमेंट करो और मज़े लो ज़िन्दगी के… “.

निशा कुछ बोली नहीं.. वैसे भी घोड़ी बानी रही और अपना सिर तकिये पर रख दिया….

इमरान ने अपने लंड पर तेल लगाया और उसकी अच्छी मालिश की… उसका लंड चमक रहा था रौशनी में… फिर उसने निशा के गांड के छेद पर तेल लगाया… कुछ तेल छेद के अंदर भी डाला, अपने ऊँगली से…

निशा सिहर उठी…. पर वो गांड मरवाने के लिए तैयार थी…

इमरान ने फिर अपना लंड का टोपा उसके गांड के छेद पर रखा और बोलै, ” लो मेरी जान, मेरा लंड तुम्हारी गांड में… “.

इतना कह उसने ज़ोर का एक झटका मारा और लंड अंदर डाला… निशा चिल्ला उठी… उससे सहन नहीं हो रहा था दर्द…. आलिया उसके पास गयी और उसे चूमने लगी… कंसोल करने लगी…

“थोड़ा सहन करो निशा.. कुछ देर में मज़ा आने लगेगा… “, और उसे चूमने लगी…

निशा भी आलिया के किस का जवाब दे रही थी…आलिया निशा के चूचियां भी दबा रही थी…

और यहाँ मैं अपना तना हुआ लंड सेहला रहा था और अपने बीवी को इमरान से गांड मरवाते देख रहा था….

इमरान के फिर एक ज़ोर का झटका मारा… निशा फिर चीखी… इमरान का लंड अब पूरा अंदर था.. निशा के गांड में खून दिख रहा था.. उसकी गांड फट गयी थी… इमरान ने लगातार झटके मारना शुरू किया… निशा की चीख अब आनंद भरी आवाज़ों में बदल गयी थी.. वो मज़े से गांड मरवा रही थी…

आलिया वापस मेरे पास आयी और मेरा लंड चूसने लगी.. कुछ देर में मैं आलिया को चोदने वाला था… आज मुझे उसकी चूत और गांड मारने का मौका मिला था.. मैं उसके चुचे दबा रहा था और वो मेरा लंड और आंड…

इमरान पूरे ताकत से निशा की गांड मारता रहा… अचानक वो अकड़ा…

“निशा, मेरा पानी गिरने वाला है… अपने मुँह में ले… “, इतना बोल उसने अपना लंड निशा के गांड में से निकल लिया….

निशा भी इमरान के लंड और उसके पानी की प्यासी थी.. फ़ौरन पलटी और इमरान का लंड अपने मुँह में ले चूसने लगी….

इमरान कराहने लगा और निशा के सर पकड़ उसका मुँह पेलने लगा… कुछ देर में वो निशा के मुँह में झड़ गया…. उसने काफी सारा पानी निशा में मुँह में छोड़ दिया….

अपना पूरा पानी उसके मुँह में खली कर वो बेड पर लेट गया…

निशा खुश दिख रही थी… वो इमरान का लंड सेहला रही थी… उसके होंठों के बगल से इमरान के लंड का पानी निकल रहा था…

इधर, मैं आलिया को पेलने तैयार हो रहा था…

मैंने आलिया को कैसे चोदा, इसकी कहानी अगले अंक में पढ़ना न भूलें…..

Meri Sex Story
पड़ोस वाली भाभी की चुत चोद कर 💋💋👇👇👇

Meri Desi Kahani तीन महीने पहले की है, मैं थोड़ा बीमार हो गया था और मैं इलाज के लिये अपनी बहन के पास लुधियाना चला गया जो एक डॉक्टर हैं।
मैं अंकुश हूँ, मेरी हाइट 172 सेंटीमीटर है और मेरा शरीर कसरती है, मैं जालंधर से हूँ।
मुझे शादीशुदा भाभियों और आंटियों की चूत लेने में बहुत मजा आता है क्योंकि इसमें कोई डर नहीं रहता, ऐसी भाभियाँ या आंटियां चुदवाने में भी बहुत मजा देती हैं।

वो वहाँ किसी के घर में पेइंग गेस्ट के तौर पर रहती हैं। उसके लैंडलार्ड स्वभावतः बहुत ही अच्छे हैं उनका एक लड़का और बहू भी है। जिनको मैं भाभी कहता हूँ, मुझे भाभी बहुत ही हॉट लगती हैं।

लैंडलार्ड के लड़के का एक्सिडेंट हो गया था और वो कई दिनों से बिस्तर पर ही था। वो इस घटना के कारण ना ही कुछ बोल पाता है और ना ही चल पाता है।
ऐसे में भाभी बहुत उदास थीं और किसी से ज्यादा बात भी नहीं करती थीं।

जब मेरी बहन हॉस्पिटल चली जाती तो मैं कमरे में एकेला ही हो जाता था और भाभी मुझे खाने को कुछ ना कुछ दे जाती थीं।

एक दिन जब वो मुझे जूस देने आईं.. तो उनकी आँखों में मुझे खुद के लिए अलग सी चमक दिखी, वे मुझे ऐसे देख रही थीं.. जैसे कि वो मुझे नंगा देख रही हों।
मैंने भाभी से पूछा- भाभी क्या बात है?
तो उन्होंने कहा- कुछ नहीं बस ऐसे ही!

उस दिन से वो मुझसे खुल कर बात करने लगीं। मैं उनसे उनकी लाइफ के बारे में पूछने लगा। वो कुछ उदास सी हो गईं।
मैंने जोर देकर पूछा- क्या बात है भाभी.. क्या मुझे भी नहीं बताओगी?

पहले तो वो बहुत मना करती रहीं.. फिर बाद में बहुत जोर देने पर बताया कि तुम्हें तो पता ही है कि तुम्हारे भैया का एक्सिडेंट हो गया है और मैं काफी दिनों से तड़प रही हूँ। इधर कोई नहीं है.. जो मेरी परेशानी को हल कर सके।

मैंने पूछा- कैसी परेशानी? आप मुझे बताओ मैं 101% जरूर सॉल्व करूँगा।
भाभी को कसम दे दी मैंने!

भाभी तो मानो अन्दर ही अन्दर बहुत खुश हो गईं.. पर मुझे शो नहीं होने दिया, भाभी ने कहा- तुम्हें तो पता ही है एक लड़की को क्या चाहिए होता है?
वो मुझे घुमा-फिरा कर बताने लगीं।

मैं भी समझ चुका था कि वो क्या चाहती हैं.. पर मैं उनके मुँह से ही सुनना चाहता था।

भाभी कहने लगीं- मुझे सेक्स किए हुए कई दिन हो गए हैं और मैं घर से बाहर भी कभी नहीं गई हूँ। मेरी तड़प बहुत ज्यादा बढ़ गई है.. अब तो दिल करता है कि किसी से भी…!

जब उन्होंने ऐसा कहा तो मैंने भाभी का हाथ पकड़ लिया- भाभी.. मैंने आपसे प्रामिस किया था कि मैं आपकी हेल्प करूँगा। आप मुझे एक मौका दीजिए.. आप ज़िंदगी भर याद रखोगी कि मैंने कैसे आपको खुश किया।

मेरा भाग्य इतना अच्छा था कि अगले दिन मेरी सिस्टर के लैंडलार्ड का प्लान बना कि वो लोग भैया को दिखाने दिल्ली लेकर जा रहे हैं और 3-4 दिन में वापिस आएंगे।

वो सब लोग सुबह ही चले गए, उनके जाने के बाद अब घर में मैं भाभी और मेरी सिस्टर ही रह गए थे और थोड़ी देर बाद मेरी बहन भी हॉस्पिटल को निकल गईं।

अब मैं भाभी के रूम में गया, भाभी मेरा ही वेट कर रही थीं, मैंने भाभी को जोर से अपने सीने से लगा लिया और किस करने लगा।
वो तो मुझसे भी ज्यादा जल्दी में थीं.. और बहुत ही खुश थीं।

मैं भाभी के शरीर पर किस करता रहा और उनके मम्मों को दबाता रहा। कुछ ही पलों में चुदास बढ़ गई और मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया। मैं भाभी को बेड पर ही जोर-जोर से चुम्बन करने लगा।

मैंने फिर धीरे से भाभी का टॉप उतारा और उनकी कैपरी भी उतार दी। अब वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में ही थीं। सच में वो ब्रा और पेंटी में बहुत ही मस्त माल लग रही थीं.. बिल्कुल स्वर्ग की अप्सरा सी लग रही थीं, उनके 34 डी साइज के चूचे ब्रा से बाहर आने को उतावले हो रहे थे और उनकी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी।

उनका कामुक शरीर देख कर मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे और अब मैं भी सिर्फ़ शॉर्ट्स में आ गया था। मैं भाभी के मम्मों को ब्रा के ऊपर से ही किस करने लगा। अगले ही पल मैंने भाभी की ब्रा का हुक खोल दिया।

वॉवव.. क्या बूब्स थे..!

मैं तो भाभी के तने हुए चूचों को देखता ही रह गया। मैंने जरा भी देर किए बिना भाभी के मम्मों की निप्पल को चूसना स्टार्ट कर दिया। सच में भाभी के क्या कड़क निप्पल थे.. और चूचे तो ब्रा से निकलने के बाद इतने बड़े हो गए थे जैसे किसी पॉर्न स्टार के चूचे हों।

मैं कुछ मिनट उनके मम्मों को ही चूसता ही रहा। फिर धीरे से उनके पूरे शरीर पर किस करने लगा। मैं नीचे को आते उनकी नाभि पर किस करता हुआ उनकी पेंटी के पास आ गया।

अगले ही पल मैंने भाभी की पेंटी उतार दी। वाऊ.. क्या स्मेल थी उनकी चूत की.. एकदम मस्त गीली चूत थी।

मैं उनकी चूत पर किस करने लगा और जब मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटने लगा तो वो तो बहुत मदहोश होने लगीम भाभी कहने लगीं- आह्ह.. ऐसा तो मेरे साथ तुम्हारे भईया ने कभी नहीं किया था।👇👇👇👇

मैंने भी भाभी से कहा- मैंने आपको कहा था ना कि मैं आपको ऐसे खुश करूँगा कि आप कभी भी भूलोगी नहीं।

फिर मैंने अपना शॉर्ट्स भी उतार दिया, भाभी मेरे लंड को देख कर एकदम से डर गईं, वे कहने लगीं- ओह्ह.. इतना बड़ा लंड..! तुम्हारे भैया का तो इससे आधा ही है.. लगता है आज तुम मेरी चूत को फाड़ दोगे।
मैंने कहा- भाभी आप फिक्र ना करो.. आज आपको मैं जन्नत की सैर कराऊँगा।

भाभी ने एक पल भी देर ना करते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में डाल लिया और चूसने लगीं।

भाभी के द्वारा लंड चुसाई करने से मेरा लंड और सख्त हो गया। कुछ ही देर में मेरा माल निकलने वाला था। मैंने बिना भाभी को बताए ही उनके मुँह में ही उसको निकाल दिया।
भाभी भी उसको जूस की तरह पी गईं।

फिर हम दोनों आपस में चिपक गए और किस करने लगे। कुछ देर के लिए हम ऐसे ही चिपक कर लेटे रहे और एक-दूसरे की जुबान को चूसते रहे।

अब भाभी ने चुदास से भरते हुए कहा- राजा अब और मत तड़पाओ.. बस मेरी आग बुझा दो।
मैंने अपना लंड भाभी की चूत पर रखा और जोर से धक्का लगा दिया.. पर मेरा लंड चूत में पूरा अन्दर नहीं गया क्योंकि भाभी काफी दिनों से भईया के लंड से चुदी नहीं थीं। मुझे भाभी की चूत ऐसी लग रही थी कि जैसे किसी कुंवारी चूत की सील तोड़ने को मिल गई हो।

मैंने एक बार फिर से चूत में लंड का धक्का दिया, इस बार मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर घुस गया।
भाभी जोर से चिल्ला उठीं – आऊ.. ऊऊहह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओक्ककह.. मर गई.. रे फट गई आह्ह.. चूऊत.. आह्ह..’

मैंने भाभी को बहुत जोर से जकड़ लिया और उनके मम्मों को चूसने लगा। भाभी चुप सी हुईं.. तो मैं अपना लंड चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।

भाभी और जोर से चिल्लाने लगीं, मैंने उनकी आवाज को अनसुना करके अपनी स्पीड बढ़ा दी और भाभी के होंठों को किस करने लगा। होंठों को दबाने से भाभी की आवाज आनी भी कुछ कम हो गई। उस दिन मैं भाभी को कई मिनट तक चोदता रहा, भाभी दो बार झड़ चुकी थीं।

फिर मैंने अपना सारा रस भाभी की चूत में ही छोड़ दिया।

उनको इस चुदाई में बहुत मजा आया। हम दोनों थक कर चूर हो गए थे और लेटे हुए थे। हमारे इस सेक्स प्रोग्राम में हमें टाइम का पता ही नहीं चला।

तभी डोरबेल बजी.. मैंने टाइम देखा तो सिस्टर के आने का टाइम हो गया था। मैं अपने कपड़े लेकर वहाँ से अपने रूम में भागा और भाभी भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहन कर दरवाजा खोलने चली गईं।

मुझे भाभी को और चोदने का मन था पर इस वक्त हमारा सेक्स बीच में ही छूट गया.. पर यह भी ज्यादा देर तक नहीं छूटा। फिर उस रात को हमने पूरी रात चुदाई की.. क्योंकि मेरी सिस्टर भाभी के साथ सोने चली गईं।

मैंने भाभी को कह दिया था कि सिस्टर के दूध में आज नींद की दवा मिला देना। भाभी ने ऐसा ही किया और जब सिस्टर गहरी नींद में सो गईं.. तो भाभी मेरे रूम में आ गईं।

इस बार वो मेरे रूम में बिना कपड़ों के आ गई थीं क्योंकि हमें अब किसी का डर नहीं था। मैं भी अपने कपड़े खोल कर भाभी की चुदाई के लिए रेडी था।

भाभी ने आते ही मुझे किस करना शुरु कर दिया और हम दोनों ने सेक्स का पूरा मजा लिया। उस दिन मैंने भाभी को 3 बार चोदा और उनकी कई दिनों से तड़प रही चूत को शांत कर दिया।

आज भाभी तो इतनी ज्यादा खुश थीं कि वो मुझे छोड़ कर जाना ही नहीं चाहती थीं। ऐसे ही हमारा यह चूत चुदाई का सिलसिला 4 दिनों तक चलता रहा।

इसके बाद भाभी की चूत चोदने का कार्यक्रम आज तक चल रहा है और जब भी मैं लुधियाना जाता हूँ तो भाभी की चूत को शांत जरूर करता हूँ। जब भी भाभी ज्यादा परेशान हो उठती हैं.. तो उनकी एक कॉल पर मैं उनकी चूत बजाने के लिए स्पेशियली लुधियाना आ जाता हूँ।

हम दोनों बहुत खुश हैं और भाभी तो मुझसे भी ज्यादा खुश हैं।

Biwi Aur Sali Ko Ek Sath Choda)
 👇👇👇👇💋

यह घटना उन दिनों की है जब मेरी साली ग्रेजूएशन करने की जिद कर रही थी, मेरा ससुराल गाँव में है और वहाँ कोई कॉलेज नहीं है।
मेरी मैडम बोली- आप यहाँ हमारे पास रख कर करा दीजिये, मेरा भी काम बांट लेगी तो मुझे आराम मिल जायेगा।

तो मैंने कहा- ठीक है, बुला लो, अलग कमरे में रहने का पूरा इन्तजाम कर देना।
मैडम बोली- ठीक है।

वो हमारे साथ रह कर कॉलेज में पढ़ने लगी। साली जी देर रात तक पढ़ती, सुबह आराम से उठती।

यह देख मैडम परेशान होकर बोली- कल से हमारे साथ सोना, साथ जागना, घर का कुछ तो काम कर लिया करो।
“ठीक है दीदी!”

रात खाना खाने के बाद मैडम फ्रेश होकर नाईटसूट में बेडरूम में आ गई तो मेरी साली बोली- मैं भी चेन्ज करके आती हूँ।

उसके जाते ही मैंने मैडम से कहा- फटाफट से एक किस दे दो।
मेरी बीवी बोली- आपकी साली सो जाय तब हमसे चिपक लेना
“ठीक है मेरी जान, जैसी मर्जी आपकी

इतने में साली साहिबा फैंसी मैक्सी पहन परफ्यूम लगा कर बेडरूम में आई। उसकी खूबसूरती देख मेरी सांसें कुछ पल थम गई।
इधर उधर वे दोनों

साली की मैक्सी का गला बड़ा था जिसमें से उसकी आकर्षक चूचियों के उभार मेरे मन को कामुक कर रहे थे।
पतली कमर पर डोरी कसी देख मेरा लण्ड फूलकर चिपचिपा हो रहा था।

खैर गपशप करते सो गए, नीद में करवट ली और कब मैं अपनी साली से चिपक गया, पता नहीं।

खैर रात में जब मेरी नींद जब खुली तो देखा कि सालीजी नागिन की तरह मुझसे चिपकी हुई थी, उसकी चूचियाँ साफ दिख रही थी।👇👇

मैंने उसके होंटों को चूमा तो वो जाग गई, बोली- जीजा जी, दीदी जाग जायेगी, जब वो कल मंदिर जायेगी, तब
यह कहकर सालीजी ने मुझे किस किया- अभी सो जाईये

अगले दिन मैडम रोजाना की तरह मंदिर गई, मेरे इंतजार की घड़ियाँ खत्म हो चली थी।

साली साहिबा चाय-नाश्ता लाई, चाय मेज पर रखते वक्त उसकी चूचियाँ बिजली गिरा रही थी।

मैं उसे अपनी बाहों में लेने के लिए उठा तो बोली- जीजाजी, पहले ब्रेकफास्ट कर लो। मैंने कहा- पहले रोमांस करेंगे, फिर नाश्ता

बोली- अच्छा, दोनों एक साथ ठीक है ना?

यह कहते हुए वग मेरी बाहों में आ गई, मैंने उसकी चूचियों को हाथ से दबा कर देखा, चूचियाँ रबड की गेंद की तरह सख्त थी, मुझ से रुका नहीं जा रहा था, मेरा लण्ड फूलता गया, ऐसा लग रहा था कि फट जाएगा।

मैंने उसे सोफ़े पर लिटाया और उसके ऊपर लेट गया, बोला- जान, अब तड़फाना बन्द करो।
साली बोली- तो क्या करें?
मैंने कहा- कपड़े उतार लो
वो बोली- मुझे शर्म आती है, आप खुद करो!


थोड़ी ही देर में उसने खुद ही अपने कपड़े उतार दिये, मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिया।

मेरी साली बोली- कितना मोटा है, कितना गोरा!

मैने कहा- जान इस लण्ड को चूम करके अपनी चूत में धीरे धीरे डालो।

“ठीक है” बोली- जीजाजी, पहली बार दर्द बहुत होगा, धीरे करना।

उसकी चूत गीली थी, मैंने अपना लण्ड का सुपारा उसकी चूत में डाला और धीरे धीरे हिलाने लगा।

वह मुस्करा कर बोली- थोड़ा अन्दर करो, बहुत खुजली हो रही है।
मैंने समझ लिया कि यह पूरा लन्ड खाने का मन बना चुकी है।
“पहले अपने हाथ मेरे हाथों में दो, फिर मजा लो”
बोली- बस? मेरी जान लो

मैंने उसके हाथ पकड़ लिए और मैंने पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया, चूत का पर्दा फट गया था।

उसे दर्द हुआ पर मैंने उसके दर्द को अनदेखा करके उसकी चूत को चोदना शुरु कर दिया।कुछ ही देर बाद साली साहिबा बोली- बहुत मजा आ रहा है, जल्दी जल्दी करो ना

इस तरह मैं मौका मिलते ही साली की चुदाई करने लगा। दो माह बीत गए, अब तो एक दिन भी अलग रहना हम दोनों को बुरा लगता था।

मैंने साली साहिबा से कहा- तुम्हें अपनी दीदी के सामने मेरे साथ सेक्स करने में तो कोई परेशानी तो नहीं होगी? मैंने मैडम से बात कर ली है, उसे कोई परेशानी नहीं।

वह तपाक से बोली- यदि उन्हें नहीं तो हमें भी नहीं पर आप पहले मुझसे करेंगे।
“ठीक है”

खैर रात हुई, तीनों बिस्तर पर लेट गये, कुछ देर बाद मैंने साली को चोदना शुरु किया।

तभी मैडम ने अपना हाथ से हमें टटोलना शुरु किया। लण्ड चूत के अंदर घुसा हुआ मस्त हो रहा था।

मैडम बोली- मैं टार्च की रोशनी से देखूँगी।
मैंने कहा- ठीक है।

मैडम देखते देखते कामुक हो गई, वो मेरे लण्ड और अपनी बहन की चूत को चाटने लगी।

तभी मेरी साली बोली- इनके अन्दर भी डाल दो ना
मैंने कहा- एक शर्त पर तुम मेरा लण्ड अपने हाथ से अपनी बहन की चूत में डालोगी।
बोली- जानू, आपको जो अच्छा लगेगा वही आपकी जान करेगी।
साली साहिबा बोली- दीदी, आओ ना देखो, कितना प्यारा लण्ड है


मैं अपनी बीवी के ऊपर लेट गया, साली साहिबा मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी दीदी की चूत पर रगड़ने लगी।

मैडम बोली- अन्दर घुसाओ ना

मैंने लण्ड अन्दर घुसाया और मेरी साली अपने हाथों से कभी मेरे टट्टे, कभी मेरे चूतड़ तो कभी मेरी बीवी के चूचों को सहला रही थी।
इस तरह तीन साल बीत गए। अब वो कहती है- जीऊँगी तो दीदी-जीजू के साथ नहीं तो मर जाऊँगी।

मेरी साली साहिबा अब भी जिद करके हमारे साथ रह रही है, हर रात मिलन की रात होती है।

(Sali Ke Sath Sex Kiya Use Sharab Pila Kar)
दोस्तों मैं दिखने मैं ठीक ठाक और गोरा हूँ.. मेरी हाईट 5’10 इंच है और मेरी उम्र 28 साल है. अब आप लोगों का ज्यादा समय ना लेते हुए मैं अपनी स्टोरी पर आता हूँ. यह बात आज से 4 महीने पहले की है जब मुझे कम्पनी के बहुत बड़े प्रोजेक्ट के काम से एक साल के लिए फ़्रांस जाना था. मैं और मेरी वाईफ अपनी पैकिंग में लगे हुए थे और उसी दौरान मेरी साली संजू जो मेरी वाईफ के चाचा की लड़की है.. हमारी मदद के लिए आई हुई थी. संजू एक कॉलेज में है और वो सिर्फ 22 साल की है और उसकी हाईट 5’4” इंच है. उसका फिगर करीब 32-28-34 होगा और वो हम लोगों के शुरू से ही बहुत करीब है और वो मुझसे भी हमेशा से ही बहुत खुलकर बातें करती थी. Sali Ke Sath Sex Kiya Use Sharab Pila Kar.

मैंने अपने ऑफिस से एक सप्ताह की छुट्टी ली हुई थी.. क्योंकि मुझे पैकिंग और बहुत से और भी काम करने थे और फिर मेरी वाईफ सुबह ही अपने ऑफिस के लिए निकल जाती थी. उसके आने तक मैं और संजू अकेले ही रहते थे. वैसे मैं अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहता था और वो टीवी देखने में, या नेट पर हमेशा व्यस्त रहती थी. वो हमेशा मेरे पीछे पड़ी रहती थी कि उसे एक बार हार्ड ड्रिंक टेस्ट करना है. वो अपनी दीदी को इस बात का पता नहीं लगने देना चाहती थी.. क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसकी दीदी उसकी यह बात उसके मम्मी, पापा को ना बता दे.                  “Sali Ke Sath Sex Kiya”

फिर एक दिन मैं उसके लिए एक वोड्का की बोतल और मेरे लिए एक बियर लाया.. जब मेरी वाईफ ऑफिस के लिए गई हुई थी. मैंने संजू को कभी भी गलत नज़र से नहीं देखा और हमेशा उसे बच्चे की तरह समझाया करता था. फिर मैंने उसका पेग ऑरेंज जूस के साथ बनाया और अपनी भी बियर लेकर उसके साथ ही बैठ गया और पीने के साथ ही मैं अपने काम में भी व्यस्त हो गया और वो टीवी देखने लगी.. तभी थोड़ी देर बाद संजू मेरे पास आई और बोली कि उसे एक और पेग पीना है. तो मैं उठा और उसके लिए दूसरा पेग बनाकर लाया और उसके बाद वो मेरे साथ ही बैठी रही.. उसकी आँखो से लग रहा था कि उसे नशा चढ़ रहा है. फिर हम लोग आपस मैं इधर उधर की बातें कर रहे थे. मैंने संजू से उसके बॉयफ्रेंड के बारे मैं पूछा और वो मेरी शादी से पहले के अफेयर्स के बारे में पूछने लगी और बातों ही बातों में पता नहीं कैसे वो मेरे सेक्सुअल रिलेशन्स पर आ गई. फिर संजू ने बोला कि उसने तो बस फिल्म ही देखी है.. उसको और उसके बॉयफ्रेंड को कभी कोई अच्छा मौका नहीं मिला. फिर पता नहीं क्यों मुझे अंदर से रोमांटिक सा महसूस होने लगा.

तो मैं संजू से और विस्तार में पूछने लगा कि वो और उसका बॉयफ्रेंड क्या क्या करते थे? अभी तक मेरे मन में संजू के लिए कोई भी गलत ख्याल नहीं आया था.. लेकिन अंदर ही अंदर अजीब सा महसूस हो रहा था. संजू को बहुत अच्छी ख़ासी चढ़ चुकी थी और वो मुझे सब कुछ ज्यादा ही विस्तार में बता रही थी. तो इतने में उसने मुझसे कहा कि अब मैं अपनी कुछ बातें उसे बताऊँ.. लेकिन अब मेरा मूड बातें करने का नहीं.. कुछ शरारत करने का हो रहा था. तो मैंने संजू से पूछा कि उसे क्या अभी रोमांटिक महसूस हो रहा है? तो उसने हाँ कह दिया और फिर मैंने बोला कि क्यों ना कुछ टाईम के लिए हम दोनों ही मस्ती कर ले? इस बात पर हम दोनों ही हँसने लगे. मैंने हँसते हँसते संजू से उसके फिगर का साईज पूछा और उस बात पर वो शरमा गई. तो मैंने उससे कहा कि नहीं बताएगी तो जीजू अपने हाथों से नाप भी सकते है.. तो वो हंसकर बोली की यह मैं कभी नहीं कर सकता. तो उसके यह बोलते ही मैंने झट से उसके बूब्स पर हाथ रख दिया और उसे हल्का सा दबा दिया और हँसने लगा. फिर संजू बहुत चकित हो गई.. लेकिन उसने मुझे कुछ नहीं बोला और मुस्कुराने लगी.              “Sali Ke Sath Sex Kiya”

तो मुझे लगा की शायद यही अच्छा मौका है और फिर मैंने संजू से कहा कि बाकी का साईज भी तुम खुद ही बता दो नहीं तो वो भी मुझे नापना पड़ेगा. फिर वो इस बात पर स्माईल करने लगी और मैंने अपना हाथ उसके कूल्हों पर रख दिया. संजू ने एक टॉप पहना हुआ था और नीचे स्कर्ट. इतने में संजू ने मुझे ज़ोर से धक्का दे दिया और मस्ती में हँसने लगी. मुझे भी थोड़ा जोश आया और मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया और उसे कसकर हग कर लिया.. लेकिन संजू अभी भी हंस रही थी और यह देख मैंने अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और फिर से उसको कसकर किस कर लिया.. तभी संजू की हँसी एकदम से रुक गई और वो ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगी और हम थोड़ी देर इसी पोज़िशन में रहे और उसके बाद मैंने संजू के होंठो पर धीरे धीरे किस करना शुरू किया और फिर संजू भी बहुत अच्छे से मेरा साथ दे रही थी. फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ उसकी जांघ पर रखा और उसको सहलाने लगा.                 “Sali Ke Sath Sex Kiya”

संजू की जांघे बहुत ही चिकनी, मुलायम और गोरी थी. उसने ढीली सी स्कर्ट पहन रखी थी जिसके कारण मुझे आराम से पूरा मस्ती भरा अहसास मिल रहा था और मैं उसकी जांघो पर ऊपर से नीचे तक अपना हाथ घुमा रहा था और लगातार किस की स्पीड भी बढ़ती जा रही थी. तो इतने में, मैंने अपना दूसरा हाथ संजू के टॉप में डाल दिया और उसकी पीठ को सहलाने लगा तभी मैं बहुत चकित हुआ क्योंकि उसने ब्रा नहीं पहनी थी. यह बात जानकर मुझे और जोश आ गया और अब मेरा लंड पूरा कड़क हो चुका था और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था. तो मैंने संजू का हाथ अपने लंड पर रख दिया और उससे लंड को सहलाने को बोला.. लेकिन वो एकदम से शरमा गई और मुझसे और कसकर चिपक गई..


लेकिन उसका हाथ मेरे लंड से नहीं हटा. फिर मैंने उसके टॉप को धीरे से थोड़ा ऊपर किया और उसके बूब्स देखे.. सच बोलूं वो अंदर से बहुत सुंदर और गोरे थे.. एकदम सही गोलाई के बूब्स और साथ में हल्के गुलाबी निप्पल. फिर मैंने अपनी टी-शर्ट भी ऊपर कर दी.. फिर मैं और संजू कसकर चिपक गए और जैसे ही उसके नंगे बूब्स मेरी नंगी छाती पर चिपके वैसे ही मुझे एक बहुत ही अच्छा अहसास हुआ. तभी मैंने संजू के होंठ अपने होंठ में भर लिए और उनको कसकर चूसने लगा. हम बहुत कामुक होते जा रहे थे.. मैंने उसका टॉप उतारकर फेंक दिया और अपनी टी-शर्ट भी उतार दी. अपने होंठ उसके बूब्स पर ले गया और उनको अच्छे से सक करने लगा और एक हाथ संजू की जांघ से कूल्हों के साईड मैं डाल दिया. संजू के कुल्हे बहुत ही मुलायम थे.👇👇👇

मैं अपने दोनों हाथ से उसको अच्छे से मसाज और सहला रहा था. तो संजू मेरे लंड को कसकर पकड़े हुई थी.. वो शायद मस्ती में सब कुछ भूल गई और बस ऊहह आआहहह कर रही थी. मैंने संजू को स्कर्ट उतारने को बोला.. तो उसने मना कर दिया और बोल कि आज के लिए बस इतना बहुत है.. लेकिन मैं कहाँ रुकने वाला था. मैं अपना एक हाथ कूल्हों से सीधा उसकी चूत पर ले गया जो पूरी तहर गरम थी और मैंने अपनी एक ऊँगली उस पर जैसे ही रखी संजू के मुहं से आआहह निकल पड़ी और उसने बोला कि प्लीज अपना हाथ चूत से हटा लो.. क्योंकि उसने कभी अपनी चूत अपने बॉयफ्रेंड को भी नहीं छूने दी. तभी यह सुनकर मेरा जोश और बढ़ा और मैंने संजू की स्कर्ट पीछे से सरकानी शुरू की और फिर उसने एकदम से अपनी स्कर्ट पकड़ ली और नहीं बोलने लगी और मैंने धीरे से एक ऊँगली उसकी चूत में डालनी शुरू की और अपने अंगूठे से चूत के दाने को सहलाने लगा.. संजू अपने हाथ स्कर्ट से हटाकर सीधे मुझसे चिपक गई और बोलने लगी कि जीजू मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ आप वाकई में बहुत कमाल के हो.                          “Sali Ke Sath Sex Kiya”

मैंने कहा कि हाँ ऐसा ही हूँ और मैंने उसकी स्कर्ट को खींचकर फेक दिया और अपनी भी पेंट को उतार दिया. संजू अभी तक मेरा लंड अंडरवियर के अंदर हाथ डालकर पकड़ें हुई थी और जैसे ही उसने मेरे 6.5 इंच के लंड को देखा तो वो थोड़ा सहम गई और बोली कि जीजू यह मेरी चूत के अंदर नहीं जाएगा? और प्लीज आप ट्राई भी मत करना. तो मैंने संजू से बोला कि तुम इसकी टेंशन मत लो अभी बस मजे करो और मैंने संजू को वहीं धक्का दे दिया और उसके पैर फैला दिए.. क्या नज़ारा था उसकी मक्खन जैसी जांघे और उसके बीच की गहराइ मैं गुलाबी चूत एकदम कामुक और साफ दिख रही थी. फिर मैंने अपने दोनों हाथ संजू के बूब्स पर रखे और उसकी जांघो को किस करना शुरू किया और धीरे धीरे उसकी चूत के पास पहुंच गया. फिर मैं उसकी चूत के चारो और किस करने लगा और संजू छटपटाने लगी और फिर मैंने अपने पूरे होंठ उसकी चूत के होंठ पर रख दिए और अपनी जीभ उसकी चूत पर और मैं उसकी चूत चाटने लगा और उसके बाद अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में डालनी शुरू की और साथ ही मैं अपनी जीभ से उसके क्लिटोरिस को चाट रहा था.         “Sali Ke Sath Sex Kiya”

संजू तेज़ तेज़ साँसे ले रही थी और चिल्ला रही थी. उसके बाद मैंने अपनी ऊँगली को बाहर निकाला और उसकी चूत का सारा रस अपने लंड पर लगा दिया. फिर अपने लंड का टोपा उसकी चूत पर रख दिया और एक हल्का सा धक्का दिया और संजू ने मुझे कसकर पकड़ लिया और वो बोली कि जीजू प्लीज थोड़ा आराम से और फिर मैंने भी इस बात का ध्यान रखा और फिर धीरे से दूसरा धक्का दिया. संजू ज़ोर से चिल्ला उठी और मुझे उसकी चूत में खून दिखने लगा.. शायद उसकी सील टूट चुकी थी. फिर मैंने तीसरे जोरदार धक्के मैं अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया.. तो वो बहुत ज़ोर से चिल्ला पड़ी और मुझे लंड को बाहर निकालने के लिए बोलने लगी. वो ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही थी.                   👇👇👇

फिर मैंने संजू को धक्के देना बंद किया और उसके होंठ पर प्यार से किस करने लगा और मैंने उसको बोला कि पहली चुदाई में थोड़ा दर्द होता है. दो मिनट के बाद वो कुछ ठीक हुई और फिर मैंने अपना लंड आगे पीछे करना शुरू किया कुछ देर में संजू को भी मज़ा आने लगा और वो मेरा पूरा साथ देने लगी.. लेकिन थोड़ा थोड़ा उसको दर्द भी हो रहा था. मैंने भी अपना आधा ही लंड अंदर डाला था जिससे उसको ज्यादा दर्द ना हो. फिर हम दोनों 10-15 मिनट सेक्स करते रहे और फिर मैंने झड़ने के टाईम अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया और सारा वीर्य उसकी नाभि पर गिरा दिया. मेरे फ़्रांस आने से पहले संजू 4 दिन और हमारे साथ रही और उन चार दिनों में, मैंने और संजू ने कई बार अलग अलग तरीके से सेक्स किया. आज भी हम नेट पर एक दूसरे से जुड़े हुए है और हम अब कैम में एक दूसरे को देखकर सेक्स करते है.                      

(Chhote Bhai Ki Biwi Ko Choda)
निशा मेरे छोटे भाई रुपम की वाइफ़ है। निशा काफ़ी सुंदर महिला है। उसका बदन ऊपर वाले ने काफ़ी तसल्ली से तराश कर बनाया है। मैं शिवम उसका जेठ हूं। मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं। निशा शुरु से ही मुझे काफ़ी अच्छी लगती थी। मुझसे वो काफ़ी खुली हुई थी। रुपम एक यूके बेस्ड कम्पनी में सर्विस करता था। हां बताना तो भूल ही गया निशा का मायका नागपुर में है और हम जालंधर में रहते हैं।आज से कोई पांच साल पहले की बात है। हुआ यूं कि शादी के एक साल बाद ही निशा प्रेग्नेंट हो गयी, डिलीवरी के लिये वो अपने मायके गयी हुई थी। सात महीने में प्रीमेच्योर डिलीवरी हो गयी। बच्चा शुरु से ही काफ़ी वीक था। दो हफ़्ते बाद ही बच्चे की डेथ हो गयी। रुपम तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया। कुछ दिन वहां रह कर वापस आया। वापस अकेला ही आया था। ये तय हुआ था कि निशा की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आयेगी।
एक महीने के बाद जब निशा को वापस लाने की बात आयी तो रुपम को छुट्टी नहीं मिली। निशा को लेने जाने के लिये रुपम ने मुझे कहा। तो मैं निशा को लेने ट्रेन से निकला। निशा को वैसे मैंने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस यात्रा मे हम दोनों में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में घूमने वाली निशा बेपर्दा हो गयी।

हमारी टिकट प्रथम क्लास में बुक थी। चार सीटर कूपे में दो सीट पर कोई नहीं आया। हम ट्रेन में चढ़ गये। गरमी के दिन थे, जब तक ट्रेन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी थी। मगर दूसरों के आंखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा- अब आप चाहे कुछ भी समझें मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूंगी। मुझे आप अच्छे लगते हो आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूंगी।

मैं उसकी बात पर हँस पड़ा- मैं भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।
मैंने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया। अचानक मेरे मुंह से निकला- अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुश्न छिपा है उसका पता कैसे लगता।
उसने मेरी ओर देखा फ़िर शर्म से लाल हो गयी।

उसने बोतल ग्रीन रंग की एक शिफ़ोन की साड़ी पहन रखी थी, ब्लाउज़ भी मैचिंग पहना था। गर्मी के कारण बात करते हुए साड़ी का आंचल ब्लाउज़ के ऊपर से सरक गया। तब मैंने जाना कि उसने ब्लाउज़ के अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई है। उसके स्तन दूध से भरे हुए थे इसलिये काफ़ी बड़े बड़े हो गये थे। ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिये उसकी आधी छातियां साफ़ दिख रही थी। पतले ब्लाउज़ में से ब्रा नहीं होने के कारण निप्पल और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ़ नजर आ रहा था।

मेरी नजर उसकी छाती से चिपक गयी। उसने बात करते करते मेरी ओर देखा। मेरी नजरों का अपनी नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए बूब को देखता पाकर शरमा गयी और जल्दी से उसे आंचल से ढक लिया। हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे। कुछ देर बाद वो उठकर बाथरूम चली गयी। कुछ देर बाद लौट कर आयी तो उसका चेहरा थोड़ा गम्भीर था। हम वापस बात करने लगे। कुछ देर बाद वो वापस उठी और कुछ देर बाद लौट कर आ गयी। मैंने देखा वो बात करते करते कसमसा रही है। अपने हाथो से अपने ब्रेस्ट को हल्के से दबा रही है।

“कोई प्रोब्लम है क्या?’ मैंने पूछा।
“ना… नहीं!”
मैंने उसे असमंजस में देखा।

कुछ देर बाद वो फिर उठी तो मैंने कहा- मुझे बताओ न क्या प्रोब्लम है?
वो झिझकती हुई सी खड़ी रही, फ़िर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी, कुछ देर बाद वापस आकर वो सामने बैठ गयी।
“मेरी छातियों में दर्द हो रहा है।” उसने चेहरा ऊपर उठाया तो मैंने देखा उसकी आंखें आंसु से छलक रही हैं।
“क्यों क्या हुआ?” मर्द वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं। मेरी भी समझ में नहीं आया अचानक उसे क्या हो गया।

“जी, वो क्या है म्म वो मेरी छातियां भारी हो रही हैं।” वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाये आखिर मैं उसका जेठ था।
“म्मम मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है।” उसने नजरें नीची करते हुए कहा।
“बाथरूम जाना है?” मैंने पूछा.
“गयी थी लेकिन वाश-वेसिन बहुत गंदा है इसलिये मैं वापस चली आयी.” उसने कहा- और बाहर के वाश-वेसिन में मुझे शर्म आती है कोई देख ले तो क्या सोचेगा?
“फ़िर क्या किया जाए?” मैं सोचने लगा.

“कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर सको। लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फ़र्श पर गिरा नहीं सकती और यहां कोई बर्तन भी नहीं है जिसमें दूध निकाल सको!”
उसने झिझकते हुये फ़िर मेरी तरफ़ एक नजर डाल कर अपनी नजरें झुका ली। वो अपने पैर के नखूनों को कुरेदती हुई बोली- अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूं?
“बोलो?”
“आप इन्हें खाली कर दीजिये न!”
“मैं? मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूं।” मैंने उसकी छातियों को निगाह भर कर देखा।
“आप अगर इस दूध को पी लो…” उसने आगे कुछ नहीं कहा।

मैं उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया- लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे छोटे 👇

भाई की बीवी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुंह कैसे लगा सकता हूं?
“जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं इसमें गलत क्या है। क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है?” उसने मुझसे कहा- मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के बारे में सोच रहे हो? प्लीज़!

मैं चुपचाप बैठा रहा, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। अपने छोटे भाई की बीवी के निप्पल मुंह में लेकर दूध पीना एक बड़ी बात थी।

निशा ने अपने ब्लाउज़ के सारे बटन खोल दिये- प्लीज़!
उसने फ़िर कहा लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला।

“जाइये आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आप अपने रूढ़ीवादी विचारों से घिरे बैठे रहिये चाहे मैं दर्द से मर ही जाऊँ।” कह कर उसने वापस अपने स्तनों को आंचल से ढक लिया और अपने हाथ आंचल के अंदर करके ब्लाउज़ के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से उसके मुंह से चीख निकल गयी- आआहह!

मैंने उसके हाथ थाम कर ब्लाउज़ से बाहर निकाल दिये। फ़िर एक झटके में उसके आंचल को सीने से हटा दिया। उसने मेरी तरफ़ देखा।

मैं अपनी सीट से उठ कर केबिन के दरवाजे को लोक किया और उसके बगल में आ गया। उसने अपने ब्लाउज़ को उतार दिया, उसके नग्न ब्रेस्ट जो कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थी मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिये बेताब थे। मैंने अपनी एक उंगली को उसके एक ब्रेस्ट पर ऊपर से फ़ेरते हुए निप्पल के ऊपर लाया। मेरी उंगली की छुअन पा कर उसके निप्पल अंगूर की साइज़ के हो गये।
मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। उसके बड़े बड़े दूध से भरे हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे।

उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपने स्तन को नीचे झुकाया। उसका निप्पल अब मेरे होंठों को छू रहा था। मैंने जीभ निकाल कर उसके निप्पल को छूआ।
“ऊओफ़्फ़फ़्फ़ जेठजी अब मत सताओ… प्लीज़ इनका रस चूस लो!” कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया। मैंने अपने होंठ खोल कर सिर्फ़ उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर चूसा। मीठे दूध की एक तेज़ धार से मेरा मुंह भर गया। मैंने उसकी आंखों में देखा। उसकी आंखों में शर्म की परछाई तैर रही थी। मैंने मुंह में भरे दूध को एक घूंठ में अपने गले के नीचे उतार दिया।
“आआअहह!” उसने अपने सिर को एक झटका दिया।

मैंने फ़िर उसके निप्पल को जोर से चूसा और एक घूंठ दूध पिया। मैं उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा।
“ऊओह्हह हहाआन्न हाआन्नन… जोर से चूसो और जोर से… प्लीज़ मेरे निप्पल को दांतों से दबाओ, काफ़ी खुजली हो रही है।” उसने कहा। वो मेरे बालों में अपनी उंगलियां फ़ेर रही थी।

मैंने दांतों से उसके निप्पल को जोर से दबाया।
वो ‘ऊउईईइ…’ कर उठी, वो अपने ब्रेस्ट को मेरे चेहरे पर दबा रही थी। उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़ कर मेरे शर्ट के अन्दर घुस गये। वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फ़ेरने लगी। फ़िर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा।
“क्या कर रही हो?” मैंने उससे पूछा।
“वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ!” उसने कहा
“क्या कर रहा हूं मैं तुम्हारे साथ?” मैंने उसे छेड़ा.
“दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की बीवी के स्तनों से!”
“काफ़ी मीठा है!”

“धत्त…” कहकर उसने अपने हाथ मेरे शर्ट से निकाल लिये और मेरे चेहरे पर झुक गयी। इससे उसका निप्पल मेरे मुंह से निकल गया। उसने झुक कर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये और मेरे होंठों के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ़ किया। फ़िर वो अपने हाथों से वापस अपने निप्पल को मेरे लिप्स पर रख दी। मैंने मुंह को काफ़ी खोल कर निप्पल के साथ उसके बूब का एक पोर्शन भी मुंह में भर लिया। वापस उसके दूध को चूसने लगा। कुछ देर बाद उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तन को दबा दबा कर जितना हो सकता था दूध निचोड़ कर मेरे मुंह में डाल दिया।

“अब दूसरा!” वो बोली.
मैंने उसके स्तन को मुंह से निकाल दिया फ़िर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे एडजस्ट किया और उस स्तन को पीने लगा। उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फ़िर रहे थे। हम दोनों ही उत्तेजित हो गये थे।

उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे पैंट की ज़िप पर रख दिया। मेरे लिंग पर कुछ देर हाथ यूं ही रखे रही। फ़िर उसे अपने हाथों से दबा कर उसके साइज़ का जायजा लिया।
“काफ़ी तन रहा है!” उसने शर्माते हुए कहा।
“तुम्हारी जैसी हूर पास इस अन्दाज में बैठी हो तो एक बार तो विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाये।”
“म्मम्म अच्छा। और आप? आपके क्या हाल हैं?” उसने मेरे ज़िप की चैन को खोलते हुए पूछा.
“तुम इतने कातिल मूड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है?”

उसने अपना हाथ मेरे ज़िप से अन्दर कर ब्रीफ़ को हटाया और मेरे तने हुए लिंग को निकालते हुए कहा- देखूं तो सही कैसा लगता है दिखने में?
मेरे मोटे लिंग को देख कर खूब खुश हुई- अरे बाप रे कितना बड़ा लिंग है आपका। दीदी कैसे लेती हैं इसे?
“आ जाओ तुम्हें भी दिखा देता हूं कि इसे कैसे लिया जाता है।”
“धत्त मुझे नहीं देखना कुछ… आप बड़े वो हो!” उसने शरमा कर कहा लेकिन उससे हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की।

“इसे एक बार किस तो करो!” मैंने उसके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर झुकाते हुए कहा।
उसने झिझकते हुए मेरे लिंग पर अपने होंठ टिका दिये👇👇👇

अब तक उसका दूसरा स्तन भी खाली हो गया था। उसके झुकने के कारण मेरे मुंह से निप्पल छूट गया। मैंने उसके सिर को हल्के से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोल कर मेरे लिंग को जगह दे दी। मेरा लिंग उसके मुंह में चला गया। उसने दो तीन बार मेरे लिंग को अन्दर बाहर किया फ़िर उसे अपने मुंह से निकाल लिया।
“ऐसे नहीं… ऐसे मजा नहीं आ रहा है!”
“हां अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा देना चाहिये” मैंने अपने कपड़ों की तरफ़ इशारा किया।

मैंने उठकर अपने कपड़े उतार दिये फ़िर उसे बाहों से पकड़ कर उठाया। उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसके बदन से अलग कर दिया। अब हम दोनों बिल्कुल नग्न थे।
तभी किसी ने दरवाजे पर नोक किया।
“कौन हो सकता है?” हम दोनों हड़बड़ी में अपने अपने कपड़े एक थैली में भर लिये और निशा बर्थ पर सो गयी। मैंने उसके नग्न शरीर पर एक चादर डाल दी।

इस बीच दो बार नोक और हुआ।
मैंने दरवाजा खोला बाहर टीटी खड़ा था, उसने अन्दर आकर टिकट चेक किया और कहा- ये दोनों सीट खाली रहेंगी इसलिये आप चाहें तो अन्दर से लोक करके सो सकते हैं.
और बाहर चला गया।

मैंने दरवाजा बंद किया और निशा के बदन से चादर को हटा दिया। निशा शर्म से अपनी जांघों के जोड़ को और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी। मैंने उसके हाथों को पकड़ कर हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा- प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।

मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा। इससे मेरा लिंग उसके मुंह के ऊपर था। उसने अपने मुंह और पैरों को खोला। एक साथ उसके मुंह में मेरा लिंग चला गया और उसकी योनि पर मेरे होंठ सट गये।

“आह शिवम जी क्या कर रहे हो, मेरा बदन जलने लगा है। पंकज ने कभी इस तरह मेरी योनि पर अपनी जीभ नहीं डाली!” उसके पैर छटपटा रहे थे। उसने अपनी टांगों को हवा में उठा दिया और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी योनि पर दबाने लगी।

मैं उसके मुंह में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा। मेरे हाथों ने उसकी योनि की फ़ांकों को अलग अलग कर रखा था और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी। वो पूरी तन्मयता से अपने मुंह में मेरे लिंग को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी।

काफ़ी देर तक इसी तरह 69 पोज़िशन में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद लगभग दोनों एक साथ खल्लास हो गये, उसका मुंह मेरे रस से पूरा भर गया था। उसके मुंह से चू कर मेरा रस एक पतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके बालों में जाकर खो रहा था। मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठ कर बैठ गयी।
हम दोनों एक दम नग्न थे और दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनों एक दूसरे से लिपट गये और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गये मानो अब कभी भी न अलग होने की कसम खा ली हो। कुछ मिनट तक यूं ही एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे फ़िर हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे।

“अब आ जाओ!” मैंने निशा को कहा।
“जेठजी थोड़ा सम्भाल कर… अभी अंदर नाजुक है, आपका बहुत मोटा है, कहीं कोई जख्म न हो जाये।”
“ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है।”

निशा उठकर बर्थ पर चौपाया हो गयी। मैं पीछे से उसकी योनि पर अपना लंड सटा कर हल्का सा धक्का मारा, मेरे भाई की बीवी की चूत गीली तो पहले ही हो रही थी, धक्के से मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर धंस गया।
एक बच्चा होने के बाद भी उसकी योनि काफ़ी टाइट थी। वो दर्द से “आआह्हह” कर उठी। मैं कुछ देर के लिये उसी पोज़ में शांत खड़ा रहा। कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो निशा ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड पूरा अंदर चला जाये।
“डालो न… रुक क्यों गये।”
“मैंने सोचा तुम्हें दर्द हो रहा है इसलिये।”
“इस दर्द का मजा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है दर्द तो करेगा ही।” उसने कहा।

फ़िर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी। मैं पीछे से शुरु शुरु में सम्भल कर धक्का मार रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के से उसके दूध भरे स्तन उछल उछल जाते थे। मैंने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके स्तनो को अपने हाथों से थाम लिया। लेकिन मसला नहीं, नहीं तो सारी बर्थ उसके दूध की धार से भीग जाती। काफ़ी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने अपने सिर को को जोर जोर से झटकना चालू किया।
“आआहह शीईव्वअम्मम आआअहह तउम्म इतनए दिन कहा थीए। ऊऊओह्हह माआईईइ माअर्रर्रर जाऊऊं गीइ। मुझए माअर्रर डालओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लओ” और उसकी योनि में रस की बौछार होने लगी।

कुछ धक्के मारने के बाद मैंने उसे चित लिटा दिया और ऊपर से अब धक्के मारने लगा।
“आअह मेरा गला सूख रहा है।” उसका मुंह खुला हुआ था। और जीभ अंदर बाहर हो रही थी। मैंने हाथ बढ़ा कर मिनरल वाटर की बोतल उठाई और उसे दो घूंठ पानी पिलाया। उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक किस किया।
“चोदो शिवम चोदो… जी भर कर चोदो मुझे।👇👇👇

मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा। काफ़ी देर तक धक्के लगाने के बाद मैंने रस में डूबे अपने लिंग को उसकी योनि से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया।
“आजा मेरे ऊपर!” मैंने निशा को कहा।
निशा उठ कर मेरे बर्थ पर आ गयी और अपने घुटने मेरी कमर के दोनों ओर रख कर अपनी योनि को मेरे लिंग पर सेट करके धीरे धीरे मेरे लिंग पर बैठ गयी। अब वो मेरे लिंग की सवारी कर रही थी। मैंने उसके निप्पल को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। तो वो मेरे ऊपर झुक गयी। मैंने उसके निप्पल को सेट कर के दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुंह में गिरी। अब वो मुझे चोद रही थी और मैं उसका दूध निचोड़ रहा था।

काफ़ी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी- शिवम, मेरे निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो।
हम दोनों साथ साथ झड़ गये।

काफ़ी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लम्बी लम्बी सांसें लेती रही। फ़िर जब कुछ नोर्मल हुई तो उठ कर सामने वाली सीट पर लेट गयी। हम दोनों लगभग पूरे रास्ते नग्न एक दूसरे को प्यार करते रहे। लेकिन उसने दोबारा मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया, उसके बच्चेदानी में हल्का हल्का दर्द हो रहा था।
लेकिन उसने मुझे आश्वासन दिया- आज तो मैं आपको और नहीं दे सकूंगी लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लूंगी अपने अंदर। और हां अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनों भाइयों में से किसका बच्चा आता है।

उस यात्रा के दौरान कई बार मैंने उसके दूध की बोतल पर जरूर हाथ साफ़ किया। The end
Antarvasna 🤤🤤🥵💋💋

कामवाली की कुंवारी बेटी की चुदाई
(Kamvali Ki Kunvari Beti Ki Chudai)
विजय कपूर

 यह कहानी सुनें
लेखक की पिछली कहानी: पंजाबन भी चुद गयी
60 साल की उम्र में बैंक से रिटायर होने के बाद मैं सारा दिन घर पर ही रहता था जबकि मेरी पत्नी अभी कार्यरत थीं.

शांति नामक महिला हमारे घर पर काम करने आती थी. शांति की उम्र करीब 40 साल थी, उसका भरा बदन, गोरा रंग, बड़ी बड़ी चूचियां और भारी भरकम चूतड़ देखकर मन डोल जाता था. शांति को चोदने के चक्कर में मैंने उसकी किसी न किसी बहाने से कई बार मदद भी की थी.

चूंकि मैं दिन भर घर पर अकेला रहता था इसलिये मौके की कमी नहीं थी, बस दिक्कत यह थी कि बात शुरू कैसे हो.


तभी एक दिन शांति बोली- साहब, हम एक हफ्ते के लिए गांव जा रहे हैं, इस दौरान हमारी बिटिया काम करने आती रहेगी.

अगले दिन शांति अपनी बेटी स्वरा को साथ लेकर आई. स्वरा की उम्र करीब बीस साल, कद पांच फीट चार इंच, रंग गोरा, 32 इंच की चूचियां और 36 इंच के चूतड़. स्वरा का बदन और नशीली आँखें देखकर मैं दीवाना हो गया.

अगले दिन स्वरा काम पर आई तो मैंने उससे बातचीत की तो पता लगा कि वो आठ क्लास तक पढ़ी है और अब घर पर ही रहती है.
मैंने उसकी पीठ पर हाथ फिराते हुए उससे कहा- तुमको और पढ़ना चाहिए था.
तो उसने बताया कि वो पढ़ना चाहती थी लेकिन आर्थिक तंगी के कारण घर वालों ने सपोर्ट नहीं किया.

मैंने कहा- कोई बात नहीं, डिग्री, सर्टिफिकेट न सही लेकिन ज्ञान तो अभी भी प्राप्त कर सकती हो. तुम्हारी मां लौट आये तो तुम रोज एक दो घंटे मेरे पास आना, मैं तुमको गणित और अंग्रेजी में पारंगत कर दूंगा.

स्वरा के काम करने के दौरान मैंने चाय बनाई, मैंने भी पी और उसको भी पिलाई.

अब स्वरा मेरे घर पर ज्यादा समय देने लगी. मैं उसको अंग्रेजी के दो चार शब्द रोज सिखाता और लगातार प्रैक्टिस कराता. साथ ही साथ ऑनलाइन ऑर्डर करके पिज्जा, बर्गर, डोसा मंगाता और हम दोनों खाते.

अंग्रेजी पढ़ाते पढ़ाते एक दिन मैंने उसे बॉडी पार्ट्स के नाम पढ़ाने शुरू किये. सिर से शुरू करके नीचे उतरते हुए चूचियों और बुर की अंग्रेजी भी बताई. चूचियों और बुर की चर्चा करते हुए मैंने उससे पूछ लिया- तुम्हारी बुर पर बाल तो होंगे?
मेरे इस सवाल से स्वरा शरमा गयी और अपनी आँखें नीची रखते हुए उसने हां में सिर हिला दिया.

“तो तुम अपनी चूत के बाल नियमित रूप से साफ करती हो ना?”
उसने शरमाते हुए इन्कार कर दिया.
“बेटा, पढ़ाई के साथ साथ शारीरिक साफ सफाई बहुत महत्वपूर्ण है. इसका बहुत ध्यान रखा करो.”

अगले दिन जब उसने घर का काम निपटा लिया और पढ़ने के लिए मेरे पास ड्राइंग रूम में आई तो मैंने पहला सवाल किया- स्वरा, कल शारीरिक साफ सफाई की जो बात मैंने तुमसे कही थी, उस पर अमल किया?
स्वरा शांत रही.
तो मैंने पूछा- तुमने अपनी बुर के बाल साफ किये या नहीं?
तो उसने ना कहते हुए मुंह नीचे कर लिया.

“बड़ी अजीब लड़की हो, तुमको अपने शरीर और सेहत की बिल्कुल चिंता नहीं है?” यह कहते हुए मैंने उसका हाथ पकड़ा और बाथरूम की ओर ले जाते हुए कहा- आओ इधर आओ, अभी साफ करो.

मेरे पास बाल साफ़ करने की क्रीम तो थी नहीं … मैं अपनी झांटें कैंची से तराशता हूँ. मेरी बीवी भी अपनी झांटें कैंची से ही तराशती है. वैसे कई बार तो मैं ही उसकी झांटें बनाता हूँ.

तो स्वरा को बाथरूम में खड़ा करके मैंने अपना रेजर उठाया और उससे कहा- खोलो अपनी सलवार, पांच मिनट का काम है और तुम टाल रही हो.
उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

तो मैंने उसका कुर्ता थोड़ा सा ऊपर उठाकर उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया, एक झटके में उसकी सलवार नीचे गिर गई, मैंने उसकी सलवार खूंटी पर टांग दी और उसकी झांटों से भरी बुर निहारने लगा.
स्वरा की बुर पर काफी लम्बी लम्बी झांटें थी. रेजर से इन्हें साफ़ करना दुष्कर कार्य था.

तो मैंने पहले अपनी मूंछें तराशने वाली कैंची ली और प्लास्टिक के पटरे पर बैठकर जितनी हो सकी उसकी झांटें मैंने कैंची से काट दी.

इसके बाद मैंने स्वरा की झांटों में पानी लगाया, फिर फोम लगाया और उसकी झांटें रेज़र से साफ करने लगा.

थोड़ी ही देर में स्वरा की बुर चमकने लगी.

मैं खड़ा हुआ और स्वरा का कुर्ता उतार कर उसके अण्डर आर्मस भी शेव कर दिये. स्वरा के बदन पर सिर्फ ब्रा थी. एक तौलिया स्वरा को देते हुए मैंने कहा- अब तुम शैम्पू और साबुन लगाकर अच्छे से नहा लो, मैं तब तक चाय बना लेता हूँ. चाय पीने के बाद पढ़ाई होगी.

शैम्पू करने और नहाने के स्वरा जब कमरे में आई तो उसके बालों से निकलती खुशबू और टपकती पानी की बूंदों ने मुझे मदहोश कर दिया लेकिन मुझे अभी खुद पर नियंत्रण रखना था.

चाय का कप लेकर मैं बेडरूम में आ गया.


मैं बेड पर बैठा और स्वरा जमीन पर बैठ कर चाय पीने लगी तो मैंने जिद करके उसे बेड पर बिठा लिया. चाय पीने के बाद स्वरा कप किचन में रखकर वापस आई तो मैंने उससे पूछा- साफ सफाई और शैम्पू करने के बाद कैसा फील कर रही हो?
“अच्छा लग रहा है, खुद को कॉन्फीडेंट फील कर रही हूँ.”
“गुड, धीरे धीरे तुम्हारी पर्सनैलिटी डेवलप होगी.”

“एक बात बताओ, तुम पैन्टी क्यों नहीं पहनती हो?”
“पहनते हैं सर. पीरियड के दिनों में पहनते हैं.”
“हमेशा पहना करो. और हां, तुम्हारा ब्रा का नम्बर कितना है?”
“32 है, सर.”
“देखने से लगता तो नहीं है.”
“है सर. हम 32 नम्बर ही पहनते हैं.”

“घूमो जरा देखें?” कहते हुए मैंने उसे घुमाया और उसका कुर्ता ऊपर उठाकर उसकी ब्रा में लगी साइज स्लिप देखने लगा. साइज स्लिप नहीं दिखी तो मैंने स्वरा की ब्रा का हुक खोल दिया और देखा, उस पर 32 लिखा था.

स्वरा को घुमाकर उसका चेहरा अपनी ओर करते हुए मैंने कहा- 32 लिखा तो है लेकिन तुम्हारी चूचियां देखकर ऐसा लगता नहीं है.
यह कहते कहते मैंने स्वरा की चूचियां खोल दीं.

स्वरा की चूचियां देखकर मैं जन्नत में पहुंच गया. स्वरा की चूची पर हौले से हाथ फेरते हुए मैंने कहा- तुम्हारी चूचियां बहुत सुन्दर हैं, स्वरा. इन्हें बंद कर लो वरना मैं बेकाबू हो जाऊंगा.
उसने पीछे हाथ बढ़ाकर ब्रा का हुक बंद करना चाहा तो मैंने कहा- एक मिनट रुको, स्वरा. जब मैंने तुम्हारी चूचियां देख ही ली हैं तो एक बार चूस ही लूं.

मैं बेड पर बैठा था और स्वरा मेरे सामने खड़ी थी. स्वरा की एक चूची अपने मुंह में लेकर मैं दूसरी चूची मसलने लगा.
बूढ़ा शेर जवान हिरणी का शिकार करने के लिए पूरी तरह से तैयार था.

स्वरा की चूची चूसते चूसते मैं उसके चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा. मुझे ऐसा लगा कि स्वरा भी यह आनन्द लेने के लिए खुद को तैयार कर चुकी थी.
मैंने स्वरा की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसका कुर्ता भी उतार दिया.
स्वरा को बेड पर बिठा कर मैं खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतार दिये. खुद को स्वरा के करीब लाकर मैंने अपना लण्ड स्वरा के चेहरे के सामने किया और उसके मुंह में दे दिया.

स्वरा मेरा लण्ड चूसने लगी तो मैंने उसे लिटा दिया और उसकी बुर चाटने लगा. बुर चाटने से स्वरा को करंट सा लगा और स्वरा की बुर ने पानी छोड़ दिया.

अब मामला पूरी तरह से उफान पर था. मैंने कोल्ड क्रीम की शीशी और कॉण्डोम का पैकेट निकाला. अपने लण्ड और स्वरा की बुर पर क्रीम लगाने के बाद मैंने स्वरा के चूतड़ उठाकर तकिया रखा. स्वरा बेड पर लेटी थी और मैं जमीन पर खड़ा था. चूतड़ों के नीचे तकिया रखने से स्वरा की बुर ऊंची हो

गई थी और उसका मुंह खुल गया था. स्वरा की बुर के लब खोलकर देखा तो बुर का गुलाबीपन मेरे लण्ड को दावत दे रहा था.

अपने लण्ड का सुपारा स्वरा की बुर के मुखद्वार पर रखकर मैंने अपनी हथेलियां बेड पर टिका दीं. अपने होंठों से स्वरा के होंठ चूसते हुए मैंने लण्ड को स्वरा की बुर में धकेला. पहले लण्ड का सुपारा और अगले धक्के में आधा लण्ड स्वरा की बुर में घुस गया.


स्वरा के होंठ अपने होंठों में दबोचते हुए एक जोर का धक्का मारा तो स्वरा की बुर की झिल्ली फाड़कर मेरा लण्ड उसकी बुर में समा गया. बुर की झिल्ली फटने से हुए दर्द पर स्वरा की कराहें उसके मुंह में घुट कर रह गईं.

रिटायरमेंट के बाद एक कुंवारी बुर फाड़ कर मेरे मन में प्रसन्नता का कोई पारावार ना था.
जब मैंने स्वरा को चोदना शुरू किया तो वो सामान्य होने लगी और आनन्द लेने लगी. लण्ड को अन्दर बाहर करते हुए मैंने एक बार बाहर निकाला और स्वरा की बुर के खून से सने लण्ड पर कॉण्डोम चढ़ाकर फिर से उसकी बुर में उतार दिया.

स्वरा की चूचियों से खेलते हुए मैं उसे धीरे धीरे चोद रहा था लेकिन जब मेरे डिस्चार्ज का समय करीब आया तो मैंने स्पीड बढ़ा दी और समय आने पर मेरे लण्ड से पिचकारी छूटी और हिरणी का शिकार करके शेर मस्त हो गया.

Comments

Popular posts from this blog

15 posts collection

Story 77h

Yeh vidhi ka vidhan hai.