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नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र के नाम संबोधन में लॉकडाउन के चौथे चरण का संकेत दे दिया है । उन्होंने कहा कि चौथे चरण में नियम बदल जाएंगे। इसके लिए राज्यों से भी सुझाव मांगे गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 18 मई से पहले देश को नए नियमों जानकारी दे दी जाएगी।
पीएम मोदी ने बताया कि 18 मई से पहले लॉकडाउन के चौथे चरण की जानकारी साझा की जाएगी, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये लॉकडाउन नए रंग-रूप-नियम वाला होगा। बता दें कि देश में लागू लॉकडाउन 3.0 की अवधि 17 मई को खत्म हो रही है। पीएम मोदी ने कहा कि लॉकडाउन 4.0 नए रंग रूप वाला होगा, नए नियमों वाला होगा। राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं, इससे जुड़ी जानकारी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी।
पीएम मोदी ने कोरोना आपदा से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, जो भारत की जीडीपी का 10 फीसद है। पिछला और आज का पैैकेज का मिलाकर है यह राशि।
पीएम ने कहा कि इस पैकेज के बारे में विस्तार से जानकारी बाद में दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है।
कोरोना से हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी
पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना से हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ा आपदा भारत के लिए संदेश और एक अवसर लेकर आई है। उन्होंने कहा कि मैं एक उदाहरण के साथ बताना चाहता हूं कि जब कोरोना संकट शुरू हुआ तो भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी न ही एन95 मास्क का उत्पादन होता था। लेकिन आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। हम ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि आपदा को हमने अवसर में बदल दिया है।
थकना नहीं, हारना नहीं, टूटना नहीं: पीएम
अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि यह संकट अभूतपूर्व है, लेकिन थकना, हारना, टूटना, बिखरना मानव को मंजूर नहीं है। सतर्क रहते हुए ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है।' प्रधानमंत्री ने देश-दुनिया में कोविड-19 मरीजों की मौत पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
पीएम का 'चौथा राष्ट्र के नाम संबोधन'
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दो महीने में चौथी बार देश को संबोधित किया है। कोरोना संकट के बीच पीएम मोदी ने पहली बार 18 मार्च को देश को संबोधित किया था। उस संबोधन में उन्होंने लोगों से 22 मार्च को सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक 'जनता कर्फ्यू' का पालन करते हुए घरों से नहीं निकलने की अपील की थी। फिर, 24 मार्च को दूसरे संबोधन में पीएम मोदी ने 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था। पीएम ने तीसरी बार 14 अप्रैल को देशवासियों को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया था। हालांकि, बाद में सरकार ने 3 मई की मियाद बढ़ाकर 17 मई कर दी और भारत लॉकडाउन के तीसरे चरण में प्रवेश कर गया। मंगलवार के 'राष्ट्र के नाम संबोधन' के दौरान पीएम मोदी ने लॉकडाउन के चौथे चरण का भी ऐलान कर दिया।
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सियागंज से तीन दिन बेचा जाएगा ज़हर !
अंकुर जायसवाल, इंदौर
प्रशासन ने आँख मूँद कर मार्च से लागू हुए, लॉकडाउन के बाद से दुकानो-गोदामों में पड़े सॉफ्ट ड्रिंक पैक बोतलों को भी बेचने की अनुमति दे दी हैं। कई ट्रांसपोर्टो पर भी हज़ारों कार्टून साफ्ट ड्रिंक के रखे हुए हैं। इन्हें भी ठिकाने लगाने की हो रही हैं जुगाड़। जानकारी के मुताबिक़ यह माल उपभोग लायक़ नहीं बचा हैं। सियागंज के 33 दुकानदारों को माल बेचने की परमिशन दी है। वह पूरी तरह ग़लत निर्णय हैं।
ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट जहर बिकेगा:
प्रशासन ने 13, 14, 15 मई को सियागंज होलसेल मार्केट के दुकानदारों को माल बेचने की परमिशन दी है। प्रशासन ने एक बार भी नहीं सोचा कि यह सारे दुकानदार खाने-पीने का सामान बेचते हैं। मार्च से हुई तालाबंदी को क़रीब 50 दिन हो गए हैं। उसके पहले से बना इनके पास जितना भी गोदामों में खाने और पीने का सामान रखा हुआ है वह सब लगभग खराब हो चुका होगा। यह दुकानदार ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट सॉफ्ट ड्रिंक और कोल्ड ड्रिंक है जो कि अब जहर बन चुका होगा। इनके उपभोग की एक समय सीमा 60 से 90 दिन की होती हैं।
ट्रांसपोर्ट के रास्ते ठिकाने लगाने की जुगत:
ये जहर सियागंज की दुकानों पर सैंपल के तौर पर रखा जाता है। इन सब के गोडाउनओं में करोड़ों रुपए का माल भरा पड़ा हैं। अब सारे ट्रांसपोर्ट जो कि इंदौर से महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और एमपी के सारे एरिया छोटे एरिया गांव में जहां अभी करोना नहीं पहुंचा वहां पर एक नए कोरोना बीमारी जैसी महामारी पहुंचाने की तैयारी है। प्रशासन को तत्काल फूड अफसरों को इन सारी दुकानों, गोदामों और ट्रांसपोर्ट पर भेजना चाहिए। सैंपल लेकर जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही माल बेचने की अनुमति देना चाहिए। वरना अगर यह माल जनता तक पहुँच गया तो आप समझ सकते हैं की क्या हालात होने वाले हैं।
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मोदी को सलाह और चुनौती, और वित्तमंत्री भी ध्यान से सुने..वित्तमंत्री को देखे कई युग बीत गए..
● अनिल अंबानी, IL&FS, DHFL- वाधवा ग्रुप, HDIL और Zee - इन पांचों के लोन का जोड़ पता है आपको?
● लगभग 4.6 लाख करोड़ या $66 बिलीयन..जीडीपी का 2.5%..क्या आपको गोदीमीडिया ने बताया? सारे देशद्रोही है..
● और सुनिये - ये 4.6 लाख करोड़ दुुनिया की 44.04% देशो की Individual जीडीपी से ज्यादा है..यानी आधे विश्व के बराबर लूट लिया है..
● इन सारी कंपनियो से बीजेपी को कितना चन्दा मिला है? क्या बीजेपी बताएगी?
● बीजेपी को चाहिए कि इन चोरों से लिया चन्दा देश के खजाने में वापस लौटा दे..क्या हिम्मत है ऐसा करने की?
● मोदी एक सरकारी आदेश जारी कर ऐसे और अन्य लोगो की सारी सम्पत्ति जब्त कर देश को पैकेज घोषित करे..
राहुल गांधी की तरह कैंब्रिज से Mphil करने के लिए दिन में आपको कमसे कम 16 घन्टे पढ़ाई करनी पड़ती है.."गटर की गैस" शराब या चरस के नशे में नाली में गिरा हुआ कोई भी नशेड़ी बोल सकता है..पूरा देश लूट लिया गया है, और इसके लिए आप भी जिम्मेदार है.. #राहुलगांधी #प्रियंकागांधी #aicc #krishnaniyer
9 May at 15:45 · Public
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आज भक्तो और संघीयो को जलील करने का दिन है..जब भी जमानत की बात करे तो ये लिस्ट पोस्ट कीजिये..Save कीजिये..
● आडवानी, मुरली जोशी बेल पर है..मैं कन्फर्म नही हूँ पर अटल भी बेल पर ही था मरते वक्त..पूरा मार्गदर्शक मंडल बेल पर..
● चोर बंगारू लक्ष्मण बेल पर ही था..
● तड़ीपार भी बेल पर था..
● उमा भारती बेल पर है या थी..
● जनवरी 2015 से मुख्तार नकवी बेल पर
● मुकुल रॉय बंगाल में बेल पर..
● केरल के सुरेंद्रन बेल पर..
● रेप पर बेल वाले मंत्री बनाये मोदी ने..
● हरियाणा के विकास बारला बेल पर
● चिन्मयानंद बेल पर ही है🤣
● रीता बहुगुणा जोशी, बाबुल सुप्रियो बेल पर..
● योगी मई 2016 मे सिद्धार्थनगर CJM कोर्ट से 15,000 की बेल पर है..इसके अलावा भी अलग अलग केस में बेल पर रहा था या है..
● केशव प्रसाद मौर्य 2014 से हत्या के केस में बेल पर है..2018 में केशव मौर्य को दुर्गा पूजा की चंदा चोरी केस मे बेल मिली है..
● गुजरात के C R Patil , दिनुभाई सोलंकी समेत असंख्य बीजेपी के नेता बेल पर है..(कोई गुजरात के मित्र गुजरात की लिस्ट बना दे प्लीज..)
● गुजरात में बीजेपी के दंगों में आरोपी बेल पर..
● बीजेपी के 150 से ज्यादा जनप्रतिनिधि अलग अलग केस में लगभग हर राज्य में बेल पर है..
★ हर भक्त की वाल पर इस पोस्ट को चिपकाने का काम आपका..बीजेपी = बेल जेल पार्टी..
अब तो सुधीर और अर्नब को भी बेल लेनी है..शायद वो समय आने वाला है जब नोटबन्दी जैसे मामले में शायद मोदी, शाह को भी बेल की जरूरत पड़े..#राहुलगांधी #प्रियंकागांधी #aicc #krishnaniyer
(अपने अपने इलाके में बीजेपी नेता जो बेल पर है उनकी लिस्ट बनाइये और कमेंटबॉक्स में डालिये..मैं सबका संकलन कर पोस्ट कर दूंगा)
11 May at 16:03 · Public
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आज एक #प्रोफेसर को #facebook पे #live देखा। उनको जानता हूँ। वो क़ुरआन के चैप्टर्स और आयतों को quote करके खुलेआम गलतबयानी कर रहे थे और सरासर झूठ बोल रहे थे।
#इस्लाम को #कातिल #मजहब, #मुहम्मद साहब और उनके अनुयायियों को लुटेरा और पता नहीं क्या-क्या बोल रहे थे। एक पक्की नौकरीं वाले प्रोफेसर के मुंह से ये सब सुनना दुखद था। #mass #communication के ही प्रोफेसर हैं। चाहता तो वहीं फेसबुक लाइव में उनको जवाब दे सकता था और चैलेंज कर सकता था कि आप हर आयत को पहले quote करो और फिर मतलब बताओ। जो बात आयात में है ही नहीं, उसे अपने मन से जोड़कर गलत बयानी और धार्मिक भावना भड़काने का काम उन्होंने किया।
उनके कहने का स्टाइल ये रहा कि क़ुरआन के फलां चैप्टर के फलां आयत में कहा गया है कि लूटो, मारो, क़त्ल कर दो। यानी एकदम सफेद झूठ। मतलब मैं कह दूं कि आधुनिक इतिहास की फलां पुस्तक में फलां अध्याय के पेज नम्बर फलां पे लिखा है कि महात्मा गांधी ब्राजील में पैदा हुए, वहां वे डाकू थे, फिर 5900 हत्याएं उन्होंने की और तब जाकर उनको चीन के कम्युनिस्ट पार्टी का मुखिया बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने चीन में 2.5 करोड़ लोगों का नरसंहार करवा दिया।
क्या आप गांधी जी को जानते हैं? क्या अपने इतिहास पढ़ा है? अगर हां, तो आप कहेंगे कि ये सब झूठ नहीं, बड़ा अपराध है इतना बड़ा असत्य कहना। तो समझ लीजिए कि ये प्रोफेसर इस्लाम और मुहम्मद साहब के बारे में धार्मिक ग्रन्थ क़ुरआन को quote करके ऐसा ही झूठ बोल रहा था, जिसका कोई सिर-पैर नहीं।
अब अगर सरकारी कॉलेज के प्रोफेसर लेवल के लोग facebook live में सफेद झूठ बोलकर साम्प्रदायिक घृणा और उन्माद फैलाएंगे तो इस देश का क्या होगा, ये सोच लीजिए। उनको अपने आकाओं से किसी चीज़ की लालसा होगी, तो वो कोई और जतन करें। इस्लाम और क़ुरआन के बारे में गलत जानकारी देकर फेसबुक पे धार्मिक उन्माद और ज़हर फैलाने का काम ना करें। उनके पूरे फेसबुक लाइव का लब्बोलुबाब ये था कि मुसलमान खूनी, लुटेरे और दूसरे मज़हब के लोगों का क़त्ल करने वाले होते हैं। उन्होंने क़ुरआन की आयतों को quote करके ये fake news प्रसारित की और इस देश के संविधान व अपनी प्रोफेसरी को कलंकित किया। पता नहीं, इनके पढ़ाए बच्चे कैसे पत्रकार बनते होंगे?
ये सब बेहद बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक रहा। बेहद दुखद।
10 May at 18:47 · Public
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प्रिय अभिषेक
वो तो अमरीका था। जो हिंदुस्तान होता तो बात ही अलग होती।
जीजा कहते- एक साली दिवस भी हो। सालियां कहतीं- एक जीजू दिवस भी होगा।
बुजुर्ग कहते -जब इतने दिबस हैं, तौ एक दिबस घर के मान्य लोगन कौ हू रख लो।
फूफाजी कहते-जे क्या बात हुई? हमारा दिवस सबके संग रख दिया। कोई इज्जत नहीं है क्या हमारी। जो हमारा दिवस अलग नहीं किया तौ हम ससुर दिवस में न तो आवेंगे, न शुभकामना देंगे।
सास कहती - सुनते हो, निम्मी का दूला नाराज है, एक दामाज्जी दिबस भी धर लो। भले हमारा काट दो।
ताऊजी दिवस, देवरानी-जेठानी दिवस, चचिया ससुर दिवस, मौसिया सास दिवस, फूफाजी दिवस और साढूभाई दिवस भी होता।
और एक दिवस उनका होता जो कोई दिवस न होने से रूठ गए है- रूठे लोगन कौ दिवस।
पूँजी वाले सैम अंकिल, फ्री में आइडिया दे रिया हूँ, नोट कल्लो। मौज करोगे।
#दिवसईदिवस
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अपनी माताजी की बिना अनुमति मोदी को अपना "बाप" घोषित कर खुद की माताजी का अपमान करने वाले दो कौड़ी के पात्रा को जलील कीजिये.
- बंगारु लक्ष्मण बीजेपी का अध्यक्ष था (2000-01)..ये रेल मंत्री भी था अटल सरकार में..
- बंगारु रक्षा सौदे में 1 लाख ₹ घुस लेते हुए TV पर लाइव पकड़ा गया था..(13 मार्च 2001)
- इंग्लैंड की वेस्ट एंड इंटरनेशनल कम्पनी सेना को उपकरण बेच रही थी और बंगारु लक्ष्मण 1 लाख ₹ घुस ले रहा था..राष्ट्रवाद, देशप्रेम !!!
- उस वक्त अटल PM था..क्या अटल को बिना बताए रक्षा सौदे में घुस लेना संभव था?
- सरकार में अटल रक्षा सौदे की अनुमति देगा और पार्टी अध्यक्ष घुस लेगा, यही डील थी? जिन्नाह की मजार पर ट्रेनिंग मिली थी?
- TV पर पूरी दुनिया ने देखा था कि कैसे अटल के समय रक्षा सौदों में घोटाला हुआ था..बीजेपी पार्टी अध्यक्ष खुले आम घुस लेता था..
- बंगारु लक्ष्मण को CBI ने गिरफ्तार किया था..बंगारु पर केस चला..
- 28 अप्रैल 2012 को बंगारू को 4 साल की सजा हुई..बंगारु माफी के लिए गिड़गिड़ाया था..पर बच नही पाया..
- 2014 में बंगारु मर गया एक सजायाफ्ता चोर की हैसियत में..
- जिस पार्टी का एक अध्यक्ष घूसखोर रहा हो और दूसरा अध्यक्ष तड़ीपार रहा हो उनकी इज्जत और हैसियत सबको मालूम है..
बीजेपी वालो, तुम्हारा पार्टी अध्यक्ष रक्षा सौदे में घुस लेते हुए पकड़ा गया और एक सजायाफ्ता अपराधी रहते हुए मर गया..रक्षा सौदों के दलालों को, देश से भगाओ सारो को.. #krishnaniyer
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कोई कमाने के लिए शहर जाता है तो इस उम्मीद से नहीं जाता कि अब कभी नहीं लौटेगा. वह परिवार को उम्मीद देकर जाता है कि पैसा कमाएगा और परिवार का बोझ हल्का कर देगा. वह भी बिहार से हरियाणा कमाने गया था. न परिवार ने, न खुद उसने ही कभी यह सोचा होगा कि वह लाख कोशिश के बाद भी घर नहीं लौट सकेगा और रास्ते में मारा जाएगा. वह पैदल चलते हुए वह मारा गया. उसका नाम अशोक था.
बिहार का रहने वाला अशोक अपने एक दोस्त पिंकू और दो अन्य के साथ पैदल बिहार जा रहा था. हरियाणा में अम्बाला के जगाधरी हाइवे पर इन्हें तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी. अशोक की मौके पर ही मौत हो गई. पिंकू गंभीर रूप से जख्मी हो गया.
इनके साथ के ही सुधीर कुमार मंडल ने बताया, 'मैं पूर्णिया का रहने वाला हूं. अम्बाला में पिछले दो-तीन साल से रह रहा हूं. हमारे पास पैसे खत्म हो गए थे, इंतजार कर रहे थे कि कब लॉकडाउन खुलेगा और अपने घर जाएंगे. मेरे चार साथी पैसे खत्म हो जाने पर पैदल ही बिहार के पूर्णिया के लिए निकले थे. जगाधरी रोड पर अज्ञात वाहन ने दो को कुचल दिया. अशोक की मौके पर मौत हो गई, पिंकू गंभीर रुप से घायल हो गया. हमारे दो साथी विजय और मनोज बच गए.'
11 मई का दिन मजदूरों के लिए ज्यादा भयावह रहा. अलग अलग दुर्घटनाओं में कम से कम 15 मजदूर मारे गए हैं.
आजतक की खबर के मुताबिक, मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर, बड़वानी, सागर और शाजापुर जिलों में कुल मिलाकर 11 प्रवासी मजदूरों की मौत हुई, जबकि 14 अन्य घायल हुए. ये सभी महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना से उत्तर प्रदेश जा रहे थे. इनमें से 6 मजदूरों की मौत गर्मी और थकान से हुई. इसके अलावा, नरसिंहपुर जिले में एक ट्रक पलट गया और इस दुर्घटना में 5 मजदूरों की मौत हो गई. इस हादसे में 14 अन्य मजदूर घायल हो गए. इस ट्रक में आम भरा हुआ था और इसी में 20 प्रवासी मजदूर हैदराबाद से उत्तर प्रदेश के एटा और झांसी जा रहे थे.
इनमें यूपी के सिद्धार्थ नगर के रामबली (31) कर्नाटक से घर लौट रहे थे. मध्य प्रदेश के सागर-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई. अस्पताल में उनकी मौत हो गई.
यूपी के ही बस्ती निवासी रामरूप (35) महाराष्ट्र से पैदल लौट रहे थे. शाजापुर जिले में उनकी मौत हो गई. बड़वानी से रिपोर्ट मिली कि मुंबई से उत्तर प्रदेश पैदल जा रहे तीन प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई.
बिहार का रहने वाला शिवकुमार अपने कुछ साथियों के साथ साइकिल से अपने घर बिहार जा रहा था. वे लोग बुलंदशहर से चले थे. रायबरेली पहुंचे थे, तभी कार ने टक्कर मार दी. उसकी मौत हो गई.
यूपी के फतेहपुर में एक सड़क हादसा हुआ जिसमें एक मां-बेटी की मौत हो गई. ये दोनों महाराष्ट्र से आ रहे मजदूरों की टोली में थीं. ये सभी जौनपुर जा रहे थे.
फतेहपुर के हरदासपुर निवासी अनीस अहमद और प्रयागराज निवासी लल्लूराम की महाराष्ट्र से यूपी के रास्ते में मौत हो गई. अलग अलग घटनाओं में इन दोनों की मौत अचानक रास्ते में तबियत बिगड़ने के कारण हुई.
यह दिन भर का कुल आंकड़ा नहीं है. यह बस नमूना है.
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कोविड-19 के गम्भीर और मृतप्राय रोगी किस तरह से अन्य संक्रमित लोगों से अलग हैं ?
वर्तमान कोविड-19 पैंडेमिक में किसी भी वय , लिंग , नस्ल , धर्म , जाति का व्यक्ति इस विषाणु से संक्रमित हो सकता है , पर गम्भीर समस्या होने की आशंका उन्हें अधिक है , जो बड़ी उम्र के हैं अथवा जो किसी दीर्घकालिक रोग से ग्रस्त हैं। ये ही वे लोग हैं , जिनमें मृत्यु-दर भी अधिक पायी जा रही है। ऐसे में यह सोचना स्वाभाविक है कि किसलिए सार्स-सीओवी 2 विषाणु से संक्रमित होने पर वृद्धों व दीर्घकालिक रोगग्रस्त लोगों में ऐसा देखने को मिल रहा है।
एक ऐसे तराजू की कल्पना करिए , जिसका एक पलड़ा दूसरे से बस थोड़ा ही हल्का है। सब्ज़ी-इत्यादि तौलाते समय आपने ऐसी स्थिति अक्सर देखी होगी , जब एक किलो का बाट सब्ज़ीवाला एक पलड़े पर रखता है और दूसरे पलड़े में कोई सब्ज़ी ( मान लीजिए टमाटर ) होती है। दोनों पलड़ों की बराबरी की स्थिति लगभग आ चुकी है : बस थोड़ा सा अन्तर रह गया है। टमाटर वाला पलड़ा बाट वाले पलड़े से थोड़ा ही ऊपर है। तभी सब्ज़ीवाला एक छोटा टमाटर उठाता है और उसे टमाटर वाले पलड़े में रख देता है। बस ! तुरन्त टमाटर वाला पलड़ा नीचे आता है और दोनों पलड़े बराबर हो जाते हैं। एक किलो टमाटर प्रस्तुत है। लीजिए !
जीवन को सब्ज़ी के इस सौदे-सा समझने का प्रयास कीजिए। जीवित व्यक्ति का टमाटर वाला पलड़ा हल्का है। जिसका जितना यह हल्का , उतना वह स्वस्थ। बच्चों और युवाओं में यह पलड़ा अमूमन हल्का रहा करता है। लगभग तीस , पैंतीस या कई बार चालीस की उम्र तक। फिर कोई-न-कोई रोग जीवन में लगने लगता है। ज्यों लकड़ी में दीमक। शोध बताते हैं कि पैंतीस की वय तक आते-आते ढेरों लोगों ( लगभग 25 % ) में कम-से-कम एक दीर्घकालिक रोग लग जाता है , चाहे वह डायबिटीज़ हो , हायपरटेंशन हो अथवा फिर इस्कीमिक हार्ट डिज़ीज़। ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती है , दूसरे दीर्घकालिक रोग व्यक्ति के शरीर से चिपकते हैं। साठ की वय तक आते-आते लगभग 50 % लोग दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। पचहत्तर की वय तक यह प्रतिशत 75 % के क़रीब पहुँच जाता है। जितनी अधिक उम्र , उतनी अधिक दीर्घकालिक ( क्रॉनिक ) बीमारी की आशंका। बड़ी उम्र के लोगों में एक या एक-से-अधिक क्रॉनिक बीमारी बहुधा देखने को मिलती हैं।
बढ़ती उम्र के साथ , दीर्घकालिक रोगों के साथ , धूमपान व मदिरापान के कारण तराजू का सौदे वाला पलड़ा धीरे-धीरे झुकता जा रहा है। वह बाट वाले पलड़े से बराबरी की ओर बढ़ रहा है। बस तभी कोविड-19 उस छोटे टमाटर की तरह उसमें रख दिया जाता है और दोनों पलड़े सन्तुलित हो जाते हैं। यही मृत्यु है।
सौदे वाले पलड़े का नित्य भारी होते जाना दरअसल शरीर में इन्फ्लेमेशन नाम प्रक्रिया का नित्य बढ़ते जाना है। बढ़ती उम्र और दीर्घकालिक रोग मानव-शरीर में एक इन्फ्लेमेशन की स्थिति पैदा करते जाते हैं। स्वस्थ युवा व्यक्ति की तुलना में वृद्धों और दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त लोगों में कोशिकाएँ मरती रहती हैं और प्रतिरक्षा-तन्त्र उनके शवों व उनसे निकले रसायनों का निस्तारण करते रहते हैं। इन कोशिका-शवों का निस्तारण कम ज़रूरी मत समझिए : यह काम कीटाणुओं को मारने से कम आवश्यक नहीं है।
शवों को निस्तारित न किया जाए , तो क्या होगा ? दुर्गन्ध फैलने से स्थिति का बिगाड़ शुरू होगा और बीमारियों तक जाएगा। शरीर के भीतर मृत-मृतप्राय कोशिकाओं व उनसे निकल रहे रसायनों के कारण ही इन्फ्लेमेशन का जन्म होता है। यह शरीर के भीतर होगा अगर मृत कोशिकाओं के शरीरों का 'उचित अन्तिम संस्कार' नहीं किया गया। मृत या मृतप्राय कोशिकाओं से निकल रहे रसायनों को रोका जाएगा। कोशिकीय स्तर पर चल रहा यह आपदा-काल समाप्त किया जाएगा। शरीर में पुरानी के स्थान पर नयी कोशिकाएँ जन्म लेंगी। कोशिका-शवों का त्वरित निस्तारण होगा , तभी शरीर की स्वास्थ्यपरक स्वच्छता बनी रहेगी।
बढ़ती उम्र के साथ कोशिकाओं का बूढ़ा होना और मरना नित्य बढ़ता जाता है। धूमपान करने वाले के शरीर की कोशिकाएँ भी सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक तेज़ी से मर रही होती हैं। अनिद्रा व तनाव भी यही करते हैं , प्रदूषण भी। दीर्घकालिक रोग भी कोशिका-मरण बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाते हैं। इससे पैदा हुई इन्फ्लेमेशन की स्थिति एक ऐसे देश की तरह होती है , जहाँ एक आपदा की तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। तराज़ू का टमाटरी पलड़ा लगातार बाट वाले पलड़े की ओर झुक रहा है।
तभी सार्स-सीओवी 2 का शरीर में प्रवेश होता है। उस शरीर में जो वृद्ध है अथवा दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त है। इस शरीर के भीतर के प्रतिरक्षक सैनिक सालों से लड़ते रहे हैं। पूरे शरीर में इन्फ्लेमेशन की स्थिति सालों से रहती आयी हैं ; चारों ओर मृत-मृतप्राय कोशिकाओं के ढेर रोज़ लगते रहते हैं और उनसे लगातार आपदा-कालीन रसायन निकलते रहते हैं। अब इस थके बोझिल ऊबे-उकताये प्रतिरक्षा-तन्त्र को इस नये विषाणु-शत्रु से जूझना पड़ जाता है। वह जूझता भी है , पर इस मारामारी में इन्फ्लेमेशन का स्तर इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति की जान निकल जाती है। विषाणु ही सीधे-सीधे कोविड-रोगी को नहीं मारता , विषाणु और प्रतिरक्षक कोशिकाओं की लड़ाई में शरीर मारा जाता है। मित्र और शत्रु लड़ते हैं , जान व्यक्ति की जाती है।
इन्फ्लेमेशन पैदा करने वाली स्थितियाँ अगर टमाटर हैं , तो सार्स-सीओवी 2 तराज़ू बराबर करने के लिए जोड़ा गया अन्तिम छोटा टमाटर। बहुत हल्के टमाटरी पलड़े में विषाणु के छोटे टमाटरी इन्फ्लेमेशन से तराज़ू के पलड़े बराबर होने की उम्मीद बहुत कम है। इसलिए स्वस्थ रहने का अर्थ टमाटर-रूपी इन्फ्लेमेशन को पलड़े में कम-से-कम रखना है। बढ़ती उम्र का कुछ कर नहीं सकते , प्रदूषण भी सामूहिक प्रयासों से ही जाएगा। लेकिन धूमपान न करें , यह सम्भव है। मदिरापान से यथासम्भव दूरी रखें , यह भी। डायबिटीज़ और ब्लडप्रेशर की रोकथाम के लिए सन्तुलित भोजन , सम्यक् निद्रा , तनावमुक्ति व व्यायाम नित्य करें। ( बाक़ी कुछ टमाटर मानव के बुरे जीन भी हैं , उनका हम कुछ कर नहीं सकते। वे हमें माँ-बाप से तराज़ू के अपने पलड़े में विरासत में मिले हैं। )
विषाणु आएगा , देह-तुला का पलड़ा हल्का ही रहेगा। तुला सन्तुलित न हो सकेगी , जीवन चलता रहेगा। मृत्यु का सौदा टल जाएगा।
--- स्कन्द।
( पुनश्च : लेख में टमाटर केवल लाक्षणिक प्रतीक है इन्फ्लेमेशन पैदा करने वाली स्थितियों का। टमाटर व सब्ज़ियों-फलों के वास्तविक सेवन से शरीर का इन्फ्लेमेशन कम होता है , इनमें अनेक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद रहते हैं। स्वस्थ लोग लगातार पौष्टिक भोजन लेते रहें और बीमार अपने डॉक्टरों से पूछकर आहार-विषयक निर्णय लें। )
#skandshukla22
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अँगरेज़ जिस 'डिवाइड एण्ड रूल' के साथ भारत पर शासन करने में सफल रहे , वह राजनीतिक मन्त्र कदाचित् उन्हें विज्ञान ने दिया था।
'डिवाइड एण्ड रूल' या 'डिवाइड एण्ड कॉन्कर' पिछले पाँच-सौ सालों से विज्ञान के मूल में रहते रहे हैं। तोड़-तोड़ कर समझो। तोड़ते जाओ , समझते जाओ। जितना तोड़ सकोगे , उतना समझ सकोगे। विज्ञान की दृष्टि में तोड़कर समझना ही जीतना है। जितना जो समझा गया , उतना वह जीत लिया गया। यही विज्ञान-नीति है।
उपनिवेशवादियों ( विशेषकर अँगरेज़ों की ) की राजनीति में जब यह पद आया , तब इसने राजनीतिक चाल-ढाल अपना ली। विज्ञान तोड़कर-फोड़कर चीज़ें समझता था / है , उपनिवेशवादियों की राजनीति फूट डालकर लोगों को समझती है। अन्ततः विज्ञान को भी केवल समझना नहीं है , राजनीति भी लोगों को समझकर नहीं रुकने वाली। दोनों पहले तोड़ेंगे-फोड़ेंगे , फिर समझेंगे और अन्त में अपने-अपने ढंग से जीतकर शासन करेंगे।
यह तरीक़ा अवव्याख्यावाद या रिडक्शनिज़्म है। आधुनिक विज्ञान अब-तक इसी ढंग पर चलता रहा है। जानवरों और इंसानों को बायलॉजिकल इकाई की तरह देखते हैं , उन्हें रसायनों में तोड़ते हैं। रसायनों के इन पुलिन्दों को हम तत्त्वों में और तत्त्वों को उप-पारमाण्विक कणों में तोड़ते चले जाते हैं। रासायनिक तत्त्व से परमाणु , उप-पारमाण्विक कण और फिर क्वार्कों तक की यह यात्रा दरअसल रसायनविज्ञान का भौतिकी में टूटते जाना है।
बायलॉजी टूटकर केमिस्ट्री बने , केमिस्ट्री टूटकर फ़िज़िक्स --- यही मुख्य धारा का विज्ञान अब-तक करता आया है। इंसानों को मशीन कहने के पीछे भी यही विचारधारा ज़िम्मेदार रही है। मशीन फ़िज़िक्स से चलती है , इंसानी देह भी उसी से चलती है। इंसान एक मशीन ही तो है। इस तरह से ज्यों हम मशीन तोड़ कर पुनः बना लेते हैं , इंसान भी बना लेंगे।
पेड़ों को समझकर हम जंगल समझ लेंगे --- रिडक्शनिज़्म के इस विज्ञान-मन्त्र के साथ हम कई सौ साल चल लिये। हमने तरह-तरह की दवाएँ बनायीं ; संक्रमणों व कैंसरों पर हम जीतने लगे। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध तक लेकिन दो बातें धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगी थीं। इस रिडक्शनिस्ट तरीक़े की हम सीमा तक पहुँच चुके हैं और इस पर निर्भर रहकर हम सारे संक्रमणों और सभी कैंसरों पर विजय नहीं पा सकेंगे। दरअसल यह तोड़फोड़ का तरीक़ा मानव-देह को जितना सरल ढंग से समझता-समझाता है , वैसा मामला है नहीं। बायलॉजी को केमिस्ट्री में ढालने से और केमिस्ट्री को फ़िज़िक्स में तोड़ने से मानव-शरीर की सभी समस्याएँ हल नहीं की जा सकतीं। मानव-देह कम-से-कम मशीन की तरह की मशीन नहीं है , न ही वैज्ञानिक और डॉक्टर मेकैनिक हैं। पेड़ों को समझने लेने से जंगल को समझ सकने का दम भरना केवल नादानी है , और कुछ नहीं।
'फूट डालो और समझ लो' का यह तरीक़ा भौतिकी और रसायन-विज्ञान में चल सकता है , किन्तु जीव-विज्ञान में नहीं। मेडिकल साइंस में हम केवल मरीज़ के शरीर को अंगों में , अंगों को ऊतकों में , ऊतकों को कोशिकाओं में , कोशिकाओं को रसायनों में , रसायनों को तत्त्वों में, तत्त्व-परमाणुओं को उप-पारमाण्विक कणों में और इन कणों को क्वार्कों में बदल कर कदाचित् यह न बता पाएँ कि बरखू की फ़सल नष्ट होने पर उसके मन में आत्महत्या का विचार क्यों आया और राम सिंह के शरीर में बैठे टीबी के जीवाणु उसमें रोग क्यों नहीं पैदा कर रहे। इसके लिए विज्ञान को सर्वथा नये तौर-तरीक़े से सामान्य और समस्यापरक को समझना होगा। और इस तौर-तरीके में हमारी मदद करेंगे कम्प्यूटर और गणित। अब हम शरीरों को तोड़कर उन्हें नहीं समझेंगे , उन्हें शरीर बने रहेंगे देंगे और फिर समझने की कोशिश करेंगे। शरीर को शरीर के रूप में समझना शरीर ही को बेहतर समझना होगा।
सिस्टम्स बायलॉजी और नैनोटेक्नोलॉजी जैसे विषय मानव-चिकित्सा का सन्निकट भविष्य हैं। आज जब हम एक नये कोरोनावायरस से जूझ रहे हैं , तब पारम्परिक रिडक्शनिस्ट तरीक़े के अलावा कई वैज्ञानिक इन नये तरीक़ों से भी इस विषाणु पर विजय पाने में लगे हुए हैं। विषाणु और जीवाणु हमारे रसायनों का जवाब रसायनों से दे रहे हैं। यह दरअसल रसायनों की रसायनों से लड़ाई है। किन्तु परम्परागत ढंग से हम कितने रसायन बना सकते हैं ? कितनी एंटीबायटिक बनाएँगे ? कहाँ-कहाँ कैंसर-कोशिकाओं को रासायनिक युद्धों में मात देंगे ? नैनोतकनीकी के माध्यम से हमें जीवाणु या विषाणु को किसी दवा से नहीं हराना है , बल्कि नैनोकणों के माध्यम से उनमें त्रुटि पैदा कर देनी है। जिस तरह से विषाणु जीवाणु की सतह में छेद कर देता है , उसी तरह हमारे नैनोकण भी करेंगे। इसी तरह विषाणुओं के साथ भी जूझा जाएगा। दिलचस्प बात यह कि इन तरीक़ों के खिलाफ़ प्रतिरोध विकसित कर पाने का इन कीटाणुओं को समय ही न मिल सकेगा।
मस्तिष्क में चेतना कैसे रहती है ? इस प्रश्न का उत्तर रिडक्शनिस्ट तरीक़ा दे सके , मुझे संशय है। आपको भी होगा। मस्तिष्क को तोड़ते जाइए और चेतना खोज कर दिखाइए। बहुत मुश्किल मामला है। यहाँ भी सिस्टम्स बायलॉजी जैसे तरीक़ों का योगदान महत्त्वपूर्ण हो सकता है। सम्पूर्णता को नष्ट किये बिना उसे समझते हुए शरीर के रहस्य बूझिए। सिस्टम्स बायलॉजी में सिद्धान्त भी होंगे , प्रयोग भी , मॉडलों का भी स्थान होगा। किन्तु इसमें अनेक क्षेत्रों के वैज्ञानिक संग बैठकर किसी पहेली को सुलझाने का बेहतर प्रयास करेंगे।
'डिवाइड एण्ड रूल' को विज्ञान अब त्यागने के क्रम में है। फूट डालकर आप कुदरत को एक सीमा के बाद समझकर राज नहीं कर सकते। आप पूछेंगे कि क्या विज्ञान के इस समन्वयीकरण को आधुनिक राजनीति भी अपनाएगी ? अपना ही रही है। हमारे-आपके आँकड़ों को जमा करके कम्प्यूटरों द्वारा उनसे पैटर्न निचोड़े ही जा रहे हैं। हमें समझा जा रहा है , ताकि हमें रिझाया-भरमाया जा सके। राजनीति समन्वय से और चतुर होकर फूट डालना बेहतर सीखेगी। इस काम में कम्प्यूटरीय एल्गोरिद्म उसकी मदद करेंगे।
विज्ञान और राजनीति ने तरीका चाहे बदल दिया हो, जीतने की इच्छा नहीं त्यागी। उसके त्याग के बाद तो विज्ञान और राजनीति की पहचान का संकट खड़ा हो जाएगा ! जब तक जन-संख्या पर सत्ता की निर्भरता है , आँकड़ों का अध्ययन बढ़ता और बेहतर होता जाएगा। जनसंख्या को समझो , उनसे ट्रेंड निकालो , फिर लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर बदलने की कोशिश करो। कम्यूटरीय एलोगोरिद्मों द्वारा जन-मन की हैकिंग करो। हैकीकृत जनता फिर जनता रहेगी ही नहीं : जिस समुदाय की विभिन्नता पहले से पता हो और जिसे बदला जा सकता हो , वह तो मानवीय होने का अधिकार ही कदाचित् खो देगा।
--- स्कन्द।
#skandshukla22
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एक बात और. 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान तो हो गया, पर पैसा आएगा कहां से? अभी हाल तक केंद्र सरकार #RBI से देश का रिजर्व पैसा ले चुकी है। वह तो महज 1.76 लाख करोड़ ही रहा। यानी इतना पैसा भी सरकार के पास नहीं था। मजबूरन आरबीआई के उस फंड से पैसा निकालना पड़ा, जो युद्ध के समय भी देश ने नही निकाला था।
फिर हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी की घोषणा के मुताबिक़ ये 20 लाख करोड़ के पैकेज का पैसा आएगा कहां से? सरकार के पास इतना पैसा तो है ही नहीं। इसका दसवाँ भाग यानी लगभग दो लाख करोड़ तो इन्होंने आरबीआई से झपटकर लिया था।
मुझे नहीं मालूम कि बीस लाख करोड़ का भारीभरकम पैकेज आएगा कहां से? पीएम ने कहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसकी घोषणा करेंगी। नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन के बाद सरकार का राजस्व बहुत ही ज़्यादा कम हुआ है। खर्चे चलाने के लाले हैं। फिर इतनी बड़ी रक़म सरकार कहा से लाएगी और इसके लिए क्या मास्टरप्लान है, ये रहस्य-रोमांच से भरा हुआ है।
अगर मेरी मित्र सूची में कोई अर्थशास्त्री या वित्त मामलों के विशेषज्ञ हों तो कृपया मेरा और फ़ेसबुक की जनता का ज्ञानवर्धन करें।
धन्यवाद.
मेरी टीआरपी दिमाग़ वाला प्रोड्यूसर तो टीभी पर एक स्पेशल आधे घंटे का प्रोग्राम प्लान कर चुका है
" 20 लाख करोड़ का रहस्य, खुल जा सिमसिम, हटा दे तिलिस्म, कैसे आएगी अर्थव्यवस्था में जान, कैसे बचेगा जिस्म "
9 hrs · Public
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प्रधानमंत्री का 8 बजे वाला भाषण सुनने से पहले पीएम केयर फंड के पीछे की इस कहानी को पढ़ जाना...
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तमाम जानकारों का कहना है कि PM Care फंड ट्रांसपेरेंट नहीं है, इसकी जांच CAG नहीं कर सकता। जैसा कि खुद सरकार ने एक RTI के जबाव में साफ भी कर दिया है। RTI में कैग ने स्वयं कहा है कि हमें PM Care जांच करने का अधिकार नहीं है। अब आपके मन में आया होगा कि कैग से जांच होना ही क्यों जरूरी है, और आखिर ये कैग किस बला का नाम है। दरअसल कैग ( Comptroller and Auditor General of India) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के द्वारा नियुक्त ऐसी न्यूट्रल संस्था होती है जो सरकारी खर्चे का लेखा-जोखा रखती है, कि कहाँ-कहाँ गड़बड़ हुई, कहाँ कितना पैसा खर्च हुआ, कैग इन्हीं सबका हिसाब रखती है, ऑडिट रखती है। कांग्रेस सरकार के समय कुछ कथित घोटाले भी कैग की जांच के बाद ही सामने आए थे। हालांकि उनमें से एकाध मामला बाद में कोर्ट में गलत भी पाया गया। लेकिन आप इस उदाहरण से अंदाजा लगा सकते हैं कि यदि कैग के रूप में नियुक्त व्यक्ति की मंशा सही हो तो कैग कितनी शक्तिशाली स्वतंत्र संस्था के रूप में काम कर सकती है।
अब आते हैं कि PM cares पर, इस फंड की जांच को लेकर सरकार का कहना है कि इसकी जांच कैग नहीं कर सकती। लेकिन इसका ऑडिट एक थर्ड पार्टी द्वारा किया जाएगा। अब आपके मन में आया होगा कि ये थर्ड पार्टी ऑडिट टीम क्या बला है? सरकार का कहना है कि PM Care फंड के जो ट्रस्टी होंगे वही ऑडिट करने वाले लोगों को नियुक्त करेंगे.
हैं??????????
जिस संस्था की जांच की जानी वह संस्था ही अपने जांचकर्ताओं की नियुक्त करेगी? सीरियसली?
क्या ये हितों का टकराव नहीं है?
इसके भी आगे आपको जानना जरूरी है कि PM Cares के ट्रस्टी कौन होंगे जो इन जांचकर्ताओं को चुनेंगे। PM Care फंड की वेबसाइट पर लिखा हुआ है कि प्रधानमंत्री इस फंड के चेयरमैन होंगे, तीन केबिनेट मंत्री इसके मेम्बर होंगे, तीन केबिनेट मंत्री मतलब, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, और वित्त मंत्री। अब ये सब मेम्बर तीन और अन्य सदस्तों को चुनेंगे जो हेल्थ, रिसर्च, दानकर्ताओं, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल वर्क से जुड़े हुए हो सकते हैं। जैसे हेल्थ से बंदा चाहिए होगा तो संदीप पात्रा है ही, दानकर्ताओं में से एक बंदा चाहिए होगा तो अक्षय कुमार है ही, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में चाहिए तो चमचागिरी करने वाले तमाम रिटायर्ड डीएम और सचिव मिल ही जाने हैं।
कुलमिलाकर ये जो तीन अन्य मेम्बर चुने जाएंगे वे प्रधानमंत्री और अन्य तीन केबिनेट मंत्रियों के चहेते ही होंगे। इन सबको मिलाकर बनता है "PM Care फंड का Trust"।
अब ये ट्रस्ट ही डिसाइड करेगा कि इनके द्वारा खर्च किए गए पैसे को कौन सी संस्था ऑडिट करेगी? यानी कौन सी प्राइवेट, सस्ती सी भक्त टाइप, दो नम्बरी चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्था को पकड़ कर के फंड के खर्चे पर मोहर लगवानी है ये मोदी जी ही तय करेंगे, इससे आपको तो लगेगा कि जांच हो तो रही है। लेकिन उधर सरजी पूरा खेल कर चुके होंगे।
अब आते हैं कि सरकार का क्या तर्क है कि वह क्यों कैग पर ऑडिट न करवाकर प्राइवेट लोगों ऑडिट करवा रही है?
सरकार का कहना है "चूंकि इसमें आने वाला पैसा दान का पैसा है इसलिए इसकी जांच कैग नहीं कर सकता। हमारी मर्जी है जिससे चाहे करवाएंगे"
अब आप थोड़ा आउट ऑफ द बॉक्स चलिए। इसी तरह आपातकाल से सम्बंधित एक और फंड है, 1948 के टाइम से। इसका नाम है प्रधानमंत्री राहत कोष, अंग्रेजी में PM Relief Fund। आपको बता दूं जैसे PM Care में दान का पैसा आता है, बजट से नहीं आता, उसी तरह इसमें भी दान का ही पैसा आता है, बजट से कोई पैसा नहीं आता। इस फंड की जानकारी के सम्बंध में कैग ने बताया है कि वह भी प्रधानमंत्री राहत कोष की जांच नहीं करते। इसका ऑडिट भी थर्ड पार्टी ही करती है। हालांकि करते नहीं हैं इसका मतलब ये नहीं है कि कैग PM Relief Fund की जांच नहीं कर सकती है, कैग के अनुसार कैग जब चाहे सरकार से इस फंड के बारे में पूछ सकती है। जैसे कि उत्तराखंड आपदा के समय कैग ने इस फंड के हिसाब के बारे में पूछा था। कैग के इस बयान की पुष्टि आपको द वायर नाम की अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट पर मिल जाएगी।
इस लिहाज से रिलीफ फंड, PM Care फंड से अधिक ट्रांसपेरेंट है। अब आप एक अफवाह के बारे में भी जान लीजिए। भाजपा के अवैतनिक आईटी सेल द्वारा एक अफवाह फैलाई जा रही है कि PM Care फंड इसलिए बनाया है क्योंकि प्रधानमंत्री रिलीफ फंड कांग्रेस के टाइम बना था, इसलिए इसकी चेयरमैन कांग्रेस की अध्यक्ष होती है। यानी सोनिया गांधी। फंड में से खर्चा बिना सोनिया गांधी की मर्जी के खर्च नहीं किया जा सकता। असल में आईटी सेल का ये दावा भी देशवासियों को भ्रमित करने से अधिक नहीं है। रिलीफ फंड का अध्यक्ष कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री होते हैं। उन्हीं के निर्देशों के आधार फंड से खर्च किया जाता है। इस समय रिलीफ फंड के चैयरमैन सोनिया गांधी नहीं बल्कि अप्रिय प्रधानमंत्री मोदी हैं। उनकी मर्जी के बिना इस फंड से चवन्नी भी खर्च नहीं की जा सकती। इसलिए भाजपा आईटी सेल का दावा हजारों पिछले दावों की तरह इसबार भी झूठा ही निकला है।
द प्रिंट की 4 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री राहत कोष में ऑलरेडी 2200 करोड़ रूपए ऐसे ही पड़े हुए हैं, उनका कोई यूज नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री चाहते तो कोरोना से लड़ाई में उनका उपयोग कर सकते थे, लेकिन मालूम नहीं प्रधानमंत्री ने ऐसा क्यों नहीं किया।
अब अगला सवाल ये कि प्रधानमंत्री के पास पहले से ही, प्रधानमंत्री के नाम का एक आपातकाल कोष था तो फिर प्रधानमंत्री ने एक दूसरा नया कोष क्यों बनाया? और यदि बनाया भी है तो उसकी जांच के लिए प्राइवेट लोगों को रखने की बात क्यों की जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री तो अपने भाषणों में हमेशा "पारदर्शिता" का जिक्र करते हैं। क्या प्रधानमंत्री ने पारदर्शिता के अपने सिद्धांत को महामारी के काल में श्रद्धाजंलि दे दी है?
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अब आते हैं कि क्या सच में PM Care में आया हुआ पैसा, केवल दान किया हुआ पैसा है? उसमें कोई भी सरकारी पैसा नहीं है?
तो अब इसकी हकीकत भी सुनिए।
-फाइनेंसियल एक्सप्रेस की 31 मार्च की एक रिपोर्ट के अनुसार स्टील मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कहने पर स्टील मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली 8 सरकारी कम्पनियों(PSUs) ने 267.55 करोड़ रुपए PM Care फंड में कंट्रीब्यूट किए हैं। ये 8 PSU- SAIL, RINL, NMDC, MOIL, MECON, KIOCL, MSTC, and FSNL आदि हैं।
- फाइनेंसियल एक्सप्रेस की ही 4 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी कम्पनियों ने पीएम केयर फंड में करीब 2500 करोड़ रुपए से अधिक पैसे कॉन्ट्रिब्यूशन करने का निर्णय लिया है।
ऐसे ही अंग्रेजी वेबसाइट द प्रिंट की 4 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार PM Care फंड में करीब 500 करोड़ रूपए से अधिक पैसे देश की सेना, नेवी, एयरफोर्स, डिफेंस की सरकारी कंपनियों और रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों से आए हैं।
अंग्रेजी अखबार द हिन्दू बिजनेस लाइन की 31 मार्च की खबर के अनुसार Ministries of Power & MNRE ने PM Care फंड में 925 करोड़ रूपए देने का निर्णय लिया है। ये लिस्ट बहुत लंबी है, इतनी लंबी की आप ये पोस्ट बीच में ही छोड़कर चले जाएंगे। लाखों सरकारी कर्मचारियों का वेतन काटकर उसे दान का नाम दे दिया गया है। बड़े ही शातिर तरीके से प्रधानमंत्री के इस निजी कोष में जमा करवा दिया गया है।
द वायर पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ने सभी कर्मचारियों से पैसे तो लिए प्रधानमंत्री रिलीफ फंड के नाम पर और दान कर दिए PM Care फंड में। जिसकी शिकायत दिल्ली विश्वविद्यालय की टीचर्स एसोसिएशन ने की है।
ये कोई छोटी मोटी रकम नहीं है। हजारों करोड़ की रकम है। ये आपका पैसा है, आपके प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष करों का पैसा है। सरकारी कम्पनियों का पैसा, किसी पार्टी का पैसा नहीं होता, वह प्रधानमंत्री और उसके मंत्रियों का पैसा भी नहीं होता। वह जनता का पैसा है। और जनता के पैसे की जांच प्रायवेट हाथों में नहीं दी जा सकती। उसकी जांच उसी तरीके से की जा सकती है जिस तरह से संविधान में वर्णित है।
संविधान के अनुच्छेद 148 में बाकायदा CAG संस्था का जिक्र है। जो सरकारी पैसे का लेखा जोखा करती है, जो ये नजर रखती है कि कुछ भी गड़बड़ तो नहीं हुई है। PM Care फंड में हजारों करोड़ रुपया मंत्रालयों, PSUs और सरकारी कर्मचारियों के वेतन का लगा हुआ है। इसका ऑडिट प्राइवेट हाथों द्वारा कैसे किया जा सकता है? PM Care फंड में संकट के समय देश के नाम पर हजारों करोड़ रुपया लिया गया है। हजारों कम्पनियों ने मन भर के दान दिया है, सरकारी पैसा भी लगा है। प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि इसकी स्वतंत्र जांच हो ताकि भविष्य में संकट के समय इसी तरह लोग खुलकर दान कर पाएं। किसी भी तरह का घपला सरकार को विश्वसनियता को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि देश के सामान्य जन संकट के समय मदद करना बंद कर देंगे। इससे एक गलत परिपाटी का जन्म होगा जो भविष्य में देश के लिए घातक साबित हो सकती है।
प्रधानमंत्री तमाम मंचों से ट्रांसपेरेंसी की बात करते हैं। फिर इस मामले में गड़बड़ी क्यों कर रहे हैं? कायदा से प्रधानमंत्री को कैग को ही और अधिक उत्तरदायित्व और पारदर्शी बनाना चाहिए था, लेकिन प्रधानमंत्री ने तो उल्टा कैग से कैग का काम ही छीन लिया। ये सरासर भ्रष्टाचार है, अनैतिक है। संकट के इस समय में प्रधानमंत्री को इतनी असंवेदनशीलता नहीं दिखानी चाहिए थी।
13 hrs · Public
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गोदिमीडिया बता रहा है कि मोदी आज रात 8 बजे न्यू इंडिया बना देंगे..भारत आज ही कोरोना मुक्त होगा..मोदी और गोदिमीडिया को खुली चुनौती और कुछ सवाल..
- जब लॉकडाउन शुरू हुआ तब क्या मोदी को मजदूरों के बारे में कुछ पता नही था?
- करोड़ो मजदूर जब पैदल चलने लगे तब होश आया? कौन से नशे में था मोदी?
- लाठीचार्ज किया, मजदूरों के लिए बस की फ़र्ज़ी कहानी सुनाई गई..पर हवाई जहाज और AC बस चालू रही..
● पैकेज में मजदूरों के लिए कुछ नही था
● बिना राशन कार्ड अनाज नही दिया गया
● केंद्र ने कम्युनिटी किचन नही बनाऐ
● फ़ूड सिक्योरिटी एक्ट लागू नही किया
● राज्यो को मार्केट भाव अनाज लेने बोला
● 7500₹ कैश ट्रांसफर को मना कर दिया
● मजदूर रोड पर मर गए..क्या किया?
● महिलाओं ने रोड पर बच्चे जन्मे !!
● ट्रेन से कट कर मर गए मजदूर..क्या दिया?
● फर्ज़ी कहानी बनाई गई कि केंद्र रेल का 85% दे रही है..ये असल मे मालिको के दबाव मजदूरों को बंधक बनाने का प्लान था..
गुजरात मजदूरों पर अत्याचार, शोषण और लूट का मुख्य केंद्र बन चुका है..किसी मीडिया की हैसियत नही की गुजरात पर बात करे..वैसे ही मोदी की हैसियत ही नही की मजदूरों के लिए कुछ करे..
आपकी आने वाली नस्ल की बर्बादी का ऐलान हो चुका है.. #राहुलगांधी #प्रियंकागांधी #aicc #krishnaniyer
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Big Breaking
अभी-अभी गुजरात राज्य के कानून मंत्री Bhupendra sinh Chudasama के विधानसभा चुनाव को गुजरात हाईकोर्ट ने Null and void कर दिया है। सादा भाषा में कहूँ तो भाजपा मंत्री की 2017 विधानसभा चुनाव में मिली जीत, न्यायालय में इलीगल पाई गई है। गुजरात राज्य के न्यायाधीश परेश उपाध्याय ने 73 वी सुनवाई में भाजपा मंत्री के इस चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया है। ध्यातव्य है कि 2017 विधानसभा चुनाव में वोट काउंटिंग में समय प्रशासन के साथ घपलेबाजी करके भूपेंद्र को 429 वोटों के साथ जीत मिली थी। सामने कांग्रेस के प्रत्याशी अश्विन राठौड़ थे जोकि ओबीसी वर्ग से आते हैं और पेशे से किसान हैं। अश्विन ने बीते तीन सालों में एक भी हियरिंग नहीं छोड़ी और अंत में जीत कांग्रेस प्रत्याशी अश्विन की ही हुई है।
बताइए भाजपा के कानून मंत्री ही न्यायालय में इलीगल पाए जा रहे हैं, उस राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति क्या होगी। प्रशासन और मंत्री ही मिलकर चुनाव तय कर लें। फिर जनता पर वोट किसलिए डलवाते हैं?
क्या पूरा गुजरात इलेक्शन ही, इस तरह की घपलेबाजी करके जीता गया है? माना जाता है भूपेंद्र गुजरात राज्य में दूसरे नम्बर के मंत्री हैं। क्या ये सब बिना प्रधानमंत्री की नजरों से गुजर कर हो रहा होगा? मुझे 2019 के लोकसभा इलेक्शन के नतीजों को लेकर भी शक हो रहा है। प्रधानमंत्री को पूरे गुजरात एलेक्शन की दोबारा से जांच करवानी चाहिए।
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आर्थिक पैकेज पर जरा सा रुकिए..वैसे ये घोषणा कांग्रेस और राहुल गांधी के सरकार पर निरन्तर दबाव की जीत है..राहुल गांधी के साथ बात करते हुए डॉ राजन और डॉ अभिजीत ने 10% जीडीपी पैकेज की मांग की थी..
पर पिछले 1.70 लाख करोड़ के पैकेज में देश ने फर्जीवाड़ा देखा है..पुरानी योजनाओं और राज्य के 90 हजार करोड़ को मोदी ने पैकेज में शामिल कर लिया था..
पैकेज के लिए पैसों की व्यवस्था और पैकेज के ब्रेकअप पर ध्यान देना जरूरी है..बिहार में 1.25 लाख करोड़ पैकेज का फर्जीवाड़ा देश भुला नही है..
बाकी तो आत्ममुग्धता में पोलिओ को भी खुद की सफलता बता गया..ऐसा लगा कि आत्मनिर्भरता के लिए कोरोना का इंतजार हो रहा था..अभी नजर सिर्फ पैकेज के ब्रेकअप पर रहेगी.. #राहुलगांधी #प्रियंकागांधी #aicc #krishnaniyer
10 hrs · Public
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कितने कम सवाल हैं तुम्हारे पास मां
वह पूछती ही कितना है। खाना खा लिया, ठीक से मिल गया था न। काम ज्यादा है तो बीच-बीच में आराम करते रहना। वीडियो कॉल पर देखा आंखें बहुत अंदर नजर आ रही है। इतना दुबला क्यों लग रहा है। नींद नहीं हो रही है क्या ठीक से। किसी बात की ज्यादा चिंता मत करना। जो होगा देख लेंगे। किसी बात की परेशानी नहीं है, बस अपना ख्याल रखना। बचपन से ऐसे ही तीन-चार सवाल हैं। जो मुझ पर सफेदी की परत चढ़ने तक बदस्तूर जारी है। क्या पता वह और सवाल नहीं जानती या उसे पूछना नहीं आता। या फिर इन सवालों के अलावा वह कुछ पूछना नहीं चाहती। उसके लिए पूरी दुनिया के सवालों में से बस उतने ही सवाल काफी हैं जो बता दे कि मैं ठीक हूं। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं जानना चाहती। उसे किसी और जानकारी से कोई मतलब नहीं है।
जबकि मैं जानता हूं वह कितना कुछ कहती आई है, बताती रही है। मैं कितना सुनता रहा, कितना अनसुना करता रहा। घर से निकलते वक्त मां ने कहा था कि भूखे मत रहना। रास्ते में रुककर कुछ खा लेना। साथ में पराठे, चटनी-अचार और आलू की सब्जी भी बांधी थी। मैं चिढ़ा भी कि अचार मत रखा करो तेल निकल आता है। बैग, कपड़े, कागज सब खराब हो जाते हैं। फिर साफ भी नहीं होता। जवाब में मां सिर्फ हंस दी थी। कपड़ों और बैग से ज्यादा उसे इस बात की चिंता थी कि लंबे सफर में सब्जी गड़बड़ हुई तो भी अचार काम आ जाएगा।
घर से निकलते ही मैं एक दुकान पर रुका, कुछ चिप्स के पैकेट, नमकीन भी बैग में ठूंस लिए। बड़ा खराब लगता था ट्रेन में छह लोगों के बीच टिफिन खोलकर बैठ जाना। या फिर मुंह छुपाकर इधर-उधर देखते हुए खाते रहना। चिप्स खाते हुए मुंह से आती आवाज में दिलफेंक क्रंच है, किक है, मां के टिफिन का देशीपन 70 के दशक की फिल्मों की याद दिलाता है। जिस पर अब सिर्फ हंसी आती है कि बेटा मैंने तेरे लिए गाजर का हलवा बनाया है।
स्कूल जाते वक्त भी टिफिन ठीक से खाना, लड़ाई मत करना, टीचर जो पढ़ाए उस पर ध्यान देना। और भी न जाने क्या-क्या। मगर स्कूल तो स्कूल ही था। दोस्त थे तो दुश्मन भी। लड़ाई करते नहीं थे हो जाती थी। कभी मेरी बेंच पर कोई बैठ जाता, कभी मेरे दोस्त से कोई भिड़ लेता। टिफिन का खाना अच्छा लगता था, लेकिन बाहर जो जाम, बोर, इमली और उनके साथ चटपटा मसाला मिलता था, उसका क्या करते। टीचर तो रोज ही पढ़ाते थे, लेकिन दूरदर्शन पर फौजी तो बुधवार को ही आता था न। इसलिए उसकी बातें शुरू होती तो फिर रुकती कहां थी। फिर किताब के पन्नों के आखिरी नंबर से क्रिकेट भी तो खेलना होता था। पन्ने घूमाते और जहां रुकता, उसका आखिरी अंक सामने वाले के रन हो जाते।
परीक्षा के दिनों में तो जैसे उसे न जाने क्या हो जाता। पूरे समय नजर रखती। पढ़ रहा हूं या नहीं, कहीं इधर-उधर ध्यान तो नहीं है। आईएमपी के चक्कर में तो नहीं लगा हूं। दोस्तों के साथ पढ़ाई के दौरान किस तरह की बातें चल रही हैं। कितनी बजे उठे, कितनी बजे सोए, कितनी पढ़ाई की। टेस्ट के नंबर कितने आए, आगे कौन-पीछे कौन। उम्र बढ़ी तो नजर और पैनी हो गई। कब कौन से गाने सुन रहा हूं। गुनगुना रहा हूं।
खिड़की पर कितनी खड़ा हूं और कितनी देर से ओटले से नहीं हटा हूं। कौन दोस्त आए, उनसे किस तरह की बात हुई। कौन सी बात थी, जो उनके कमरे में आते ही बंद हो गई। सारा हिसाब जितना मुझे पता था, उतना ही उन्हें भी बिना बताए पता चल जाता। इसका राज क्या था यह आजतक समझ ही नहीं आया। कब मेरे दोस्तों से बात करती, कब टीचर से मिलने पहुंच जाती। चिढ़ भी जाता कि क्या जासूसों की तरह नजर रखती हो, वे बस हंस देती। स्कूल छूटा, कॉलेज पूरा हुआ, नौकरी में पहुंचे तब भी मां की हिदायतें उतनी ही थी, वैसी ही हैं। गिनती के उन सवालों के बीच मैंने जरूर एक सफर पूरा कर लिया है। सफर अपनी समझ का, सफर दुनियादारी का।
और जो सवाल तब मुझे झुंझलाते थे, अब मैं उन्हीं सवालों के सिरहाने रोज रात को सोना चाहता हूं। अब जब किसी सफर पर होता हूं तो टिफिन खोलते हुए अपने बैग पर चटनी की खुशबू और अचार के तेल-हल्दी वाले दाग से ज्यादा उन सवालों को मिस करता हूं। कभी सोचता हूं कि पूरी जिंदगी को एक बार रिवाइंड कर दूं और फिर मां के उन्हीं सवालों से इसे शुरू करूं। इस मदर्स डे मैं मां को उनके वही सवाल गिफ्ट करना चाहता हूं।
#अमितमंडलोई #मदर्सडे #मांकेसवाल #मांकीदुनिया फोटो गूगल
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जो लोग मुझे अपनी मित्र सूची में शामिल करना चाहते हैं, वे अगर
पहाड़, फूल, बादल, नदी, चिड़िया, तोता, मैना, शेर, बब्बर शेर, बन्दर, चिंपैंजी, भारत माता, गाय, बैल, सैनिक, सेना, इंडिया गेट, जामा मस्जिद, प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, मायावती, ममता बनर्जी, सुंदर कन्या, मैंचो मैन, फिल्मी सितारे, वारे-न्यारे, आदि-इत्यादि
के फोटुक अपनी प्रोफाइल पिक में लगाएंगे तो उन्हें तुरन्त मैं फर्जी प्रोफाइल घोषित कर देता हूँ। अब सोशल मीडिया वो जगह नहीं रही कि आप चेहरा छुपाकर दोस्ती गांठने चलें। या तो आप खुद को बहुत चालाक समझते हैं या सामने वाले को महा-मूर्ख। बिना चेहरा दिखाए दोस्ती नहीं हो सकती। अभी हाल ही में एक -सुंदर- बालक पकड़ा गया, जो एक -कुरूप- कन्या की प्रोफाइल पिक लगाकर फेसबुक पर टहल रहा था और उसके 10 हज़ार फॉलोवर्स थे। इस देश की जनता भोली है, मैं नहीं, इसलिए मुझे झांसा देने की कोशिश ना करें। ऐसे फर्जी लोगों को सीधे उल्टा टांग देता हूँ।
बीच-बीच में अपनी मित्र सूची के लोगों को भी टटोलता रहता हूँ। अगर वहां भी संदेहास्पद गतिविधि दिखती है तो सीधे unfriend करता हूँ। सोशल मीडिया पे अपनी मर्ज़ी से हूँ, इसलिए यहां मैं किसी को झेलूँगा नहीं। चाहे वास्तविक दुनिया में वह मेरा कितना भी अजीज़ और प्रिय क्यों ना हो! ये सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का मेरा उसूल है। ये पब्लिक प्लेटफॉर्म है, इसलिए यहां अनुशासन की सख्त जरूरत है। अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आप fake news, गंदगी और नफरत फैलाएंगे, इसकी इजाजत अपनी वॉल पे मैँ नहीं देता। आप अपनी वॉल पे भी अगर रोबॉट की तरह समाज को तोड़ने वाली पोस्ट डालेंगे, तो भी मैं आपको हटा दूंगा अपनी मित्र सूची से।
इस दुनिया में पहले ही बहुत सारे टेंशन हैं, सो सोशल मीडिया का बेवजह तनाव मैं नहीं लेता। हां, अगर आप मेरी बात से इत्तेफाक नहीं रखते और वो आपको चुभती हैं तो आप बेशक खुद को मुझसे अलग कर लें। चॉइस आपकी है। मित्र कम हों या एक भी ना हों, मुझे फर्क नहीं पड़ता। इस दुनिया में अकेला आया था और अकेला जाऊंगा। किस्मत रही तो चार आदमी कांधा दे ही देंगे मेरी अंतिम यात्रा को। वैसे मैं यारों का यार हूँ और दुश्मनों का दुश्मन। मुझ जैसा दोस्त और मुझसे खतरनाक शत्रु आपको नहीं मिलेगा। जो मुझे नज़दीक से जानते हैं, उनको पता है कि अपना नुकसान करके दोस्ती का हक अदा किया है।
दुनियादारी का शिष्टाचार निभाने में यकीन नहीं रखता। अगर आप मित्र हैं और गलत करेंगे तो आपको टोकूंगा। इस दुनिया में दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता है, जिसे आप अपनी मर्जी से चुनते हैं। बीवी और शौहर तक मां-बाप चुन लें आते हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं। सो दोस्त कम रखिये, पर अच्छे रखिये। फेसबुक भी आपको ये चॉइस देता है। फेसबुक कहने को आभासी दुनिया ज़रूर है पर यहां सबकुछ real यानी वास्तविक होता है। ऐसे माध्यम में दोस्तों का चुनाव सावधानीपूर्वक करें। मैं करता हूँ।
धन्यवाद।
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ऋषि कपूर की मौत के बाद उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने वाले ये लोग कौन थे !
ऋषि कपूर की मौत के बाद उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने वाले ये लोग कौन थे !
Nadim Akhter 23:50
"हरदिलअजीज और हंसमुख चिंटू के इस दुनिया से
जाने के बाद कल सोशल मीडिया पर उनके
ख़िलाफ़ एक Hate Campaign चला। ये लोग
स्वर्गीय ऋषि कपूर पर डोमेस्टिक वॉयलेंस से
लेकर तमाम तरह के आरोप लगा उन्हें बुरा इंसान
बताने की मुहिम चला रहे थे। इनमें कुछ पत्रकार
भी शामिल थे "
Nadim S. Akhter 1 May 2020
बहुत अफसोस की बात है कि कल अभिनेता ऋषि
कपूर की मौत के बाद कुछ लोगों ने सोशल
मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ लिखा और कैम्पने
चलाने की कोशिश की। ये लोग स्वर्गीय ऋषि
कपूर पर डोमेस्टिक वॉयलेंस से लेकर तमाम तरह के
आरोप लगा उन्हें बुरा इंसान बताने की मुहिम चला
रहे थे। इनमें कुछ पत्रकार भी थे। पहले ऋषि साब पर
लगे सारे आरोप गिना देता हूँ, फिर बारी-बारी से
उन सबका जवाब भी दूंगा।
ऋषि साहब पर पहला आरोप डोमेस्टिक वॉयलेंस
यानी घरेलू हिंसा का है जो ज़ाहिर है, उनकी
पत्नी नीतू कपूर के कंधे पर बंदूक़ रखकर लगाया
गया। इसमें कुछ ख़बरों का हवाला देकर ये बताया
गया कि कैसे नीतू कपूर ने ऋषि कपूर के ख़िलाफ़
डोमेस्टिक वॉयलेंस का केस किया था। फिर
अपुष्ट सूत्रों के हवाले से ये बताया कि नीतू कपूर,
उसके बाद ऋषि का घर छोड़कर चली गई थीं और
आजीविका के लिए सैलून तक चलाया।
ऋषि कपूर पर दूसरा ये लगा कि वे Child pornography को बढ़ावा देने वाले इंसान थे और इस
बाबत मुंबई के एक एनजीओ ‘जय हो फाउंडेशन’ ने
उनके खिलाफ एक केस भी दर्ज कराया था। यह
केस Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत था।
तीसरा आरोप ऋषि कपूर पर ये लगाया गया कि
वह महिलाओं का सम्मान नहीं करते थे और उनके
बारे में अनाप-शनाप ट्वीट कर देते थे। इसमें उनके दो
ट्वीट का हवाला दिया गया। इसमें ऋषि जी के
उस ट्वीट का हवाला दिया जा रहा था, जब
भारतीय महिला क्रिकेट टीम लॉर्ड्स में विश्व
कप का फ़ाइनल इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेल रही थी।
तब ऋषि कपूर ने जो ट्वीट किया था, वो मैं नीचे
कॉपी-पेस्ट कर रहा हूँ।
“Waiting for a repeat of Sourav Ganguly’s act on the balcony of The Lords Ground, London, when India beat England 2002 NatWest series final! YO.”
बहुत ही चालाकी से इस ट्वीट का मतलब भाई
लोगों ने ये बताया कि ऋषि कपूर चाहते थे कि
भारतीय महिला टीम भी मैच जीतने के बाद
बालकनी में आकर सौरव गांगुली की तरह अपना
टीशर्ट निकाले और हवा में लहराए। उस वक़्त इस
ट्वीट के बाद ऋषि कपूर को ट्विटर पर काफ़ी
भला-बुरा कहा गया।
उनका दूसरे ट्वीट का जिक्र सेलिब्रिटी किम
करदाशियां को लेकर था, जिसमें ऋषि कपूर ने
सोशल मीडिया पर किम पे बने एक वायरल मेमे को
शेयर किया था। इसमें किम के कपड़ों की तुलना
बोरी में बंद प्याज़ से की गई थी। इस मेमे को शेयर
करते हुए ऋषि ने लिखा था- Onions in a mesh bag!
तो इन सारे आरोपों की खिचड़ी ऐसी पकाई गई
कि अच्छे-अच्छे लोगों को हमने ये लिखते देखा कि
ऋषि कपूर को श्रद्धांजलि देने से पहले ये देख लो
कि वह कितने निम्न स्तर के इंसान थे। किसी के
मरने के बाद उसके पाप कम हो जाते हैं क्या ? ऐसी
तमाम बातें तथाकथित बुद्धिजीवियों ने लिखीं।
ये सब देखकर मेरा दिल बैठ गया। सोचा, वहीं
उनको जवाब दूँ पर खून का घूँट पीकर रह गया। फिर
विचार बनाया कि कलम का जवाब कलम से ही
दूँगा। वो भी मुंहतोड़।
तो सबसे पहले ऋषि कपूर के लिए नफरत बो रहे
विद्वानों के पहले आरोप का जवाब।
डोेमेस्टिक वायलेंस के आरोप का बुलबुला
तो ऐसा है बंधुओं ! अगर पत्रकार हो तो ख़बर को
कन्फर्म भी करना सीखो। आरोप तो कोई किसी
पर, कुछ भी लगा सकता है। मुझे नीतू कपूर द्वारा
डोमेस्टिक वॉयलेंस का केस करने संबंधी जो भी
ख़बर इंटरनेट पर दिखी, वह सब अटकलों पर
आधारित थी। माना जाता है, बताया जाता है
टाइप। अरे पुलिस में केस हुआ है तो जाकर थानेदार
से वर्जन लाओ ना ! लिखो तो पुलिस क्या बोल
रही है? लेकिन घरेलू हिंसा के आरोप वाली किसी
भी ख़बर में मुझे पुलिस का कोई कन्फर्मेशन नज़र
नहीं आया। यानी ख़बर या तो हवाहवाई थी या
डेस्क पर बैठ सपने में लिखी गई थी।
अब दूसरा पहलू। भई, मियाँ-बीवी के बीच झगड़े
किस घर में नहीं होते। हो सकता है कि ऋषि कपूर
के वैवाहिक जीवन में भी कुछ अनबन हुई हो। बात
थाना-पुलिस तक भी पहुँची हो पर इससे आप ऋषि
कपूर को नारी विरोधी कैसे बता सकते हैं ? नीतू
जी के साथ वह अपना भरापूरा परिवार छोड़ गए
हैं। इसलिए कोई मूर्ख ही इस तरह के आरोप लगाकर
एक दिवंगत आत्मा को बदनाम कर सकता है।
वैसे आपकी जानकारी के लिए ये बता दूँ कि
ख़ुद ऋषि कपूर ने अपनी किताब ‘खुल्लमखुल्ला’
में लिखा है कि शादी के बाद अपनी फ़्लॉप
होती फ़िल्मों की वजह से वह डिप्रेशन में जाने
लगे थे और इसके लिए नीतू कपूर को ज़िम्मेदार
ठहराने लगे थे। तब नीतू कपूर प्रेग्नेंट थीं। बाद में
ऋषि कपूर को इस बात का बहुत मलाल हुआ कि
उनकी वजह से उस वक़्त नीतू जी किस कदर
मानसिक दबाव में रही होंगी। ऋषि कपूर ने इस
किताब में अपनी ज़िंदगी की कोई बात उन्होंने
छुपाई नहीं। सब खुलकर बता दिया है। सो घरेलू
हिंसा का आरोप भी कहीं टिकता नहीं।
अब आते हैं दूसरे आरोप में, जिसमें मुंबई के जय हो
फाउंडेशन नामक एक एनजीओ ने लाइमलाइट में आने
के लिए ऋषि कपूर पर Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत मुकदमा दर्ज करवा
दिया था। नीचे उस वीडियो का स्क्रीनशॉट दे रहा हूं, जिसे लेकर उन पर ये आरोप लगा था। आप ही देखिए और सोचिए।
दरअसल हुआ ये था कि ऋषि कपूर एक मजाकिया
इंसान भी थे और मजाक-मजाक में सीरियस बात
कह देना उनकी आदत थी। तब गुरमीत राम-रहीम
का मामला गर्म था। इसे लेकर ऋषि साब ने ट्विटर
पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एटीएम जैसी
किसी मशीन के सामने खड़ी एक लड़की को पीछे
से एक छोटा बच्चा छेड़ता है। लड़की जब पीछे
मुड़ती है तो सामने एक बड़ा बच्चा भी खड़ा
होता है। लड़की समझती है कि ये हरकत बड़े बच्चे ने
की है। वह उसे तमाचा जड़ देती है। अब बड़ा बच्चा
लाइन में छोटे बच्चे को आगे कर देता है और ख़ुद पीछे
खड़ा हो जाता है। छोटा बच्चा फिर लड़की को
पीछे से टच करता है तो अबकी बार फिर लड़की
पीछे घूमकर तमाचा बड़े बच्चे को ही मारती है।
यानी करे कोई और भरे कोई।
ऋषि कपूर ने तब अपने ऊपर हुए इस एफआईआर पर
कहा था कि चूँकि वह सेलिब्रिटी हैं, इसलिए उन्हें
टार्गेट किया जा रहा है। वह इस वीडियो के
सहारे लोगों को बताना चाहते हैं कि अपने दिल
की आवाज़ सुनो, ढोंगी बाबाओं की नहीं। इसके
बाद उन्होंने वह ट्वीट डिलीट भी कर दिया। इस
पूरे घटनाक्रम में हुआ ये कि ऋषि कपूर के नाम का
फ़ायदा उठाकर मुंबई का एक अनाम एनजीओ
ख्याति पा गया। यानी दूसरों को बदनाम करके
ख़ुद का नाम हो गया। और पब्लिक के लिये ये हुआ
कि खाया पिया कुछ नहीं और गिलास फोड़ा
बारह आने का। मुझे व्यकितगत तौर पर उस
वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखा कि चाइल्ड
पोर्नोग्राफी टाइप कोई मामला बने। एक ह्यूमर
का वीडियो था, जिसे लेकर एनजीओ अपनी
दुकानदारी चमकाने थाने पहुँच गया।
चलिए, अब चलते हैं तीसरे आरोप पर कि ऋषि जी
महिला विरोधी थे और महिलाओं का सम्मान
नहीं करते थे। वह मैच जीतने पर महिला क्रिकेट टीम
से भी सौरव गांगुली जैसे व्यवहार की अपेक्षा
करते थे। यानी शर्ट उतारने वाली बात। तो ट्विटर
पर मूर्ख लोगों को कौन समझा सकता है भाई?
बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं कि जब बात समझ ना आए, तो
इंसान को चोंच बंद रखनी चाहिए। पर भारत में सब
चोंच फाड़ने वाले ही हैं। जरा देखिए, मरहूम ऋषि
साब ने क्या ट्वीट किया था- “Waiting for a repeat of Sourav Ganguly’s act on the balcony of The Lords Ground, London, when India beat England 2002 NatWest series final! YO.”
अगर अंग्रेज़ी ना आती हो तो इसका ट्रांसलेशन ये
है कि लॉर्ड्स ग्राउंड की बालकनी में सौरव
गांगुली जैसे करतब की प्रतीक्षा है। यहाँ ऋषि
जी ने कहां लिखा है कि महिला खिलाड़ी
अपनी शर्ट उतारकर हवा में लहराएं ? अगर भाव
आपको समझ नहीं आया, तो इसमें ऋषि जी की
क्या गलती थी? वह तो अपनी महिला क्रिकेट
टीम से इंग्लैंड को हराकर एक धाँसू विजयघोष की
उम्मीद कर रहे थे। इसका तरीक़ा कुछ भी हो
सकता था। पर नहीं। भाई लोगों को बाल की
खाल निकालने की आदत होती है। सो ना आगे
देखा, ना पीछा, ना कौआ और ना अपना कान,
बस दौड़ पड़े कौए के पीछे कि मेरा कान ले गया,
मेरा कान ले गया कौआ… ! वही मूर्ख लोग, जो तब
ऋषि जी का ट्वीट नहीं समझ पाए थे, आज उनकी
मौत के बाद पुराने गड़े मुर्दे निकालकर सोशल
मीडिया पर बदबू फैला रहे थे। एक सभ्य समाज को
ये सब शोभा देता है क्या ?
रही किम करदाशियां पर बने मेमे को ट्वीट करने
की बात तो सिम्पल लॉजिक है गुरु। ऋषि कपूर
फ़ैशन आइकन रहे थे। उन्हें इसकी समझ थी। सो किम
के कपड़ों के डिज़ाइन की तुलना जब बोरी में बंद
प्याज़ से करने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर
वायरल हुई तो बतौर एक यूज़र उन्होंने भी हास-
परिहास के अंदाज में इसे शेयर कर दिया। क्या हम
बातचीत में कभी-कभी अपनी महिला मित्रों,
यहाँ तक कि घर की महिलाओं से भी ये नहीं कह देते
कि आज सुग्गे यानी तोते जैसी ड्रेस क्यों पहनी
हो ? सो बाल-बच्चेदार और जिम्मेदार बुजुर्ग ऋषि
कपूर भी जब ऐसी ही कोई तस्वीर शेयर कर देते हैं
तो इसमें महिलाओं का अपमान कैसे हुआ
मूर्खाधिराज महाराज !! या तो गंदगी आपके
दिमाग़ में है या फिर आप ग्लास को हमेशा आधा
ख़ाली देखते हैं। ग्लास को आधा भरा हुआ देखने
की भी आदत डाल लीजिए। ज़िंदगी ख़ुशगवार
गुजरेगी।
एक बात और। ना मैं स्वर्गीय ऋषि कपूर साहब
का प्रवक्ता हूँ और ना ही कोई समाज
सुधारक। बस, सही को सही और ग़लत को ग़लत
कहना मुझे आता है। आप लोगों को शर्म नहीं आई
कि एक बुजुर्ग एक्टर, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से
भारतीय सिनेमा को इतना कुछ दिया, जिन्होंने
अपनी फ़िल्मों से आपकी ज़िंदगी के कई अनुभवों
को जीवंत कर दिया, जो जीवन भर सच के साथ
खड़ा रहा और कभी ये परवाह नहीं की कि सत्ता
या समाज या दोस्त-यार क्या बोलेंगे, बेबाक़ और
बेलाग तरीक़े से सार्वजनिक मंच पर अपनी बात
रखी, उस बुजुर्ग के इस दुनिया से जाने के बाद इतनी
नीचता पर उतर आए आप लोग !! धिक्कार है। जो
लोग कल बड़े पाक-साफ बनकर ऋषि कपूर पर सोशल
मीडिया पे इल्ज़ाम लगा रहे थे, उनसे यही कहूँगा
कि बॉस! पहला पत्थर वो मारे, जो पापी ना हो।
जिगर चाहिए सच बोलने के लिए।
ऋषि कपूर तो ऐसे इंसान थे, जिन्होंने अपनी
ज़िंदगी को खुली किताब बनाकर जनता के बीच
उछाल दिया। अपनी यादों को समेटते हुए किताब ‘खुल्लमखुल्ला’ में ये भी बता दिया कि उनके पिता
स्वर्गीय राजकपूर साहब का मरहूम नरगिस जी और
बैजयंतीमाला जी से अफ़ेयर था। एक वक़्त था जब
अवॉर्ड के लिए उन्होंने पैसे दिए थे, ये भी कबूला।
अब बोलिए, जो इंसान इतनी ईमानदारी से अपने
परिवार और ज़िंदगी के राज बता रहा हो, वह
क्या छिपाएगा हमसे ? जो कुछ छुपा था, सब
ज़ाहिर तो कर दिया उन्होंने अपनी किताब में !
और अगर आपमें इतनी बुद्धि नहीं है कि आप उनके
ट्वीट को समझ सकें तो उसका ग़लत इंटरप्रिटेशन
बनाकर उनको बदनाम और ज़लील तो मत करो !
जिस भारतीय संस्कृति की आप दुहाई दे रहे हो, वह
मरने के बाद दुश्मन के बारे में भी अपशब्द नहीं
निकालती क्योंकि तब पाक रूह परमात्मा से जा
मिली होती है और नश्वर शरीर ही जहान में रह
जाता है। सो उस रूह यानी आत्मा का अपमान,
परमात्मा का अपमान माना जाता है। क्या
इत्ती छोटी सी बात आप लोगों को समझ नहीं
आई ? बड़े फ़र्ज़ी आदमी हो यार आपलोग !!
#Nadimkibaat #नदीमकीबात
नोट- ऋषि कपूर साहब पर डोमेस्टिक वॉयलेंस का आरोप लगाने वाली जो दो ख़बरें छपी हैं, उनका लिंक यहाँ दे रहा हूं। आप चाहें तो उसे पढ़ सकते हैं
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इधर कुआँ और उधर खाई में फँस गए हैं पीएम मोदी
इधर कुआँ और उधर खाई में फँस गए हैं पीएम मोदी
Nadim Akhter 02:37
Nadim S. Akhter 12 May 2020
आप कुछ भी कयास लगा लीजिए पर कोई नहीं जानता कि आज पीएम मोदी रात 8 बजे क्या ऐलान करने वाले हैं। महाराष्ट्र और गुजरात जैसे कुछ राज्यों में lockdown बढ़ाना मजबूरी है, कुछ राज्यों में ढील दी जा सकती है। रही रेल और हवाई जहाज़ की बात, तो हो सकता है कि जल्द वो भी खोले जाएं। आखिर इतने मजदूर जो घर वापिस जा रहे हैं, lockdown का पालन तो नहीं ही हो रहा है ना! मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए श्रमिक स्पेशल ट्रेन भी चल रही है और सड़क के रास्ते मजदूर पैदल भी झुंड में घर लौट रहे हैं। पर क्या किया जा सकता है? बिना प्लानिंग के हुए लॉकडाउन में ये स्थिति तो होनी ही थी। जब लॉकडाउन पहली दफा घोषित हुआ तो देश में कोरोना के गिने-चुने घोषित मामले थे, यानी सरकारी आंकड़ों में इनकी संख्या बहुत कम थी। सो अगर उस वक्त एक हफ्ते का वक्त देकर ये कह दिया जाता कि एक सप्ताह बाद देश में लॉकडाउन लागू होगा, जिसे जहां पहुंचना है, चला जाए तो ऐसी स्थिति नहीं होती। सरकार के लिए भी सिरदर्द नहीं होता और गरीब मजदूर भी गांव की अपनी झोपड़ी मे पहुंच चुका होता। कम से कम घर जाते हुए हार्ट अटैक, गर्मी, बीमारी और ट्रेन से कटकर नहीं मरता। पर ऐसा हो ना सका।
अब जब लॉकडाउन-३ चल रहा है और चौथे लॉकडाउन की आशंका जताई जा रही है तो आज रात 8 बजे पूरे देश की निगाहें पीएम मोदी पर होंगी कि उनकी सरकार अजीबोग़रीब स्थिति में फँस चुके देश को इससे बाहर निकालने का क्या रास्ता लेकर आ रही है। क्या लॉकडाउन-4 लागू होगा? या फिर कुछ रियायतों के साथ लॉकडाउन चालू रहेगा? या फिर लॉकडाउन को सीमित करके आर्थिक गतिविधियों को चालू करने की देशव्यापी इजाज़त मिल जाएगी? सवाल कई हैं और जवाब आज रात को देश को मिल जाएगा।
वैसे सोशल मीडिया से लेकर हर जगह ये कयास हैं कि आज रात 8 बजे पीएम मोदी लॉकडाउन को लेकर क्या नई घोषणा करने वाले हैं पर ठीक-ठीक बात किसी को पता नहीं। हर एक्सपर्ट इस पर अपनी राय देता है क्योंकि वह सिर्फ अपने चश्मे से परिस्थितियों को देखता है। मुझे लगता है कि लॉकडाउन को लेकर एक समग्र नजर बनाने की जरूरत है और स्वार्थी ना होकर इस चक्रव्यूह से निकलने की एक कुशल योजना बनाने की दरकार है, तभी 130 करोड़ की आबादी वाला ये विशाल देश कोरोना जैसे सूक्ष्म वायरस से पार पा सकता है, वरना बड़ी मुश्किल होगी।
सो तमाम हालात पर गौर करने के बाद मुझे लगता है कि कुछ रियायतों के साथ lockdown धीरे-धीरे खोलने का ऐलान आज हो सकता है। लेकिन अगर जून-जुलाई में कोरोना के भारत में peak पर रहने की आशंका को देखें और सरकार एक बार फिर अर्थव्यवस्था को किनारे कर सिर्फ कोरोना नियंत्रण पे फोकस करे, तो lockdown बढ़ सकता है, पहले की तरह। फिर वही बात होगी कि जहां कोरोना कंट्रोल में है, वहां ढील दी जाएगी। पर समग्र रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था को इस ढील से कोई फायदा नहीं होने वाला।
इसलिए सरकार अब दोराहे पे खड़ी है। या तो lockdown में तगड़ी ढील देकर छोटे और बड़े उद्योगों को काम करने की इजाज़त दे, असंगठित मजदूर वर्ग को भी दिहाड़ी कमाने की छूट दे, दुकानदारों को कुछ पाबंदियों के साथ दुकानें खोलने की इजाजत दे और सुरक्षा उपायों के साथ पब्लिक को बाजार में टहलने की सुविधा दे या फिर..
कंप्यूटर मॉडल से बताई गई उस भविष्यवाणी को सिरमाथे रखे कि जून-जुलाई के आगामी महीनों में भारत में कोरोना के मामले उच्चतम स्तर पर होंगे। ऐसे में लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करवाए ताकि देश में कोरोना विस्फोट ना हो। सरकार के लिए ये बड़ी दुविधा की स्थिति है। इधर शेर और उधर बब्बर शेर है। क्या किया जाए?
देश की अर्थव्यवस्था पाताल लोक में पहुँच चुकी है। नोटबंदी के बाद वह पहले ही बेहोश थी, अब तो कब्र में है। उद्योग और व्यापार जगत लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए है कि अब लॉकडाउन खोलकर उन्हें छूट दे वरना जो बचा-खुचा रह गया है, वह भी कबाड़ में तब्दील हो जाएगा। वह सरकार से Revival Package भी मांग रहा है ताकि बंद उद्योगों को दुबारा खड़ा कर सके और अपने कर्मचारियों को वेतन दे सके। लेकिन ये सब इतना आसान नहीं है। ये सरकार को भी पता है कि रिवाइवल पैकेज देने के बाद भी उद्योगों के सामने सबसे बड़ा संकट मांग का होगा। बाजार में कैश फ्लो एकदम ठप हो गया है, वह अलग मुसीबत है। हर उद्योग एक-दूसरे से चेन के रूप में बंधा होता है, सो अगर आगे वाला या पीछे वाला काम शुरु नहीं करेगा, तो आप अकेले काम शुरु करके क्या कर लोगे? आपका माल फंस जाएगा। ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिस पर विस्तार से डिस्कशन और योजना बनाने की जरूरत है। दो बूंद जिंदगी की वाला नारा अब उद्योगों के लिए लाना होगा और हर सेक्टर के हर छोटी-बड़ी इकाई की इसे एक साथ पिलाना होगा, तभी बैठ चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था खड़ी हो पाएगी, वरना Great Recession की भविष्यवाणी दुनियाभर में बड़े-बड़े अर्थशास्त्री तो कर ही रहे हैं।
ये सब बिज़नेस की बात आपको इसलिए बताई कि जान सकें के कोरोना ने भारत पर डबल अटैक किया है। एक तो जान का नुक़सान और दूसरा- माल का नुक़सान। एक को बचाओ, तो दूसरे की जान जाती है। बहुत मुश्किल घड़ी है और अब तक तो सरकार ने जान की परवाह की है, माल के नुक़सान को किनारे रखा है। पर अब पानी नाक तक पहुँच गया है। इससे ज़्यादा सरकार अर्थव्यवस्था को इग्नोर नहीं कर सकती। ऐसे में सरकार के पास क्या मास्टर प्लान है, उसी की झलक आज रात 8 बजे पीएम मोदी के संबोधन में आपको दिखेगी। मुझे लगता है कि ये एक रोडमैप होगा कि हमारी सरकार अब किस दिशा में बढ़ना चाह रही है क्योंकि अर्थव्यवस्था का सवाल बहुत बड़ा है।
इसी के मद्देनज़र पिछले कुछ दिनों से पीएम मोदी कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए बैठकें कर चुके हैं और उनकी राय ली है। लेकिन दिक़्क़त ये है कि अपनी-अपनी परेशानी के मुताबिक़ हर राज्य की राय जुदा है। महाराष्ट्र जहां देश में कोरोना के कुल मामलों का क़रीब एक तिहाई मामला है, वहाँ के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लॉकडाउन बढ़ाने को कह रहे हैं और बोल रहे हैं कि इसके अलावा और कोई चारा नहीं। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अनेकानेक कारणों से केंद्र पर हमलावर हैं। पिछली दफ़ा की मीटिंग में उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार कोरोना पर उनकी मदद करने की बजाय confusion बढ़ा रही है। उनका कहना था कि एक तरफ केंद्र, दुकानें खोलने को कहता है तो दूसरी तरफ lockdown भी चाहता है। सो अगर दुकानें खुलेंगी, तो lockdown का पालन कैसे होगा? कल की मीटिंग में उन्होंने फिर केंद्र पर हमला किया और कहा कि केंद्र सरकार, कोरोना के बहाने राजनीति ना करे, राज्य सरकारें अच्छा काम कर रही हैं। भाजपा शासित राज्यों को केंद्र से कोई गिला नहीं और सुना है कि कल की मीटिंग में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्यादा बोलने भी नहीं दिया गया और गृहमंत्री ने उनसे कहा कि वह बस चंद लाइनों में अपनी बात रख दें। उन्होंने वैसा ही किया।
लेकिन गैरबीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शिकायत कर रहे हैं। इनमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी शामिल हैं। वैसे मोदी जी राजस्थान के कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ये कहकर तारीफ़ कह चुके हैं कि कोरोना से निपटने में उन्होंने अच्छा काम किया है। शायद यही वजह रही कि कल यानी सोमवार को पीएम के साथ मुख्यमंत्रियों की जो मीटिंग हुई, उसमें बोलने का सबसे ज़्यादा समय अशोक गहलोत को मिला। ख़बर है कि गहलोत २० मिनट से भी ज़्यादा बोले और सबने उनको सुना। उसके बाद बाक़ी मुख्यमंत्रियों को 5-7 मिनट में ही बात ख़त्म करने को कह दिया गया।
इससे एक बात साफ़ हो रही है कि अबकी बार पीएम मोदी लॉकडाउन को लेकर जो फ़ैसला करेंगे, उसमें सारे मुख्यमंत्रियों की राय का समावेश होगा। आरोप लगते रहे हैं कि पहले लॉकडाउन की घोषणा में पीएम मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रयों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया और एकतरफ़ा तरीक़े से रात में टीवी पर आकर लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। पर आज पीएम मोदी की तक़रीर पहले से जुदा होगी। अब उनके पास देशभर से काफ़ी फ़ीडबैक है, काफ़ी कुछ हो गया है, विशेषज्ञों की राय को आज़मा लिया गया है, उसका नतीजा भी देख लिया गया है और फिर अब आगे के एक्शन की तैयारी है।
सो आख़िर में लाख टके का सवाल फिर वही है। आज पीएम लॉकडाउन को लेकर क्या घोषणा करेंगे? जैसा मैंने ऊपर लिखा है कि इस दफ़ा केंद्र की रणनीति में अर्थव्यवस्था प्रमुख पहलू होगा। सो हो सकता है कि लॉकडाउन में अच्छी-खासी ढील देकर आर्थिक गतिविधियों को चालू करने की इजाज़त मिल जाए। और जिन राज्यों में कोरोना का प्रकोप फैल रहा है, उन राज्यों की सरकारों से कहा जाए कि कोरोना के मामले कम होने पर वे भी अपने यहीं लॉकडाउन इसी तरह खोलें, जैसा केंद्र कह रहा है। सो आप देख लीजिए कि आप किस राज्य में हैं और आपके यहाँ कोरोना की क्या स्थिति है।
अगर आप रेड ज़ोन वाले इलाक़े में हैं तो फ़िलहाल किसी छूट की उम्मीद मत करिए। जो लोग ओरेंज या ग्रीन ज़ोन में हैं, उनके यहाँ बड़ी राहत मिलेगी। आर्थिक कारोबार शुरु हो सकेगा मगर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन आपको हर हाल में, हर जगह करना पड़ेगा। तब तक, जब तक कि कोरोना की वैक्सीन बनकर ना आ जाए। उसके भी कई लफड़े हैं और ये आसान ना होगा। बनाने के बाद भी सबको ये वैक्सीन लग जाए, ये संभव हो नहीं पाएगा। उस पे फिर कभी। अगली पोस्ट में।
धन्यवाद।
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मेरा अनुमान सही निकला, आर्थिक पैकेज भी मिला और लॉकडाउन-4 भी आएगा
मेरा अनुमान सही निकला, आर्थिक पैकेज भी मिला और लॉकडाउन-4 भी आएगा
Nadim Akhter 14:53
Nadim S. Akhter 13 May 2020
पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया, जो हमारी जीडीपी का 10 फ़ीसदी होगा। साथ ही # LockDown4 का ऐलान भी हो गया, जो नए रंग-रूप वाला होगा और इसकी घोषणा 18 मई से पहले हो जाएगी।
पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की ख़ास बात यही रही। पर हमारे प्रधानमंत्री जी ने शुरुआती 17 मिनट तक मुझ जैसे देशभक्त नागरिक को पका दिया। इंटरनेट पर टीवी देखता हूँ और डाटा लिमिटेड है मेरे पास, उसके बाद भी 17 मिनट तक लगातार पीएम को सुनता रहा, इस आशा में कि राष्ट्र के लिए कुछ अच्छी-अच्छी घोषणाएँ होंगी, देशभक्ति का इससे बड़ा सबूत क्या दूँ आपको। खैर !
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना मेरी आदत नहीं पर कल दिन में पीएम के आज के संबोधन के बारे में मैंने जिन बातों का ज़िक्र किया था, मुझे आपको ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पीएम ने ठीक उसी लाइन पर अपनी बात कही।
1. पहली बात। मैंने लिखा था कि देश का उद्योग जगत आर्थिक पैकेज की माँग कर रहा है और ये सरकार भी जानती है कि सिर्फ़ पैकेज देने से काम नहीं चलेगा। अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर को -दो बूँद ज़िंदगी की- मिलनी चाहिए।
पीएम ने क्या कहा- प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि कोरोना के बाद अब तक केंद्र सरकार राहत के लिए जितने भी पैसे दे रही है, उसे मिला दिया जाए तो भारत 20 लाख करोड़ का पैकेज दे रहा है, जो हमारी जीडीपी का 10 फ़ीसदी बैठता है। साथ ही ये पैकेज उद्योग, किसान, मज़दूर, व्यापारी हर वर्ग के लिए होगा और इसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी।
यानी जैसा मैंने दिन में लिखा था- सिर्फ़ उद्योग के लिए पैकेज नहीं, हर वर्ग के लिए पैकेज मिलना चाहिए। दो बूँद ज़िंदगी की सबको चाहिए, पीएम ने ठीक वैसा ही ऐलान किया।
2. दूसरी बात जो हमने लिखी थी कि सरकार के लिए बड़ी दुविधा की स्थिति है। जान भी बचानी है और माल भी सुरक्षित रखना है, सो लॉकडाउन कुछ शर्तों के साथ खुलेगा। अलग-अलग जोन्स के अनुसार छूट मिलेगी और उद्योगों को काम शुरु करने दिया जाएगा वरना अर्थव्यवस्था का पट्टा बैठ जाएगा।
पीएम ने क्या कहा- यहाँ भी अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनते हुए आपको ये बता रहा हूँ कि पीएम ने इसी लाइन पर अपनी बात आगे बढ़ाई। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ लॉकडाउन के सहारे ज़िंदगी नहीं चल सकती। आत्मनिर्भर भारत बनाना होगा, सो लॉकडाउन--4 एक नए रंग-रूप में आएगा। 18 मई के पहले इसका ऐलान कर देंगे।
यानी जैसा मैंने कहा था कि जान के साथ-साथ सरकार माल के लिए भी चिंता करे क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था कब्र में पहुँच चुकी है और लॉकडाउन अब पूरे देश में एकसमान नहीं हो सकता। हर राज्य में इसका स्वरूप अलग-अलग होगा।
3. तीसरी बात जो हमने लिखी थी कि पिछले कई दिनों से पीएम सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं और इस बार उनकी तक़रीर जुदा होगी यानी अबकी बार पीएम सभी की बातों के मद्देनज़र ऐलान करेंगे।
पीएम ने क्या कहा- प्रधानमंत्री मोदी ने भी आज अपने संबोधन में कहा कि वह सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं, सबका फ़ीडबैक मिला है, सो लॉकडाउन-४ उसी के मुताबिक़ नए ढंग वाला होगा।
यानी यहाँ भी मेरा ये अनुमान बिल्कुल सटीक बैठा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सलाह और विशेषज्ञों की बात पर गौर करने के बाद ही लॉकडाउन-4 का ऐलान किया जाएगा। बात बस इतनी रही कि पीएम ने लॉकडाउन-4 का ऐलान आज ना करके उसे 18 मई से पहले करने की बात कही। लेकिन ये लॉकडाउन कैसा होगा, उसके संकेत दे दिए। वही, जो मैंने लिखा था कि अर्थव्यवस्था को गति देनी है, सो लॉकडाउन तो हटाना होगा और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग राज्यों में अलग तरह की ढील होगी।
आज दिन में पीएम मोदी के आज रात 8 बजे के संबोधन के बारे में मैंने क्या-क्या लिखा था और किस प्रकार मेरी भविष्यवाणी कहिए या अनुमान कहिए, सही हुई, अगर ये विस्तार से जानना है तो आप नीचे के लिंक को क्लिक करके पूरी बात पढ़ सकते हैं। शीर्षक है
"इधर कुआँ और उधर खाई में फँस गए हैं पीएम मोदी"
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साहब आप कितना झूठ बोलते है...🙏🙏🙏
आपने दावा किया कि वायरस के संकट से पहले भारत ने कोई सुरक्षा उपकरण या पीपीई किट नहीं बनाया था
सफेद झूठ कैसे बोला जाता है कोई आपसे सीखे..
अगर हमने कोई पीपीई नहीं बनाया, तो सरकार ने फरवरी में निर्यात पर प्रतिबंध क्यों लगाया था जो चीज बनी ही नही उसका निर्यात कैसे रुक सकता है ???
आप भारत को आत्मनिर्भर बनाना चाहते है लेकिन पहले सच बोलना औऱ सुनना सिखिये बापू के देश मे अगर आपने असत्य की आंखों से आत्मनिर्भरता के सपने देखे तो पूरा भारत असत्य के प्रयोग ही करेगा 🙏🙏🙏🙏
अपूर्व भारद्वाज
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बिग मनी, बिग फार्मा और बिग करप्शन
गतांक से आगे........
आज से दो साल पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गर्भ नाल से जुड़ा हुआ संगठन स्वदेशी जागरण मंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एक अजीब सी माँग करता है कि हितों में टकराव के आधार पर नचिकेत मोर को भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड से हटाया जाए.
आप कहेंगे कि ये बिल गेट्स की श्रृंखला में नचिकेत मोर का क्या काम? नचिकेत मोर को तो इकनॉमी से जुड़े लोग तो एक बैंकर के बतौर जानते है उन्होंने कुछ समितियों का नेतृत्व भी किया है जिनकी सिफारिशों के आधार पर जनधन योजना जैसी बड़ी ओर महत्वपूर्ण योजना की परिकल्पना की गई थी........
आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि 2016 के मध्य से 2019 तक नचिकेत मोर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के हेड थे, कमाल की बात यह है कि इस पद पर रहते हुए भी उन्हें मोदी सरकार ने आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्ति दे दी थी, जबकि मोदी सरकार लगातार बड़े NGO के पर कतरने का काम करती आई थी तो फिर नचिकेत मोर में ऐसा क्या खास था ?
स्वदेशी जागरण मंच के सह - संयोजक अश्विनी महाजन ने मोदी को लिखे गए पत्र में कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड में नचिकेत मोर को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है. यह हितों में टकराव का बिल्कुल सीधा मामला है, क्योंकि उनके प्रधान नियोक्ता बीएमजीएफ को विदेशी फंड प्राप्त होता है और आरबीआई फंड का नियामक है.’मोर बीएमजीएफ के भारत मे पूर्णकालिक प्रतिनिधि हैं. बीएमजीएफ केंद्रीय गृह मंत्रालय की सख्त निगरानी में है और विदेशी स्रोतों से सक्रियता से धन प्राप्त कर रहा है.
लेकिन सिर्फ एक यही वजह नही थी जिसकी वजह से स्वदेशी जागरण मंच उनकी आरबीआई में उपस्थिति का विरोध कर रहा था, स्वदेशी जागरण मंच अपने पत्र में आगे लिखता है
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम कर रहा है बीएमजीएफ
'गृह मंत्रालय बीएमजीएफ पर इन आरोपों के कारण नजर रख रहा है कि यह फाउंडेशन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम कर रहा है ताकि स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्रों में सरकारी नीतियों को उनके पक्ष में प्रभावित कर सके.'
ध्यान दीजिए' स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्रों में'....आगे अपने इस पत्र में स्वदेशी जागरण मंच मांग करता है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अलावा नीति आयोग, भारतीय मेडिकल अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और केंद्रीय कृषि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालयों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे ऐसे संगठनों एवं उनके प्रतिनिधियों से दूरी बनाए रखें.
ये हैरानी की बात है कि स्वदेशी जागरण मंच इस पत्र में ICMR का नाम लेता है स्वदेशी जागरण मंच के सह - संयोजक अश्विनी महाजन आगे कहते है कि 'हाल में मीडिया में कुछ खबरें आई थीं जिनमें आरोप लगाए गए थे कि बीएमजीएफ ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज (जीएचएस) नाम के एक एनजीओ की फंडिंग कर रहा है ताकि वह भारत में वैश्विक तौर पर व्यर्थ दवाएं इस्तेमाल करने के लिए जरूरी प्रयास करे'
यह एक बड़ी महत्वपूर्ण बात हमे पता लगती है जो बिल गेट्स फाउंडेशन के द्वारा तथाकथित रूप से किये जा रहे 'परोपकार' की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है और वो है वैश्विक तौर पर व्यर्थ दवाएं को भारत मे इस्तेमाल किये जाने का प्रयास करना, ओर यह सारी बाते मैं नही कह रहा हूँ यह कह रहा है दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवक संगठन कहे जाने वाला आरएसएस का एक सवसे महत्वपूर्ण संगठन........
2018 से पहले 2017 में टीकाकरण में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन भारत मे एक्सपोज हो चुका था, 2017 में बिल गेट्स और भारत सरकार के बीच हुआ एक अहम करार तोड़ दिया गया ये करार इम्युनाइजेशन टेक्निकल सपोर्ट यूनिट से जुड़ा हुआ था,दरअसल गेट्स फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से ITSU (इम्युनाइजेशन टेक्निकल सपोर्ट यूनिट) के लिए फंडिंग कर रहा था। जिसके तहत करीब 2.7 करोड़ शिशुओं का हर साल टीका करण किया जाता था। गेट्स फाउंडेशन राजधानी में टीकाकरण के काम को देखती थी उसकी रणनीति तय करती थी और सरकार को सलाह देती थी।
टीकाकरण में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन किसी से छुपी हुई नही थी हमने पिछली पोस्ट दो बूंद जिंदगी की ओरल पोलियो वैक्सीन ओर HPV वैक्सीन के बारे आपको बताया था लेकिन इसके अलावा भी जितने वैक्सीन इस संगठन की सहायता से लगाए गए उनके रिजल्ट भी बाद में संदिग्ध पाए गए इसलिए स्वदेशी जागरण मंच द्वारा उस पर भी सवाल खड़े किए जाने के कारण जांच की गई और कोई कार्यवाही तो नही की गई बस इतना किया गया कि बीएमजीएफ को इस प्रोग्राम से दूर कर दिया गया,
बहरहाल स्वदेशी जागरण मंच ने एक NGO ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज का इसमे नाम लिया था तो ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज क्या काम करता है यह जानना जरूरी था तो उसकी वेबसाइट पर जो जानकारी मिलती है वो ये है कि डेविड गोल्ड और विक्टर ज़ोनाना ने वर्ष 2002 में GHS की स्थापना की। GHS की स्थापना के समय उन्होंने एचआईवी एक्टीविज्म, मीडिया, उद्योग व सरकारी संस्थाओ में अपने व्यक्तिगत कार्य के अनुभवों से आधार निर्मित किया। इसके परिणामस्वरूप एक ऐसी कंपनी सामने आई जो उन्नत संचार व एडवोकेसी के माध्यम से संस्थाओं की मदद करती है
यानी कि एक तरह का पीआर का काम करना
वो आगे लिखते हैं 'संक्रामक रोगों पर काम के अपने आरंभिक अनुभव से आगे बढ़ते हुए हमने मुद्दों पर विशिष्ट विशेषज्ञता का विस्तार किया जिसमें स्वास्थ्य व विकास संबंधी चुनौतियों की विविधता शामिल है, जिसका क्षेत्र शोध एवं विकास से लेकर जलवायु परिवर्तन से होते हुए परिवार नियोजन सेवाओं तक है। अब हमारे राष्ट्रीयकार्यालय अमेरिका, ब्राजील, भारत, चीन, अफ्रीका और यूरोप में है'
GHS इंडिया की स्थापना नई दिल्ली में वर्ष 2010 में हुई यह वही समय था जब बिल गेट्स इस दशक को टीकाकरण का दशक घोषित कर रहे थे
GHS इंडिया अपने बारे में बताते हुए लिखता है
'नीति निर्माताओं, प्रोग्राम मैनेजरों और अन्य निर्णय लेने वालों के बीच महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याओं की प्राथमिकता सुनिश्चित करने के लिए, हम भारत सरकार और राज्य सरकारों के साथ ही साथ अन्य प्रमुख हितधारकों और तमाम क्षेत्रों के प्रभावी लोगों व संस्थाओं के साथ भी मिलकर काम करते हैं।
हम क्षेत्रीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर 'मीडिया' के साथ मिलकर भी काम करते हैं, ताकि स्वास्थ्य संबंधी विमर्श को अधिक विस्तार मिले और भारतीय मीडिया में स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को उजागर करने के लिए अधिक अनुकूल वातावरण निर्मित हो सके।'
शायद अब आपके समझ मे आ सके कि मीडिया क्यो वैक्सीन के बेजा इस्तेमाल के बारे में, व्यर्थ दवाओं के भारत मे इस्तेमाल होने के बारे में कोई खबरे क्यो नही दिखाता है........सिर्फ पॉजिटिव खबरे ही क्यो दिखाई जाती है.......
क्रमशः
9 May at 11:58 · Public
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अरनब ओर अरनब जैसे तमाम बीजेपी की थाली की झूठन चाटने वाले विशिष्ट 'जीव-जंतु' महीने भर से टीवी पर चिल्ला चिल्ला कर पूछते रहे कि 'इंडिया वान्ट्स टू नो'........मौलाना साद को गिरफ्तार क्यो नही किया जा रहा है?
ये सवाल उन्होंने सरकार के अलावा हर दल के छोटे मोटे प्रवक्ता ओर 5000 रुपये के लालच में टीवी पर आकर कौम की एवज में लिटरली गाली खाते हुए मौलानाओं से बार बार पूछा....... आज इस बहुत छोटे से सवाल का जवाब इंडियन एक्सप्रेस ने खोज निकाला है कि मौलाना साद को गिरफ्तार क्यो नही किया जा रहा है ?
इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि इंस्पेक्टर सतीश कुमार की अगुवाई वाली जांच टीम वायरल हुई ऑडियो क्लिप का पता लगाने की कोशिश कर रही है। लेकिन लैपटॉप से ऐसी कोई क्लिप बरामद नहीं हुई है, जिसके चलते मौलाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में पता चला है कि वायरल ऑडियो क्लिप में धर्म और पुलिस को लेकर जो बयान दिया गया है, वो अलग अलग आयोजन में और किसी और संदर्भ में दिया गया था, जिसे ऑडियो में जोड़ दिया गया है। जांच टीम ने नोटिस किया है कि वायरल ऑडियो कई अन्य क्लिप को जोड़कर बनायी गई है। फिलहाल वायरल ऑडियो को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया गया है
दरअसल मौलाना साद के खिलाफ मुकेश वालिया की शिकायत के आधार पर एक मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसमें कथित तौर पर मौलाना साद की एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने की शिकायत की गई थी। इस ऑडियो क्लिप में मौलाना साद अपने समर्थकों, अनुायियों से कथित तौर पर लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने और धार्मिक सम्मेलनों में शामिल होने की बात कह रहे हैं।
यानी जब ऑडियो क्लिप ही झूठी निकली तो दिल्ली पुलिस किस मुँह से मौलाना साद को गिरफ्तार करने के लिए जाएगी?.......…यह बात शुरू से पुलिस को मालूम थी और इसलिए ही इस मामले को लंबे समय तक लटका के रखा गया ताकि इन बिके हुए चैनलों पर बहस चला चला कर कोरोना जैसी बीमारी पर मुसलमानों से नफरत फैलाने के एजेंडा पर भरपूर काम किया जा सके....ओर वो अपने एजेंडे में कामयाब हो चुके हैं "तबलीगी' शब्द को अब एक गाली सरीखा इस्तेमाल किया जा रहा है
अब सारे नफरती चैनलो पर दिन भर बकवास करते हुए न्यूज़ एंकर्स इस डॉक्टर्ड क्लिप वाली खबर पर चुप्पी साध जाएंगे!.........वो यह कभी नही पूछेंगे कि यह डॉक्टर्ड ऑडियो क्लिप बनाई किसने?..... क्योकि वह अगर ऐसा पूछेंगे तो खुद ही एक्सपोज हो जाएंगे.......
9 May at 13:38 · Public
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थोड़ी गड़बड़ कर गए मोदी जी इस बार विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करने में.......
उन्हें बोलना चाहिए था मेरे प्यारे बहनों भाइयों मैं कोरोना के आर्थिक पैकेज की घोषणा यही से करूँगा, ( कैमरे पर टीवी के पर बैठे दर्शक की आँख में आंख डालकर ) करू?....करू?..... करू?.....
10 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
11 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
12 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
13 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
14 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
15 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
बहन भाइयों में वादा करता हूँ .....कान जरा नजदीक रख सुन लीजिए, मेरी सरकार ( हाथ जोर जोर से हवा में हिलाते हुए) 20 लाख करोड़ का विशेष पैकेज दे रही है कोरोना के लिए......
( याद तो आ ही गया होगा!.... नही आया हो तो कमेन्ट बॉक्स में देख लीजिए)
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर लॉकडाउन के बीच देश को संबोधित किया। उन्होंने जहां एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कोरोना संकट को दूर करने के उपायों और फैसलों की सराहना की वहीं देशवासियों का भी धन्यवाद किया। इस संबोधन के केंद्र में उनके द्वारा 20 लाख करोड़ के पैकेज का एलान रहा। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी साफ कर दिया है कि लॉकडाउन 4 एक नए रंग रूप में होगा जिसके नियम कायदे 18 मई से पहले देशवासियों को बता दिए जाएंगे। पीएम मोदी के इस संबोधन में देश को आर्थिक मजबूती देने का रोड़मैप भी था। उन्होंने इस संबोधन से पहले ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कोरोना पर बैठक की थी और उनसे उनके विचार जाने थे। आइए जानते हैं उनके संबोधन की कुछ अहम बातें।
पीएम मोदी ने इस संबोधन में देश को इस संकट की घड़ी को अवसर में बदलने का रोड़मैप दिखाया। उन्होंने इस लक्ष्य को पाने के लिए देश के हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों के अंदर वित्तमंत्री चरणबद्ध तरीके से इसका एलान करेंगी। इसमें देश के किसानों, मजदूरों, उद्योगों समेत सभी के लिए कुछ न कुछ होगा।
अब तक लगे लॉकडाउन के दौरान हमारे देश के मजदूरों, रेहड़ी वालों और उन लोगों ने जिनका काम रोज कमाना खाना रहा है सबसे ज्यादा मुसीबत झेली है। अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर उनके लिए कुछ करें और उन्हें मजबूती प्रदान करें।
पीएम मोदी ने कहा कि लॉकडाउन 4 का एकदम नया रंगरूप होगा। इस लॉकडाउन हर देशवासी नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करेगा। हर कोई अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहेगा साथ ही अपने करीबियों की भी सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा। लॉकडाउन पर फैसले के लिए राज्यों से भी सुझाव मांगे गए थे। 18 मई से पहले लॉकडाउन 4 के नए नियमों को भी पूरी तरह से सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
कोरोना संकट के चलते लगे लॉकडाउन के दौरान भारत में आत्मनिर्भर बनने की तरफ कदम बढ़ाया है। कोरोना संकट से पहले जहां नाममात्र की पीपीई किट और एन95 मास्क भारत में बना करते थे वहीं अब हम हर रोज दो लाख पीपीई और इतने ही एन95 मास्क बना रहे हैं। हमनें इस दौरान अपने लोकल ब्रांड की तरफ सफलतापूर्वक कदम बढ़ाया है। वहीं हमारे लोकल ब्रांड ने देश की मांग को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब समय आ गया है कि हम इन लोकल ब्रांड को ज्यादा से ज्यादा अपनाएं और इन्में मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई बड़े ब्रांड जिनका हम आज गर्व के साथ उपयोग करते हैं कभी लोकल ही थे। लेकिन वहां के लोगों ने अपनाया और उनकी सराहना की और उनका प्रचार-प्रसार भी किया। इसके बाद ही वे वैश्विक ब्रांड बन सके। अब हमें अपने लोकल ब्रांड को आगे बढ़ाना है जो देश को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित होगा।
उन्होंने कहा कि कोरोना से मुकाबला करते हुए दुनिया को चार माह से अधिक बीत चुके हैं। इस दौरान दुनिया के 42 लाख से ज्यादा लोग इससे पीडि़त हुए हैं और पौने 3 लाख से ज्यादा लोगों की दुखद मौत हुई है। भारत में भी लोगों ने अपनों को खोया है। उनके प्रति हम अपनी संवेदना प्रकट करते हैं। एक वायरस ने दुनिया को तहस नहस कर दिया हे। विश्व में करोड़ों जिंदगियों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। सारी दुनिया जिंदगी बचाने में जुटी है। हमनें ऐसा संकट पहले कभी न देखा और न ही सुना। मानव जाति के लिए ये अकल्पनिय है। ये संकट अभूतपूर्व है। लेकिन इसमें भी हमें न थकना है, न हारना और बिखरना है। हमें सतर्क रहते हुए इस जंग के नियमों का पालन करते हुए खुद को बचाना भी है और आगे भी बढ़ना है। आज जब दुनिया संकट में है तो हमें अपना संकल्प और मजबूत करना है। हमारा संकल्प इस संकट से भी विराट होना चाहिए।
हम पिछली शताब्दी से सुनते आए हैा कि 21 वीं सदी भारत की है। कोरेाना संकट के बीच पूरी दुनिया भारत की तरफ बड़ी हसरत से देख रही है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। से स्थिति हमें सिखाती है कि इस संकट का मुकाबला केवल आत्मनिर्भर बनकर ही किया जा सकता है। एक राष्ट्र के रूप में हम आज एक अहम मोड़ पर खड़े हैं। भारत के लिए ये आपदा एक संकेत और संदेश लेकर आई है। इसमें अवसर भी है।
विश्व को भारत आशा की किरण के तौर पर देख रहा है। हमारी संस्कृति वसुधेव कुटुंबकुम है। हम जब ये बात करते हैं तो भारत आत्म केंद्रित की वकालत नहीं करता है। इसमें पूरी दुनिया के सुख और उसकी चिंता होती है। हम जय जगत में विश्वास रखते हैं। हम पूरी दुनिया को परिवार मानते हैं। हम इस धरती को अपनी मां मानते हैं। ऐसे में जब हम आत्मनिभ्रर बनते है। हमारी प्रगति में विश्व की प्रगति समाहित होती है। हमारे कार्य का प्रभाव दुनिया पर पड़ता है। खुले में शौच से मुक्त होने वाले भारत से दुनिया की सोच बदलती है। हमारे अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता है। ग्लोबल योगा दिवस इंसान को तनाव से मुक्त दिलाने के लिए दुनिया को हमारा उपहार है।
जब दुनिया में Y2K का संकट छाया था तो भारत ने ही दुनिया को इससे निकाला था। आज हमारे पास साधन भी है और सामर्थ्य भी है। आज हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरनी टैलेंट हें। हम अपनी क्वालिटी को, सप्लाई चेन को और बेहतर करेंगे। ये हम कर सकते हैं और हर हाल में करेंगे। हमनें अपने सामने कच्छ के भीषण भूकंप को देखा है। जब पूरा कच्छ एक मलबे में तब्दील हो गया था लेकिन बाद में खुद दोबारा अपने पांव पर खड़ा हो गया।
आत्मनिर्भर भारत से ही पूरा होगा 21 वीं सदी को भारत की बनाने का संकल्प। यही नूतन पर्व भी होगा। हमें आत्मनिर्भर भारत बनाने से कोई नहीं रोक सकता अपने परिवार और करीबियों का ध्यान रखें।
वैज्ञानिक बताते हैं कि कोरोना लंबे समय तक रहेगा। लेकिन ऐसा नहीं होने देना है कि इसके ही इर्द गिर्द हमारी जिंदगी सिमट जाए। हम एहतियात बरतेंगे लेकिन कामयाबी के साथ आगे बढ़ेंगे। लॉकडउान 4 नया होगा 18 मई से पहले इसकी जानकारी मिल जाएगी। नियमों का पालन करते हुए हम इस संकट से लड़ेंगे और आगे बढ़ेंगे।
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नई दिल्ली, एजेंसियां। लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मसले पर चर्चा की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही हम लॉकडाउन को क्रमबद्ध ढंग से हटाने पर गौर कर रहे हैं लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जब तक हम वायरस पर कारगर कोई वैक्सीन या उपाय नहीं ढूंढ लेते हैं तब तक वायरस से लड़ने के लिए हमारे पास सबसे बड़ा हथियार सामाजिक दूरी ही है। प्रधानमंत्री के संबोधन से जुड़े हर अपडेट के लिए जुड़े रहें jagran.com के साथ...
PM Narendra Modi Address Nation -
- पीएम मोदी ने कहा, आत्मनिर्भरता हमें सुख और संतोष देने के साथ-साथ सशक्त भी करती है। 21वीं सदी, भारत की सदी बनाने का हमारा दायित्व, आत्मनिर्भर भारत के प्रण से ही पूरा होगा। आत्मनिर्भर भारत का ये युग, हर भारतवासी के लिए नूतन प्रण भी होगा, नूतन पर्व भी होगा। अब एक नई प्राणशक्ति, नई संकल्पशक्ति के साथ हमें आगे बढ़ना है। इस दायित्व को 130 करोड़ देशवासियों की प्राणशक्ति से ही ऊर्जा मिलेगी।
- पीएम मोदी ने कहा, लॉकडाउन का चौथा चरण, लॉकडाउन 4, पूरी तरह नए रंग रूप वाला होगा, नए नियमों वाला होगा। राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं, उनके आधार पर लॉकडाउन 4 से जुड़ी जानकारी भी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी। पीएम मोदी ने कहा, ये संकट इतना बड़ा है, कि बड़ी से बड़ी व्यवस्थाएं हिल गई हैं। लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में हमने, देश ने हमारे गरीब भाई-बहनों की संघर्ष-शक्ति, उनकी संयम-शक्ति का भी दर्शन किया है। आज से हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए ‘वोकल’ बनना है, न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा देश ऐसा कर सकता है।
-पीएम मोदी ने कहा, अब रिफार्म के उस दायरे को व्यापक करना है, नई ऊंचाई देनी है। ये रिफॉर्मस खेती से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन में होंगे, ताकि किसान भी सशक्त हो और भविष्य में कोरोना जैसे किसी दूसरे संकट में कृषि पर कम से कम असर हो। साथियों, आत्मनिर्भरता, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। आत्मनिर्भरता, ग्लोबल सप्लाई चेन में कड़ी स्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है।
- पीएम मोदी ने कहा, ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है। आपने भी अनुभव किया है कि बीते 6 वर्षों में जो रिफार्म हुए, उनके कारण आज संकट के इस समय भी भारत की व्यवस्थाएं अधिक सक्षम, अधिक समर्थ नज़र आईं हैं।
- पीएम मोदी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए, इस पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडटी और कानून सभी पर बल दिया गया है। ये आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, हमारे लघु-मंझोले उद्योग, हमारे MSME के लिए है, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है, जो आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का मजबूत आधार है।
- पीएम मोदी ने कहा, इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा।
- पीएम मोदी ने कहा, कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। ये आर्थिक पैकेज, 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है।
- पीएम मोदी ने कहा, तीसरा पिलर- हमारा System। एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली Technology Driven व्यवस्थाओं पर आधारित हो। चौथा पिलर- हमारी डेमोग्राफी - दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रसी में हमारी Vibrant Demography हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है। पाँचवाँ पिलर- डिमांड- हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।
- पीएम मोदी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच Pillars पर खड़ी होगी। पहला पिलर Economy एक ऐसी इकॉनॉमी जो Incremental change नहीं बल्कि Quantum Jump लाए दूसरा पिलर Infrastructure एक ऐसा Infrastructureजो आधुनिक भारत की पहचान बने।
- पीएम मोदी ने कहा, मैंने अपनी आंखों के सामने कच्छ भूकंप के वे दिन देखे हैं। हर तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा। सब कुछ ध्वस्त हो गया था। ऐसा लगता था मानो पूरा कच्छ मौत की चादर ओढ़कर सो गया हो। उस समय कोई भी नहीं सोच सकता था कि वहां हालत बदल पाएंगे। लेकिन देखते ही देखते कच्च उठ खड़ा हुआ। कच्छ चल पड़ा। कच्छ बढ़ चला। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं है। कोई राह मुश्किल नहीं है। आज तो चाह भी और राह भी है। यह है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। भारत की संकल्पशक्ति ऐसी है कि भारत आत्मनिर्भर बन सकता है।
- पीएम मोदी ने कहा, आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट है, हम Best Products बनाएंगे, अपनी Quality और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं, कोई राह मुश्किल नहीं। और आज तो चाह भी है, राह भी है। ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना।
- पीएम मोदी ने कहा, दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है, मानव जाति के कल्याण के लिए बहुत कुछ अच्छा दे सकता है। सवाल यह है - कि आखिर कैसे? इस सवाल का भी उत्तर है- 130 करोड़ देशवासियों का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प।
- पीएम मोदी ने कहा, जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई आशा लेकर पहुंचती हैं। इन कदमों से दुनिया भर में भारत की भूरि-भूरि प्रशंसा होती है, तो हर भारतीय गर्व करता है।
- पीएम मोदी ने कहा, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्लोबर वॉर्मिंग के खिलाफ भारत की सौगात है। इंटरनेशनल योगा दिवस की पहल, मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है।
- पीएम मोदी ने कहा, जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की तस्वीर बदल जाती है। टीबी हो, कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही पड़ता है।
- पीएम मोदी ने कहा, भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव, विश्व कल्याण पर पड़ता है।
- पीएम मोदी ने कहा, जो पृथ्वी को मां मानती हो, वो संस्कृति, वो भारतभूमि, जब आत्मनिर्भर बनती है, तब उससे एक सुखी-समृद्ध विश्व की संभावना भी सुनिश्चित होती है।
- पीएम मोदी ने कहा, विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन, आशा की किरण नजर आता है। भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार, उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वसुधैव कुटुंबकम है।
- पीएम मोदी ने कहा, एन-95 मास्क का भारत में नाममात्र उत्पादन होता था। आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं।
-पीएम मोदी ने कहा, इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है।
- पीएम मोदी ने कहा, विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है- "आत्मनिर्भर भारत"
- पीएम मोदी ने कहा, जब हम इन दोनों कालखंडों को भारत के नजरिए से देखते हैं तो लगता है कि 21वीं सदी भारत की हो, ये हमारा सपना नहीं, ये हम सभी की जिम्मेदारी है।
- पीएम मोदी ने कहा, लेकिन थकना, हारना, टूटना-बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है।
- पीएम मोदी ने कहा, साथियों, एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। विश्व भर में करोड़ों जिंदगियां संकट का सामना कर रही हैं। सारी दुनिया, जिंदगी बचाने की जंग में जुटी है।
- पीएम मोदी ने कहा, सभी देशवासियों को आदर पूर्वक नमस्कार, कोरोना संक्रमण से मुकाबला करते हुए दुनिया को अब चार महीने से ज्यादा हो रहे हैं।
कयासों का दौर शुरू
- पीएम नरेंद्र मोदी का यह संबोधन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करने के ठीक अगले दिन होना है। पीएम के ऐलान को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा कयास लॉकडाउन पर लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लॉकडाउन 4 को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
ममता बोलीं, आय के बारे में क्या
- पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री के साथ बैठकों के दौरान उम्मीदें हैं लेकिन हम हर बार खाली हाथ लौटते हैं। पिछले 2 महीनों से कोई आय नहीं हुई है लेकिन हमें केंद्र से कोई विकल्प नहीं मिल रहा है। हमें 52 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। कोरोना जारी रहेगा लेकिन आय के बारे में क्या...?
संबोधन से पहले गरमाई सियासत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में यह संकेत दे चुके हैं कि किसी भी सूरत में लॉकडाउन से धीरे धीरे चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलना होगा। पीएम मोदी ने राज्यों से इस बारे में एग्जिट प्लान मांगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई राज्य अभी लॉकडाउन हटाना नहीं चाहते हैं जबकि कुछ राहत पैकेजों की मांग कर रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कुछ आरोपों के साथ सियासी माहौल भी गरमा दिया है।
ममता ने लगाए गंभीर आरोप
- इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की वीडियो कॉन्फ्रेंस मीटिंग से नाखुश ममता बनर्जी का कहना है कि बैठक से बंगाल को कुछ हासिल नहीं हुआ और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा है। ममता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल को केंद्र से उतना वित्तीय सहयोग नहीं मिला है जिनने का वह हकदार है।
ममता बनर्जी ने की यह पहल
- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लॉकडाउन-4 की अटकलों से पहले एलान किया है कि राज्य में रेड जोन को आगे तीन कैटिगरी (a, b, c) में बांटा जाएगा। पुलिस इन इलाकों को देखेगी। राज्य के कंटेनमेंट जोनों में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने राहत भरी जानकारी दी
- लॉकडाउन के चौथे चरण की अटकलों के बीच देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70 हजार को पार कर गई है। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70756 हो गई है जिसमें से 22454 ठीक हो चुके हैं। देश में अभी कोरोना के सक्रिय संक्रमितों की संख्या 46008 है। देश में कोरोना से 2293 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक राहत भरी जानकारी दी है कि देश में कोरोना से होने वाली मृत्युदर बाकी मुल्कों के लिहाज से बेहद कम है।
पांचवीं बार संबोधन
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने सभी संबोधनों में देशवासियों से सहयोग की अपील की है। साथ ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई को और धारदार बनाने का आह्वान किया है। आइये संक्षेप में जानते हैं कि पीएम मोदी ने इससे पहले के संबोधनों में क्या बातें कही हैं।
पहले संबोधन में जनता कर्फ्यू की बात
प्रधानमंत्री ने पहली बार 19 मार्च 2020 की रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने सावधानियों का पालन करते हुए 22 मार्च (रविवार) को जनता कर्फ्यू की अपील की थी।
दूसरे संबोधन में लॉकडाउन का एलान
जनता कर्फ्यू की सपलता के बाद पीएम मोदी ने दूसरी बार 24 मार्च की रात 8 बजे देश को संबोधित करते हुए पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी।
तीसरे संबोधन में दीप जलाने की अपील
तीन अप्रैल को पीएम मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे पांच अप्रैल की रात नौ बजे कोरोना वॉरियर्स के लिए 9 मिनट का वक्त निकालें और घरों की बत्तियां बंद कर दीप, मोमबत्ती, टार्च, मोबाइल की फ्लैश लाइटें रोशन करें।
चौथे संबोधन में लॉकडाउन-2 का एलान
प्रधानमंत्री ने चौथी बार 14 अप्रैल को देशवासियों को संबोधित करते हुए तीन मई तक के लिए पूरे देश में लॉकडाउन-2 लगाए जाने की घोषणा की थी।
दिखेगी भविष्य की तस्वीर
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। प्रधानमंत्री ने ‘दो गज की दूरी’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा था कि कई मुख्यमंत्रियों द्वारा रात में कर्फ्यू लगाने के लिए दिए गए सुझाव को मानने से निश्चित रूप से लोगों में सतर्कता की भावना फिर से पैदा होगी। ऐसे समय जब लॉकडाउन-3 खत्म होने में अब पांच दिन का समय ही बचा है... पीएम मोदी का यह संबोधन भविष्य की तस्वीर दिखाएगा। कोरोना से निपटने के लिए देश को लॉकडाउन-4 (Lockdown-4) की जरूरत है या नहीं और यदि है तो उसकी रूपरेखा और तस्वीर कैसी होगी... इस बारे में भी प्रधानमंत्री इशारा करेंगे।
अर्थव्यवस्था को गति देने की चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करके भावी कदमों को लेकर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमें यह समझना होगा कि अब कोरोना से लड़ाई पहले ज्यादा केंद्रित होगी। आगे हमें इसके फैलाव को रोकना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग सभी ऐहतियाती कदमों का पालन करें। इस बातचीत में पीएम मोदी ने स्पष्ट संकेत दिया था कि अगले चरण में राहत तो दी जाएगी लेकिन लॉकडाउन एकदम से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि हमारे सामने बीमारी को रोकने के साथ साथ अर्थव्यवस्था को गति देने की गहरी चुनौती है।
जन से लेकर जग तक की नीति पर चलने के संकेत
पीएम मोदी के साथ बातचीत में ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री भी लॉकडाउन में एकमुश्त ढील देने के पक्ष में नहीं दिखे। वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि जन से लेकर जग तक की नीति पर आगे बढ़ना होगा। सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन के अगले दौर में ऑरेंज और रेड जोन में भी थोड़ी ढील दी जा सकती है। हालांकि आवागमन, मनोरंजन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम शुरू होने के लिए अभी इंतजार करना होगा। यही नहीं गांवों को संक्रमण से बचाने की भी एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में पीएम मोदी के इस संबोधन को बेहत खास माना जा रहा है।
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नई दिल्ली, एजेंसियां। लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मसले पर चर्चा की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही हम लॉकडाउन को क्रमबद्ध ढंग से हटाने पर गौर कर रहे हैं लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जब तक हम वायरस पर कारगर कोई वैक्सीन या उपाय नहीं ढूंढ लेते हैं तब तक वायरस से लड़ने के लिए हमारे पास सबसे बड़ा हथियार सामाजिक दूरी ही है। प्रधानमंत्री के संबोधन से जुड़े हर अपडेट के लिए जुड़े रहें jagran.com के साथ...
LIVE PM Narendra Modi will Address Nation
- पीएम मोदी ने कहा, कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। ये आर्थिक पैकेज, 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है।
- पीएम मोदी ने कहा, तीसरा पिलर- हमारा System। एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली Technology Driven व्यवस्थाओं पर आधारित हो। चौथा पिलर- हमारी डेमोग्राफी - दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रसी में हमारी Vibrant Demography हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है। पाँचवाँ पिलर- डिमांड- हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।
- पीएम मोदी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच Pillars पर खड़ी होगी। पहला पिलर Economy एक ऐसी इकॉनॉमी जो Incremental change नहीं बल्कि Quantum Jump लाए दूसरा पिलर Infrastructure एक ऐसा Infrastructureजो आधुनिक भारत की पहचान बने।
- पीएम मोदी ने कहा, आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट है, हम Best Products बनाएंगे, अपनी Quality और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं, कोई राह मुश्किल नहीं। और आज तो चाह भी है, राह भी है। ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना।
- पीएम मोदी ने कहा, दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है, मानव जाति के कल्याण के लिए बहुत कुछ अच्छा दे सकता है। सवाल यह है - कि आखिर कैसे? इस सवाल का भी उत्तर है- 130 करोड़ देशवासियों का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प।
- पीएम मोदी ने कहा, जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई आशा लेकर पहुंचती हैं। इन कदमों से दुनिया भर में भारत की भूरि-भूरि प्रशंसा होती है, तो हर भारतीय गर्व करता है।
- पीएम मोदी ने कहा, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्लोबर वॉर्मिंग के खिलाफ भारत की सौगात है। इंटरनेशनल योगा दिवस की पहल, मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है।
- पीएम मोदी ने कहा, जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की तस्वीर बदल जाती है। टीबी हो, कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही पड़ता है।
- पीएम मोदी ने कहा, भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव, विश्व कल्याण पर पड़ता है।
- पीएम मोदी ने कहा, जो पृथ्वी को मां मानती हो, वो संस्कृति, वो भारतभूमि, जब आत्मनिर्भर बनती है, तब उससे एक सुखी-समृद्ध विश्व की संभावना भी सुनिश्चित होती है।
- पीएम मोदी ने कहा, विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन, आशा की किरण नजर आता है। भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार, उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वसुधैव कुटुंबकम है।
- पीएम मोदी ने कहा, एन-95 मास्क का भारत में नाममात्र उत्पादन होता था। आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं।
-पीएम मोदी ने कहा, इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है।
- पीएम मोदी ने कहा, विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है- "आत्मनिर्भर भारत"
- पीएम मोदी ने कहा, जब हम इन दोनों कालखंडों को भारत के नजरिए से देखते हैं तो लगता है कि 21वीं सदी भारत की हो, ये हमारा सपना नहीं, ये हम सभी की जिम्मेदारी है।
- पीएम मोदी ने कहा, लेकिन थकना, हारना, टूटना-बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है।
- पीएम मोदी ने कहा, साथियों, एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। विश्व भर में करोड़ों जिंदगियां संकट का सामना कर रही हैं। सारी दुनिया, जिंदगी बचाने की जंग में जुटी है।
- पीएम मोदी ने कहा, सभी देशवासियों को आदर पूर्वक नमस्कार, कोरोना संक्रमण से मुकाबला करते हुए दुनिया को अब चार महीने से ज्यादा हो रहे हैं।
कयासों का दौर शुरू
- पीएम नरेंद्र मोदी का यह संबोधन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करने के ठीक अगले दिन होना है। पीएम के ऐलान को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा कयास लॉकडाउन पर लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लॉकडाउन 4 को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
ममता बोलीं, आय के बारे में क्या
- पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री के साथ बैठकों के दौरान उम्मीदें हैं लेकिन हम हर बार खाली हाथ लौटते हैं। पिछले 2 महीनों से कोई आय नहीं हुई है लेकिन हमें केंद्र से कोई विकल्प नहीं मिल रहा है। हमें 52 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। कोरोना जारी रहेगा लेकिन आय के बारे में क्या...?
संबोधन से पहले गरमाई सियासत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में यह संकेत दे चुके हैं कि किसी भी सूरत में लॉकडाउन से धीरे धीरे चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलना होगा। पीएम मोदी ने राज्यों से इस बारे में एग्जिट प्लान मांगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई राज्य अभी लॉकडाउन हटाना नहीं चाहते हैं जबकि कुछ राहत पैकेजों की मांग कर रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कुछ आरोपों के साथ सियासी माहौल भी गरमा दिया है।
ममता ने लगाए गंभीर आरोप
- इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की वीडियो कॉन्फ्रेंस मीटिंग से नाखुश ममता बनर्जी का कहना है कि बैठक से बंगाल को कुछ हासिल नहीं हुआ और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा है। ममता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल को केंद्र से उतना वित्तीय सहयोग नहीं मिला है जिनने का वह हकदार है।
ममता बनर्जी ने की यह पहल
- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लॉकडाउन-4 की अटकलों से पहले एलान किया है कि राज्य में रेड जोन को आगे तीन कैटिगरी (a, b, c) में बांटा जाएगा। पुलिस इन इलाकों को देखेगी। राज्य के कंटेनमेंट जोनों में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने राहत भरी जानकारी दी
- लॉकडाउन के चौथे चरण की अटकलों के बीच देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70 हजार को पार कर गई है। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70756 हो गई है जिसमें से 22454 ठीक हो चुके हैं। देश में अभी कोरोना के सक्रिय संक्रमितों की संख्या 46008 है। देश में कोरोना से 2293 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक राहत भरी जानकारी दी है कि देश में कोरोना से होने वाली मृत्युदर बाकी मुल्कों के लिहाज से बेहद कम है।
पांचवीं बार संबोधन
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने सभी संबोधनों में देशवासियों से सहयोग की अपील की है। साथ ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई को और धारदार बनाने का आह्वान किया है। आइये संक्षेप में जानते हैं कि पीएम मोदी ने इससे पहले के संबोधनों में क्या बातें कही हैं।
पहले संबोधन में जनता कर्फ्यू की बात
प्रधानमंत्री ने पहली बार 19 मार्च 2020 की रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने सावधानियों का पालन करते हुए 22 मार्च (रविवार) को जनता कर्फ्यू की अपील की थी।
दूसरे संबोधन में लॉकडाउन का एलान
जनता कर्फ्यू की सपलता के बाद पीएम मोदी ने दूसरी बार 24 मार्च की रात 8 बजे देश को संबोधित करते हुए पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी।
तीसरे संबोधन में दीप जलाने की अपील
तीन अप्रैल को पीएम मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे पांच अप्रैल की रात नौ बजे कोरोना वॉरियर्स के लिए 9 मिनट का वक्त निकालें और घरों की बत्तियां बंद कर दीप, मोमबत्ती, टार्च, मोबाइल की फ्लैश लाइटें रोशन करें।
चौथे संबोधन में लॉकडाउन-2 का एलान
प्रधानमंत्री ने चौथी बार 14 अप्रैल को देशवासियों को संबोधित करते हुए तीन मई तक के लिए पूरे देश में लॉकडाउन-2 लगाए जाने की घोषणा की थी।
दिखेगी भविष्य की तस्वीर
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। प्रधानमंत्री ने ‘दो गज की दूरी’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा था कि कई मुख्यमंत्रियों द्वारा रात में कर्फ्यू लगाने के लिए दिए गए सुझाव को मानने से निश्चित रूप से लोगों में सतर्कता की भावना फिर से पैदा होगी। ऐसे समय जब लॉकडाउन-3 खत्म होने में अब पांच दिन का समय ही बचा है... पीएम मोदी का यह संबोधन भविष्य की तस्वीर दिखाएगा। कोरोना से निपटने के लिए देश को लॉकडाउन-4 (Lockdown-4) की जरूरत है या नहीं और यदि है तो उसकी रूपरेखा और तस्वीर कैसी होगी... इस बारे में भी प्रधानमंत्री इशारा करेंगे।
अर्थव्यवस्था को गति देने की चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करके भावी कदमों को लेकर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमें यह समझना होगा कि अब कोरोना से लड़ाई पहले ज्यादा केंद्रित होगी। आगे हमें इसके फैलाव को रोकना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग सभी ऐहतियाती कदमों का पालन करें। इस बातचीत में पीएम मोदी ने स्पष्ट संकेत दिया था कि अगले चरण में राहत तो दी जाएगी लेकिन लॉकडाउन एकदम से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि हमारे सामने बीमारी को रोकने के साथ साथ अर्थव्यवस्था को गति देने की गहरी चुनौती है।
जन से लेकर जग तक की नीति पर चलने के संकेत
पीएम मोदी के साथ बातचीत में ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री भी लॉकडाउन में एकमुश्त ढील देने के पक्ष में नहीं दिखे। वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि जन से लेकर जग तक की नीति पर आगे बढ़ना होगा। सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन के अगले दौर में ऑरेंज और रेड जोन में भी थोड़ी ढील दी जा सकती है। हालांकि आवागमन, मनोरंजन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम शुरू होने के लिए अभी इंतजार करना होगा। यही नहीं गांवों को संक्रमण से बचाने की भी एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में पीएम मोदी के इस संबोधन को बेहत खास माना जा रहा है।
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मोदी सरकार अब कोरोना के मामले में अब पूरी तरह से हाथ ऊंचे करते नजर आ रही है.......... जो खबर आई है वह बहुत ही खतरनाक है अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने को लेकर नई नीति तैयार की है। इसके मुताबिक, अब कोरोना के हल्के या मध्यम लक्षण वाले मरीजों को ठीक होने के बाद बिना टेस्टिंग के भी डिस्चार्ज किया जा सकता है, इसके लिए शर्त यह है कि मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए और उनमें लगातार तीन दिन तक बुखार नहीं होना चाहिए। हालांकि, डिस्चार्ज के बाद भी उन्हें 7 दिन के लिए घर पर ही आइसोलेशन में रहना अनिवार्य होगा।.........
कुल मिलाकर ऐसे मरीज को घर भेजा जा रहा है जो कोरोना का कैरियर हो सकते हैं इस बात की बिना पुष्टि किये कि उन्हें कोरोना नही है, घर भेजा जा रहा है, यह ओर खतरनाक हो सकता है ..........अब ठीक हो चुके मरीज को भी लोग शक की नजरों से देखेंगे कि उसे कोरोना तो नही है,.......... साफ दिख रहा है कि यह जल्दी जल्दी हॉस्पिटल खाली कराने की कवायद है ताकि देश मे कोरोना के आंकड़े कम कर के दिखलाए जा सके, ........इंदौर जैसे शहरों में यह काम प्रशासन ने पहले से ही शुरू कर दिया है...........
आपको यदि याद हो तो लगभग एक हफ्ते पहले क्वारैंटाइन की गाइडलाइन में बड़ा बदलाव किया था तब यह नई पॉलिसी लागू की गयी थी कि पॉजिटिव मरीज के घर वाले यानी काेराेना संदिग्ध दो पड़ोसियों की गारंटी देकर अपने ही घर में हाेम क्वारेंटाइन हो सकेंगे। यह कदम तब उठाया गया था जब सोशल मीडिया में क्वारैंटाइन सेंटर की अव्यवस्थाओं को लेकर सैकड़ों वीडियो एंव शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद वहां संदिग्ध लोगों को रखना बंद कर दिया गया।
ओर अब यह नया कदम उठाया जा रहा है साफ है कि मोदी सरकार अब अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला छुड़ाने की जल्दबाजी में है, ध्यान दीजिएगा "बिना टेस्टिंग के मरीजो को डिस्चार्ज' के कदम तब उठाए जा रहे है जब देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स के निदेशक गुलेरिया जी बोल चुके हैं कोरोना जून जुलाई में पीक पर होगा............
अब ईश्वर ही देशवासियों की रक्षा करे.....
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'अमेरिका जैसे देशों में वहां की सरकार छोटे बिजनसमैन के लिए पे-चेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम चला रही है जिसके तहत उन्हें करीब 349 अरब डॉलर की मदद दी जा रही है जिससे वे अपने एंप्लॉयी को इस क्राइसिस के दौरान सैलरी देते रहेंगे।'
यह कहना है क्रिस्टोफर वुड का जो 'अमेरिकन इन्वेस्टमेंट बैंकिंग ऐंड फाइनैंशल सर्विस जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटिजी ग्लोबल हेड है
बड़ा सवाल यह है कि भारत की सरकार MSME के लिए, छोटे व्यापारी के लिए कितने फंड की व्यवस्था करने जा रही है जो ये लोग अपने कर्मचारियों को तनखा दे सके ?....
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आप सोचते है कि राज्य सरकार कम से कम अपने राज्य प्रवासी मजदूरों को एक जगह से दूसरी जगह तो पुहंचा सकती है? आप सोचते है कि एक जिले के कलेक्टर को कम से कम इतना तो करना ही चाहिए कि वह अपने अधिकारियों को निर्देश दे कि यदि कोई खाली ट्रक हाइवे पर जा रहा हो तो उसे रोक कर हाईवे पर चल रहे मजदूरों को बैठा दे ताकि कम से कम जहाँ तक वो खाली ट्रक जा रहा हो वहाँ तक ये लोग पैदल चलने से बच जाएं.......
माफ कीजिए आप गलत सोचते हैं, मध्यप्रदेश में परिवहन आयुक्त RTO ने सभी परिवहन अधिकारियों को यात्री वाहन और मालयानों की चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं। मधुकुमार ने कहा कि इससे प्रवासी मजदूरों के अवैध परिवहन एवं मोटरयान अधिनियम का उल्लंघन करने से कोरोना संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। इसलिए इस पर रोक लगाने के लिए सभी वाहनों की चेकिंग जरूरी हो गई है
कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आवश्यक वस्तुओं के निर्बाध परिवहन के लिये प्रदेश में किसी भी मालयान का रोकना निषेध किया गया था, परंतु कुछ मालयान चालकों/मालिको द्वारा इस आदेश का दुरूपयोग कर एक राज्य से दूसरे राज्य के मध्य प्रवासी मजदूरों का अवैध परिवहन करने के साथ ही मजदूरों से किराया भी वसूल किया जा रहा है।.....
ठीक है मजदूरों से किराया लेना तो गलत है लेकिन क्या ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में मानवीयता के आधार ट्रकों में खाली स्थान पर मजदूरों को बैठाने की ढील नही दी जा सकती,...... यही परिवहन आयुक्त RTO जब किसी मुख्यमंत्री की या प्रधानमंत्री की रैली होती है तो सारी स्कूल बसों को अधिग्रहित कर लेते हैं..... उस समय इनकी सक्रियता ओर नियम कायदों की उपेक्षा देखने लायक होती है....... लेकिन कोरोना काल मे देखिए इन्हें कैसे कानून कायदा सूझ रहा है..........
9 May at 20:05
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साल था 1936, भारत आजाद नही हुआ था, लेकिन भारत माता की जय, भारत माता की जय ये नारे बहुत गूंजा करते थे, एक सभा को जब जवाहर लाल नेहरू संबोधित करने आए तो खूब नारे लगने लगे, भारत माता की जय,भारत माता की जय,नेहरू ने भाषण करते वक्त ही जनता से यह सवाल पूछा कि भारत माता कौन है,और आप लोग किसकी जीत होते हुए देखना चाहते हैं? और अगली पंक्ति में खुद ही उसका जवाब देते हुए कहा कि 'यहाँ के पर्वत, नदियां, मैदान और जंगल स्वाभाविक तौर पर सबको प्रिय हैं। लेकिन अंततः इस विशाल भूमि पर फैले भारत के लोग भारत माता हैं। यहाँ के करोड़ो लोग भारत माता हैं। इनकी जीत होनी चाहिए, इन लोगों की जीत होनी चाहिए।
Pankaj Chaturvedi जी की वाल पर यह वीडियो मौजूद था उन्होंने भी अपनी बात यही से शुरू कि यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर भारत माता कौन है?........... कुछ छद्म किस्म के राष्ट्रवादी एक केसरिया साड़ी पहने, शेर पर सवार और हाथ में भगवा झंडा लिए महिला की काल्पनिक छबि को भारत माता बताते हैं।........भारत माता असल में इस देश के मुफ़लिस, गरीबी, लाचारी और भूख के साथ खड़ी वह महिला है जो ऊपर से 40 - 41 डिग्री तापमान की गर्मी और नीचे अंगार से तपते डामर की सड़क पर अपने मासूम बच्चों के लिए सरपट दौड़ी चली जाती है ।शायद पीछे से दो तीन सौ किलोमीटर चल कर आई होगी और आगे भी 5- 700 किलोमीटर चलना होगा ।लेकिन उसके जज्बे में ,उसकी हिम्मत में कोई कमी नहीं है। इतनी सारी विषम परिस्थितियों को मात देती है उसकी एक हल्की सी मुस्कान । यही भारत माता की मुस्कान है। यदि सही में भारत माता को देखना है तो इस वीडियो को पूरा देखें और इस भारत माता को सलाम करें।
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मित्र प्रकाश के रे बता रहे है कि सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत जो नया संसद भवन बनाया जा रहा है उसकी ये डिजाइन बिलकुल कमोड टाइप है वो लिखते है 'चित्र देखिए। ....मौजूदा भवन की प्रेरणा लटियन और बेकर ने चौंसठ योगिनी मंदिर से ली थी. आप ख़ुद देखकर बताइए, नए डिज़ाइन का प्रेरणास्रोत कमोड के अलावा क्या हो सकता है! यह निहायत इरिटेटिंग पोस्ट-मॉडर्न डिज़ाइन है',......उनकी बात ठीक ही है डिजाइन के लेवल पर बात की जाए तो इसे कोई ख़ास अच्छा डिजाइन नहीं माना जाएगा
लेकिन जब मोदी सरकार ने इसके डिजाइनिंग का ठेका गुजरात की आर्किटेक्ट कंसल्टेंसी कंपनी एचसीपी कॉन्ट्रैक्टर (HCP Design, Planning & Management Pvt. Ltd) को 230 करोड़ में दे रही है तो क्या कह सकते है। मोदी जी के गृहराज्य की कम्पनी है वो जो करे वो कम है जितने में कर दे वो कम है......लेकिन वाकई डिजाइनिंग बकवास है इससे कही बेहतर तो आज वाला संसद भवन ही लग रहा है
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जब से कोरोना शुरू हुआ है मुझे तभी से ये लगता आया है कि इस नए कोरोना वायरस को लेकर एक गलत तरह की एप्रोच लेकर काम किया जा रहा है और यह भारत की बात नही है यह पूरी दुनिया मे हो रहा है कोरोना को लेकर एक तरह का जो डर है उससे बचा जा सकता था, हमने वर्ल्ड वाइड पैनिक क्रिएट किया, उसे एक हव्वा बना दिया यह बड़ी गलती थी, यदि हमने इसे समझने समझाने को लेकर अपनी एप्रोच सही रखी होती, तो हम लॉक डाउन जैसे उपायों से बच सकते थे, ओर इस तरह का पैनिक फैलाने में चीन भी दोषी है और WHO भी.......
हमारे देश के नेता मूर्खता पूर्ण दावे कर रहे हैं कि हम कोरोना को हरा देंगे, आप किसी वायरस को कैसे हराओगे, वो हर जगह है ?
दो दिन पहले CNN ने एक स्टडी पब्लिश की है जिसके मुताबिक चीन के मिलिट्री हॉस्पिटल में 38 लोगों पर किए गए अध्ययन के नतीजे बताते है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो चुके लोगों के वीर्य में भी यह जिंदा रह सकता है. सेक्स के दौरान यह दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है.
इससे पहले तंजानिया में बकरी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद वहाँ के राष्ट्रपति जॉन मागुफुली ने कोरोना की टेस्ट किट पर ही सवाल उठा दिए, उन्होंने कहा, 'ऐसा कैसे हो सकता है कि पॉपॉ फल और बकरी भी कोरोना पॉजिटिव निकले।' राष्ट्रपति मागुफुली ने इसे लेकर सेना को कहा है कि टेस्ट किट की जांच कराएं, क्योंकि जांच करने वाले लोगों ने इंसानों के अलावा भी सैंपल जमा किए थे।कोरोना वायरस के ये सैंपल बकरी, पॉपॉ फल और भेड़ से लिए गए थे। सैंपल को जांच के लिए तंजानिया की लैब में भेजा गया, जहां बकरी और पॉपॉ फल कोरोना पॉजिटिव निकले।
कुछ दिनों पहले लैंसेट पत्रिका में छपी रिसर्च में मानव मल में कोरोना का वायरस पाए जाने की बात कही गयी थी लेकिन तब भारत के स्वास्थय मंत्रालय ने इस प्रकार से कोरोना फैलने की बात से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद बीजिंग तथा अमेरिका में कोरोना के संक्रमित मरीज के मल में कोरोना वायरस पाया गया, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी की शी चेंगली प्रयोगशाला के रिसर्चर्स को कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के मल में वायरस के आरएनए यानी राइबोन्यूक्लिक एसिड मिले हैं. यह वायरस फैलने के एक और तरीके की तरफ इशारा करता है. चीनी रिसर्चरों के शोध नतीजों की पुष्टि अमेरिकी रिसर्चरों ने भी की है. अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमित एक व्यक्ति के मल में भी वायरस के आरएनए मिले हैं.
यदि मल में वायरस है तो नाले के पानी मे यह क्यों नही हो सकता? यानी वहाँ भी है अब वैज्ञानिक कोरोना के छिपे मामलों का पता लगाने के लिए सीवेज यानी नाले के गंदे पानी की जांच कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब कोरोना वायरस महमारी का रूप ले चुका है और इसका इलाज नहीं मिल रहा है। अमेरिका में सीवेज वाटर में यह मिला है
WHO अप्रैल में बोलता था कि पालतू जानवरों से कोरोना वायरस के प्रसार के प्रमाण नही मिले है लेकिन अब डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कोरोनावायरस चमगादड़ से फैला है और यह सामान्य बिल्ली और फेरेट (बिल्ली प्रजाति का जीव) को संक्रमित कर सकता है।संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा बिल्लियों को है। हालांकि, अभी और रिसर्च की जानी है, कुत्ते, बिल्ली, बाघ और शेर के कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है अब ऊदबिलाव (Mink) भी इस बीमारी से संक्रमित होने वाले जानवरों की लिस्ट में शामिल है
यानी वीर्य में वायरस है मानव मल में वायरस है पपीते जैसे फल में है, नाले के पानी में है,कुत्ते, बिल्ली, बाघ और शेर ऊदबिलाव में वायरस है, ऐसे इंसानों में वायरस है जो बिल्कुल स्वस्थ है उन्हें कोई लक्षण नही है उन्हें हल्का बुखार क्या सर्दी खाँसी तक नही है............
तो एक बार फिर से इस वायरस के प्रति हमारी जो पैनिक एप्रोच हो गयी है उसे ही बदलने की जरूरत है अगर लॉक डाउन ऐसे ही बढाना है तो इसे हमे अनंत काल तक बढाते रहना होगा, इसलिए यह जरूरी है कि हम अपनी सोच में ही बदलाव लेकर के आए और इसमें सरकारो का, मीडिया का बहुत महत्वपूर्ण रोल है, नही तो कहते रहिए stay safe stay home........
10 May at 11:23 · Public
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मै हमेशा से कहता आया हूँ कि कोरोना भारत में कही और से नहीं, किसी और से नहीं बल्कि, जनवरी फरवरी में चीन से आने वाले यात्रियों की वजह से फैला है इस संबंध में विभिन्न समाचार माध्यमों में आई खबरों पर रिसर्च कर के एक पोस्ट भी लिखी थी.... चीन में आज भी लाखो की संख्या में कोरोना पॉजिटिव मौजूद है लेकिन चीन की सरकार मानने को तैयार नही है। ........
आज जो एअर इंडिया के 5 पायलटो के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की खबर आयी है ये खबर भी मेरे दावों की पुष्टि कर रही है एयर इण्डिया के ये सभी पायलट इन दिनों कार्गों ऑपरेशन में काम कर रहे थे, 18 अप्रैल को इन्होने अपनी आखिरी उड़ान चीन के ग्वांगझोउ से उड़ान भरी थी. ताकि वहां से मेडिकल सप्लाई लाई जा सके, भारत में आने के बाद इन पायलटों में कोरोना के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए थे. तीन चार दिन पहले जब इन्हे दुबारा ड्यूटी ज्वाइन करने बुलाया गया तो इन पायलटों की कोरोना जांच की गई तो उनमें कोरोना के लक्षण मिले.........पांचों पायलटों को एयर इंडिया के प्रोटोकॉल के तहत परीक्षण किया गया था. दरअसल इन पायलटों को ड्यूटी पर वापस जाने से 72 घंटे पहले जांच से गुजरना होता है. इस जांच में पांचों पायलट कोरोना पॉजिटिव पाए गए. बता दें कि ये लोग जब चीन से लौटे थे उस वक्त इनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे....... आज भी इनमे कोरोना के कोई लक्षण नहीं है। .....यह असिन्टेमेटिक मरीज है ऐसे लोग कोरोना के सुपर स्प्रेडर हो सकते है ये बात हमे कोरोना के विषय में किये गए नए अध्ययन से पता चली है
अब अगर हममे थोड़ी सी भी बुध्दि बची हो तो एक समुदाय विशेष को कोरोना फैलाना का दोषी बताने से बाज आ जाना चाहिए!........... हालांकि न्यूज़ चैनलों से आप ऐसी समझदारी की उम्मीद न रखे वो इन पायलटो के चीन से लौटने वाले बात पूरी तरह से दबा गए है। ....... दरअसल इन चैनलों की रोजी रोटी ही इस नफरत भरे माहौल को बनाए रखने से चल रही है। .....
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वैसे बहुत से मजदूर जो वापस लौट रहे वो स्वयं ऐसे आयोजनों में शामिल होते आए है!..उनकी तो प्रैक्टिस भी है पहले भी उन्होंने बड़े गर्व के साथ उन्होंने धर्म ध्वजा उठाई थी वो उन्होंने अपने इष्ट के लिए उठाए थी तो आज अपने लिए उठा ले ! क्या कहते हो?
करके देखिए ......अच्छा लगता है!.…
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मोदी सरकार के इंतजामो से दुखी लाखो प्रवासी मजदूर अपने अपने घरों की ओर पैदल ही निकल पड़े है मीडिया में, सोशल मीडिया में उनके रास्ते मे आ रही दुख तकलीफों को बताया जा रहा है यह देख कर मन बहुत विचलित महसूस कर रहा है उनकी अंतहीन समस्याओं पर विचार करते हुए मुझे एक अच्छा आइडिया आया है.... .….....देखिए लाखों मजदूर सड़कों पर तो पैदल चल ही रहा है वो बस एक छोटा सा काम करे, ..........एक रामनामी दुपट्टा ओढ़ ले या कपड़े भगवा रंग के पहन लें, और कंधे पे एक कांवड़ उठा ले, दो लोटे में इधर उधर का जल भर ले और बम भोले, बम भोले का नाद करता हुआ निकल पड़े......
उसके ऐसा करते ही आप देखिएगा राज्य सरकारों का उसके प्रति नजरिया पूरी तरह से बदल जाएगा, वो जहाँ जहाँ से भी गुजरेगे उनके स्वागत सत्कार की व्यवस्था की जाएगी, ,जगह जगह सरकार द्वारा स्वास्थ्य केम्प लगाए जाएंगे जिसमे सरकारी डॉक्टर नियुक्त किये जाएंगे, यहाँ तक कि इन मजदूरों के लिए एक कांवड़ यात्रा मैनेजमेंट एप्प जैसी एप्प बनवा दी जाएगी जिसमे रियल टाइम डाटा ओर जियो टैगिंग के आधार पर मजदूरों को कहा से आना है कहा जाना है यह सब सूचना मिलती रहेगी
धर्मप्राण संस्थाएं उन्हें पानी पिलाएगी, टेंट लगाकर कार्यकर्ता साबूदाने की खिचड़ी खिलाने के लिए मजदूरों की मनुहार करेंगे ओर जो पुलिस उन्हें अभी मारती है पैसा तक छीन लेती है वह स्वंय उनकी आगे बढ़कर सुरक्षा करेगी ओर तो ओर जिले का एसपी उनके पाँव तक दबाएगा, .......हेलिकॉप्टर से राज्य के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी DGM उन पर फूलों की वर्षा करेगा,........ इसके लिये हफ्ते भर के लिए 20 -25 लाख लगाकर हेलीकॉप्टर बुक किया जाएगा , दो ढाई लाख के उन पर फूल बरसाए जाएंगे
जगह जगह डीजे बजने लगेंगे, प्रवासी मजदूर चलते चलते थोड़ा डांस भी कर पाएंगे इनसे उनकी इम्युनिटी ओर मजबूत हो जाएगी
रास्तों में उन्हें रोककर खाना खिलाने के इंतजाम राज्य सरकारें कर देगी, धर्मपरायण संगठन पूरी श्रद्धा भक्ति से उसकी सेवा में जुट जाएंगे, ट्रक मालिकों को निर्देश दे दिए जाएंगे कि मजदूरों को पहले रास्ता दे उन्हें कुचले नही ओर अगर कोई वाहन मजदूरों को कुचलता है तो उसे रोक कर उसमे आग लगाने की पूरी छूट भी मिल जाएगी .......
जो मुख्यमंत्री उन्हें रोक लेना चाह रहा है वह स्वंय आगे बढ़कर उनकी अगवानी करेंगे......... मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों को यहाँ तक निर्देशित करेगा कि हाईवे किनारे बड़े बड़े लग्जरी टेन्ट लगवा कर मजदूरों के आराम की डोरमैट्री में व्यवस्था की जाए यहाँ तक कि मुख्यमंत्री सड़कों पर लगे गूलर के पेड़ो को कटवा भी देगा....... सड़को पर कांटे तक बिनवा दिए जाएंगे कि मजदूरों को कोई कष्ट न हो .....….
यानी आप खुद ही सोचिए कि सिर्फ वस्त्र का कलर बदलने से, रामनामी ओढ़ लेने से, कंधे पे एक कांवड़ उठा लेने से कितना बड़ा परिवर्तन सरकार की सोच में हो जाएगा इसका अंदाज़ा भी सड़क पर चलता हुआ मजदूर नही लगा पा रहा है
यह बहुत छोटा सा उपाय है पर बेहद प्रभावी साबित होगा ऐसी आशा है........
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भूखा आदमी सड़क किनारे कराह रहा था। एक दयालु आदमी रोटी लेकर उसके पास पहुँचा और उसे दे ही रहा था कि एक-दूसरे आदमी ने उसका हाथ खींच लिया। वह आदमी बड़ा रंगीन था।
पहले आदमी ने पूछा, 'क्यों भाई, भूखे को भोजन क्यों नहीं देने देते?'
रंगीन आदमी बोला, 'ठहरो, तुम इस प्रकार उसका हित नहीं कर सकते। तुम केवल उसके तन की भूख समझ पाते हो, मैं उसकी आत्मा की भूख जानता हूँ। देखते नहीं हो, मनुष्य-शरीर में पेट नीचे है और हृदय ऊपर। हृदय की अधिक महत्ता है।'
पहला आदमी बोला, 'लेकिन उसका हृदय पेट पर ही टिका हुआ है। अगर पेट में भोजन नहीं गया तो हृदय की टिक-टिक बंद नहीं हो जाएगी!'
रंगीन आदमी हँसा, फिर बोला, 'देखो, मैं बतलाता हूँ कि उसकी भूख कैसे बुझेगी!'
यह कहकर वह उस भूखे के सामने बाँसुरी बजाने लगा। दूसरे ने पूछा, 'यह तुम क्या कर रहे हो, इससे क्या होगा?'
रंगीन आदमी बोला, 'मैं उसे संस्कृति का राग सुना रहा हूँ। तुम्हारी रोटी से तो एक दिन के लिए ही उसकी भूख भागेगी, संस्कृति के राग से उसकी जनम-जनम की भूख भागेगी।'
वह फिर बाँसुरी बजाने लगा।
और तब वह भूखा उठा और बाँसुरी झपटकर पास की नाली में फेंक दी
- हरिशंकर परसाई
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इतिहास में इतनी झूठी सरकार कभी देखने को नही मिलेगी अभी कुछ देर पहले न्यूज़ 18 की खबर है कि रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ट्वीट किया है 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर रेलवे बीते छह दिनों से रोजाना 300 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चला रही है. मैं सभी राज्यों से अपील करता हूं कि वे अपने फंसे प्रवासियों को बाहर निकालने और वापस लाने में मदद करे
कौन सी दुनिया मे हो पीयूष गोयल जी?......इतना खुला झूठ तो मत ही बोलो, आपके हिसाब से रोजाना 300 श्रमिक स्पेशल ट्रेन 6 दिन में चलाई है इसका मतलब है कि कुल 1800 ट्रेंन चली है........ वैसे रेलवे ने 1 मई से से स्पेशल श्रमिक ट्रेंन चलाने की बात की थी तीन दिन पहले अमर उजाला की खबर है 'भारतीय रेलवे ने गुरुवार को कहा कि उसने 1 मई से अब तक यानी 7 मई गुरुवार तक मात्र 163 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें ही चलाई हैं। ओर आप तो 300 ट्रेंन पर डे कह रहे हो या तो आप झूठ बोल रहे हो या आपका मंत्रालय झूठ बोल रहा है?.......
8 मई को नवभारत टाइम्स की खबर है कि लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों, छात्रों और अन्य लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे ने अबतक कुल 222 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया है। इसके जरिए रेलवे ने 2.5 लाख से ज्यादा यात्रियों को उनके गृह राज्य तक पहुंचाया है,
यानी अगर 222 में 163 घटा दिया जाए तो एक दिन में आपने मात्र 59 ट्रेनों का संचालन किया है अब एक ट्रेंन मे यात्री कितने जाते ये गणित भी जान लीजिए आपकी ही सूचना के अनुसार हर विशेष ट्रेन में 24 कोच हैं। हर कोच में 72 सीटें हैं। लेकिन राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर की तरफ से एक कोच में केवल 54 लोगों को ही बैठाया जा रहा है। यह फैसला सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके तहत किसी भी यात्री को मिडिल बर्थ नहीं दी गई है।
यानी 24x54 = 1296 यात्री अब शुक्रवार 8 मई तक आपने ट्रेंन चलाई आपने मात्र 222 यानी 222x1296 ये फिगर हुआ 2 लाख 87, हज़ार 712
वैसे नवभारत टाइम्स की खबर में 222 ट्रेंन से मात्र ढाई लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पुहंचाया जा सका है, अकेले बिहार के कम से कम 40 लाख प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए है विभिन्न राज्यों से कुल मिलाकर यह संख्या करोड़ो में होने जा रही है........ऐसे में आप 1200 मजदूर प्रति ट्रेंन के हिसाब से कब तक इन मजदूरों को अपने गृह जिले तक पुहंचा पाओगे........
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आज हम जॉन पर्किन्स के बारे में बात करेंगे
गतांक से आगे........
आप कहेंगे कि बिल गेट्स श्रृंखला में जॉन पर्किन्स का क्या काम ?......ठीक है! उनका कोई सीधा संबंध बिल गेट्स एंड मेलिंडा फाउंडेशन से नही है लेकिन बिल गेट्स एंड मेलिंडा फाउंडेशन जैसे समूह कैसे पूरे विश्व मे ख़ास तौर पर तीसरी दुनिया के देशों में कैसे काम करते हैं यह उनके उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है
1945 में अमेरिका में जन्मे जॉन पर्किन्स ने एक प्रमुख इंटरनेशनल एडवाजरी फर्म में मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते थे विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र, आईएमएफ, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग, फॉर्च्यून 500 निगमों और अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों के नेताओं को सलाह देने का काम करते थे लेकिन वास्तव में वह लेकिन वास्तविक तौर पर वो अमेरिका के ईकोनॉमिक हिटमैन थे
2004 में जॉन पर्किन्स ने अपनी आत्मकथा लिखी जिसने दुनिया भर में हंगामा मचा दिया उनकी आत्मकथा का शीर्षक था "कन्फैशन्स ऑफ एन ईकोनॉमिक हिटमैन" अपने इस विशिष्ट टाइटल के बारे में बताते हुए जॉन पर्किन्स लिखते हैं 'Economic hit men (EHMs) are highly paid professionals who cheat countries around the globe out of trillions of dollars. They funnel money from the World Bank, the U.S. Agency for International Development (USAID), and other foreign "aid" organizations into the coffers of huge corporations and the pockets of a few wealthy families who control the planet’s natural resources. Their tools include fraudulent financial reports, rigged elections, payoffs, extortion, sex, and murder. They play a game as old as empire, but one that has taken on new and terrifying dimensions during this time of globalization. I should know; I was an EHM."
ईकोनॉमिक हिटमैन काफी अच्छी सेलरी पाने वाले वो लोग होते हैं जो पूरे विश्व के कई देशों के अरबों-खरबों रुपए धोखे से हड़पने का काम करते हैं। यह लोग विश्व बैंक, यूनाईटेज स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवेलपमेंट (USAID) और अन्य विदेशी सहायता संगठनों से पैसे निकालकर उनसे विश्व की बड़ी-बड़ी कॉरपोरेशन्स और कुछ अति धनवान परिवारों की तिजोरिया भरते हैं जो इन पैसों और रसूख से पूरे विश्व की प्राकृतिक सम्पदाओं को नियंत्रित करते हैं। इसके लिए यह लोग झूठी फाइनेंशियल रिपोर्टस, जबर्दस्ती थोपे गए चुनाव, रिश्वत, फिरौती, सेक्स और यहां तक कि हत्या जैसे कामों का भी सहारा लेते हैं।
इन प्रोफेशनल्स का काम तीसरी दुनिया के विकासशील देशों के राजनीतिक नेताओं आर्थिक संस्थाओं को वर्ल्ड बैंक या यूएसएड सरीखी वैश्विक संस्थाओं से भारी-भरकम विकास कर्ज लेने के लिए राज़ी करना है। और जब यह देश इन भारी-भरकम कर्ज़ों को लौटा पाने की स्थिति में नहीं होते तब कर्ज़ माफ़ी के नाम पर अमेरिका जैसे बड़े देश उनसे अपनी शर्ते मनवाते हैं।
विकासशील राष्ट्रों को कर्जा लेने को तैयार करने के लिए पर्किन्स ऐसी फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करते थे जो कि यह दिखाती थी कि कर्ज़ के इन पैसों से देश में जो इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा उससे देश की जीएनपी (ग्रॉस नेशनल प्रोडक्ट) बढ़ेगी। पर्किन्स के अनुसार जीएनपी के आंकड़े इन कामों के लिए काफी उपयुक्त होते हैं क्योंकि अगर सिर्फ एक व्यक्ति या कंपनी की आय में भी वृद्धि हो जाए तो जीएनपी में वृद्धि दिखने लगती है।
कर्ज नहीं चुका पाने के कारण इन छोटे राष्ट्रों के नेता राजनीतिक, आर्थिक और अन्य आंतरिक मामलों पर विकसित देशों की दखलंदाजी सहने के लिए विवश हो जाते हैं। इस तरीके से यह ईकोनॉमिक हिटमैन विकासशील देशों और विकसित देशों के बीच की आर्थिक खाई को और गहरा करने और गरीब देशों की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने का काम करते हैं ताकि विकसित देश अपनी मनमानी कर सकें।
जॉन पर्किन्स ने इस व्यवस्था को 'कॉरपोरेटोक्रेसी' का नाम दिया है। कॉरपोरेटोक्रेसी- यानि विकसित देशों की सरकारों, बैंकों और अत्यन्त धनवान कॉरपोरेशन्स का संगठन जो विकासशील देशों का पैसा धोखे से हड़पकर उनसे अपनी मांगे मनवाने का काम करता है।
जॉन पर्किन्स के बारे में यह पूरा विवरण शब्द कृतियां नामक ब्लॉग से साभार लिया गया है यदि आप कॉरपोरेटोक्रेसी को समझना चाहते हैं तो विस्तृत रूप कमेन्ट बॉक्स की लिंक में पढ़ सकते हैं .......उनका एक ted के प्रोग्राम में दिया गया स्पीच भी इकनॉमिक हिटमैन की टर्म को समझने में सहायता करेगा अनुरोध है कि उस 17-18 मिनट के उस वीडियो को जरूर देखिए
जॉन पर्किन्स 70 -80 या 90 के दशक की बात करते हैं जब एक अमेरिकी अर्थशास्त्री की सलाह को तीसरी दुनिया के देश गम्भीरता से लिया करते थे लेकिन अब जमाना बदल गया है, गोरे लोगो से स्थानीय लोग वैसे ही चिढ़ जाते हैं अब भारत जैसे देशों में इकनॉमिक हिटमैन का किरदार वो भारतीय निभाते हैं जो बड़ी बड़ी अमेरिकन या यूरोपीय यूनिवर्सिटीयो से बिजनेस ओर इकनॉमी में मास्टर्स ओर पीएचडी जैसी डिग्री लेकर के आते हैं और सरकार उन्हें सीधे नीति निर्माण को प्रभावित करने वाले पदों पर नियुक्ति दे देती है और तब ये लोग बड़े अमेरिकी कारपोरेट ओर अमेरिकी सरकार के अनुकूल नीतियों का निर्माण करते हैं ........जैसे बड़े बड़े सरकारी संस्थानो का प्राइवेटाइजेशन करना, सब्सिडी जैसी व्यवस्था को देश पर बोझ बताना,
अक्सर यह काम यह लोग समिति बनाकर करते हैं इन समितियों के प्रमुख ये नए प्रकार के इकनॉमिक हिटमैन होते हैं ........फिर अमेरिकन हितों के अनुसार उसकी रिपोर्ट तैयार करते हैं फिर उस रिपोर्ट को सरकार को पेश कर दी जाती है ओर सरकार उस समिति की अनुशंसा के आधार पर नीतियां लागू कर देती है सन 2000 से 2020 तक यह खेल धड़ल्ले से भारत मे खेला जाता रहा है........ बिल गेट्स ओर मेलिंडा फाउंडेशन इस खेल में मीलों आगे है दरअसल यह लोग ऐसे ही गेम सेट करने के लिए परोपकार का चोला ओढ़ लेते है
क्रमशः
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अब श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 1200 यात्रियों की जगह 1700 श्रमिक यात्रा कर सकेंगे, यानी ट्रेन में जितनी सीटें होती हैं, उन्हें पूरी तरह से भरा जाएगा.
यानी बीच की सीट पर यात्रियों को नहीं बिठाने के सोशल डिस्टेंसिंग के फार्मूले को भी 'पांडेचेरी वणक्कम'
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मोदी राज में कुछ राज्यों में बिल्कुल राम राज्य आ गया है......... इन राज्यों के शराब ठेकेदार शराब की दुकाने खोलने से ही मना कर रहे हैं लेकिन हमारा देश का मीडिया इतना खराब है कि वह ऐसा सिर्फ पंजाब के बारे में ही दिखा रहा है पंजाब में के बारे में यह खबर दिखाई गयी थी कि मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक में पंजाब के कैबिनेट मंत्री मनप्रीत सिंह बादल व चरणजीत चन्नी की मुख्य सचिव करण अवतार के साथ शराब पॉलिसी को लेकर जमकर कहासुनी हुई. इसके बाद वित्तमंत्री मनप्रीत बादल मीटिंग को बीच में ही छोड़कर चले गए.
लेकिन मामला क्या था यह नही बताया गया!..... दरअसल मसला ये था कि सीनियर आईएएस अधिकारी ये चाह रहे थे कि साल 2020-21 के लिए आबकारी नीति इस तरह से बनाई जाए, ताकि सरकार के राजस्व में किसी तरह की कमी न आए और सरकार अपने तय राजस्व के टारगेट को पूरा करे. हालांकि मंत्रियों की दलील थी कि शराब के ठेकेदारों की हालत खस्ता है. पंजाब में ज्यादातर शराब का इस्तेमाल होटलों और शादियों में होता है, लेकिन होटल भी बंद हैं और किसी तरह के आयोजन और फंक्शन भी नहीं हो रहे हैं, इसी वजह से शराब के ठेकेदारों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. उनका भी ख्याल रखा जाए
सच्चाई यह है कि पंजाब में शराब ठेकेदारों के सिंडिकेट ने सरकार को हर महीने दी जाने वाली फीस को मुद्दा बनाकर ठेके खोलने से इनकार कर दिया है वो कह रहे कि राज्य में शराब का कारोबार करीब 6000 करोड़ का है और उसी हिसाब से सरकार को लाइसेंस फीस आदि अदायगियां की जाती हैं, आम दिनों में 14 घंटे ठेके खोले जाते हैं लेकिन अब कर्फ्यू में ढील के दौरान राज्य सरकार केवल 4 घंटे के लिए ठेके खोलने की अनुमति देने का मन बना रही है जबकि मासिक फीस को लेकर कोई बात नहीं कर रही।
ठीक यही समस्या मध्यप्रदेश की भी है यहाँ भी भारी ड्यूटी से बचने के लिए खुद शराब ठेकेदार ही दुकान खोलने के लिए तैयार नहीं हैं. ज़्यादातर जगहों पर दुकानें बंद हैं. ठेकेदार लॉबी की आपत्ति फीस को लेकर है. साल 2020 21 के लिए 10, 650 करोड़ रुपए रेवेन्यू के साथ शराब दुकानें आवंटित हुई थीं. यह एक्साइज ड्यूटी 1 अप्रैल से प्रभावी है. लॉक डाउन के कारण महीना भर से ज़्यादा वक्त से दुकानें बंद हैं. इसलिए बिक्री भी चौपट है. ठेकेदार इतनी ड्यूटी कैसे पे करें. ये बड़ी समस्या है
मध्यप्रदेश के गृह मंत्री श्री नरोत्तम मिश्रा ने बयान दिया है कि जो शराब ठेकेदार दुकाने नहीं खोलेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ओर उधर शराब ठेकेदारों का कहना है कि प्रदेश में शराब का विक्रय शुरू करने के कारण कोरोनावायरस का इन्फेक्शन बढ़ने की 100% संभावना है, इसलिए हम अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए शराब की दुकान नहीं खोलेंगे,
मतलब क्या ग़जब का मजाक चल रहा है प्रदेश में देख लीजिए?......
ठीक यही हाल उत्तर प्रदेश के भी है उत्तर प्रदेश के शराब और बीयर विक्रेता भी अब कारोबार करने को तैयार नहीं हैं। कोरोना संकट की वजह से उपजे हालात में बढ़ती आर्थिक दिक्कतों के चलते शराब और बीयर की लगातार घटती जा रही बिक्री और प्रदेश सरकार की नई आबकारी नीति में देसी व अंग्रेजी शराब का निर्धारित कोटा हर हाल में उठाने की बाध्यता की वजह से इन विक्रेताओं को अब राज्य में मयखाने चलाने का कारोबार रास नहीं आ रहा है।
यानी सरकार कह रही है कि दारू बेचो लेकिन ठेकेदार ही मना कर रहे हैं ...फिर आया कि नही राम राज्य?....
Yesterday at 15:23 · Public
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आज एक मित्र से बात हुई उसने बताया कि उसकी कॉलोनी में रहने वाला परिवार की बेटी मुंबई में लॉक डाउन में फँस गयी थी बड़ी मुश्किल से पास की जुगाड़ कर पिता अपनी कार से मुम्बई के लिए निकले (आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हमारे शहर से छूता हुआ ही AB रोड यानी आगरा बॉम्बे निकलता है ) AB रोड से वह कार से सिर्फ 7 घण्टे की अंदर मुंबई पुहंच गए बेटी को उन्होंने पिक किया और वापस लौटने लगे लेकिन आश्चर्य की बात है उसी रास्ते से उन्हें वापस आने में 18 घण्टे लग गए, उन्होंने आकर बताया कि लाखों की संख्या में मजदूर सड़को पर पैदल, साइकिल से, रिक्शे से ट्रकों से यानी जैसे बन पड़े वैसे लौट रहा है हाइवे पर भयानक जाम है मजदूरों के बहुत ही बुरे हाल हो रहे है .......
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प्रवासी मजदूरों को लेकर मैंने दसियो रिपोर्ट मुंबई की देख ली होगी लेकिन एक भी माई के लाल ने गुजरात से ग्राउंड रिपोर्ट दिखाने की हिम्मत नहीं की? बड़े तुर्रम खां चैनलों की बात कर रहा हूँ
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viya
किसी भी सड़क पर, घर लौटते हुए मजदूर से बात कर लीजिए, सब सिर्फ एक ही बात कहते है कि ' कैसे भी करके बस एक बार घर पुहंच जाए उसके बाद अपने गांव को छोड़कर परदेश इस जन्म में तो नहीं आएँगे'.......
राज्य सरकारों द्वारा, बड़ी बड़ी फैक्ट्री मालिकों द्वारा जो व्यहवार आज इन मजदूरों से किया गया है उससे देश के उद्योगों का भट्टा बैठना तो तय मानिए। ...
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Girish Malviya
ये हालत है तिरुपुर रेलवे स्टेशन की जो तमिलनाडु में स्थित है, अगर मजदूर पैदल सड़क पर घर की तरफ चल न पड़े तो ओर क्या करे?..........सब सरकारों को,चाहे वह केंद्र की मोदी सरकार हो या राज्यों की सरकार, .....सब सरकारों को बहुत अच्छी तरह से मालूम था कि 3 मई के बाद क्या होने वाला है तैयारी के लिए टाइम नही मिला जैसे बहाने नही बनाए जा सकते!......... लेकिन इन सरकारों ने पुलिस के डंडे के जोर पर ही व्यवस्था संभालने का फैसला किया और आज परिणाम हमारे सामने है.......भारत के विभाजन पर हम लोग अपने बुजुर्गों से, अपने दादा दादी जी से जो किस्से सुनते थे वही पलायन आज हम प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं .......यह मजदूर आज की सरकारों की घोर विफलता की कहानी बता रहा है अफसोस की बात यह है कि न हम इसे न देखना चाहते है न सुनना चाहते है!........
यकीन मानिए जितने लोग कोरोना से नही मरे होंगे न, उससे कही ज्यादा लोग रास्तों पर चलते हुए दम तोड़ देंगे........
इलाज-ए-चाक-ए-पैराहन हुआ तो इस तरह होगा
सिया जाएगा काँटों से गरेबाँ हम न कहते थे
कोई इतना न होगा लाश भी ले जा के दफ़ना दे
इन्हीं सड़कों पे मर जाएगा इंसाँ हम न कहते थे
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PM मोदी आज रात 8 बजे देश को सम्बोधित करने वाले हैं.......सम्बोधन में मोदीजी क्या बोलेंगे ओर भक्त समुदाय की प्रतिक्रिया क्या होगी इस पर 4 अनुमान पेश है........
1) मितरो 17 मई से देश मे लॉक डाउन खत्म किया जाता है
भक्त समुदाय + न्यूज़ चैनल : वाह वाह
2) मितरो 17 मई के बाद देश में लॉक डाउन 4 लागू किया जाता है
भक्त समुदाय + न्यूज़ चैनल : वाह वाह
3) मितरो 17 मई के बाद देश केवल रेड ज़ोन में लॉक डाउन 4 लागू किया जाता है
भक्त समुदाय + न्यूज़ चैनल : वाह वाह
4) मितरो 17 मई के बाद जो लॉक डाउन 4 लागू किया जा रहा है वो अब तक का सबसे कड़ा लॉक डाउन होगा, पुलिस को कानून व्यवस्था लागू करने के लिए हर तरह की छूट दी जाती है
भक्त समुदाय + न्यूज़ चैनल : वाह वाह
6 hrs · Public
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सट्टा बाजार से खबर आ रही है, दो बातों पर सट्टा लगना जोर-शोर से शुरू हो गया है.......
1) टसुए बहाएंगे कि नही!.....
2) मास्क के रूप में गमछा चेक्स वाला पहनेंगे कि सादा वाला!.....
#8_PM
6 hrs · Pub
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जिसे एक धड़े ने पप्पू कहकर प्रचारित किया था उसने लगभग आज से 4 महीने पहले ही आने वाली मुसीबत के बारे में चेता दिया था लेकिन आप उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति का इस्तकबाल करने की तैयारी कर रहे थे।
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कल ब्रिटेन में लॉकडाउन को लेकर भविष्य के रोडमैप की घोषणा की.... जॉनसन ने कोरोना लॉकडाउन खत्म करने के लिए तीन चरणों वाले एक अंतरिम 'एग्जिट प्लान' को पेश किया है
उन्होंने कहा अगर कोई घर से काम नहीं कर सकता है तो अब उन्हें काम पर जाने के लिए "सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए" लेकिन सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से बचना चाहिए.ब्रिटिश पीएम ने एक पांच-स्तरीय एलर्ट सिस्टम पर काम करने की बात की है जिसका इस्तेमाल ब्रिटिश सरकार वैज्ञानिक डेटा का उपयोग कर वायरस के प्रसार की दर को मॉनिटर और ट्रैक करने के लिए करेगी, इसे 'R' दर कहा जाएगा.बोरिस जॉनसन ने अपने एलर्ट सिस्टम के 'लेवल' के बारे में बताते हुए कहा कि, 'लेवल 1 का मतलब है कि यह बीमारी अब ब्रिटेन में मौजूद नहीं है. लेवल 5 सबसे गंभीर है. लॉकडाउन के दौरान हम लेवल 4 में रहे हैं, और आपके त्याग के लिए धन्यवाद कि अब हम लेवल 3 में कदम रखने की स्थिति में हैं.'
बोरिस जॉनसन ने कहा कि "stay at home, protect the NHS, save lives" की जगह अब एक नया स्लोगन है. यह नया स्लोगन है,"stay alert, control the virus, save lives"
कुछ ऐसे ही जुमले जिल्ले इलाही भी उछाल सकते है
3 hrs · Public
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मोदी सरकार हवाई उड़ानों में यात्रियों के लिए मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु ऐप इन्स्टॉल करना अनिवार्य करने करने जा रही है अभी जो प्रस्ताव दिया गया है उसके मुताबिक 'ऐसे यात्री जिनका आरोग्य सेतु ऐप 'ग्रीन' नहीं दिखेगा उन्हें एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। .......
चीन के बाद भारत दूसरा देश होगा जो यात्रा के लिए ऐसी सर्विलांस मोबाइल ऐप को अनिवार्य बनाने जा रहा है........चीन में हेल्थ कोड सर्विस ऐप का उपयोग लोगों के प्रभावित इलाकों में आवाजाही का प्रबंधन करने के लिए किया गया था। हुबेई प्रांत में लॉकडाउन खत्म होने के बाद सरकार ने लोगों को ग्रीन कोड के साथ प्रांत में आने-जाने की अनुमति दी थी।...........
सम्भव है इस बारे में कोई अध्यादेश सरकार लाए ओर इस आरोग्य सेतु एप्प को अनिवार्य बना दे.......मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर प्राइवेसी के अधिकार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते है....... हम सर्विलांस स्टेट में प्रवेश करने जा रहे है......
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ख़ास बात यह है कि गुजरात हाई कोर्ट में ऐसी 20 सीटों के नतीजों की याचिका पर सुनवाई बाकी है...........
गुजरात में आज बीजेपी सरकार के शिक्षा और कानून मंत्री भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा की विधायकी चली गई है. यह गुजरात हाई कोर्ट का फैसला है पूरा मामला बड़ा दिलचस्प है भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा चुनाव में 327 वोट से जीते थे. कांग्रेस उम्मीदवार अश्विन राठौड़ ने जनवरी 2018 में नतीजे को हाई कोर्ट में चुनौती दी. अपनी याचिका में उन्होंने मतों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा था कि रिटर्निंग ऑफिसर और धोलका के डिप्टी कलेक्टर धवल जानी ने पोस्टल बैलेट की गिनती में गड़बड़ीकरते हुए उन्हें मिले 429 बैलेट पेपर को रद्द कर दिया.......... राठौड़ ने कहा कि अगर इन बैलेट पेपर गिना जाता तो वे चुनाव जीतते, क्योंकि जीत-हार का अंतर काफी कम रहा था. कांग्रेस उम्मीदवार ने याचिका में खुद को विजयी घोषित करने की मांग भी की थी.
कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला देते हुए माना कि मतगणना के दौरान काफी अनियमितताएं थीं. साथ ही धोखेबाजी और गलत आचरण भी देखने को मिला. इसलिए पूरा चुनाव निरस्त किया जाता है.
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भी ऐसी बीसियों सीट थी जिन पर कांग्रेस प्रत्याशी अगर दमदारी से हाईकोर्ट का रुख करते तो आज निर्णय उनके पक्ष में होता लेकिन उन्होंने तो मतगणना स्थल पर चल रही तमाम गड़बड़ियों पर आँख मूंदे रखी और गिनती पूरी होने से पहले ही मैदान छोड़ दिया। ......
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पीएम मोदी ने बताया कि 18 मई से पहले लॉकडाउन के चौथे चरण की जानकारी साझा की जाएगी, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये लॉकडाउन नए रंग-रूप-नियम वाला होगा। बता दें कि देश में लागू लॉकडाउन 3.0 की अवधि 17 मई को खत्म हो रही है। पीएम मोदी ने कहा कि लॉकडाउन 4.0 नए रंग रूप वाला होगा, नए नियमों वाला होगा। राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं, इससे जुड़ी जानकारी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी।
पीएम मोदी ने कोरोना आपदा से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है, जो भारत की जीडीपी का 10 फीसद है। पिछला और आज का पैैकेज का मिलाकर है यह राशि।
पीएम ने कहा कि इस पैकेज के बारे में विस्तार से जानकारी बाद में दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है।
कोरोना से हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी
पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना से हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ा आपदा भारत के लिए संदेश और एक अवसर लेकर आई है। उन्होंने कहा कि मैं एक उदाहरण के साथ बताना चाहता हूं कि जब कोरोना संकट शुरू हुआ तो भारत में एक भी पीपीई किट नहीं बनती थी न ही एन95 मास्क का उत्पादन होता था। लेकिन आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। हम ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि आपदा को हमने अवसर में बदल दिया है।
थकना नहीं, हारना नहीं, टूटना नहीं: पीएम
अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि यह संकट अभूतपूर्व है, लेकिन थकना, हारना, टूटना, बिखरना मानव को मंजूर नहीं है। सतर्क रहते हुए ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है।' प्रधानमंत्री ने देश-दुनिया में कोविड-19 मरीजों की मौत पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
पीएम का 'चौथा राष्ट्र के नाम संबोधन'
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दो महीने में चौथी बार देश को संबोधित किया है। कोरोना संकट के बीच पीएम मोदी ने पहली बार 18 मार्च को देश को संबोधित किया था। उस संबोधन में उन्होंने लोगों से 22 मार्च को सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक 'जनता कर्फ्यू' का पालन करते हुए घरों से नहीं निकलने की अपील की थी। फिर, 24 मार्च को दूसरे संबोधन में पीएम मोदी ने 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था। पीएम ने तीसरी बार 14 अप्रैल को देशवासियों को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया था। हालांकि, बाद में सरकार ने 3 मई की मियाद बढ़ाकर 17 मई कर दी और भारत लॉकडाउन के तीसरे चरण में प्रवेश कर गया। मंगलवार के 'राष्ट्र के नाम संबोधन' के दौरान पीएम मोदी ने लॉकडाउन के चौथे चरण का भी ऐलान कर दिया।
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सियागंज से तीन दिन बेचा जाएगा ज़हर !
अंकुर जायसवाल, इंदौर
प्रशासन ने आँख मूँद कर मार्च से लागू हुए, लॉकडाउन के बाद से दुकानो-गोदामों में पड़े सॉफ्ट ड्रिंक पैक बोतलों को भी बेचने की अनुमति दे दी हैं। कई ट्रांसपोर्टो पर भी हज़ारों कार्टून साफ्ट ड्रिंक के रखे हुए हैं। इन्हें भी ठिकाने लगाने की हो रही हैं जुगाड़। जानकारी के मुताबिक़ यह माल उपभोग लायक़ नहीं बचा हैं। सियागंज के 33 दुकानदारों को माल बेचने की परमिशन दी है। वह पूरी तरह ग़लत निर्णय हैं।
ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट जहर बिकेगा:
प्रशासन ने 13, 14, 15 मई को सियागंज होलसेल मार्केट के दुकानदारों को माल बेचने की परमिशन दी है। प्रशासन ने एक बार भी नहीं सोचा कि यह सारे दुकानदार खाने-पीने का सामान बेचते हैं। मार्च से हुई तालाबंदी को क़रीब 50 दिन हो गए हैं। उसके पहले से बना इनके पास जितना भी गोदामों में खाने और पीने का सामान रखा हुआ है वह सब लगभग खराब हो चुका होगा। यह दुकानदार ब्रांडेड कंपनियों का डुप्लीकेट सॉफ्ट ड्रिंक और कोल्ड ड्रिंक है जो कि अब जहर बन चुका होगा। इनके उपभोग की एक समय सीमा 60 से 90 दिन की होती हैं।
ट्रांसपोर्ट के रास्ते ठिकाने लगाने की जुगत:
ये जहर सियागंज की दुकानों पर सैंपल के तौर पर रखा जाता है। इन सब के गोडाउनओं में करोड़ों रुपए का माल भरा पड़ा हैं। अब सारे ट्रांसपोर्ट जो कि इंदौर से महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और एमपी के सारे एरिया छोटे एरिया गांव में जहां अभी करोना नहीं पहुंचा वहां पर एक नए कोरोना बीमारी जैसी महामारी पहुंचाने की तैयारी है। प्रशासन को तत्काल फूड अफसरों को इन सारी दुकानों, गोदामों और ट्रांसपोर्ट पर भेजना चाहिए। सैंपल लेकर जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही माल बेचने की अनुमति देना चाहिए। वरना अगर यह माल जनता तक पहुँच गया तो आप समझ सकते हैं की क्या हालात होने वाले हैं।
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मोदी को सलाह और चुनौती, और वित्तमंत्री भी ध्यान से सुने..वित्तमंत्री को देखे कई युग बीत गए..
● अनिल अंबानी, IL&FS, DHFL- वाधवा ग्रुप, HDIL और Zee - इन पांचों के लोन का जोड़ पता है आपको?
● लगभग 4.6 लाख करोड़ या $66 बिलीयन..जीडीपी का 2.5%..क्या आपको गोदीमीडिया ने बताया? सारे देशद्रोही है..
● और सुनिये - ये 4.6 लाख करोड़ दुुनिया की 44.04% देशो की Individual जीडीपी से ज्यादा है..यानी आधे विश्व के बराबर लूट लिया है..
● इन सारी कंपनियो से बीजेपी को कितना चन्दा मिला है? क्या बीजेपी बताएगी?
● बीजेपी को चाहिए कि इन चोरों से लिया चन्दा देश के खजाने में वापस लौटा दे..क्या हिम्मत है ऐसा करने की?
● मोदी एक सरकारी आदेश जारी कर ऐसे और अन्य लोगो की सारी सम्पत्ति जब्त कर देश को पैकेज घोषित करे..
राहुल गांधी की तरह कैंब्रिज से Mphil करने के लिए दिन में आपको कमसे कम 16 घन्टे पढ़ाई करनी पड़ती है.."गटर की गैस" शराब या चरस के नशे में नाली में गिरा हुआ कोई भी नशेड़ी बोल सकता है..पूरा देश लूट लिया गया है, और इसके लिए आप भी जिम्मेदार है.. #राहुलगांधी #प्रियंकागांधी #aicc #krishnaniyer
9 May at 15:45 · Public
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आज भक्तो और संघीयो को जलील करने का दिन है..जब भी जमानत की बात करे तो ये लिस्ट पोस्ट कीजिये..Save कीजिये..
● आडवानी, मुरली जोशी बेल पर है..मैं कन्फर्म नही हूँ पर अटल भी बेल पर ही था मरते वक्त..पूरा मार्गदर्शक मंडल बेल पर..
● चोर बंगारू लक्ष्मण बेल पर ही था..
● तड़ीपार भी बेल पर था..
● उमा भारती बेल पर है या थी..
● जनवरी 2015 से मुख्तार नकवी बेल पर
● मुकुल रॉय बंगाल में बेल पर..
● केरल के सुरेंद्रन बेल पर..
● रेप पर बेल वाले मंत्री बनाये मोदी ने..
● हरियाणा के विकास बारला बेल पर
● चिन्मयानंद बेल पर ही है🤣
● रीता बहुगुणा जोशी, बाबुल सुप्रियो बेल पर..
● योगी मई 2016 मे सिद्धार्थनगर CJM कोर्ट से 15,000 की बेल पर है..इसके अलावा भी अलग अलग केस में बेल पर रहा था या है..
● केशव प्रसाद मौर्य 2014 से हत्या के केस में बेल पर है..2018 में केशव मौर्य को दुर्गा पूजा की चंदा चोरी केस मे बेल मिली है..
● गुजरात के C R Patil , दिनुभाई सोलंकी समेत असंख्य बीजेपी के नेता बेल पर है..(कोई गुजरात के मित्र गुजरात की लिस्ट बना दे प्लीज..)
● गुजरात में बीजेपी के दंगों में आरोपी बेल पर..
● बीजेपी के 150 से ज्यादा जनप्रतिनिधि अलग अलग केस में लगभग हर राज्य में बेल पर है..
★ हर भक्त की वाल पर इस पोस्ट को चिपकाने का काम आपका..बीजेपी = बेल जेल पार्टी..
अब तो सुधीर और अर्नब को भी बेल लेनी है..शायद वो समय आने वाला है जब नोटबन्दी जैसे मामले में शायद मोदी, शाह को भी बेल की जरूरत पड़े..#राहुलगांधी #प्रियंकागांधी #aicc #krishnaniyer
(अपने अपने इलाके में बीजेपी नेता जो बेल पर है उनकी लिस्ट बनाइये और कमेंटबॉक्स में डालिये..मैं सबका संकलन कर पोस्ट कर दूंगा)
11 May at 16:03 · Public
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आज एक #प्रोफेसर को #facebook पे #live देखा। उनको जानता हूँ। वो क़ुरआन के चैप्टर्स और आयतों को quote करके खुलेआम गलतबयानी कर रहे थे और सरासर झूठ बोल रहे थे।
#इस्लाम को #कातिल #मजहब, #मुहम्मद साहब और उनके अनुयायियों को लुटेरा और पता नहीं क्या-क्या बोल रहे थे। एक पक्की नौकरीं वाले प्रोफेसर के मुंह से ये सब सुनना दुखद था। #mass #communication के ही प्रोफेसर हैं। चाहता तो वहीं फेसबुक लाइव में उनको जवाब दे सकता था और चैलेंज कर सकता था कि आप हर आयत को पहले quote करो और फिर मतलब बताओ। जो बात आयात में है ही नहीं, उसे अपने मन से जोड़कर गलत बयानी और धार्मिक भावना भड़काने का काम उन्होंने किया।
उनके कहने का स्टाइल ये रहा कि क़ुरआन के फलां चैप्टर के फलां आयत में कहा गया है कि लूटो, मारो, क़त्ल कर दो। यानी एकदम सफेद झूठ। मतलब मैं कह दूं कि आधुनिक इतिहास की फलां पुस्तक में फलां अध्याय के पेज नम्बर फलां पे लिखा है कि महात्मा गांधी ब्राजील में पैदा हुए, वहां वे डाकू थे, फिर 5900 हत्याएं उन्होंने की और तब जाकर उनको चीन के कम्युनिस्ट पार्टी का मुखिया बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने चीन में 2.5 करोड़ लोगों का नरसंहार करवा दिया।
क्या आप गांधी जी को जानते हैं? क्या अपने इतिहास पढ़ा है? अगर हां, तो आप कहेंगे कि ये सब झूठ नहीं, बड़ा अपराध है इतना बड़ा असत्य कहना। तो समझ लीजिए कि ये प्रोफेसर इस्लाम और मुहम्मद साहब के बारे में धार्मिक ग्रन्थ क़ुरआन को quote करके ऐसा ही झूठ बोल रहा था, जिसका कोई सिर-पैर नहीं।
अब अगर सरकारी कॉलेज के प्रोफेसर लेवल के लोग facebook live में सफेद झूठ बोलकर साम्प्रदायिक घृणा और उन्माद फैलाएंगे तो इस देश का क्या होगा, ये सोच लीजिए। उनको अपने आकाओं से किसी चीज़ की लालसा होगी, तो वो कोई और जतन करें। इस्लाम और क़ुरआन के बारे में गलत जानकारी देकर फेसबुक पे धार्मिक उन्माद और ज़हर फैलाने का काम ना करें। उनके पूरे फेसबुक लाइव का लब्बोलुबाब ये था कि मुसलमान खूनी, लुटेरे और दूसरे मज़हब के लोगों का क़त्ल करने वाले होते हैं। उन्होंने क़ुरआन की आयतों को quote करके ये fake news प्रसारित की और इस देश के संविधान व अपनी प्रोफेसरी को कलंकित किया। पता नहीं, इनके पढ़ाए बच्चे कैसे पत्रकार बनते होंगे?
ये सब बेहद बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक रहा। बेहद दुखद।
10 May at 18:47 · Public
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प्रिय अभिषेक
वो तो अमरीका था। जो हिंदुस्तान होता तो बात ही अलग होती।
जीजा कहते- एक साली दिवस भी हो। सालियां कहतीं- एक जीजू दिवस भी होगा।
बुजुर्ग कहते -जब इतने दिबस हैं, तौ एक दिबस घर के मान्य लोगन कौ हू रख लो।
फूफाजी कहते-जे क्या बात हुई? हमारा दिवस सबके संग रख दिया। कोई इज्जत नहीं है क्या हमारी। जो हमारा दिवस अलग नहीं किया तौ हम ससुर दिवस में न तो आवेंगे, न शुभकामना देंगे।
सास कहती - सुनते हो, निम्मी का दूला नाराज है, एक दामाज्जी दिबस भी धर लो। भले हमारा काट दो।
ताऊजी दिवस, देवरानी-जेठानी दिवस, चचिया ससुर दिवस, मौसिया सास दिवस, फूफाजी दिवस और साढूभाई दिवस भी होता।
और एक दिवस उनका होता जो कोई दिवस न होने से रूठ गए है- रूठे लोगन कौ दिवस।
पूँजी वाले सैम अंकिल, फ्री में आइडिया दे रिया हूँ, नोट कल्लो। मौज करोगे।
#दिवसईदिवस
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अपनी माताजी की बिना अनुमति मोदी को अपना "बाप" घोषित कर खुद की माताजी का अपमान करने वाले दो कौड़ी के पात्रा को जलील कीजिये.
- बंगारु लक्ष्मण बीजेपी का अध्यक्ष था (2000-01)..ये रेल मंत्री भी था अटल सरकार में..
- बंगारु रक्षा सौदे में 1 लाख ₹ घुस लेते हुए TV पर लाइव पकड़ा गया था..(13 मार्च 2001)
- इंग्लैंड की वेस्ट एंड इंटरनेशनल कम्पनी सेना को उपकरण बेच रही थी और बंगारु लक्ष्मण 1 लाख ₹ घुस ले रहा था..राष्ट्रवाद, देशप्रेम !!!
- उस वक्त अटल PM था..क्या अटल को बिना बताए रक्षा सौदे में घुस लेना संभव था?
- सरकार में अटल रक्षा सौदे की अनुमति देगा और पार्टी अध्यक्ष घुस लेगा, यही डील थी? जिन्नाह की मजार पर ट्रेनिंग मिली थी?
- TV पर पूरी दुनिया ने देखा था कि कैसे अटल के समय रक्षा सौदों में घोटाला हुआ था..बीजेपी पार्टी अध्यक्ष खुले आम घुस लेता था..
- बंगारु लक्ष्मण को CBI ने गिरफ्तार किया था..बंगारु पर केस चला..
- 28 अप्रैल 2012 को बंगारू को 4 साल की सजा हुई..बंगारु माफी के लिए गिड़गिड़ाया था..पर बच नही पाया..
- 2014 में बंगारु मर गया एक सजायाफ्ता चोर की हैसियत में..
- जिस पार्टी का एक अध्यक्ष घूसखोर रहा हो और दूसरा अध्यक्ष तड़ीपार रहा हो उनकी इज्जत और हैसियत सबको मालूम है..
बीजेपी वालो, तुम्हारा पार्टी अध्यक्ष रक्षा सौदे में घुस लेते हुए पकड़ा गया और एक सजायाफ्ता अपराधी रहते हुए मर गया..रक्षा सौदों के दलालों को, देश से भगाओ सारो को.. #krishnaniyer
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कोई कमाने के लिए शहर जाता है तो इस उम्मीद से नहीं जाता कि अब कभी नहीं लौटेगा. वह परिवार को उम्मीद देकर जाता है कि पैसा कमाएगा और परिवार का बोझ हल्का कर देगा. वह भी बिहार से हरियाणा कमाने गया था. न परिवार ने, न खुद उसने ही कभी यह सोचा होगा कि वह लाख कोशिश के बाद भी घर नहीं लौट सकेगा और रास्ते में मारा जाएगा. वह पैदल चलते हुए वह मारा गया. उसका नाम अशोक था.
बिहार का रहने वाला अशोक अपने एक दोस्त पिंकू और दो अन्य के साथ पैदल बिहार जा रहा था. हरियाणा में अम्बाला के जगाधरी हाइवे पर इन्हें तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी. अशोक की मौके पर ही मौत हो गई. पिंकू गंभीर रूप से जख्मी हो गया.
इनके साथ के ही सुधीर कुमार मंडल ने बताया, 'मैं पूर्णिया का रहने वाला हूं. अम्बाला में पिछले दो-तीन साल से रह रहा हूं. हमारे पास पैसे खत्म हो गए थे, इंतजार कर रहे थे कि कब लॉकडाउन खुलेगा और अपने घर जाएंगे. मेरे चार साथी पैसे खत्म हो जाने पर पैदल ही बिहार के पूर्णिया के लिए निकले थे. जगाधरी रोड पर अज्ञात वाहन ने दो को कुचल दिया. अशोक की मौके पर मौत हो गई, पिंकू गंभीर रुप से घायल हो गया. हमारे दो साथी विजय और मनोज बच गए.'
11 मई का दिन मजदूरों के लिए ज्यादा भयावह रहा. अलग अलग दुर्घटनाओं में कम से कम 15 मजदूर मारे गए हैं.
आजतक की खबर के मुताबिक, मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर, बड़वानी, सागर और शाजापुर जिलों में कुल मिलाकर 11 प्रवासी मजदूरों की मौत हुई, जबकि 14 अन्य घायल हुए. ये सभी महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना से उत्तर प्रदेश जा रहे थे. इनमें से 6 मजदूरों की मौत गर्मी और थकान से हुई. इसके अलावा, नरसिंहपुर जिले में एक ट्रक पलट गया और इस दुर्घटना में 5 मजदूरों की मौत हो गई. इस हादसे में 14 अन्य मजदूर घायल हो गए. इस ट्रक में आम भरा हुआ था और इसी में 20 प्रवासी मजदूर हैदराबाद से उत्तर प्रदेश के एटा और झांसी जा रहे थे.
इनमें यूपी के सिद्धार्थ नगर के रामबली (31) कर्नाटक से घर लौट रहे थे. मध्य प्रदेश के सागर-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई. अस्पताल में उनकी मौत हो गई.
यूपी के ही बस्ती निवासी रामरूप (35) महाराष्ट्र से पैदल लौट रहे थे. शाजापुर जिले में उनकी मौत हो गई. बड़वानी से रिपोर्ट मिली कि मुंबई से उत्तर प्रदेश पैदल जा रहे तीन प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई.
बिहार का रहने वाला शिवकुमार अपने कुछ साथियों के साथ साइकिल से अपने घर बिहार जा रहा था. वे लोग बुलंदशहर से चले थे. रायबरेली पहुंचे थे, तभी कार ने टक्कर मार दी. उसकी मौत हो गई.
यूपी के फतेहपुर में एक सड़क हादसा हुआ जिसमें एक मां-बेटी की मौत हो गई. ये दोनों महाराष्ट्र से आ रहे मजदूरों की टोली में थीं. ये सभी जौनपुर जा रहे थे.
फतेहपुर के हरदासपुर निवासी अनीस अहमद और प्रयागराज निवासी लल्लूराम की महाराष्ट्र से यूपी के रास्ते में मौत हो गई. अलग अलग घटनाओं में इन दोनों की मौत अचानक रास्ते में तबियत बिगड़ने के कारण हुई.
यह दिन भर का कुल आंकड़ा नहीं है. यह बस नमूना है.
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कोविड-19 के गम्भीर और मृतप्राय रोगी किस तरह से अन्य संक्रमित लोगों से अलग हैं ?
वर्तमान कोविड-19 पैंडेमिक में किसी भी वय , लिंग , नस्ल , धर्म , जाति का व्यक्ति इस विषाणु से संक्रमित हो सकता है , पर गम्भीर समस्या होने की आशंका उन्हें अधिक है , जो बड़ी उम्र के हैं अथवा जो किसी दीर्घकालिक रोग से ग्रस्त हैं। ये ही वे लोग हैं , जिनमें मृत्यु-दर भी अधिक पायी जा रही है। ऐसे में यह सोचना स्वाभाविक है कि किसलिए सार्स-सीओवी 2 विषाणु से संक्रमित होने पर वृद्धों व दीर्घकालिक रोगग्रस्त लोगों में ऐसा देखने को मिल रहा है।
एक ऐसे तराजू की कल्पना करिए , जिसका एक पलड़ा दूसरे से बस थोड़ा ही हल्का है। सब्ज़ी-इत्यादि तौलाते समय आपने ऐसी स्थिति अक्सर देखी होगी , जब एक किलो का बाट सब्ज़ीवाला एक पलड़े पर रखता है और दूसरे पलड़े में कोई सब्ज़ी ( मान लीजिए टमाटर ) होती है। दोनों पलड़ों की बराबरी की स्थिति लगभग आ चुकी है : बस थोड़ा सा अन्तर रह गया है। टमाटर वाला पलड़ा बाट वाले पलड़े से थोड़ा ही ऊपर है। तभी सब्ज़ीवाला एक छोटा टमाटर उठाता है और उसे टमाटर वाले पलड़े में रख देता है। बस ! तुरन्त टमाटर वाला पलड़ा नीचे आता है और दोनों पलड़े बराबर हो जाते हैं। एक किलो टमाटर प्रस्तुत है। लीजिए !
जीवन को सब्ज़ी के इस सौदे-सा समझने का प्रयास कीजिए। जीवित व्यक्ति का टमाटर वाला पलड़ा हल्का है। जिसका जितना यह हल्का , उतना वह स्वस्थ। बच्चों और युवाओं में यह पलड़ा अमूमन हल्का रहा करता है। लगभग तीस , पैंतीस या कई बार चालीस की उम्र तक। फिर कोई-न-कोई रोग जीवन में लगने लगता है। ज्यों लकड़ी में दीमक। शोध बताते हैं कि पैंतीस की वय तक आते-आते ढेरों लोगों ( लगभग 25 % ) में कम-से-कम एक दीर्घकालिक रोग लग जाता है , चाहे वह डायबिटीज़ हो , हायपरटेंशन हो अथवा फिर इस्कीमिक हार्ट डिज़ीज़। ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती है , दूसरे दीर्घकालिक रोग व्यक्ति के शरीर से चिपकते हैं। साठ की वय तक आते-आते लगभग 50 % लोग दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। पचहत्तर की वय तक यह प्रतिशत 75 % के क़रीब पहुँच जाता है। जितनी अधिक उम्र , उतनी अधिक दीर्घकालिक ( क्रॉनिक ) बीमारी की आशंका। बड़ी उम्र के लोगों में एक या एक-से-अधिक क्रॉनिक बीमारी बहुधा देखने को मिलती हैं।
बढ़ती उम्र के साथ , दीर्घकालिक रोगों के साथ , धूमपान व मदिरापान के कारण तराजू का सौदे वाला पलड़ा धीरे-धीरे झुकता जा रहा है। वह बाट वाले पलड़े से बराबरी की ओर बढ़ रहा है। बस तभी कोविड-19 उस छोटे टमाटर की तरह उसमें रख दिया जाता है और दोनों पलड़े सन्तुलित हो जाते हैं। यही मृत्यु है।
सौदे वाले पलड़े का नित्य भारी होते जाना दरअसल शरीर में इन्फ्लेमेशन नाम प्रक्रिया का नित्य बढ़ते जाना है। बढ़ती उम्र और दीर्घकालिक रोग मानव-शरीर में एक इन्फ्लेमेशन की स्थिति पैदा करते जाते हैं। स्वस्थ युवा व्यक्ति की तुलना में वृद्धों और दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त लोगों में कोशिकाएँ मरती रहती हैं और प्रतिरक्षा-तन्त्र उनके शवों व उनसे निकले रसायनों का निस्तारण करते रहते हैं। इन कोशिका-शवों का निस्तारण कम ज़रूरी मत समझिए : यह काम कीटाणुओं को मारने से कम आवश्यक नहीं है।
शवों को निस्तारित न किया जाए , तो क्या होगा ? दुर्गन्ध फैलने से स्थिति का बिगाड़ शुरू होगा और बीमारियों तक जाएगा। शरीर के भीतर मृत-मृतप्राय कोशिकाओं व उनसे निकल रहे रसायनों के कारण ही इन्फ्लेमेशन का जन्म होता है। यह शरीर के भीतर होगा अगर मृत कोशिकाओं के शरीरों का 'उचित अन्तिम संस्कार' नहीं किया गया। मृत या मृतप्राय कोशिकाओं से निकल रहे रसायनों को रोका जाएगा। कोशिकीय स्तर पर चल रहा यह आपदा-काल समाप्त किया जाएगा। शरीर में पुरानी के स्थान पर नयी कोशिकाएँ जन्म लेंगी। कोशिका-शवों का त्वरित निस्तारण होगा , तभी शरीर की स्वास्थ्यपरक स्वच्छता बनी रहेगी।
बढ़ती उम्र के साथ कोशिकाओं का बूढ़ा होना और मरना नित्य बढ़ता जाता है। धूमपान करने वाले के शरीर की कोशिकाएँ भी सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक तेज़ी से मर रही होती हैं। अनिद्रा व तनाव भी यही करते हैं , प्रदूषण भी। दीर्घकालिक रोग भी कोशिका-मरण बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाते हैं। इससे पैदा हुई इन्फ्लेमेशन की स्थिति एक ऐसे देश की तरह होती है , जहाँ एक आपदा की तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। तराज़ू का टमाटरी पलड़ा लगातार बाट वाले पलड़े की ओर झुक रहा है।
तभी सार्स-सीओवी 2 का शरीर में प्रवेश होता है। उस शरीर में जो वृद्ध है अथवा दीर्घकालिक रोगों से ग्रस्त है। इस शरीर के भीतर के प्रतिरक्षक सैनिक सालों से लड़ते रहे हैं। पूरे शरीर में इन्फ्लेमेशन की स्थिति सालों से रहती आयी हैं ; चारों ओर मृत-मृतप्राय कोशिकाओं के ढेर रोज़ लगते रहते हैं और उनसे लगातार आपदा-कालीन रसायन निकलते रहते हैं। अब इस थके बोझिल ऊबे-उकताये प्रतिरक्षा-तन्त्र को इस नये विषाणु-शत्रु से जूझना पड़ जाता है। वह जूझता भी है , पर इस मारामारी में इन्फ्लेमेशन का स्तर इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति की जान निकल जाती है। विषाणु ही सीधे-सीधे कोविड-रोगी को नहीं मारता , विषाणु और प्रतिरक्षक कोशिकाओं की लड़ाई में शरीर मारा जाता है। मित्र और शत्रु लड़ते हैं , जान व्यक्ति की जाती है।
इन्फ्लेमेशन पैदा करने वाली स्थितियाँ अगर टमाटर हैं , तो सार्स-सीओवी 2 तराज़ू बराबर करने के लिए जोड़ा गया अन्तिम छोटा टमाटर। बहुत हल्के टमाटरी पलड़े में विषाणु के छोटे टमाटरी इन्फ्लेमेशन से तराज़ू के पलड़े बराबर होने की उम्मीद बहुत कम है। इसलिए स्वस्थ रहने का अर्थ टमाटर-रूपी इन्फ्लेमेशन को पलड़े में कम-से-कम रखना है। बढ़ती उम्र का कुछ कर नहीं सकते , प्रदूषण भी सामूहिक प्रयासों से ही जाएगा। लेकिन धूमपान न करें , यह सम्भव है। मदिरापान से यथासम्भव दूरी रखें , यह भी। डायबिटीज़ और ब्लडप्रेशर की रोकथाम के लिए सन्तुलित भोजन , सम्यक् निद्रा , तनावमुक्ति व व्यायाम नित्य करें। ( बाक़ी कुछ टमाटर मानव के बुरे जीन भी हैं , उनका हम कुछ कर नहीं सकते। वे हमें माँ-बाप से तराज़ू के अपने पलड़े में विरासत में मिले हैं। )
विषाणु आएगा , देह-तुला का पलड़ा हल्का ही रहेगा। तुला सन्तुलित न हो सकेगी , जीवन चलता रहेगा। मृत्यु का सौदा टल जाएगा।
--- स्कन्द।
( पुनश्च : लेख में टमाटर केवल लाक्षणिक प्रतीक है इन्फ्लेमेशन पैदा करने वाली स्थितियों का। टमाटर व सब्ज़ियों-फलों के वास्तविक सेवन से शरीर का इन्फ्लेमेशन कम होता है , इनमें अनेक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद रहते हैं। स्वस्थ लोग लगातार पौष्टिक भोजन लेते रहें और बीमार अपने डॉक्टरों से पूछकर आहार-विषयक निर्णय लें। )
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अँगरेज़ जिस 'डिवाइड एण्ड रूल' के साथ भारत पर शासन करने में सफल रहे , वह राजनीतिक मन्त्र कदाचित् उन्हें विज्ञान ने दिया था।
'डिवाइड एण्ड रूल' या 'डिवाइड एण्ड कॉन्कर' पिछले पाँच-सौ सालों से विज्ञान के मूल में रहते रहे हैं। तोड़-तोड़ कर समझो। तोड़ते जाओ , समझते जाओ। जितना तोड़ सकोगे , उतना समझ सकोगे। विज्ञान की दृष्टि में तोड़कर समझना ही जीतना है। जितना जो समझा गया , उतना वह जीत लिया गया। यही विज्ञान-नीति है।
उपनिवेशवादियों ( विशेषकर अँगरेज़ों की ) की राजनीति में जब यह पद आया , तब इसने राजनीतिक चाल-ढाल अपना ली। विज्ञान तोड़कर-फोड़कर चीज़ें समझता था / है , उपनिवेशवादियों की राजनीति फूट डालकर लोगों को समझती है। अन्ततः विज्ञान को भी केवल समझना नहीं है , राजनीति भी लोगों को समझकर नहीं रुकने वाली। दोनों पहले तोड़ेंगे-फोड़ेंगे , फिर समझेंगे और अन्त में अपने-अपने ढंग से जीतकर शासन करेंगे।
यह तरीक़ा अवव्याख्यावाद या रिडक्शनिज़्म है। आधुनिक विज्ञान अब-तक इसी ढंग पर चलता रहा है। जानवरों और इंसानों को बायलॉजिकल इकाई की तरह देखते हैं , उन्हें रसायनों में तोड़ते हैं। रसायनों के इन पुलिन्दों को हम तत्त्वों में और तत्त्वों को उप-पारमाण्विक कणों में तोड़ते चले जाते हैं। रासायनिक तत्त्व से परमाणु , उप-पारमाण्विक कण और फिर क्वार्कों तक की यह यात्रा दरअसल रसायनविज्ञान का भौतिकी में टूटते जाना है।
बायलॉजी टूटकर केमिस्ट्री बने , केमिस्ट्री टूटकर फ़िज़िक्स --- यही मुख्य धारा का विज्ञान अब-तक करता आया है। इंसानों को मशीन कहने के पीछे भी यही विचारधारा ज़िम्मेदार रही है। मशीन फ़िज़िक्स से चलती है , इंसानी देह भी उसी से चलती है। इंसान एक मशीन ही तो है। इस तरह से ज्यों हम मशीन तोड़ कर पुनः बना लेते हैं , इंसान भी बना लेंगे।
पेड़ों को समझकर हम जंगल समझ लेंगे --- रिडक्शनिज़्म के इस विज्ञान-मन्त्र के साथ हम कई सौ साल चल लिये। हमने तरह-तरह की दवाएँ बनायीं ; संक्रमणों व कैंसरों पर हम जीतने लगे। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध तक लेकिन दो बातें धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगी थीं। इस रिडक्शनिस्ट तरीक़े की हम सीमा तक पहुँच चुके हैं और इस पर निर्भर रहकर हम सारे संक्रमणों और सभी कैंसरों पर विजय नहीं पा सकेंगे। दरअसल यह तोड़फोड़ का तरीक़ा मानव-देह को जितना सरल ढंग से समझता-समझाता है , वैसा मामला है नहीं। बायलॉजी को केमिस्ट्री में ढालने से और केमिस्ट्री को फ़िज़िक्स में तोड़ने से मानव-शरीर की सभी समस्याएँ हल नहीं की जा सकतीं। मानव-देह कम-से-कम मशीन की तरह की मशीन नहीं है , न ही वैज्ञानिक और डॉक्टर मेकैनिक हैं। पेड़ों को समझने लेने से जंगल को समझ सकने का दम भरना केवल नादानी है , और कुछ नहीं।
'फूट डालो और समझ लो' का यह तरीक़ा भौतिकी और रसायन-विज्ञान में चल सकता है , किन्तु जीव-विज्ञान में नहीं। मेडिकल साइंस में हम केवल मरीज़ के शरीर को अंगों में , अंगों को ऊतकों में , ऊतकों को कोशिकाओं में , कोशिकाओं को रसायनों में , रसायनों को तत्त्वों में, तत्त्व-परमाणुओं को उप-पारमाण्विक कणों में और इन कणों को क्वार्कों में बदल कर कदाचित् यह न बता पाएँ कि बरखू की फ़सल नष्ट होने पर उसके मन में आत्महत्या का विचार क्यों आया और राम सिंह के शरीर में बैठे टीबी के जीवाणु उसमें रोग क्यों नहीं पैदा कर रहे। इसके लिए विज्ञान को सर्वथा नये तौर-तरीक़े से सामान्य और समस्यापरक को समझना होगा। और इस तौर-तरीके में हमारी मदद करेंगे कम्प्यूटर और गणित। अब हम शरीरों को तोड़कर उन्हें नहीं समझेंगे , उन्हें शरीर बने रहेंगे देंगे और फिर समझने की कोशिश करेंगे। शरीर को शरीर के रूप में समझना शरीर ही को बेहतर समझना होगा।
सिस्टम्स बायलॉजी और नैनोटेक्नोलॉजी जैसे विषय मानव-चिकित्सा का सन्निकट भविष्य हैं। आज जब हम एक नये कोरोनावायरस से जूझ रहे हैं , तब पारम्परिक रिडक्शनिस्ट तरीक़े के अलावा कई वैज्ञानिक इन नये तरीक़ों से भी इस विषाणु पर विजय पाने में लगे हुए हैं। विषाणु और जीवाणु हमारे रसायनों का जवाब रसायनों से दे रहे हैं। यह दरअसल रसायनों की रसायनों से लड़ाई है। किन्तु परम्परागत ढंग से हम कितने रसायन बना सकते हैं ? कितनी एंटीबायटिक बनाएँगे ? कहाँ-कहाँ कैंसर-कोशिकाओं को रासायनिक युद्धों में मात देंगे ? नैनोतकनीकी के माध्यम से हमें जीवाणु या विषाणु को किसी दवा से नहीं हराना है , बल्कि नैनोकणों के माध्यम से उनमें त्रुटि पैदा कर देनी है। जिस तरह से विषाणु जीवाणु की सतह में छेद कर देता है , उसी तरह हमारे नैनोकण भी करेंगे। इसी तरह विषाणुओं के साथ भी जूझा जाएगा। दिलचस्प बात यह कि इन तरीक़ों के खिलाफ़ प्रतिरोध विकसित कर पाने का इन कीटाणुओं को समय ही न मिल सकेगा।
मस्तिष्क में चेतना कैसे रहती है ? इस प्रश्न का उत्तर रिडक्शनिस्ट तरीक़ा दे सके , मुझे संशय है। आपको भी होगा। मस्तिष्क को तोड़ते जाइए और चेतना खोज कर दिखाइए। बहुत मुश्किल मामला है। यहाँ भी सिस्टम्स बायलॉजी जैसे तरीक़ों का योगदान महत्त्वपूर्ण हो सकता है। सम्पूर्णता को नष्ट किये बिना उसे समझते हुए शरीर के रहस्य बूझिए। सिस्टम्स बायलॉजी में सिद्धान्त भी होंगे , प्रयोग भी , मॉडलों का भी स्थान होगा। किन्तु इसमें अनेक क्षेत्रों के वैज्ञानिक संग बैठकर किसी पहेली को सुलझाने का बेहतर प्रयास करेंगे।
'डिवाइड एण्ड रूल' को विज्ञान अब त्यागने के क्रम में है। फूट डालकर आप कुदरत को एक सीमा के बाद समझकर राज नहीं कर सकते। आप पूछेंगे कि क्या विज्ञान के इस समन्वयीकरण को आधुनिक राजनीति भी अपनाएगी ? अपना ही रही है। हमारे-आपके आँकड़ों को जमा करके कम्प्यूटरों द्वारा उनसे पैटर्न निचोड़े ही जा रहे हैं। हमें समझा जा रहा है , ताकि हमें रिझाया-भरमाया जा सके। राजनीति समन्वय से और चतुर होकर फूट डालना बेहतर सीखेगी। इस काम में कम्प्यूटरीय एल्गोरिद्म उसकी मदद करेंगे।
विज्ञान और राजनीति ने तरीका चाहे बदल दिया हो, जीतने की इच्छा नहीं त्यागी। उसके त्याग के बाद तो विज्ञान और राजनीति की पहचान का संकट खड़ा हो जाएगा ! जब तक जन-संख्या पर सत्ता की निर्भरता है , आँकड़ों का अध्ययन बढ़ता और बेहतर होता जाएगा। जनसंख्या को समझो , उनसे ट्रेंड निकालो , फिर लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर बदलने की कोशिश करो। कम्यूटरीय एलोगोरिद्मों द्वारा जन-मन की हैकिंग करो। हैकीकृत जनता फिर जनता रहेगी ही नहीं : जिस समुदाय की विभिन्नता पहले से पता हो और जिसे बदला जा सकता हो , वह तो मानवीय होने का अधिकार ही कदाचित् खो देगा।
--- स्कन्द।
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एक बात और. 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान तो हो गया, पर पैसा आएगा कहां से? अभी हाल तक केंद्र सरकार #RBI से देश का रिजर्व पैसा ले चुकी है। वह तो महज 1.76 लाख करोड़ ही रहा। यानी इतना पैसा भी सरकार के पास नहीं था। मजबूरन आरबीआई के उस फंड से पैसा निकालना पड़ा, जो युद्ध के समय भी देश ने नही निकाला था।
फिर हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी की घोषणा के मुताबिक़ ये 20 लाख करोड़ के पैकेज का पैसा आएगा कहां से? सरकार के पास इतना पैसा तो है ही नहीं। इसका दसवाँ भाग यानी लगभग दो लाख करोड़ तो इन्होंने आरबीआई से झपटकर लिया था।
मुझे नहीं मालूम कि बीस लाख करोड़ का भारीभरकम पैकेज आएगा कहां से? पीएम ने कहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसकी घोषणा करेंगी। नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन के बाद सरकार का राजस्व बहुत ही ज़्यादा कम हुआ है। खर्चे चलाने के लाले हैं। फिर इतनी बड़ी रक़म सरकार कहा से लाएगी और इसके लिए क्या मास्टरप्लान है, ये रहस्य-रोमांच से भरा हुआ है।
अगर मेरी मित्र सूची में कोई अर्थशास्त्री या वित्त मामलों के विशेषज्ञ हों तो कृपया मेरा और फ़ेसबुक की जनता का ज्ञानवर्धन करें।
धन्यवाद.
मेरी टीआरपी दिमाग़ वाला प्रोड्यूसर तो टीभी पर एक स्पेशल आधे घंटे का प्रोग्राम प्लान कर चुका है
" 20 लाख करोड़ का रहस्य, खुल जा सिमसिम, हटा दे तिलिस्म, कैसे आएगी अर्थव्यवस्था में जान, कैसे बचेगा जिस्म "
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प्रधानमंत्री का 8 बजे वाला भाषण सुनने से पहले पीएम केयर फंड के पीछे की इस कहानी को पढ़ जाना...
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तमाम जानकारों का कहना है कि PM Care फंड ट्रांसपेरेंट नहीं है, इसकी जांच CAG नहीं कर सकता। जैसा कि खुद सरकार ने एक RTI के जबाव में साफ भी कर दिया है। RTI में कैग ने स्वयं कहा है कि हमें PM Care जांच करने का अधिकार नहीं है। अब आपके मन में आया होगा कि कैग से जांच होना ही क्यों जरूरी है, और आखिर ये कैग किस बला का नाम है। दरअसल कैग ( Comptroller and Auditor General of India) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के द्वारा नियुक्त ऐसी न्यूट्रल संस्था होती है जो सरकारी खर्चे का लेखा-जोखा रखती है, कि कहाँ-कहाँ गड़बड़ हुई, कहाँ कितना पैसा खर्च हुआ, कैग इन्हीं सबका हिसाब रखती है, ऑडिट रखती है। कांग्रेस सरकार के समय कुछ कथित घोटाले भी कैग की जांच के बाद ही सामने आए थे। हालांकि उनमें से एकाध मामला बाद में कोर्ट में गलत भी पाया गया। लेकिन आप इस उदाहरण से अंदाजा लगा सकते हैं कि यदि कैग के रूप में नियुक्त व्यक्ति की मंशा सही हो तो कैग कितनी शक्तिशाली स्वतंत्र संस्था के रूप में काम कर सकती है।
अब आते हैं कि PM cares पर, इस फंड की जांच को लेकर सरकार का कहना है कि इसकी जांच कैग नहीं कर सकती। लेकिन इसका ऑडिट एक थर्ड पार्टी द्वारा किया जाएगा। अब आपके मन में आया होगा कि ये थर्ड पार्टी ऑडिट टीम क्या बला है? सरकार का कहना है कि PM Care फंड के जो ट्रस्टी होंगे वही ऑडिट करने वाले लोगों को नियुक्त करेंगे.
हैं??????????
जिस संस्था की जांच की जानी वह संस्था ही अपने जांचकर्ताओं की नियुक्त करेगी? सीरियसली?
क्या ये हितों का टकराव नहीं है?
इसके भी आगे आपको जानना जरूरी है कि PM Cares के ट्रस्टी कौन होंगे जो इन जांचकर्ताओं को चुनेंगे। PM Care फंड की वेबसाइट पर लिखा हुआ है कि प्रधानमंत्री इस फंड के चेयरमैन होंगे, तीन केबिनेट मंत्री इसके मेम्बर होंगे, तीन केबिनेट मंत्री मतलब, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, और वित्त मंत्री। अब ये सब मेम्बर तीन और अन्य सदस्तों को चुनेंगे जो हेल्थ, रिसर्च, दानकर्ताओं, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल वर्क से जुड़े हुए हो सकते हैं। जैसे हेल्थ से बंदा चाहिए होगा तो संदीप पात्रा है ही, दानकर्ताओं में से एक बंदा चाहिए होगा तो अक्षय कुमार है ही, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में चाहिए तो चमचागिरी करने वाले तमाम रिटायर्ड डीएम और सचिव मिल ही जाने हैं।
कुलमिलाकर ये जो तीन अन्य मेम्बर चुने जाएंगे वे प्रधानमंत्री और अन्य तीन केबिनेट मंत्रियों के चहेते ही होंगे। इन सबको मिलाकर बनता है "PM Care फंड का Trust"।
अब ये ट्रस्ट ही डिसाइड करेगा कि इनके द्वारा खर्च किए गए पैसे को कौन सी संस्था ऑडिट करेगी? यानी कौन सी प्राइवेट, सस्ती सी भक्त टाइप, दो नम्बरी चार्टर्ड एकाउंटेंट संस्था को पकड़ कर के फंड के खर्चे पर मोहर लगवानी है ये मोदी जी ही तय करेंगे, इससे आपको तो लगेगा कि जांच हो तो रही है। लेकिन उधर सरजी पूरा खेल कर चुके होंगे।
अब आते हैं कि सरकार का क्या तर्क है कि वह क्यों कैग पर ऑडिट न करवाकर प्राइवेट लोगों ऑडिट करवा रही है?
सरकार का कहना है "चूंकि इसमें आने वाला पैसा दान का पैसा है इसलिए इसकी जांच कैग नहीं कर सकता। हमारी मर्जी है जिससे चाहे करवाएंगे"
अब आप थोड़ा आउट ऑफ द बॉक्स चलिए। इसी तरह आपातकाल से सम्बंधित एक और फंड है, 1948 के टाइम से। इसका नाम है प्रधानमंत्री राहत कोष, अंग्रेजी में PM Relief Fund। आपको बता दूं जैसे PM Care में दान का पैसा आता है, बजट से नहीं आता, उसी तरह इसमें भी दान का ही पैसा आता है, बजट से कोई पैसा नहीं आता। इस फंड की जानकारी के सम्बंध में कैग ने बताया है कि वह भी प्रधानमंत्री राहत कोष की जांच नहीं करते। इसका ऑडिट भी थर्ड पार्टी ही करती है। हालांकि करते नहीं हैं इसका मतलब ये नहीं है कि कैग PM Relief Fund की जांच नहीं कर सकती है, कैग के अनुसार कैग जब चाहे सरकार से इस फंड के बारे में पूछ सकती है। जैसे कि उत्तराखंड आपदा के समय कैग ने इस फंड के हिसाब के बारे में पूछा था। कैग के इस बयान की पुष्टि आपको द वायर नाम की अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट पर मिल जाएगी।
इस लिहाज से रिलीफ फंड, PM Care फंड से अधिक ट्रांसपेरेंट है। अब आप एक अफवाह के बारे में भी जान लीजिए। भाजपा के अवैतनिक आईटी सेल द्वारा एक अफवाह फैलाई जा रही है कि PM Care फंड इसलिए बनाया है क्योंकि प्रधानमंत्री रिलीफ फंड कांग्रेस के टाइम बना था, इसलिए इसकी चेयरमैन कांग्रेस की अध्यक्ष होती है। यानी सोनिया गांधी। फंड में से खर्चा बिना सोनिया गांधी की मर्जी के खर्च नहीं किया जा सकता। असल में आईटी सेल का ये दावा भी देशवासियों को भ्रमित करने से अधिक नहीं है। रिलीफ फंड का अध्यक्ष कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री होते हैं। उन्हीं के निर्देशों के आधार फंड से खर्च किया जाता है। इस समय रिलीफ फंड के चैयरमैन सोनिया गांधी नहीं बल्कि अप्रिय प्रधानमंत्री मोदी हैं। उनकी मर्जी के बिना इस फंड से चवन्नी भी खर्च नहीं की जा सकती। इसलिए भाजपा आईटी सेल का दावा हजारों पिछले दावों की तरह इसबार भी झूठा ही निकला है।
द प्रिंट की 4 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री राहत कोष में ऑलरेडी 2200 करोड़ रूपए ऐसे ही पड़े हुए हैं, उनका कोई यूज नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री चाहते तो कोरोना से लड़ाई में उनका उपयोग कर सकते थे, लेकिन मालूम नहीं प्रधानमंत्री ने ऐसा क्यों नहीं किया।
अब अगला सवाल ये कि प्रधानमंत्री के पास पहले से ही, प्रधानमंत्री के नाम का एक आपातकाल कोष था तो फिर प्रधानमंत्री ने एक दूसरा नया कोष क्यों बनाया? और यदि बनाया भी है तो उसकी जांच के लिए प्राइवेट लोगों को रखने की बात क्यों की जा रही है, जबकि प्रधानमंत्री तो अपने भाषणों में हमेशा "पारदर्शिता" का जिक्र करते हैं। क्या प्रधानमंत्री ने पारदर्शिता के अपने सिद्धांत को महामारी के काल में श्रद्धाजंलि दे दी है?
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अब आते हैं कि क्या सच में PM Care में आया हुआ पैसा, केवल दान किया हुआ पैसा है? उसमें कोई भी सरकारी पैसा नहीं है?
तो अब इसकी हकीकत भी सुनिए।
-फाइनेंसियल एक्सप्रेस की 31 मार्च की एक रिपोर्ट के अनुसार स्टील मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कहने पर स्टील मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली 8 सरकारी कम्पनियों(PSUs) ने 267.55 करोड़ रुपए PM Care फंड में कंट्रीब्यूट किए हैं। ये 8 PSU- SAIL, RINL, NMDC, MOIL, MECON, KIOCL, MSTC, and FSNL आदि हैं।
- फाइनेंसियल एक्सप्रेस की ही 4 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी कम्पनियों ने पीएम केयर फंड में करीब 2500 करोड़ रुपए से अधिक पैसे कॉन्ट्रिब्यूशन करने का निर्णय लिया है।
ऐसे ही अंग्रेजी वेबसाइट द प्रिंट की 4 अप्रैल की एक रिपोर्ट के अनुसार PM Care फंड में करीब 500 करोड़ रूपए से अधिक पैसे देश की सेना, नेवी, एयरफोर्स, डिफेंस की सरकारी कंपनियों और रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों से आए हैं।
अंग्रेजी अखबार द हिन्दू बिजनेस लाइन की 31 मार्च की खबर के अनुसार Ministries of Power & MNRE ने PM Care फंड में 925 करोड़ रूपए देने का निर्णय लिया है। ये लिस्ट बहुत लंबी है, इतनी लंबी की आप ये पोस्ट बीच में ही छोड़कर चले जाएंगे। लाखों सरकारी कर्मचारियों का वेतन काटकर उसे दान का नाम दे दिया गया है। बड़े ही शातिर तरीके से प्रधानमंत्री के इस निजी कोष में जमा करवा दिया गया है।
द वायर पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ने सभी कर्मचारियों से पैसे तो लिए प्रधानमंत्री रिलीफ फंड के नाम पर और दान कर दिए PM Care फंड में। जिसकी शिकायत दिल्ली विश्वविद्यालय की टीचर्स एसोसिएशन ने की है।
ये कोई छोटी मोटी रकम नहीं है। हजारों करोड़ की रकम है। ये आपका पैसा है, आपके प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष करों का पैसा है। सरकारी कम्पनियों का पैसा, किसी पार्टी का पैसा नहीं होता, वह प्रधानमंत्री और उसके मंत्रियों का पैसा भी नहीं होता। वह जनता का पैसा है। और जनता के पैसे की जांच प्रायवेट हाथों में नहीं दी जा सकती। उसकी जांच उसी तरीके से की जा सकती है जिस तरह से संविधान में वर्णित है।
संविधान के अनुच्छेद 148 में बाकायदा CAG संस्था का जिक्र है। जो सरकारी पैसे का लेखा जोखा करती है, जो ये नजर रखती है कि कुछ भी गड़बड़ तो नहीं हुई है। PM Care फंड में हजारों करोड़ रुपया मंत्रालयों, PSUs और सरकारी कर्मचारियों के वेतन का लगा हुआ है। इसका ऑडिट प्राइवेट हाथों द्वारा कैसे किया जा सकता है? PM Care फंड में संकट के समय देश के नाम पर हजारों करोड़ रुपया लिया गया है। हजारों कम्पनियों ने मन भर के दान दिया है, सरकारी पैसा भी लगा है। प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि इसकी स्वतंत्र जांच हो ताकि भविष्य में संकट के समय इसी तरह लोग खुलकर दान कर पाएं। किसी भी तरह का घपला सरकार को विश्वसनियता को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि देश के सामान्य जन संकट के समय मदद करना बंद कर देंगे। इससे एक गलत परिपाटी का जन्म होगा जो भविष्य में देश के लिए घातक साबित हो सकती है।
प्रधानमंत्री तमाम मंचों से ट्रांसपेरेंसी की बात करते हैं। फिर इस मामले में गड़बड़ी क्यों कर रहे हैं? कायदा से प्रधानमंत्री को कैग को ही और अधिक उत्तरदायित्व और पारदर्शी बनाना चाहिए था, लेकिन प्रधानमंत्री ने तो उल्टा कैग से कैग का काम ही छीन लिया। ये सरासर भ्रष्टाचार है, अनैतिक है। संकट के इस समय में प्रधानमंत्री को इतनी असंवेदनशीलता नहीं दिखानी चाहिए थी।
13 hrs · Public
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गोदिमीडिया बता रहा है कि मोदी आज रात 8 बजे न्यू इंडिया बना देंगे..भारत आज ही कोरोना मुक्त होगा..मोदी और गोदिमीडिया को खुली चुनौती और कुछ सवाल..
- जब लॉकडाउन शुरू हुआ तब क्या मोदी को मजदूरों के बारे में कुछ पता नही था?
- करोड़ो मजदूर जब पैदल चलने लगे तब होश आया? कौन से नशे में था मोदी?
- लाठीचार्ज किया, मजदूरों के लिए बस की फ़र्ज़ी कहानी सुनाई गई..पर हवाई जहाज और AC बस चालू रही..
● पैकेज में मजदूरों के लिए कुछ नही था
● बिना राशन कार्ड अनाज नही दिया गया
● केंद्र ने कम्युनिटी किचन नही बनाऐ
● फ़ूड सिक्योरिटी एक्ट लागू नही किया
● राज्यो को मार्केट भाव अनाज लेने बोला
● 7500₹ कैश ट्रांसफर को मना कर दिया
● मजदूर रोड पर मर गए..क्या किया?
● महिलाओं ने रोड पर बच्चे जन्मे !!
● ट्रेन से कट कर मर गए मजदूर..क्या दिया?
● फर्ज़ी कहानी बनाई गई कि केंद्र रेल का 85% दे रही है..ये असल मे मालिको के दबाव मजदूरों को बंधक बनाने का प्लान था..
गुजरात मजदूरों पर अत्याचार, शोषण और लूट का मुख्य केंद्र बन चुका है..किसी मीडिया की हैसियत नही की गुजरात पर बात करे..वैसे ही मोदी की हैसियत ही नही की मजदूरों के लिए कुछ करे..
आपकी आने वाली नस्ल की बर्बादी का ऐलान हो चुका है.. #राहुलगांधी #प्रियंकागांधी #aicc #krishnaniyer
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Big Breaking
अभी-अभी गुजरात राज्य के कानून मंत्री Bhupendra sinh Chudasama के विधानसभा चुनाव को गुजरात हाईकोर्ट ने Null and void कर दिया है। सादा भाषा में कहूँ तो भाजपा मंत्री की 2017 विधानसभा चुनाव में मिली जीत, न्यायालय में इलीगल पाई गई है। गुजरात राज्य के न्यायाधीश परेश उपाध्याय ने 73 वी सुनवाई में भाजपा मंत्री के इस चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया है। ध्यातव्य है कि 2017 विधानसभा चुनाव में वोट काउंटिंग में समय प्रशासन के साथ घपलेबाजी करके भूपेंद्र को 429 वोटों के साथ जीत मिली थी। सामने कांग्रेस के प्रत्याशी अश्विन राठौड़ थे जोकि ओबीसी वर्ग से आते हैं और पेशे से किसान हैं। अश्विन ने बीते तीन सालों में एक भी हियरिंग नहीं छोड़ी और अंत में जीत कांग्रेस प्रत्याशी अश्विन की ही हुई है।
बताइए भाजपा के कानून मंत्री ही न्यायालय में इलीगल पाए जा रहे हैं, उस राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति क्या होगी। प्रशासन और मंत्री ही मिलकर चुनाव तय कर लें। फिर जनता पर वोट किसलिए डलवाते हैं?
क्या पूरा गुजरात इलेक्शन ही, इस तरह की घपलेबाजी करके जीता गया है? माना जाता है भूपेंद्र गुजरात राज्य में दूसरे नम्बर के मंत्री हैं। क्या ये सब बिना प्रधानमंत्री की नजरों से गुजर कर हो रहा होगा? मुझे 2019 के लोकसभा इलेक्शन के नतीजों को लेकर भी शक हो रहा है। प्रधानमंत्री को पूरे गुजरात एलेक्शन की दोबारा से जांच करवानी चाहिए।
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आर्थिक पैकेज पर जरा सा रुकिए..वैसे ये घोषणा कांग्रेस और राहुल गांधी के सरकार पर निरन्तर दबाव की जीत है..राहुल गांधी के साथ बात करते हुए डॉ राजन और डॉ अभिजीत ने 10% जीडीपी पैकेज की मांग की थी..
पर पिछले 1.70 लाख करोड़ के पैकेज में देश ने फर्जीवाड़ा देखा है..पुरानी योजनाओं और राज्य के 90 हजार करोड़ को मोदी ने पैकेज में शामिल कर लिया था..
पैकेज के लिए पैसों की व्यवस्था और पैकेज के ब्रेकअप पर ध्यान देना जरूरी है..बिहार में 1.25 लाख करोड़ पैकेज का फर्जीवाड़ा देश भुला नही है..
बाकी तो आत्ममुग्धता में पोलिओ को भी खुद की सफलता बता गया..ऐसा लगा कि आत्मनिर्भरता के लिए कोरोना का इंतजार हो रहा था..अभी नजर सिर्फ पैकेज के ब्रेकअप पर रहेगी.. #राहुलगांधी #प्रियंकागांधी #aicc #krishnaniyer
10 hrs · Public
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कितने कम सवाल हैं तुम्हारे पास मां
वह पूछती ही कितना है। खाना खा लिया, ठीक से मिल गया था न। काम ज्यादा है तो बीच-बीच में आराम करते रहना। वीडियो कॉल पर देखा आंखें बहुत अंदर नजर आ रही है। इतना दुबला क्यों लग रहा है। नींद नहीं हो रही है क्या ठीक से। किसी बात की ज्यादा चिंता मत करना। जो होगा देख लेंगे। किसी बात की परेशानी नहीं है, बस अपना ख्याल रखना। बचपन से ऐसे ही तीन-चार सवाल हैं। जो मुझ पर सफेदी की परत चढ़ने तक बदस्तूर जारी है। क्या पता वह और सवाल नहीं जानती या उसे पूछना नहीं आता। या फिर इन सवालों के अलावा वह कुछ पूछना नहीं चाहती। उसके लिए पूरी दुनिया के सवालों में से बस उतने ही सवाल काफी हैं जो बता दे कि मैं ठीक हूं। इससे ज्यादा वह कुछ नहीं जानना चाहती। उसे किसी और जानकारी से कोई मतलब नहीं है।
जबकि मैं जानता हूं वह कितना कुछ कहती आई है, बताती रही है। मैं कितना सुनता रहा, कितना अनसुना करता रहा। घर से निकलते वक्त मां ने कहा था कि भूखे मत रहना। रास्ते में रुककर कुछ खा लेना। साथ में पराठे, चटनी-अचार और आलू की सब्जी भी बांधी थी। मैं चिढ़ा भी कि अचार मत रखा करो तेल निकल आता है। बैग, कपड़े, कागज सब खराब हो जाते हैं। फिर साफ भी नहीं होता। जवाब में मां सिर्फ हंस दी थी। कपड़ों और बैग से ज्यादा उसे इस बात की चिंता थी कि लंबे सफर में सब्जी गड़बड़ हुई तो भी अचार काम आ जाएगा।
घर से निकलते ही मैं एक दुकान पर रुका, कुछ चिप्स के पैकेट, नमकीन भी बैग में ठूंस लिए। बड़ा खराब लगता था ट्रेन में छह लोगों के बीच टिफिन खोलकर बैठ जाना। या फिर मुंह छुपाकर इधर-उधर देखते हुए खाते रहना। चिप्स खाते हुए मुंह से आती आवाज में दिलफेंक क्रंच है, किक है, मां के टिफिन का देशीपन 70 के दशक की फिल्मों की याद दिलाता है। जिस पर अब सिर्फ हंसी आती है कि बेटा मैंने तेरे लिए गाजर का हलवा बनाया है।
स्कूल जाते वक्त भी टिफिन ठीक से खाना, लड़ाई मत करना, टीचर जो पढ़ाए उस पर ध्यान देना। और भी न जाने क्या-क्या। मगर स्कूल तो स्कूल ही था। दोस्त थे तो दुश्मन भी। लड़ाई करते नहीं थे हो जाती थी। कभी मेरी बेंच पर कोई बैठ जाता, कभी मेरे दोस्त से कोई भिड़ लेता। टिफिन का खाना अच्छा लगता था, लेकिन बाहर जो जाम, बोर, इमली और उनके साथ चटपटा मसाला मिलता था, उसका क्या करते। टीचर तो रोज ही पढ़ाते थे, लेकिन दूरदर्शन पर फौजी तो बुधवार को ही आता था न। इसलिए उसकी बातें शुरू होती तो फिर रुकती कहां थी। फिर किताब के पन्नों के आखिरी नंबर से क्रिकेट भी तो खेलना होता था। पन्ने घूमाते और जहां रुकता, उसका आखिरी अंक सामने वाले के रन हो जाते।
परीक्षा के दिनों में तो जैसे उसे न जाने क्या हो जाता। पूरे समय नजर रखती। पढ़ रहा हूं या नहीं, कहीं इधर-उधर ध्यान तो नहीं है। आईएमपी के चक्कर में तो नहीं लगा हूं। दोस्तों के साथ पढ़ाई के दौरान किस तरह की बातें चल रही हैं। कितनी बजे उठे, कितनी बजे सोए, कितनी पढ़ाई की। टेस्ट के नंबर कितने आए, आगे कौन-पीछे कौन। उम्र बढ़ी तो नजर और पैनी हो गई। कब कौन से गाने सुन रहा हूं। गुनगुना रहा हूं।
खिड़की पर कितनी खड़ा हूं और कितनी देर से ओटले से नहीं हटा हूं। कौन दोस्त आए, उनसे किस तरह की बात हुई। कौन सी बात थी, जो उनके कमरे में आते ही बंद हो गई। सारा हिसाब जितना मुझे पता था, उतना ही उन्हें भी बिना बताए पता चल जाता। इसका राज क्या था यह आजतक समझ ही नहीं आया। कब मेरे दोस्तों से बात करती, कब टीचर से मिलने पहुंच जाती। चिढ़ भी जाता कि क्या जासूसों की तरह नजर रखती हो, वे बस हंस देती। स्कूल छूटा, कॉलेज पूरा हुआ, नौकरी में पहुंचे तब भी मां की हिदायतें उतनी ही थी, वैसी ही हैं। गिनती के उन सवालों के बीच मैंने जरूर एक सफर पूरा कर लिया है। सफर अपनी समझ का, सफर दुनियादारी का।
और जो सवाल तब मुझे झुंझलाते थे, अब मैं उन्हीं सवालों के सिरहाने रोज रात को सोना चाहता हूं। अब जब किसी सफर पर होता हूं तो टिफिन खोलते हुए अपने बैग पर चटनी की खुशबू और अचार के तेल-हल्दी वाले दाग से ज्यादा उन सवालों को मिस करता हूं। कभी सोचता हूं कि पूरी जिंदगी को एक बार रिवाइंड कर दूं और फिर मां के उन्हीं सवालों से इसे शुरू करूं। इस मदर्स डे मैं मां को उनके वही सवाल गिफ्ट करना चाहता हूं।
#अमितमंडलोई #मदर्सडे #मांकेसवाल #मांकीदुनिया फोटो गूगल
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जो लोग मुझे अपनी मित्र सूची में शामिल करना चाहते हैं, वे अगर
पहाड़, फूल, बादल, नदी, चिड़िया, तोता, मैना, शेर, बब्बर शेर, बन्दर, चिंपैंजी, भारत माता, गाय, बैल, सैनिक, सेना, इंडिया गेट, जामा मस्जिद, प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, मायावती, ममता बनर्जी, सुंदर कन्या, मैंचो मैन, फिल्मी सितारे, वारे-न्यारे, आदि-इत्यादि
के फोटुक अपनी प्रोफाइल पिक में लगाएंगे तो उन्हें तुरन्त मैं फर्जी प्रोफाइल घोषित कर देता हूँ। अब सोशल मीडिया वो जगह नहीं रही कि आप चेहरा छुपाकर दोस्ती गांठने चलें। या तो आप खुद को बहुत चालाक समझते हैं या सामने वाले को महा-मूर्ख। बिना चेहरा दिखाए दोस्ती नहीं हो सकती। अभी हाल ही में एक -सुंदर- बालक पकड़ा गया, जो एक -कुरूप- कन्या की प्रोफाइल पिक लगाकर फेसबुक पर टहल रहा था और उसके 10 हज़ार फॉलोवर्स थे। इस देश की जनता भोली है, मैं नहीं, इसलिए मुझे झांसा देने की कोशिश ना करें। ऐसे फर्जी लोगों को सीधे उल्टा टांग देता हूँ।
बीच-बीच में अपनी मित्र सूची के लोगों को भी टटोलता रहता हूँ। अगर वहां भी संदेहास्पद गतिविधि दिखती है तो सीधे unfriend करता हूँ। सोशल मीडिया पे अपनी मर्ज़ी से हूँ, इसलिए यहां मैं किसी को झेलूँगा नहीं। चाहे वास्तविक दुनिया में वह मेरा कितना भी अजीज़ और प्रिय क्यों ना हो! ये सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का मेरा उसूल है। ये पब्लिक प्लेटफॉर्म है, इसलिए यहां अनुशासन की सख्त जरूरत है। अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर आप fake news, गंदगी और नफरत फैलाएंगे, इसकी इजाजत अपनी वॉल पे मैँ नहीं देता। आप अपनी वॉल पे भी अगर रोबॉट की तरह समाज को तोड़ने वाली पोस्ट डालेंगे, तो भी मैं आपको हटा दूंगा अपनी मित्र सूची से।
इस दुनिया में पहले ही बहुत सारे टेंशन हैं, सो सोशल मीडिया का बेवजह तनाव मैं नहीं लेता। हां, अगर आप मेरी बात से इत्तेफाक नहीं रखते और वो आपको चुभती हैं तो आप बेशक खुद को मुझसे अलग कर लें। चॉइस आपकी है। मित्र कम हों या एक भी ना हों, मुझे फर्क नहीं पड़ता। इस दुनिया में अकेला आया था और अकेला जाऊंगा। किस्मत रही तो चार आदमी कांधा दे ही देंगे मेरी अंतिम यात्रा को। वैसे मैं यारों का यार हूँ और दुश्मनों का दुश्मन। मुझ जैसा दोस्त और मुझसे खतरनाक शत्रु आपको नहीं मिलेगा। जो मुझे नज़दीक से जानते हैं, उनको पता है कि अपना नुकसान करके दोस्ती का हक अदा किया है।
दुनियादारी का शिष्टाचार निभाने में यकीन नहीं रखता। अगर आप मित्र हैं और गलत करेंगे तो आपको टोकूंगा। इस दुनिया में दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता है, जिसे आप अपनी मर्जी से चुनते हैं। बीवी और शौहर तक मां-बाप चुन लें आते हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं। सो दोस्त कम रखिये, पर अच्छे रखिये। फेसबुक भी आपको ये चॉइस देता है। फेसबुक कहने को आभासी दुनिया ज़रूर है पर यहां सबकुछ real यानी वास्तविक होता है। ऐसे माध्यम में दोस्तों का चुनाव सावधानीपूर्वक करें। मैं करता हूँ।
धन्यवाद।
18 hrs · Public
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ऋषि कपूर की मौत के बाद उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने वाले ये लोग कौन थे !
ऋषि कपूर की मौत के बाद उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने वाले ये लोग कौन थे !
Nadim Akhter 23:50
"हरदिलअजीज और हंसमुख चिंटू के इस दुनिया से
जाने के बाद कल सोशल मीडिया पर उनके
ख़िलाफ़ एक Hate Campaign चला। ये लोग
स्वर्गीय ऋषि कपूर पर डोमेस्टिक वॉयलेंस से
लेकर तमाम तरह के आरोप लगा उन्हें बुरा इंसान
बताने की मुहिम चला रहे थे। इनमें कुछ पत्रकार
भी शामिल थे "
Nadim S. Akhter 1 May 2020
बहुत अफसोस की बात है कि कल अभिनेता ऋषि
कपूर की मौत के बाद कुछ लोगों ने सोशल
मीडिया पर उनके ख़िलाफ़ लिखा और कैम्पने
चलाने की कोशिश की। ये लोग स्वर्गीय ऋषि
कपूर पर डोमेस्टिक वॉयलेंस से लेकर तमाम तरह के
आरोप लगा उन्हें बुरा इंसान बताने की मुहिम चला
रहे थे। इनमें कुछ पत्रकार भी थे। पहले ऋषि साब पर
लगे सारे आरोप गिना देता हूँ, फिर बारी-बारी से
उन सबका जवाब भी दूंगा।
ऋषि साहब पर पहला आरोप डोमेस्टिक वॉयलेंस
यानी घरेलू हिंसा का है जो ज़ाहिर है, उनकी
पत्नी नीतू कपूर के कंधे पर बंदूक़ रखकर लगाया
गया। इसमें कुछ ख़बरों का हवाला देकर ये बताया
गया कि कैसे नीतू कपूर ने ऋषि कपूर के ख़िलाफ़
डोमेस्टिक वॉयलेंस का केस किया था। फिर
अपुष्ट सूत्रों के हवाले से ये बताया कि नीतू कपूर,
उसके बाद ऋषि का घर छोड़कर चली गई थीं और
आजीविका के लिए सैलून तक चलाया।
ऋषि कपूर पर दूसरा ये लगा कि वे Child pornography को बढ़ावा देने वाले इंसान थे और इस
बाबत मुंबई के एक एनजीओ ‘जय हो फाउंडेशन’ ने
उनके खिलाफ एक केस भी दर्ज कराया था। यह
केस Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत था।
तीसरा आरोप ऋषि कपूर पर ये लगाया गया कि
वह महिलाओं का सम्मान नहीं करते थे और उनके
बारे में अनाप-शनाप ट्वीट कर देते थे। इसमें उनके दो
ट्वीट का हवाला दिया गया। इसमें ऋषि जी के
उस ट्वीट का हवाला दिया जा रहा था, जब
भारतीय महिला क्रिकेट टीम लॉर्ड्स में विश्व
कप का फ़ाइनल इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेल रही थी।
तब ऋषि कपूर ने जो ट्वीट किया था, वो मैं नीचे
कॉपी-पेस्ट कर रहा हूँ।
“Waiting for a repeat of Sourav Ganguly’s act on the balcony of The Lords Ground, London, when India beat England 2002 NatWest series final! YO.”
बहुत ही चालाकी से इस ट्वीट का मतलब भाई
लोगों ने ये बताया कि ऋषि कपूर चाहते थे कि
भारतीय महिला टीम भी मैच जीतने के बाद
बालकनी में आकर सौरव गांगुली की तरह अपना
टीशर्ट निकाले और हवा में लहराए। उस वक़्त इस
ट्वीट के बाद ऋषि कपूर को ट्विटर पर काफ़ी
भला-बुरा कहा गया।
उनका दूसरे ट्वीट का जिक्र सेलिब्रिटी किम
करदाशियां को लेकर था, जिसमें ऋषि कपूर ने
सोशल मीडिया पर किम पे बने एक वायरल मेमे को
शेयर किया था। इसमें किम के कपड़ों की तुलना
बोरी में बंद प्याज़ से की गई थी। इस मेमे को शेयर
करते हुए ऋषि ने लिखा था- Onions in a mesh bag!
तो इन सारे आरोपों की खिचड़ी ऐसी पकाई गई
कि अच्छे-अच्छे लोगों को हमने ये लिखते देखा कि
ऋषि कपूर को श्रद्धांजलि देने से पहले ये देख लो
कि वह कितने निम्न स्तर के इंसान थे। किसी के
मरने के बाद उसके पाप कम हो जाते हैं क्या ? ऐसी
तमाम बातें तथाकथित बुद्धिजीवियों ने लिखीं।
ये सब देखकर मेरा दिल बैठ गया। सोचा, वहीं
उनको जवाब दूँ पर खून का घूँट पीकर रह गया। फिर
विचार बनाया कि कलम का जवाब कलम से ही
दूँगा। वो भी मुंहतोड़।
तो सबसे पहले ऋषि कपूर के लिए नफरत बो रहे
विद्वानों के पहले आरोप का जवाब।
डोेमेस्टिक वायलेंस के आरोप का बुलबुला
तो ऐसा है बंधुओं ! अगर पत्रकार हो तो ख़बर को
कन्फर्म भी करना सीखो। आरोप तो कोई किसी
पर, कुछ भी लगा सकता है। मुझे नीतू कपूर द्वारा
डोमेस्टिक वॉयलेंस का केस करने संबंधी जो भी
ख़बर इंटरनेट पर दिखी, वह सब अटकलों पर
आधारित थी। माना जाता है, बताया जाता है
टाइप। अरे पुलिस में केस हुआ है तो जाकर थानेदार
से वर्जन लाओ ना ! लिखो तो पुलिस क्या बोल
रही है? लेकिन घरेलू हिंसा के आरोप वाली किसी
भी ख़बर में मुझे पुलिस का कोई कन्फर्मेशन नज़र
नहीं आया। यानी ख़बर या तो हवाहवाई थी या
डेस्क पर बैठ सपने में लिखी गई थी।
अब दूसरा पहलू। भई, मियाँ-बीवी के बीच झगड़े
किस घर में नहीं होते। हो सकता है कि ऋषि कपूर
के वैवाहिक जीवन में भी कुछ अनबन हुई हो। बात
थाना-पुलिस तक भी पहुँची हो पर इससे आप ऋषि
कपूर को नारी विरोधी कैसे बता सकते हैं ? नीतू
जी के साथ वह अपना भरापूरा परिवार छोड़ गए
हैं। इसलिए कोई मूर्ख ही इस तरह के आरोप लगाकर
एक दिवंगत आत्मा को बदनाम कर सकता है।
वैसे आपकी जानकारी के लिए ये बता दूँ कि
ख़ुद ऋषि कपूर ने अपनी किताब ‘खुल्लमखुल्ला’
में लिखा है कि शादी के बाद अपनी फ़्लॉप
होती फ़िल्मों की वजह से वह डिप्रेशन में जाने
लगे थे और इसके लिए नीतू कपूर को ज़िम्मेदार
ठहराने लगे थे। तब नीतू कपूर प्रेग्नेंट थीं। बाद में
ऋषि कपूर को इस बात का बहुत मलाल हुआ कि
उनकी वजह से उस वक़्त नीतू जी किस कदर
मानसिक दबाव में रही होंगी। ऋषि कपूर ने इस
किताब में अपनी ज़िंदगी की कोई बात उन्होंने
छुपाई नहीं। सब खुलकर बता दिया है। सो घरेलू
हिंसा का आरोप भी कहीं टिकता नहीं।
अब आते हैं दूसरे आरोप में, जिसमें मुंबई के जय हो
फाउंडेशन नामक एक एनजीओ ने लाइमलाइट में आने
के लिए ऋषि कपूर पर Protection of Children from Sexual Offences Act के तहत मुकदमा दर्ज करवा
दिया था। नीचे उस वीडियो का स्क्रीनशॉट दे रहा हूं, जिसे लेकर उन पर ये आरोप लगा था। आप ही देखिए और सोचिए।
दरअसल हुआ ये था कि ऋषि कपूर एक मजाकिया
इंसान भी थे और मजाक-मजाक में सीरियस बात
कह देना उनकी आदत थी। तब गुरमीत राम-रहीम
का मामला गर्म था। इसे लेकर ऋषि साब ने ट्विटर
पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एटीएम जैसी
किसी मशीन के सामने खड़ी एक लड़की को पीछे
से एक छोटा बच्चा छेड़ता है। लड़की जब पीछे
मुड़ती है तो सामने एक बड़ा बच्चा भी खड़ा
होता है। लड़की समझती है कि ये हरकत बड़े बच्चे ने
की है। वह उसे तमाचा जड़ देती है। अब बड़ा बच्चा
लाइन में छोटे बच्चे को आगे कर देता है और ख़ुद पीछे
खड़ा हो जाता है। छोटा बच्चा फिर लड़की को
पीछे से टच करता है तो अबकी बार फिर लड़की
पीछे घूमकर तमाचा बड़े बच्चे को ही मारती है।
यानी करे कोई और भरे कोई।
ऋषि कपूर ने तब अपने ऊपर हुए इस एफआईआर पर
कहा था कि चूँकि वह सेलिब्रिटी हैं, इसलिए उन्हें
टार्गेट किया जा रहा है। वह इस वीडियो के
सहारे लोगों को बताना चाहते हैं कि अपने दिल
की आवाज़ सुनो, ढोंगी बाबाओं की नहीं। इसके
बाद उन्होंने वह ट्वीट डिलीट भी कर दिया। इस
पूरे घटनाक्रम में हुआ ये कि ऋषि कपूर के नाम का
फ़ायदा उठाकर मुंबई का एक अनाम एनजीओ
ख्याति पा गया। यानी दूसरों को बदनाम करके
ख़ुद का नाम हो गया। और पब्लिक के लिये ये हुआ
कि खाया पिया कुछ नहीं और गिलास फोड़ा
बारह आने का। मुझे व्यकितगत तौर पर उस
वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखा कि चाइल्ड
पोर्नोग्राफी टाइप कोई मामला बने। एक ह्यूमर
का वीडियो था, जिसे लेकर एनजीओ अपनी
दुकानदारी चमकाने थाने पहुँच गया।
चलिए, अब चलते हैं तीसरे आरोप पर कि ऋषि जी
महिला विरोधी थे और महिलाओं का सम्मान
नहीं करते थे। वह मैच जीतने पर महिला क्रिकेट टीम
से भी सौरव गांगुली जैसे व्यवहार की अपेक्षा
करते थे। यानी शर्ट उतारने वाली बात। तो ट्विटर
पर मूर्ख लोगों को कौन समझा सकता है भाई?
बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं कि जब बात समझ ना आए, तो
इंसान को चोंच बंद रखनी चाहिए। पर भारत में सब
चोंच फाड़ने वाले ही हैं। जरा देखिए, मरहूम ऋषि
साब ने क्या ट्वीट किया था- “Waiting for a repeat of Sourav Ganguly’s act on the balcony of The Lords Ground, London, when India beat England 2002 NatWest series final! YO.”
अगर अंग्रेज़ी ना आती हो तो इसका ट्रांसलेशन ये
है कि लॉर्ड्स ग्राउंड की बालकनी में सौरव
गांगुली जैसे करतब की प्रतीक्षा है। यहाँ ऋषि
जी ने कहां लिखा है कि महिला खिलाड़ी
अपनी शर्ट उतारकर हवा में लहराएं ? अगर भाव
आपको समझ नहीं आया, तो इसमें ऋषि जी की
क्या गलती थी? वह तो अपनी महिला क्रिकेट
टीम से इंग्लैंड को हराकर एक धाँसू विजयघोष की
उम्मीद कर रहे थे। इसका तरीक़ा कुछ भी हो
सकता था। पर नहीं। भाई लोगों को बाल की
खाल निकालने की आदत होती है। सो ना आगे
देखा, ना पीछा, ना कौआ और ना अपना कान,
बस दौड़ पड़े कौए के पीछे कि मेरा कान ले गया,
मेरा कान ले गया कौआ… ! वही मूर्ख लोग, जो तब
ऋषि जी का ट्वीट नहीं समझ पाए थे, आज उनकी
मौत के बाद पुराने गड़े मुर्दे निकालकर सोशल
मीडिया पर बदबू फैला रहे थे। एक सभ्य समाज को
ये सब शोभा देता है क्या ?
रही किम करदाशियां पर बने मेमे को ट्वीट करने
की बात तो सिम्पल लॉजिक है गुरु। ऋषि कपूर
फ़ैशन आइकन रहे थे। उन्हें इसकी समझ थी। सो किम
के कपड़ों के डिज़ाइन की तुलना जब बोरी में बंद
प्याज़ से करने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर
वायरल हुई तो बतौर एक यूज़र उन्होंने भी हास-
परिहास के अंदाज में इसे शेयर कर दिया। क्या हम
बातचीत में कभी-कभी अपनी महिला मित्रों,
यहाँ तक कि घर की महिलाओं से भी ये नहीं कह देते
कि आज सुग्गे यानी तोते जैसी ड्रेस क्यों पहनी
हो ? सो बाल-बच्चेदार और जिम्मेदार बुजुर्ग ऋषि
कपूर भी जब ऐसी ही कोई तस्वीर शेयर कर देते हैं
तो इसमें महिलाओं का अपमान कैसे हुआ
मूर्खाधिराज महाराज !! या तो गंदगी आपके
दिमाग़ में है या फिर आप ग्लास को हमेशा आधा
ख़ाली देखते हैं। ग्लास को आधा भरा हुआ देखने
की भी आदत डाल लीजिए। ज़िंदगी ख़ुशगवार
गुजरेगी।
एक बात और। ना मैं स्वर्गीय ऋषि कपूर साहब
का प्रवक्ता हूँ और ना ही कोई समाज
सुधारक। बस, सही को सही और ग़लत को ग़लत
कहना मुझे आता है। आप लोगों को शर्म नहीं आई
कि एक बुजुर्ग एक्टर, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से
भारतीय सिनेमा को इतना कुछ दिया, जिन्होंने
अपनी फ़िल्मों से आपकी ज़िंदगी के कई अनुभवों
को जीवंत कर दिया, जो जीवन भर सच के साथ
खड़ा रहा और कभी ये परवाह नहीं की कि सत्ता
या समाज या दोस्त-यार क्या बोलेंगे, बेबाक़ और
बेलाग तरीक़े से सार्वजनिक मंच पर अपनी बात
रखी, उस बुजुर्ग के इस दुनिया से जाने के बाद इतनी
नीचता पर उतर आए आप लोग !! धिक्कार है। जो
लोग कल बड़े पाक-साफ बनकर ऋषि कपूर पर सोशल
मीडिया पे इल्ज़ाम लगा रहे थे, उनसे यही कहूँगा
कि बॉस! पहला पत्थर वो मारे, जो पापी ना हो।
जिगर चाहिए सच बोलने के लिए।
ऋषि कपूर तो ऐसे इंसान थे, जिन्होंने अपनी
ज़िंदगी को खुली किताब बनाकर जनता के बीच
उछाल दिया। अपनी यादों को समेटते हुए किताब ‘खुल्लमखुल्ला’ में ये भी बता दिया कि उनके पिता
स्वर्गीय राजकपूर साहब का मरहूम नरगिस जी और
बैजयंतीमाला जी से अफ़ेयर था। एक वक़्त था जब
अवॉर्ड के लिए उन्होंने पैसे दिए थे, ये भी कबूला।
अब बोलिए, जो इंसान इतनी ईमानदारी से अपने
परिवार और ज़िंदगी के राज बता रहा हो, वह
क्या छिपाएगा हमसे ? जो कुछ छुपा था, सब
ज़ाहिर तो कर दिया उन्होंने अपनी किताब में !
और अगर आपमें इतनी बुद्धि नहीं है कि आप उनके
ट्वीट को समझ सकें तो उसका ग़लत इंटरप्रिटेशन
बनाकर उनको बदनाम और ज़लील तो मत करो !
जिस भारतीय संस्कृति की आप दुहाई दे रहे हो, वह
मरने के बाद दुश्मन के बारे में भी अपशब्द नहीं
निकालती क्योंकि तब पाक रूह परमात्मा से जा
मिली होती है और नश्वर शरीर ही जहान में रह
जाता है। सो उस रूह यानी आत्मा का अपमान,
परमात्मा का अपमान माना जाता है। क्या
इत्ती छोटी सी बात आप लोगों को समझ नहीं
आई ? बड़े फ़र्ज़ी आदमी हो यार आपलोग !!
#Nadimkibaat #नदीमकीबात
नोट- ऋषि कपूर साहब पर डोमेस्टिक वॉयलेंस का आरोप लगाने वाली जो दो ख़बरें छपी हैं, उनका लिंक यहाँ दे रहा हूं। आप चाहें तो उसे पढ़ सकते हैं
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इधर कुआँ और उधर खाई में फँस गए हैं पीएम मोदी
इधर कुआँ और उधर खाई में फँस गए हैं पीएम मोदी
Nadim Akhter 02:37
Nadim S. Akhter 12 May 2020
आप कुछ भी कयास लगा लीजिए पर कोई नहीं जानता कि आज पीएम मोदी रात 8 बजे क्या ऐलान करने वाले हैं। महाराष्ट्र और गुजरात जैसे कुछ राज्यों में lockdown बढ़ाना मजबूरी है, कुछ राज्यों में ढील दी जा सकती है। रही रेल और हवाई जहाज़ की बात, तो हो सकता है कि जल्द वो भी खोले जाएं। आखिर इतने मजदूर जो घर वापिस जा रहे हैं, lockdown का पालन तो नहीं ही हो रहा है ना! मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए श्रमिक स्पेशल ट्रेन भी चल रही है और सड़क के रास्ते मजदूर पैदल भी झुंड में घर लौट रहे हैं। पर क्या किया जा सकता है? बिना प्लानिंग के हुए लॉकडाउन में ये स्थिति तो होनी ही थी। जब लॉकडाउन पहली दफा घोषित हुआ तो देश में कोरोना के गिने-चुने घोषित मामले थे, यानी सरकारी आंकड़ों में इनकी संख्या बहुत कम थी। सो अगर उस वक्त एक हफ्ते का वक्त देकर ये कह दिया जाता कि एक सप्ताह बाद देश में लॉकडाउन लागू होगा, जिसे जहां पहुंचना है, चला जाए तो ऐसी स्थिति नहीं होती। सरकार के लिए भी सिरदर्द नहीं होता और गरीब मजदूर भी गांव की अपनी झोपड़ी मे पहुंच चुका होता। कम से कम घर जाते हुए हार्ट अटैक, गर्मी, बीमारी और ट्रेन से कटकर नहीं मरता। पर ऐसा हो ना सका।
अब जब लॉकडाउन-३ चल रहा है और चौथे लॉकडाउन की आशंका जताई जा रही है तो आज रात 8 बजे पूरे देश की निगाहें पीएम मोदी पर होंगी कि उनकी सरकार अजीबोग़रीब स्थिति में फँस चुके देश को इससे बाहर निकालने का क्या रास्ता लेकर आ रही है। क्या लॉकडाउन-4 लागू होगा? या फिर कुछ रियायतों के साथ लॉकडाउन चालू रहेगा? या फिर लॉकडाउन को सीमित करके आर्थिक गतिविधियों को चालू करने की देशव्यापी इजाज़त मिल जाएगी? सवाल कई हैं और जवाब आज रात को देश को मिल जाएगा।
वैसे सोशल मीडिया से लेकर हर जगह ये कयास हैं कि आज रात 8 बजे पीएम मोदी लॉकडाउन को लेकर क्या नई घोषणा करने वाले हैं पर ठीक-ठीक बात किसी को पता नहीं। हर एक्सपर्ट इस पर अपनी राय देता है क्योंकि वह सिर्फ अपने चश्मे से परिस्थितियों को देखता है। मुझे लगता है कि लॉकडाउन को लेकर एक समग्र नजर बनाने की जरूरत है और स्वार्थी ना होकर इस चक्रव्यूह से निकलने की एक कुशल योजना बनाने की दरकार है, तभी 130 करोड़ की आबादी वाला ये विशाल देश कोरोना जैसे सूक्ष्म वायरस से पार पा सकता है, वरना बड़ी मुश्किल होगी।
सो तमाम हालात पर गौर करने के बाद मुझे लगता है कि कुछ रियायतों के साथ lockdown धीरे-धीरे खोलने का ऐलान आज हो सकता है। लेकिन अगर जून-जुलाई में कोरोना के भारत में peak पर रहने की आशंका को देखें और सरकार एक बार फिर अर्थव्यवस्था को किनारे कर सिर्फ कोरोना नियंत्रण पे फोकस करे, तो lockdown बढ़ सकता है, पहले की तरह। फिर वही बात होगी कि जहां कोरोना कंट्रोल में है, वहां ढील दी जाएगी। पर समग्र रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था को इस ढील से कोई फायदा नहीं होने वाला।
इसलिए सरकार अब दोराहे पे खड़ी है। या तो lockdown में तगड़ी ढील देकर छोटे और बड़े उद्योगों को काम करने की इजाज़त दे, असंगठित मजदूर वर्ग को भी दिहाड़ी कमाने की छूट दे, दुकानदारों को कुछ पाबंदियों के साथ दुकानें खोलने की इजाजत दे और सुरक्षा उपायों के साथ पब्लिक को बाजार में टहलने की सुविधा दे या फिर..
कंप्यूटर मॉडल से बताई गई उस भविष्यवाणी को सिरमाथे रखे कि जून-जुलाई के आगामी महीनों में भारत में कोरोना के मामले उच्चतम स्तर पर होंगे। ऐसे में लॉकडाउन का सख़्ती से पालन करवाए ताकि देश में कोरोना विस्फोट ना हो। सरकार के लिए ये बड़ी दुविधा की स्थिति है। इधर शेर और उधर बब्बर शेर है। क्या किया जाए?
देश की अर्थव्यवस्था पाताल लोक में पहुँच चुकी है। नोटबंदी के बाद वह पहले ही बेहोश थी, अब तो कब्र में है। उद्योग और व्यापार जगत लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए है कि अब लॉकडाउन खोलकर उन्हें छूट दे वरना जो बचा-खुचा रह गया है, वह भी कबाड़ में तब्दील हो जाएगा। वह सरकार से Revival Package भी मांग रहा है ताकि बंद उद्योगों को दुबारा खड़ा कर सके और अपने कर्मचारियों को वेतन दे सके। लेकिन ये सब इतना आसान नहीं है। ये सरकार को भी पता है कि रिवाइवल पैकेज देने के बाद भी उद्योगों के सामने सबसे बड़ा संकट मांग का होगा। बाजार में कैश फ्लो एकदम ठप हो गया है, वह अलग मुसीबत है। हर उद्योग एक-दूसरे से चेन के रूप में बंधा होता है, सो अगर आगे वाला या पीछे वाला काम शुरु नहीं करेगा, तो आप अकेले काम शुरु करके क्या कर लोगे? आपका माल फंस जाएगा। ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिस पर विस्तार से डिस्कशन और योजना बनाने की जरूरत है। दो बूंद जिंदगी की वाला नारा अब उद्योगों के लिए लाना होगा और हर सेक्टर के हर छोटी-बड़ी इकाई की इसे एक साथ पिलाना होगा, तभी बैठ चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था खड़ी हो पाएगी, वरना Great Recession की भविष्यवाणी दुनियाभर में बड़े-बड़े अर्थशास्त्री तो कर ही रहे हैं।
ये सब बिज़नेस की बात आपको इसलिए बताई कि जान सकें के कोरोना ने भारत पर डबल अटैक किया है। एक तो जान का नुक़सान और दूसरा- माल का नुक़सान। एक को बचाओ, तो दूसरे की जान जाती है। बहुत मुश्किल घड़ी है और अब तक तो सरकार ने जान की परवाह की है, माल के नुक़सान को किनारे रखा है। पर अब पानी नाक तक पहुँच गया है। इससे ज़्यादा सरकार अर्थव्यवस्था को इग्नोर नहीं कर सकती। ऐसे में सरकार के पास क्या मास्टर प्लान है, उसी की झलक आज रात 8 बजे पीएम मोदी के संबोधन में आपको दिखेगी। मुझे लगता है कि ये एक रोडमैप होगा कि हमारी सरकार अब किस दिशा में बढ़ना चाह रही है क्योंकि अर्थव्यवस्था का सवाल बहुत बड़ा है।
इसी के मद्देनज़र पिछले कुछ दिनों से पीएम मोदी कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए बैठकें कर चुके हैं और उनकी राय ली है। लेकिन दिक़्क़त ये है कि अपनी-अपनी परेशानी के मुताबिक़ हर राज्य की राय जुदा है। महाराष्ट्र जहां देश में कोरोना के कुल मामलों का क़रीब एक तिहाई मामला है, वहाँ के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लॉकडाउन बढ़ाने को कह रहे हैं और बोल रहे हैं कि इसके अलावा और कोई चारा नहीं। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अनेकानेक कारणों से केंद्र पर हमलावर हैं। पिछली दफ़ा की मीटिंग में उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार कोरोना पर उनकी मदद करने की बजाय confusion बढ़ा रही है। उनका कहना था कि एक तरफ केंद्र, दुकानें खोलने को कहता है तो दूसरी तरफ lockdown भी चाहता है। सो अगर दुकानें खुलेंगी, तो lockdown का पालन कैसे होगा? कल की मीटिंग में उन्होंने फिर केंद्र पर हमला किया और कहा कि केंद्र सरकार, कोरोना के बहाने राजनीति ना करे, राज्य सरकारें अच्छा काम कर रही हैं। भाजपा शासित राज्यों को केंद्र से कोई गिला नहीं और सुना है कि कल की मीटिंग में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्यादा बोलने भी नहीं दिया गया और गृहमंत्री ने उनसे कहा कि वह बस चंद लाइनों में अपनी बात रख दें। उन्होंने वैसा ही किया।
लेकिन गैरबीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शिकायत कर रहे हैं। इनमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी शामिल हैं। वैसे मोदी जी राजस्थान के कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ये कहकर तारीफ़ कह चुके हैं कि कोरोना से निपटने में उन्होंने अच्छा काम किया है। शायद यही वजह रही कि कल यानी सोमवार को पीएम के साथ मुख्यमंत्रियों की जो मीटिंग हुई, उसमें बोलने का सबसे ज़्यादा समय अशोक गहलोत को मिला। ख़बर है कि गहलोत २० मिनट से भी ज़्यादा बोले और सबने उनको सुना। उसके बाद बाक़ी मुख्यमंत्रियों को 5-7 मिनट में ही बात ख़त्म करने को कह दिया गया।
इससे एक बात साफ़ हो रही है कि अबकी बार पीएम मोदी लॉकडाउन को लेकर जो फ़ैसला करेंगे, उसमें सारे मुख्यमंत्रियों की राय का समावेश होगा। आरोप लगते रहे हैं कि पहले लॉकडाउन की घोषणा में पीएम मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रयों से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया और एकतरफ़ा तरीक़े से रात में टीवी पर आकर लॉकडाउन का ऐलान कर दिया। पर आज पीएम मोदी की तक़रीर पहले से जुदा होगी। अब उनके पास देशभर से काफ़ी फ़ीडबैक है, काफ़ी कुछ हो गया है, विशेषज्ञों की राय को आज़मा लिया गया है, उसका नतीजा भी देख लिया गया है और फिर अब आगे के एक्शन की तैयारी है।
सो आख़िर में लाख टके का सवाल फिर वही है। आज पीएम लॉकडाउन को लेकर क्या घोषणा करेंगे? जैसा मैंने ऊपर लिखा है कि इस दफ़ा केंद्र की रणनीति में अर्थव्यवस्था प्रमुख पहलू होगा। सो हो सकता है कि लॉकडाउन में अच्छी-खासी ढील देकर आर्थिक गतिविधियों को चालू करने की इजाज़त मिल जाए। और जिन राज्यों में कोरोना का प्रकोप फैल रहा है, उन राज्यों की सरकारों से कहा जाए कि कोरोना के मामले कम होने पर वे भी अपने यहीं लॉकडाउन इसी तरह खोलें, जैसा केंद्र कह रहा है। सो आप देख लीजिए कि आप किस राज्य में हैं और आपके यहाँ कोरोना की क्या स्थिति है।
अगर आप रेड ज़ोन वाले इलाक़े में हैं तो फ़िलहाल किसी छूट की उम्मीद मत करिए। जो लोग ओरेंज या ग्रीन ज़ोन में हैं, उनके यहाँ बड़ी राहत मिलेगी। आर्थिक कारोबार शुरु हो सकेगा मगर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन आपको हर हाल में, हर जगह करना पड़ेगा। तब तक, जब तक कि कोरोना की वैक्सीन बनकर ना आ जाए। उसके भी कई लफड़े हैं और ये आसान ना होगा। बनाने के बाद भी सबको ये वैक्सीन लग जाए, ये संभव हो नहीं पाएगा। उस पे फिर कभी। अगली पोस्ट में।
धन्यवाद।
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मेरा अनुमान सही निकला, आर्थिक पैकेज भी मिला और लॉकडाउन-4 भी आएगा
मेरा अनुमान सही निकला, आर्थिक पैकेज भी मिला और लॉकडाउन-4 भी आएगा
Nadim Akhter 14:53
Nadim S. Akhter 13 May 2020
पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया, जो हमारी जीडीपी का 10 फ़ीसदी होगा। साथ ही # LockDown4 का ऐलान भी हो गया, जो नए रंग-रूप वाला होगा और इसकी घोषणा 18 मई से पहले हो जाएगी।
पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की ख़ास बात यही रही। पर हमारे प्रधानमंत्री जी ने शुरुआती 17 मिनट तक मुझ जैसे देशभक्त नागरिक को पका दिया। इंटरनेट पर टीवी देखता हूँ और डाटा लिमिटेड है मेरे पास, उसके बाद भी 17 मिनट तक लगातार पीएम को सुनता रहा, इस आशा में कि राष्ट्र के लिए कुछ अच्छी-अच्छी घोषणाएँ होंगी, देशभक्ति का इससे बड़ा सबूत क्या दूँ आपको। खैर !
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना मेरी आदत नहीं पर कल दिन में पीएम के आज के संबोधन के बारे में मैंने जिन बातों का ज़िक्र किया था, मुझे आपको ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पीएम ने ठीक उसी लाइन पर अपनी बात कही।
1. पहली बात। मैंने लिखा था कि देश का उद्योग जगत आर्थिक पैकेज की माँग कर रहा है और ये सरकार भी जानती है कि सिर्फ़ पैकेज देने से काम नहीं चलेगा। अर्थव्यवस्था के हर सेक्टर को -दो बूँद ज़िंदगी की- मिलनी चाहिए।
पीएम ने क्या कहा- प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि कोरोना के बाद अब तक केंद्र सरकार राहत के लिए जितने भी पैसे दे रही है, उसे मिला दिया जाए तो भारत 20 लाख करोड़ का पैकेज दे रहा है, जो हमारी जीडीपी का 10 फ़ीसदी बैठता है। साथ ही ये पैकेज उद्योग, किसान, मज़दूर, व्यापारी हर वर्ग के लिए होगा और इसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी।
यानी जैसा मैंने दिन में लिखा था- सिर्फ़ उद्योग के लिए पैकेज नहीं, हर वर्ग के लिए पैकेज मिलना चाहिए। दो बूँद ज़िंदगी की सबको चाहिए, पीएम ने ठीक वैसा ही ऐलान किया।
2. दूसरी बात जो हमने लिखी थी कि सरकार के लिए बड़ी दुविधा की स्थिति है। जान भी बचानी है और माल भी सुरक्षित रखना है, सो लॉकडाउन कुछ शर्तों के साथ खुलेगा। अलग-अलग जोन्स के अनुसार छूट मिलेगी और उद्योगों को काम शुरु करने दिया जाएगा वरना अर्थव्यवस्था का पट्टा बैठ जाएगा।
पीएम ने क्या कहा- यहाँ भी अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनते हुए आपको ये बता रहा हूँ कि पीएम ने इसी लाइन पर अपनी बात आगे बढ़ाई। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ लॉकडाउन के सहारे ज़िंदगी नहीं चल सकती। आत्मनिर्भर भारत बनाना होगा, सो लॉकडाउन--4 एक नए रंग-रूप में आएगा। 18 मई के पहले इसका ऐलान कर देंगे।
यानी जैसा मैंने कहा था कि जान के साथ-साथ सरकार माल के लिए भी चिंता करे क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था कब्र में पहुँच चुकी है और लॉकडाउन अब पूरे देश में एकसमान नहीं हो सकता। हर राज्य में इसका स्वरूप अलग-अलग होगा।
3. तीसरी बात जो हमने लिखी थी कि पिछले कई दिनों से पीएम सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं और इस बार उनकी तक़रीर जुदा होगी यानी अबकी बार पीएम सभी की बातों के मद्देनज़र ऐलान करेंगे।
पीएम ने क्या कहा- प्रधानमंत्री मोदी ने भी आज अपने संबोधन में कहा कि वह सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं, सबका फ़ीडबैक मिला है, सो लॉकडाउन-४ उसी के मुताबिक़ नए ढंग वाला होगा।
यानी यहाँ भी मेरा ये अनुमान बिल्कुल सटीक बैठा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों की सलाह और विशेषज्ञों की बात पर गौर करने के बाद ही लॉकडाउन-4 का ऐलान किया जाएगा। बात बस इतनी रही कि पीएम ने लॉकडाउन-4 का ऐलान आज ना करके उसे 18 मई से पहले करने की बात कही। लेकिन ये लॉकडाउन कैसा होगा, उसके संकेत दे दिए। वही, जो मैंने लिखा था कि अर्थव्यवस्था को गति देनी है, सो लॉकडाउन तो हटाना होगा और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग राज्यों में अलग तरह की ढील होगी।
आज दिन में पीएम मोदी के आज रात 8 बजे के संबोधन के बारे में मैंने क्या-क्या लिखा था और किस प्रकार मेरी भविष्यवाणी कहिए या अनुमान कहिए, सही हुई, अगर ये विस्तार से जानना है तो आप नीचे के लिंक को क्लिक करके पूरी बात पढ़ सकते हैं। शीर्षक है
"इधर कुआँ और उधर खाई में फँस गए हैं पीएम मोदी"
51notes
साहब आप कितना झूठ बोलते है...🙏🙏🙏
आपने दावा किया कि वायरस के संकट से पहले भारत ने कोई सुरक्षा उपकरण या पीपीई किट नहीं बनाया था
सफेद झूठ कैसे बोला जाता है कोई आपसे सीखे..
अगर हमने कोई पीपीई नहीं बनाया, तो सरकार ने फरवरी में निर्यात पर प्रतिबंध क्यों लगाया था जो चीज बनी ही नही उसका निर्यात कैसे रुक सकता है ???
आप भारत को आत्मनिर्भर बनाना चाहते है लेकिन पहले सच बोलना औऱ सुनना सिखिये बापू के देश मे अगर आपने असत्य की आंखों से आत्मनिर्भरता के सपने देखे तो पूरा भारत असत्य के प्रयोग ही करेगा 🙏🙏🙏🙏
अपूर्व भारद्वाज
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बिग मनी, बिग फार्मा और बिग करप्शन
गतांक से आगे........
आज से दो साल पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गर्भ नाल से जुड़ा हुआ संगठन स्वदेशी जागरण मंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एक अजीब सी माँग करता है कि हितों में टकराव के आधार पर नचिकेत मोर को भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड से हटाया जाए.
आप कहेंगे कि ये बिल गेट्स की श्रृंखला में नचिकेत मोर का क्या काम? नचिकेत मोर को तो इकनॉमी से जुड़े लोग तो एक बैंकर के बतौर जानते है उन्होंने कुछ समितियों का नेतृत्व भी किया है जिनकी सिफारिशों के आधार पर जनधन योजना जैसी बड़ी ओर महत्वपूर्ण योजना की परिकल्पना की गई थी........
आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि 2016 के मध्य से 2019 तक नचिकेत मोर बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के हेड थे, कमाल की बात यह है कि इस पद पर रहते हुए भी उन्हें मोदी सरकार ने आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्ति दे दी थी, जबकि मोदी सरकार लगातार बड़े NGO के पर कतरने का काम करती आई थी तो फिर नचिकेत मोर में ऐसा क्या खास था ?
स्वदेशी जागरण मंच के सह - संयोजक अश्विनी महाजन ने मोदी को लिखे गए पत्र में कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड में नचिकेत मोर को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है. यह हितों में टकराव का बिल्कुल सीधा मामला है, क्योंकि उनके प्रधान नियोक्ता बीएमजीएफ को विदेशी फंड प्राप्त होता है और आरबीआई फंड का नियामक है.’मोर बीएमजीएफ के भारत मे पूर्णकालिक प्रतिनिधि हैं. बीएमजीएफ केंद्रीय गृह मंत्रालय की सख्त निगरानी में है और विदेशी स्रोतों से सक्रियता से धन प्राप्त कर रहा है.
लेकिन सिर्फ एक यही वजह नही थी जिसकी वजह से स्वदेशी जागरण मंच उनकी आरबीआई में उपस्थिति का विरोध कर रहा था, स्वदेशी जागरण मंच अपने पत्र में आगे लिखता है
बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम कर रहा है बीएमजीएफ
'गृह मंत्रालय बीएमजीएफ पर इन आरोपों के कारण नजर रख रहा है कि यह फाउंडेशन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए काम कर रहा है ताकि स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्रों में सरकारी नीतियों को उनके पक्ष में प्रभावित कर सके.'
ध्यान दीजिए' स्वास्थ्य एवं कृषि क्षेत्रों में'....आगे अपने इस पत्र में स्वदेशी जागरण मंच मांग करता है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अलावा नीति आयोग, भारतीय मेडिकल अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और केंद्रीय कृषि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालयों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे ऐसे संगठनों एवं उनके प्रतिनिधियों से दूरी बनाए रखें.
ये हैरानी की बात है कि स्वदेशी जागरण मंच इस पत्र में ICMR का नाम लेता है स्वदेशी जागरण मंच के सह - संयोजक अश्विनी महाजन आगे कहते है कि 'हाल में मीडिया में कुछ खबरें आई थीं जिनमें आरोप लगाए गए थे कि बीएमजीएफ ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज (जीएचएस) नाम के एक एनजीओ की फंडिंग कर रहा है ताकि वह भारत में वैश्विक तौर पर व्यर्थ दवाएं इस्तेमाल करने के लिए जरूरी प्रयास करे'
यह एक बड़ी महत्वपूर्ण बात हमे पता लगती है जो बिल गेट्स फाउंडेशन के द्वारा तथाकथित रूप से किये जा रहे 'परोपकार' की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है और वो है वैश्विक तौर पर व्यर्थ दवाएं को भारत मे इस्तेमाल किये जाने का प्रयास करना, ओर यह सारी बाते मैं नही कह रहा हूँ यह कह रहा है दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवक संगठन कहे जाने वाला आरएसएस का एक सवसे महत्वपूर्ण संगठन........
2018 से पहले 2017 में टीकाकरण में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन भारत मे एक्सपोज हो चुका था, 2017 में बिल गेट्स और भारत सरकार के बीच हुआ एक अहम करार तोड़ दिया गया ये करार इम्युनाइजेशन टेक्निकल सपोर्ट यूनिट से जुड़ा हुआ था,दरअसल गेट्स फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से ITSU (इम्युनाइजेशन टेक्निकल सपोर्ट यूनिट) के लिए फंडिंग कर रहा था। जिसके तहत करीब 2.7 करोड़ शिशुओं का हर साल टीका करण किया जाता था। गेट्स फाउंडेशन राजधानी में टीकाकरण के काम को देखती थी उसकी रणनीति तय करती थी और सरकार को सलाह देती थी।
टीकाकरण में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन किसी से छुपी हुई नही थी हमने पिछली पोस्ट दो बूंद जिंदगी की ओरल पोलियो वैक्सीन ओर HPV वैक्सीन के बारे आपको बताया था लेकिन इसके अलावा भी जितने वैक्सीन इस संगठन की सहायता से लगाए गए उनके रिजल्ट भी बाद में संदिग्ध पाए गए इसलिए स्वदेशी जागरण मंच द्वारा उस पर भी सवाल खड़े किए जाने के कारण जांच की गई और कोई कार्यवाही तो नही की गई बस इतना किया गया कि बीएमजीएफ को इस प्रोग्राम से दूर कर दिया गया,
बहरहाल स्वदेशी जागरण मंच ने एक NGO ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज का इसमे नाम लिया था तो ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज क्या काम करता है यह जानना जरूरी था तो उसकी वेबसाइट पर जो जानकारी मिलती है वो ये है कि डेविड गोल्ड और विक्टर ज़ोनाना ने वर्ष 2002 में GHS की स्थापना की। GHS की स्थापना के समय उन्होंने एचआईवी एक्टीविज्म, मीडिया, उद्योग व सरकारी संस्थाओ में अपने व्यक्तिगत कार्य के अनुभवों से आधार निर्मित किया। इसके परिणामस्वरूप एक ऐसी कंपनी सामने आई जो उन्नत संचार व एडवोकेसी के माध्यम से संस्थाओं की मदद करती है
यानी कि एक तरह का पीआर का काम करना
वो आगे लिखते हैं 'संक्रामक रोगों पर काम के अपने आरंभिक अनुभव से आगे बढ़ते हुए हमने मुद्दों पर विशिष्ट विशेषज्ञता का विस्तार किया जिसमें स्वास्थ्य व विकास संबंधी चुनौतियों की विविधता शामिल है, जिसका क्षेत्र शोध एवं विकास से लेकर जलवायु परिवर्तन से होते हुए परिवार नियोजन सेवाओं तक है। अब हमारे राष्ट्रीयकार्यालय अमेरिका, ब्राजील, भारत, चीन, अफ्रीका और यूरोप में है'
GHS इंडिया की स्थापना नई दिल्ली में वर्ष 2010 में हुई यह वही समय था जब बिल गेट्स इस दशक को टीकाकरण का दशक घोषित कर रहे थे
GHS इंडिया अपने बारे में बताते हुए लिखता है
'नीति निर्माताओं, प्रोग्राम मैनेजरों और अन्य निर्णय लेने वालों के बीच महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याओं की प्राथमिकता सुनिश्चित करने के लिए, हम भारत सरकार और राज्य सरकारों के साथ ही साथ अन्य प्रमुख हितधारकों और तमाम क्षेत्रों के प्रभावी लोगों व संस्थाओं के साथ भी मिलकर काम करते हैं।
हम क्षेत्रीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर 'मीडिया' के साथ मिलकर भी काम करते हैं, ताकि स्वास्थ्य संबंधी विमर्श को अधिक विस्तार मिले और भारतीय मीडिया में स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को उजागर करने के लिए अधिक अनुकूल वातावरण निर्मित हो सके।'
शायद अब आपके समझ मे आ सके कि मीडिया क्यो वैक्सीन के बेजा इस्तेमाल के बारे में, व्यर्थ दवाओं के भारत मे इस्तेमाल होने के बारे में कोई खबरे क्यो नही दिखाता है........सिर्फ पॉजिटिव खबरे ही क्यो दिखाई जाती है.......
क्रमशः
9 May at 11:58 · Public
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अरनब ओर अरनब जैसे तमाम बीजेपी की थाली की झूठन चाटने वाले विशिष्ट 'जीव-जंतु' महीने भर से टीवी पर चिल्ला चिल्ला कर पूछते रहे कि 'इंडिया वान्ट्स टू नो'........मौलाना साद को गिरफ्तार क्यो नही किया जा रहा है?
ये सवाल उन्होंने सरकार के अलावा हर दल के छोटे मोटे प्रवक्ता ओर 5000 रुपये के लालच में टीवी पर आकर कौम की एवज में लिटरली गाली खाते हुए मौलानाओं से बार बार पूछा....... आज इस बहुत छोटे से सवाल का जवाब इंडियन एक्सप्रेस ने खोज निकाला है कि मौलाना साद को गिरफ्तार क्यो नही किया जा रहा है ?
इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि इंस्पेक्टर सतीश कुमार की अगुवाई वाली जांच टीम वायरल हुई ऑडियो क्लिप का पता लगाने की कोशिश कर रही है। लेकिन लैपटॉप से ऐसी कोई क्लिप बरामद नहीं हुई है, जिसके चलते मौलाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में पता चला है कि वायरल ऑडियो क्लिप में धर्म और पुलिस को लेकर जो बयान दिया गया है, वो अलग अलग आयोजन में और किसी और संदर्भ में दिया गया था, जिसे ऑडियो में जोड़ दिया गया है। जांच टीम ने नोटिस किया है कि वायरल ऑडियो कई अन्य क्लिप को जोड़कर बनायी गई है। फिलहाल वायरल ऑडियो को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया गया है
दरअसल मौलाना साद के खिलाफ मुकेश वालिया की शिकायत के आधार पर एक मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसमें कथित तौर पर मौलाना साद की एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने की शिकायत की गई थी। इस ऑडियो क्लिप में मौलाना साद अपने समर्थकों, अनुायियों से कथित तौर पर लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने और धार्मिक सम्मेलनों में शामिल होने की बात कह रहे हैं।
यानी जब ऑडियो क्लिप ही झूठी निकली तो दिल्ली पुलिस किस मुँह से मौलाना साद को गिरफ्तार करने के लिए जाएगी?.......…यह बात शुरू से पुलिस को मालूम थी और इसलिए ही इस मामले को लंबे समय तक लटका के रखा गया ताकि इन बिके हुए चैनलों पर बहस चला चला कर कोरोना जैसी बीमारी पर मुसलमानों से नफरत फैलाने के एजेंडा पर भरपूर काम किया जा सके....ओर वो अपने एजेंडे में कामयाब हो चुके हैं "तबलीगी' शब्द को अब एक गाली सरीखा इस्तेमाल किया जा रहा है
अब सारे नफरती चैनलो पर दिन भर बकवास करते हुए न्यूज़ एंकर्स इस डॉक्टर्ड क्लिप वाली खबर पर चुप्पी साध जाएंगे!.........वो यह कभी नही पूछेंगे कि यह डॉक्टर्ड ऑडियो क्लिप बनाई किसने?..... क्योकि वह अगर ऐसा पूछेंगे तो खुद ही एक्सपोज हो जाएंगे.......
9 May at 13:38 · Public
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थोड़ी गड़बड़ कर गए मोदी जी इस बार विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करने में.......
उन्हें बोलना चाहिए था मेरे प्यारे बहनों भाइयों मैं कोरोना के आर्थिक पैकेज की घोषणा यही से करूँगा, ( कैमरे पर टीवी के पर बैठे दर्शक की आँख में आंख डालकर ) करू?....करू?..... करू?.....
10 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
11 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
12 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
13 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
14 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
15 लाख करोड़ करू की ज्यादा करू ?.......
बहन भाइयों में वादा करता हूँ .....कान जरा नजदीक रख सुन लीजिए, मेरी सरकार ( हाथ जोर जोर से हवा में हिलाते हुए) 20 लाख करोड़ का विशेष पैकेज दे रही है कोरोना के लिए......
( याद तो आ ही गया होगा!.... नही आया हो तो कमेन्ट बॉक्स में देख लीजिए)
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर लॉकडाउन के बीच देश को संबोधित किया। उन्होंने जहां एक तरफ केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कोरोना संकट को दूर करने के उपायों और फैसलों की सराहना की वहीं देशवासियों का भी धन्यवाद किया। इस संबोधन के केंद्र में उनके द्वारा 20 लाख करोड़ के पैकेज का एलान रहा। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी साफ कर दिया है कि लॉकडाउन 4 एक नए रंग रूप में होगा जिसके नियम कायदे 18 मई से पहले देशवासियों को बता दिए जाएंगे। पीएम मोदी के इस संबोधन में देश को आर्थिक मजबूती देने का रोड़मैप भी था। उन्होंने इस संबोधन से पहले ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कोरोना पर बैठक की थी और उनसे उनके विचार जाने थे। आइए जानते हैं उनके संबोधन की कुछ अहम बातें।
पीएम मोदी ने इस संबोधन में देश को इस संकट की घड़ी को अवसर में बदलने का रोड़मैप दिखाया। उन्होंने इस लक्ष्य को पाने के लिए देश के हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों के अंदर वित्तमंत्री चरणबद्ध तरीके से इसका एलान करेंगी। इसमें देश के किसानों, मजदूरों, उद्योगों समेत सभी के लिए कुछ न कुछ होगा।
अब तक लगे लॉकडाउन के दौरान हमारे देश के मजदूरों, रेहड़ी वालों और उन लोगों ने जिनका काम रोज कमाना खाना रहा है सबसे ज्यादा मुसीबत झेली है। अब वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर उनके लिए कुछ करें और उन्हें मजबूती प्रदान करें।
पीएम मोदी ने कहा कि लॉकडाउन 4 का एकदम नया रंगरूप होगा। इस लॉकडाउन हर देशवासी नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करेगा। हर कोई अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहेगा साथ ही अपने करीबियों की भी सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा। लॉकडाउन पर फैसले के लिए राज्यों से भी सुझाव मांगे गए थे। 18 मई से पहले लॉकडाउन 4 के नए नियमों को भी पूरी तरह से सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
कोरोना संकट के चलते लगे लॉकडाउन के दौरान भारत में आत्मनिर्भर बनने की तरफ कदम बढ़ाया है। कोरोना संकट से पहले जहां नाममात्र की पीपीई किट और एन95 मास्क भारत में बना करते थे वहीं अब हम हर रोज दो लाख पीपीई और इतने ही एन95 मास्क बना रहे हैं। हमनें इस दौरान अपने लोकल ब्रांड की तरफ सफलतापूर्वक कदम बढ़ाया है। वहीं हमारे लोकल ब्रांड ने देश की मांग को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब समय आ गया है कि हम इन लोकल ब्रांड को ज्यादा से ज्यादा अपनाएं और इन्में मजबूत बनाएं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई बड़े ब्रांड जिनका हम आज गर्व के साथ उपयोग करते हैं कभी लोकल ही थे। लेकिन वहां के लोगों ने अपनाया और उनकी सराहना की और उनका प्रचार-प्रसार भी किया। इसके बाद ही वे वैश्विक ब्रांड बन सके। अब हमें अपने लोकल ब्रांड को आगे बढ़ाना है जो देश को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित होगा।
उन्होंने कहा कि कोरोना से मुकाबला करते हुए दुनिया को चार माह से अधिक बीत चुके हैं। इस दौरान दुनिया के 42 लाख से ज्यादा लोग इससे पीडि़त हुए हैं और पौने 3 लाख से ज्यादा लोगों की दुखद मौत हुई है। भारत में भी लोगों ने अपनों को खोया है। उनके प्रति हम अपनी संवेदना प्रकट करते हैं। एक वायरस ने दुनिया को तहस नहस कर दिया हे। विश्व में करोड़ों जिंदगियों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। सारी दुनिया जिंदगी बचाने में जुटी है। हमनें ऐसा संकट पहले कभी न देखा और न ही सुना। मानव जाति के लिए ये अकल्पनिय है। ये संकट अभूतपूर्व है। लेकिन इसमें भी हमें न थकना है, न हारना और बिखरना है। हमें सतर्क रहते हुए इस जंग के नियमों का पालन करते हुए खुद को बचाना भी है और आगे भी बढ़ना है। आज जब दुनिया संकट में है तो हमें अपना संकल्प और मजबूत करना है। हमारा संकल्प इस संकट से भी विराट होना चाहिए।
हम पिछली शताब्दी से सुनते आए हैा कि 21 वीं सदी भारत की है। कोरेाना संकट के बीच पूरी दुनिया भारत की तरफ बड़ी हसरत से देख रही है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। से स्थिति हमें सिखाती है कि इस संकट का मुकाबला केवल आत्मनिर्भर बनकर ही किया जा सकता है। एक राष्ट्र के रूप में हम आज एक अहम मोड़ पर खड़े हैं। भारत के लिए ये आपदा एक संकेत और संदेश लेकर आई है। इसमें अवसर भी है।
विश्व को भारत आशा की किरण के तौर पर देख रहा है। हमारी संस्कृति वसुधेव कुटुंबकुम है। हम जब ये बात करते हैं तो भारत आत्म केंद्रित की वकालत नहीं करता है। इसमें पूरी दुनिया के सुख और उसकी चिंता होती है। हम जय जगत में विश्वास रखते हैं। हम पूरी दुनिया को परिवार मानते हैं। हम इस धरती को अपनी मां मानते हैं। ऐसे में जब हम आत्मनिभ्रर बनते है। हमारी प्रगति में विश्व की प्रगति समाहित होती है। हमारे कार्य का प्रभाव दुनिया पर पड़ता है। खुले में शौच से मुक्त होने वाले भारत से दुनिया की सोच बदलती है। हमारे अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता है। ग्लोबल योगा दिवस इंसान को तनाव से मुक्त दिलाने के लिए दुनिया को हमारा उपहार है।
जब दुनिया में Y2K का संकट छाया था तो भारत ने ही दुनिया को इससे निकाला था। आज हमारे पास साधन भी है और सामर्थ्य भी है। आज हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरनी टैलेंट हें। हम अपनी क्वालिटी को, सप्लाई चेन को और बेहतर करेंगे। ये हम कर सकते हैं और हर हाल में करेंगे। हमनें अपने सामने कच्छ के भीषण भूकंप को देखा है। जब पूरा कच्छ एक मलबे में तब्दील हो गया था लेकिन बाद में खुद दोबारा अपने पांव पर खड़ा हो गया।
आत्मनिर्भर भारत से ही पूरा होगा 21 वीं सदी को भारत की बनाने का संकल्प। यही नूतन पर्व भी होगा। हमें आत्मनिर्भर भारत बनाने से कोई नहीं रोक सकता अपने परिवार और करीबियों का ध्यान रखें।
वैज्ञानिक बताते हैं कि कोरोना लंबे समय तक रहेगा। लेकिन ऐसा नहीं होने देना है कि इसके ही इर्द गिर्द हमारी जिंदगी सिमट जाए। हम एहतियात बरतेंगे लेकिन कामयाबी के साथ आगे बढ़ेंगे। लॉकडउान 4 नया होगा 18 मई से पहले इसकी जानकारी मिल जाएगी। नियमों का पालन करते हुए हम इस संकट से लड़ेंगे और आगे बढ़ेंगे।
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नई दिल्ली, एजेंसियां। लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मसले पर चर्चा की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही हम लॉकडाउन को क्रमबद्ध ढंग से हटाने पर गौर कर रहे हैं लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जब तक हम वायरस पर कारगर कोई वैक्सीन या उपाय नहीं ढूंढ लेते हैं तब तक वायरस से लड़ने के लिए हमारे पास सबसे बड़ा हथियार सामाजिक दूरी ही है। प्रधानमंत्री के संबोधन से जुड़े हर अपडेट के लिए जुड़े रहें jagran.com के साथ...
PM Narendra Modi Address Nation -
- पीएम मोदी ने कहा, आत्मनिर्भरता हमें सुख और संतोष देने के साथ-साथ सशक्त भी करती है। 21वीं सदी, भारत की सदी बनाने का हमारा दायित्व, आत्मनिर्भर भारत के प्रण से ही पूरा होगा। आत्मनिर्भर भारत का ये युग, हर भारतवासी के लिए नूतन प्रण भी होगा, नूतन पर्व भी होगा। अब एक नई प्राणशक्ति, नई संकल्पशक्ति के साथ हमें आगे बढ़ना है। इस दायित्व को 130 करोड़ देशवासियों की प्राणशक्ति से ही ऊर्जा मिलेगी।
- पीएम मोदी ने कहा, लॉकडाउन का चौथा चरण, लॉकडाउन 4, पूरी तरह नए रंग रूप वाला होगा, नए नियमों वाला होगा। राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं, उनके आधार पर लॉकडाउन 4 से जुड़ी जानकारी भी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी। पीएम मोदी ने कहा, ये संकट इतना बड़ा है, कि बड़ी से बड़ी व्यवस्थाएं हिल गई हैं। लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में हमने, देश ने हमारे गरीब भाई-बहनों की संघर्ष-शक्ति, उनकी संयम-शक्ति का भी दर्शन किया है। आज से हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए ‘वोकल’ बनना है, न सिर्फ लोकल प्रोडक्ट खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा देश ऐसा कर सकता है।
-पीएम मोदी ने कहा, अब रिफार्म के उस दायरे को व्यापक करना है, नई ऊंचाई देनी है। ये रिफॉर्मस खेती से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन में होंगे, ताकि किसान भी सशक्त हो और भविष्य में कोरोना जैसे किसी दूसरे संकट में कृषि पर कम से कम असर हो। साथियों, आत्मनिर्भरता, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। आत्मनिर्भरता, ग्लोबल सप्लाई चेन में कड़ी स्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है।
- पीएम मोदी ने कहा, ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है। आपने भी अनुभव किया है कि बीते 6 वर्षों में जो रिफार्म हुए, उनके कारण आज संकट के इस समय भी भारत की व्यवस्थाएं अधिक सक्षम, अधिक समर्थ नज़र आईं हैं।
- पीएम मोदी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए, इस पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडटी और कानून सभी पर बल दिया गया है। ये आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, हमारे लघु-मंझोले उद्योग, हमारे MSME के लिए है, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है, जो आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का मजबूत आधार है।
- पीएम मोदी ने कहा, इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा।
- पीएम मोदी ने कहा, कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। ये आर्थिक पैकेज, 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है।
- पीएम मोदी ने कहा, तीसरा पिलर- हमारा System। एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली Technology Driven व्यवस्थाओं पर आधारित हो। चौथा पिलर- हमारी डेमोग्राफी - दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रसी में हमारी Vibrant Demography हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है। पाँचवाँ पिलर- डिमांड- हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।
- पीएम मोदी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच Pillars पर खड़ी होगी। पहला पिलर Economy एक ऐसी इकॉनॉमी जो Incremental change नहीं बल्कि Quantum Jump लाए दूसरा पिलर Infrastructure एक ऐसा Infrastructureजो आधुनिक भारत की पहचान बने।
- पीएम मोदी ने कहा, मैंने अपनी आंखों के सामने कच्छ भूकंप के वे दिन देखे हैं। हर तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा। सब कुछ ध्वस्त हो गया था। ऐसा लगता था मानो पूरा कच्छ मौत की चादर ओढ़कर सो गया हो। उस समय कोई भी नहीं सोच सकता था कि वहां हालत बदल पाएंगे। लेकिन देखते ही देखते कच्च उठ खड़ा हुआ। कच्छ चल पड़ा। कच्छ बढ़ चला। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं है। कोई राह मुश्किल नहीं है। आज तो चाह भी और राह भी है। यह है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। भारत की संकल्पशक्ति ऐसी है कि भारत आत्मनिर्भर बन सकता है।
- पीएम मोदी ने कहा, आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट है, हम Best Products बनाएंगे, अपनी Quality और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं, कोई राह मुश्किल नहीं। और आज तो चाह भी है, राह भी है। ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना।
- पीएम मोदी ने कहा, दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है, मानव जाति के कल्याण के लिए बहुत कुछ अच्छा दे सकता है। सवाल यह है - कि आखिर कैसे? इस सवाल का भी उत्तर है- 130 करोड़ देशवासियों का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प।
- पीएम मोदी ने कहा, जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई आशा लेकर पहुंचती हैं। इन कदमों से दुनिया भर में भारत की भूरि-भूरि प्रशंसा होती है, तो हर भारतीय गर्व करता है।
- पीएम मोदी ने कहा, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्लोबर वॉर्मिंग के खिलाफ भारत की सौगात है। इंटरनेशनल योगा दिवस की पहल, मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है।
- पीएम मोदी ने कहा, जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की तस्वीर बदल जाती है। टीबी हो, कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही पड़ता है।
- पीएम मोदी ने कहा, भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव, विश्व कल्याण पर पड़ता है।
- पीएम मोदी ने कहा, जो पृथ्वी को मां मानती हो, वो संस्कृति, वो भारतभूमि, जब आत्मनिर्भर बनती है, तब उससे एक सुखी-समृद्ध विश्व की संभावना भी सुनिश्चित होती है।
- पीएम मोदी ने कहा, विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन, आशा की किरण नजर आता है। भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार, उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वसुधैव कुटुंबकम है।
- पीएम मोदी ने कहा, एन-95 मास्क का भारत में नाममात्र उत्पादन होता था। आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं।
-पीएम मोदी ने कहा, इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है।
- पीएम मोदी ने कहा, विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है- "आत्मनिर्भर भारत"
- पीएम मोदी ने कहा, जब हम इन दोनों कालखंडों को भारत के नजरिए से देखते हैं तो लगता है कि 21वीं सदी भारत की हो, ये हमारा सपना नहीं, ये हम सभी की जिम्मेदारी है।
- पीएम मोदी ने कहा, लेकिन थकना, हारना, टूटना-बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है।
- पीएम मोदी ने कहा, साथियों, एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। विश्व भर में करोड़ों जिंदगियां संकट का सामना कर रही हैं। सारी दुनिया, जिंदगी बचाने की जंग में जुटी है।
- पीएम मोदी ने कहा, सभी देशवासियों को आदर पूर्वक नमस्कार, कोरोना संक्रमण से मुकाबला करते हुए दुनिया को अब चार महीने से ज्यादा हो रहे हैं।
कयासों का दौर शुरू
- पीएम नरेंद्र मोदी का यह संबोधन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करने के ठीक अगले दिन होना है। पीएम के ऐलान को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा कयास लॉकडाउन पर लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लॉकडाउन 4 को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
ममता बोलीं, आय के बारे में क्या
- पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री के साथ बैठकों के दौरान उम्मीदें हैं लेकिन हम हर बार खाली हाथ लौटते हैं। पिछले 2 महीनों से कोई आय नहीं हुई है लेकिन हमें केंद्र से कोई विकल्प नहीं मिल रहा है। हमें 52 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। कोरोना जारी रहेगा लेकिन आय के बारे में क्या...?
संबोधन से पहले गरमाई सियासत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में यह संकेत दे चुके हैं कि किसी भी सूरत में लॉकडाउन से धीरे धीरे चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलना होगा। पीएम मोदी ने राज्यों से इस बारे में एग्जिट प्लान मांगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई राज्य अभी लॉकडाउन हटाना नहीं चाहते हैं जबकि कुछ राहत पैकेजों की मांग कर रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कुछ आरोपों के साथ सियासी माहौल भी गरमा दिया है।
ममता ने लगाए गंभीर आरोप
- इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की वीडियो कॉन्फ्रेंस मीटिंग से नाखुश ममता बनर्जी का कहना है कि बैठक से बंगाल को कुछ हासिल नहीं हुआ और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा है। ममता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल को केंद्र से उतना वित्तीय सहयोग नहीं मिला है जिनने का वह हकदार है।
ममता बनर्जी ने की यह पहल
- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लॉकडाउन-4 की अटकलों से पहले एलान किया है कि राज्य में रेड जोन को आगे तीन कैटिगरी (a, b, c) में बांटा जाएगा। पुलिस इन इलाकों को देखेगी। राज्य के कंटेनमेंट जोनों में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने राहत भरी जानकारी दी
- लॉकडाउन के चौथे चरण की अटकलों के बीच देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70 हजार को पार कर गई है। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70756 हो गई है जिसमें से 22454 ठीक हो चुके हैं। देश में अभी कोरोना के सक्रिय संक्रमितों की संख्या 46008 है। देश में कोरोना से 2293 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक राहत भरी जानकारी दी है कि देश में कोरोना से होने वाली मृत्युदर बाकी मुल्कों के लिहाज से बेहद कम है।
पांचवीं बार संबोधन
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने सभी संबोधनों में देशवासियों से सहयोग की अपील की है। साथ ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई को और धारदार बनाने का आह्वान किया है। आइये संक्षेप में जानते हैं कि पीएम मोदी ने इससे पहले के संबोधनों में क्या बातें कही हैं।
पहले संबोधन में जनता कर्फ्यू की बात
प्रधानमंत्री ने पहली बार 19 मार्च 2020 की रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने सावधानियों का पालन करते हुए 22 मार्च (रविवार) को जनता कर्फ्यू की अपील की थी।
दूसरे संबोधन में लॉकडाउन का एलान
जनता कर्फ्यू की सपलता के बाद पीएम मोदी ने दूसरी बार 24 मार्च की रात 8 बजे देश को संबोधित करते हुए पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी।
तीसरे संबोधन में दीप जलाने की अपील
तीन अप्रैल को पीएम मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे पांच अप्रैल की रात नौ बजे कोरोना वॉरियर्स के लिए 9 मिनट का वक्त निकालें और घरों की बत्तियां बंद कर दीप, मोमबत्ती, टार्च, मोबाइल की फ्लैश लाइटें रोशन करें।
चौथे संबोधन में लॉकडाउन-2 का एलान
प्रधानमंत्री ने चौथी बार 14 अप्रैल को देशवासियों को संबोधित करते हुए तीन मई तक के लिए पूरे देश में लॉकडाउन-2 लगाए जाने की घोषणा की थी।
दिखेगी भविष्य की तस्वीर
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। प्रधानमंत्री ने ‘दो गज की दूरी’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा था कि कई मुख्यमंत्रियों द्वारा रात में कर्फ्यू लगाने के लिए दिए गए सुझाव को मानने से निश्चित रूप से लोगों में सतर्कता की भावना फिर से पैदा होगी। ऐसे समय जब लॉकडाउन-3 खत्म होने में अब पांच दिन का समय ही बचा है... पीएम मोदी का यह संबोधन भविष्य की तस्वीर दिखाएगा। कोरोना से निपटने के लिए देश को लॉकडाउन-4 (Lockdown-4) की जरूरत है या नहीं और यदि है तो उसकी रूपरेखा और तस्वीर कैसी होगी... इस बारे में भी प्रधानमंत्री इशारा करेंगे।
अर्थव्यवस्था को गति देने की चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करके भावी कदमों को लेकर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमें यह समझना होगा कि अब कोरोना से लड़ाई पहले ज्यादा केंद्रित होगी। आगे हमें इसके फैलाव को रोकना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग सभी ऐहतियाती कदमों का पालन करें। इस बातचीत में पीएम मोदी ने स्पष्ट संकेत दिया था कि अगले चरण में राहत तो दी जाएगी लेकिन लॉकडाउन एकदम से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि हमारे सामने बीमारी को रोकने के साथ साथ अर्थव्यवस्था को गति देने की गहरी चुनौती है।
जन से लेकर जग तक की नीति पर चलने के संकेत
पीएम मोदी के साथ बातचीत में ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री भी लॉकडाउन में एकमुश्त ढील देने के पक्ष में नहीं दिखे। वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि जन से लेकर जग तक की नीति पर आगे बढ़ना होगा। सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन के अगले दौर में ऑरेंज और रेड जोन में भी थोड़ी ढील दी जा सकती है। हालांकि आवागमन, मनोरंजन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम शुरू होने के लिए अभी इंतजार करना होगा। यही नहीं गांवों को संक्रमण से बचाने की भी एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में पीएम मोदी के इस संबोधन को बेहत खास माना जा रहा है।
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नई दिल्ली, एजेंसियां। लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस और लॉकडाउन के मसले पर चर्चा की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही हम लॉकडाउन को क्रमबद्ध ढंग से हटाने पर गौर कर रहे हैं लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जब तक हम वायरस पर कारगर कोई वैक्सीन या उपाय नहीं ढूंढ लेते हैं तब तक वायरस से लड़ने के लिए हमारे पास सबसे बड़ा हथियार सामाजिक दूरी ही है। प्रधानमंत्री के संबोधन से जुड़े हर अपडेट के लिए जुड़े रहें jagran.com के साथ...
LIVE PM Narendra Modi will Address Nation
- पीएम मोदी ने कहा, कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। ये आर्थिक पैकेज, 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है।
- पीएम मोदी ने कहा, तीसरा पिलर- हमारा System। एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली Technology Driven व्यवस्थाओं पर आधारित हो। चौथा पिलर- हमारी डेमोग्राफी - दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रसी में हमारी Vibrant Demography हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है। पाँचवाँ पिलर- डिमांड- हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।
- पीएम मोदी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच Pillars पर खड़ी होगी। पहला पिलर Economy एक ऐसी इकॉनॉमी जो Incremental change नहीं बल्कि Quantum Jump लाए दूसरा पिलर Infrastructure एक ऐसा Infrastructureजो आधुनिक भारत की पहचान बने।
- पीएम मोदी ने कहा, आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट है, हम Best Products बनाएंगे, अपनी Quality और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं, कोई राह मुश्किल नहीं। और आज तो चाह भी है, राह भी है। ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना।
- पीएम मोदी ने कहा, दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है, मानव जाति के कल्याण के लिए बहुत कुछ अच्छा दे सकता है। सवाल यह है - कि आखिर कैसे? इस सवाल का भी उत्तर है- 130 करोड़ देशवासियों का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प।
- पीएम मोदी ने कहा, जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया में आज भारत की दवाइयां एक नई आशा लेकर पहुंचती हैं। इन कदमों से दुनिया भर में भारत की भूरि-भूरि प्रशंसा होती है, तो हर भारतीय गर्व करता है।
- पीएम मोदी ने कहा, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्लोबर वॉर्मिंग के खिलाफ भारत की सौगात है। इंटरनेशनल योगा दिवस की पहल, मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है।
- पीएम मोदी ने कहा, जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की तस्वीर बदल जाती है। टीबी हो, कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही पड़ता है।
- पीएम मोदी ने कहा, भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव, विश्व कल्याण पर पड़ता है।
- पीएम मोदी ने कहा, जो पृथ्वी को मां मानती हो, वो संस्कृति, वो भारतभूमि, जब आत्मनिर्भर बनती है, तब उससे एक सुखी-समृद्ध विश्व की संभावना भी सुनिश्चित होती है।
- पीएम मोदी ने कहा, विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन, आशा की किरण नजर आता है। भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार, उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वसुधैव कुटुंबकम है।
- पीएम मोदी ने कहा, एन-95 मास्क का भारत में नाममात्र उत्पादन होता था। आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं।
-पीएम मोदी ने कहा, इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है।
- पीएम मोदी ने कहा, विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही है- "आत्मनिर्भर भारत"
- पीएम मोदी ने कहा, जब हम इन दोनों कालखंडों को भारत के नजरिए से देखते हैं तो लगता है कि 21वीं सदी भारत की हो, ये हमारा सपना नहीं, ये हम सभी की जिम्मेदारी है।
- पीएम मोदी ने कहा, लेकिन थकना, हारना, टूटना-बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है।
- पीएम मोदी ने कहा, साथियों, एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। विश्व भर में करोड़ों जिंदगियां संकट का सामना कर रही हैं। सारी दुनिया, जिंदगी बचाने की जंग में जुटी है।
- पीएम मोदी ने कहा, सभी देशवासियों को आदर पूर्वक नमस्कार, कोरोना संक्रमण से मुकाबला करते हुए दुनिया को अब चार महीने से ज्यादा हो रहे हैं।
कयासों का दौर शुरू
- पीएम नरेंद्र मोदी का यह संबोधन राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करने के ठीक अगले दिन होना है। पीएम के ऐलान को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा कयास लॉकडाउन पर लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर लॉकडाउन 4 को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
ममता बोलीं, आय के बारे में क्या
- पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री के साथ बैठकों के दौरान उम्मीदें हैं लेकिन हम हर बार खाली हाथ लौटते हैं। पिछले 2 महीनों से कोई आय नहीं हुई है लेकिन हमें केंद्र से कोई विकल्प नहीं मिल रहा है। हमें 52 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। कोरोना जारी रहेगा लेकिन आय के बारे में क्या...?
संबोधन से पहले गरमाई सियासत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में यह संकेत दे चुके हैं कि किसी भी सूरत में लॉकडाउन से धीरे धीरे चरणबद्ध तरीके से बाहर निकलना होगा। पीएम मोदी ने राज्यों से इस बारे में एग्जिट प्लान मांगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई राज्य अभी लॉकडाउन हटाना नहीं चाहते हैं जबकि कुछ राहत पैकेजों की मांग कर रहे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कुछ आरोपों के साथ सियासी माहौल भी गरमा दिया है।
ममता ने लगाए गंभीर आरोप
- इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी की वीडियो कॉन्फ्रेंस मीटिंग से नाखुश ममता बनर्जी का कहना है कि बैठक से बंगाल को कुछ हासिल नहीं हुआ और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा है। ममता का आरोप है कि पश्चिम बंगाल को केंद्र से उतना वित्तीय सहयोग नहीं मिला है जिनने का वह हकदार है।
ममता बनर्जी ने की यह पहल
- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लॉकडाउन-4 की अटकलों से पहले एलान किया है कि राज्य में रेड जोन को आगे तीन कैटिगरी (a, b, c) में बांटा जाएगा। पुलिस इन इलाकों को देखेगी। राज्य के कंटेनमेंट जोनों में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने राहत भरी जानकारी दी
- लॉकडाउन के चौथे चरण की अटकलों के बीच देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70 हजार को पार कर गई है। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 70756 हो गई है जिसमें से 22454 ठीक हो चुके हैं। देश में अभी कोरोना के सक्रिय संक्रमितों की संख्या 46008 है। देश में कोरोना से 2293 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने एक राहत भरी जानकारी दी है कि देश में कोरोना से होने वाली मृत्युदर बाकी मुल्कों के लिहाज से बेहद कम है।
पांचवीं बार संबोधन
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने सभी संबोधनों में देशवासियों से सहयोग की अपील की है। साथ ही कोरोना के खिलाफ लड़ाई को और धारदार बनाने का आह्वान किया है। आइये संक्षेप में जानते हैं कि पीएम मोदी ने इससे पहले के संबोधनों में क्या बातें कही हैं।
पहले संबोधन में जनता कर्फ्यू की बात
प्रधानमंत्री ने पहली बार 19 मार्च 2020 की रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया था जिसमें उन्होंने सावधानियों का पालन करते हुए 22 मार्च (रविवार) को जनता कर्फ्यू की अपील की थी।
दूसरे संबोधन में लॉकडाउन का एलान
जनता कर्फ्यू की सपलता के बाद पीएम मोदी ने दूसरी बार 24 मार्च की रात 8 बजे देश को संबोधित करते हुए पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी।
तीसरे संबोधन में दीप जलाने की अपील
तीन अप्रैल को पीएम मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे पांच अप्रैल की रात नौ बजे कोरोना वॉरियर्स के लिए 9 मिनट का वक्त निकालें और घरों की बत्तियां बंद कर दीप, मोमबत्ती, टार्च, मोबाइल की फ्लैश लाइटें रोशन करें।
चौथे संबोधन में लॉकडाउन-2 का एलान
प्रधानमंत्री ने चौथी बार 14 अप्रैल को देशवासियों को संबोधित करते हुए तीन मई तक के लिए पूरे देश में लॉकडाउन-2 लगाए जाने की घोषणा की थी।
दिखेगी भविष्य की तस्वीर
प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन होगा। प्रधानमंत्री ने ‘दो गज की दूरी’ के महत्व पर जोर देते हुए कहा था कि कई मुख्यमंत्रियों द्वारा रात में कर्फ्यू लगाने के लिए दिए गए सुझाव को मानने से निश्चित रूप से लोगों में सतर्कता की भावना फिर से पैदा होगी। ऐसे समय जब लॉकडाउन-3 खत्म होने में अब पांच दिन का समय ही बचा है... पीएम मोदी का यह संबोधन भविष्य की तस्वीर दिखाएगा। कोरोना से निपटने के लिए देश को लॉकडाउन-4 (Lockdown-4) की जरूरत है या नहीं और यदि है तो उसकी रूपरेखा और तस्वीर कैसी होगी... इस बारे में भी प्रधानमंत्री इशारा करेंगे।
अर्थव्यवस्था को गति देने की चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करके भावी कदमों को लेकर चर्चा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमें यह समझना होगा कि अब कोरोना से लड़ाई पहले ज्यादा केंद्रित होगी। आगे हमें इसके फैलाव को रोकना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि लोग सभी ऐहतियाती कदमों का पालन करें। इस बातचीत में पीएम मोदी ने स्पष्ट संकेत दिया था कि अगले चरण में राहत तो दी जाएगी लेकिन लॉकडाउन एकदम से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि हमारे सामने बीमारी को रोकने के साथ साथ अर्थव्यवस्था को गति देने की गहरी चुनौती है।
जन से लेकर जग तक की नीति पर चलने के संकेत
पीएम मोदी के साथ बातचीत में ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री भी लॉकडाउन में एकमुश्त ढील देने के पक्ष में नहीं दिखे। वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि जन से लेकर जग तक की नीति पर आगे बढ़ना होगा। सूत्रों का कहना है कि लॉकडाउन के अगले दौर में ऑरेंज और रेड जोन में भी थोड़ी ढील दी जा सकती है। हालांकि आवागमन, मनोरंजन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम शुरू होने के लिए अभी इंतजार करना होगा। यही नहीं गांवों को संक्रमण से बचाने की भी एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में पीएम मोदी के इस संबोधन को बेहत खास माना जा रहा है।
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मोदी सरकार अब कोरोना के मामले में अब पूरी तरह से हाथ ऊंचे करते नजर आ रही है.......... जो खबर आई है वह बहुत ही खतरनाक है अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने को लेकर नई नीति तैयार की है। इसके मुताबिक, अब कोरोना के हल्के या मध्यम लक्षण वाले मरीजों को ठीक होने के बाद बिना टेस्टिंग के भी डिस्चार्ज किया जा सकता है, इसके लिए शर्त यह है कि मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए और उनमें लगातार तीन दिन तक बुखार नहीं होना चाहिए। हालांकि, डिस्चार्ज के बाद भी उन्हें 7 दिन के लिए घर पर ही आइसोलेशन में रहना अनिवार्य होगा।.........
कुल मिलाकर ऐसे मरीज को घर भेजा जा रहा है जो कोरोना का कैरियर हो सकते हैं इस बात की बिना पुष्टि किये कि उन्हें कोरोना नही है, घर भेजा जा रहा है, यह ओर खतरनाक हो सकता है ..........अब ठीक हो चुके मरीज को भी लोग शक की नजरों से देखेंगे कि उसे कोरोना तो नही है,.......... साफ दिख रहा है कि यह जल्दी जल्दी हॉस्पिटल खाली कराने की कवायद है ताकि देश मे कोरोना के आंकड़े कम कर के दिखलाए जा सके, ........इंदौर जैसे शहरों में यह काम प्रशासन ने पहले से ही शुरू कर दिया है...........
आपको यदि याद हो तो लगभग एक हफ्ते पहले क्वारैंटाइन की गाइडलाइन में बड़ा बदलाव किया था तब यह नई पॉलिसी लागू की गयी थी कि पॉजिटिव मरीज के घर वाले यानी काेराेना संदिग्ध दो पड़ोसियों की गारंटी देकर अपने ही घर में हाेम क्वारेंटाइन हो सकेंगे। यह कदम तब उठाया गया था जब सोशल मीडिया में क्वारैंटाइन सेंटर की अव्यवस्थाओं को लेकर सैकड़ों वीडियो एंव शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद वहां संदिग्ध लोगों को रखना बंद कर दिया गया।
ओर अब यह नया कदम उठाया जा रहा है साफ है कि मोदी सरकार अब अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला छुड़ाने की जल्दबाजी में है, ध्यान दीजिएगा "बिना टेस्टिंग के मरीजो को डिस्चार्ज' के कदम तब उठाए जा रहे है जब देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स के निदेशक गुलेरिया जी बोल चुके हैं कोरोना जून जुलाई में पीक पर होगा............
अब ईश्वर ही देशवासियों की रक्षा करे.....
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'अमेरिका जैसे देशों में वहां की सरकार छोटे बिजनसमैन के लिए पे-चेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम चला रही है जिसके तहत उन्हें करीब 349 अरब डॉलर की मदद दी जा रही है जिससे वे अपने एंप्लॉयी को इस क्राइसिस के दौरान सैलरी देते रहेंगे।'
यह कहना है क्रिस्टोफर वुड का जो 'अमेरिकन इन्वेस्टमेंट बैंकिंग ऐंड फाइनैंशल सर्विस जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटिजी ग्लोबल हेड है
बड़ा सवाल यह है कि भारत की सरकार MSME के लिए, छोटे व्यापारी के लिए कितने फंड की व्यवस्था करने जा रही है जो ये लोग अपने कर्मचारियों को तनखा दे सके ?....
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आप सोचते है कि राज्य सरकार कम से कम अपने राज्य प्रवासी मजदूरों को एक जगह से दूसरी जगह तो पुहंचा सकती है? आप सोचते है कि एक जिले के कलेक्टर को कम से कम इतना तो करना ही चाहिए कि वह अपने अधिकारियों को निर्देश दे कि यदि कोई खाली ट्रक हाइवे पर जा रहा हो तो उसे रोक कर हाईवे पर चल रहे मजदूरों को बैठा दे ताकि कम से कम जहाँ तक वो खाली ट्रक जा रहा हो वहाँ तक ये लोग पैदल चलने से बच जाएं.......
माफ कीजिए आप गलत सोचते हैं, मध्यप्रदेश में परिवहन आयुक्त RTO ने सभी परिवहन अधिकारियों को यात्री वाहन और मालयानों की चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं। मधुकुमार ने कहा कि इससे प्रवासी मजदूरों के अवैध परिवहन एवं मोटरयान अधिनियम का उल्लंघन करने से कोरोना संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। इसलिए इस पर रोक लगाने के लिए सभी वाहनों की चेकिंग जरूरी हो गई है
कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आवश्यक वस्तुओं के निर्बाध परिवहन के लिये प्रदेश में किसी भी मालयान का रोकना निषेध किया गया था, परंतु कुछ मालयान चालकों/मालिको द्वारा इस आदेश का दुरूपयोग कर एक राज्य से दूसरे राज्य के मध्य प्रवासी मजदूरों का अवैध परिवहन करने के साथ ही मजदूरों से किराया भी वसूल किया जा रहा है।.....
ठीक है मजदूरों से किराया लेना तो गलत है लेकिन क्या ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में मानवीयता के आधार ट्रकों में खाली स्थान पर मजदूरों को बैठाने की ढील नही दी जा सकती,...... यही परिवहन आयुक्त RTO जब किसी मुख्यमंत्री की या प्रधानमंत्री की रैली होती है तो सारी स्कूल बसों को अधिग्रहित कर लेते हैं..... उस समय इनकी सक्रियता ओर नियम कायदों की उपेक्षा देखने लायक होती है....... लेकिन कोरोना काल मे देखिए इन्हें कैसे कानून कायदा सूझ रहा है..........
9 May at 20:05
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साल था 1936, भारत आजाद नही हुआ था, लेकिन भारत माता की जय, भारत माता की जय ये नारे बहुत गूंजा करते थे, एक सभा को जब जवाहर लाल नेहरू संबोधित करने आए तो खूब नारे लगने लगे, भारत माता की जय,भारत माता की जय,नेहरू ने भाषण करते वक्त ही जनता से यह सवाल पूछा कि भारत माता कौन है,और आप लोग किसकी जीत होते हुए देखना चाहते हैं? और अगली पंक्ति में खुद ही उसका जवाब देते हुए कहा कि 'यहाँ के पर्वत, नदियां, मैदान और जंगल स्वाभाविक तौर पर सबको प्रिय हैं। लेकिन अंततः इस विशाल भूमि पर फैले भारत के लोग भारत माता हैं। यहाँ के करोड़ो लोग भारत माता हैं। इनकी जीत होनी चाहिए, इन लोगों की जीत होनी चाहिए।
Pankaj Chaturvedi जी की वाल पर यह वीडियो मौजूद था उन्होंने भी अपनी बात यही से शुरू कि यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर भारत माता कौन है?........... कुछ छद्म किस्म के राष्ट्रवादी एक केसरिया साड़ी पहने, शेर पर सवार और हाथ में भगवा झंडा लिए महिला की काल्पनिक छबि को भारत माता बताते हैं।........भारत माता असल में इस देश के मुफ़लिस, गरीबी, लाचारी और भूख के साथ खड़ी वह महिला है जो ऊपर से 40 - 41 डिग्री तापमान की गर्मी और नीचे अंगार से तपते डामर की सड़क पर अपने मासूम बच्चों के लिए सरपट दौड़ी चली जाती है ।शायद पीछे से दो तीन सौ किलोमीटर चल कर आई होगी और आगे भी 5- 700 किलोमीटर चलना होगा ।लेकिन उसके जज्बे में ,उसकी हिम्मत में कोई कमी नहीं है। इतनी सारी विषम परिस्थितियों को मात देती है उसकी एक हल्की सी मुस्कान । यही भारत माता की मुस्कान है। यदि सही में भारत माता को देखना है तो इस वीडियो को पूरा देखें और इस भारत माता को सलाम करें।
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मित्र प्रकाश के रे बता रहे है कि सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत जो नया संसद भवन बनाया जा रहा है उसकी ये डिजाइन बिलकुल कमोड टाइप है वो लिखते है 'चित्र देखिए। ....मौजूदा भवन की प्रेरणा लटियन और बेकर ने चौंसठ योगिनी मंदिर से ली थी. आप ख़ुद देखकर बताइए, नए डिज़ाइन का प्रेरणास्रोत कमोड के अलावा क्या हो सकता है! यह निहायत इरिटेटिंग पोस्ट-मॉडर्न डिज़ाइन है',......उनकी बात ठीक ही है डिजाइन के लेवल पर बात की जाए तो इसे कोई ख़ास अच्छा डिजाइन नहीं माना जाएगा
लेकिन जब मोदी सरकार ने इसके डिजाइनिंग का ठेका गुजरात की आर्किटेक्ट कंसल्टेंसी कंपनी एचसीपी कॉन्ट्रैक्टर (HCP Design, Planning & Management Pvt. Ltd) को 230 करोड़ में दे रही है तो क्या कह सकते है। मोदी जी के गृहराज्य की कम्पनी है वो जो करे वो कम है जितने में कर दे वो कम है......लेकिन वाकई डिजाइनिंग बकवास है इससे कही बेहतर तो आज वाला संसद भवन ही लग रहा है
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जब से कोरोना शुरू हुआ है मुझे तभी से ये लगता आया है कि इस नए कोरोना वायरस को लेकर एक गलत तरह की एप्रोच लेकर काम किया जा रहा है और यह भारत की बात नही है यह पूरी दुनिया मे हो रहा है कोरोना को लेकर एक तरह का जो डर है उससे बचा जा सकता था, हमने वर्ल्ड वाइड पैनिक क्रिएट किया, उसे एक हव्वा बना दिया यह बड़ी गलती थी, यदि हमने इसे समझने समझाने को लेकर अपनी एप्रोच सही रखी होती, तो हम लॉक डाउन जैसे उपायों से बच सकते थे, ओर इस तरह का पैनिक फैलाने में चीन भी दोषी है और WHO भी.......
हमारे देश के नेता मूर्खता पूर्ण दावे कर रहे हैं कि हम कोरोना को हरा देंगे, आप किसी वायरस को कैसे हराओगे, वो हर जगह है ?
दो दिन पहले CNN ने एक स्टडी पब्लिश की है जिसके मुताबिक चीन के मिलिट्री हॉस्पिटल में 38 लोगों पर किए गए अध्ययन के नतीजे बताते है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्त हो चुके लोगों के वीर्य में भी यह जिंदा रह सकता है. सेक्स के दौरान यह दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है.
इससे पहले तंजानिया में बकरी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद वहाँ के राष्ट्रपति जॉन मागुफुली ने कोरोना की टेस्ट किट पर ही सवाल उठा दिए, उन्होंने कहा, 'ऐसा कैसे हो सकता है कि पॉपॉ फल और बकरी भी कोरोना पॉजिटिव निकले।' राष्ट्रपति मागुफुली ने इसे लेकर सेना को कहा है कि टेस्ट किट की जांच कराएं, क्योंकि जांच करने वाले लोगों ने इंसानों के अलावा भी सैंपल जमा किए थे।कोरोना वायरस के ये सैंपल बकरी, पॉपॉ फल और भेड़ से लिए गए थे। सैंपल को जांच के लिए तंजानिया की लैब में भेजा गया, जहां बकरी और पॉपॉ फल कोरोना पॉजिटिव निकले।
कुछ दिनों पहले लैंसेट पत्रिका में छपी रिसर्च में मानव मल में कोरोना का वायरस पाए जाने की बात कही गयी थी लेकिन तब भारत के स्वास्थय मंत्रालय ने इस प्रकार से कोरोना फैलने की बात से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद बीजिंग तथा अमेरिका में कोरोना के संक्रमित मरीज के मल में कोरोना वायरस पाया गया, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी की शी चेंगली प्रयोगशाला के रिसर्चर्स को कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति के मल में वायरस के आरएनए यानी राइबोन्यूक्लिक एसिड मिले हैं. यह वायरस फैलने के एक और तरीके की तरफ इशारा करता है. चीनी रिसर्चरों के शोध नतीजों की पुष्टि अमेरिकी रिसर्चरों ने भी की है. अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमित एक व्यक्ति के मल में भी वायरस के आरएनए मिले हैं.
यदि मल में वायरस है तो नाले के पानी मे यह क्यों नही हो सकता? यानी वहाँ भी है अब वैज्ञानिक कोरोना के छिपे मामलों का पता लगाने के लिए सीवेज यानी नाले के गंदे पानी की जांच कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब कोरोना वायरस महमारी का रूप ले चुका है और इसका इलाज नहीं मिल रहा है। अमेरिका में सीवेज वाटर में यह मिला है
WHO अप्रैल में बोलता था कि पालतू जानवरों से कोरोना वायरस के प्रसार के प्रमाण नही मिले है लेकिन अब डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कोरोनावायरस चमगादड़ से फैला है और यह सामान्य बिल्ली और फेरेट (बिल्ली प्रजाति का जीव) को संक्रमित कर सकता है।संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा बिल्लियों को है। हालांकि, अभी और रिसर्च की जानी है, कुत्ते, बिल्ली, बाघ और शेर के कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है अब ऊदबिलाव (Mink) भी इस बीमारी से संक्रमित होने वाले जानवरों की लिस्ट में शामिल है
यानी वीर्य में वायरस है मानव मल में वायरस है पपीते जैसे फल में है, नाले के पानी में है,कुत्ते, बिल्ली, बाघ और शेर ऊदबिलाव में वायरस है, ऐसे इंसानों में वायरस है जो बिल्कुल स्वस्थ है उन्हें कोई लक्षण नही है उन्हें हल्का बुखार क्या सर्दी खाँसी तक नही है............
तो एक बार फिर से इस वायरस के प्रति हमारी जो पैनिक एप्रोच हो गयी है उसे ही बदलने की जरूरत है अगर लॉक डाउन ऐसे ही बढाना है तो इसे हमे अनंत काल तक बढाते रहना होगा, इसलिए यह जरूरी है कि हम अपनी सोच में ही बदलाव लेकर के आए और इसमें सरकारो का, मीडिया का बहुत महत्वपूर्ण रोल है, नही तो कहते रहिए stay safe stay home........
10 May at 11:23 · Public
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मै हमेशा से कहता आया हूँ कि कोरोना भारत में कही और से नहीं, किसी और से नहीं बल्कि, जनवरी फरवरी में चीन से आने वाले यात्रियों की वजह से फैला है इस संबंध में विभिन्न समाचार माध्यमों में आई खबरों पर रिसर्च कर के एक पोस्ट भी लिखी थी.... चीन में आज भी लाखो की संख्या में कोरोना पॉजिटिव मौजूद है लेकिन चीन की सरकार मानने को तैयार नही है। ........
आज जो एअर इंडिया के 5 पायलटो के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की खबर आयी है ये खबर भी मेरे दावों की पुष्टि कर रही है एयर इण्डिया के ये सभी पायलट इन दिनों कार्गों ऑपरेशन में काम कर रहे थे, 18 अप्रैल को इन्होने अपनी आखिरी उड़ान चीन के ग्वांगझोउ से उड़ान भरी थी. ताकि वहां से मेडिकल सप्लाई लाई जा सके, भारत में आने के बाद इन पायलटों में कोरोना के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए थे. तीन चार दिन पहले जब इन्हे दुबारा ड्यूटी ज्वाइन करने बुलाया गया तो इन पायलटों की कोरोना जांच की गई तो उनमें कोरोना के लक्षण मिले.........पांचों पायलटों को एयर इंडिया के प्रोटोकॉल के तहत परीक्षण किया गया था. दरअसल इन पायलटों को ड्यूटी पर वापस जाने से 72 घंटे पहले जांच से गुजरना होता है. इस जांच में पांचों पायलट कोरोना पॉजिटिव पाए गए. बता दें कि ये लोग जब चीन से लौटे थे उस वक्त इनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे....... आज भी इनमे कोरोना के कोई लक्षण नहीं है। .....यह असिन्टेमेटिक मरीज है ऐसे लोग कोरोना के सुपर स्प्रेडर हो सकते है ये बात हमे कोरोना के विषय में किये गए नए अध्ययन से पता चली है
अब अगर हममे थोड़ी सी भी बुध्दि बची हो तो एक समुदाय विशेष को कोरोना फैलाना का दोषी बताने से बाज आ जाना चाहिए!........... हालांकि न्यूज़ चैनलों से आप ऐसी समझदारी की उम्मीद न रखे वो इन पायलटो के चीन से लौटने वाले बात पूरी तरह से दबा गए है। ....... दरअसल इन चैनलों की रोजी रोटी ही इस नफरत भरे माहौल को बनाए रखने से चल रही है। .....
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वैसे बहुत से मजदूर जो वापस लौट रहे वो स्वयं ऐसे आयोजनों में शामिल होते आए है!..उनकी तो प्रैक्टिस भी है पहले भी उन्होंने बड़े गर्व के साथ उन्होंने धर्म ध्वजा उठाई थी वो उन्होंने अपने इष्ट के लिए उठाए थी तो आज अपने लिए उठा ले ! क्या कहते हो?
करके देखिए ......अच्छा लगता है!.…
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मोदी सरकार के इंतजामो से दुखी लाखो प्रवासी मजदूर अपने अपने घरों की ओर पैदल ही निकल पड़े है मीडिया में, सोशल मीडिया में उनके रास्ते मे आ रही दुख तकलीफों को बताया जा रहा है यह देख कर मन बहुत विचलित महसूस कर रहा है उनकी अंतहीन समस्याओं पर विचार करते हुए मुझे एक अच्छा आइडिया आया है.... .….....देखिए लाखों मजदूर सड़कों पर तो पैदल चल ही रहा है वो बस एक छोटा सा काम करे, ..........एक रामनामी दुपट्टा ओढ़ ले या कपड़े भगवा रंग के पहन लें, और कंधे पे एक कांवड़ उठा ले, दो लोटे में इधर उधर का जल भर ले और बम भोले, बम भोले का नाद करता हुआ निकल पड़े......
उसके ऐसा करते ही आप देखिएगा राज्य सरकारों का उसके प्रति नजरिया पूरी तरह से बदल जाएगा, वो जहाँ जहाँ से भी गुजरेगे उनके स्वागत सत्कार की व्यवस्था की जाएगी, ,जगह जगह सरकार द्वारा स्वास्थ्य केम्प लगाए जाएंगे जिसमे सरकारी डॉक्टर नियुक्त किये जाएंगे, यहाँ तक कि इन मजदूरों के लिए एक कांवड़ यात्रा मैनेजमेंट एप्प जैसी एप्प बनवा दी जाएगी जिसमे रियल टाइम डाटा ओर जियो टैगिंग के आधार पर मजदूरों को कहा से आना है कहा जाना है यह सब सूचना मिलती रहेगी
धर्मप्राण संस्थाएं उन्हें पानी पिलाएगी, टेंट लगाकर कार्यकर्ता साबूदाने की खिचड़ी खिलाने के लिए मजदूरों की मनुहार करेंगे ओर जो पुलिस उन्हें अभी मारती है पैसा तक छीन लेती है वह स्वंय उनकी आगे बढ़कर सुरक्षा करेगी ओर तो ओर जिले का एसपी उनके पाँव तक दबाएगा, .......हेलिकॉप्टर से राज्य के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी DGM उन पर फूलों की वर्षा करेगा,........ इसके लिये हफ्ते भर के लिए 20 -25 लाख लगाकर हेलीकॉप्टर बुक किया जाएगा , दो ढाई लाख के उन पर फूल बरसाए जाएंगे
जगह जगह डीजे बजने लगेंगे, प्रवासी मजदूर चलते चलते थोड़ा डांस भी कर पाएंगे इनसे उनकी इम्युनिटी ओर मजबूत हो जाएगी
रास्तों में उन्हें रोककर खाना खिलाने के इंतजाम राज्य सरकारें कर देगी, धर्मपरायण संगठन पूरी श्रद्धा भक्ति से उसकी सेवा में जुट जाएंगे, ट्रक मालिकों को निर्देश दे दिए जाएंगे कि मजदूरों को पहले रास्ता दे उन्हें कुचले नही ओर अगर कोई वाहन मजदूरों को कुचलता है तो उसे रोक कर उसमे आग लगाने की पूरी छूट भी मिल जाएगी .......
जो मुख्यमंत्री उन्हें रोक लेना चाह रहा है वह स्वंय आगे बढ़कर उनकी अगवानी करेंगे......... मुख्यमंत्री अपने अधिकारियों को यहाँ तक निर्देशित करेगा कि हाईवे किनारे बड़े बड़े लग्जरी टेन्ट लगवा कर मजदूरों के आराम की डोरमैट्री में व्यवस्था की जाए यहाँ तक कि मुख्यमंत्री सड़कों पर लगे गूलर के पेड़ो को कटवा भी देगा....... सड़को पर कांटे तक बिनवा दिए जाएंगे कि मजदूरों को कोई कष्ट न हो .....….
यानी आप खुद ही सोचिए कि सिर्फ वस्त्र का कलर बदलने से, रामनामी ओढ़ लेने से, कंधे पे एक कांवड़ उठा लेने से कितना बड़ा परिवर्तन सरकार की सोच में हो जाएगा इसका अंदाज़ा भी सड़क पर चलता हुआ मजदूर नही लगा पा रहा है
यह बहुत छोटा सा उपाय है पर बेहद प्रभावी साबित होगा ऐसी आशा है........
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भूखा आदमी सड़क किनारे कराह रहा था। एक दयालु आदमी रोटी लेकर उसके पास पहुँचा और उसे दे ही रहा था कि एक-दूसरे आदमी ने उसका हाथ खींच लिया। वह आदमी बड़ा रंगीन था।
पहले आदमी ने पूछा, 'क्यों भाई, भूखे को भोजन क्यों नहीं देने देते?'
रंगीन आदमी बोला, 'ठहरो, तुम इस प्रकार उसका हित नहीं कर सकते। तुम केवल उसके तन की भूख समझ पाते हो, मैं उसकी आत्मा की भूख जानता हूँ। देखते नहीं हो, मनुष्य-शरीर में पेट नीचे है और हृदय ऊपर। हृदय की अधिक महत्ता है।'
पहला आदमी बोला, 'लेकिन उसका हृदय पेट पर ही टिका हुआ है। अगर पेट में भोजन नहीं गया तो हृदय की टिक-टिक बंद नहीं हो जाएगी!'
रंगीन आदमी हँसा, फिर बोला, 'देखो, मैं बतलाता हूँ कि उसकी भूख कैसे बुझेगी!'
यह कहकर वह उस भूखे के सामने बाँसुरी बजाने लगा। दूसरे ने पूछा, 'यह तुम क्या कर रहे हो, इससे क्या होगा?'
रंगीन आदमी बोला, 'मैं उसे संस्कृति का राग सुना रहा हूँ। तुम्हारी रोटी से तो एक दिन के लिए ही उसकी भूख भागेगी, संस्कृति के राग से उसकी जनम-जनम की भूख भागेगी।'
वह फिर बाँसुरी बजाने लगा।
और तब वह भूखा उठा और बाँसुरी झपटकर पास की नाली में फेंक दी
- हरिशंकर परसाई
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इतिहास में इतनी झूठी सरकार कभी देखने को नही मिलेगी अभी कुछ देर पहले न्यूज़ 18 की खबर है कि रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ट्वीट किया है 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेश पर रेलवे बीते छह दिनों से रोजाना 300 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चला रही है. मैं सभी राज्यों से अपील करता हूं कि वे अपने फंसे प्रवासियों को बाहर निकालने और वापस लाने में मदद करे
कौन सी दुनिया मे हो पीयूष गोयल जी?......इतना खुला झूठ तो मत ही बोलो, आपके हिसाब से रोजाना 300 श्रमिक स्पेशल ट्रेन 6 दिन में चलाई है इसका मतलब है कि कुल 1800 ट्रेंन चली है........ वैसे रेलवे ने 1 मई से से स्पेशल श्रमिक ट्रेंन चलाने की बात की थी तीन दिन पहले अमर उजाला की खबर है 'भारतीय रेलवे ने गुरुवार को कहा कि उसने 1 मई से अब तक यानी 7 मई गुरुवार तक मात्र 163 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें ही चलाई हैं। ओर आप तो 300 ट्रेंन पर डे कह रहे हो या तो आप झूठ बोल रहे हो या आपका मंत्रालय झूठ बोल रहा है?.......
8 मई को नवभारत टाइम्स की खबर है कि लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों, छात्रों और अन्य लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए भारतीय रेलवे ने अबतक कुल 222 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया है। इसके जरिए रेलवे ने 2.5 लाख से ज्यादा यात्रियों को उनके गृह राज्य तक पहुंचाया है,
यानी अगर 222 में 163 घटा दिया जाए तो एक दिन में आपने मात्र 59 ट्रेनों का संचालन किया है अब एक ट्रेंन मे यात्री कितने जाते ये गणित भी जान लीजिए आपकी ही सूचना के अनुसार हर विशेष ट्रेन में 24 कोच हैं। हर कोच में 72 सीटें हैं। लेकिन राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर की तरफ से एक कोच में केवल 54 लोगों को ही बैठाया जा रहा है। यह फैसला सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इसके तहत किसी भी यात्री को मिडिल बर्थ नहीं दी गई है।
यानी 24x54 = 1296 यात्री अब शुक्रवार 8 मई तक आपने ट्रेंन चलाई आपने मात्र 222 यानी 222x1296 ये फिगर हुआ 2 लाख 87, हज़ार 712
वैसे नवभारत टाइम्स की खबर में 222 ट्रेंन से मात्र ढाई लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पुहंचाया जा सका है, अकेले बिहार के कम से कम 40 लाख प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए है विभिन्न राज्यों से कुल मिलाकर यह संख्या करोड़ो में होने जा रही है........ऐसे में आप 1200 मजदूर प्रति ट्रेंन के हिसाब से कब तक इन मजदूरों को अपने गृह जिले तक पुहंचा पाओगे........
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आज हम जॉन पर्किन्स के बारे में बात करेंगे
गतांक से आगे........
आप कहेंगे कि बिल गेट्स श्रृंखला में जॉन पर्किन्स का क्या काम ?......ठीक है! उनका कोई सीधा संबंध बिल गेट्स एंड मेलिंडा फाउंडेशन से नही है लेकिन बिल गेट्स एंड मेलिंडा फाउंडेशन जैसे समूह कैसे पूरे विश्व मे ख़ास तौर पर तीसरी दुनिया के देशों में कैसे काम करते हैं यह उनके उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है
1945 में अमेरिका में जन्मे जॉन पर्किन्स ने एक प्रमुख इंटरनेशनल एडवाजरी फर्म में मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते थे विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र, आईएमएफ, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग, फॉर्च्यून 500 निगमों और अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों के नेताओं को सलाह देने का काम करते थे लेकिन वास्तव में वह लेकिन वास्तविक तौर पर वो अमेरिका के ईकोनॉमिक हिटमैन थे
2004 में जॉन पर्किन्स ने अपनी आत्मकथा लिखी जिसने दुनिया भर में हंगामा मचा दिया उनकी आत्मकथा का शीर्षक था "कन्फैशन्स ऑफ एन ईकोनॉमिक हिटमैन" अपने इस विशिष्ट टाइटल के बारे में बताते हुए जॉन पर्किन्स लिखते हैं 'Economic hit men (EHMs) are highly paid professionals who cheat countries around the globe out of trillions of dollars. They funnel money from the World Bank, the U.S. Agency for International Development (USAID), and other foreign "aid" organizations into the coffers of huge corporations and the pockets of a few wealthy families who control the planet’s natural resources. Their tools include fraudulent financial reports, rigged elections, payoffs, extortion, sex, and murder. They play a game as old as empire, but one that has taken on new and terrifying dimensions during this time of globalization. I should know; I was an EHM."
ईकोनॉमिक हिटमैन काफी अच्छी सेलरी पाने वाले वो लोग होते हैं जो पूरे विश्व के कई देशों के अरबों-खरबों रुपए धोखे से हड़पने का काम करते हैं। यह लोग विश्व बैंक, यूनाईटेज स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवेलपमेंट (USAID) और अन्य विदेशी सहायता संगठनों से पैसे निकालकर उनसे विश्व की बड़ी-बड़ी कॉरपोरेशन्स और कुछ अति धनवान परिवारों की तिजोरिया भरते हैं जो इन पैसों और रसूख से पूरे विश्व की प्राकृतिक सम्पदाओं को नियंत्रित करते हैं। इसके लिए यह लोग झूठी फाइनेंशियल रिपोर्टस, जबर्दस्ती थोपे गए चुनाव, रिश्वत, फिरौती, सेक्स और यहां तक कि हत्या जैसे कामों का भी सहारा लेते हैं।
इन प्रोफेशनल्स का काम तीसरी दुनिया के विकासशील देशों के राजनीतिक नेताओं आर्थिक संस्थाओं को वर्ल्ड बैंक या यूएसएड सरीखी वैश्विक संस्थाओं से भारी-भरकम विकास कर्ज लेने के लिए राज़ी करना है। और जब यह देश इन भारी-भरकम कर्ज़ों को लौटा पाने की स्थिति में नहीं होते तब कर्ज़ माफ़ी के नाम पर अमेरिका जैसे बड़े देश उनसे अपनी शर्ते मनवाते हैं।
विकासशील राष्ट्रों को कर्जा लेने को तैयार करने के लिए पर्किन्स ऐसी फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करते थे जो कि यह दिखाती थी कि कर्ज़ के इन पैसों से देश में जो इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा उससे देश की जीएनपी (ग्रॉस नेशनल प्रोडक्ट) बढ़ेगी। पर्किन्स के अनुसार जीएनपी के आंकड़े इन कामों के लिए काफी उपयुक्त होते हैं क्योंकि अगर सिर्फ एक व्यक्ति या कंपनी की आय में भी वृद्धि हो जाए तो जीएनपी में वृद्धि दिखने लगती है।
कर्ज नहीं चुका पाने के कारण इन छोटे राष्ट्रों के नेता राजनीतिक, आर्थिक और अन्य आंतरिक मामलों पर विकसित देशों की दखलंदाजी सहने के लिए विवश हो जाते हैं। इस तरीके से यह ईकोनॉमिक हिटमैन विकासशील देशों और विकसित देशों के बीच की आर्थिक खाई को और गहरा करने और गरीब देशों की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने का काम करते हैं ताकि विकसित देश अपनी मनमानी कर सकें।
जॉन पर्किन्स ने इस व्यवस्था को 'कॉरपोरेटोक्रेसी' का नाम दिया है। कॉरपोरेटोक्रेसी- यानि विकसित देशों की सरकारों, बैंकों और अत्यन्त धनवान कॉरपोरेशन्स का संगठन जो विकासशील देशों का पैसा धोखे से हड़पकर उनसे अपनी मांगे मनवाने का काम करता है।
जॉन पर्किन्स के बारे में यह पूरा विवरण शब्द कृतियां नामक ब्लॉग से साभार लिया गया है यदि आप कॉरपोरेटोक्रेसी को समझना चाहते हैं तो विस्तृत रूप कमेन्ट बॉक्स की लिंक में पढ़ सकते हैं .......उनका एक ted के प्रोग्राम में दिया गया स्पीच भी इकनॉमिक हिटमैन की टर्म को समझने में सहायता करेगा अनुरोध है कि उस 17-18 मिनट के उस वीडियो को जरूर देखिए
जॉन पर्किन्स 70 -80 या 90 के दशक की बात करते हैं जब एक अमेरिकी अर्थशास्त्री की सलाह को तीसरी दुनिया के देश गम्भीरता से लिया करते थे लेकिन अब जमाना बदल गया है, गोरे लोगो से स्थानीय लोग वैसे ही चिढ़ जाते हैं अब भारत जैसे देशों में इकनॉमिक हिटमैन का किरदार वो भारतीय निभाते हैं जो बड़ी बड़ी अमेरिकन या यूरोपीय यूनिवर्सिटीयो से बिजनेस ओर इकनॉमी में मास्टर्स ओर पीएचडी जैसी डिग्री लेकर के आते हैं और सरकार उन्हें सीधे नीति निर्माण को प्रभावित करने वाले पदों पर नियुक्ति दे देती है और तब ये लोग बड़े अमेरिकी कारपोरेट ओर अमेरिकी सरकार के अनुकूल नीतियों का निर्माण करते हैं ........जैसे बड़े बड़े सरकारी संस्थानो का प्राइवेटाइजेशन करना, सब्सिडी जैसी व्यवस्था को देश पर बोझ बताना,
अक्सर यह काम यह लोग समिति बनाकर करते हैं इन समितियों के प्रमुख ये नए प्रकार के इकनॉमिक हिटमैन होते हैं ........फिर अमेरिकन हितों के अनुसार उसकी रिपोर्ट तैयार करते हैं फिर उस रिपोर्ट को सरकार को पेश कर दी जाती है ओर सरकार उस समिति की अनुशंसा के आधार पर नीतियां लागू कर देती है सन 2000 से 2020 तक यह खेल धड़ल्ले से भारत मे खेला जाता रहा है........ बिल गेट्स ओर मेलिंडा फाउंडेशन इस खेल में मीलों आगे है दरअसल यह लोग ऐसे ही गेम सेट करने के लिए परोपकार का चोला ओढ़ लेते है
क्रमशः
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अब श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 1200 यात्रियों की जगह 1700 श्रमिक यात्रा कर सकेंगे, यानी ट्रेन में जितनी सीटें होती हैं, उन्हें पूरी तरह से भरा जाएगा.
यानी बीच की सीट पर यात्रियों को नहीं बिठाने के सोशल डिस्टेंसिंग के फार्मूले को भी 'पांडेचेरी वणक्कम'
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मोदी राज में कुछ राज्यों में बिल्कुल राम राज्य आ गया है......... इन राज्यों के शराब ठेकेदार शराब की दुकाने खोलने से ही मना कर रहे हैं लेकिन हमारा देश का मीडिया इतना खराब है कि वह ऐसा सिर्फ पंजाब के बारे में ही दिखा रहा है पंजाब में के बारे में यह खबर दिखाई गयी थी कि मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक में पंजाब के कैबिनेट मंत्री मनप्रीत सिंह बादल व चरणजीत चन्नी की मुख्य सचिव करण अवतार के साथ शराब पॉलिसी को लेकर जमकर कहासुनी हुई. इसके बाद वित्तमंत्री मनप्रीत बादल मीटिंग को बीच में ही छोड़कर चले गए.
लेकिन मामला क्या था यह नही बताया गया!..... दरअसल मसला ये था कि सीनियर आईएएस अधिकारी ये चाह रहे थे कि साल 2020-21 के लिए आबकारी नीति इस तरह से बनाई जाए, ताकि सरकार के राजस्व में किसी तरह की कमी न आए और सरकार अपने तय राजस्व के टारगेट को पूरा करे. हालांकि मंत्रियों की दलील थी कि शराब के ठेकेदारों की हालत खस्ता है. पंजाब में ज्यादातर शराब का इस्तेमाल होटलों और शादियों में होता है, लेकिन होटल भी बंद हैं और किसी तरह के आयोजन और फंक्शन भी नहीं हो रहे हैं, इसी वजह से शराब के ठेकेदारों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. उनका भी ख्याल रखा जाए
सच्चाई यह है कि पंजाब में शराब ठेकेदारों के सिंडिकेट ने सरकार को हर महीने दी जाने वाली फीस को मुद्दा बनाकर ठेके खोलने से इनकार कर दिया है वो कह रहे कि राज्य में शराब का कारोबार करीब 6000 करोड़ का है और उसी हिसाब से सरकार को लाइसेंस फीस आदि अदायगियां की जाती हैं, आम दिनों में 14 घंटे ठेके खोले जाते हैं लेकिन अब कर्फ्यू में ढील के दौरान राज्य सरकार केवल 4 घंटे के लिए ठेके खोलने की अनुमति देने का मन बना रही है जबकि मासिक फीस को लेकर कोई बात नहीं कर रही।
ठीक यही समस्या मध्यप्रदेश की भी है यहाँ भी भारी ड्यूटी से बचने के लिए खुद शराब ठेकेदार ही दुकान खोलने के लिए तैयार नहीं हैं. ज़्यादातर जगहों पर दुकानें बंद हैं. ठेकेदार लॉबी की आपत्ति फीस को लेकर है. साल 2020 21 के लिए 10, 650 करोड़ रुपए रेवेन्यू के साथ शराब दुकानें आवंटित हुई थीं. यह एक्साइज ड्यूटी 1 अप्रैल से प्रभावी है. लॉक डाउन के कारण महीना भर से ज़्यादा वक्त से दुकानें बंद हैं. इसलिए बिक्री भी चौपट है. ठेकेदार इतनी ड्यूटी कैसे पे करें. ये बड़ी समस्या है
मध्यप्रदेश के गृह मंत्री श्री नरोत्तम मिश्रा ने बयान दिया है कि जो शराब ठेकेदार दुकाने नहीं खोलेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ओर उधर शराब ठेकेदारों का कहना है कि प्रदेश में शराब का विक्रय शुरू करने के कारण कोरोनावायरस का इन्फेक्शन बढ़ने की 100% संभावना है, इसलिए हम अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए शराब की दुकान नहीं खोलेंगे,
मतलब क्या ग़जब का मजाक चल रहा है प्रदेश में देख लीजिए?......
ठीक यही हाल उत्तर प्रदेश के भी है उत्तर प्रदेश के शराब और बीयर विक्रेता भी अब कारोबार करने को तैयार नहीं हैं। कोरोना संकट की वजह से उपजे हालात में बढ़ती आर्थिक दिक्कतों के चलते शराब और बीयर की लगातार घटती जा रही बिक्री और प्रदेश सरकार की नई आबकारी नीति में देसी व अंग्रेजी शराब का निर्धारित कोटा हर हाल में उठाने की बाध्यता की वजह से इन विक्रेताओं को अब राज्य में मयखाने चलाने का कारोबार रास नहीं आ रहा है।
यानी सरकार कह रही है कि दारू बेचो लेकिन ठेकेदार ही मना कर रहे हैं ...फिर आया कि नही राम राज्य?....
Yesterday at 15:23 · Public
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आज एक मित्र से बात हुई उसने बताया कि उसकी कॉलोनी में रहने वाला परिवार की बेटी मुंबई में लॉक डाउन में फँस गयी थी बड़ी मुश्किल से पास की जुगाड़ कर पिता अपनी कार से मुम्बई के लिए निकले (आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हमारे शहर से छूता हुआ ही AB रोड यानी आगरा बॉम्बे निकलता है ) AB रोड से वह कार से सिर्फ 7 घण्टे की अंदर मुंबई पुहंच गए बेटी को उन्होंने पिक किया और वापस लौटने लगे लेकिन आश्चर्य की बात है उसी रास्ते से उन्हें वापस आने में 18 घण्टे लग गए, उन्होंने आकर बताया कि लाखों की संख्या में मजदूर सड़को पर पैदल, साइकिल से, रिक्शे से ट्रकों से यानी जैसे बन पड़े वैसे लौट रहा है हाइवे पर भयानक जाम है मजदूरों के बहुत ही बुरे हाल हो रहे है .......
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प्रवासी मजदूरों को लेकर मैंने दसियो रिपोर्ट मुंबई की देख ली होगी लेकिन एक भी माई के लाल ने गुजरात से ग्राउंड रिपोर्ट दिखाने की हिम्मत नहीं की? बड़े तुर्रम खां चैनलों की बात कर रहा हूँ
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viya
किसी भी सड़क पर, घर लौटते हुए मजदूर से बात कर लीजिए, सब सिर्फ एक ही बात कहते है कि ' कैसे भी करके बस एक बार घर पुहंच जाए उसके बाद अपने गांव को छोड़कर परदेश इस जन्म में तो नहीं आएँगे'.......
राज्य सरकारों द्वारा, बड़ी बड़ी फैक्ट्री मालिकों द्वारा जो व्यहवार आज इन मजदूरों से किया गया है उससे देश के उद्योगों का भट्टा बैठना तो तय मानिए। ...
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Girish Malviya
ये हालत है तिरुपुर रेलवे स्टेशन की जो तमिलनाडु में स्थित है, अगर मजदूर पैदल सड़क पर घर की तरफ चल न पड़े तो ओर क्या करे?..........सब सरकारों को,चाहे वह केंद्र की मोदी सरकार हो या राज्यों की सरकार, .....सब सरकारों को बहुत अच्छी तरह से मालूम था कि 3 मई के बाद क्या होने वाला है तैयारी के लिए टाइम नही मिला जैसे बहाने नही बनाए जा सकते!......... लेकिन इन सरकारों ने पुलिस के डंडे के जोर पर ही व्यवस्था संभालने का फैसला किया और आज परिणाम हमारे सामने है.......भारत के विभाजन पर हम लोग अपने बुजुर्गों से, अपने दादा दादी जी से जो किस्से सुनते थे वही पलायन आज हम प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं .......यह मजदूर आज की सरकारों की घोर विफलता की कहानी बता रहा है अफसोस की बात यह है कि न हम इसे न देखना चाहते है न सुनना चाहते है!........
यकीन मानिए जितने लोग कोरोना से नही मरे होंगे न, उससे कही ज्यादा लोग रास्तों पर चलते हुए दम तोड़ देंगे........
इलाज-ए-चाक-ए-पैराहन हुआ तो इस तरह होगा
सिया जाएगा काँटों से गरेबाँ हम न कहते थे
कोई इतना न होगा लाश भी ले जा के दफ़ना दे
इन्हीं सड़कों पे मर जाएगा इंसाँ हम न कहते थे
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PM मोदी आज रात 8 बजे देश को सम्बोधित करने वाले हैं.......सम्बोधन में मोदीजी क्या बोलेंगे ओर भक्त समुदाय की प्रतिक्रिया क्या होगी इस पर 4 अनुमान पेश है........
1) मितरो 17 मई से देश मे लॉक डाउन खत्म किया जाता है
भक्त समुदाय + न्यूज़ चैनल : वाह वाह
2) मितरो 17 मई के बाद देश में लॉक डाउन 4 लागू किया जाता है
भक्त समुदाय + न्यूज़ चैनल : वाह वाह
3) मितरो 17 मई के बाद देश केवल रेड ज़ोन में लॉक डाउन 4 लागू किया जाता है
भक्त समुदाय + न्यूज़ चैनल : वाह वाह
4) मितरो 17 मई के बाद जो लॉक डाउन 4 लागू किया जा रहा है वो अब तक का सबसे कड़ा लॉक डाउन होगा, पुलिस को कानून व्यवस्था लागू करने के लिए हर तरह की छूट दी जाती है
भक्त समुदाय + न्यूज़ चैनल : वाह वाह
6 hrs · Public
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सट्टा बाजार से खबर आ रही है, दो बातों पर सट्टा लगना जोर-शोर से शुरू हो गया है.......
1) टसुए बहाएंगे कि नही!.....
2) मास्क के रूप में गमछा चेक्स वाला पहनेंगे कि सादा वाला!.....
#8_PM
6 hrs · Pub
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जिसे एक धड़े ने पप्पू कहकर प्रचारित किया था उसने लगभग आज से 4 महीने पहले ही आने वाली मुसीबत के बारे में चेता दिया था लेकिन आप उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति का इस्तकबाल करने की तैयारी कर रहे थे।
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कल ब्रिटेन में लॉकडाउन को लेकर भविष्य के रोडमैप की घोषणा की.... जॉनसन ने कोरोना लॉकडाउन खत्म करने के लिए तीन चरणों वाले एक अंतरिम 'एग्जिट प्लान' को पेश किया है
उन्होंने कहा अगर कोई घर से काम नहीं कर सकता है तो अब उन्हें काम पर जाने के लिए "सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए" लेकिन सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से बचना चाहिए.ब्रिटिश पीएम ने एक पांच-स्तरीय एलर्ट सिस्टम पर काम करने की बात की है जिसका इस्तेमाल ब्रिटिश सरकार वैज्ञानिक डेटा का उपयोग कर वायरस के प्रसार की दर को मॉनिटर और ट्रैक करने के लिए करेगी, इसे 'R' दर कहा जाएगा.बोरिस जॉनसन ने अपने एलर्ट सिस्टम के 'लेवल' के बारे में बताते हुए कहा कि, 'लेवल 1 का मतलब है कि यह बीमारी अब ब्रिटेन में मौजूद नहीं है. लेवल 5 सबसे गंभीर है. लॉकडाउन के दौरान हम लेवल 4 में रहे हैं, और आपके त्याग के लिए धन्यवाद कि अब हम लेवल 3 में कदम रखने की स्थिति में हैं.'
बोरिस जॉनसन ने कहा कि "stay at home, protect the NHS, save lives" की जगह अब एक नया स्लोगन है. यह नया स्लोगन है,"stay alert, control the virus, save lives"
कुछ ऐसे ही जुमले जिल्ले इलाही भी उछाल सकते है
3 hrs · Public
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मोदी सरकार हवाई उड़ानों में यात्रियों के लिए मोबाइल फोन पर आरोग्य सेतु ऐप इन्स्टॉल करना अनिवार्य करने करने जा रही है अभी जो प्रस्ताव दिया गया है उसके मुताबिक 'ऐसे यात्री जिनका आरोग्य सेतु ऐप 'ग्रीन' नहीं दिखेगा उन्हें एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। .......
चीन के बाद भारत दूसरा देश होगा जो यात्रा के लिए ऐसी सर्विलांस मोबाइल ऐप को अनिवार्य बनाने जा रहा है........चीन में हेल्थ कोड सर्विस ऐप का उपयोग लोगों के प्रभावित इलाकों में आवाजाही का प्रबंधन करने के लिए किया गया था। हुबेई प्रांत में लॉकडाउन खत्म होने के बाद सरकार ने लोगों को ग्रीन कोड के साथ प्रांत में आने-जाने की अनुमति दी थी।...........
सम्भव है इस बारे में कोई अध्यादेश सरकार लाए ओर इस आरोग्य सेतु एप्प को अनिवार्य बना दे.......मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर प्राइवेसी के अधिकार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते है....... हम सर्विलांस स्टेट में प्रवेश करने जा रहे है......
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ख़ास बात यह है कि गुजरात हाई कोर्ट में ऐसी 20 सीटों के नतीजों की याचिका पर सुनवाई बाकी है...........
गुजरात में आज बीजेपी सरकार के शिक्षा और कानून मंत्री भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा की विधायकी चली गई है. यह गुजरात हाई कोर्ट का फैसला है पूरा मामला बड़ा दिलचस्प है भूपेंद्र सिंह चुड़ास्मा चुनाव में 327 वोट से जीते थे. कांग्रेस उम्मीदवार अश्विन राठौड़ ने जनवरी 2018 में नतीजे को हाई कोर्ट में चुनौती दी. अपनी याचिका में उन्होंने मतों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा था कि रिटर्निंग ऑफिसर और धोलका के डिप्टी कलेक्टर धवल जानी ने पोस्टल बैलेट की गिनती में गड़बड़ीकरते हुए उन्हें मिले 429 बैलेट पेपर को रद्द कर दिया.......... राठौड़ ने कहा कि अगर इन बैलेट पेपर गिना जाता तो वे चुनाव जीतते, क्योंकि जीत-हार का अंतर काफी कम रहा था. कांग्रेस उम्मीदवार ने याचिका में खुद को विजयी घोषित करने की मांग भी की थी.
कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला देते हुए माना कि मतगणना के दौरान काफी अनियमितताएं थीं. साथ ही धोखेबाजी और गलत आचरण भी देखने को मिला. इसलिए पूरा चुनाव निरस्त किया जाता है.
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भी ऐसी बीसियों सीट थी जिन पर कांग्रेस प्रत्याशी अगर दमदारी से हाईकोर्ट का रुख करते तो आज निर्णय उनके पक्ष में होता लेकिन उन्होंने तो मतगणना स्थल पर चल रही तमाम गड़बड़ियों पर आँख मूंदे रखी और गिनती पूरी होने से पहले ही मैदान छोड़ दिया। ......
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